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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने की शिष्टाचार भेंट|Bhadas4india

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  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने की शिष्टाचार भेंट
  • उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, तीव्र विकास, पर्यटन संभावनाओं एवं सुशासन मॉडल से कराया अवगत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की।

मुख्यमंत्री ने सभी पत्रकारों का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौन्दर्य और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि तीव्र गति से विकास के नए आयाम स्थापित करने वाला राज्य भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के पत्रकारों का उत्तराखण्ड भ्रमण राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकास यात्रा को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परम्पराओं, लोक संस्कृति तथा हिमालयी सभ्यता के कारण देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां स्थित चारधाम, पंचकेदार, पंचबदरी, पंचप्रयाग, हेमकुंड साहिब, पूर्णागिरि, जागेश्वर, आदि कैलाश एवं ओम पर्वत जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाकर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन तथा होमस्टे आधारित पर्यटन को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित किए जाने के कारण उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र के इस आध्यात्मिक स्थल को वैश्विक पहचान मिली है। इसके परिणामस्वरूप आदि कैलाश सहित सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखण्ड में 25 करोड़ से अधिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं, जो राज्य की बढ़ती लोकप्रियता तथा पर्यटन क्षेत्र में विकसित हुई आधुनिक सुविधाओं का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन (Round the Year Tourism) के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। विशेष रूप से शीतकालीन यात्रा (Winter Yatra) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे चारधाम एवं अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शीतकालीन गद्दी स्थलों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा केदार एवं भगवान बदरीविशाल की नगरी को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाने के उद्देश्य से केदारनाथ एवं बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष मार्गदर्शन में इन दोनों धामों में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई संपर्क के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखण्ड तक पहुंच और अधिक सुगम होगी तथा पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। साथ ही रेल सेवाओं एवं हवाई सेवाओं का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास पर राज्य सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, पेयजल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग, स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास, कृषि, बागवानी तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार विकास और विरासत के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ हैं। उनके माध्यम से समाज तक सही और सकारात्मक जानकारी पहुंचती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ से आए पत्रकार उत्तराखण्ड की विकास यात्रा, पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी पहलों को निकट से जानने के बाद अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करेंगे, जिससे देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देशभर में और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों के माध्यम से समस्त छत्तीसगढ़वासियों को आगामी कुंभ में देवभूमि उत्तराखण्ड आने का सादर आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का विराट पर्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में देवभूमि पहुंचकर इस दिव्य एवं भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे तथा उत्तराखण्ड के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव का अनुभव करेंगे।

पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत एवं समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखण्ड में हो रहे विकास कार्यों, बेहतर आधारभूत संरचना, पर्यटन क्षेत्र में हुए परिवर्तन तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहलों की सराहना की।

इस अवसर पर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक के. एस. चौहान, छत्तीसगढ़ सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक धनंजय राठौर तथा छत्तीसगढ़ से आए 20 से अधिक पत्रकार उपस्थित रहे।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं:डीएम|Bhadas4india

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देहरादून जनपद में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार को नगर निगम, नगर पालिकाओं, जिला पंचायत, छावनी परिषद तथा सभी उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त देहरादून के लक्ष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिये एक प्रकोष्ठ का गठन किया जाए। नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, छावनी परिषद् द्वारा समस्त निर्वाचित प्रतिनिधियों, पार्षदों, वार्ड मेम्बरों को उपलब्ध करायी जाए। प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सदस्य नामित करें, जो मौका मुआयना कर डम्प साइट व अन्य कूड़ा प्रबन्धन कार्याे के चित्र व प्रमाण सहित आख्या प्रस्तुत करें। एसडब्ल्यूएम का परिहन स्थानीय निकाय से अनाधिकृत वाहनों से न हो, जिससे अनाधिकृत डम्प साईट न बनें।

जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित अनधिकृत कचरा डंपिंग स्थलों तथा बल्क वेस्ट जनरेटरों का चिन्हांकन कर विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को वैज्ञानिक एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

जिलाधिकारी ने बायो-रिमेडिएशन प्लांटों का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो प्लांट निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने ऋषिकेश, विकासनगर, देहरादून सहित जनपद की सभी सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग साइटों का निरीक्षण करने तथा नगर निगमों द्वारा किए जा रहे लीगेसी वेस्ट के निस्तारण कार्यों की दो दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगमों एवं छावनी परिषद क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का फोटोग्राफ सहित विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी अपर्णा ढौंडियाल, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, विभिन्न नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से सभी उप जिलाधिकारी एवं छावनी परिषद के अधिकारी उपस्थित रहे।

मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल: मुख्यमंत्री धामी

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  • उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू, मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल: मुख्यमंत्री धामी
  • विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रदान किए गए मान्यता प्रमाण पत्र
  • ‘‘वन नेशन-वन एजुकेशन’’ की दिशा में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पहल, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ
  • धामी सरकार का बड़ा फैसला: सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देने की नई व्यवस्था लागू
  • किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधार: मुख्यमंत्री
  • आस्था और आधुनिकता के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था का नया युग शुरू
  • राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य पर फोकस: अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से बदलेगी तस्वीर
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उत्तराखण्ड में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिला नया विस्तार
  • छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को मिलेंगे समान अवसर, आधुनिक शिक्षा से जुड़ेगा भविष्य
  • शिक्षा के मंदिरों में अब गुणवत्ता, पारदर्शिता और कौशल विकास होगा प्राथमिक लक्ष्य: मुख्यमंत्री
  • श्रेष्ठ उत्तराखण्ड के संकल्प को मजबूती देगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी,  श्री प्रदीप बत्रा, विधायक श्री उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के डीएम, व्यवस्थाएं सुधारने के सख्त निर्देश

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देहरादून जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू  वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40ः से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा मौजूद थे।

चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

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  • मुख्यमंत्री धामी ने डॉक्टर्स डे पर चिकित्सकों को बताया “देवभूमि के आरोग्य प्रहरी”, सेवा भावना को किया नमन
  • स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री धामी
  • आयुष्मान भारत योजना से प्रदेश में 12 लाख से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ
  • दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए टेलीमेडिसिन और हेली एंबुलेंस सेवाएं बनीं सहारा
  • चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
  • स्वस्थ उत्तराखंड के निर्माण में चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, देहरादून शाखा द्वारा चकराता रोड देहरादून स्थित स्थानीय होटल में नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को डॉक्टर्स डे की शुभकामनाएं दीं तथा उत्कृष्ट चिकित्सकों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती एवं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन चिकित्सा सेवा, मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार करने वाले विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि वे समाज में विश्वास, उम्मीद और जीवन की नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को विशेष सम्मान दिया गया है। चिकित्सक अपनी सेवा, संवेदना और समर्पण से मानवता की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में चिकित्सक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी जनसेवा कर रहे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और समस्त स्वास्थ्य योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि संकट के उस दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अनेक चिकित्सकों ने मानव जीवन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक दिया, उनका त्याग सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लाखों जरूरतमंद परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख से अधिक मरीजों को 2300 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं जबकि दो मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही नर्सिंग शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है। हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। किच्छा में एम्स के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण भी अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में हेली एंबुलेंस सेवा भी लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्तियों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके बेहतर कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी चिकित्सक के साथ हिंसा या अभद्र व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवाओं में नए अवसर लेकर आई हैं, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत समर्पित मानव संसाधन ही है। मरीज के लिए चिकित्सक उपचार के साथ विश्वास और संवेदना का प्रतीक होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा संस्थानों, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और समाज के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे चिकित्सकों का योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने सभी चिकित्सकों से अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आह्वान किया और कहा कि स्वस्थ चिकित्सक ही स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके और सभी के सहयोग से एक स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी, चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

PM मोदी की परियोजनाओं की समीक्षा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने 40 प्रोजेक्ट्स पर मांगी प्रगति रिपोर्ट

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास की गई विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्यभर में चल रही 40 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया गया और संबंधित विभागों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के सचिवों को निर्देशित किया कि परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर उनकी प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर समय-समय पर अपडेट की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना की अपडेट रिपोर्ट में संभावित पूर्णता तिथि का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए, ताकि कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।

उन्होंने मानसून सीजन को देखते हुए इस वर्ष के अंत तक पूर्ण होने वाली परियोजनाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद कार्यों की गति बनाए रखते हुए निर्धारित समयसीमा में परियोजनाएं पूरी की जाएं।

बैठक में पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने महासू देवता हनोल में समग्र बुनियादी ढांचे के विकास और जागेश्वर धाम से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रतिदिन समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।

शहरी विकास विभाग के अंतर्गत देहरादून में जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी प्रणाली के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इन कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए ताकि शहर की बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत बनाया जा सके।

ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने 300 मेगावाट की लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना, 220 केवी बनबसा सबस्टेशन, 400 केवी पिपलकोटी स्विचिंग सबस्टेशन और घनसाली सबस्टेशन सहित विभिन्न ट्रांसमिशन परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने वन स्वीकृति और भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों की लगातार पैरवी कर बाधाओं को समय रहते दूर करने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य अंतिम चरण में है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने 13 जिलों में संचालित 73 पेयजल परियोजनाओं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 133 सड़कों और 151 पुलों के निर्माण कार्यों के साथ-साथ नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ऊधम सिंह नगर में नदी पुनर्जीवन परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना से जुड़ी सभी विकास परियोजनाएं तय समय पर पूरी हों, ताकि प्रदेश के नागरिकों को उनका लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

उत्तराखण्ड की सड़क अवसंरचना को रूपये 7 हजार करोड़ की मिली सहमति

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राज्य के सड़क नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक किया प्रतिभाग
उत्तराखण्ड की सड़क अवसंरचना को रूपये 7 हजार करोड़ की मिली सहमति
राज्य के सड़क विकास से सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में उत्तराखण्ड राज्य से संबंधित सड़क एवं अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक एवं रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन तथा आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में सुदृढ़ एवं आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य के लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय का अनुरोध किया।

केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 हेतु राज्य सरकार को लगभग रूपये 750 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति पर सहमति प्रदान की गई। इसके साथ ही NHO के अंतर्गत 05 प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग रूपये 2966 करोड़ है। इनमें श्रीनगर बाईपास का PMC, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास की alignment , मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार तथा रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण प्रमुख रूप से शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की रूपये 530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र अवमुक्त किए जाने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने आगामी अर्धकुंभ मेला 2027 के दृष्टिगत हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे यातायात दबाव में कमी आएगी तथा श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में भी तेजी लाने का अनुरोध किया, जिससे क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुगम हो सके तथा स्थानीय जनता को जाम की समस्या से राहत मिले।दोनों ही प्रस्तावों को सहमति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने National Highways पर Spur के माध्यम से अन्य मार्गों के संयोजन हेतु कुछ परियोजनाओं के लिए लगभग रूपये 3000 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री द्वारा सकारात्मक सहमति व्यक्त की गई। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण हेतु लगभग रूपये 300 करोड़ की परियोजना पर चर्चा और सैद्धान्तिक सहमति की गई।

राज्य में आपदा प्रबन्धन में सफल और कुशल कार्यों के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में उपचारात्मक कार्यों हेतु डीपीआर तैयार किए जाने हेतु MoU करने का अनुरोध किया जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय द्वारा इसे स्वीकृत किया गया है ।

मुख्यमंत्री ने सीमा सड़क संगठन (BRO) से संबंधित लंबित मामलों, विशेषकर ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी खंड की डीपीआर तथा जोशीमठ बाईपास मार्ग के संशोधित प्रस्तावों (COS) को शीघ्र स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यंत कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के मामलों में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं स्लोप ट्रीटमेंट कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से इन सभी परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से उत्तराखण्ड में सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि तथा राज्य की आर्थिक प्रगति को गति प्राप्त होगी।

बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव सड़क परिवहन बृजेश कुमार संत, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मानसून को लेकर गढ़वाल मंडल हाई अलर्ट पर, चारधाम यात्रा की सुरक्षा के लिए 2 जुलाई को होगी मॉक ड्रिल

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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले गढ़वाल मंडल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के निर्देशन में सभी जिलाधिकारियों को संभावित आपदा स्थितियों से निपटने के लिए एक्शन मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार चारधाम यात्रा मार्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और अन्य संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले 2 जुलाई को सभी जनपदों में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों का परीक्षण करना है।

उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन किया जाएगा। इससे वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

प्रशासन ने पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, पेयजल विभाग समेत सभी संबंधित एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सभी विभागों को पर्याप्त संसाधन, उपकरण और मानव बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी मौसम विभाग के पूर्वानुमानों और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

गढ़वाल मंडल में इस बार मानसून को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है, ताकि चारधाम यात्रा सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित हो सके तथा किसी भी प्राकृतिक आपदा का प्रभाव न्यूनतम रहे।

चंपावत को मिली 6 करोड़ की MRI मशीन, CM धामी ने दी 40 करोड़ की स्वास्थ्य योजनाओं की सौगात|Bhadas4India

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चंपावत। सीमांत जनपद चंपावत की स्वास्थ्य सेवाओं को सोमवार को बड़ी मजबूती मिली, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चंपावत और आसपास के क्षेत्रों के लिए 40 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न स्वास्थ्य परियोजनाओं की सौगात भी दी।

चंपावत में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत हैं। राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाने और लोगों को उनके घर के नजदीक बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ के सहयोग से सीएसआर के तहत स्थापित यह अत्याधुनिक एमआरआई मशीन सीमांत क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगी। अब चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को जटिल जांचों के लिए हल्द्वानी या बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि मस्तिष्क, रीढ़, नसों, जोड़ों, कैंसर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की सटीक जांच अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे तथा गंभीर रोगों के उपचार में तेजी आएगी।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि जिला चिकित्सालय चंपावत में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाया जा रहा है। इसके अलावा 11.71 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डायग्नोस्टिक विंग, ऑपरेशन थिएटर और पार्किंग सुविधा का निर्माण भी तेजी से चल रहा है।

उन्होंने कहा कि अमोड़ी में 2.18 करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं नर्सिंग शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए 129 बेड वाले आधुनिक छात्रावास का निर्माण भी पूरा हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चंपावत में पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे और प्रदेश को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक तंगी किसी भी परिवार के इलाज में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वस्थ और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि जब हर नागरिक को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तभी समृद्ध और विकसित उत्तराखंड का सपना साकार होगा।

रुद्रपुर के बागवाला में तैयार हुए 1872 पीएम आवास, जल्द लाभार्थियों को मिलेंगी चाबियां|BHADAS4INIDA

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रुद्रपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऊधम सिंह नगर जिले के बागवाला क्षेत्र में निर्मित 1872 आवास अब लाभार्थियों को सौंपने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।

करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है। निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होते ही आवासों का लोकार्पण किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को उनके घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से लाभार्थियों द्वारा जमा की गई धनराशि और आवंटन प्रक्रिया की जानकारी भी ली। इस दौरान विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक आवास के लिए 3 लाख रुपये की सहायता सरकार द्वारा दी जा रही है, जबकि 3 लाख रुपये लाभार्थी के अंशदान के रूप में जमा किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आवास परिसर में साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। परिसर को हरित और सुविधायुक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जा रहा है। इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण भी पूरा हो चुका है और उसकी तकनीकी जांच व परीक्षण सफलतापूर्वक कर लिया गया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लाभार्थियों को आवास सौंपने से पहले सभी आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह सुनिश्चित की जाएं।

बागवाला की यह परियोजना प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश की बड़ी आवासीय परियोजनाओं में शामिल है, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना जल्द साकार होने जा रहा है।