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चारधाम यात्रा पर डीएम आशीष चौहान सख्त, सुरक्षा और व्यवस्थाओं में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं पर डीएम आशीष चौहान सख्त, बोले- किसी स्तर पर न हो लापरवाही

देहरादून। चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचने के बीच जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने यात्रा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने सभी विभागों को मुख्यमंत्री के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम चारधाम यात्रा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर रहेगा विशेष फोकस

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, दवाइयों की उपलब्धता, शौचालयों की नियमित सफाई और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट, ओवररेटिंग और अन्य अनियमितताओं पर भी लगातार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने बिजली आपूर्ति, स्ट्रीट लाइटों की कार्यशीलता और चिकित्सा सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रमुख पड़ावों पर बढ़ेगी प्रशासनिक निगरानी

डीएम ने उप जिलाधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों को प्रमुख यात्रा पड़ावों पर संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजीकरण केंद्रों और होल्डिंग एरिया में यात्रियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

यात्रा मार्गों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन, वाहन फिटनेस जांच और आरटीओ चेकिंग व्यवस्था को भी और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।

रात्रि 10 बजे के बाद सीमित होगा भारी वाहनों का संचालन

यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए जिलाधिकारी ने कहा कि रात 10 बजे के बाद केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी जाए। इससे श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगी।

फेक वीडियो और अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

बैठक में सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं और फेक वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। डीएम ने कहा कि श्रद्धालुओं को सही और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

इसके लिए नगर निगम, एमडीडीए, स्मार्ट सिटी, एफएम रेडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी

डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं सकारात्मक यात्रा अनुभव प्रदान करें।

उन्होंने दोहराया कि यात्रा व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही पर जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

23 करोड़ पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड, शहरी विकास पर सीएम धामी का बड़ा विजन

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ऋषिकेश में 29.78 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, महापौर परिषद बैठक में बोले सीएम धामी

ऋषिकेश। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ऋषिकेश स्थित होटल नटराज में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद की 117वीं कार्यकारी समिति बैठक में प्रतिभाग करते हुए 29.78 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में देशभर से आए महापौरों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने शहरों को विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की आधारशिला बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महापौर केवल अपने शहर के प्रथम नागरिक नहीं हैं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं के प्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन देश के भविष्य और विकास की संभावनाएं शहरों में आकार लेती हैं।

चारधाम यात्रा में बना नया रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष चारधाम यात्रा के शुरुआती 45 दिनों में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो अब तक का नया रिकॉर्ड है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आदि कैलाश यात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग एक हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं मां पूर्णागिरि धाम में भी 24 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

चार वर्षों में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड में 23 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ है। राज्य सरकार पर्यटन, धार्मिक यात्रा और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

शहरी विकास में उत्तराखंड की नई पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना और अमृत मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार नगर निकायों में अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं। साथ ही निराश्रित गौवंशों के संरक्षण के लिए आश्रय योजना और श्वानों की बढ़ती संख्या नियंत्रण के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल योजना लागू की गई है।

ऋषिकेश में ईवी चार्जिंग स्टेशन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाएं

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र में 1.80 करोड़ रुपये की लागत से 10 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। इसके अलावा 4.83 करोड़ रुपये की लागत से 12 स्थानों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) परियोजनाओं की भी आधारशिला रखी गई।

इसके साथ ही 23.15 करोड़ रुपये की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के अंतर्गत लालपानी बीट क्षेत्र में कम्पोस्ट प्लांट एवं सैनिटरी लैंडफिल साइट निर्माण कार्य का लोकार्पण किया गया।

विकसित भारत के लिए मजबूत होंगे शहर

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर देश की पहचान और विकास का चेहरा होते हैं। यदि शहर स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर होंगे तो भारत की वैश्विक छवि और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने सभी नगर निकायों से स्वच्छता, हरित विकास, ऊर्जा संरक्षण और स्थानीय रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भी विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सौर ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

उत्तराखंड में बच्चों की जन्म से शिक्षा तक होगी डिजिटल ट्रैकिंग, सरकार बनाएगी यूनिफाइड प्लेटफॉर्म

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देहरादून: उत्तराखंड सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए बच्चों की जन्म से लेकर स्कूल शिक्षा पूरी होने तक की पूरी यात्रा को डिजिटल रूप से ट्रैक करने की तैयारी कर रही है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को विद्यार्थियों की ट्रैकिंग एवं मैपिंग के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी बच्चों की ABHA ID और APAAR ID तैयार की जाए तथा इन दोनों प्रणालियों को और अधिक उन्नत बनाकर ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जिससे बच्चे के जन्म से लेकर विद्यालय से पासआउट होने तक का संपूर्ण रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहे।

एक प्लेटफॉर्म पर मिलेगा शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरा रिकॉर्ड

सरकार की योजना के तहत बच्चे के जन्म, टीकाकरण, आंगनबाड़ी में प्रवेश, स्कूल नामांकन, शैक्षणिक उपलब्धियों और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एकीकृत किया जाएगा। इससे विभिन्न विभागों को बच्चों की प्रगति की निगरानी करने में आसानी होगी और योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाया जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान में ABHA और APAAR ID के माध्यम से स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड रखा जा रहा है, लेकिन अब इसे और अधिक व्यापक बनाकर एक सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा।

अभिभावकों को मिलेगा SMS अलर्ट

नई व्यवस्था के तहत अभिभावकों को स्वतः SMS भेजे जाएंगे। यदि कोई बच्चा टीकाकरण, आंगनबाड़ी प्रवेश या स्कूल में दाखिले के लिए पात्र होगा, तो सिस्टम समय रहते अभिभावकों को सूचना देगा।

इससे बच्चों के टीकाकरण, प्रारंभिक शिक्षा और स्कूल नामांकन में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी।

विभाग करेंगे नियमित फॉलोअप

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से संबंधित विभाग बच्चों की प्रगति का नियमित फॉलोअप कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर समय पर हस्तक्षेप कर पाएंगे।

एनआईसी और आईटीडीए तैयार करेंगे रोडमैप

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों, National Informatics Centre और Information Technology Development Agency को मिलकर विस्तृत मंथन करने और इस परियोजना का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस विषय पर दोबारा समीक्षा बैठक आयोजित कर प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मददगार साबित हो सकती है। एकीकृत डेटा उपलब्ध होने से ड्रॉपआउट दर कम करने, टीकाकरण कवरेज बढ़ाने और बच्चों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

उत्तराखंड में एग्री स्टैक पर मुख्य सचिव सख्त, किसान पंजीकरण और डिजिटल क्रॉप सर्वे में तेजी लाने के निर्देश

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उत्तराखंड में एग्री स्टैक मिशन पर सरकार सख्त, किसान पंजीकरण नहीं हुआ तो अटक सकती हैं योजनाएं

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने किसानों से जुड़े डिजिटल डाटाबेस तैयार करने वाली महत्वाकांक्षी एग्री स्टैक परियोजना को लेकर सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट किया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक करते हुए स्पष्ट किया कि किसान पंजीकरण और डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि एग्री स्टैक किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में अंश निर्धारण और पंजीकरण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

किसान पंजीकरण से जुड़ा होगा उर्वरक वितरण

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि भविष्य में उर्वरकों का वितरण किसान पंजीकरण के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में सभी जिलाधिकारी विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत किसान पंजीकरण सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्देश दिए कि गांव स्तर पर विशेष शिविर आयोजित कर किसानों का पंजीकरण कराया जाए और प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा की जाए।

पीएम किसान योजना पर पड़ सकता है असर

मुख्य सचिव ने चेतावनी दी कि यदि किसान पंजीकरण समय पर पूरा नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है। साथ ही उर्वरक वितरण प्रक्रिया में भी बाधा आ सकती है।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को देखते हुए यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।

डिजिटल क्रॉप सर्वे में छात्रों और स्वयं सहायता समूहों की मदद

प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे की गति बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव ने नवाचार आधारित रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कर्मियों की कमी को देखते हुए स्वयं सहायता समूहों, युवा मंगल दलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर इस अभियान से जोड़ा जा सकता है।

इससे सर्वेक्षण कार्य तेजी से पूरा होगा और कृषि संबंधी आंकड़े अधिक सटीक रूप से उपलब्ध हो सकेंगे।

किसानों को जागरूक करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने कहा कि एग्री स्टैक परियोजना की सफलता के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जिला प्रशासन को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को पंजीकरण और डिजिटल सर्वे के महत्व की जानकारी देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एग्री स्टैक से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं होने पर केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

डिजिटल कृषि व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

एग्री स्टैक परियोजना के माध्यम से किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही फसल सर्वेक्षण, उर्वरक वितरण और कृषि प्रबंधन की प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सभी किसानों को डिजिटल कृषि प्रणाली से जोड़कर उन्हें आधुनिक तकनीक आधारित सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।

सीएम धामी से राजस्थान के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर की मुलाकात, शिक्षा और पंचायती राज पर हुई अहम चर्चा

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सीएम धामी से राजस्थान के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर की मुलाकात
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री मदन दिलावर ने की शिष्टाचार भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री (स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा) श्री मदन दिलावर ने शिष्टाचार भेंट की।
भेंट के दौरान उनके मध्य शिक्षा, पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तीकरण, भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, ग्रामीण विकास तथा स्थानीय स्वशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के विषयों पर भी चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, विद्यालयी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने तथा पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।
कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा शिक्षा, संस्कृति संरक्षण तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों राज्यों के मध्य शिक्षा, संस्कृति एवं स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया।

सीएम धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, सुशासन और विकास मॉडल पर हुई चर्चा

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सीएम धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, सुशासन और विकास मॉडल पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की मुलाकात, विकास और सुशासन पर हुआ मंथन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री आवास में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सुशासन, जनकल्याण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राज्यों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने, जनप्रतिनिधियों की भूमिका को मजबूत करने और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन प्रणाली को और बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।

उत्तराखंड के विकास मॉडल की जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष को उत्तराखंड में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं, निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों, पर्यटन विकास, चारधाम यात्रा प्रबंधन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सफल योजनाओं के अनुभव साझा करने से विकास को नई गति मिलती है तथा शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर

भेंट के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने तथा जनता और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने के विषय पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सुशासन और पारदर्शिता को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।

उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा विकास, जनसेवा और पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद और सहयोग से विकास के नए अवसर पैदा होते हैं और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह मुलाकात दोनों राज्यों के बीच सहयोग, सुशासन और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

देहरादून के प्रेमनगर में छापा, विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण एंगल की जांच शुरू

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देहरादून के प्रेमनगर में छापा, विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण एंगल की जांच शुरू

देहरादून में बच्चों की शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण का आरोप, बाल अधिकार आयोग की छापेमार कार्रवाई में मिले अहम सुराग

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित खैरी गांव में संचालित एक संदिग्ध संस्थान पर छापेमार निरीक्षण कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख बरामद किए हैं। आयोग का दावा है कि प्रथम दृष्टया संस्थान में शिक्षा और सामाजिक सेवा की आड़ में लोगों को एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर प्रभावित करने तथा धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के संकेत मिले हैं।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के निर्देश पर 2 जून 2026 को की गई इस कार्रवाई के दौरान “मेडिकल एम्बेसडर” नाम से संचालित संस्थान का निरीक्षण किया गया। जांच टीम को परिसर से विभिन्न रजिस्टर, प्रचार सामग्री, पोस्टर, फाइलें और अन्य दस्तावेज प्राप्त हुए।

शिक्षा या कुछ और? जांच में उठे कई सवाल

निरीक्षण के दौरान आयोग को संस्थान में व्यवस्थित शैक्षणिक गतिविधियों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। उपलब्ध दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर टीम ने आशंका जताई कि संस्थान का घोषित उद्देश्य और वास्तविक गतिविधियों में अंतर हो सकता है।

आयोग के अनुसार परिसर में मौजूद साहित्य और अभिलेख एक विशेष धार्मिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार की ओर संकेत करते दिखाई दिए। हालांकि इन तथ्यों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही संभव होगी।

दिव्यांग बच्चों और परिवारों को सहायता के नाम पर गतिविधियों की जांच

प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज भी मिले जिनसे संकेत मिलता है कि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के नाम पर विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया जाता था। आयोग ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि लोगों को विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और सहायता का प्रलोभन देकर उनके धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती थी।

विदेशी फंडिंग के संकेत, पुलिस को सौंपे गए दस्तावेज

आयोग को उपलब्ध कुछ अभिलेखों में विदेशी स्रोतों से आर्थिक सहायता मिलने के संकेत भी प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा कुछ दस्तावेजों से संस्थान की गतिविधियों का संबंध देहरादून के कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से होने की संभावना भी सामने आई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने सभी दस्तावेज, अभिलेख, फाइलें और अन्य सामग्री आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दी है।

डॉ. गीता खन्ना ने क्या कहा?

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, आर्थिक स्थिति या दिव्यांगता जैसी संवेदनशील परिस्थितियों का उपयोग किसी भी छिपे हुए उद्देश्य के लिए किया जाना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संरक्षण प्रदान करना समाज और संस्थाओं की जिम्मेदारी है, न कि उन्हें किसी प्रकार के प्रभाव या प्रलोभन का माध्यम बनाना।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि, विदेशी वित्तपोषण के दुरुपयोग, धर्मांतरण संबंधी कृत्य या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक एजेंसियां बरामद दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही हैं।

चारधाम यात्रा पर सीएम धामी का बड़ा एक्शन प्लान, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और मानसून तैयारियों पर फोकस

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चारधाम यात्रा को लेकर सीएम धामी का बड़ा निर्देश, सुरक्षा और सुगम दर्शन पर पूरा फोकस

चारधाम यात्रा के लिए सीएम धामी का बड़ा निर्देश: ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ बनेगा नया मंत्र

देहरादून। उत्तराखंड में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसून सीजन को देखते हुए सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य करें और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मौसम और आपदा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन की आवश्यकता है।

रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा मार्गों पर रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों के संचालन पर लागू प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए। आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही अनुमति दी जाए, जबकि दिन के समय उनका संचालन प्रतिबंधित रहे।

भीड़ प्रबंधन के लिए बनेगी नई एसओपी

मुख्यमंत्री ने चारों धामों में श्रद्धालुओं की क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी धाम में क्षमता से अधिक भीड़ होने पर नीचे स्थित होल्डिंग एरिया और चेक प्वाइंट्स से यात्रियों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाए।

होल्डिंग एरिया में मिलें सभी सुविधाएं

सीएम ने कहा कि जहां भी श्रद्धालुओं को रोका जाए, वहां भोजन, पेयजल, पार्किंग, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। यात्रियों को प्रतीक्षा के कारणों और संभावित समय की जानकारी लगातार दी जाए ताकि भ्रम और असंतोष की स्थिति न बने।

सोशल मीडिया और एलईडी के जरिए मिलेगी रियल टाइम जानकारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम, ट्रैफिक, मार्ग अवरोध और दर्शन व्यवस्था से जुड़ी सभी सूचनाएं एलईडी स्क्रीन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल, एफएम रेडियो और सार्वजनिक सूचना प्रणाली के माध्यम से लगातार प्रसारित की जाएं।

उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए।

मानसून को लेकर विशेष तैयारी

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, पोकलैंड मशीन, एम्बुलेंस, सैटेलाइट फोन और राहत-बचाव उपकरण पहले से तैनात रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में रहकर लगातार निरीक्षण करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

होटल और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य

यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग और जांच करने को कहा गया।

रिकॉर्ड बना रही है चारधाम यात्रा

इस वर्ष चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। शुरुआती 44 दिनों में चारधामों में 29.85 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 26.34 लाख थी। यानी इस बार अब तक 3 लाख से अधिक अतिरिक्त श्रद्धालु यात्रा कर चुके हैं।

सरकार का मानना है कि बढ़ती संख्या को देखते हुए यात्रा प्रबंधन को और अधिक मजबूत, तकनीक आधारित और समन्वित बनाने की आवश्यकता है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।

रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा को राष्ट्रीय सम्मान, ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ की सूची में मिली जगह

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सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ सूची में शामिल रुद्रप्रयाग डीएम

राष्ट्रीय स्तर पर चमके रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा, ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ की सूची में मिली जगह

रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को प्रशासनिक उत्कृष्टता और जनहित में किए गए नवाचारपूर्ण कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। फेम इंडिया मैगजीन की प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ सूची में उन्हें देश के शीर्ष 50 जिलाधिकारियों में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि रुद्रप्रयाग जनपद के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

देशभर के लगभग 800 जिलों में कार्यरत जिलाधिकारियों के कार्यों और प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बाद यह सूची जारी की गई। चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता, सुशासन, नवाचार, जवाबदेही, संकट प्रबंधन, जनसंपर्क, निर्णय क्षमता और विकासोन्मुख कार्यशैली जैसे प्रमुख मानकों को आधार बनाया गया।

‘कुशल प्रबंधक’ श्रेणी में मिली राष्ट्रीय पहचान

फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा किए गए सर्वेक्षण में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को ‘कुशल प्रबंधक’ श्रेणी में देश के प्रमुख जिलाधिकारियों में स्थान दिया गया। विशेषज्ञों की राय, जमीनी रिपोर्ट, मीडिया विश्लेषण और विभिन्न प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।

केदारनाथ यात्रा प्रबंधन बना पहचान

रुद्रप्रयाग में कार्यकाल के दौरान डीएम विशाल मिश्रा ने विशेष रूप से केदारनाथ धाम यात्रा प्रबंधन को नई दिशा दी। यात्रा सीजन से पहले हेलीपैड सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन तैयारियों की लगातार समीक्षा कर व्यवस्थाओं को मजबूत बनाया गया।

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनकी व्यापक सराहना हुई।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी विशेष पहल

जिलाधिकारी ने स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। केदारनाथ हेलीपैड क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों के लिए विक्रय केंद्र स्थापित कर स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया गया। इससे तीर्थ पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने में मदद मिली।

प्रशासनिक नेतृत्व की बनी मिसाल

अपने कार्यकाल में विशाल मिश्रा ने त्वरित निर्णय क्षमता, संवेदनशील प्रशासन और नवाचार आधारित कार्यशैली के माध्यम से जनसेवा का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा है बल्कि उत्तराखंड की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने वाली उपलब्धि भी मानी जा रही है।

देहरादून जिला योजना 2026-27: रोजगार, ब्लूबेरी फार्मिंग और ट्राउट उत्पादन पर फोकस, डीएम के सख्त निर्देश

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देहरादून की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देने की तैयारी, जिला योजना में शामिल होंगी रोजगार और नवाचार आधारित परियोजनाएं

देहरादून। राजधानी देहरादून के विकास को नई दिशा देने के लिए जिला प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना को लेकर व्यापक रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिला योजना में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें, रोजगार के अवसर बढ़ाएं और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएं।

जिला योजना समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि प्रत्येक विभाग कम से कम एक अभिनव (Innovative) और स्थायी (Sustainable) परियोजना का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करे। साथ ही परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध कराया जाए।

स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

जिलाधिकारी ने उद्योग, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़े प्रस्तावों को जिला योजना में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ब्लूबेरी फार्मिंग, ट्राउट फिश उत्पादन, पोल्ट्री फार्मिंग और गन्ना उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करें।

अधूरी योजनाओं पर सख्त रुख

डीएम ने स्पष्ट किया कि जिला योजना में केवल उन्हीं परियोजनाओं को शामिल किया जाए जिनकी भूमि उपलब्ध हो, कोई कानूनी विवाद न हो और जिन्हें निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद योजनाओं का समय पर पूरा न होना गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

हर विद्यालय में हों मूलभूत सुविधाएं

शिक्षा विभाग को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद का कोई भी विद्यालय बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए।

100 करोड़ रुपये की विकास योजना

जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने देहरादून जनपद के विकास के लिए जिला योजना के तहत लगभग 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस धनराशि का उपयोग ऐसे कार्यों में किया जाना चाहिए जिनका प्रभाव सीधे जनता के जीवन पर दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि जिला योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और जनहित के अनुरूप धनराशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

99.39 करोड़ का अनुमोदित परिव्यय

बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देहरादून जनपद हेतु 99.39 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है। इसमें 37.19 करोड़ रुपये वचनबद्ध योजनाओं एवं मानदेय मद में, 10.39 करोड़ रुपये अधूरे कार्यों को पूरा करने, 15.93 करोड़ रुपये स्वरोजगार योजनाओं तथा 36.25 करोड़ रुपये नए और अभिनव विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि विकास योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचे और देहरादून को आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर नई पहचान मिले।