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पाकिस्तानी महिला बनी सरकारी शिक्षक खुलासे के बाद निलंबित, रिपोर्ट दर्ज

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रामपुर जिले में एक पाकिस्तानी महिला, शुमायला खान, को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। शुमायला ने 2015 में बरेली के फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी शुरू की थी, और वह तब से वेतन प्राप्त कर रही थी।

शुमायला ने नागरिकता और अन्य दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया था, जिससे वह नौकरी प्राप्त कर सकी। जब इसकी शिकायत की गई, तो संबंधित अधिकारियों ने उसकी दस्तावेजों की जांच की, और पाया कि उसका सामान्य निवास प्रमाणपत्र त्रुटिपूर्ण था। इसके बाद एसडीएम की जांच में यह साबित हुआ कि शुमायला पाकिस्तानी नागरिक है, और उसने जानबूझकर अपनी नागरिकता छुपाई थी।

बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) ने शुमायला को 3 अक्टूबर 2024 को निलंबित कर दिया, और अब उसके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज़ों के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शुमायला की गिरफ्तारी की संभावना है।

इस घटना में शुमायला को 9 साल तक शिक्षक की नौकरी मिलती रही, जबकि उसने लाखों रुपये का वेतन भी लिया। अब उसे उसकी नियुक्ति तिथि से पद से हटा दिया गया है।

खेल रत्न, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिए खेल पुरस्कार

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भारत के चार खिलाड़ियों को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसमें 22 वर्षीय मनु भाकर, 18 वर्षीय डी गुकेश, भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, और पैरालंपियन प्रवीण कुमार शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में इन खिलाड़ियों को यह पुरस्कार प्रदान किया।

मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली स्वतंत्र भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं, जिन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने पेरिस ओलंपिक में लगातार दूसरे ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।

डी गुकेश 18 साल की उम्र में शतरंज में विश्व चैंपियन बने और भारतीय टीम को शतरंज ओलंपियाड में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। प्रवीण कुमार ने पेरिस पैरालंपिक में टी64 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जो एक विशेष श्रेणी है, जिसमें खिलाड़ी कृत्रिम पैर पर दौड़ते हैं।

यह पुरस्कार इन खिलाड़ियों की अद्वितीय उपलब्धियों और खेलों में उनके योगदान का सम्मान है। खेल रत्न के अलावा 34 खिलाड़ियों को 2024 में खेलों में उत्कृट प्रदर्शन के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जिसमें से एथलीट सुचा सिंह और पैरा तैराक मुरलीकांत राजाराम पेटकर को अर्जुन अवॉर्ड लाइफटाइम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेहतर कोचिंग देने के लिए पांच लोगों को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला, जिसमें बैडमिंटन कोच एस मुरलीधरन और फुटबॉल कोच अरमांडो एगनेलो कोलाको को लाइफटाइम वर्ग में शामिल हैं।

छात्रों को दिल्ली मेट्रो में 50% छूट केजरीवाल का PM को पत्र

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनैतिक समीकरण अपने अपने पक्ष में करने को राजनैतिक पैतरे बाजी शुरू हो गई है केजरीवाल की आप पार्टी अपनी विधानसभा सीटों को बचा कर रखने में ताकत खपा रही है तो वही बीजेपी दिल्ली विधानसभा चुनावो में सत्ता पर काबिज होने को बेताब है कांग्रेस का राजनैतिक विजन यहाँ कमजोर देखा जा रहा है आप पार्टी के पास पिछली दो बार से सत्ता में बने रहने का अनुभव है जो मतदाता तक पहुंच बना पाने में कामयाब रहा है

अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए मेट्रो किराए में 50% सब्सिडी देने की मांग की है। केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि दिल्ली के छात्र अपने स्कूल अथवा कॉलेज तक आने-जाने के लिए बड़े पैमाने पर मेट्रो पर निर्भर हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों इससे होने वाला खर्चा वहन करें। हमारी ओर से हम छात्रों के लिए बस यात्रा पूरी तरह से मुफ्त करने की योजना बना रहे हैं।

दिल्ली के पूर्व सीएम ने अपने पत्र में लिखा, ‘मैं दिल्ली के स्कूल और कॉलेज के छात्रों से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले पर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए ये पत्र लिख रहा हूं। दिल्ली के छात्र अपने स्कूल अथवा कॉलेज तक आने- जाने के लिए बड़े पैमाने पर मेट्रो पर निर्भर हैं। छात्रों पर वित्तीय बोझ को कम करने के लिए मैं दिल्ली मेट्रो में छात्रों को 50% की रियायतें देने का प्रस्ताव रखता हूं। दिल्ली मेट्रो दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच 50:50 सहयोग की परियोजना है। इसलिए इस पर होने वाले खर्च को दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार आधा-आधा वहन करें।

केजरीवाल ने आगे लिखा कि हमारी ओर से हम छात्रों के लिए बस यात्रा पूरी तरह से मुफ्त करने की योजना बना रहे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इस प्रस्ताव से सहमत होंगे।

महिला प्रीमियर लीग 2025: कार्यक्रम की घोषणा और प्रमुख विवरण

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महिला प्रीमियर लीग 2025: कार्यक्रम की घोषणा और प्रमुख विवरण

महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2025 का तीसरा संस्करण 14 फरवरी से शुरू होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस लीग के कार्यक्रम का एलान किया है, जो इस बार चार शहरों – बड़ौदा, बेंगलुरू, मुंबई और लखनऊ में खेला जाएगा। टूर्नामेंट में कुल 22 मैच खेले जाएंगे।

प्रमुख मैच और स्थल:

  1. पहला मैच:
    • गुजरात जाइंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच पहला मैच बड़ौदा के नवनिर्मित बीसीए स्टेडियम में खेला जाएगा।
  2. फाइनल:
    • टूर्नामेंट का फाइनल 15 मार्च को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा।
  3. लखनऊ की मेज़बानी:
    • लखनऊ, जो पहली बार लीग की मेज़बानी करेगा, 3 मार्च से यूपी वारियर्स के चार मैचों का आयोजन करेगा।

अन्य महत्वपूर्ण विवरण:

  • मुंबई की वापसी: मुंबई ने इस साल आयोजन स्थल की लिस्ट में वापसी की है, जबकि बेंगलुरू और नई दिल्ली में डब्ल्यूपीएल 2024 का आयोजन किया गया था।
  • आरसीबी का पहला घरेलू मैच: मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू का पहला घरेलू मैच 21 फरवरी को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरू में होगा, जहाँ उनका सामना पूर्व चैंपियन मुंबई इंडियंस से होगा।

प्रतियोगिता का प्रारूप:

  • लीग चरण: हर दिन एक मैच खेला जाएगा।
  • एलिमिनेटर और फाइनल: तालिका में शीर्ष पर रहने वाली टीम सीधे फाइनल में प्रवेश करेगी, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के बीच एलिमिनेटर मैच होगा, और विजेता टीम फाइनल में प्रतिस्पर्धा करेगी।
  • मुंबई में अंतिम चरण: टूर्नामेंट के अंतिम चरण का आयोजन मुंबई में होगा, जहां क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) दो लीग मैचों और दो प्लेऑफ मुकाबलों की मेज़बानी करेगा।

इस साल महिला क्रिकेट की इस प्रमुख लीग में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे, और इसमें चार प्रमुख शहरों में मुकाबले खेलें जाएंगे।

अखाड़ों में राष्ट्रपति शासन लागू, महाकुंभ समापन के पहले चुनी जाएगी नई सरकार

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अखाड़ों में पंचायती व्यवस्था और महाकुंभ की प्रबंधन प्रणाली

संन्यासी परंपरा के तहत सभी सातों प्रमुख अखाड़ों में नागा संन्यासी, महामंडलेश्वर और अन्य हजारों सदस्य होते हैं, जो अखाड़ों के विशाल परिवार का हिस्सा हैं। इन अखाड़ों का संचालन मुख्य रूप से अष्टकौशल के माध्यम से किया जाता है, जिसमें आठ महंत होते हैं, जो अखाड़े के प्रशासनिक और आध्यात्मिक कार्यों की देखरेख करते हैं। इस व्यवस्था में आठ उप महंत भी होते हैं जो महंतों की सहायता करते हैं।

महाकुंभ और पंचायती व्यवस्था:

महाकुंभ के दौरान अखाड़ों के प्रशासन में बदलाव आता है। जब महाकुंभ शुरू होता है, तो अखाड़ों की आंतरिक कार्यकारिणी भंग हो जाती है और उनकी जगह पंचायती व्यवस्था स्थापित की जाती है। यह व्यवस्था कुंभ के समापन तक काम करती है, और इसके माध्यम से सभी निर्णय लिए जाते हैं। महाकुंभ के बाद फिर से अखाड़े अपनी नई कार्यकारिणी का चुनाव करते हैं, और यह कार्यकाल अगले छह साल तक चलता है।

इस व्यवस्था में अखाड़ों के लिए चेहरा-मोहरा स्थापित होता है, जो एक प्रकार की पंचायती परिषद होती है। इस परिषद में सभी महंत मिलकर जरूरी फैसले लेते हैं। जूना अखाड़े के महंत रमेश गिरि के अनुसार, जब अखाड़े की छावनी में प्रवेश होता है, तो कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और सारे फैसले चेहरा-मोहरा के माध्यम से होते हैं।

पंचायती व्यवस्था की प्रमुख भूमिका:

अखाड़ों में फैसले आमतौर पर पंचों के माध्यम से होते हैं, और इसलिए कई अखाड़ों के नाम में ‘पंचायती’ शब्द जुड़ा हुआ है, जैसे पंचायती अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, और पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा। निरंजनी अखाड़े के महंत शिव वन ने बताया कि अखाड़ों की परंपरा में आम सहमति से निर्णय लिए जाते हैं। प्रत्येक निर्णय पारदर्शी तरीके से लिया जाता है और किसी संन्यासी के खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी पंचायत के माध्यम से ही होती है।

इस प्रकार, अखाड़ों का प्रशासन और महाकुंभ के आयोजन की जिम्मेदारी एक मजबूत पंचायती ढांचे के तहत काम करती है, जो सभी फैसलों को सामूहिक और सहमति आधारित रूप से पूरा करता है।

बीजापुर में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 18 नक्सली मारे गए

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बीजापुर में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 18 नक्सली मारे गए

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पुजारी कांकेर और मारुड़बाका के जंगलों में गुरुवार को सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में 18 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। सुरक्षाकर्मियों ने दावा किया कि यह मुठभेड़ एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन का हिस्सा था, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा रही थी। मारे गए नक्सलियों में कुछ इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय थे।

अधिकारी के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान रुक-रुककर गोलीबारी जारी रही, और सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों को घेर लिया। हालांकि, मुठभेड़ की स्थिति अभी भी जारी है और सुरक्षा बल स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, यह ऑपरेशन बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर चल रहे नक्सल विरोधी अभियान का हिस्सा था, जिसमें तीन जिलों के सुरक्षाबल शामिल थे।

सूत्रों के अनुसार, नक्सली बड़ी बैठक कर रहे थे, जिसमें छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के हार्ड कोर नक्सली शामिल थे। पुलिस के पास मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षाबल ने यह एनकाउंटर किया, और घने जंगलों की वजह से नक्सली भागने में सफल नहीं हो पाए। हालांकि, इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के कोई नुकसान की खबर नहीं है और सभी जवान सुरक्षित बताए गए हैं।

नक्सल विरोधी अभियान
यह घटना उस समय हुई जब सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन पर निकली थी। सुरक्षाबल ने दक्षिण बीजापुर के जंगल में नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या अभी बढ़ भी सकती है, क्योंकि गोलीबारी और मुठभेड़ का सिलसिला जारी है

मौनी अमावस्या का व्रत और उसका महत्व

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मौनी अमावस्या का व्रत और उसका महत्व

मौनी अमावस्या, जिसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है, हर वर्ष माघ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। यह दिन खासतौर पर गंगा स्नान, दान, और पितरों की पूजा के लिए समर्पित होता है। 2025 में यह व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा, और इस दिन महाकुंभ मेले में तीसरा शाही स्नान भी होगा। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, आत्मसंयम, और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का महत्व:

  1. आध्यात्मिक उन्नति:
    शास्त्रों के अनुसार, मौन व्रत से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक उन्नति होती है। मौन रहकर, व्यक्ति अपने मन और वाणी पर नियंत्रण पाता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक बल बढ़ता है।
  2. वाणी की शुद्धता:
    मौन व्रत से वाणी की शुद्धता प्राप्त होती है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति का एक प्रभावशाली साधन माना जाता है, क्योंकि मौन रहकर व्यक्ति अपने विचारों और शब्दों पर नियंत्रण रखता है, जो आत्मिक उन्नति में सहायक होता है।
  3. साधना में गहराई:
    यह व्रत साधकों को ध्यान और साधना में गहराई लाने का अवसर प्रदान करता है। मौन रहकर व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा को महसूस करता है और ध्यान में अधिक एकाग्रता प्राप्त करता है।

मौनी अमावस्या का व्रत कैसे किया जाता है:

  1. प्रातःकाल गंगा स्नान:
    इस दिन गंगा स्नान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो किसी पवित्र नदी के जल से स्नान करें, ताकि व्रत का प्रभाव अधिकतम हो सके।
  2. मौन व्रत:
    व्रत के दौरान पूरे दिन मौन रहकर ध्यान और जप करें। किसी प्रकार का बोलना वर्जित होता है, ताकि व्यक्ति के मन में शांति और संयम बना रहे।
  3. व्रत का समापन:
    व्रत समाप्त होने के बाद भगवान राम या अपने इष्ट देव का नाम लेकर व्रत को पूर्ण करें। यह व्रत एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति के लिए किया जाता है।

मौनी अमावस्या के लाभ:

  • आत्मिक शांति: मौन व्रत करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अपने आंतरिक द्वार को खोलने में सक्षम होता है।
  • समाज में मान-सम्मान: शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और उसकी वाणी में मधुरता आती है।
  • मनोबल में वृद्धि: यह व्रत आत्म-नियंत्रण का अभ्यास है, जो साधक के मनोबल को मजबूत करता है और मानसिक तनाव को कम करता है।

निष्कर्ष:
मौनी अमावस्या का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक शांति प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। यह व्रत साधक को आत्मसंयम, शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है, और वाणी और विचारों की शुद्धता को बढ़ावा देता है।

नेशनल गेम्स में पीएम मोदी का आगमन: खिलाड़ी चार घंटे पहले करेंगे प्रवेश, लक्ष्य सेन करेंगे मार्च पास्ट की अगुवाई

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नेशनल गेम्स में पीएम मोदी का आगमन: खिलाड़ी चार घंटे पहले करेंगे प्रवेश, लक्ष्य सेन होंगे मार्च पास्ट की अगुवाई करने वाले

उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और राज्य सरकार इस आयोजन की मेज़बानी को लेकर पूरी तरह से तैयार दिख रही है। इस खेल इवेंट के साथ उत्तराखंड को विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने का बड़ा मौका मिल रहा है, खासतौर पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका शुभारंभ करने के लिए आ रहे हैं। पीएम मोदी के आगमन से पहले सभी खिलाड़ियों को 4 घंटे पहले स्टेडियम में प्रवेश करने के आदेश दिए गए हैं ताकि उनकी मार्च पास्ट में कोई बाधा न हो, और खेलों का शुभारंभ सुचारू रूप से हो सके।

मार्च पास्ट की अगुवाई की जिम्मेदारी लगभग तय हो चुकी है। देश और दुनिया में उत्तराखंड का परचम लहराने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन को मार्च पास्ट का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा। उनके साथ राज्य के अन्य ओलंपियन खिलाड़ी और वरिष्ठ पदक विजेता खिलाड़ी भी इस महत्वपूर्ण पल का हिस्सा बनेंगे। लक्ष्य सेन के नाम पर आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 जनवरी को राष्ट्रीय खेलों का शुभारंभ करेंगे, और उनके सुरक्षा इंतजामों के मद्देनजर, गेम्स टेक्निकल कंडक्ट कमिटी (जीटीसीसी) और शेफ डी मिशन द्वारा सभी खेल अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई है, ताकि मार्च पास्ट से जुड़े सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

इस आयोजन को लेकर राज्य सरकार ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है, और राष्ट्रीय खेलों के सफलतापूर्वक आयोजन की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य को खेल क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर शार्ट सर्किट से आग का हादसा, गनीमत रही बड़ा हादसा टला

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर शार्ट सर्किट से आग का हादसा, गनीमत रही बड़ा हादसा टला

उत्तराखंड, विशेष रूप से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्य में एक बड़ा हादसा होने से बच गया। गुरुवार को मलेथा गांव में निर्माण स्थल पर बने मजदूरों के कमरे में शार्ट सर्किट के कारण अचानक गैस सिलेंडर में आग लग गई। आग ने आसपास के क्षेत्र में नुकसान किया, लेकिन गनीमत रही कि उस समय मजदूर वहां मौजूद नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

कीर्तिनगर कोतवाल देवराज शर्मा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना उस समय हुई जब रेल परियोजना के निर्माण में लगे मजदूर अपने काम पर थे और उनके रहने के लिए बनाए गए टीनशेड में आग लगी। आग ने दो बाइकों, आठ बेड, मजदूरों के सामान, कपड़े, पैसे और सामूहिक भोजनालय में रखी राशन को जलाकर राख कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन सेवा श्रीनगर के कर्मी संजय और सोनू कुमार सैनी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। फिलहाल, घटना में हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है।

उत्तराखंड सरकार की ओर से इस रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है, और इसका उद्देश्य चार धाम यात्रा के मार्ग को सुगम बनाना है, जिससे यात्रियों को अधिक आसानी से यात्रा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस घटना ने निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो सकें।

हल्द्वानी में धाकड़ धामी के नारे, रोड शो में उमड़ा जनसैलाब

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हल्द्वानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भा.ज.पा. प्रत्याशी गजराज सिंह बिष्ट के समर्थन में रोड शो का शुभारंभ किया। यह रोड शो कालाढूंगी रोड से शुरू होकर नैनीताल रोड और तिकुनिया तक पहुंचा। इस दौरान भा.ज.पा. कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली, और सड़कों पर जोश और उत्साह का माहौल था।

रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री धामी की “धाकड़ धामी” के नारे गूंजते रहे। इस मौके पर सड़कें खचाखच भरी हुई थीं, जिसके कारण हल्द्वानी में भारी जाम की स्थिति बन गई। मुख्यमंत्री धामी इस जबरदस्त समर्थन से उत्साहित नजर आए।

रोड शो में भाजपा के कई प्रमुख नेता शामिल थे, जिनमें सांसद अजय भट्ट, भा.ज.पा. प्रत्याशी गजराज सिंह बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, और मोहन सिंह बिष्ट जैसे नेता उपस्थित थे। रोड शो में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जोश और उत्साह का माहौल था, जो पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को स्पष्ट रूप से दर्शाता था।

यह रोड शो पार्टी के प्रचार में महत्वपूर्ण साबित हुआ, और हल्द्वानी में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित हुआ।