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सीएम धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, सुशासन और विकास मॉडल पर हुई चर्चा

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मुख्यमंत्री धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, विकास और सुशासन पर हुआ मंथन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री आवास में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सुशासन, जनकल्याण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राज्यों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने, जनप्रतिनिधियों की भूमिका को मजबूत करने और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन प्रणाली को और बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

उत्तराखंड के विकास मॉडल की जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष को उत्तराखंड में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं, निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों, पर्यटन विकास, चारधाम यात्रा प्रबंधन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सफल योजनाओं के अनुभव साझा करने से विकास को नई गति मिलती है तथा शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर

भेंट के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने तथा जनता और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने के विषय पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सुशासन और पारदर्शिता को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।

उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा विकास, जनसेवा और पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद और सहयोग से विकास के नए अवसर पैदा होते हैं और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह मुलाकात दोनों राज्यों के बीच सहयोग, सुशासन और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

देहरादून के प्रेमनगर में छापा, विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण एंगल की जांच शुरू

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देहरादून में बच्चों की शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण का आरोप, बाल अधिकार आयोग की छापेमार कार्रवाई में मिले अहम सुराग

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित खैरी गांव में संचालित एक संदिग्ध संस्थान पर छापेमार निरीक्षण कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख बरामद किए हैं। आयोग का दावा है कि प्रथम दृष्टया संस्थान में शिक्षा और सामाजिक सेवा की आड़ में लोगों को एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर प्रभावित करने तथा धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के संकेत मिले हैं।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के निर्देश पर 2 जून 2026 को की गई इस कार्रवाई के दौरान “मेडिकल एम्बेसडर” नाम से संचालित संस्थान का निरीक्षण किया गया। जांच टीम को परिसर से विभिन्न रजिस्टर, प्रचार सामग्री, पोस्टर, फाइलें और अन्य दस्तावेज प्राप्त हुए।

शिक्षा या कुछ और? जांच में उठे कई सवाल

निरीक्षण के दौरान आयोग को संस्थान में व्यवस्थित शैक्षणिक गतिविधियों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। उपलब्ध दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर टीम ने आशंका जताई कि संस्थान का घोषित उद्देश्य और वास्तविक गतिविधियों में अंतर हो सकता है।

आयोग के अनुसार परिसर में मौजूद साहित्य और अभिलेख एक विशेष धार्मिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार की ओर संकेत करते दिखाई दिए। हालांकि इन तथ्यों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही संभव होगी।

दिव्यांग बच्चों और परिवारों को सहायता के नाम पर गतिविधियों की जांच

प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज भी मिले जिनसे संकेत मिलता है कि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के नाम पर विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया जाता था। आयोग ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि लोगों को विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और सहायता का प्रलोभन देकर उनके धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती थी।

विदेशी फंडिंग के संकेत, पुलिस को सौंपे गए दस्तावेज

आयोग को उपलब्ध कुछ अभिलेखों में विदेशी स्रोतों से आर्थिक सहायता मिलने के संकेत भी प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा कुछ दस्तावेजों से संस्थान की गतिविधियों का संबंध देहरादून के कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से होने की संभावना भी सामने आई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने सभी दस्तावेज, अभिलेख, फाइलें और अन्य सामग्री आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दी है।

डॉ. गीता खन्ना ने क्या कहा?

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता जैसी संवेदनशील परिस्थितियों का उपयोग किसी भी छिपे हुए उद्देश्य के लिए किया जाना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संरक्षण प्रदान करना समाज और संस्थाओं की जिम्मेदारी है, न कि उन्हें किसी प्रकार के प्रभाव या प्रलोभन का माध्यम बनाना।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि, विदेशी वित्तपोषण के दुरुपयोग, धर्मांतरण संबंधी कृत्य या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक एजेंसियां बरामद दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही हैं।

चारधाम यात्रा पर सीएम धामी का बड़ा एक्शन प्लान, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और मानसून तैयारियों पर फोकस

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चारधाम यात्रा के लिए सीएम धामी का बड़ा निर्देश: ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ बनेगा नया मंत्र

देहरादून। उत्तराखंड में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसून सीजन को देखते हुए सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य करें और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मौसम और आपदा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन की आवश्यकता है।

रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा मार्गों पर रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों के संचालन पर लागू प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए। आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही अनुमति दी जाए, जबकि दिन के समय उनका संचालन प्रतिबंधित रहे।

भीड़ प्रबंधन के लिए बनेगी नई एसओपी

मुख्यमंत्री ने चारों धामों में श्रद्धालुओं की क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी धाम में क्षमता से अधिक भीड़ होने पर नीचे स्थित होल्डिंग एरिया और चेक प्वाइंट्स से यात्रियों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाए।

होल्डिंग एरिया में मिलें सभी सुविधाएं

सीएम ने कहा कि जहां भी श्रद्धालुओं को रोका जाए, वहां भोजन, पेयजल, पार्किंग, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। यात्रियों को प्रतीक्षा के कारणों और संभावित समय की जानकारी लगातार दी जाए ताकि भ्रम और असंतोष की स्थिति न बने।

सोशल मीडिया और एलईडी के जरिए मिलेगी रियल टाइम जानकारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम, ट्रैफिक, मार्ग अवरोध और दर्शन व्यवस्था से जुड़ी सभी सूचनाएं एलईडी स्क्रीन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल, एफएम रेडियो और सार्वजनिक सूचना प्रणाली के माध्यम से लगातार प्रसारित की जाएं।

उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए।

मानसून को लेकर विशेष तैयारी

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, पोकलैंड मशीन, एम्बुलेंस, सैटेलाइट फोन और राहत-बचाव उपकरण पहले से तैनात रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में रहकर लगातार निरीक्षण करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

होटल और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य

यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग और जांच करने को कहा गया।

रिकॉर्ड बना रही है चारधाम यात्रा

इस वर्ष चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। शुरुआती 44 दिनों में चारधामों में 29.85 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 26.34 लाख थी। यानी इस बार अब तक 3 लाख से अधिक अतिरिक्त श्रद्धालु यात्रा कर चुके हैं।

सरकार का मानना है कि बढ़ती संख्या को देखते हुए यात्रा प्रबंधन को और अधिक मजबूत, तकनीक आधारित और समन्वित बनाने की आवश्यकता है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।

रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा को राष्ट्रीय सम्मान, ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ की सूची में मिली जगह

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राष्ट्रीय स्तर पर चमके रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा, ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ की सूची में मिली जगह

रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को प्रशासनिक उत्कृष्टता और जनहित में किए गए नवाचारपूर्ण कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। फेम इंडिया मैगजीन की प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ सूची में उन्हें देश के शीर्ष 50 जिलाधिकारियों में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि रुद्रप्रयाग जनपद के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

देशभर के लगभग 800 जिलों में कार्यरत जिलाधिकारियों के कार्यों और प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बाद यह सूची जारी की गई। चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता, सुशासन, नवाचार, जवाबदेही, संकट प्रबंधन, जनसंपर्क, निर्णय क्षमता और विकासोन्मुख कार्यशैली जैसे प्रमुख मानकों को आधार बनाया गया।

‘कुशल प्रबंधक’ श्रेणी में मिली राष्ट्रीय पहचान

फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा किए गए सर्वेक्षण में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को ‘कुशल प्रबंधक’ श्रेणी में देश के प्रमुख जिलाधिकारियों में स्थान दिया गया। विशेषज्ञों की राय, जमीनी रिपोर्ट, मीडिया विश्लेषण और विभिन्न प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।

केदारनाथ यात्रा प्रबंधन बना पहचान

रुद्रप्रयाग में कार्यकाल के दौरान डीएम विशाल मिश्रा ने विशेष रूप से केदारनाथ धाम यात्रा प्रबंधन को नई दिशा दी। यात्रा सीजन से पहले हेलीपैड सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन तैयारियों की लगातार समीक्षा कर व्यवस्थाओं को मजबूत बनाया गया।

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनकी व्यापक सराहना हुई।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी विशेष पहल

जिलाधिकारी ने स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। केदारनाथ हेलीपैड क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों के लिए विक्रय केंद्र स्थापित कर स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया गया। इससे तीर्थ पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने में मदद मिली।

प्रशासनिक नेतृत्व की बनी मिसाल

अपने कार्यकाल में विशाल मिश्रा ने त्वरित निर्णय क्षमता, संवेदनशील प्रशासन और नवाचार आधारित कार्यशैली के माध्यम से जनसेवा का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा है बल्कि उत्तराखंड की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने वाली उपलब्धि भी मानी जा रही है।

देहरादून जिला योजना 2026-27: रोजगार, ब्लूबेरी फार्मिंग और ट्राउट उत्पादन पर फोकस, डीएम के सख्त निर्देश

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देहरादून की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देने की तैयारी, जिला योजना में शामिल होंगी रोजगार और नवाचार आधारित परियोजनाएं

देहरादून। राजधानी देहरादून के विकास को नई दिशा देने के लिए जिला प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना को लेकर व्यापक रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिला योजना में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें, रोजगार के अवसर बढ़ाएं और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएं।

जिला योजना समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि प्रत्येक विभाग कम से कम एक अभिनव (Innovative) और स्थायी (Sustainable) परियोजना का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करे। साथ ही परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध कराया जाए।

स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

जिलाधिकारी ने उद्योग, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़े प्रस्तावों को जिला योजना में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ब्लूबेरी फार्मिंग, ट्राउट फिश उत्पादन, पोल्ट्री फार्मिंग और गन्ना उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करें।

अधूरी योजनाओं पर सख्त रुख

डीएम ने स्पष्ट किया कि जिला योजना में केवल उन्हीं परियोजनाओं को शामिल किया जाए जिनकी भूमि उपलब्ध हो, कोई कानूनी विवाद न हो और जिन्हें निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद योजनाओं का समय पर पूरा न होना गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

हर विद्यालय में हों मूलभूत सुविधाएं

शिक्षा विभाग को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद का कोई भी विद्यालय बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए।

100 करोड़ रुपये की विकास योजना

जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने देहरादून जनपद के विकास के लिए जिला योजना के तहत लगभग 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस धनराशि का उपयोग ऐसे कार्यों में किया जाना चाहिए जिनका प्रभाव सीधे जनता के जीवन पर दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि जिला योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और जनहित के अनुरूप धनराशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

99.39 करोड़ का अनुमोदित परिव्यय

बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देहरादून जनपद हेतु 99.39 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है। इसमें 37.19 करोड़ रुपये वचनबद्ध योजनाओं एवं मानदेय मद में, 10.39 करोड़ रुपये अधूरे कार्यों को पूरा करने, 15.93 करोड़ रुपये स्वरोजगार योजनाओं तथा 36.25 करोड़ रुपये नए और अभिनव विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि विकास योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचे और देहरादून को आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर नई पहचान मिले।

उत्तराखंड के गांवों को मिलेगी नई पहचान, सभी ग्राम पंचायतों के लिए बन रहा मास्टर प्लान

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देहरादून। उत्तराखंड की ग्राम पंचायतों को विकास की नई रफ्तार देने के लिए पंचायतीराज विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। पंचायतीराज मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को पेयजल, सड़क, बिजली, दूरसंचार और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह आच्छादित करने के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाए।

विधानसभा स्थित कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को ग्राम विकास के क्षेत्र में देश का आदर्श राज्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए जिसे जल्द कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

विकास कार्यों की होगी संयुक्त मॉनिटरिंग

मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी अथवा मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग समिति गठित की जाए। यह समिति विभिन्न विभागों द्वारा ग्राम पंचायतों में किए जा रहे विकास कार्यों की निगरानी करेगी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्राम पंचायत में किसी विभाग द्वारा कोई कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है तो उसी कार्य के लिए दोबारा बजट खर्च न किया जाए। इसके बजाय उस गांव की अन्य आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। इससे सरकारी धन का बेहतर उपयोग होगा और पंचायतों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

केंद्र से अधिक फंड लाने की तैयारी

बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक धनराशि प्राप्त करने के लिए प्रभावी प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उनका कहना था कि अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने से पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा।

382 पंचायत भवनों के निर्माण पर जोर

मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि प्रदेश की 382 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन पंचायत भवनों के निर्माण के लिए राज्य सेक्टर के अनुपूरक बजट में आवश्यक धनराशि की मांग का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पंचायत स्तर पर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जवाबदेही तय करने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों तक सभी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाकर ग्रामीण जीवन स्तर को और बेहतर बनाया जाए। बैठक में पंचायतीराज विभाग के सचिव, निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

पूर्व सैनिकों के लिए नई शस्त्र लाइसेंस नीति पर विचार, मुफ्त कानूनी सहायता और अग्निवीर रोजगार योजना पर धामी सरकार का फोकस

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देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के कल्याण को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के लिए नई शस्त्र लाइसेंस नीति, भूमि विवादों में निशुल्क कानूनी सहायता और अग्निवीरों के रिटायरमेंट के बाद रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से मंथन कर रही है।

जानकारी के मुताबिक गृह विभाग स्तर पर पूर्व सैनिकों को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। लंबे समय से पूर्व सैनिक संगठन यह मांग उठाते रहे हैं कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद आत्मरक्षा और सुरक्षा सेवाओं में रोजगार के मद्देनजर उन्हें शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

भूमि विवादों के समाधान के लिए विशेष पहल

राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के बढ़ते भूमि और संपत्ति विवादों को देखते हुए उन्हें निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो पूर्व सैनिकों को कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिल सकेगी।

अग्निवीरों के लिए रोजगार और आरक्षण पर फोकस

धामी सरकार पहले ही अग्निवीरों के लिए पुलिस, जेल प्रहरी और वन विभाग की भर्तियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की घोषणा कर चुकी है। सरकार ने संबंधित विभागों को आगामी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए तैयारी तेज करने और रिक्त पदों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का मानना है कि सेना से प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं के शामिल होने से सुरक्षा तंत्र को मजबूत आधार मिलेगा और प्रशिक्षण पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा।

निजी क्षेत्र और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार निजी कंपनियों से भी अपील कर रही है कि वे अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करें। इसके साथ ही स्वरोजगार आधारित योजनाओं के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

पूर्व अर्धसैनिक बलों के लिए भी बन सकती हैं नई योजनाएं

सूत्रों के अनुसार सरकार पूर्व सैनिकों की तर्ज पर पूर्व अर्धसैनिक बलों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी अंतिम चरण की चर्चा कर रही है। इसके अलावा सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके बच्चों को राष्ट्र निर्माण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

कर्नल अजय कोठियाल ने जताई उम्मीद

अजय कोठियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ पूर्व सैनिक कल्याण से जुड़े विषयों पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। शासन स्तर पर भी विभिन्न प्रस्तावों पर संवाद हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही सकारात्मक निर्णय ले सकती है।

क्या बोले मुख्यमंत्री धामी?

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह स्वयं सैनिक परिवार से जुड़े हैं और राज्य सरकार पूर्व सैनिकों तथा पूर्व अर्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके बेहतर भविष्य के लिए नए प्रस्तावों पर विचार कर रही है। साथ ही उत्तराखंड में निर्माणाधीन सैन्य धाम परियोजना भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

डोईवाला में कथित अनधिकृत धार्मिक परिसर सील, एमडीडीए और प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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देहरादून। जिला प्रशासन और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने डोईवाला क्षेत्र में एक कथित अनधिकृत धार्मिक परिसर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मंजिला भवन को सील कर दिया। सोमवार को की गई इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रानीपोखरी थाना क्षेत्र के कंडोगल-कुडियाला गांव स्थित एक भवन को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में निर्माण मानकों के उल्लंघन और भूमि उपयोग से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। मामले की जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भवन को सील कर दिया।

बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण का आरोप

प्रशासनिक जांच में पाया गया कि लगभग 800 वर्ग फुट क्षेत्रफल में निर्मित दो मंजिला भवन का नक्शा मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं कराया गया था। इसके अलावा भवन के उपयोग को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

अधिकारियों के अनुसार विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत किसी भी निर्माण कार्य के लिए आवश्यक स्वीकृतियां अनिवार्य हैं। निर्धारित मानकों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

संयुक्त टीम ने की कार्रवाई

सोमवार को एसडीएम डोईवाला और एमडीडीए की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए भवन को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि संबंधित प्रकरण की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विकास प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन कर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

लंबे समय से उठ रही थीं शिकायतें

स्थानीय स्तर पर इस परिसर को लेकर लंबे समय से शिकायतें और आपत्तियां सामने आ रही थीं। प्रशासन का कहना है कि मामले में आवश्यक जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है।प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अवैध निर्माण, भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन और बिना स्वीकृति किए गए निर्माण कार्यों पर भविष्य में भी निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी।

देहरादून में हर सोमवार होगा समाधान दिवस, अब हर शिकायत की होगी ऑनलाइन ट्रैकिंग: डीएम आशीष चौहान

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देहरादून में हर सोमवार होगा ‘समाधान दिवस’, अब हर शिकायत की होगी ऑनलाइन ट्रैकिंग; डीएम ने दिए सख्त निर्देश

देहरादून। जन समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए देहरादून प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाला जनता दरबार ‘समाधान दिवस’ के रूप में आयोजित किया जाएगा, जहां दर्ज होने वाली प्रत्येक शिकायत को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जाएगी।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित समाधान दिवस के दौरान स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे शिकायतों के समयबद्ध समाधान की जवाबदेही तय होगी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी निगरानी की जा सकेगी।

132 शिकायतें पहुंचीं, भूमि विवाद सबसे बड़ी समस्या

समाधान दिवस में कुल 132 लोगों ने अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। इनमें सबसे अधिक शिकायतें भूमि विवाद, अतिक्रमण, कब्जा, सार्वजनिक रास्तों, ऋण माफी और आर्थिक सहायता से जुड़ी थीं।

भूमि विवादों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने जनपद स्तर पर एक हाई-लेवल स्पेशल सेल गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह सेल सीमांकन, कब्जा, अतिक्रमण, किरायेदारी विवाद और अन्य राजस्व मामलों का फास्ट ट्रैक मोड में निस्तारण करेगा।

दूरस्थ गांवों में गर्भवती महिलाओं की होगी विशेष निगरानी

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि सड़क संपर्क से वंचित दूरस्थ गांवों में गर्भवती महिलाओं का डेटा तैयार किया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को समय रहते सुरक्षित अस्पतालों में भर्ती कराया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति से बचा जा सके।

अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए टोकन सिस्टम लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे लंबी कतारों में लगने की परेशानी कम होगी।

बुजुर्गों की शिकायत पर तत्काल एक्शन

समाधान दिवस में 89 वर्षीय पूर्व सैनिक राधेश्याम ने किरायेदार द्वारा मकान खाली न करने और धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित पुलिस अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसी तरह बुजुर्ग भरत भूषण मित्तल द्वारा अवैध कब्जे और धमकी की शिकायत पर एसडीएम सदर को त्वरित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

फसल नुकसान और आर्थिक सहायता के मामलों पर भी निर्देश

ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को पीएम फसल बीमा योजना के तहत जल्द मुआवजा दिलाने के लिए उद्यान विभाग को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं आर्थिक तंगी के कारण स्कूल फीस जमा न कर पाने वाले परिवारों और आर्थिक सहायता मांगने वाले जरूरतमंद नागरिकों के मामलों पर भी प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया।

जनजातीय क्षेत्रों में एंबुलेंस और नई बस सेवा पर विचार

चकराता, क्वांसी और लाखामंडल जैसे जनजातीय क्षेत्रों में ‘खुशियों की सवारी’ एंबुलेंस सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके अलावा देहरादून-डोईवाला-भानियावाला-जौली-थानो मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस या सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार किया जा रहा है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि जन समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी विभागों को नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।

Sri Lanka Civil Service Delegation Visits Uttarakhand, Studies Advanced Disaster Management Systems

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Sri Lanka Civil Service Delegation Visits Uttarakhand, Studies Advanced Disaster Management Systems

40 Sri Lankan Civil Service Officers Learn Uttarakhand’s Disaster Management Model During USDMA Visit

From Early Warning Systems to Landslide Management, Sri Lankan Officers Study Uttarakhand’s Disaster Preparedness Framework

A 40-member delegation of Sri Lankan Civil Service Officers visited the Uttarakhand State Disaster Management Authority under a capacity-building program coordinated by the National Centre for Good Governance. The delegation was briefed on Uttarakhand’s disaster management framework, including early warning systems, emergency response mechanisms, community participation, and advanced technologies used for disaster risk reduction in the Himalayan state.