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विकास का विस्तार, विश्वास का संचार काशी से हो रहा ‘नए भारत’ का संकल्प साकार

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विकास का विस्तार, विश्वास का संचार” के संदेश के साथ नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में ₹6,330 करोड़ से अधिक की 163 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

यह आयोजन ‘नए भारत’ के संकल्प को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास से जुड़ी कई योजनाओं को धरातल पर उतारा गया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनों (बनारस–पुणे और अयोध्या–मुंबई) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे विभिन्न राज्यों के बीच आवागमन और कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।

इसके साथ ही बनास डेयरी से जुड़े 3,21,813 दुग्ध उत्पादकों को बोनस का हस्तांतरण भी किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिला।

कार्यक्रम में आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम काशी से देशभर में विकास, रोजगार और विश्वास के संदेश को आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर राजनीति नहीं: CM धामी का बड़ा बयान

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे शीघ्र लागू करने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड की महान महिला विभूतियों जैसे गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण और अन्य को नमन करते हुए कहा कि ये सभी नारी शक्ति और सामाजिक चेतना की प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्वरूप माना गया है—माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की आराधना की जाती है। इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ नीति निर्माण में उनकी निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यह देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देने की दिशा में आवश्यक पहल है।

केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें:

  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
  • सुकन्या समृद्धि योजना
  • प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना
  • स्वच्छ भारत मिशन
  • तीन तलाक के खिलाफ कानून

उन्होंने कहा कि इन पहलों से महिलाओं की स्थिति में व्यापक सुधार आया है और उन्हें सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा मिली है।

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है:

  • स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा
  • ब्याज मुक्त ऋण
  • महिला उद्यमिता योजनाएं
  • सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण
  • सहकारी समितियों में 33% आरक्षण

उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाखों महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में सभी दलों से अपील की कि वे महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाएं, ताकि देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार मिल सके।

राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत सात नेता अब भाजपा सांसद

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राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत सात नेता अब भाजपा सांसद

राज्यसभा में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, क्योंकि आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से सदन का अंकगणित प्रभावित हुआ है और सियासी माहौल में नई चर्चा शुरू हो गई है।
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप की स्थिति कमजोर हो गई है। संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सातों सांसदों को अब भाजपा सदस्य के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

पहले राज्यसभा में आप के 10 सांसद थे, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गए हैं। वहीं इस राजनीतिक बदलाव का सीधा फायदा भाजपा को मिला है, जिसकी संख्या 106 से बढ़कर 113 सांसदों तक पहुंच गई है, जिससे सदन में उसकी पकड़ और मजबूत हो गई है।

विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेला का भव्य आयोजन

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जनपद चमोली के सलूड-डूंगरा गांव में रविवार को विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेला का भव्य आयोजन पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया।

रामायण की मूल कथा और उत्तराखंड की प्राचीन मुखौटा शैली पर आधारित यह अनूठा लोकनाट्य अपनी जीवंत प्रस्तुति, लोकगीतों, नृत्य और धार्मिक परंपराओं के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है। मेले के दौरान पूरा गांव उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया और हर ओर लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार भी उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी ने कहा कि ‘रम्माण’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस धरोहर को संरक्षित और आगे बढ़ाने में स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिल्ली से भागे देहरादून में हांफे नहीं मिली गर्मी से राहत

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दिल्ली से राहत की उम्मीद लेकर देहरादून पहुंचे लोगों को इस बार मौसम ने निराश कर दिया।

दिल्ली में जहां तापमान 44°C के पार पहुंच गया, वहीं देहरादून भी पीछे नहीं रहा और पारा 40°C के करीब पहुंच गया। आंकड़ों में थोड़ा अंतर जरूर था, लेकिन गर्मी की तीव्रता लगभग समान महसूस हुई।

वीकेंड पर हमेशा की तरह बड़ी संख्या में दिल्ली-एनसीआर के लोग ठंडक की तलाश में देहरादून और आसपास के इलाकों में पहुंचे। बेहतर कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे के कारण अब यह सफर महज 2.5 से 3 घंटे का रह गया है, जिससे पर्यटकों की संख्या और बढ़ गई है।

हालांकि, इस बार देहरादून में भी दिन के समय तेज धूप और लू जैसी स्थिति बनी रही, जबकि रात में भी गर्म हवाओं ने राहत नहीं दी। शहर में बढ़ते निर्माण कार्यों से उड़ती धूल ने माहौल को और अधिक गर्म और असहज बना दिया, जिससे लोगों को एनसीआर जैसा ही अनुभव हुआ।

स्थानीय लोगों ने दोपहर में घरों से बाहर निकलने से परहेज किया, जबकि शाम के समय राजपुर रोड पर हलचल जरूर देखने को मिली। कुल मिलाकर, जो देहरादून कभी “कूल एस्केप” माना जाता था, वहां अब अप्रैल के अंत में ही मई-जून जैसी गर्मी महसूस होने लगी है—जो बदलते मौसम और शहरीकरण का साफ संकेत है।

AWPL विजय पर्व कार्यक्रम जॉब सीकर” से “जॉब क्रिएटर मुख्यमंत्री धामी की सीक्रेट स्पीच

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पुष्कर सिंह धामी ने गुरुग्राम में आयोजित AWPL विजय पर्व कार्यक्रम में प्रतिभाग कर युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डायरेक्ट सेलिंग मॉडल आज के समय में रोजगार का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है, जो युवाओं को “जॉब सीकर” से “जॉब क्रिएटर” बनने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस मॉडल को आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से जोड़ते हुए इसे आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बताया।

उन्होंने डॉ. संजीव कुमार और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि AWPL जैसे प्लेटफॉर्म लाखों लोगों को स्वरोजगार से जोड़ रहे हैं और उन्हें अपनी पहचान बनाने का अवसर दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज महिलाएं डायरेक्ट सेलिंग के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “स्टार्टअप इंडिया”, “स्किल इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “मेक इन इंडिया” जैसी पहलें देश को आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य में निवेश, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के तहत लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं और बड़ी संख्या में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं।

उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल टू ग्लोबल” को बढ़ावा देने की अपील करते हुए बताया कि “हाउस ऑफ हिमालयाज” जैसे प्रयासों से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है और हजारों महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।

अंत में मुख्यमंत्री ने सभी से विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

चारधाम यात्रा: ट्रैफिक कंट्रोल के लिए SSP श्वेता चौबे मैदान में, ड्रोन से निगरानी

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चारधाम यात्रा के मद्देनज़र तपोवन क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्वेता चौबे खुद मैदान में उतरीं और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

टिहरी पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। एसएसपी द्वारा मुनि की रेती से तपोवन तक निरीक्षण कर ट्रैफिक, पार्किंग और संवेदनशील स्थानों की स्थिति का आकलन किया गया। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए पूरे मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सतर्कता, समन्वय और संवेदनशीलता के साथ अपनी ड्यूटी निभाएं।

टिहरी पुलिस का कहना है कि उनका लक्ष्य चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

बंगाल में चुनावी जंग: ‘शब्द प्रहार’ के बीच हिंसा का साया

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बंगाल में चुनावी जंग: ‘शब्द प्रहार’ के बीच हिंसा का साया

तेज होते भाषण, बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप… और जमीन पर टकराव की घटनाएं

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। एक ओर नेताओं के बीच तीखे “शब्द प्रहार” हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों से हिंसा और टकराव की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण होता दिख रहा है।

 चुनावी मंच से शब्दों की जंग

राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं।

  • आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज
  • रैलियों में तीखी भाषा का इस्तेमाल
  • सोशल मीडिया पर भी बयानबाजी चरम पर

चुनावी भाषण अब केवल वादों तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे विरोधियों पर हमले तक पहुंच चुके हैं।

 जमीन पर बढ़ती हिंसा

कई क्षेत्रों से झड़प, तोड़फोड़ और मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं।

  • कार्यकर्ताओं के बीच टकराव
  • चुनावी रैलियों के दौरान तनाव
  • प्रशासन की बढ़ी निगरानी

हिंसा की इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।

 लोकतंत्र पर असर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • चुनावी हिंसा लोकतंत्र की सेहत के लिए खतरा है
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए शांत माहौल जरूरी
  • प्रशासन को सख्ती से कानून व्यवस्था बनाए रखनी होगी

 आगे क्या?

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे,

  • राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है
  • सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होगी
  • मतदाताओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी

बंगाल की चुनावी तस्वीर इस समय दो हिस्सों में बंटी दिख रही है—एक तरफ शब्दों की जंग, दूसरी तरफ हिंसा की चुनौती। ऐसे में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

बंगाल चुनाव में बढ़ी हिंसा और बयानबाजी | राजनीतिक टकराव तेज

अलकनंदा नदी में बहा NIT छात्र श्रीनगर में SDRF चला रही सर्च ऑपरेशन

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अलकनंदा में बहा NIT छात्र, दोस्तों के सामने हादसा; SDRF सर्च ऑपरेशन जारी

तेलंगाना का 23 वर्षीय छात्र श्रीनगर में दोस्तों संग नहाने उतरा था, तेज बहाव बना हादसे की वजह

उत्तराखंड के श्रीनगर में बड़ा हादसा सामने आया है। अलकनंदा नदी के तेज बहाव में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर का एक छात्र बह गया। घटना के बाद पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन चला रही है।

 कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, तेलंगाना निवासी 23 वर्षीय छात्र आनंद सोहन अपने चार दोस्तों के साथ नदी में नहाने उतरा था।

  • समय: शाम करीब 4 बजे
  • अचानक तेज बहाव में फंसा
  • दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन नहीं बचा सके

कुछ ही पलों में छात्र नदी की तेज धारा में ओझल हो गया।

 रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

घटना की सूचना मिलते ही:

  • पुलिस प्रशासन
  • जल पुलिस
  • SDRF टीम

मौके पर पहुंची और छात्र की तलाश शुरू कर दी गई है।

कोतवाली प्रभारी विनय कुमार के अनुसार, लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

 खतरे में नदियों में नहाना

अलकनंदा जैसी पहाड़ी नदियों में:

  • अचानक जलस्तर बढ़ सकता है
  • बहाव बेहद तेज होता है
  • किनारों पर फिसलन और गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है

विशेषज्ञ लगातार सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

यह घटना एक बार फिर चेतावनी है कि पहाड़ी नदियों में बिना सुरक्षा के उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।

अलकनंदा नदी में बहा NIT छात्र | श्रीनगर में SDRF चला रही सर्च ऑपरेशन

हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: CM धामी को पहले जत्थे के विदाई समारोह का निमंत्रण

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हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: CM धामी को पहले जत्थे के विदाई समारोह का निमंत्रण

23 मई को खुलेंगे कपाट, 20 मई को रवाना होगा पहला जत्था, सरकार ने दिए बेहतर व्यवस्थाओं के संकेत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आगामी हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 की तैयारियों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री को पहले जत्थे के विदाई समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

 कब शुरू होगी यात्रा?

  • पहला जत्था रवाना: 20 मई 2026
  • कपाट खुलेंगे: 23 मई 2026

यात्रा में शामिल होने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

 पंज प्यारों के नेतृत्व में रवाना होगा जत्था

पहले जत्थे का नेतृत्व पारंपरिक रूप से पंज प्यारों द्वारा किया जाएगा, जो सिख परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयोजन श्रद्धा और परंपरा का भव्य प्रतीक माना जाता है।

 सरकार की तैयारी पर CM धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

  • श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है
  • यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है
  • सरकार यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

 आस्था का केंद्र—हेमकुंड साहिब

श्री हेमकुंड साहिब सिख धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसे गुरु गोबिंद सिंह जी की तपोभूमि माना जाता है। हर वर्ष यहां लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय यात्रा कर दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सरकार और ट्रस्ट मिलकर इस पवित्र यात्रा को सफल और सुगम बनाने में जुटे हैं। हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 | 23 मई को खुलेंगे कपाट, CM धामी को मिला निमंत्रण