HomeDehardunभारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच देगा उत्तराखंड : मुख्यमंत्री

भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच देगा उत्तराखंड : मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड को भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टि (Vision) का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह लक्ष्य पारंपरिक ज्ञान, आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर आधारित है।

क्या है इस विजन का उद्देश्य?

उत्तराखण्ड को ऐसा केंद्र बनाना जहां—

  • भारतीय संस्कृति, वेद, शास्त्र और योग का गहन अध्ययन और शोध हो
  • आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय हो
  • देश-विदेश के शोधकर्ता, विद्यार्थी और विद्वान आकर्षित हों

प्रमुख पहल

  • हरिद्वार के ऋषिकुल में
    श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान को विश्वस्तरीय संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा
  • संस्कृत, आयुर्वेद, ज्योतिष, योग और भारतीय दर्शन जैसे विषयों में उच्च स्तरीय रिसर्च को बढ़ावा
  • डिजिटल लाइब्रेरी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आधुनिक शोध सुविधाएं विकसित करना
  • चारधाम और धार्मिक स्थलों को सांस्कृतिक-शोध केंद्रों से जोड़ना

क्यों है उत्तराखण्ड इसके लिए उपयुक्त?

  • देवभूमि के रूप में पहचान
  • ऋषि-मुनियों की तपस्थली और आध्यात्मिक परंपरा
  • हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र
  • योग, ध्यान और आयुर्वेद की वैश्विक पहचान

संभावित लाभ

  • राज्य में शिक्षा और शोध का हब विकसित होगा
  • रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
  • भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच मिलेगा

यह पहल उत्तराखण्ड को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उसे ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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