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CM धामी ने सुना ‘मन की बात’ का 133वां एपिसोड

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CM धामी ने सुना ‘मन की बात’ का 133वां एपिसोड

देहरादून में आमजन के साथ सुना प्रसारण, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के मोथरोवाला क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात का 133वां संस्करण सुना। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देशवासियों को प्रेरणा देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है।

 “मन की बात” से मिलती है प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के प्रेरक कार्यों, स्टार्टअप्स, नवाचार, स्वच्छता, आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को सामने लाया जाता है।
इससे आमजन को आगे बढ़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।

 आमजन को मिला मंच

सीएम धामी ने कहा कि इस कार्यक्रम ने देशभर में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह मंच उन लोगों की कहानियों को सामने लाता है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

भारत की बढ़ती ताकत पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत:

  • आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है
  • विज्ञान, रक्षा और AI के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है
  • रक्षा उपकरणों का निर्यात कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है

 उत्तराखंड का बढ़ता योगदान

सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक” बताए जाने के संकल्प को राज्य सरकार आगे बढ़ा रही है।उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 कानून और विकास पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा:

  • दंगारोधी कानून
  • धर्मांतरण कानून
  • नकल विरोधी कानून
    जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं।

‘मन की बात’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को जोड़ने और प्रेरित करने वाला जनआंदोलन बन चुका है, जो सकारात्मक बदलाव की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।

CM धामी ने सुना मन की बात 133वां एपिसोड | बोले- प्रेरणा देने वाला कार्यक्रम

सुनील शेट्टी का आध्यात्मिक अनुभव परमार्थ निकेतन में विशेष संवाद

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सुनील शेट्टी ने जिया आध्यात्मिक अनुभव, परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती संग विशेष संवाद

ऋषिकेश में सुनील शेट्टी ने जिया आध्यात्मिक अनुभव, परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती संग विशेष संवाद

माना शेट्टी हुईं भावविभोर, गंगा तट पर प्रार्थना और संस्कृति-पर्यावरण पर गहन चर्चा

सुनील शेट्टी और उनकी पत्नी माना शेट्टी ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में दिव्य और आध्यात्मिक क्षणों का अनुभव किया। इस दौरान भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और समाज निर्माण में फिल्मों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद हुआ।

 आध्यात्मिक माहौल ने छुआ मन

माँ गंगा के पावन तट पर दीपों की रोशनी, वेदमंत्रों की गूंज और शंखनाद की ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस दिव्य माहौल ने सुनील शेट्टी और माना शेट्टी के अंतर्मन को गहराई से प्रभावित किया।

 फिल्मों के जरिए समाज निर्माण पर चर्चा

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने जोर दिया कि फिल्मों के माध्यम से:

  • भारतीय संस्कृति
  • परिवारिक मूल्य
  • नारी सम्मान
  • पर्यावरण संरक्षण
    जैसे विषयों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • सुनील शेट्टी का संदेश

सुनील शेट्टी ने कहा:
“परमार्थ निकेतन एक अनुभव है, जहां आकर मन शांत हो जाता है और जीवन की प्राथमिकताएं स्पष्ट हो जाती हैं।”

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भारतीय संस्कृति और मूल्यों को समझें, क्योंकि यही भारत की असली ताकत है।

 माना शेट्टी हुईं भावुक

माना शेट्टी ने आश्रम के अनुशासित और सात्त्विक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे स्थान आत्मा को सुकून देते हैं। बच्चियों से आत्मीय मुलाकात

सुनील शेट्टी ने रेस्क्यू फाउंडेशन की बच्चियों से मुलाकात कर उन्हें आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया। उनके शब्दों ने बच्चियों के चेहरे पर नई उम्मीद जगाई।

 विश्व शांति के लिए प्रार्थना

अंत में सभी ने मिलकर राष्ट्र, समाज और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की, जो इस आध्यात्मिक मुलाकात का सबसे भावपूर्ण क्षण रहा।

ऋषिकेश की पावन धरती पर यह मुलाकात सिर्फ एक विजिट नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, संस्कृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश बनकर उभरी।

ऋषिकेश में सुनील शेट्टी का आध्यात्मिक अनुभव | परमार्थ निकेतन में विशेष संवाद

राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री पुत्र की शादी पर एक्शन, विभाग ने रुकवाए इंतजाम

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राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री पुत्र की शादी पर एक्शन, विभाग ने रुकवाए इंतजाम

सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद सख्ती, मंदिर समिति पर मुकदमा दर्ज

उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में प्रस्तावित एक शादी समारोह को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे के विवाह आयोजन से जुड़े इंतजामों पर वन विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए कार्यक्रम रुकवा दिया और मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

 क्या है पूरा मामला?

हरिद्वार रेंज स्थित मां सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में रविवार को विवाह समारोह प्रस्तावित था। इसके लिए मंदिर परिसर को सजाया गया था और आयोजन से जुड़े सामान भी पहुंच चुके थे।

लेकिन जैसे ही विभाग को जानकारी मिली, अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सभी तैयारियां रुकवा दीं और सामान हटवा दिया। इसके बाद केवल पूजा-अर्चना तक ही कार्यक्रम सीमित रहा।

 सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल

मामले ने तूल तब पकड़ा जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि:

  • कोर जोन में बड़े स्तर पर विवाह आयोजन किया जा रहा है
  • जनरेटर और अन्य व्यवस्थाएं वन्यजीवों को प्रभावित कर सकती हैं
  • बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना थी

इन आरोपों के बाद वन विभाग हरकत में आया और जांच शुरू की गई।

 वन विभाग की कार्रवाई

राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर:

  • शादी से जुड़े इंतजाम हटवाए
  • जांच के आदेश दिए
  • मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया

प्रभारी निदेशक राजीव धीमान के अनुसार शिकायत मिलने के बाद तुरंत टीम भेजी गई और आवश्यक कार्रवाई की गई।

 मंत्री खजान दास का बयान

कैबिनेट मंत्री खजान दास ने सफाई देते हुए कहा:

  • केवल वैवाहिक रस्म और भंडारे का कार्यक्रम था
  • कोई शोर-शराबा या ढोल-नगाड़े नहीं थे
  • वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कार्य नहीं किया गया

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में पहले भी भंडारे होते रहे हैं।

 पर्यावरण बनाम आयोजन

यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि:

  • क्या संरक्षित क्षेत्रों में निजी आयोजन की अनुमति होनी चाहिए?
  • क्या नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है?

राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील इको-ज़ोन में इस तरह के आयोजन पर रोक लगाकर वन विभाग ने साफ संकेत दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री पुत्र की शादी पर कार्रवाई | वन विभाग सख्त

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बद्रीनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले, आस्था से गूंजा धाम

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केदारनाथ धाम में घटना पर प्रशासन की संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई

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केदारनाथ धाम में घटना पर प्रशासन की संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई

उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम में 22 अप्रैल 2026 को एक दुखद घटना सामने आई, जिसमें गुजरात के एक 69 वर्षीय श्रद्धालु का निधन हो गया। इस संबंध में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुछ माध्यमों में प्रसारित हो रही सूचनाएं भ्रामक और तथ्यहीन हैं।

 घटना की जानकारी और त्वरित एक्शन

सुबह करीब 6:30 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि व्हाइट हाउस क्षेत्र के पास एक व्यक्ति अचेत अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया।

युवा मंगल दल फोर्स (वाईएमएफ) के जवानों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर श्रद्धालु को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, केदारनाथ पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 सम्मानजनक तरीके से की गई आगे की कार्रवाई

प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पार्थिव शरीर के सम्मानजनक प्रबंधन को प्राथमिकता दी—

  • वाईएमएफ के सहयोग से शव को केदारनाथ हेलीपैड तक पहुंचाया गया
  • उस समय हेली सेवा अस्थायी रूप से बाधित थी
  • सेवा शुरू होते ही शव को हेलीकॉप्टर से जामू हेलीपैड भेजा गया
  • वहां से शव वाहन द्वारा रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया

 अफवाहों से बचने की अपील

जिला प्रशासन ने अपील की है कि लोग किसी भी तरह की अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

 सुरक्षा के प्रति प्रशासन प्रतिबद्ध

प्रशासन ने दोहराया कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कठिन मौसम और लंबी यात्रा को देखते हुए सभी आवश्यक स्वास्थ्य और राहत व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।इस घटना में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता ने संकट की घड़ी में मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण प्रस्तुत किया।

एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन, युवाओं को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश

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एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन, युवाओं को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश

ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण के साथ सेवा करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धि का नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारी की शुरुआत का प्रतीक है।

 कोविड काल और भारत की भूमिका

उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया और “वैक्सीन मैत्री” के माध्यम से 100 से अधिक देशों को सहायता प्रदान की।

 स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार की सराहना

उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान चिकित्सा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

  • टेलीमेडिसिन सेवाएं
  • हेली एम्बुलेंस
  • ड्रोन के माध्यम से दवा आपूर्ति
    इन पहलों को उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

 पहाड़ी क्षेत्रों में सेवा का आह्वान

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने युवा डॉक्टरों से अपील की कि वे पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियों को अवसर में बदलें और दूरस्थ इलाकों में सेवाएं दें।

 चिकित्सा सेवा = मानवता की सेवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम है।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश आज कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

साथ ही ऊधमसिंह नगर में एम्स के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

 इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की सराहना

उपराष्ट्रपति ने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की।

 जीवनभर सीखने की जरूरत

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखते रहना आवश्यक है और मरीजों के साथ प्रभावी संवाद ही बेहतर उपचार का आधार है। इस अवसर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत, नरेश बंसल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समापन संदेश स्पष्ट रहा—डिग्री के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है, और सच्ची सफलता सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण में ही निहित है।

फूलों से सजा बाबा केदारनाथ धाम, 22 को खुलेंगे कपाट—धामी करेंगे दर्शन

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फूलों से सजा बाबा केदारनाथ धाम, 22 को खुलेंगे कपाट—धामी करेंगे दर्शन

उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम में भक्ति और उत्साह का माहौल चरम पर है। बर्फीली ठंड के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है और पूरा केदारपुरी क्षेत्र “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंज रहा है।

 धाम पहुंची बाबा की उत्सव डोली

भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली गौरीकुंड से प्रस्थान कर मंगलवार को केदारनाथ धाम पहुंच गई। डोली के धाम पहुंचते ही पूरी केदारपुरी भक्तिमय हो उठी और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया।

 फूलों से सजा केदारपुरी

धाम को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया है। कपाट खुलने से पहले ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र दिव्य और भव्य रूप ले चुका है।

 22 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उपस्थित रहकर पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे।

 बर्फ के बीच आस्था का संगम

धाम में अभी भी ठंड और बर्फ का असर बना हुआ है, जिससे तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंच रहे हैं और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

चारधाम यात्रा के इस प्रमुख पड़ाव पर अब श्रद्धालुओं को कपाट खुलने का बेसब्री से इंतजार है, जहां एक बार फिर बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए देशभर से भक्त उमड़ेंगे।

केदारनाथ धाम फूलों से सजा, 22 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

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केदारनाथ धाम फूलों से सजा, 22 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इन दिनों भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। पूरे केदारपुरी क्षेत्र को फूलों से भव्य रूप से सजाया जा रहा है और हर ओर “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज रहा है।

 फाटा से गौरीकुंड पहुंची उत्सव डोली

भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली फाटा से प्रस्थान कर विभिन्न पड़ावों—बड़ासू, शेरसी, रामपुर, सीतापुर और सोनप्रयाग होते हुए गौरीकुंड पहुंच गई है। गौरीकुंड स्थित गौरी माता मंदिर में डोली का भव्य स्वागत किया गया, जहां रात्रि प्रवास भी हुआ।इससे पहले डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद रवाना होकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची थी। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और अक्षत से डोली का स्वागत किया।

 22 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी दर्शन करेंगे।

 बर्फबारी के बीच आस्था का प्रवाह

केदारनाथ में अभी भी ठंड और बर्फबारी का असर है, जिससे तापमान लगातार बदल रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं है और बड़ी संख्या में भक्त धाम की ओर बढ़ रहे हैं।

 गौरीकुंड का धार्मिक महत्व

गौरीकुंड को माता पार्वती की तपस्थली माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।

  • यहां स्थित तप्त कुंड में स्नान कर श्रद्धालु यात्रा शुरू करते हैं
  • पितृ कुंड में तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है

भक्ति, परंपरा और प्रकृति के अद्भुत संगम के बीच बाबा केदारनाथ धाम एक बार फिर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।

चारधाम यात्रा 2026: सरकार की नई SOP पंजीकरण अनिवार्य, टोकन से होंगे दर्शन

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चारधाम यात्रा में स्वच्छ और शुद्ध भोजन के लिए विशेष अभियान शुरू

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चारधाम यात्रा में स्वच्छ और शुद्ध भोजन के लिए विशेष अभियान शुरू

चारधाम यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “हरित यात्रा” विज़न के तहत यह अभियान संचालित किया जा रहा है।

क्विक रिस्पांस टीम और मोबाइल वैन तैनात

विभाग ने यात्रा मार्ग पर क्विक रिस्पांस टीमों और मोबाइल फूड सेफ्टी वैन की तैनाती की है, जो खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के साथ शिकायतों का त्वरित निस्तारण करेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर 18001804246 भी जारी किया गया है।

होटल-ढाबा संचालकों को प्रशिक्षण

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा यात्रा मार्ग के प्रमुख शहरों—उत्तरकाशी, श्रीनगर, देवप्रयाग, चंबा, रुद्रप्रयाग आदि में होटल और ढाबा संचालकों के साथ प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। अब तक 250 से अधिक कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

इन कार्यशालाओं में कारोबारियों को स्वच्छता, मिलावट रहित भोजन, तथा तेल, नमक और चीनी के सीमित उपयोग के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित यात्रियों को भी सुविधा मिल सके।

“ईट राइट” और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के “ईट राइट” अभियान के तहत होटल संचालकों को खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने और उसे बायोफ्यूल के लिए उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।

साथ ही, यात्रा को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और “Reduce, Reuse, Recycle” के सिद्धांत को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

हरित चारधाम यात्रा का लक्ष्य

चारधाम यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य है कि यात्रियों को न केवल शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले, बल्कि पवित्र तीर्थस्थलों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “हरित चारधाम यात्रा” के माध्यम से राज्य में स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।