उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी जारी है, जिससे ठंड में बढ़ोतरी हो गई है। उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी और जनपद के ऊंचे क्षेत्रों में सुबह से बर्फबारी हो रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री में भी बर्फबारी का सिलसिला जारी है। निचले इलाकों में घने बादल छाए हुए हैं। मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में बर्फबारी का दृश्य अत्यंत भव्य और आकर्षक है।
यमुनोत्री धाम के साथ-साथ मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में भी बर्फबारी हो रही है। सुबह चार बजे से यमुनोत्री धाम और इसके आसपास के क्षेत्रों जैसे खरसाली गांव, जानकीचट्टी, नारायणपुरी और फूलचट्टी में बर्फबारी हो रही है, जबकि निचले इलाकों, जैसे बड़कोट तहसील क्षेत्र में रिमझिम बारिश हो रही है। मां यमुना के शीतकालीन पुजारी शेखर उनियाल ने बताया कि सुबह से ही क्षेत्र में बर्फबारी हो रही है, जो इस क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा रही है।
देहरादून उत्तराखंड में भू कानून को कैबिनेट से पास होने के बाद सदन में पेश किए जाने से राज्य में एक उम्मीद सरकार से बनी है। राज्य सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बढ़ा राजनैतिक स्टॉक खेला है जिसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है।
उत्तराखंड में भू कानून लंबे समय से जनता की मांग बना हुआ था, धामी ने सदन में कैबिनेट से इसको मंजूरी देकर आवाम को बड़ा लाभ दिया है। विरोध भी विपक्ष से कई सामाजिक लोग इसका कर रहे थे उनकी राज्य में भू कानून लागू किए जाने की मांग थी आखिरकार धामी की धमक एक बार फिर देखने को मिली है।
देहरादून उत्तराखंड में भू कानून की मांग लंबे समय से की जाती रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारों में भू कानून को लेकर पहले के बनाए गए नियमों को उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने निरस्त करते हुए संशोधन भू कानून को कैबिनेट से हरी झंडी दी है।
सियासत के गलियारों में भू कानून के कैबिनेट से पास होने के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि उत्तराखंड का नया भू-कानून राज्य की तस्वीर को बदल सकता है इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई ऐसी बेशकीमती जमीन है जिनको बचाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की है।
जल्द कानून को सदन में पेश किया जाएगा। जिलाधिकारी के स्तर पर अब इन जमीनों की खरीद नहीं हो पाएगी राज्य सरकार से जमीन की खरीद के लिए परमिशन लिया जाना जरूरी है। पुष्कर सिंह धामी लगातार उत्तराखंड की सियासत में मास्टर स्ट्रोक खेल रहे हैं ucc को उत्तराखंड में लागू किया जाना हो या फिर नकल विरोधी कानून, हर मोर्चे पर धामी की राजनीतिक कौशलता देखने को मिली है। विधानसभा सत्र के बीच कैबिनेट की बैठक से भू-कानून जैसे बड़े मुद्दे को लपक कर धामी ने दूरगामी राजनीतिक मास्टर स्ट्रोक खेला है।
भ्रम फैलाने की अपेक्षा कांग्रेस को सुझाव और चर्चा मे शिरकत की जरूरत
देहरादून 19 फरवरी। भाजपा ने कैबिनेट द्वारा भू कानून संशोधन विधेयक की मंजूरी पर खुशी जताते हुए इसे जनता से किया गया एक और वायदा पूर्ण करने वाला बताया है।
प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट ने मीडिया को दी प्रतिक्रिया मे मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ठोस कदम राज्य के भू संसाधनों और मूल स्वरूप के संरक्षण को लेकर हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने सख्त भू कानून निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। भट्ट ने कहा कि भाजपा राज्य निर्माण से लेकर उसके चौमुखी विकास के प्रति कटिबद्ध रही है। जिसमें प्रदेश की संस्कृति और उसके मूल स्वरूप को बरकरार रखना सर्वोपरी है। उसमें भी राज्य के सीमित भू संपदा और संसाधनों के संरक्षण को लेकर हमारी सरकारें हमेशा प्रयास करती रही हैं। जनसामान्य की भावना और प्रदेश की जरूरत समझते हुए भाजपा ने विधानसभा चुनावों में कठोर भू कानून लाने का संकल्प लिया था। जिसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार में आते ही इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। जिसने इस कानून से जुड़े प्रदेश के सभी हितधारकों से विचार विमर्श कर अपनी रिपोर्ट तैयार की। जिसके कानूनी, प्रशासनिक एवं व्यवहारिक सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। तदोपरांत सीएम ने जनता से बजट सत्र में सदन के पटल पर इसको प्रस्तुत करने का संकल्प किया।
इसी क्रम में आज कैबिनेट ने भू कानून संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है और इसे अब सदन में चर्चा के लिए रखा जाएगा। बतौर पार्टी कार्यकर्ता हम सबके लिए बेहद प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि मुख्यमंत्री ने पार्टी के चुनावी संकल्प पत्र के एक और अहम वादे की पूर्ति दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में चर्चा के बाद जब यह कठोर भू कानून अस्तित्व में आएगा तो यह राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा मैं अहम भूमिका निभाएगा।
भट्ट ने भू कानून को लेकर भ्रामक दुष्प्रचार के लिए कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक भू संसाधनों की दुर्गति करने के लिए वह सर्वाधिक जिम्मेदार है। कांग्रेस जब सरकार में आयी तो उसने संसाधनों को लूट कर राज्य के मूल स्वरूप को बिगड़ने का पाप किया। लिहाजा जब हम इस समस्या के निदान हेतु संशोधन कानून लेकर आए हैं तो वह अड़ंगा डालने की मंशा से झूठ और भ्रम फैला रहे हैं।
उन्होंने विपक्ष के सभी विधायकों से अपील की कि सदन के अंदर उनके पास इस मुद्दे को लेकर सकारात्मक चर्चा करने का अवसर हैं। लिहाजा बाहर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय उन्हें अपने ठोस तथ्यों और उचित तर्कों के साथ चर्चा में शामिल होना चाहिए। ताकि अंतिम स्वरूप में जब यह कानून सामने आए तो जनसामान्य की भावनाओं और राज्य के संरक्षण की संतुष्टि करने वाला हो।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जताया आभार
प्रदेश में अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के दिए थे निर्देश
सुबे के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी द्वारा विभागीय अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के क्रम में आज उद्यान विभाग में केन्द्रपोषित बागवानी मिशन योजनान्तर्गत भारत सरकार ने पण्डित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय उद्यान चौबटिया, अल्मोड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर टैम्परेट फ्रूट की स्थापना के लिए रुपये 671.62 लाख की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके लिए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।
यह परियोजना इण्डो-डच नीदरलैण्ड वर्किंग ग्रुप के सहयोग के साथ फसलों पर नवीन तकनीक अपनाते हुए कियान्वित की जायेगी। यह परियोजना में मुख्यतः शीतोष्ण फलों की फसल पर केन्द्रित है जिसमें सेब, आडू, नाशपाती, प्लम एवं अखरोट को सम्मिलित किया गया है। इस प्रस्ताव में आधार भूत संरचना, ट्रेनिंग हॉस्टल, सिंचाई प्रणाली, पॉलीहाउस, सॉर्टिंग ग्रेडिंग यूनिट, प्रदर्शन प्रखण्ड के साथ-साथ कोल्ड रूम की मंजूरी प्रदान की गयी है। जिसमें राज्य सरकार द्वारा मृदा प्रयोगशाला तैयार किये जाने के लिए भी सहयोग प्रदान किया जायेगा। परियोजना का लक्ष्य फसल में नवीन तकनीक अपनाते हुए उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता में वृद्धि करना है। जिस हेतु फसलवार एवं नवीन तकनीक सहित प्रदर्शन प्रखण्ड स्थापित किये जायेंगें। विदित है कि उत्कृष्ठता केन्द्र अनेक अच्छी कृषि पद्धतियों और किस्मों का मूल्याकन करेगा तथा किसानों को प्रर्दशनी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा ताकि कृषक उपयुक्त पद्धति को अपनाकर अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में शीतोष्ण फल उत्पादन की अपार सम्भावनायें है। यह सेंटर उत्तराखंड में शीतोष्ण फलों की उन्नत खेती, अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे प्रदेश के किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी मिलेगी, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय में सुधार होगा। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह परियोजना राज्य की बागवानी को एक नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले फल उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी मिलेगी और उन्हें बाजार में अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राजकीय उद्यान चौबटिया, जो पहले से ही अपनी बागवानी प्रयोगशालाओं और अनुसंधान कार्यों के लिए प्रसिद्ध है, अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में और भी विकसित होगा। इससे प्रदेश में सेब, नाशपाती, आड़ू, खुबानी और अन्य समशीतोष्ण फलों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा
उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा प्रदेश में सख्त भू-कानून को मंजूरी दिए जाने पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हार्दिक बधाई और आभार व्यक्त किया।
डॉ. निशंक ने कहा कि, “उत्तराखंड की जनता की वर्षों पुरानी मांग और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया यह निर्णय प्रदेश के स्वाभिमान, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह केवल एक भू-कानून नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है।”
उन्होंने आगे कहा कि डबल इंजन की सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड के विकास, आत्मनिर्भरता और मूल पहचान को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्र सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन से यह सपना साकार हो सका है, जिसके लिए वह हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
डॉ. निशंक ने प्रदेशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, “हम सब मिलकर अपने राज्य की संस्कृति, परंपरा और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत रहेंगे और उत्तराखंड को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 फरवरी को अपनी शीतकालीन यात्रा के तहत उत्तरकाशी जिले के हर्षिल-मुखबा क्षेत्र में पहुंचेंगे। मुखबा गंगोत्री धाम का शीतकालीन स्थल है, और इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी गंगा मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे। इसके अलावा, हर्षिल में प्रस्तावित कार्यक्रम को दूरदर्शन के माध्यम से लाइव प्रसारित किया जाएगा ताकि पूरा देश इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को देख सके। इस कार्यक्रम की तैयारी के लिए शासन के अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया और मीडियाकर्मियों से बातचीत कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की।
मंगलवार को सचिव मुख्यमंत्री, गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन, और आईजी गढ़वाल मंडल राजीव स्वरूप ने मुखबा और हर्षिल में प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट और एसपी सरिता डोभाल से कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और रूपरेखा की जानकारी ली।
विनय शंकर पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत से लेकर उनके प्रस्थान तक के हर पहलू की योजना तय प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों के अनुसार की जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस आयोजन में क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम भी शामिल किए जाएं।
साथ ही, उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और शिल्प कला पर आधारित प्रदर्शनी के ले-आउट प्लान और अन्य व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। सचिव विनोद कुमार सुमन ने कार्यक्रम के दौरान ब्लूबुक में निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार काम करने के निर्देश दिए।
हर्षिल में आयोजित कार्यक्रम स्थल पर अधिक लोगों को व्यवस्थित रूप से बैठाने के लिए सिटिंग प्लान में बदलाव करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, आईजी राजीव स्वरूप ने सुरक्षा प्रबंधों का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था, मूवमेंट, यातायात प्लान और पार्किंग व्यवस्था पर अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि हर्षिल स्थित कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश और निकास की उचित व्यवस्था की जाए।
देहरादून में 18 से 20 फरवरी तक उत्तराखंड विधानसभा सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राज्य सरकार द्वारा दो विधेयक और तीन अध्यादेश सदन में पेश किए जाएंगे। 20 फरवरी को वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल सदन में बजट पेश करेंगे। राज्य सरकार बजट को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है और इसमें विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में 18 से 20 फरवरी तक सदन के संचालन के लिए एजेंडा तय किया गया है।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) के अभिभाषण पर चर्चा और धन्यवाद प्रस्ताव होगा। 20 फरवरी को बजट पेश होने का समय दोपहर 12:30 बजे निर्धारित है, और बजट एक लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसमें सरकार का फोकस महिला, युवा, गरीब, किसान और अवस्थापना विकास पर हो सकता है।
विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए खास मुद्दे नहीं मिल रहे हैं, सिवाय स्मार्ट मीटर के। विपक्ष के पास कोई बड़ा मुद्दा नहीं दिखता जिससे वह सदन में समय खराब कर सके। हाल ही में, जब राज्यपाल के अभिभाषण के समय विपक्ष ने हंगामा किया, वह चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष के सदस्य काजी निजामुदीन ने सदन की अवधि बढ़ाने का सवाल उठाया और सरकार से इसे लेकर मांग की है कि सदन में अधिक समय तक चर्चा हो।
यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड राज्य में 2000-2001 में प्रति व्यक्ति आय 16,232 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2023-24 में 2,46,178 रुपये हो गई है, जो राज्य की निरंतर प्रगति को दर्शाता है। राज्य में बेरोजगारी दर में कमी आई है। राज्य सरकार ने पारदर्शी और नकल विहीन परीक्षाओं का आयोजन किया, जिससे राज्य के युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिल रहे हैं। राज्यपाल के बजट अभिभाषण के साथ सदन में सरकार की प्राथमिकताओं और संकल्पों पर चर्चा की जाएगी।
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आम जन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा विधानसभा के आसपास लगने वाले बैरियरों को पहले के मुकाबले ज्यादा खुलवाकर बनाया गया है, जिससे आमजन के साथ- साथ स्कूली वाहन भी बिना किसी परेशानी के आवाजाही कर सके तथा किसी प्रकार के जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।
इसके अतिरिक्त LIC बिल्डिंग के पास लगने वाले मुख्य बैरियर से आगे स्लाइडिंग बैरियर लगाकर व्यवस्था को इस प्रकार से बनाया गया है कि धरना प्रदर्शन के दौरान भी बिना किसी परेशानी के उक्त मार्ग से आमजन का आवागमन सुनिश्चित किया जा सके, जबकि पूर्व में धरना प्रदर्शन के दौरान उक्त बैरियर से आम जन का आवागमन प्रतिबंधित किया जाता था।
ग्रामीण शासन को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड को 93 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि मिली
केंद्र सरकार ने पंजाब, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान जारी किया है। पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई)/ ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को प्रदान किए गए ये अनुदान जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पंजाब के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 225.1707 करोड़ रुपये की अप्रतिबंधित अनुदान (स्थानीय निकायों को उनके क्षेत्र में विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दी जाने वाली धनराशि) की पहली किस्त जारी की गई है। ये धनराशि राज्य की 13144 ग्राम पंचायतों, 146 ब्लॉक पंचायतों और सभी 22 जिला पंचायतों के लिए है।
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जारी पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान में वित्तीय वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदानों की 237.1393 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदानों की पहली किस्त की रोकी गई राशि 6.9714 करोड़ रुपए शामिल है। ये धनराशि राज्य की 11548 ग्राम पंचायतों, सभी 146 ब्लॉक पंचायतों और सभी 27 जिला पंचायतों के लिए है। वहीं उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए, वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदानों की 93.9643 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी की गई है।
पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय ( पेयजल और स्वच्छता विभाग ) के माध्यम से भारत सरकार ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है , जिसे बाद में वित्त मंत्रालय जारी करता है।
आवंटित अनुदानों की सिफारिश की जाती है जिसे एक वित्तीय वर्ष में 2 किस्तों में जारी किया जाता है। वेतन और अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर, संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस ( 29 ) विषयों के तहत स्थान-विशिष्ट में महसूस की जाने वाली जरूरतों को पूरा करने के लिए पंचायती राज संस्थान (पीआरआई) / ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) इस अनबंधित अनुदानों का उपयोग करता है। इन अनुदानों का उपयोग (ए) स्वच्छता और ओडीएफ स्थिति के रखरखाव की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है, और इसमें विशेष रूप से घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, और मानव मल और मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए।
इस अनुदान का उपयोग (क) घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, विशेष रूप से मानव मल और मल कीचड़ का प्रबंधन शामिल करते हुए स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति को बनाए रखने और (ख) पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन तथा जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
देहरादून उत्तराखंड विधानसभा सत्र में एक माननीय आचरण का खुला मखौल उड़ाते नजर आए है। राज्य की सबसे बड़ी जनप्रतिनिधि अदालत में माननीय का आचरण कुछ ऐसा नजर आए जिसको लेकर सत्ता पक्ष के नेता सदन भी काफी नाराज नजर आए।
वाकया उस समय देखने को मिला जब विपक्ष के सदस्य महामहिम के अभिभाषण के समय वेल में आकर हंगामा कर रहे थे, सरकार के बजट भाषण को शालीनता से सुनने के बजाय विपक्ष के एक सदस्य अपने आचरण की सीमा को तोड़ते देखे गए जो सदन में चर्चा का विषय बना रहा। ऐसे आचरण की उम्मीद चुने हुए सदस्य से उनकी जनता ने भी नहीं की होगी।
अपनी विधानसभा के मुद्दों को उठाए जाने के लिए ऐसे प्रतिनिधि कितने सजग है, इसको बानगी सदन में नजर आई। पूरे राज्य की जनता बजट से जहां सरकार से उम्मीद करती नजर आ रही है ऐसे में चुने हुए एक प्रतिनिधि अपने आचरण से पूरी विधानसभा में चर्चा का केंद्र बन गए। सवाल ये उठ रहा है क्या ऐसे चुने हुए प्रतिनिधि जनता की समस्याओं को कैसे सदन में उठाएंगे जिसका आचरण सबसे बड़ी जनप्रतिनिधि अदालत में राज्य की छवि को तार तार करता देखा गया।
नेता सदन ने विपक्ष के सदस्यों के हंगामे पर मीडिया से बात करते हुए कहा सदन में विपक्ष का हंगामा किया जाना साबित करता है, विपक्ष सदन को सुचारू रूप से नहीं चलने देना चाहता बेहतर होता विपक्ष अपनी अपनी बात को प्रमुखता से उठा कर सरकार के सामने अपनी बात रखते, लेकिन हंगामे के कारण सदन में महामहिम के अभिभाषण के समय सदस्यों का हल्ला किया जाना विकास विरोधी है।
सीएम धामी ने कहा राज्य सरकार बजट में हर वर्ग के लिए नई उम्मीद से आगे राज्य को ले जाने की परिकल्पना को साकार करना चाहती है ताकि जनता तक विकास की किरण पहुंच सकें लेकिन विपक्ष सिर्फ हंगामे तक सीमित है जिसको राज्य की जनता देख रही है।