Wednesday, March 4, 2026
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ग्रीन बोनस उत्तराखंड को मिले सांसद ने की केंद्र से डिमांड

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ग्रीन बोनस उत्तराखंड को मिले सांसद ने की केंद्र से डिमांड

उत्तर-पूर्व के राज्यो की तरह ही उत्तराखंड की भौगोलिक स्तिथि है उन्ही की तर्ज पर विषेश पैकेज, ग्रीन बोनस उत्तराखंड को दिया जाना चाहिए:डा. नरेश बंसल (राज्यसभा सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष)*

राज्य की आबादी संपूर्ण आठ करोड़ से अधिक मानते हुए इसके अनुपात मे आर्थिक साहयता और योजनाओ का लाभ दे व ग्रीन बोनस दे और औद्योगिक पैकेज को बहाल करे: डा. नरेश बंसल (राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष भाजपा एवं सासंद राज्यसभा)

भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष व सासंद राज्य सभा डा. नरेश बंसल ने राज्यसभा मे शून्यकाल मे उत्तराखंड से संबंधित एक गंभीर व जनहित का विषय उठाया।

डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है,उत्तराखंड आदरणीय अटल जी ने दिया व माननीय नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व मे डबल इंजन की सरकार मे मुख्य मंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा उसे संवारने का काम निरंतर जारी है।उन्होने कहा कि चार धाम पुर्ननिर्माण हो,आल वेदर रोड,एयर कनेक्टिविटी,रोड-रेल कनेक्टिविटी हो बहुत सी योजनाओ का लाभ मोदी सरकार मे उत्तराखंड वासियो को मिल रहा है ।

डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्यो की भौगोलिक परिस्थिति देश के बाकी राज्यो से अलग है।यहां जहां एक और प्राकृतिक सौंदर्य व सम्पदा की बहुतायत है व पर्यावरण स्वच्छ है दूसरी तरफ की विषम समस्या भी है।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि हिमालयी राज्यो के सतत विकास के लिए स्वतंत्र नीति बनाने की मांग लम्बे समय से चल रही है।हिमालयी राज्यो की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सो से अलग है विषम भौगोलिक हालात की वजह से यहां विकास काफी प्रभावित होता है,योजनाओ को पूरा होने मे समय लगता है कई परियोजनाए लम्बे समय से लटकी पड़ी है ।जो कार्य मैदानी जिलो मे सहजता से हो जाता है वह पर्वतीय राज्यो मे श्रम व आर्थिक लिहाज से काफी मुश्किल हो जाता है।पर्वतीय राज्यो की भौगोलिक और सामाजिक संरचना के अनुसार विकास की प्रथक नीति बननी अति आवश्यक है।
उत्तराखंड इस मुद्दे को शुरू से उठाता रहा है।

डा.नरेश बंसल ने सदन को बताया कि राज्य की सामान्यतः आबादी 1.20 करोड़ है लेकिन पर्यटन, विभिन्न धार्मिक यात्राओ, पर्व त्योहार पर आने वाले श्रद्धालुओ की संख्या को जोड़ा जाए तो यह आठ करोड़ से भी ज्यादा हो जाती है।राज्य के इतनी बड़ी आबादी के लिए बुनियादी सुविधाओ की व्यवस्था करनी होती है।

डा. नरेश बंसल ने सदन मे बताया कि दूसरी और पिछले एक दशक से ज्यादा से उत्तराखंड की देश को अपनी पर्यावरणीय सेवाओ के लिए केन्द्र सरकार से विषेश पैकेज व ग्रीन बोनस की मांग करता रहा है।उत्तराखंड का वनाच्छादित क्षेत्र, ग्लेशियर,सदानीरा नदियां उत्तराखंड से ज्यादा लाभ देश के अन्य भागो को देती है ।वैश्विक पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ता है ।एक आकलन के अनुसार उत्तराखंड हर वर्ष अपनी जैव विविधता के जरिए देश को 95हजार 112 करोड़ रूपये की सेवाए देता है।जहां उत्तराखंड के पास इतनी प्राकृतिक संपदा है ,वही विकास की राह मे वह पिछड़ रहा है।इसकी भरपाई ग्रीन बोनस से ही बनती है।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखंड का विषेश पैकेज जो अटल जी ने दिया था वो तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया,उत्तराखंड मे तेजी से औद्योगिकीकरण हो सकता है अगर यह प्रोत्साहन मिले तो,उत्तर-पूर्व के राज्यो की तरह ही उत्तराखंड की भौगोलिक स्तिथि है उन्ही की तर्ज पर विषेश पैकेज उत्तराखंड को दिया जाना चाहिए।

डा. नरेश बंसल राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष भाजपा एवं सासंद राज्य सभा ने सदन के माध्यम से सरकार से निवेदन किया कि राज्य की आबादी संपूर्ण आठ करोड़ से अधिक मानते हुए इसके अनुपात मे आर्थिक साहयता और योजनाओ का लाभ दे व ग्रीन बोनस दे और औद्योगिक पैकेज को बहाल करे।

पर्वतीय शैली के आधार पर हो पंचायत भवनों का निर्माण

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पर्वतीय शैली के आधार पर हो पंचायत भवनों का निर्माण

प्रत्येक विकासखण्ड में 5-5 गांवों को बनाया जाए आदर्श ग्राम -मुख्यमंत्री

ग्राम चौपालों के आयोजन में उच्चाधिकारी भी हों शामिल।

पंचायत भवनों के निर्माण के 10 लाख की धनराशि को बढ़ाकर 20 लाख रूपये किये जाने के मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश ।

गांवों के सुनियोजित विकास के लिए प्रत्येक विकासखण्ड में 5-5 गांवों को आदर्श ग्राम बनाने की दिशा में कार्य किये जाएं। देश के शीर्ष 100 आदर्श गांवों की श्रेणी में उत्तराखण्ड के 10 गांवों के नाम भी शामिल हों, इसके लिए गावों के समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किये जाएं। ग्राम चौपाल के आयोजन में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जनपदों में जिलाधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया जाए तथा ग्राम पंचायतों के प्रबुद्धजनों के साथ बैठकर गांवों की विकास योजनाओं पर कार्य किया जाए। ग्राम सभाओं के स्थापना दिवस उत्सव के रूप में मनाये जाए, इनमें उन गांवों के प्रवासी लोगों को प्रतिभाग करने के लिए विशेष रूप से प्रतिभागी बनाया जाए। यह बात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में पंचायतीराज विभाग की समीक्षा के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि मानक तय कर पंचायत भवनों का निर्माण किया जाए। ग्राम पंचायतों में जो भी पंचायत भवन बनाये जा रहे हैं, वे पर्वतीय शैली में बनाये जाय, जिसमें उत्तराखण्ड की विरासत की झलक हो। पंचायत भवनों के लिए उचित स्थलों का चयन किया जाए, ताकि उनका ग्राम पंचायतों में पूर्णतः उपयोग हो सके। पंचायत भवनों के निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत की जा रही 10 लाख की धनराशि को बढ़ाकर 20 लाख रूपये करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। गांवों में सड़क निर्माण के समय नालियां भी बनाई जाय, ताकि जल निकासी की समस्या न हो। ग्राम पंचायतों में ओपन जिम और पार्कों की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सेना और अर्द्धसैन्य बलों के शहीदों के नाम पर उनके गांवों में द्वार, स्कूल और पंचायत भवनों के नाम रखे जाएं और गांवों में शिलापटों पर शहीदों के नाम अंकित करने की व्यवस्था बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि गांवों के विकास के लिए 15वें वित्त आयोग से राज्य को प्राप्त धनराशि का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए। स्वच्छता, कूड़ा निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि गांवों के विकास के लिए जो भी योजनाएं बनाई जाए, धरातल पर पहले उसका आंकलन किया जाए। सभी ग्राम पंचायतों में कम्प्यूटर और हाई स्पीड इन्टरनेट कनेक्टिविटी की व्यवस्था की जाए।

कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज ने कहा कि गांवों के विकास के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा दिया जाए। ग्राम पंचायतों में हो रहे कार्यों की वरिष्ठ अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने सभी पंचायतों की परिसम्पतियों की जी.आई.एस मैपिंग करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मल्टी-लेवल पार्किंग के निर्माण से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उचित इस्तेमाल और देख-रेख हो। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि से गांवों के विकास के लिए निर्धारित मानकों के हिसाब से तेजी से कार्य किये जाएं।

बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव पंचायतीराज चन्द्रेश यादव, अपर सचिव आलोक कुमार पाण्डेय, निदेशक पंचायतीराज निधि यादव, निदेशक सेतु डॉ. मनोज पंत उपस्थित थे।

दीपक रावत के निरीक्षण में डॉक्टर नदारद

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दीपक रावत के निरीक्षण में डॉक्टर नदारद

सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय में पीपीपी मोड पर संचालित डायलिसिस केन्द्र में चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर आयुक्त दीपक रावत ने कडी नाराजगी व्यक्त की और प्रमुख अधीक्षक बेस को नियमित मानिटरिंग करने के निर्देश दिये।
आयुक्त दीपक रावत ने शुक्रवार को डायलिसिस केन्द्र के निरीक्षण के दौरान चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर एक माह का सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिये ताकि यह पता चल सके कि चिकित्सक कब केन्द्र में आ रहे है।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने पाया कि डायलिसिस केन्द्र में 25 बैड पर मराजों की डायलिसिस की जाती है लेकिन बैड की स्थिति काफी खराब होने पर आयुक्त ने केन्द्र संचालक को एक सप्ताह के भीतर मरीजों के बैड ठीक कराने के निर्देश दिये साथ ही प्रमुख अधीक्षक बेस को मानिटरिंग कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये। वर्तमान में डायलिसिस केन्द्र में प्रतिदिन लगभग 70 लोगों की डायलसिस की जाती है।

आयुक्त ने प्रमुख अधीक्षक बेस को निर्देश दिये कि डायलिसिस सेंटर की व्यवस्थाओं में कोई भी कमी है तो उसकी लिखित सूचना महानिदेशक स्वास्थ्य के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को देना सुनिश्चित करें ताकि डायलिसिस केन्द्र की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा सके।

बेस चिकित्सालय निरीक्षण के दौरान मौके पर तीनों गेटों पर सुरक्षा कर्मी नदारत पाये गये और बुलाने के पश्चात काफी देर के बार उपस्थित हुये जो सुरक्षा मानकों के अनुसार ड्रेस में भी नही पाये गये। जिस पर आयुक्त ने कडी आपत्ति जताई और प्रमुख अधीक्षक को सुरक्षा कर्मियों की नियमित मानिटरिंग के साथ ही सुरक्षा कर्मी के ड्रैस कोड को भी चैक करने के निर्देश दिये। इसके पश्चात आयुक्त द्वारा अटल आयुष्मान कक्ष का निरीक्षण किया गया। आयुक्त ने आयुष्मान के कक्ष के निरीक्षण के दौरान कहा कि सभी लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाय। उन्होंने कहा जिन लोगों के अभिलेख में कोई त्रुटि है तो उनका निस्तारण आयुष्मान कार्ड बनाये जांए। प्रमुख अधीक्षक बेस के कार्यालय के निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने कहा कि मुख्यालय के साथ ही अन्य कार्यालयों मे सभी प्रकार के पत्राचार ई-मेल के माध्यम से किये जाएं।

निरीक्षण के दौरान बेस चिकित्सालय गेट के निकट आई लैंस ऑप्टिकल की दुकान द्वारा नाले व गेट पर अतिक्रमण कर टिन शैड बना दिया है जिस पर आयुक्त ने सायं 5 बजे तक टिन शैड हटाने के निर्देश दिये। इसके पश्चात श्री रावत ने केएमवीएन पार्किग के निकट सडक के निरीक्षण के दौरान लोगों द्वारा सडक पर वाहनों को पार्क किया था जिस पर उन्होंने चालान की कार्यवाही करने के निर्देश सीओ को दिये।

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त विशाल मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी, सचिव विकास प्राधिकरण बीएन शुक्ल, सहायक नगर आयुक्त तुषार सैनी आदि उपस्थित थे।

डीएम ने मांगे प्रस्ताव 15 दिनों का समय

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डीएम ने मांगे प्रस्ताव 15 दिनों का समय

जिलाधिकारी वंदना सिंह ने शुक्रवार को कैंप कार्यालय हल्द्वानी में वित्तीय वर्ष 2024-25 के अन्तर्गत दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त विभागीय परिसंपत्तियों की मरम्मत और पुननिर्माण कार्यों के संबंध में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया। बैठक में जिलाधिकारी ने बरसात के दौरान आपदा से नष्ट हुई सार्वजनिक परिसंपत्तियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें। कहा कि बरसात के सीजन में सड़कों, काज्वे, दीवार, कलमठ,पेय़जल लाइन आदि में ज्यादा नुकसान देखने को मिलता है।

उन्होंने सभी विभाग के अधिकारियों को बरसात में हुए नुकसान का मुआयना-सर्वे कर 15 दिन के भीतर प्रस्ताव देने की बात कही जिससे समय से बजट निर्गत किया जा सके। आपदा से प्रभावित क्षेत्रों की परिसंपत्तियों की मरम्मत के कार्य को प्राथमिकता से कराने की बात कही।

जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित विभाग 15 दिन के भीतर क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के प्रस्ताव अनिवार्य रूप से भेज दें। साथ ही मानकों को पूरा ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने उपजिलाधिकारियों को आपदा के तहत प्रस्ताव या अन्य कागजी कार्यवाही हेतु प्रत्येक सप्ताह में तिथि और समय निर्धारित करने के निर्देश दिए। जिससे विभागीय अधिकारियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

बैठक में अपर ज़िलाधिकारी पी आर चौहान, ईई लोनिवि नैनीताल रत्नेश सक्सेना, अशोक चौधरी, जल संस्थान रवि शंकर लोशाली सहित स्मस्त बीडीओ और विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की सहायता हेतु मंदिर समिति भी आयी आगे

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केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की सहायता हेतु मंदिर समिति भी आयी आगे

श्री केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की सहायता हेतु प्रशासन के साथ श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति भी आगे आयी

  • मंदिर समिति ने तीर्थयात्रियों को फल वितरित किये,जिला -प्रशासन, गढ़वाल मंडल विकास निगम ने उपलब्ध कराया भोजन एवं पीने का पानी श्री केदारनाथ धाम: 2 अगस्त। श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति ने केदारनाथ क्षेत्र के जंगलचट्टी (लिनचोली) में बुधवार 31 जुलाई बादल फटने के बाद श्री केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की सहायता हेतु कदम उठाये है।
    श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय के अनुसार तीर्थयात्रियों को मंदिर में दर्शन के पश्चात उचित सहायता मार्गदर्शन दिया गया है कि बरसात के दौरान सुरक्षित स्थानों में रूके।
    उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मार्ग की स्थिति ठीक होने
    एवं मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखते हुए यात्रा करें।

श्री केदारनाथ धाम से श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी/ श्री केदारनाथ विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया है कि श्री केदारनाथ मंदिर में बीते बुधवार देर शाम 31जुलाई दर्शन हेतु 2965 तीर्थयात्री पहुंचे थे उनमें से कुछ वापस गुप्तकाशी सकुशल पहुंच गये थे कुछ तीर्थयात्रियों को लिनचौली से रैस्क्यू कर प्रशासन द्वारा हैलीकॉप्टर से गुप्तकाशी पहुंचाया गया। आज भी एमआई-17 ने उड़ान भरी तथा 15 तीर्थयात्रियों को गौचर तक पहुंचाया गया वहीं केदारनाथ में मौसम बदल रहा है इसलिए हैली सेवाएं समय से नहीं चल रही हैं। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने अवगत कराया कि मंदिर समिति मुख्य कार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह अपने स्तर पर केदारनाथ धाम में मौजूद तीर्थयात्रियों की समस्याओं को सुन रहे हैं तथा यात्रियों को हो रही परेशानियों का निराकरण भी कर रहे हैं।

अभी भी श्री केदारनाथ धाम में 400 से अधिक तीर्थयात्री मौजूद हैं।उन्होंने बताया कि मंदिर समिति द्वारा तीर्थयात्रियों का यथा संभव ध्यान रखा जा रहा है आज मंदिर समिति की ओर से तीर्थयात्रियों को केदारनाथ हैलीपेड पर फल‌ वितरित किये।जबकि प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए पीने का पानी, बिस्कुट, नमकीन उपलब्ध कराया। गढ़वाल मंडल विकास निगम ने तीर्थयात्रियों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराया है।

जिलाधिकारी सौरभ गहरवार, पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे सहित जिला प्रशासन पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के निर्देशन में रेस्क्यू कार्यों का संचालन हो रहा है।

मंदिर समिति की ओर से आज वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, प्रदीप सेमवाल, कुलदीप धर्म्वाण, ललित त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।

राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में विज्ञान संकाय को मिली स्वीकृति

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राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में विज्ञान संकाय को मिली स्वीकृति

सरकार ने छह असिस्टेंट प्रोफेसर सहित 14 पदों को दी मंजूरी

उच्च शिक्षा मंत्री डा. रावत बोले, छात्रों को नहीं जाना होगा घर से दूर

उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित गुरू गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में विज्ञान संकाय की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने महाविद्यालय में विज्ञान वर्ग की कक्षाओं के संचालन के लिये छह असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 14 पदों के सृजन की भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। शासन स्तर से शीघ्र ही इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया जायेगा। बिथ्याणी में विज्ञान संकाय खुलने से अब बीएससी करने वाले छात्र-छात्राओं को निजी कॉलेज या फिर अन्य शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु सकारात्मक कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित गुरू गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय की स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही महाविद्यालय में विज्ञान वर्ग की कक्षाओं के सुचारू संचालन हेतु छह असिस्टेंट प्रोफेसर तथा आठ अन्य पदों के सृजन की भी मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसमें गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा कम्प्यूटर विज्ञान के एक-एक पद शामिल है, जबकि प्रयोगशाला सहायक एवं प्रयोगशाला परिचर के चार-चार पद शामिल है। जिसमें प्रयोगशाला सहायक एवं प्रयोगशाला परिचर के पदों को नियम मानदेय के आधार पर आउटसोर्स के माध्यम से भरा जायेगा। जिसका शासनादेश शीघ्र ही शासन स्तर से जारी कर दिया जायेगा।

शासनादेश जारी होने के उपरांत महाविद्यालय में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से बीएससी पीसीएम तथा बीएससी जेडबीसी में स्नातक प्रथम वर्ष की कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जायेगा। डॉ. रावत ने बताया कि बिथ्याणी महाविद्यालय में विज्ञान संकाय खोलने की मांग लम्बे समय से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय जनता करती आ रही थी, जिसे पूरा कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में विज्ञान संकाय खुलने से दूरस्थ क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को विज्ञान वर्ग के विषयों की बेहतर उच्च शिक्षा प्राप्त होगी, साथ ही स्थानीय युवाओं को बीएससी करने के लिये घर से दूर निजी कॉलेजों तथा ऋषिकेश या देहरादून जाने की आवश्यकता नहीं पडेगी। डॉ रावत ने बताया कि बिथ्याणी महाविद्यालय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ जी के गुरु व नाथ सम्प्रदाय के शीर्ष योगी गुरु गोरखनाथ के नाम से संचालित है, जिसका संचालन पूर्व में प्रबंधन तंत्र द्वारा किया जा रहा था, बाद में महाविद्यालय का राजकीयकरण कर इसे राज्य सरकार के अधीन कर दिया गया है।

केदारनाथ लिंचोली एवं भीमबली से एयर लिफ्ट हुए तीर्थ यात्री

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देहरादून केदारघाटी में अत्यधिक बारिश के कारण जगह -जगह अवरूद्ध हुए केदारनाथ यात्रा मार्ग में फंसे तीर्थयात्रियों को जिलाधिकारी सौरभ गहरवार के निर्देशन में रेस्क्यू टीमों एवं जिला प्रशासन द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ दूसरे दिन शुक्रवार को रेस्क्यू कार्य कर शुरू कर दिया गया है। बीती देर रात तक रेस्क्यू अभियान जारी रहा।

शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे तक लिंचोली एवं भीमबली से एयर लिफ्ट कर लगभग 480 यात्रियों को रेस्क्यू कर लिया गया है। वहीं गौरीकुंड- सोनप्रयाग के बीच लगभग 1500 यात्रियों को सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। इसके साथ ही एनडीआरएफ एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा घायल तीर्थ यात्रियों का उपचार किया जा रहा है।

अपर मुख्य अधिकारी केदारनाथ विकास प्राधिकरण योगेंद्र सिंह ने अवगत कराया कि केदारनाथ धाम में मौजूद तीर्थ यात्रियों को सुबह मुख्य हेलीपैड पर पहुंचा दिया गया है। यहीं से एमआई 17 से 15 तीर्थ यात्रियों को गौचर हैलीपैड रेस्क्यू किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि मौसम खराब होने के कारण एमआई एवं चिनूक विमान अभी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।

केदारनाथ में मौजूद करीब 450 तीर्थ यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से लगातार राहत सामाग्री, फूड पैकेट्स एवं भोजन उपलब्ध करवाया गया। वहीं बीकेटीसी द्वारा तीर्थ यात्रियों को फल वितरित किए गए। बताया कि मौसम ठीक होते ही केदारनाथ में मौजूद यात्रियों को रेस्क्यू किया जाएगा।
उधर जिलाधिकारी सौरभ गहरवार, पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे, मुख्य विकास अधिकारी जीएस खाती सहित अन्य संबंधित अधिकारी सोनप्रयाग- गौरीकुंड मार्ग सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं।

इस दौरान जिलाधिकारी ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ एवं अन्य सुरक्षा बलों की हौसला अफजाई करते हुए सभी तीर्थ यात्रियों का कुशलता के साथ सुरक्षित रेस्क्यू करने के निर्देश दिए। साथ ही आपदा के चलते क्षेत्र में हुई क्षति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

केदारनाथ प्रतिष्ठा रक्षा यात्रा पर लगा ब्रेक

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सीएम धामी ने दिए डीएम को निर्देश, आपदा प्रभावित क्षेत्रो के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर करें शिफ्ट

देहरादून उत्तराखंड की आपदा ने कांग्रेस की केदारनाथ प्रतिष्ठा रक्षा यात्रा पर ब्रेक लगा दिया है Kedarnath Sanklap Yatra postponed सियासत का रंग ले चुकी यात्रा पर कांग्रेस के राहुल गाँधी निर्देश के बाद यात्रा को फ़िलहाल पोस्टपोन किया गया है पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोनप्रयाग में आपदा से हुए नुकसान को देखते हुए यात्रा में आगे जाने का कार्यक्रम पहले ही स्थगित कर दिया। हरीश रावत ने कहा, केदारनाथ क्षेत्र में भयंकर आपदा आई है। बड़ी संख्या में यात्री फंसे हैं। उनका बचाव कार्य चल रहा है। उन्होंने सरकार आग्रह किया कि राज्य की संपूर्ण शक्ति लगाकर बचाव कार्य करें।

उत्तराखंड में हरिद्वार से शुरू हुई केदारनाथ प्रतिष्ठा रक्षा यात्रा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा के नेतृत्व में शुरू हुई थी यात्रा को लेकर सियासत का रंग ऐसे चढ़ा जैसे जैसे यात्रा केदारनाथ की तरफ बढ़ती गई सियासत का रंग भी चढ़ता चला गया यात्रा कांग्रेस यात्रा होड़ लेने की ऐसी तस्वीर बनी जैसे मानो कुर्सी की लड़ाई को लेकर जंग चल रही हो। मुद्दा केदारनाथ मंदिर से जुड़ा हुआ था जिसको केदारनाथ उपचुनाव तक जिन्दा रखने की असली चुनौती कांग्रेस की थी

केदारनाथ यात्रा को लेकर आपदा के आने से चार धाम यात्रा सरकार ने फिलहाल रोक दी है ऐसे में दिल्ली दरबार से आने वाले एक निर्देश के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी यात्रा को रोक दी है यात्रा सीतापुर तक पहुंच गई थी और शुक्रवार को सीतापुर से आगे रवाना होनी थी। आपदा से सामान्य स्थिति होने के बाद कांग्रेस फिर से सीतापुर से आगे की यात्रा शुरू करेगी।

नीट-यूजी 2024 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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नीट-यूजी 2024

नीट-यूजी 2024 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट-यूजी 2024 के पेपर में कोई व्यवस्थागत उल्लंघन नहीं हुआ है। लीक सिर्फ पटना और हजारीबाग तक सीमित था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र द्वारा गठित समिति परीक्षा प्रणाली की साइबर सुरक्षा में संभावित कमजोरियों की पहचान करने, जांच बढ़ाने की प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी निगरानी के लिए तकनीकी प्रगति के लिए एसओपी तैयार करने पर भी विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को विवादों से घिरे NEET-UG 2024 को रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई डेटा नहीं है, जो प्रश्नपत्र के व्यवस्थित रूप से लीक होने और अन्य गड़बड़ियों का संकेत दे। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा, संजय हेगड़े और मैथ्यूज नेदुमप्रा सहित वकीलों की दलीलें करीब चार दिनों तक सुनीं थीं।

अफसरों को सीएम धामी की डैडलाइन

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सड़क निर्माण सम्बन्धी कार्यों की टेंडर प्रक्रिया प्रारम्भ कर मानसून के बाद हर हाल में 30 सितम्बर से निर्माण कार्यों में लायी जाए तेजी,निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का रखा जाय विशेष ध्यान,आपदा के दौरान अवरूद्ध हो रही सड़कों की की जाए अविलम्ब मरम्मत,सड़क मरम्मत के लिये अधिकृत जे.सी.बी. पर जी.पी.एस. व्यवस्था को बनाया जाये प्रभावी

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के किनारे क्रस बेरियर के साथ पेड लगाने पर दिया जाए ध्यान,सड़क निर्माण से जुडे ठेकेदारों तथा जे.सी.बी ठेकेदारों के लम्बित देयकों का अविलम्ब किया जाए भुगतान,सड़कों पर डिवाइडर, रिफलेक्टर, साइनेज व लाइटिंग की व्यवस्था के भी मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को सचिवालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा की। उन्होंने 30 अक्टूबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढ़ा मुक्त किये जाने के निर्देश देते हुए सड़क निर्माण सम्बन्धी कार्यों की टेंडर प्रक्रिया प्रारम्भ कर मानसून के बाद हर हाल में 30 सितम्बर से निर्माण कार्यों में तेजी लाये जाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा आपदा के दौरान अवरूद्ध हो रही सड़कों की अविलम्ब मरम्मत के भी निर्देश दिए हैं। सड़क मरम्मत के लिये अधिकृत जे.सी.बी. पर जी.पी.एस. व्यवस्था को प्रभावी बनाये जाने, पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के किनारे क्रस बेरियर के साथ पेड लगाने, तथा सड़कों पर डिवाइडर, रिफलेक्टर, साइनेज व लाइटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण से जुडे ठेकेदारों तथा जे.सी.बी ठेकेदारों के लम्बित देयकों का अविलम्ब भुगतान के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेहतर रोड कनेक्टिविटी के लिये सड़कों के निर्माण में तेजी लायी जानी होगी। इसके लिये टेण्डर एवं डी.पी.आर. तैयार करने में तकनीकि दक्षता का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों आदि के निर्माण में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत निर्मित होने वाली सड़कों पर भी समयबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये है। ट्रॉली पर आवाजाही की निर्भरता कम करने के लिये इन स्थानों पर मोटर व पैदल पुलों के निर्माण में तेजी लाये जाने पर भी मुख्यमंत्री ने बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली देहरादून एलिवेटेड रोड के तैयार होने के बाद देहरादून शहर पर बढने वाले यातायात के दबाव की चुनौती का सामना करने के लिये रिंग रोड सहित शहर की प्रस्तावित अन्य सड़कों एवं एलिवेटेड रोड आदि की योजना पर तेजी से कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन एवं तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। राज्य में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल तेजी से वृद्धि हो रही है। इसके लिए रोड कनेक्टिविटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़कों के विस्तार के लिए हमें तेजी से आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने पी.एम.जी.एस.वाई. की सड़कों की मरम्मत में आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिये इसकी स्पष्ट गाइड लाईन तैयार किये जाने को कहा। उन्होंने कहा कि सुगम और सुरक्षित यातायात के साथ आमजन के जीवन को सहज, सुगम और समृद्ध बनाने में सड़कों का बडा योगदान रहता है। निर्माण कार्यों से इकोलॉजी के दुष्प्रभावों को कम करने के लिये सड़क निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग पर ध्यान दिये जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।

सचिव लोक निर्माण डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रिस्पना एवं बिंदाल नदी पर एलिवेटेड रोड निर्माण, ऋषिकेश बाईपास, देहरादून मसूरी संयोजकता, देहरादून व हल्द्वानी शहर के लिए रिंग रोड आदि से संबंधित प्रस्तावों की जानकारी दी। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में सड़कों के निर्माण आदि की भी जानकारी दी।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. बंशीधर तिवारी, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग डी. के. यादव, अधीक्षण अभियंता एन.एच.ए.आई. विशाल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।