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उत्तराखंड में ड्रग्स के खिलाफ सख्ती: 15 दिन में बनेगा एक्शन प्लान, स्कूलों में एंटी-ड्रग क्लब होंगे शुरू

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उत्तराखंड में ड्रग्स के खिलाफ सख्ती: 15 दिन में बनेगा एक्शन प्लान, स्कूलों में एंटी-ड्रग क्लब होंगे शुरू

उत्तराखंड में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट (NCORD) की 11वीं बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।

 15 दिन में तैयार होगा ड्रग्स के खिलाफ रोडमैप

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि:

  • अगले 15 दिनों में राज्य और जिला स्तर का रोडमैप तैयार किया जाए
  • इसमें एनफोर्समेंट (कार्रवाई) + रिहेबिलिटेशन (पुनर्वास) दोनों शामिल होंगे
  • सभी विभाग अपनी योजना बनाकर गृह विभाग को सौंपेंगे

 सप्लाई चेन तोड़ने पर जोर

  • मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार पर कड़ी निगरानी
  • बड़ी मात्रा में पकड़े गए मामलों पर तेज कार्रवाई और फॉलोअप
  • पुलिस को ड्रग्स की सप्लाई चेन खत्म करने के निर्देश

 स्कूल-कॉलेज होंगे फोकस में

  • स्कूलों में एंटी-ड्रग क्लब बनाए जाएंगे
  • छात्रों के बीच जागरूकता अभियान चलेंगे
  • शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री पर सख्ती

 लक्ष्य: नई पीढ़ी को नशे से दूर रखना

 डी-एडिक्शन पर भी बड़ा फैसला

  • हर जिले में कम से कम एक अस्पताल में डी-एडिक्शन बेड
  • निजी नशा मुक्ति केंद्रों की सख्त जांच
  • नियम न मानने वाले सेंटर तुरंत बंद होंगे

 सर्वे और स्पेशल टीम

  • पूरे राज्य में ड्रग्स उपयोग पर सर्वे कराया जाएगा
  • गढ़वाल और कुमाऊं में डेडिकेटेड ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्त होंगे

 हेल्पलाइन 1933 का प्रचार

  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की हेल्पलाइन 1933 (मानस) का प्रचार
  • सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर जानकारी प्रदर्शित होगी

 आम लोग भी अब ड्रग्स से जुड़ी जानकारी आसानी से दे सकेंगे

 क्यों अहम है यह कदम?

  • बढ़ते नशे के खतरे पर रोक
  • युवाओं को सुरक्षित भविष्य
  • कानून व्यवस्था मजबूत
  • Uttarakhand drug action plan
  • NCORD meeting news
  • Anti drug campaign India
  • Drug helpline 1933

उत्तराखंड सरकार अब ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस मोड में नजर आ रही है।
 सख्त कानून, जागरूकता और पुनर्वास—तीनों पर एक साथ काम कर
 नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी है।

प्रखर छात्रवृत्ति योजना 2025: मेधावी छात्रों को सीएम धामी ने किया सम्मानित

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उत्तराखंड में शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘प्रखर छात्रवृत्ति योजना 2025’ के तहत मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।

यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास में दैनिक जागरण समूह द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें उन विद्यार्थियों को सम्मान मिला जो अखबार वितरण करने वाले मेहनतकश परिवारों से आते हैं।

 संघर्ष से सफलता तक की कहानी

इन छात्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद:

  • शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया
  • कठिन परिस्थितियों को मात दी
  • अपने परिवार और प्रदेश का नाम रोशन किया

 यह पहल खास इसलिए भी है क्योंकि यह उन परिवारों के बच्चों को पहचान देती है, जो अक्सर पर्दे के पीछे रह जाते हैं।

 मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने कहा:

  • कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है
  • ये विद्यार्थी समाज के लिए प्रेरणा हैं
  • अभिभावकों का संघर्ष और त्याग ही बच्चों की सफलता की नींव है

 शिक्षा पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि:

  • राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और सुधार के लिए प्रतिबद्ध है
  • मेधावी छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं जारी रहेंगी

 क्यों खास है यह पहल?

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को मंच मिला
  • मेहनत और प्रतिभा को पहचान
  • समाज में सकारात्मक संदेश
  • प्रखर छात्रवृत्ति योजना 2025
  • Uttarakhand scholarship scheme news
  • CM Dhami student सम्मान
  • Daily Jagran scholarship program

‘प्रखर छात्रवृत्ति योजना’ सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि यह उन सपनों को उड़ान देने का मंच है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य रखते हैं। ऐसे प्रयास न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को भी मजबूत करते हैं।

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल: किसकी बनेगी सरकार? आंकड़ों में दिखी बड़ी टक्कर

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पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल: किसकी बनेगी सरकार? आंकड़ों में दिखी बड़ी टक्कर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। सामने आए आंकड़े बेहद मिश्रित और चौंकाने वाले हैं, जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस की वापसी के दावे भी सामने आए हैं।

 6 एग्जिट पोल में BJP को बहुमत

आठ प्रमुख सर्वे में से छह एग्जिट पोल ऐसे हैं जो भाजपा के पक्ष में जाते नजर आ रहे हैं:

  • प्रजा पोल: BJP – 178 से 208 सीट
  • पोल डायरी, पी-मारक्यू, मैट्रिज, चाणक्य स्ट्रैटजीज, जेवीसी
     सभी ने भाजपा को बहुमत के पार दिखाया

 इन सर्वे के मुताबिक:

  • भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बना सकती है
  • लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल को झटका लग सकता है

 2 सर्वे में TMC की वापसी का दावा

हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है।

  • जनमत पोल्स:TMC – 195-205 सीट BJP – 80-90 सीट
  • पीपल्स पल्स:TMC – 177-187 सीट BJP – 95-110 सीट

 इन सर्वे के अनुसार ममता बनर्जी की पार्टी फिर से सत्ता में लौट सकती है।

 क्या कहते हैं ये आंकड़े?

  • चुनाव में कड़ी टक्कर साफ नजर आ रही है
  • वोटर्स का मूड पूरी तरह एकतरफा नहीं
  • अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े बड़े अंतर दिखा रहे हैं

 असली फैसला कब?

 एग्जिट पोल सिर्फ अनुमान होते हैं
 अंतिम नतीजे मतगणना के दिन ही साफ होंगे

  • West Bengal Exit Poll 2026
  • BJP vs TMC seats prediction
  • Mamata Banerjee vs BJP result
  • Bengal election survey results

निष्कर्ष

एग्जिट पोल्स ने यह तो साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है।
 एक तरफ भाजपा की संभावित ऐतिहासिक जीत के संकेत
 दूसरी तरफ तृणमूल की मजबूत वापसी के दावे अब सबकी नजर सिर्फ एक दिन पर टिकी है—रिजल्ट डे, जहां तय होगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

जल जीवन मिशन 2.0: उत्तराखंड में पेयजल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, 14 लाख परिवारों को होगा सीधा लाभ

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जल जीवन मिशन 2.0: उत्तराखंड में पेयजल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, 14 लाख परिवारों को होगा सीधा लाभ

उत्तराखंड में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन और राज्य सरकार के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।

 क्यों अहम है यह समझौता?

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह एमओयू राज्य में जल जीवन मिशन के कार्यों को नई गति और मजबूती देगा। खासकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में यह मिशन केवल योजना नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन से जुड़ा अभियान है।

 राज्य में:

  • करीब 14 लाख ग्रामीण परिवार लाभार्थी
  • 16,500 पेयजल योजनाएं स्वीकृत
  • अधिकांश योजनाएं पूरी, बाकी तेजी से प्रगति पर

 पहाड़ों में पानी पहुंचाना क्यों चुनौती?

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इस मिशन को और जटिल बनाती हैं:

  • दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र
  • दूरस्थ गांव
  • भूस्खलन और आपदा का खतरा

इसी वजह से यहां पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक कठिन होता है।

 जल संरक्षण पर भी बड़ा फोकस

राज्य सरकार सिर्फ पाइपलाइन नहीं, बल्कि जल स्रोत बचाने पर भी काम कर रही है

 बड़े कदम:

  • पारंपरिक स्रोत (नौले, धारे) संरक्षण
  • स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी का गठन

 उपलब्धियां:

  • 6500+ जल स्रोतों का संरक्षण
  • 3.5 मिलियन घन मीटर वर्षा जल संचयन

 1000 गांवों में जल क्रांति

जल शक्ति अभियान के तहत:

  • 1000 गांवों में तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन
  • जनभागीदारी से जल संरक्षण को बढ़ावा

 टेक्नोलॉजी का सहारा

  • डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
  • ग्लेशियर रिसर्च सेंटर
  • बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान

 लक्ष्य: हिमालय और जल स्रोतों का दीर्घकालिक संरक्षण

 केंद्र सरकार का समर्थन

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना करते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।

  • जल जीवन मिशन 2.0 उत्तराखंड
  • “हर घर जल योजना अपडेट”
  • “उत्तराखंड पेयजल योजना 2026”
  • “ग्रामीण जल सप्लाई स्कीम”

कुंभ मेला 2027:मुख्य सचिव ने जताई निर्माण कार्यों में देरी पर नाराजगी

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यह खबर उत्तराखंड में आगामी कुंभ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासन की गंभीरता और तेजी को दर्शाती है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अहम बिंदुओं पर सख्त निर्देश दिए गए।

क्या हैं मुख्य फैसले और निर्देश?

1. निर्माण कार्यों में देरी पर नाराजगी
मुख्य सचिव ने विभिन्न प्रोजेक्ट्स के शासनादेश (GO) जारी न होने पर नाराजगी जताई और सभी आपत्तियां दूर कर 3 दिन के भीतर GO जारी करने के निर्देश दिए।

2. भूमि अधिग्रहण और आवंटन
कुंभ के लिए जरूरी जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन तुरंत शुरू करने और 30 जून तक पूरा करने को कहा गया।

3. ट्रैफिक और कनेक्टिविटी प्लान

  • मेलाधिकारी, IG कुंभ और रेलवे अधिकारियों को संयुक्त बैठक कर ट्रैफिक प्लान फाइनल करने के निर्देश
  • सड़कों, जंक्शनों और स्पर मार्गों का निर्माण/मरम्मत जल्द पूरा करने पर जोर
  • आसपास के जिलों में भी पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

4. आकस्मिक (Emergency) प्लान
भीड़ और आपात स्थिति को देखते हुए अलग से आकस्मिक ट्रैफिक प्लान तैयार रखने को कहा गया।

5. स्वच्छता पर विशेष फोकस

  • पूरे मेला क्षेत्र के लिए डेडिकेटेड सैनिटेशन प्लान बनाने के निर्देश
  • पार्किंग, शौचालय, भोजन और ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर

6. सूचना और सुविधा केंद्र
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्यटक सूचना केंद्रों की संख्या बढ़ाने को कहा गया।

7. सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
कुंभ के दौरान रोज़ाना लोक संस्कृति, पौराणिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश दिए गए, ताकि उत्तराखंड की संस्कृति को वैश्विक मंच मिले।

क्या है इसका महत्व?

कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में:

  • बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर
  • सुचारु यातायात
  • स्वच्छता और सुरक्षा
  • और सांस्कृतिक प्रस्तुति

इन सभी पर एक साथ काम करना बेहद जरूरी होता है।

कुल मिलाकर

सरकार इस बार संगठित, समयबद्ध और आधुनिक प्रबंधन के साथ कुंभ मेला आयोजित करने की दिशा में काम कर रही है। साफ है कि प्रशासन इस बार कोई भी चूक नहीं चाहता और हर स्तर पर तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटा है।

वन विकास निगम का कुमाऊं में विस्तार: रजत जयंती पर CM धामी का बड़ा ऐलान

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वन विकास निगम का कुमाऊं में विस्तार: रजत जयंती पर CM धामी का बड़ा ऐलान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड वन विकास निगम के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित “रजत जयंती समारोह” में प्रतिभाग करते हुए कई अहम घोषणाएं कीं।

कुमाऊं में भी खुलेगा नया कार्यालय

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड वन विकास निगम का कार्यालय कुमाऊं मंडल में भी खोलने की घोषणा की। साथ ही वन क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन (बी-बॉक्स) को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए।

“हिमकाष्ठ” मोबाइल ऐप लॉन्च

मुख्यमंत्री ने “हिमकाष्ठ” मोबाइल ऐप का लोकार्पण भी किया। इस ऐप के जरिए:

  • लकड़ी की बिक्री ऑनलाइन होगी
  • फॉरेस्ट गुड्स की ई-नीलामी संभव होगी

उन्होंने कहा कि इस तरह की डिजिटल पहल से Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विकास निगम राज्य की अर्थव्यवस्था (Economy) और पर्यावरण (Ecology) दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

  • वैज्ञानिक वन प्रबंधन
  • टिकाऊ वन उपज
  • इको-टूरिज्म
  • वन पुनर्स्थापन

इन सभी क्षेत्रों में निगम अहम भूमिका निभा रहा है।

उल्लेखनीय उपलब्धियां

  • पिछले वर्ष निगम ने ₹167 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया
  • कुल राजस्व ₹627 करोड़ तक पहुंचा

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी के “Lifestyle for Environment” संदेश का उल्लेख करते हुए पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे प्राकृतिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

देहरादून में 76 जर्जर स्कूल भवन ध्वस्त होंगे, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा एक्शन

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देहरादून में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 76 जर्जर विद्यालय भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल की सख्ती के बाद महज 10 दिनों में 100 स्कूलों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट तैयार कर ली गई। लंबे समय से खराब हालत में पड़े इन भवनों को पहली बार निष्प्रोज्य घोषित कर कार्रवाई की जा रही है।

क्या है पूरी स्थिति?

  • कुल 79 स्कूल भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य पाए गए
    • 13 माध्यमिक विद्यालय
    • 66 प्राथमिक विद्यालय
  • 17 स्कूल आंशिक रूप से निष्प्रोज्य
  • 8 स्कूलों में ध्वस्तीकरण की जरूरत नहीं
  • 63 स्कूलों में वैकल्पिक पढ़ाई की व्यवस्था हो चुकी
  • 16 स्कूलों के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश

प्रशासन की कार्रवाई

  • ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत
  • लोक निर्माण विभाग को एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश
  • पूर्णतः जर्जर भवनों का तत्काल ध्वस्तीकरण
  • आंशिक रूप से खराब भवनों में मरम्मत और सुरक्षा उपाय

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की जान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और जोखिम वाले भवनों में पढ़ाई पूरी तरह बंद रहेगी। कुल मिलाकर, यह कार्रवाई वर्षों से लंबित समस्या पर निर्णायक कदम है, जिससे हजारों बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

फल-सब्जियों में कीटनाशक पर सख्ती: उत्तराखंड सरकार का बड़ा अभियान

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फल-सब्जियों में कीटनाशक पर सख्ती: उत्तराखंड सरकार का बड़ा अभियान फल-सब्जियों में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर उत्तराखंड सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कृषि एवं उद्यान विभाग के साथ मिलकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देश पर विभाग ने प्रदेशभर में फलों और सब्जियों के सैंपल लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच शुरू कर दी है। अब तक आम, केला, पपीता और तरबूज जैसे फलों के 95 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।

क्यों बढ़ी सख्ती?

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा किए गए सर्विलांस अभियानों में यह सामने आया है कि कई खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष तय मानकों से अधिक पाए जा रहे हैं।

  • इसका मुख्य कारण कृषि में कीटनाशकों का अवैज्ञानिक और अत्यधिक उपयोग बताया गया है
  • यह स्थिति जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है

क्या होंगे कदम?

  • किसानों के लिए जागरूकता कार्यशालाएं
  • फल-सब्जी विक्रेताओं और मंडी व्यापारियों को प्रशिक्षण
  • नियमित सैंपलिंग और लैब जांच
  • मिलावट और हानिकारक रसायनों पर सख्त कार्रवाई

उपायुक्त गणेश कंडवाल के अनुसार यह अभियान लगातार जारी रहेगा और पूरे प्रदेश को कवर किया जाएगा।

चारधाम यात्रा के बीच बढ़ी सतर्कता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान खाद्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शुद्ध भोजन मिल सके। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस साफ है—स्वस्थ खाद्य, सुरक्षित नागरिक और जागरूक किसान

महिला आक्रोश मशाल यात्रा सियासत का नया समीकरण

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देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित महिला आक्रोश मशाल यात्रा ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया। गांधी पार्क से घंटाघर तक निकाली गई इस यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर सड़कों पर उतरी मातृशक्ति ने अपने अधिकारों को लेकर मजबूत आवाज उठाई।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ जनआक्रोश है जो महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालती हैं। उन्होंने कहा कि आज की नारी जागरूक है, संगठित है और अपने अधिकारों के लिए निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीरता की कमी का आरोप लगाया और कहा कि अब देश की महिलाएं सब समझ चुकी हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी।

उन्होंने केंद्र सरकार के महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब नीतियां केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई दे रहा है।

इस आयोजन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में महिला शक्ति न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी निर्णायक भूमिका निभाने जा रही है।

शिक्षा में समान अवसर पर जोर: CM धामी का बड़ा बयान

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कहा कि प्रदेश में शिक्षा को लेकर सरकार समान अवसर और समावेशी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एआई जैसे क्षेत्रों का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, शिक्षा के आधार पर समाज को बांटना सही नहीं है और सरकार का उद्देश्य है कि हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम करते हुए समाज में सद्भाव बनाए रखने और सभी को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के मामले में न अल्पसंख्यक और न बहुसंख्यक—सभी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

मदरसा शिक्षा में सुधार पर जोर

उन्होंने बताया कि मदरसा बोर्ड के माध्यम से ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों को भी शामिल किया जा सके। इसका उद्देश्य बच्चों को भविष्य के अनुरूप कौशल प्रदान करना है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर भी फोकस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी उनकी मांगों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस समावेशी शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण को एक साथ आगे बढ़ाने पर है।