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उत्तराखंड के 243 नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ियों को मिल सकती है नौकरी

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उत्तराखंड के 243 नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ियों को मिल सकती है नौकरी, खेल मंत्री रेखा आर्या ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में खेल विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को वर्ष 2025 के राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नौकरी देने संबंधी प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में खेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को उचित अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। इसके लिए लगभग 243 नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ियों को खेल अकादमियों, प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय और अन्य विभागों में आउट ऑफ टर्न नौकरी के माध्यम से समायोजित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

23 खेल अकादमियों को स्थायी बनाने की तैयारी

रेखा आर्या ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लेगेसी योजना के तहत वर्तमान में अस्थायी रूप से संचालित 23 खेल अकादमियों को स्थायी रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक पदों के सृजन संबंधी प्रस्ताव भी तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी और प्रदेश में खेलों का आधार मजबूत होगा।

अन्य विभागों में कार्यरत खिलाड़ियों की मूल विभाग में तैनाती का प्रस्ताव

खेल मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि आउट ऑफ टर्न भर्ती के माध्यम से अन्य विभागों में सेवा दे रहे खिलाड़ियों को उनके मूल विभाग में प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) पर तैनात किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी तैयार किया जाए, ताकि खिलाड़ियों की प्रतिभा और अनुभव का बेहतर उपयोग किया जा सके।

29 अगस्त को होगा खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त 2026) के अवसर पर गौलापार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

खेल मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश की अग्रणी खेल भूमि के रूप में विकसित करना है, जिसके लिए खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नई खेल नीति में शामिल होंगे पारंपरिक और पैरा खेल

बैठक में नई खेल नीति को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुरानी खेल नीति की कमियों को दूर करते हुए नई नीति को केंद्र सरकार की खेल नीति के अनुरूप तैयार किया जाए।

नई नीति में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ पैरा एथलीट और बौने खिलाड़ियों (ड्वार्फ एथलीट्स) के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा खेल नीति तैयार करने से पहले खिलाड़ियों और आम जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। बेहतर सुझाव देने वालों को सम्मानित करने की भी योजना है।

बैठक में विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक दीप्ति सिंह, महाराणा प्रताप खेल परिसर के प्रिंसिपल राजेश ममगाईं, संयुक्त निदेशक खेल अजय अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुंबई में प्रवासी उत्तराखंडवासियों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संवाद

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  • मुंबई में प्रवासी उत्तराखंडवासियों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आत्मीय संवाद, विकास यात्रा और भविष्य के विजन को किया साझा
  • मुख्यमंत्री बोले: देश-दुनिया में बसे उत्तराखंडवासी राज्य के सबसे बड़े सांस्कृतिक दूत और ब्रांड एंबेसडर।
  • प्रवासी उत्तराखंड परिषद के माध्यम से सरकार ने प्रवासी समाज की विकास में सहभागिता को दिया संस्थागत स्वरूप।
  • 27 प्रवासियों ने 29 पैतृक गांव गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका।
  • मुख्यमंत्री ने विकास, सुशासन, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां गिनाईं।
  • देश-विदेश में बसे उत्तराखंडवासियों से विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में निरंतर सहयोग का किया आह्वान।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुंबई में आयोजित प्रवासी उत्तराखंडवासियों के भव्य सम्मेलन में प्रदेश और देश-विदेश में बसे उत्तराखंड मूल के लोगों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यसेवक के रूप में पिछले पाँच वर्षों की विकास यात्रा, जनसेवा के संकल्प तथा विकसित उत्तराखंड के विजन को साझा करते हुए प्रवासी समाज को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने वाले प्रवासी उत्तराखंडवासियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विशेष आत्मीयता और गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी चाहे कितनी भी हो, उत्तराखंड और उसके प्रवासी परिवारों के बीच भावनात्मक संबंध सदैव अटूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी अपनी मेहनत, संस्कार, उपलब्धियों और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से देश-दुनिया में राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं तथा वे वास्तव में उत्तराखंड के सांस्कृतिक दूत और सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति प्रवासी समाज का स्नेह, समर्पण और जुड़ाव राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि से यह भावनात्मक संबंध नई पीढ़ी को भी उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सभी प्रवासी संगठनों और उपस्थित उत्तराखंडवासियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवासी उत्तराखंडवासियों की प्रतिभा, अनुभव और विशेषज्ञता को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने के उद्देश्य से प्रवासी उत्तराखंड परिषद का गठन किया है। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखंडवासी राज्य की विकास योजनाओं, निवेश, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवासी समाज के सुझावों और अनुभवों को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार मानती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के दौरान भी प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने सदैव आगे बढ़कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के आह्वान पर अब तक देश-विदेश में रह रहे 27 प्रवासियों ने उत्तराखंड के 29 गांवों को गोद लिया है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुंबई में रहने वाली प्रख्यात अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी द्वारा अपने पैतृक गांव को गोद लेने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और देवभूमि के देवी-देवताओं के आशीर्वाद से उत्तराखंड आज विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण सहित सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एक जनपद-दो उत्पाद, हाउस ऑफ हिमालयाज, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, होम-स्टे योजना, वेड इन उत्तराखंड, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक पहलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ‘अचीवर्स’ तथा स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है तथा जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों ने उत्तराखंड की वैश्विक पहचान को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से राज्य को 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है तथा उद्योगों और स्टार्टअप्स की संख्या में भी निरंतर विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन आधारित नीतियों के सकारात्मक परिणामस्वरूप प्रदेश में होटल और होम-स्टे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा रिवर्स पलायन को भी नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रोजगार के लिए गांव छोड़ने को विवश थे, वे अब नए अवसरों के साथ अपनी मातृभूमि लौट रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय संतुलन के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के माध्यम से सुशासन को और अधिक मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां पहाड़ का पानी और जवानी प्रदेश के विकास में ही योगदान दें तथा किसी भी युवा को मजबूरी में पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव, आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षा, रोजगार और मजबूत आधारभूत संरचना के माध्यम से उत्तराखंड को देश का अग्रणी और विकसित राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में बसे सभी प्रवासी उत्तराखंडवासियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव, निवेश, नवाचार और सामाजिक योगदान के माध्यम से उत्तराखंड के विकास में इसी प्रकार सक्रिय भागीदारी निभाते रहें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और प्रवासी समाज के साझा प्रयासों से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का संकल्प अवश्य साकार होगा।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आत्मीय स्वागत करते हुए राज्य सरकार की विकास यात्रा, जनहितकारी निर्णयों तथा उत्तराखंड को नई पहचान दिलाने के प्रयासों पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंड संगठनों के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडवासी तथा बड़ी संख्या में मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में निवासरत प्रवासी उत्तराखंडवासी उपस्थित रहे।

कांवड़ यात्रा 2026: मुख्य सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष जोर

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कांवड़ यात्रा 2026: मुख्य सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष जोर

देहरादून। उत्तराखंड में 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर शासन ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित विभागों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए सभी तैयारियां समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले कांवड़ मेले के दौरान रूट प्लान, ट्रैफिक संचालन और भीड़ प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से 31 जुलाई से 4 अगस्त तक पंचक काल के दौरान अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कांवड़ यात्रियों के लिए पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर

बैठक में निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्गों और प्रमुख पड़ाव स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल, मोबाइल शौचालय, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। साथ ही नियमित कूड़ा उठान, फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए जाएं।

मुख्य सचिव ने यात्रा मार्गों पर अस्थायी सेक्टर अस्पताल, प्राथमिक उपचार केंद्र, बीएलएस एम्बुलेंस और बाइक एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।

पार्किंग और सड़क सुधार कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान आने वाले लाखों वाहनों को देखते हुए पार्किंग स्थलों के विस्तार और मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवश्यक बैरिकेडिंग, सड़क मरम्मत, साफ-सफाई और मार्ग सुधार कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।

बिजली और खाद्य सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

मुख्य सचिव ने यूपीसीएल को यात्रा मार्गों पर बिजली आपूर्ति का ऑडिट कराने और भविष्य के लिए स्थायी विद्युत व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए। वहीं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होटल, ढाबों, धार्मिक भंडारों, अस्थायी खाद्य स्टॉलों, रेस्टोरेंट और दुग्ध उत्पाद विक्रेताओं की नियमित जांच एवं सैंपलिंग कराने को कहा गया।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश

बैठक में कांवड़ यात्रा के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा पड़ोसी राज्यों के साथ जल्द अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि यात्रा के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनोद कुमार सुमन, धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, टिहरी की जिलाधिकारी नीतिका खंडेलवाल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सरकार पहुंची जनता के द्वार: तीन दिन में हजारों लोगों को मिला योजनाओं का लाभ, समस्याओं का हुआ समाधान

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जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान बना जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेशभर में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। अभियान के पहले तीन दिनों में ही हजारों लोगों ने विभिन्न विशेष शिविरों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया और अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान प्राप्त किया।

प्रदेश में 4 जुलाई से शुरू हुए 15 दिवसीय इस विशेष अभियान के तहत जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहकर आमजन की शिकायतों का मौके पर निस्तारण कर रहे हैं।

एक ही स्थान पर मिल रही कई सरकारी सेवाएं

विशेष शिविरों में नागरिकों को समाज कल्याण पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व प्रमाण पत्र, चिकित्सा उपकरण, कृषि उपकरण, बीज वितरण तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच कर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

अभियान के दौरान सड़क, बिजली, पानी, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा और अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मामलों का भी त्वरित समाधान किया जा रहा है, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही।

पिछले अभियान में 5 लाख से अधिक लोगों ने की थी भागीदारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर दिसंबर माह में भी 45 दिवसीय ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान संचालित किया गया था। उस दौरान प्रदेशभर में 681 शिविर आयोजित किए गए थे, जिनमें 5.33 लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया था।

अभियान के दौरान लगभग 33 हजार जन शिकायतों का समाधान किया गया था। बेहतर जनसंपर्क, त्वरित समस्या समाधान और योजनाओं की सीधी पहुंच के कारण इस पहल को सुशासन की एक सफल मॉडल व्यवस्था के रूप में भी सराहा गया।

जनता तक पहुंच रही सरकार

राज्य सरकार का उद्देश्य है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी सोच के तहत प्रशासन स्वयं गांव-गांव और क्षेत्र-क्षेत्र में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहा है तथा मौके पर समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार “सरलीकरण, समाधान और संतुष्टि” के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से उत्तराखंड में जनभागीदारी आधारित सुशासन की दिशा में एक मजबूत पहल देखने को मिल रही है, जिसका लाभ प्रदेश के हजारों नागरिकों को सीधे तौर पर मिल रहा है।

समाधान दिवस में डीएम आशीष चौहान का सख्त रुख, 169 शिकायतों पर कार्रवाई, लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी

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समाधान दिवस में डीएम आशीष चौहान का एक्शन मोड, 169 शिकायतों की सुनवाई, लापरवाह अधिकारियों पर सख्ती

देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित ‘समाधान दिवस’ में आमजन की समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 169 फरियादियों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें से कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

समाधान दिवस में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, अतिक्रमण, आपदा क्षतिपूर्ति, पारिवारिक विवाद और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की भरमार रही। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

एसीपी भुगतान में लापरवाही पर डेयरी प्रबंधक का वेतन रोका

अधोईवाला निवासी नितिन कुमार ने शिकायत की कि दुग्ध संघ में कार्यरत उनकी माता को लंबे समय से एसीपी का भुगतान नहीं किया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेयरी) के प्रबंधक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए और लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने को कहा।

अवैध कब्जों और भू-माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा

मेहूंवाला क्षेत्र में सरकारी नहर पर अवैध कब्जे की शिकायत पर एसडीएम को तत्काल जांच कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं छिद्दरवाला और कृसाली क्षेत्रों में जनजातीय भूमि पर अवैध प्लाटिंग और कब्जों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दिए।

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट स्थित ऐतिहासिक खुर्जा वाली धर्मशाला की भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने को कहा।

बुजुर्गों और महिलाओं की शिकायतों पर विशेष संवेदनशीलता

समाधान दिवस में बुजुर्गों और महिलाओं से जुड़े मामलों पर जिलाधिकारी विशेष रूप से संवेदनशील नजर आए। पारिवारिक प्रताड़ना, भरण-पोषण और सुरक्षा संबंधी शिकायतों में संबंधित अधिकारियों को त्वरित राहत प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

एक बुजुर्ग महिला द्वारा पुत्र और बहू से प्रताड़ना की शिकायत पर भरण-पोषण अधिनियम के तहत तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि एक अन्य बुजुर्ग दंपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और राजस्व अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।

शिक्षा और सामाजिक सहायता के मामलों पर भी सुनवाई

जनता दरबार में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की शिक्षा, दिव्यांगजन सहायता और छात्रवृत्ति संबंधी मामलों को भी प्राथमिकता से सुना गया। प्रशासन ने पात्र आवेदकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का भी प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समाधान दिवस में अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

शराब कबाब शबाब मिक्स कॉकटेल पार्टी देवभूमि का मिजाज बिगाड़ रही|Bhadas4india

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रामनगर के रिजॉर्ट में सेक्स रैकेट और शराब पार्टी का भंडाफोड़, 52 पुरुष और 10 महिलाएं गिरफ्तार

रामनगर/नैनीताल। शराब कबाब शबाब मिक्स कॉकटेल पार्टी देवभूमि का मिजाज बिगड़ रही
रामनगर देवभूमि में शराब कबाब शबाब तीनो का मिक्स कॉकटेल उत्तराखंड के लिए मुफ़ीद नहीं माना जा रहा है ये तीनो मिजाज उत्तराखंड की आबो हवा के लिए आने वाले समय में वातावरण को ख़राब करने का मसौदा तैयार कर रहे है रामनगर हो या नैनीताल अल्मोड़ा रामगढ देहरादून हर जगह ऐसी पार्टी का शोर समय समय पर सुनाई देता रहता है पुलिस मुख़बिरी के चलते ऐसे आयोजन समय से पकडे भी जाते है लेकिन कई महफिले आज भी वीकंड पर आयोजित होती रहती है

उत्तराखंड के रामनगर स्थित एक निजी रिजॉर्ट में कथित तौर पर चल रही शराब पार्टी, देह व्यापार और अश्लील गतिविधियों का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। संयुक्त पुलिस टीम की छापेमारी में 52 पुरुषों और एक नाबालिग सहित 10 महिलाओं को हिरासत में लिया गया है। मामले में रिजॉर्ट प्रबंधन और आयोजनकर्ताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार रामनगर के सांवल्दे क्षेत्र स्थित एक निजी रिजॉर्ट में बिना अनुमति पार्टी आयोजित किए जाने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), एसओजी और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान परिसर में शराब पार्टी, अश्लील गतिविधियां और कथित देह व्यापार से जुड़े संकेत मिलने पर कार्रवाई की गई।

मेरठ के कारोबारी पर आयोजन का आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पार्टी का आयोजन मेरठ निवासी कारोबारी उमेंद्र द्वारा कराया गया था। पुलिस के अनुसार रिजॉर्ट की बुकिंग पहले से कराई गई थी और आयोजन के लिए बड़ी रकम भी जमा की गई थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि पार्टी में शामिल लोगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

पुलिस का दावा है कि कुछ महिलाओं को बाहरी राज्यों और अन्य स्थानों से बुलाया गया था। मामले में एक नाबालिग के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है, जिसके बाद पॉक्सो अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

रिजॉर्ट सील, प्रबंधन पर भी कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान रिजॉर्ट के महाप्रबंधक के फरार होने की बात कही जा रही है। पुलिस ने जांच के दौरान रिजॉर्ट को सील कर दिया है और प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA), पॉक्सो अधिनियम, आबकारी अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

देवभूमि में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर उठ रहे सवाल

रामनगर, नैनीताल और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में समय-समय पर अवैध गतिविधियों, बिना अनुमति पार्टियों और कथित देह व्यापार से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद कानून व्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे आयोजनों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सूचना मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। आयोजकों, रिजॉर्ट प्रबंधन और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद और भी खुलासे हो सकते हैं।

नाबार्ड परियोजनाओं की समीक्षा: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने विभागों को दिए 3 दिन में प्रस्ताव अपलोड करने के निर्देश|Bhadas4india

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नाबार्ड परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश, मुख्य सचिव ने 3 दिन में प्रस्ताव अपलोड करने को कहा

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) के तहत अधिक से अधिक परियोजनाओं को शामिल करने पर जोर देते हुए विभागों को आगामी तीन दिनों के भीतर अपने प्रस्ताव पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समयबद्ध तरीके से धनराशि जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रही परियोजनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए विभागीय सचिवों को ऐसे प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए।

एकीकृत विकास मॉडल पर जोर

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए, ताकि किसी क्षेत्र को योजनाओं का समग्र लाभ मिल सके। उन्होंने कृषि और बागवानी क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने पर बल दिया।

उन्होंने सुझाव दिया कि कोल्ड चेन, परिवहन, भंडारण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को एकीकृत कर व्यापक परियोजनाएं तैयार की जाएं, जिससे किसानों और उत्पादकों को अधिक लाभ मिल सके।

नाबार्ड देगा तकनीकी सहयोग

मुख्य सचिव ने नाबार्ड से परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए तकनीकी और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए ताकि वह परियोजनाओं का अध्ययन कर चयनित क्षेत्रों के लिए समग्र विकास योजना तैयार कर सके।

नाबार्ड की ओर से ऐसे कार्यों के लिए शीघ्र विशेषज्ञ टीम गठित करने का आश्वासन दिया गया।

पॉलीहाउस और पशु स्वास्थ्य परियोजनाओं की समीक्षा

मुख्य सचिव ने उद्यान विभाग को पॉलीहाउस परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की सचिव स्तर पर नियमित साप्ताहिक समीक्षा की जाए।

इसके साथ ही पशुपालन विभाग को प्रदेश के सभी जनपदों में बड़े पशु चिकित्सालय स्थापित करने तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।

1000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों का लक्ष्य

बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 1000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो चुके हैं।

इनमें से 271 करोड़ रुपये के प्रस्ताव नाबार्ड को भेजे जा चुके हैं, जबकि 210 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी नाबार्ड को उपलब्ध करा दी गई है।

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल तथा नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रामनगर में धनगढ़ी पुल का लोकार्पण, बरसात में आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या होगी खत्म

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रामनगर, नैनीताल में ₹29.65 करोड़ की लागत से निर्मित 220.90 मीटर लंबे धनगढ़ी पुल का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-309 पर निर्मित यह आधुनिक सेतु कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान सहित पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई मजबूती प्रदान करेगा।

बरसात के दौरान धनगढ़ी नाले में जलस्तर बढ़ने से आवागमन में आने वाली वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा। इससे स्थानीय लोगों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के साथ पर्यटन, व्यापार, आपातकालीन सेवाओं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री Narendra Modi जी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तराखंड में आधुनिक आधारभूत संरचना और विश्वस्तरीय सड़क संपर्क के निर्माण का कार्य निरंतर गति से आगे बढ़ रहा है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़कर विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।

उत्तराखंड में 8.41 लाख वोटों पर संकट, 2027 चुनाव से पहले कई सीटों का बदल सकता है समीकरण|Bhadas4india

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उत्तराखंड चुनाव 2027: 8.41 लाख वोटों पर संकट, भाजपा-कांग्रेस की कई सीटों का गणित बिगड़ सकता है

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में करीब 8.41 लाख मतदाता ऐसे चिन्हित किए गए हैं जिनके वोट कटने का खतरा बना हुआ है। इनमें मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में मतदाता अंतिम सूची से बाहर होते हैं तो कई विधानसभा सीटों पर जीत-हार का पूरा समीकरण बदल सकता है। सबसे अधिक असर उन सीटों पर पड़ने की संभावना है जहां पिछली बार जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था।

काशीपुर सबसे अधिक प्रभावित, 30 हजार वोट खतरे में

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार अनकलेक्टेबल श्रेणी में सबसे अधिक मतदाता काशीपुर विधानसभा सीट में हैं। यहां करीब 30 हजार वोट ऐसे हैं जिनके एसआईआर फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए हैं। यदि ये मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं तो इनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हट सकते हैं।

यही कारण है कि काशीपुर सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। यह सीट आने वाले चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक रणक्षेत्र बन सकती है।

भाजपा की सात और कांग्रेस की तीन सीटें टॉप-10 में

सबसे अधिक प्रभावित शीर्ष-10 विधानसभा सीटों में वर्तमान में भाजपा के कब्जे वाली सात सीटें शामिल हैं—

  • काशीपुर
  • धर्मपुर
  • ऋषिकेश
  • रायपुर
  • रुद्रपुर
  • सहसपुर
  • डोईवाला

वहीं कांग्रेस के कब्जे वाली तीन सीटें—

  • बाजपुर
  • किच्छा
  • हल्द्वानी

भी इस सूची में शामिल हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए मतदाता सूची का अंतिम स्वरूप बेहद अहम साबित होने वाला है।

14 जुलाई को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची

चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। 7 जुलाई तक सभी एसआईआर फॉर्म डिजिटाइज किए जाएंगे, जिसके बाद 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी।

ड्राफ्ट सूची में उन मतदाताओं को अलग श्रेणी में रखा जाएगा जिनके सत्यापन प्रपत्र जमा नहीं हुए हैं। इसके बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया चलेगी तथा अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

किन जिलों में सबसे ज्यादा वोटर संकट में?

अनकलेक्टेबल श्रेणी के मतदाताओं की संख्या जिलावार भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा रही है।

  • देहरादून – 1,90,815
  • ऊधमसिंहनगर – 1,82,162
  • हरिद्वार – 1,31,047
  • नैनीताल – 72,083
  • अल्मोड़ा – 55,930
  • पौड़ी – 53,386
  • टिहरी – 44,062
  • पिथौरागढ़ – 27,615
  • चमोली – 23,631
  • उत्तरकाशी – 18,470
  • चंपावत – 17,827
  • बागेश्वर – 13,090
  • रुद्रप्रयाग – 10,902

इन आंकड़ों से साफ है कि मैदानी जिलों में मतदाता सूची पुनरीक्षण का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।

1.24 लाख मृतक मतदाता हटना तय

आंकड़ों के मुताबिक अनकलेक्टेबल श्रेणी में शामिल 1,24,278 मतदाता मृतक पाए गए हैं। इनके नाम मतदाता सूची से हटना लगभग तय माना जा रहा है। शेष मतदाताओं के संबंध में सत्यापन और आपत्तियों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बदल सकता है चुनावी गणित

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि लाखों मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटते हैं तो कई सीटों पर वोट प्रतिशत, मतदान पैटर्न और जीत-हार के अंतर पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, ऋषिकेश और डोईवाला जैसी सीटों पर राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदलने का संकेत दे रही है।

CM धामी ने चंपावत में ₹65.95 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का किया शिलान्यास|Bhadas4india

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चंपावत को ₹65.95 करोड़ की बड़ी सौगात, CM धामी ने शारदा तटबंध और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का किया शिलान्यास

चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को जनपद चंपावत के बूमघाट में ₹65.95 करोड़ की दो महत्वपूर्ण बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा तटबंध केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, क्षेत्रीय विकास और जनसुरक्षा की मजबूत नींव है।

मुख्यमंत्री ने ₹60.21 करोड़ की लागत से बूम से टनकपुर तक शारदा नदी के तट पर बाढ़ सुरक्षा तटबंध निर्माण कार्य तथा ₹5.74 करोड़ की लागत से पूर्णागिरि तहसील के ग्राम छीनीगोठ की सुरक्षा के लिए हुड्डी नदी पर बाढ़ सुरक्षा दीवार निर्माण परियोजना का शिलान्यास किया।

शारदा नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने शारदा नदी पर चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा नदी क्षेत्र के लाखों लोगों की आजीविका और जीवन का आधार है। ऐसे में बाढ़ सुरक्षा कार्य स्थानीय आबादी, कृषि भूमि और आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

सेवा पखवाड़ा में योजनाओं का लाभ लेने उमड़े लोग

कार्यक्रम के दौरान सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का भी निरीक्षण किया गया। कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और एनआरएलएम सहित कई विभागों ने अपने स्टॉल लगाए, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से रोटी और चटनी भी बनाई, जिससे कार्यक्रम में विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिला।

शारदा कॉरिडोर से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार लगभग ₹3300 करोड़ की लागत से विकसित की जा रही शारदा कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से क्षेत्र को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की नई पहचान देने के लिए कार्य कर रही है। इस परियोजना के तहत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

खेल, विज्ञान और कृषि क्षेत्र में भी बड़े निवेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की बेटियों को विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगभग ₹257 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज और ₹58.52 करोड़ की लागत से आधुनिक साइंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

इसके साथ ही कृषि महाविद्यालय, गौशालाओं के विकास और आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी अनेक योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

टनकपुर और बनबसा में भी तेजी से चल रहे विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर में लगभग ₹237.74 करोड़ की लागत से आधुनिक आईएसबीटी और करीब ₹14 करोड़ की लागत से मीडिया सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। वहीं बनबसा में सैनिक स्मारक, पाटी में सैनिक बहुउद्देशीय केंद्र तथा अन्य विकास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, वे केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि विकसित चंपावत, सुरक्षित सीमांत क्षेत्र और समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।