उत्तराखंड में 8.41 लाख वोटों पर संकट, 2027 चुनाव से पहले कई सीटों का बदल सकता है समीकरण|Bhadas4india

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उत्तराखंड में 8.41 लाख वोटों पर संकट, 2027 चुनाव से पहले कई सीटों का बदल सकता है समीकरण|Bhadas4india

उत्तराखंड चुनाव 2027: 8.41 लाख वोटों पर संकट, भाजपा-कांग्रेस की कई सीटों का गणित बिगड़ सकता है

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में करीब 8.41 लाख मतदाता ऐसे चिन्हित किए गए हैं जिनके वोट कटने का खतरा बना हुआ है। इनमें मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में मतदाता अंतिम सूची से बाहर होते हैं तो कई विधानसभा सीटों पर जीत-हार का पूरा समीकरण बदल सकता है। सबसे अधिक असर उन सीटों पर पड़ने की संभावना है जहां पिछली बार जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था।

काशीपुर सबसे अधिक प्रभावित, 30 हजार वोट खतरे में

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार अनकलेक्टेबल श्रेणी में सबसे अधिक मतदाता काशीपुर विधानसभा सीट में हैं। यहां करीब 30 हजार वोट ऐसे हैं जिनके एसआईआर फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए हैं। यदि ये मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं तो इनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हट सकते हैं।

यही कारण है कि काशीपुर सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। यह सीट आने वाले चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक रणक्षेत्र बन सकती है।

भाजपा की सात और कांग्रेस की तीन सीटें टॉप-10 में

सबसे अधिक प्रभावित शीर्ष-10 विधानसभा सीटों में वर्तमान में भाजपा के कब्जे वाली सात सीटें शामिल हैं—

  • काशीपुर
  • धर्मपुर
  • ऋषिकेश
  • रायपुर
  • रुद्रपुर
  • सहसपुर
  • डोईवाला

वहीं कांग्रेस के कब्जे वाली तीन सीटें—

  • बाजपुर
  • किच्छा
  • हल्द्वानी

भी इस सूची में शामिल हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए मतदाता सूची का अंतिम स्वरूप बेहद अहम साबित होने वाला है।

14 जुलाई को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची

चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। 7 जुलाई तक सभी एसआईआर फॉर्म डिजिटाइज किए जाएंगे, जिसके बाद 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी।

ड्राफ्ट सूची में उन मतदाताओं को अलग श्रेणी में रखा जाएगा जिनके सत्यापन प्रपत्र जमा नहीं हुए हैं। इसके बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया चलेगी तथा अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

किन जिलों में सबसे ज्यादा वोटर संकट में?

अनकलेक्टेबल श्रेणी के मतदाताओं की संख्या जिलावार भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा रही है।

  • देहरादून – 1,90,815
  • ऊधमसिंहनगर – 1,82,162
  • हरिद्वार – 1,31,047
  • नैनीताल – 72,083
  • अल्मोड़ा – 55,930
  • पौड़ी – 53,386
  • टिहरी – 44,062
  • पिथौरागढ़ – 27,615
  • चमोली – 23,631
  • उत्तरकाशी – 18,470
  • चंपावत – 17,827
  • बागेश्वर – 13,090
  • रुद्रप्रयाग – 10,902

इन आंकड़ों से साफ है कि मैदानी जिलों में मतदाता सूची पुनरीक्षण का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।

1.24 लाख मृतक मतदाता हटना तय

आंकड़ों के मुताबिक अनकलेक्टेबल श्रेणी में शामिल 1,24,278 मतदाता मृतक पाए गए हैं। इनके नाम मतदाता सूची से हटना लगभग तय माना जा रहा है। शेष मतदाताओं के संबंध में सत्यापन और आपत्तियों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बदल सकता है चुनावी गणित

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि लाखों मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटते हैं तो कई सीटों पर वोट प्रतिशत, मतदान पैटर्न और जीत-हार के अंतर पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, ऋषिकेश और डोईवाला जैसी सीटों पर राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदलने का संकेत दे रही है।

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