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ईरान-इजरायल जंग पर पुतिन की चेतावनी: COVID-19 से भी खतरनाक हो सकते हैं नतीजे!

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ईरान-इजरायल जंग पर पुतिन की चेतावनी: COVID-19 से भी खतरनाक हो सकते हैं नतीजे!

ईरान-इजरायल जंग पर पुतिन की चेतावनी: COVID-19 से भी खतरनाक हो सकते हैं नतीजे!

पश्चिम एशिया में एक ऐसी जंग जारी है, जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है…
और अब रूस के राष्ट्रपति ने दी ऐसी चेतावनी, जिसने हालात और गंभीर बना दिए हैं 

पुतिन का बड़ा बयान

व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस जंग के परिणाम इतने गंभीर हो सकते हैं कि इसकी तुलना COVID-19 जैसी वैश्विक महामारी से की जा रही है।

मॉस्को में बिजनेस लीडर्स के साथ बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि अभी तक इस जंग के परिणामों का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है।

 27 दिन से जारी युद्ध, बढ़ता जा रहा खतरा

ईरान और इजरायल के बीच लगातार 27 दिनों से संघर्ष जारी है। दोनों देश एक-दूसरे पर मिसाइल हमले कर रहे हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है।

 इस जंग का असर अब केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

 तेल-गैस संकट से दुनिया बेहाल

इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है:

  • तेल और गैस की सप्लाई बाधित
  • कई देशों में ऊर्जा संकट
  • कीमतों में जबरदस्त उछाल
  • कुछ देशों में इमरजेंसी जैसे हालात

 आम लोगों की जेब पर सीधा असर दिखने लगा है।

 सप्लाई चेन पर बड़ा झटका

पुतिन ने चेतावनी दी कि यह जंग केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है:

  • इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स बाधित
  • उत्पादन (Production) पर असर
  • धातु और उर्वरक उद्योग दबाव में

 इससे आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

 सबसे बड़ी चिंता – अनिश्चित भविष्य

व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा कि जब जंग में शामिल देश खुद नहीं जानते कि आगे क्या होगा, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।जब पक्ष खुद भविष्य नहीं जान पा रहे, तो कोई भी सटीक अनुमान नहीं लगा सकता।”

 क्या COVID-19 जैसी वैश्विक गिरावट आएगी?

COVID-19 के दौरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ था।
अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर यह जंग लंबी चली, तो:

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी
  • विकास दर गिर सकती है
  • कई देशों में आर्थिक संकट आ सकता है

 निष्कर्ष

ईरान-इजरायल जंग अब एक बड़े वैश्विक संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। पुतिन की चेतावनी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में इसका असर हर देश और हर व्यक्ति पर पड़ सकता है।

 क्या दुनिया एक और बड़े संकट की ओर बढ़ रही है? यह सवाल अब सभी के मन में है।

लोहाखाम देवता का रहस्यमयी इतिहास

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लोहाखाम देवता का रहस्य

लोहाखाम देवता का रहस्यमयी इतिहास: नेपाल से उत्तराखंड तक आस्था, परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम

उत्तराखंड की पवित्र भूमि देवभूमि के नाम से जानी जाती है, जहां हर पहाड़, हर नदी और हर मंदिर अपने भीतर एक अनोखी कहानी समेटे हुए है। इन्हीं रहस्यमयी और आस्था से भरपूर स्थलों में से एक है भीमताल के पास स्थित लोहाखाम देवता धाम। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका इतिहास, परंपराएं और प्राकृतिक सौंदर्य इसे बेहद खास बनाते हैं।

 नेपाल से जुड़ी अनोखी कहानी

लोहाखाम देवता का इतिहास सामान्य मंदिरों की तरह सीधा नहीं है, बल्कि इसमें प्रवास, रहस्य और लोककथाओं का गहरा मेल देखने को मिलता है। मान्यता के अनुसार, इस धाम से जुड़े पूर्वज मूल रूप से नेपाल के निवासी थे। परगाई मटयाली परिवार, पनेरु उपाध्याय और अन्य कई परिवार एक समय नेपाल के एक गांव में रहते थे।

कहा जाता है कि वह पूरा गांव आज सरकारी रिकॉर्ड में “लाल पत्ता” भूमि के रूप में दर्ज हो चुका है और अब वह स्थान पूरी तरह जंगल में तब्दील हो गया है। लोकमान्यताओं के अनुसार, उस जगह पर कभी लोकचूली लोहाखाम देवता का भव्य मंदिर था, जो उस समय के लोगों के इष्ट देवता माने जाते थे।

समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और वहां का मंदिर नेपाल सरकार के अधीन चला गया। स्थानीय लोगों के बीच यह भी कहा जाता है कि अब उस क्षेत्र में सांपों का अधिक वास हो चुका है, जिससे वहां का रहस्य और भी गहरा हो गया है।

 उत्तराखंड में आगमन और बसावट

नेपाल से आए पूर्वजों ने लंबी यात्रा के बाद उत्तराखंड के इस क्षेत्र में प्रवेश किया। कहा जाता है कि उन्होंने सबसे पहले लोकचूली लोहाखाम और हरीशताल क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया। इसके बाद वे पास के गांवों में जाकर बस गए।

समय के साथ ये परिवार अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों में विभाजित हो गए और अपने नामों के साथ अलग-अलग उपाधियां जोड़ने लगे। यही कारण है कि आज इस वंश और इतिहास का सटीक आकलन कर पाना कठिन हो गया है, लेकिन उनकी आस्था और परंपरा आज भी जीवित है।

 कठोर नियमों वाले पुजारी

लोहाखाम मंदिर की सबसे खास बात यहां के पुजारी की सख्त और अनोखी जीवनशैली है। मंदिर के मुख्य पुजारी आज भी प्राचीन परंपराओं का पालन करते हैं, जो आधुनिक समय में बहुत कम देखने को मिलता है।

उनके प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:

  • वे कभी भी तेल में बना हुआ भोजन ग्रहण नहीं करते
  • प्याज, लहसुन और मंडुवा जैसे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करते हैं
  • केवल अपने हाथों से बनाया हुआ भोजन ही खाते हैं
  • हल चलाने या खेती करने जैसे कार्यों से भी दूर रहते हैं

यह अनुशासन न केवल उनकी व्यक्तिगत साधना को दर्शाता है, बल्कि मंदिर की पवित्रता और धार्मिक महत्व को भी बढ़ाता है।

 बैसाखी पूर्णिमा का ऐतिहासिक मेला

लोहाखाम देवता धाम में हर वर्ष बैसाखी पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा आजादी से पहले से चली आ रही है और इसे मुख्य रूप से चौगड़ क्षेत्र के लोग आयोजित करते हैं।

मेले की खासियतें:

  • पारंपरिक कुमाऊंनी सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • छोलिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति
  • जागर, झोड़ा और चांचरी जैसे लोकनृत्य
  • स्थानीय खान-पान और धार्मिक अनुष्ठान

इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और मेले का आनंद लेने के साथ-साथ देवता के दर्शन भी करते हैं।

 नई फसल की अनोखी परंपरा

लोहाखाम धाम में एक बेहद खास परंपरा निभाई जाती है। बैसाखी पूर्णिमा के दिन सबसे पहले पुजारी द्वारा नए अनाज का भोग लोहाखाम देवता को अर्पित किया जाता है।

इसके बाद ही क्षेत्र के लोग और पुजारी स्वयं नई फसल का सेवन करते हैं। यह परंपरा देवता के प्रति आभार और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।

 प्राकृतिक सौंदर्य और ट्रैकिंग का अनुभव

यह क्षेत्र केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

यहां की प्रमुख विशेषताएं:

  • लोहाखाम ताल – जिसे पवित्र कुंड माना जाता है
  • हरीशताल झील – शांत और मनमोहक प्राकृतिक स्थल
  • लगभग 3 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर

मंदिर से चारों ओर का दृश्य बेहद अद्भुत दिखाई देता है। यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों के साथ-साथ कैलाश पर्वत और तराई-भावर का नजारा भी साफ देखा जा सकता है।

अंग्रेजों के समय की रहस्यमयी झलक

लोहाखाम मंदिर के पास एक और रहस्यमयी चीज देखने को मिलती है—एक पुराना लोहे का झूला, जिसे “खाम” कहा जाता है। माना जाता है कि यह झूला अंग्रेजों द्वारा लगाया गया था।

कहा जाता है कि अंग्रेजी शासनकाल में कई अंग्रेज इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए यहां आते थे। वे कई किलोमीटर पैदल चलकर इस झील तक पहुंचते थे और रात्रि विश्राम के लिए यहां कोठी भी बनवाई गई थी।

हालांकि, इस झूले को लगाने का सटीक कारण आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

आस्था और मान्यता

स्थानीय लोगों के बीच लोहाखाम देवता के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है।

इसी विश्वास के चलते हर साल हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

 पर्यटन की अपार संभावनाएं

लोहाखाम धाम धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र को पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया जाए, तो:

  • स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है
  • क्षेत्र से पलायन को रोका जा सकता है
  • उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण जुड़ सकता है

 निष्कर्ष

लोहाखाम देवता धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह इतिहास, आस्था, परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम है। नेपाल से जुड़ी इसकी जड़ें, पुजारियों की कठोर साधना, सांस्कृतिक मेले और हिमालय की गोद में बसी इसकी सुंदरता इसे एक अनोखा और विशेष स्थान बनाती है।

जो लोग भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर शांति, आध्यात्म और प्रकृति का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए लोहाखाम धाम किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

रामनवमी पर प्रदेशवासियों को CM की शुभकामनाएं

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रामनवमी पर प्रदेशवासियों को CM की शुभकामनाएं

CM धामी ने रामनवमी पर किया कन्या पूजन, प्रदेश की खुशहाली की कामना

Pushkar Singh Dhami ने Ram Navami के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में कन्या पूजन कर देवी स्वरूपा बालिकाओं का सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कन्याओं को भोजन कराया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

रामनवमी की दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रामनवमी की बधाई देते हुए कहा कि
Lord Rama का जीवन हमें सत्य, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु श्रीराम की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए और प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े।

कन्या पूजन का बताया महत्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि कन्या पूजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो:

  • नारी सम्मान का संदेश देता है
  • सामाजिक समरसता को मजबूत करता है
  • भारतीय संस्कृति के मूल्यों को दर्शाता है

प्रदेश की खुशहाली की कामना

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि रामनवमी का यह पर्व हमारे जीवन में आदर्श, मर्यादा और नैतिक मूल्यों को और मजबूत करता है।

केदारनाथ यात्रा 2026 22 अप्रैल से शुरू धाम में 4 फीट तक बर्फ

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केदारनाथ धाम में तैयारियों का जायजा, DM-SP एक्शन मोड में

आगामी Kedarnath Yatra 2026 को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। इसी क्रम में जिलाधिकारी Vishal Mishra और पुलिस अधीक्षक Niharika Tomar ने Kedarnath Temple पहुंचकर यात्रा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।

बर्फ हटाने से लेकर सुरक्षा तक, युद्ध स्तर पर काम

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने:

  • धाम में जमी 3–4 फीट बर्फ हटाने की प्रगति
  • पैदल यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने के कार्य
  • सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
  • पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आवास सुविधाओं की बहाली

का विस्तृत जायजा लिया।

22 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि केदारनाथ यात्रा 22 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो रही है। इसके मद्देनजर सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि:

  • बर्फ हटते ही दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी
  • सभी मूलभूत सुविधाएं यात्रा शुरू होने से पहले बहाल कर दी जाएंगी
  • श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित यात्रा अनुभव देने पर फोकस है

सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत

पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने बताया कि वर्तमान में:

  • 3 पुलिसकर्मी
  • 12 आईटीबीपी जवान

धाम में तैनात हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव के आधार पर इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही:

  • भीड़ प्रबंधन
  • आपातकालीन सेवाएं
  • ठहरने और आवागमन की व्यवस्था

पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सभी विभागों के साथ समन्वय

निरीक्षण के दौरान श्री केदार सभा और बी.के.टी.सी. प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष की यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाई जाए।

देहरादून–पिथौरागढ़ फ्लाइट शुरू, 1 घंटे में सफर

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देहरादून–पिथौरागढ़ फ्लाइट शुरू, 1 घंटे में सफर

देहरादून–पिथौरागढ़ विमान सेवा शुरू, 1 घंटे में पूरा होगा सफर

Pushkar Singh Dhami ने Jolly Grant Airport से देहरादून–पिथौरागढ़–देहरादून विमान सेवा का शुभारंभ किया। रामनवमी के पावन अवसर पर शुरू हुई इस सेवा से अब Pithoragarh और Dehradun के बीच सफर महज एक घंटे में पूरा हो सकेगा।

सीमांत क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई हवाई सेवा न केवल आम लोगों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे सीमांत क्षेत्र तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।

UDAN योजना से बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में UDAN Scheme ने हवाई यात्रा को आम नागरिक तक पहुंचाया है। अब “हवाई चप्पल पहनने वाला” व्यक्ति भी हवाई सफर कर सकता है।

  • छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ा गया

  • सस्ती दरों पर हवाई सेवाएं उपलब्ध

  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिला बढ़ावा

UDAN 2.0 से और मजबूत होगा नेटवर्क

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में UDAN 2.0 को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत:

  • 10 वर्षों में लगभग 29 हजार करोड़ रुपये का निवेश

  • 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड विकसित होंगे

  • टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलेगा सीधा लाभ

उत्तराखंड में तेजी से बढ़ी हवाई कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में:

  • 26 हवाई मार्गों पर संचालन

  • “उत्तराखंड एयर कनेक्टिविटी योजना” के तहत 6 रूट सक्रिय

  • हेलिपोर्ट्स की संख्या 2 से बढ़कर 12

  • हेलीपैड 60 से बढ़कर 118

राज्य को “बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम” का राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुका है।

पिथौरागढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

इस नई सेवा से:

  • पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

  • व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

  • आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी आएगी

इसके साथ ही पिथौरागढ़–मुनस्यारी हेली सेवा भी शुरू की गई है, जिससे कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

नैनी सैनी एयरपोर्ट का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नैनी सैनी हवाई अड्डे के विकास के लिए लगभग 450 करोड़ रुपये की योजना पर कार्य चल रहा है। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच समझौता (MoU) भी हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री ने दी शुभकामनाएं

कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu ने वीडियो संदेश के माध्यम से इस सेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।

12 राज्यों की भागीदारी से जनजातीय महोत्सव बना राष्ट्रीय मंच

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12 राज्यों की भागीदारी से जनजातीय महोत्सव बना राष्ट्रीय मंच

देहरादून में जनजातीय महोत्सव 2026 में CM धामी, 12 राज्यों की भागीदारी से बना राष्ट्रीय मंच

Pushkar Singh Dhami ने Dehradun के परेड ग्राउंड में आयोजित Uttarakhand Tribal Festival 2026 में प्रतिभाग किया। इस दौरान 12 राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधियों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं की शानदार प्रस्तुति देकर महोत्सव को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

जनजातीय समाज राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार: CM धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सशक्त आधार है। यह समाज प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर सतत विकास और सहअस्तित्व का संदेश देता है।

‘आदि गौरव सम्मान’ से सम्मानित हुए प्रतिभागी

कार्यक्रम में थारू लोक गायिका Rinku Devi Rana (स्व.) और Darshan Lal को ‘आदि गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

‘वन क्लिक’ से 142 करोड़ से अधिक पेंशन ट्रांसफर

समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के तहत मुख्यमंत्री ने 14272.185 लाख रुपये की पेंशन ‘वन क्लिक’ के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की, जिससे 9 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला।

शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा Narendra Modi के नेतृत्व में जनजातीय विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

  • प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान

  • वन धन योजना

  • प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन

इन योजनाओं से शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा हुए हैं।

जनजातीय गौरव और पहचान को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि Birsa Munda की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना ऐतिहासिक कदम है। साथ ही देशभर में आदिवासी संग्रहालयों की स्थापना से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu का सर्वोच्च पद पर आसीन होना जनजातीय समाज की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है।

उत्तराखंड सरकार की प्रमुख पहल

  • 128 जनजातीय गांवों का चिन्हांकन और विकास

  • कालसी, मेहरावना, बाजपुर, खटीमा में एकलव्य विद्यालय संचालित

  • चकराता और बाजपुर में नए विद्यालय निर्माणाधीन

  • छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा और निःशुल्क कोचिंग

  • जनजातीय युवाओं के लिए ITI और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी सुविधाएं

  • ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ की स्थापना (देहरादून)

परंपरा और संस्कृति को मिला बड़ा मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव जनजातीय संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

CM धामी से बार एसोसिएशन देहरादून की मुलाकात, न्यायिक सुधार पर चर्चा

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बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल ने CM धामी से की शिष्टाचार भेंट

Pushkar Singh Dhami से मुख्यमंत्री आवास में Bar Association Dehradun के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं और प्रदेश के विकास कार्यों की सराहना की।

न्यायिक व्यवस्था मजबूत करने के प्रयासों की सराहना

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, न्यायालय परिसरों में सुविधाओं के विस्तार और न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के प्रयासों की सराहना की गई।

नई आपराधिक संहिताओं पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में New Criminal Laws India 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन नई संहिताओं से न्याय प्रणाली अधिक त्वरित, सुदृढ़ और जनोन्मुखी बनेगी।

मुख्यमंत्री ने इस पर कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने में बार और बेंच के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है और इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

न्यायिक अधोसंरचना के विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा:

  • न्यायालय परिसरों का आधुनिकीकरण

  • डिजिटल सुविधाओं का विस्तार

  • ई-कोर्ट प्रणाली को बढ़ावा

  • न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना

जैसी पहलें लगातार की जा रही हैं।

अधिवक्ताओं के लिए विशेष सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए:

  • बार भवनों का निर्माण

  • पुस्तकालयों का सुदृढ़ीकरण

  • आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता

सुनिश्चित की जा रही है।

सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत करने, न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और आमजन को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि अधिवक्ताओं और बार संगठनों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कुम्भ 2027 की तैयारियां तेज मंत्री कैड़ा ने की समीक्षा

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कुम्भ 2027 की तैयारियां तेज मंत्री कैड़ा ने की समीक्षा

कुम्भ 2027 को दिव्य-भव्य बनाने की तैयारी, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की समीक्षा

Ram Singh Kaida ने विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में शहरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को जनकल्याणकारी योजनाओं का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

विकास कार्य समय पर पूरे करने के निर्देश

मंत्री ने कहा कि शहरी विकास विभाग की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना प्राथमिकता है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कुम्भ 2027 की तैयारियों पर फोकस

बैठक में Kumbh Mela 2027 से जुड़े कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में सरकार कुम्भ 2027 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

श्रद्धालुओं को मिलें बेहतर सुविधाएं

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुम्भ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को:

  • बेहतर यातायात व्यवस्था

  • स्वच्छता और पेयजल

  • आवास और सुरक्षा

  • अन्य मूलभूत सुविधाएं

सुनिश्चित की जाएं, ताकि आयोजन सुचारू और व्यवस्थित हो।

अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में Nitesh Jha, Sonika और Santosh Badoni सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जलागम प्रबंधन पर सरकार का फोकस, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दिए निर्देश

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जलागम प्रबंधन पर सरकार का फोकस, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दिए निर्देश

जलागम प्रबंधन को लेकर बड़ा रोडमैप, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दिए निर्देश

Ram Singh Kaida ने विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में जलागम प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को भविष्य का ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

जलागम क्षेत्र में अपार संभावनाएं

मंत्री ने कहा कि जलागम विभाग के अंतर्गत अनेक संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया।

पहाड़ के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर फोकस

बैठक में मंत्री ने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में मौजूद:

  • चाल-खाल

  • नदियां

  • नाले और गधेरे

के पानी का वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।

“पहाड़ का पानी और जवानी” को विकास से जोड़ने की पहल

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी” को प्रदेश के विकास में उपयोगी बनाना है। इस दिशा में ठोस रणनीति के साथ कार्य करने की जरूरत है, जिससे पलायन जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लग सके।

अधिकारियों को दिए समन्वय के निर्देश

बैठक में Dilip Jawalkar और Kahkasha Naseem सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने सभी अधिकारियों को समन्वय और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।

CM धामी ने किया क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन, युवाओं को दिया संदेश

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CM धामी ने किया क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन, युवाओं को दिया संदेश

देहरादून में मंजुल सिंह मांजिला स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ, CM धामी ने खेला क्रिकेट

Pushkar Singh Dhami ने बुधवार को Maharana Pratap Sports College, Dehradun में मंजुल सिंह मांजिला स्मृति अंतर क्रिकेट टूर्नामेंट का विधिवत शुभारंभ किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद मैदान में उतरकर क्रिकेट खेला और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

खेल से विकसित होती है नेतृत्व क्षमता

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। खेलों के माध्यम से युवाओं में:

  • अनुशासन

  • टीमवर्क

  • नेतृत्व क्षमता

  • संघर्षशीलता

जैसे महत्वपूर्ण गुण विकसित होते हैं।

खेल सुविधाओं के विस्तार पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं को बढ़ाने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि अधिक से अधिक युवा खेलों से जुड़ सकें।

“खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया” से बढ़ी जागरूकता

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में चलाए जा रहे Khelo India और Fit India Movement जैसे अभियानों ने देश में खेल संस्कृति को मजबूत किया है और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस अवसर पर Khajan Das, Umesh Sharma Kau, Ajay Singh Rana सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।