देहरादून में 76 जर्जर स्कूल भवन ध्वस्त होंगे, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा एक्शन
महिला आक्रोश मशाल यात्रा सियासत का नया समीकरण
शिक्षा में समान अवसर पर जोर: CM धामी का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कहा कि प्रदेश में शिक्षा को लेकर सरकार समान अवसर और समावेशी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एआई जैसे क्षेत्रों का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, शिक्षा के आधार पर समाज को बांटना सही नहीं है और सरकार का उद्देश्य है कि हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम करते हुए समाज में सद्भाव बनाए रखने और सभी को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा के मामले में न अल्पसंख्यक और न बहुसंख्यक—सभी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
मदरसा शिक्षा में सुधार पर जोर
उन्होंने बताया कि मदरसा बोर्ड के माध्यम से ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों को भी शामिल किया जा सके। इसका उद्देश्य बच्चों को भविष्य के अनुरूप कौशल प्रदान करना है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर भी फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी उनकी मांगों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस समावेशी शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण को एक साथ आगे बढ़ाने पर है।
विकास का विस्तार, विश्वास का संचार काशी से हो रहा ‘नए भारत’ का संकल्प साकार
विकास का विस्तार, विश्वास का संचार” के संदेश के साथ नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में ₹6,330 करोड़ से अधिक की 163 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
यह आयोजन ‘नए भारत’ के संकल्प को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास से जुड़ी कई योजनाओं को धरातल पर उतारा गया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनों (बनारस–पुणे और अयोध्या–मुंबई) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे विभिन्न राज्यों के बीच आवागमन और कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही बनास डेयरी से जुड़े 3,21,813 दुग्ध उत्पादकों को बोनस का हस्तांतरण भी किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिला।
कार्यक्रम में आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम काशी से देशभर में विकास, रोजगार और विश्वास के संदेश को आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण पर राजनीति नहीं: CM धामी का बड़ा बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए।
उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे शीघ्र लागू करने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड की महान महिला विभूतियों जैसे गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण और अन्य को नमन करते हुए कहा कि ये सभी नारी शक्ति और सामाजिक चेतना की प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्वरूप माना गया है—माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की आराधना की जाती है। इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ नीति निर्माण में उनकी निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यह देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देने की दिशा में आवश्यक पहल है।
केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें:
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
- सुकन्या समृद्धि योजना
- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना
- स्वच्छ भारत मिशन
- तीन तलाक के खिलाफ कानून
उन्होंने कहा कि इन पहलों से महिलाओं की स्थिति में व्यापक सुधार आया है और उन्हें सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा मिली है।
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है:
- स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा
- ब्याज मुक्त ऋण
- महिला उद्यमिता योजनाएं
- सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण
- सहकारी समितियों में 33% आरक्षण
उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाखों महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में सभी दलों से अपील की कि वे महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाएं, ताकि देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार मिल सके।
राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत सात नेता अब भाजपा सांसद
राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत सात नेता अब भाजपा सांसद
राज्यसभा में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, क्योंकि आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से सदन का अंकगणित प्रभावित हुआ है और सियासी माहौल में नई चर्चा शुरू हो गई है।
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप की स्थिति कमजोर हो गई है। संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सातों सांसदों को अब भाजपा सदस्य के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
पहले राज्यसभा में आप के 10 सांसद थे, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गए हैं। वहीं इस राजनीतिक बदलाव का सीधा फायदा भाजपा को मिला है, जिसकी संख्या 106 से बढ़कर 113 सांसदों तक पहुंच गई है, जिससे सदन में उसकी पकड़ और मजबूत हो गई है।
विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेला का भव्य आयोजन
जनपद चमोली के सलूड-डूंगरा गांव में रविवार को विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेला का भव्य आयोजन पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया।
रामायण की मूल कथा और उत्तराखंड की प्राचीन मुखौटा शैली पर आधारित यह अनूठा लोकनाट्य अपनी जीवंत प्रस्तुति, लोकगीतों, नृत्य और धार्मिक परंपराओं के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है। मेले के दौरान पूरा गांव उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया और हर ओर लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार भी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि ‘रम्माण’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस धरोहर को संरक्षित और आगे बढ़ाने में स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दिल्ली से भागे देहरादून में हांफे नहीं मिली गर्मी से राहत
दिल्ली से राहत की उम्मीद लेकर देहरादून पहुंचे लोगों को इस बार मौसम ने निराश कर दिया।
दिल्ली में जहां तापमान 44°C के पार पहुंच गया, वहीं देहरादून भी पीछे नहीं रहा और पारा 40°C के करीब पहुंच गया। आंकड़ों में थोड़ा अंतर जरूर था, लेकिन गर्मी की तीव्रता लगभग समान महसूस हुई।
वीकेंड पर हमेशा की तरह बड़ी संख्या में दिल्ली-एनसीआर के लोग ठंडक की तलाश में देहरादून और आसपास के इलाकों में पहुंचे। बेहतर कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे के कारण अब यह सफर महज 2.5 से 3 घंटे का रह गया है, जिससे पर्यटकों की संख्या और बढ़ गई है।
हालांकि, इस बार देहरादून में भी दिन के समय तेज धूप और लू जैसी स्थिति बनी रही, जबकि रात में भी गर्म हवाओं ने राहत नहीं दी। शहर में बढ़ते निर्माण कार्यों से उड़ती धूल ने माहौल को और अधिक गर्म और असहज बना दिया, जिससे लोगों को एनसीआर जैसा ही अनुभव हुआ।
स्थानीय लोगों ने दोपहर में घरों से बाहर निकलने से परहेज किया, जबकि शाम के समय राजपुर रोड पर हलचल जरूर देखने को मिली। कुल मिलाकर, जो देहरादून कभी “कूल एस्केप” माना जाता था, वहां अब अप्रैल के अंत में ही मई-जून जैसी गर्मी महसूस होने लगी है—जो बदलते मौसम और शहरीकरण का साफ संकेत है।











