उत्तराखंड के उत्तरकाशी और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को दो बार भूकंप के झटके महसूस हुए। इसके कारण लोग घरों से बाहर निकल आए और दहशत का माहौल बन गया। लोग भयभीत थे और स्थिति की गंभीरता को लेकर चिंतित थे। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी तहसील क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठा की जा रही है। पहले भूकंप के झटके सुबह करीब 7:42 बजे महसूस किए गए, जिसके कारण वरुणावत पर्वत के भूस्खलन जोन से मलबा और पत्थर गिर गए। फिर, 8:19 बजे फिर से भूकंप के झटके महसूस हुए, जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 रही।
भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी में जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने अधिकारियों को जिले के सभी तहसील क्षेत्रों में भूकंप के प्रभाव के बारे में जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। अब तक जिले से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं आई है।
देहरादून उत्तराखंड निकाय चुनाव में कुछ जगह पर हंगामा होने के बाद निकाय चुनाव निपट गया चुनाव में बीजेपी कांग्रेस दोनों में कड़ी टक्कर कुछ निकायों में देखी जा रही है जबकि कुछ निकाय में वार्ड सभासद,पार्षद भी जीत का रुख कर सकते है शाम को आए चुनावी समीकरण के बाद ऐसे संकेत मिल रहे है राज्य में बीजेपी के लिए उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने राजनैतिक विजनरी ताकत से चुनाव में एक बार फिर कई नगर निगम सीटों के साथ साथ नगर पालिका सीटों पर कांग्रेस को हार की चौखट तक पहुंचाने में कोशिश की है चुनावी परिणाम 25 को आएंगे
रुड़की के माहीग्रान में शाम पांच बजे के बाद लाइन में लगे लोगों ने मतदान करवाने के लिए हंगामा कर दिया। जिससे वहां स्थिति तनावपूर्ण बन गई। पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह मतदान करवाने की जिद पर अड़े रहे। इस बीच किसी ने पत्थर फेंक दिया। जो एक युवक को जा लगा। इस पर हंगामा और बढ़ गया। स्थिति को काबू पाने के लिए पुलिस ने हंगामा करने लोगों पर लाठियां फटकारी जिससे भगदड़ मच गया।
ड़कोट के वार्ड नंबर 4 के डाइट मतदान केंद्र पर हंगामा। पांच बजे के बाद भाजपा प्रत्याशी के साथ मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान को जाने दिया। निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल को नहीं जाने दिया। धक्का मुक्की के साथ हंगामा हुआ। मनवीर सिंह चौहान के खिलाफ नारेबाजी। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए भीड़ को खदेड़ा। विधायक के गनर ने विधायक संजय डोभाल को सुरक्षित बाहर भीड़ से ले आए
मसूरी नगर पालिका चुनाव मतदान के दौरान हंगामा हो गया। आरएन भार्गव इंटर कॉलेज के अतिसंवेदनशील वार्ड 6 के कक्ष संख्या 3 में दो पक्षों में मारपीट हो गई। फर्जी वोट को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इस दौरान जमकर बवाल हुआ। पुलिस ने दोनों पक्षो को मतदान केंद्र से बाहर किया।
गदरपुर निकाय चुनाव को लेकर नगर में राजकीय इंटर कॉलेज में मतदान केंद्र पर हंगामा होता देखा गया नगर में कांग्रेस ने बीजेपी प्रत्याशी के पांच मत पत्र पकड़े जाने का आरोप लगाते हुए पोलिंग बूथ पर हंगामा किया मोके पर बड़ी सख्या में पुलिस बल ने काफी देर बाद पोलिंग केंद्र से लोगो को बहार किया जिसके बाद मतदाता अपने मत का प्रयोग करते देखे गए गदरपुर में कांग्रेस बीजेपी में काटे का मुकाबला मतदान होने के बाद देखा जा रहा है
दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनैतिक समीकरण अब धार्मिक नज़र से एक दूसरे पर वार करते देखे जा रहे है दिल्ली में योगी ने जिस तरह से केजरीवाल पर यमुना जी में स्नान किये जाने की तरफ इशारा करते हुए बात कही है उसके कई मायने निकाले जा रहे है योगी ने कहा अगर हम मुख्यमंत्री के रूप में और पूरी कैबिनेट के साथ संगम में स्नान कर सकते हैं, तो मैं केजरीवाल जी से पूछता हूं कि क्या वो और उनकी कैबिनेट यमुना जी में स्नान कर सकती है? केजरीवाल ने यमुना को गंदे नाले में तब्दील कर दिया है।
दिल्ली के चुनावी मैदान में अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उतर चुके हैं। उन्होंने गुरुवार को किराड़ी से भाजपा विधानसभा प्रत्याशी बजरंग शुक्ला के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। योगी ने आप सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इन्होंने यमुना को गंदे नाले में बदल दिया। मेरी पूरी कैबिनेट में कुंभ में डुबकी लगाई। क्या केजरीवाल की कैबिनेट यमुना में स्नान कर सकती है? उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव के चलते आज मुझे यहां आने का अवसर मिला है, आज मुझे नजदीक से यहां की सड़कों को देखने का अवसर मिल रहा है। मैं कल ही प्रयागराज से लखनऊ आया हूं, इस सदी का पहला महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में भव्यता से हो रहा है।
10 दिन में 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी के संगम में पावन स्नान किया योगी ने कहा कि आप अनुमान करिए कि 13 जनवरी से पौष पूर्णिमा से आज तक इन 10 दिनों में 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी के संगम में पावन स्नान किया है। आप प्रयागराज में जाएंगे तो शानदार सड़कें मिलेंगी, कहीं गंदगी नजर नहीं आएगी और बिजली पूरे समय मिलेगी। सड़क से लेकर रेल तक और हवाई तीनों की बेहतरीन कनेक्टिविटी मिलेगी। अगर हम मुख्यमंत्री के रूप में और पूरी कैबिनेट के साथ संगम में स्नान कर सकते हैं, तो मैं केजरीवाल जी से पूछता हूं कि क्या वो और उनकी कैबिनेट यमुना जी में स्नान कर सकते हैं? केजरीवाल ने यमुना को गंदे नाले में तब्दील कर दिया है।
दिल्ली में जगह-जगह कूड़ा दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, सड़क पर गड्ढा है या गड्ढे में सड़क है ये आज मैं खुद देख रहा हूं, ये छूट आपने एक व्यक्ति और उसके साथियों को क्यों दे दी है? दिल्ली में इतना कूड़ा हर जगह है कि पूरी राजधानी की दुर्गति हो गई है। आज हमारे वाहनों को यहां उसी सीवर के पानी से गुजरना पड़ा। आजकल अपने भाषणों में केजरीवाल बार बार यूपी की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि आज यूपी पूरे देश में एक मॉडल के रूप में विकसित हुआ है। दिल्ली और नोएडा की सड़कों को स्वयं देखिए, दिल्ली और गाजियाबाद की सड़कों को देखिए, जमीन और आसमान का अंतर आपको स्वयं नजर आएगा।
‘आप झूठ बोलने की एटीएम मशीन’ केजरीवाल ने अपने गुरु अन्ना हजारे को धोखा दिया, जो गुरु को धोखा दे सकता है वो जनता को भी धोखा देगा। दिल्ली में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। आप झूठ बोलने की एटीएम मशीन है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की तस्वीर को बदसूरत कर दिया,आम आदमी पार्टी को सत्ता में आने का कोई अधिकार नहीं है। केजरीवाल कर रहे राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ आम आदमी पार्टी दिल्ली में घुसपैठियों को आधार बांट रही है। रोहिंग्या को दिल्ली में बसाया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, इन्होने यहां दंगे करवाए।
देहरादून निकाय चुनाव में उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी राजनैतिक विजनरी ताकत से बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाये जाने में कामयाब रहे है आखिर सवाल उठ रहा है बीजेपी के बाकि नेता अपने उमीदवार वाले एरिया में कैद होकर रहे काश धामी सरीखी निकाय चुनाव में मेहनत बीजेपी के सभी नेता आपसी गुटबाजी को खत्म कर करते तो बीजेपी 100 निकाय चुनाव में जीत की गारंटी का रिपोर्ट कार्ड कन्फेन्डेन्स तरह से रख पाती अगर उत्तराखंड में राजनैतिक पसीना बहाने का काम सिर्फ धामी के बुते है तो बाकि नेता अपनी राजनैतिक जमीं को कैसे 2027 तक बचा पाएंगे बीजेपी को इस बारे में सोचना पड़ेगा।
उत्तराखंड निकाय चुनाव में पुष्कर सिंह धामी जितनी मेहनत करते देखे गए उसने यही सवाल खड़ा कर दिया है राज्य में हर बार धामी अपनी राजनैतिक विजनरी ताकत से 24 कैरट सोना बनकर उभर रहे है जिसकी राजनैतिक दूरदर्शिता को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भली भांति समझते है मोदी पहले ही उत्तराखंड के धामी को लेकर 21 सदी का दशक उत्तराखंड का दशक होने की बात बाबा केदार की नगरी से बोल चुके है।
निकाय चुनाव में 12 दिनों में पुष्कर सिंह धामी ने 52 जनसभा रोड शो करके अपना पसीना बहाया है उसने विपक्ष कांग्रेस को बड़ा राजनैतिक नुकसान पहुंचाया है हर चुनाव में धामी के बूते चुनाव में जीत का स्वाद लेने वाले ऐसे नेता अब अपनी राजनैतिक जमीं को खत्म होने से आने वाले दिनों में देखेंगे बीजेपी 2027 के लिए निकाय चुनाव सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है चुनावी परिणाम 25 को आएंगे उत्तराखंड में जनता का मूड किस तरफ रहा
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म है, जहां विभिन्न दलों की रणनीतियाँ और उम्मीदवारों की स्थिति एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। इस बार, दिल्ली चुनाव में नए चेहरों के चुनावी मैदान में उतरने के कारण मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। AAP, भाजपा, और कांग्रेस तीनों ने अपने-अपने रणनीतिक बदलाव किए हैं, जो दिल्ली की सियासत में नए समीकरण पैदा कर सकते हैं।
AAP का 4वीं बार सत्ता में आने का इरादा: AAP ने इस बार विधानसभा चुनाव में कई पुराने चेहरों को किनारे करते हुए नए नेताओं को अवसर दिया है। दिल्ली में पार्टी की उम्मीद इस बार भी तीन बार की जीत पर चौथी बार सत्ता में बने रहने की है। इस रणनीति में कुछ नए चेहरों को मैदान में उतारने के साथ, पार्टी ने पिछले चुनावों में जीतने वाले कुछ मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया। इससे पार्टी को अपनी रणनीतिक सफलता या विफलता का फैसला करना होगा।
भा.ज.पा. और कांग्रेस की रणनीतियाँ: भा.ज.पा. ने भी नए चेहरे उतारे हैं और इस बार अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हुए नई उम्मीदों का सामना किया है। वही, कांग्रेस ने भी कई सीटों पर पुराने चेहरों को हटा दिया है और नए उम्मीदवारों को मौका दिया है। कांग्रेस की यह रणनीति दिल्ली में अपनी स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से है।
नई सीटों पर चुनाव: चुनाव में 10 सीटों पर नए चेहरों का आगाज होगा, जैसे कि आदर्श नगर, चांदनी चौक, हरी नगर, जनकपुरी, नजफगढ़, पालम, महरौली, देवली, त्रिलोकपुरी और कृष्णा नगर। इन सीटों पर न केवल पार्टी के उम्मीदवार बदल रहे हैं, बल्कि कई पुराने विधायक भी चुनावी दंगल में हिस्सा नहीं लेंगे। यह बदलाव दिल्ली के सियासी समीकरण को नया मोड़ दे सकते हैं। इन सीटों पर नए चेहरे अपनी किस्मत आजमाएंगे और यह चुनावी प्रक्रिया इन नेताओं के लिए एक परीक्षा की घड़ी होगी।
दिल्ली की प्रमुख सीटों पर मुकाबला: दिल्ली विधानसभा की कुछ प्रमुख सीटों पर, जैसे कि नई दिल्ली, कालकाजी, बल्लीमारान और पटपड़गंज, मुकाबला बेहद तीव्र होगा। इन सीटों पर विभिन्न दलों के दिग्गज नेता अपने-अपने भाग्य को आजमाने के लिए मैदान में हैं। इन सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या भी ज्यादा है, जिससे मुकाबला और भी कड़ा हो गया है।
नए चेहरों का चुनावी दंगल: चांदनी चौक, नजफगढ़, पालम, महरौली और देवली जैसी सीटों पर नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने से, यह सापेक्ष रूप से नई राजनीति का आगाज कर रहा है। इस बदलाव से यह पता चलता है कि दिल्ली के राजनीतिक दल अब पुराने चेहरों से बाहर निकलकर नए नेताओं को मौका दे रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यह चुनावी समर निश्चित रूप से एक दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण दौर होगा, जहां AAP, भाजपा और कांग्रेस तीनों अपनी-अपनी रणनीतियों से सत्ता पर काबिज होने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP के लिए पूर्वांचलियों के प्रभाव को लेकर जो रणनीतिक पारी का उल्लेख किया है, वह सचमुच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा करता है। AAP द्वारा पूर्वांचलियों को चुनावी मैदान में उतारना एक बड़ा दांव हो सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में उनकी संख्या और प्रभाव चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
पूर्वांचलियों का दिल्ली विधानसभा की 20 से अधिक सीटों पर दबदबा है, और इन सीटों पर उनका प्रभाव किसी पार्टी को जीत दिलाने या हारने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में AAP का यह कदम बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है।
इसके विपरीत, बीजेपी भी अपनी चुनावी रणनीतियों पर लगातार काम कर रही है, खासकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिल्ली में रोड शो के माध्यम से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिशें। बीजेपी ने अपनी जमीनी कोशिशों के तहत पूर्वांचलियों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति बनाई है, और दिल्ली के चुनावी मैदान में इस क्षेत्र के प्रभाव का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत झोंकी है।
यह खेल दिल्ली विधानसभा के लिए एक रोमांचक चुनावी मुकाबला पैदा कर सकता है, जहां AAP और बीजेपी दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में हैं। AAP ने जहां एक तरफ पूर्वांचलियों को अपने साथ जोड़ा है, वहीं बीजेपी दिल्ली में अपनी सत्ता बचाने के लिए हर रणनीति को अपनाने में जुटी है।
आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक को भ्रष्टाचार में जाना पड़ा जेल
सीएम धामी ने दिल्ली वजीरपुर में पार्टी प्रत्याशी पूनम शर्मा के पक्ष में किया रोड-शो
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वजीरपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी श्रीमती पूनम शर्मा के पक्ष में आयोजित रोड-शो में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भाजपा के चुनाव कार्यालय का भी शुभारंभ किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीएम धामी को सुनने के लिए पहुंचे। लोगों ने जगह-जगह फूूल और मालाओं के साथ सीएम धामी का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में पूरी तरह से फेल हो गई है। केजरीवाल सरकार ने नए अस्पताल और स्कूल खोलने के नाम पर दिल्ली की जनता को ठगने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जिन राज्यों में डबल इंजन सरकार है। वे राज्य आज तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर है।
उन राज्यों में एक रुपये का भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, जबकि दिल्ली में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री से लेकर विधायक तक को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि ये जनता को तय करना है कि उन्हें दिल्ली को नई-नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली डबल इंजन सरकार चाहिए या फिर भ्रष्टाचार में संलिप्त सरकार।
उन्होंने कहा कि यह दिल्ली सरकार की ही नाकामी है कि जो यमुना उत्तराखण्ड में स्वच्छ और निर्मल बहती है वो दिल्ली पहुंचते ही नाले में तब्दील हो जाती है। दिल्ली में माँ यमुना का पानी आचमन तो दूर सिंचाई के भी लायक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में आयुष्मान योजना तक को लागू नहीं किया। जिस कारण लोगों को सस्ती दरों पर इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने जनता से दिल्ली में डबल इंजन सरकार बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल भी उपस्थित रहे।
मणिपुर में जेडीयू और भाजपा के बीच गठबंधन टूटने की खबर राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू ने भाजपा की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। जेडीयू के राज्य इकाई ने इस फैसले के बारे में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को सूचित किया है। इसके साथ ही, जेडीयू के एकमात्र विधायक मोहम्मद अब्दुल नासिर अब विपक्ष में बैठेंगे।
यह घटनाक्रम मणिपुर में हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच भाजपा-जेडीयू गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। नीतीश कुमार की जेडीयू के लिए यह कदम भाजपा के साथ उनके रिश्ते में दरार को और स्पष्ट करता है, और इसे बिहार में भी राजनीतिक समीकरणों पर असर डालने के रूप में देखा जा सकता है।
मणिपुर में जेडीयू का समर्थन वापस लेना भाजपा के लिए एक झटका हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में हिंसा और राजनीतिक तनाव बढ़े हुए हैं।
पहाड़ पर हुए इस दर्दनाक हादसे में महिला फार्मासिस्ट की जान चली गई, जो निश्चित रूप से बहुत ही दुखद घटना है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर भटवाड़ीसैंण में हुए इस हादसे में वाहन श्रीनगर से अगस्तमुनि जा रहा था, जब अचानक वाहन महिला समेत खाई में गिर गया। घटना की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। महिला को गंभीर अवस्था में बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मृतक महिला की पहचान कुशमलता (42) के रूप में हुई, जो उखीमठ के परकंडी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात थीं। यह हादसा न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि समग्र स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक बड़ा आघात है। इस घटना के कारण उनके परिवार में गहरी शोक की लहर है।
उत्तराखंड के निकाय चुनावों में प्रचार का शोर मंगलवार को शाम पांच बजे थम गया, और अब 23 जनवरी को मतदाता अपने मतों का प्रयोग करेंगे। यह चुनाव प्रदेश के 100 नगर निकायों में हो रहे हैं, जिसमें 11 नगर निगमों में मेयर के 72 प्रत्याशी, नगर पालिका व नगर पंचायतों में अध्यक्ष के 445 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाएंगे।
23 जनवरी को मतदान के बाद 25 जनवरी को परिणाम घोषित होंगे, जो प्रदेश के राजनीतिक भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण होंगे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने प्रचार के अंतिम दिन पूरी ताकत से माहौल तैयार किया है, और बुधवार को प्रत्याशी केवल डोर-टू-डोर प्रचार कर सकेंगे।
इन चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए यह अवसर अपने चुनावी किले मजबूत करने का है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपनी पूरी रणनीति के साथ मैदान में हैं, और अब 23 जनवरी को मतदाता अपनी छोटी सरकार का चुनाव करेंगे, जिससे प्रदेश की राजनीति की दिशा तय होगी।