Sunday, March 8, 2026
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भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड के सीएम ने दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में 1064 हेल्पलाइन की बैठक के दौरान निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्ड के लिए सभी विभागों द्वारा अपने स्तर से प्रयास किये जाएं। विभागों में जिन मामलों में अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, विभागों द्वारा इसके समाधान के लिए उचित कार्यवाही की जाए। एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का समय-समय पर ट्रांसफर किया जाए। 1064 हेल्पलाइन की प्रभावशीलता को नियमित बनाये रखने के लिए सभी विभाग विजिलेंस को सहयोग करें। सीएम हेल्पलाइन 1905 के साथ 1064 हेल्पलाइन की भी समीक्षा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर सघन जांच के साथ कठोर कार्यवाही भी की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए की शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनी रहे और भ्रष्टाचार की शिकायत होने पर यदि वह सही पाई जाती है, तो शिकायतकर्ताओं को प्रोत्साहित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए विभाग स्तर पर नोडल अधिकारी बनाये जाएं और उनको प्रशिक्षण भी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण में सभी विभाग विजिलेंस को सहयोग करें।

बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले तीन सालों में कुल 66 लोगों को ट्रैप किया जा चुका है। 72 भ्रष्टाचारियों को हिरासत में भी लिया गया है। राजस्व विभाग, पुलिस और विद्युत विभाग में सबसे अधिक कार्मिक ट्रैप किए गए है। 2025 में टोलफ्री नंबर 1064 एवं वेबसाइट से अब तक 343 शिकायतें प्राप्त हुई है, जिन पर कार्यवाही गतिमान है। रिवॉल्विंग फंड के तहत ट्रैप की कार्यवाही में शिकायतकर्ताओं को ट्रैप की धनराशि वापस की जाने की प्रकिया शुरू की गई है। जिसमें वर्तमान में 33 लोगों को ट्रैप की धनराशि वापसी की प्रक्रिया गतिमान है।

बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव न्याय प्रदीप पंत, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, एल. फैनई, आर.मीनाक्षी सुदंरम, निदेशक सतर्कता वी. मुरूगेशन, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

स्पा सेंटरों पर छापा: अवैध कारोबार बनाम वैध कारोबार

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स्पा सेंटरों पर छापा: अवैध कारोबार बनाम वैध कारोबार उत्तराखंड में स्पा सेंटरों का कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है और यह अब एक नया व्यापार बन चुका है। खासकर देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में स्पा सेंटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना काल के बाद, जबकि स्थानीय व्यापारियों की संख्या में कमी आई है, स्पा सेंटरों के कारोबार ने कई नए व्यापारी आकर्षित किए हैं। हालांकि, स्पा सेंटरों का बढ़ता कारोबार कुछ समस्याओं को भी जन्म दे रहा है।

सही दिशा में चलने वाले स्पा सेंटर

जिन स्पा सेंटरों का संचालन सही तरीके से किया जा रहा है, वे ग्राहकों को अच्छा रिस्पॉन्स देते हैं और व्यापार में वृद्धि भी होती है। ये स्पा सेंटर पेशेवर तरीके से ग्राहकों को आराम और इलाज की सेवाएं प्रदान करते हैं। लेकिन उत्तराखंड में यह आमतौर पर नहीं दिखाई देता।

स्पा सेंटरों में अनियमितताएं और अवैध गतिविधियां

कुछ स्पा सेंटरों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, जो उन्हें बदनाम कर रहे हैं। विशेष रूप से देहरादून और अन्य बड़े शहरों में कुछ स्पा सेंटर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगते हैं। इन स्पा सेंटरों में अवैध गतिविधियों के होने की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन पुलिस कभी-कभी ही इन पर कार्रवाई करती है।

हालांकि, कुछ मामलों में पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के अधिकारियों ने सख्ती दिखाई है। हाल ही में, पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की टीम ने रुड़की में आरआर सिनेमा परिसर में तीन स्पा सेंटरों पर छापा मारा। इस दौरान इन स्पा सेंटरों में कई अनियमितताएं पाई गईं, जैसे दस्तावेजों और रिकॉर्ड रजिस्टर में गड़बड़ियां। इन स्पा सेंटरों के संचालकों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

स्पा सेंटरों की बढ़ती संख्या और पुलिस की कार्रवाई

रुड़की में छापेमारी के दौरान पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की टीम ने बारीकी से स्पा सेंटरों की जांच की। इस दौरान, सिनेमा परिसर में स्थित तीन स्पा सेंटरों के संचालन में कई नियमों का उल्लंघन पाया गया। इस कार्रवाई के बाद, पुलिस ने इन सेंटरों पर जुर्माना लगाकर इसे एक कड़ी चेतावनी दी।

कुल मिलाकर

उत्तराखंड में स्पा सेंटरों का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन कुछ सेंटरों में अवैध गतिविधियों की जानकारी सामने आ रही है। यह राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि जब तक इन सेंटरों को पूरी तरह से नियमन और जांच के तहत नहीं लाया जाता, तब तक अवैध कारोबार की संभावना बनी रहेगी। सरकार और पुलिस को इस दिशा में और कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि राज्य में इस तरह के अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

चार धाम यात्रा में रील पर रोक, बैकफुट पर नहीं जाएगी सरकार: धामी का बड़ा बयान

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चार धाम यात्रा में रील पर रोक बैक फुट पर नहीं जाएगी सरकार धामी का बड़ा बयान

चार धाम यात्रा में रील पर रोक, बैकफुट पर नहीं जाएगी सरकार: धामी का बड़ा बयान देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने फैसलों से लगातार चर्चा में बने रहते हैं। राज्य में उनके निर्णय विपक्ष से लेकर अन्य सभी दलों द्वारा सराहे गए हैं, यही कारण है कि वह राज्य में अपनी धमक के साथ फैसले लेते हैं और बैकफुट पर आने का सवाल नहीं उठता। ताजा मामला मुख्यमंत्री धामी का बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा की परंपराओं को मानना होगा और रील पर रोक के मामले पर भी स्पष्ट रुख अपनाया है।

सीएम धामी ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन में अंतर है, और इसलिए चार धाम यात्रा की परंपराओं का पालन करना आवश्यक है। लिव-इन रिलेशनशिप के विषय पर उन्होंने कहा कि इस पर सरकार पीछे नहीं हटेगी, हाला

लिव-इन रिलेशनशिप पर नहीं होगी ढील

राज्य में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के विरोध पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, “हमने 2022 के चुनाव में वादा किया था कि भाजपा सरकार बनने पर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करेंगे, और हम उस वादे को पूरा कर चुके हैं।”

धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह विषय कई बार उच्चतम न्यायालय में भी उठ चुका है। उन्होंने यह कहा कि यदि इस पर कोई सुझाव आता है तो उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।

चारधाम यात्रा में रील कल्चर पर रोक

चारधाम यात्रा के दौरान रील कल्चर पर रोक से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन के बीच अंतर को समझना होगा। उन्होंने कहा, “चारधाम यात्रा को विशुद्ध रूप से यात्रा होना चाहिए, और यह धार्मिक उद्देश्य के लिए है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुराने रील चलाने से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है।

धामी का ‘इकोलॉजी और इकॉनमी’ मॉडल

सीएम धामी ने केदारनाथ में पीएम मोदी के नेतृत्व में हुए पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां इकोलॉजी का पूरा ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का विकास मॉडल ‘इकोलॉजी और इकॉनमी का संतुलन’ है। धामी ने यह भी बताया कि चारधाम यात्रा के आसपास के क्षेत्रों में भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए नए स्थान विकसित किए जा रहे हैं।

आपदाओं का सामना करना सबसे बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में आपदाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बादल फटना, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाएं अक्सर होती हैं, और इनसे निपटना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने सिलक्यारा टनल हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अतिक्रमण और कानून के पालन पर जोर

मुख्यमंत्री ने राज्य में अतिक्रमण को लेकर अपने सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया और कहा कि अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम कानून पर चलने वाले लोग हैं और अतिक्रमण को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।”

वक्फ कानून और देवभूमि की पवित्रता

धामी ने राज्य में वक्फ कानून लागू करने का भी संकेत दिया और कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना और डेमोग्राफी में बदलाव को रोकना उनके प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। इसके लिए उन्होंने सत्यापन अभियान चलाया और अन्य सख्त कानूनों को लागू किया है।

पीएम मोदी के साथ काम करने का अनुभव

अंत में, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को आधुनिक भारत का शिल्पकार बताते हुए कहा कि पीएम हर छोटी बात पर ध्यान देते हैं और सामान्य लोगों की चिंता करते हैं।

सारांश में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में विभिन्न मुद्दों पर अपने स्पष्ट और सख्त रुख को पेश किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर निर्णय में कानून का पालन करती है और जनता के हित में फैसले ले रही है, चाहे वह चारधाम यात्रा की परंपराओं का पालन हो, समान नागरिक संहिता हो या अतिक्रमण हटाने का अभियान।

बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड दो लाख का हत्यारा एक साल बाद गिरफ्तार

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उधम सिंह नगर के नानकमत्ता गुरुद्वारा के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह को पुलिस ने एक साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस अपराधी ने पिछले एक साल में कई ठिकाने बदले और पहचान छिपाने के लिए अपना हुलिया भी बदल दिया था। 28 मार्च 2024 को बाबा तरसेम सिंह की हत्या के बाद सरबजीत सिंह और उसके साथी अमरजीत सिंह बाइक से फरार हो गए थे। जहां अमरजीत को अप्रैल 2024 में हरिद्वार में एनकाउंटर में मार दिया गया था, वहीं सरबजीत भूमिगत हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर पहले 50,00 फिर एक लाख और बाद में दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस ने पंजाब में उसके संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह हर बार चकमा देने में सफल हो गया। पुलिस को दो महीने पहले यह जानकारी मिली कि सरबजीत तरनतारन में किसी घर में छिपा हुआ है। इसके बाद एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने इस टास्क को अपने हाथों में लिया और पूरी जानकारी को गोपनीय रखते हुए एक टीम भेजी। पुलिसकर्मियों ने बदल-बदलकर तरनतारन जाकर जानकारी जुटाई और इस टास्क को इतना गोपनीय रखा कि किसी को इसकी भनक भी नहीं लगी।

सरबजीत का आपराधिक इतिहास
सरबजीत सिंह पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे मामले शामिल हैं। उसने पंजाब में 2006 से लेकर 2024 तक विभिन्न स्थानों पर अपराध किए हैं। बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले में भी उसने 302, 120B और 34 IPC के तहत केस दर्ज कराया गया था।

सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी ली
इस हत्याकांड के बाद सरबजीत सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली थी। पोस्ट में दावा किया गया था कि हत्या के बाद वह अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होगा और लोकेशन बांग्लादेश के ढाका में स्थित गुरुद्वारा नानकशाही की दी गई थी। हालांकि, यह पोस्ट सरबजीत ने खुद की थी या किसी और ने, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका।

वारदात की पूरी कहानी
28 मार्च 2024 को सुबह 6:15 बजे सरबजीत सिंह और अमरजीत सिंह बाइक से डेरा कार सेवा पहुंचे थे। यहां सरबजीत बाइक चला रहा था और बाबा तरसेम सिंह को गोली अमरजीत ने मारी। उस समय बाबा परिसर में कुर्सी पर बैठे हुए थे। अमरजीत को उत्तराखंड एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने 8 अप्रैल 2024 को एनकाउंटर में मार गिराया था, लेकिन सरबजीत सिंह पुलिस के हाथ नहीं आया। अमरजीत की मौत के बाद उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन एसएसपी के नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने सरबजीत को आखिरकार एक साल बाद गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि सरबजीत सिंह पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था। पुलिस अब इस हत्याकांड से जुड़े अन्य षड्यंत्रकारियों तक भी पहुंचने में सक्षम हो सकती है।

धन सिंह रावत करेंगे बड़ा खुलासा सियासत में आने वाला है भूचाल

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सहकारिता के माध्यम से महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर: डॉ. धन सिंह रावत यूपी के मुख्यमंत्री की बहन शशि पयाल को सम्मानित किया गया

देहरादून, धन सिंह रावत करेंगे बड़ा खुलासा सियासत में आने वाला है भूचाल उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए युवा सहकार और जनजातीय सहकारिता सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।

साल 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इसके तहत पूरे साल भर सहकारिता पर गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में “सहकारिता के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण” पर आधारित एक कार्यक्रम बुधवार को देहरादून के सर्वे चौक स्थित आरटीडीए ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित करके की।

कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 35 महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें सहकारिता विभाग से 12, महिला सहकारी बैंक से 11, और सहायता समूहों से जुड़ी 12 महिलाओं को निबंधक सहकारिता और सीजीएम नाबार्ड द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा, “उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने महिलाओं को सहकारिता में 33% आरक्षण दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में महिलाओं की आय को दोगुना नहीं, बल्कि तीन गुना बढ़ाया जाए।”

सहकारिता मंत्री ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत प्रदेशभर में विभिन्न जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सहकारिता विभाग द्वारा एक युवा सहकार कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को सहकारिता से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही जनजातीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद जैसे मिलेट्स के पुनर्जीवित करने पर चर्चा की जाएगी।

इस कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बहन शशि पयाल को भी सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सम्मानित किया। डॉ. रावत ने कहा कि शशि पयाल सादगी की मिसाल हैं। वह आज भी मंदिर में फूल और चाय बेचती हैं। उन्होंने सहकारिता विभाग से ऋण लेकर अपनी आय बढ़ाई है।

लोनी अर्बन क्रेडिट सोसाइटी मामले पर बोलते हुए डॉ. रावत ने कहा कि वह जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा करेंगे और मीडिया के सामने आएंगे। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की देन बताते हुए कहा कि इस मामले में भारत सरकार और राज्य सरकार ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कार्यक्रम में सचिव सहकारिता दिलीप जावलकर ने सहकारिता विभाग द्वारा उत्तराखंड में किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना की और महिला अधिकारियों की मेहनत की भी प्रशंसा की। निबंधक सहकारिता सोनिका ने महिला सशक्तिकरण पर अपने संबोधन में कहा कि यह तभी संभव है जब महिलाओं का शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड के सीजीएम पंकज यादव, पूर्व जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री सुभाष रमोला ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर “अपना घर” संस्था की नन्ही बच्चियों ने अद्भुत योग प्रदर्शन किया, जिससे सभी उपस्थित लोग अचंभित हो गए।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन संयुक्त निबंधक मंगला त्रिपाठी ने किया, और अंत में अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में अपर निबंधक सहकारिता आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल सहित सहकारिता विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और सहकारिता क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर दीदी की मिसाल हैं सीएम योगी की बड़ी बहन

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आत्मनिर्भर दीदी की मिसाल हैं सीएम योगी की बड़ी बहन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी बहन शशि पयाल ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत कुछ धनराशि लेकर स्वरोजगार की शुरुआत की थी। उनके पति पूरण सिंह पयाल और उन्होंने मिलकर इस योजना के माध्यम से पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के कोठार गांव में चाय की दुकान खोली। आज वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं।

योगी आदित्यनाथ की बड़ी बहन शशि पयाल ने किसी सिफारिश के बजाय अपने प्रयासों से आत्मनिर्भरता हासिल की है। अब उनकी बहू शिवानी पयाल भी उनके मार्ग पर चल रही हैं और पहाड़ों में महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति जागरूक कर रही हैं।

शशि पयाल की बहुउद्देशीय सहकारी समिति किमसार से 400 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सहकारिता विभाग द्वारा देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर शशि पयाल अपनी बहू शिवानी के साथ इस कार्यक्रम में पहुंचीं। शशि पयाल ने बताया कि वर्ष 2003-04 में उन्होंने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना से कुछ रकम प्राप्त कर स्वरोजगार शुरू करने का फैसला लिया था और इस पैसे से अपने पति के साथ मिलकर कोठार गांव में चाय की दुकान खोली थी।

सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के बीच तबादलों का कोटा नहीं हुआ निर्धारित, विभागों पर छोड़ा निर्णय

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देहरादून: सरकारी कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले के लिए कोटा तय करने के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सुगम क्षेत्र से जितने कर्मचारी दुर्गम क्षेत्रों में भेजे जाएंगे, उतने ही दुर्गम से सुगम क्षेत्र में तबादले होंगे। इस बार तबादलों के लिए कोई निश्चित कोटा नहीं तय किया गया है। स्थानांतरण सत्र के दौरान कितने शिक्षकों और कर्मचारियों का तबादला होगा, यह निर्णय विभागों की विवेकाधिकार पर छोड़ा गया है।

बुधवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने तबादला सत्र के दौरान सभी विभागीय अधिकारियों से उनकी राय ली। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्मिक विभाग ने बताया कि स्थानांतरण अधिनियम में तबादलों के लिए कोई निर्धारित कोटा नहीं है। हालांकि, अधिनियम के लागू होने के बाद कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए शुरुआत में 10 प्रतिशत तबादले किए गए थे, जिसे कोविड के समय शून्य सत्र के बाद बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया। पिछले सत्र में भी 15 प्रतिशत तबादले किए गए थे।

अब तक कुल 65 प्रतिशत तबादले किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह तय हुआ कि विभाग अपने स्तर पर तबादलों की संख्या निर्धारित करेंगे, लेकिन यह शर्त रखी गई कि जितने कर्मचारी या शिक्षक सुगम से दुर्गम में भेजे जाएंगे, उतने ही कर्मचारी पहाड़ से मैदान में स्थानांतरित होंगे। अनिवार्य तबादलों के अलावा, अनुरोध पर किए जाने वाले तबादलों पर भी चर्चा की गई। विभिन्न गंभीर बीमारियों के कारण कर्मचारियों को तबादले की आवश्यकता होती है, और ऐसे तबादले स्थानांतरण अधिनियम की धारा 27 के तहत किए जाते हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ऐसे तबादलों की सिफारिश करती है, और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद यह तबादले किए जाते हैं।

बैठक में एकल अभिभावकों को अनिवार्य तबादलों से छूट देने पर भी सहमति बनी। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे थे। मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्णानंद नौटियाल ने कहा कि एकल अभिभावक के ऊपर परिवार की सभी जिम्मेदारियां होती हैं, और इस निर्णय से उन्हें अपनी नौकरी के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने में सहूलियत होगी।

लुक आउट सर्कुलर (LOC) / रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) LUCC संचालकों के विरुद्ध निर्देश

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LUCC के विरुद्ध पुलिस कार्यवाही की ADG लॉ एंड ऑडर ने की समीक्षा, जांच में तेजी लाने और LUCC संचालकों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही के दिए निर्देश
लुक आउट सर्कुलर / रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के निर्देश, ED और आयकर विभाग को भी भेजी जाएगी रिपोर्ट
मनी ट्रेल के आधार पर अभियुक्तों के बैंक खातें करें फ्रीज तथा संपत्ति करें अटैच

26 मार्च, 2025 को वी0 मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड द्वारा समस्त जनपद प्रभारियों तथा परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों के साथ राज्य में Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Co-operative Society (LUCC) के संचालकों के विरूद्ध पंजीकृत कुल 07 अभियोगों में की गई पुलिस कार्यवाही की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान उन्होंने जांच में तेजी लाने, अभियुक्तों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्यवाही करने और पीड़ितों के शिकायती प्रार्थना पत्रों पर तत्काल अभियोग पंजीकृत करने के निर्देश दिए।

गोष्ठी में यह भी निर्देशित किया गया कि राज्य में लगभग 35 शाखाओं के मुख्य संचालक समीर अग्रवाल (निवासी मुंबई), पंकज अग्रवाल (निवासी मध्यप्रदेश), एवं शबाब हुसैन (निवासी उत्तर प्रदेश) आदि के विदेश भागने की संभावना को देखते हुए लुक आउट सर्कुलर (LOC) / रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधानिक कार्यवाही हेतु इंटरपोल की सहायता लेने की आवश्यकता है। साथ ही, जो अभियुक्त उत्तर प्रदेश की विभिन्न कारागारों में निरुद्ध हैं, उन्हें वारंट बी पर लाकर नियमानुसार पुलिस कस्टडी रिमांड में लिया जाए और निवेशकों की संपत्ति बरामद की जाए। इन अभियुक्तों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को अधिग्रहित करने के निर्देश भी दिए गए।

पंजीकृत अभियोगों की विस्तृत रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग, भारत सरकार के स्थानीय कार्यालयों को भेजने के भी निर्देश दिए गए। साथ ही मनी ट्रेल के आधार पर अभियुक्तों के बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्यवाही की जाए। विवेचना के दौरान रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) से अभिलेख प्राप्त कर, साक्ष्य के आधार पर Uttarakhand Protection of Interests of Depositors (in Financial Establishments) Act, 2005 (UPID Act) और Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 (BUDS Act) के तहत भी अभियोग पंजीकृत किए जाएं, ताकि निवेशकों और पीड़ितों की धनराशि लौटाने हेतु सक्षम अधिकारी से पत्राचार किया जा सके।

गोष्ठी में नीलेश आनंद भरणे, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, धीरेन्द्र गुंज्याल, पुलिस उप महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, यशवंत चौहान, पुलिस अधीक्षक सीआईडी सहित अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

मस्जिदों पर कब्जा करके भाजपा क्या करेगी…?

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार की नीतियों के बारे में गलत जानकारी फैलाने पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विपक्ष के इरादों पर सवाल उठाए और पूछा कि वे वक्फ के नाम पर कितनी ज़मीन कब्जाने की योजना बना रहे हैं। क्या विपक्ष ने कभी वक्फ संपत्तियों का उपयोग करके कोई कल्याणकारी काम किया है? मस्जिदों पर कब्जा करके भाजपा को क्या हासिल होगा? विपक्ष जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए विपक्ष पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि क्या विपक्ष ने कभी वक्फ के नाम पर कोई अच्छा कार्य किया है? उन्होंने वक्फ संपत्तियों का अपने स्वार्थ के लिए दुरुपयोग किया है। एक संपत्ति को कई लोगों को बेच दिया गया, जिससे अब विवाद उत्पन्न हो रहे हैं।

मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए वक्फ बिल की आवश्यकता – सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जे और दुरुपयोग से मुक्त करना है, ताकि उन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए किया जा सके। सरकार वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि ये संपत्तियां मुस्लिम समुदाय की सेवा के लिए काम आ सकें। उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक देश और मुस्लिम समुदाय के लाभ के लिए आवश्यक है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेपीसी ने वक्फ संशोधन को आज की आवश्यकता बताते हुए इसे समयबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश की है। उनका मानना है कि यह देश और मुसलमानों के हित में होगा। हालांकि, इस संशोधन के लागू होने से उन लोगों को परेशानी हो सकती है, जिन्होंने वक्फ संपत्तियों पर कब्जा किया है या उन पर पैसा लगाया है, जिससे उनका पैसा जोखिम में पड़ सकता है।

वक्फ के नाम पर कई गलत निर्णय – सीएम
मुख्यमंत्री ने वक्फ बोर्ड के भूमि अधिग्रहण के अधिकार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वक्फ ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके सरकारों को ब्लैकमेल किया है और बिना किसी वैध कारण के संपत्तियों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किया है। ये लोग हमेशा संपत्ति की तलाश करते थे और फिर सरकारों को ब्लैकमेल करते थे। वक्फ के नाम पर कई गलत निर्णय लिए गए हैं, खासकर उस वक्फ के बारे में जो दावा करता है कि यह जमीन उनकी है। उन्होंने सवाल उठाया, “यह कौन सा देश है? आपको यह अधिकार किसने दिया है? क्या आप किसी संपत्ति पर कब्जा करेंगे? क्या आप किसी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करेंगे?” ऐसा नहीं हो सकता है।

पब्लिक टॉयलेट में लटका दिए गए कुणाल कामरा के फोटो

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पब्लिक टॉयलेट में लटका दिए गए कुणाल कामरा के फोटो, शिवसेना कार्यकर्ताओं का विरोध कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में उन्होंने महाराष्ट्र के एक राजनेता पर निशाना साधते हुए एक पैरोडी गीत गाया था, जिससे देश भर में गुस्सा भड़क गया था। इस विवाद को लेकर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने इंदौर में एक सार्वजनिक शौचालय के बाहर कुणाल कामरा की तस्वीर लटका दी और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन का कारण:

शिवसेना की युवा शाखा ने कुणाल कामरा के खिलाफ विरोध जताते हुए उनकी तस्वीर सार्वजनिक शौचालय के बाहर लगाने का कदम उठाया। यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब कुणाल ने महाराष्ट्र के एक राजनेता के राजनीतिक करियर पर कटाक्ष करते हुए गाने में बदलाव किया। गाने में बदलाव कर कामरा ने उन पर कटाक्ष किया, जिससे कई लोगों की भावनाएं आहत हुईं।

शिवसेना नेता की धमकी:

मध्य प्रदेश में शिवसेना की युवा शाखा के अध्यक्ष अनुराग सोनार ने कुणाल कामरा की आलोचना करते हुए कहा कि कॉमेडी के नाम पर वह लोगों को “गंदगी” परोस रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुणाल कभी मध्य प्रदेश आए तो शिवसेना कार्यकर्ता उनका चेहरा काला कर देंगे और उन्हें सड़कों पर परेड कराएंगे।

कुणाल कामरा का जवाब:

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस विवाद पर माफी मांगने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अपने विवादास्पद टिप्पणियों के लिए माफी नहीं मांगेंगे। इस विरोध प्रदर्शन के बावजूद वह अपनी बात पर अड़े हुए हैं।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी इस मामले पर टिप्पणी की और कहा कि कुणाल कामरा किसी से नहीं झुकने वाले हैं। उन्होंने कहा, “कामरा लड़ाकू हैं और वह माफी नहीं मांगेंगे। अगर आपको उनके खिलाफ कार्रवाई करनी है तो आपको कानूनी कदम उठाने होंगे।”

विवाद का असर:

कुणाल कामरा के इस विवादास्पद गाने के बाद उनका नाम राष्ट्रीय राजनीति में और कॉमेडी सर्कल में चर्चा का विषय बन गया। उनके गाने और टिप्पणी ने एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, और उनकी आलोचना भी की जा रही है, लेकिन उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अपनी कॉमेडी शैली से पीछे नहीं हटेंगे।