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राजकीय विद्यालयों में 68 हजार छात्र-छात्राओं ने लिया दाखिला

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सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेशभर के राजकीय विद्यालयों में 01 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल 2025 तक शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिये 68627 छात्र-छात्राओं का नामांकन किया गया, जोकि विद्यालयी शिक्षा विभाग के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि छात्र-छात्राओं का नामांकन कक्षा-01, कक्षा-06 और कक्षा-09 में हुआ है।

जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 5736, पिथौरागढ़ 4946, बागेश्वर 2708, ऊधमसिंह नगर 2931, नैनीताल 5373, चम्पावत 3273, चमोली 4871, उत्तरकाशी 3949, रूद्रप्रयाग 3725, पौड़ी 5954, देहरादून 11281, हरिद्वार 6817 तथा टिहरी गढ़वाल में 7063 छात्र-छात्राओं का राजकीय विद्यालयों में नामांकन किया गया है।

डा. रावत ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में छात्र नामांकन को बढ़ाने के लिये आज से प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा है, इस कार्यक्रम के साथ स्थानीय स्तर पर राजकीय विद्यालयों में नवप्रवेशित बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है साथ ही उन्हें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजकीय विद्यालयों में अधिक से अधिक छात्र नामांकन के लिये अधिकारियों एवं शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

फिल्म निर्माण की बेस्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा उत्तराखंड- तिवारी

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प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिये कार्यक्रम में फिल्म विकास परिषद के सीईओ व डीजी सूचना ने दी जानकारी

फिल्म निर्माण की सहूलियतों और अलग-अलग स्तर पर मिलने वाली सब्सिडी का मिल रहा लाभ

फिल्म नीति 2024 के प्रावधानों के चलते बड़ी संख्या में फिल्म निर्माता उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं। इससे जहां उन्हें कई तरह की सहूलियतें मिल रही है, वहीं अलग-अलग स्तरों पर सब्सिडी का लाभ भी मिल रहा है। आंचलिक फिल्मों के निर्माण और स्थानीय कलाकारों को शामिल करने पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यही कारण है कि उत्तराखंड आज फिल्म निर्माण के बेस्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।

सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिये कार्यक्रम में फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिन्दी और आठवीं अनुसूची की भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के प्रोडक्शन पर राज्य में खर्च की गई धनराशि का अधिकतम 30 फीसदी या तीन करोड़ तक की सब्सिडी देने का प्रावधान है। गढ़वाली, कुमाऊंनी व जौनसारी फिल्मों में मिलने वाली सब्सिडी को 25 लाख से बढ़ाकर दो करोड़ तक किया गया है।

प्रदेश में शूट होने वाली बाल फिल्मों को 10 फीसदी तक अतिरिक्त अनुदान की व्यवस्था है। विदेशी और 50 करोड़ से अधिक बजट की फिल्मों पर राज्य में व्यय राशि का अधिकतम 30 फीसदी या तीन करोड़ तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही राज्य शूट होने वाली वेब सीरीज, टीवी धारावाहिक को भी सब्सिडी का लाभ मिलेगा। डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म, ट्रैवलॉग, ब्लॉग व म्यूजिक वीडियो में भी सब्सिडी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में नई व कम प्रसिद्ध लोकेशन पर शूटिंग करने पर पांच फीसदी तक अतिरिक्त अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों व तकनीशियनों को शामिल करने पर फिल्म को 10 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि फिल्म नीति में देश के प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी छात्रवृत्ति दी जा रही है। साथ ही फिल्म सिटी के निर्माण की भी योजना है।

प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता हेमंत पांडेय ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से कई फिल्मों का निर्माण उत्तराखंड में हो रहा है। इससे यहां के स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को भी फायदा मिलेगा। स्थानीय फिल्मों को बढ़ावा मिलेगा। प्रेस क्लब अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कंडारी ने दोनों अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन सुरेंद्र सिंह डसीला ने किया। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष अनिल चन्दोला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, कार्यकारिणी सदस्य शूरवीर भंडारी, दीपक बड़थ्वाल, मनवर रावत, संदीप बड़ोला, मो. असद समेत अन्य पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

विदेशो मे संवैधानिक संस्थाओं की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे है राहुल: भट्ट

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भाजपा ने राहुल गांधी के अमेरिका में चुनाव आयोग पर दिए बयान को संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश बताया है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि वे विदेश जाकर देश का अपमान करने के अपराध में सीरियल अपराधी हैं। जो लूट में बेल पर बाहर अपने साथी त्रिपोदा के साथ, इन दिनों देश को बदनाम करने की यात्रा पर हैं।

उन्होंने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में दिए उनके बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। अब देश में आम धारणा बन गई है कि वे जब भी बोलेंगे, खासकर विदेश में तो हमेशा राष्ट्र विरोधी और देश की छवि खराब करने वाली बात ही कहेंगे। उन्होंने इस मर्तबा भी वही किया और देश की उस चुनाव प्रणाली और निर्वाचन का आयोग की मंशा को कटघरे में खड़ा किया, जिसके चलते ही उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने का अवसर मिला है। लगातार जनता द्वारा चुनाव दर चुनाव सबक सिखाने के बावजूद भी, राहुल देश के अपमान की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कटाक्ष किया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र की छवि खराब करने वाले ये वो शख्स है जो भ्रष्टाचार और लूट में आरोपी है तथा बेल पर है। इसी तरह कांग्रेस पार्टी भी पूरे देश में अशांति का माहौल बनाने की साजिश में जुटी है।

उन्होंने कहा कि जिनको लगता है कि वे विदेश जाकर इस महान लोकतंत्र की छवि को नष्ट कर सकते हैं, तो वे पूरी तरह गलत हैं। क्योंकि देश दुनिया भी देख रही है कि वे जहां भी वे हारते हैं, उसका ठीकरा वे चुनाव आयोग और ईवीएम पर फोड़ देते हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि जब वे झारखंड में जीते थे, तब क्या देश में अलग चुनाव आयोग था? जहां भी जीतते हैं, वहां ईवीएम ठीक हो जाता है और जहां भी वे हारते हैं, वहां कहते हैं कि चुनाव आयोग और ईवीएम गलत है।

उन्होंने हैरानी जताई कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस निंदनीय हमले के समय उनके साथ कोई और नहीं बल्कि हेराल्ड मामले में उनका सह आरोपी सैम पित्रोदा था, जो स्वयं नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर बाहर हैं। अब एक बार पुनः दोनों एक साथ हमेशा की तरह भारत को बदनाम करने की यात्रा पर निकले हुए हैं।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा किसी भी कीमत पर लोकतंत्र को कमजोर करने वाले ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देंगी।

चारधाम यात्रा के बेहतर प्रबंधन, वनाग्नि को रोकने और पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए- मुख्यमंत्री

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आगामी मानसून सीजन के दृष्टिगत भी सभी सुरक्षात्मक उपाय किये जाएं।

आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली-पानी कनेक्शन जैसी सुविधाएं अनधिकृत रूप से प्रदान करने वाले कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जन शिकायतों का शीघ्रता से समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। आगामी चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, होटल व्यवसायियों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय सचिवों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा के दौरान विभागों और जिला प्रशासन के स्तर पर सभी व्यवस्थाएं बेहतर बनाई जाए। चारधाम यात्रा आस्था का प्रमुख केन्द्र होने के साथ ही स्थानीय लोगों की आजीविका से भी जुड़ी है। चारधाम यात्रा से जुड़े सभी हितधारकों से निरन्तर समन्वय बनाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिये हैं। चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए जन सहयोग भी लिया जाए। यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा को लेकर ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने बैठक में वनाग्नि प्रबंधन के लिए वन विभाग के साथ सभी जिलाधिकारियों को पूर्ण तैयारी करने के निर्देश दिये है। वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। वनाग्नि नियंत्रण के लिए त्वरित कार्यवाही के लिए स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के नम्बर भी अपडेट रखे जाएं, ताकि वनाग्नि की घटना होने पर शीघ्रता से नियंत्रण किया जा सके। वनाग्नि की संभावना वाले क्षेत्रों में टीमें तैनात की जाए और उनकी निरंतर मॉनिटरिंग भी की जाए। मोबाइल गश्त टीमें भी तैनात की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि गर्मियों में लोगों को पेयजल की दिक्कत न हो। पेयजल की समस्याएं आने पर उनका त्वरित समाधान किया जाएं। पेयजल टैंकर की भी पर्याप्त उपलब्घता सुनिश्चित की जाए। सभी जिलाधिकारियों को पेयजल की समस्याओं के समाधान के लिए अपने स्तर से बैठक करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उन्होंने आगामी मानसून सीजन के दृष्टिगत भी सभी सुरक्षात्मक उपाय करने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से बाढ़ सुरक्षा से संबंधित कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। जल भराव की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सभी उपचारात्मक कार्य किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारियों द्वारा जन सुनवाई नियमित की जाए। तहसील दिवस, बीडीसी की बैठकों और बहुद्देशीय शिविरों के माध्यम से लोगों को योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि लोगों को अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े। ई-सेवाओं के माध्यम से लोगों को अधिकाधिक लाभान्वित किया जाए। अनावश्यक रूप से कार्यों में लेटलतीफी करने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विद्युत बिलों को लेकर प्राप्त हो रही शिकायतों का तुरंत निस्तारण किया जाए। स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य में बाहरी लोगों और संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए। अवैध अतिक्रमण पर नियमित कार्रवाई की जाए। आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली-पानी कनेक्शन जैसी सुविधाएं अनधिकृत रूप से अपात्र लोगों को प्रदान करने वाले कार्मिकों को तत्काल निलंबित कर टर्मिनेशन की कार्यवाही भी प्रारंभ की जाए। यह राज्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है, जिसमें कोई समझौता नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने दोनों मण्डल आयुक्तों को निर्देश दिए कि वे स्वयं फील्ड में जाकर इन निर्देशों की प्रगति का भौतिक सत्यापन करें और आगामी समीक्षा बैठक से पूर्व सभी कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय और सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने की “मुख्य सेवक संवाद” कार्यक्रम की शुरुआत

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हर माह विभिन्न योजना के लाभार्थियों से करेंगे संवाद

देहरादून में “गांव से ग्लोबल तकः होम स्टे संवाद” कार्यक्रम का हुआ आयोजन

प्रदेश भर से आए होम स्टे संचालकों से किया मुख्यमंत्री धामी ने संवाद

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को “मुख्यसेवक संवाद” नाम से एक नई पहल की शुरुआत की है। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद कर न सिर्फ उनके अनुभवों को समझना, बल्कि योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को भी जानना है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में यह तय किया गया है कि अब प्रत्येक माह मुख्य सेवक सदन में इस तरह का जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो नीतियों को लोगों की जरूरतों से सीधे जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

इसी क्रम में सोमवार को आयोजित हुआ ‘गांव से ग्लोबल तक: होम स्टे संवाद’ कार्यक्रम—एक ऐसा आयोजन, जिसमें प्रदेश के दूरदराज़ गांवों से आए होम स्टे संचालकों ने भाग लिया और अपने अनुभव, चुनौतियां और सुझाव सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। यह संवाद एक सजीव मंच बन गया, जहां सरकार और समाज के बीच की दूरी मिटती दिखी, और हर विचार एक नई नीति की प्रेरणा बनता नजर आया।

मुख्यमंत्री धामी ने पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ होम स्टे संचालकों की बातों को सुना और यह आश्वासन भी दिया कि उनके सुझाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आने वाली नीतियों की संरचना का आधार बनेंगे। यह संवाद केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि उत्तराखंड में जन-सहभागिता आधारित शासन का एक प्रभावशाली उदाहरण था। इस कार्यक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड अब पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का हर गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ एक संभावनाशील पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद होम स्टे संचालकों ने सरकार की इस दूरदर्शी योजना की खुलकर सराहना की। उनका कहना था कि होम स्टे योजना ने विशेष रूप से पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में न केवल रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों को सम्मानजनक जीवन जीने की राह भी दिखाई है। यह योजना अब उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की धुरी बन चुकी है। मुख्यमंत्री की दृढ़ नीति, सक्रियता और ग्रामीण विकास के प्रति समर्पण को संचालकों ने इस परिवर्तन का असली कारण बताया।

आज उत्तराखंड का होम स्टे मॉडल केवल देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। स्थानीय लोगों के घरों में चलने वाले ये होम स्टे अब वैश्विक पर्यटकों के लिए अनुभव आधारित पर्यटन का नया केंद्र बन चुके हैं। यह परिवर्तन किसी कल्पना का परिणाम नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदारी, प्रतिबद्धता और सकारात्मक नेतृत्व से उपजा एक क्रांतिकारी बदलाव है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शिता और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर नेतृत्व ईमानदार और संवेदनशील हो, तो कोई भी प्रदेश अपनी सीमाओं को लांघकर वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाइयां छू सकता है। उत्तराखंड आज न केवल पर्यटन का नया चेहरा बन रहा है, बल्कि ग्राम विकास, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है—और इस परिवर्तन की कहानी की शुरुआत हुई है मुख्य सेवक संवाद जैसे दूरदर्शी कदमों से।

26 अप्रैल को उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह

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देहरादून में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सहकारिता विभाग की लेंगे बैठक

कैबिनेट मंत्री डा. रावत ने तैयारियों को लेकर की विभागीय समीक्षा

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगामी 26 अप्रैल को उत्तराखंड के दौरे पर रहेंगे। वह देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे, इसके साथ ही वह सहकारिता विभाग की भी समीक्षा बैठक लेंगे। केन्द्रीय मंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिये।

सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभाकक्ष में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे को लेकर सभी तैयारियां पुख्ता रखने के निर्देश दिये। डा. रावत ने बताया कि केन्द्रीय गृह मंत्री आगामी 26 अप्रैल को उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे। अपने दौरे के दौरान वह देहरादून स्थित एफआरआई प्रेक्षागृह में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे। इसके उपरांत केन्द्रीय मंत्री उत्तराखंड सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे। जिसमें विभाग द्वारा राज्य में संचालित विभिन्न सहकारी योजनाओं, सहकारी बैंकों एंव समितियों की प्रगति सहित विभाग द्वारा किये गये नवाचारी कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण दिया जायेगा।

डॉ. रावत ने बताया कि बैठक में खासकर पैक्स समितियों के कम्प्यूटरीकरण, आधुनिक अन्नभण्डारण, जनऔषधि केन्द्र, अर्गेनिक बोर्ड, सहकार से समृद्धि योजना के सफल संचालन के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत की जायेगी। इसके अलावा विभाग में किये गये नवाचारी कार्यों सहकारी बोर्डों एवं समितियों में महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व, सहकारी बैंकों की महिला शाखाओं की स्थापना, माधो सिंह भण्डारी सामुहिक खेती योजना, घसयारी कल्याण योजना, प्रगतिशील किसनों का विभिन्न राज्यों में अध्ययन भ्रमण, एफपीओ के गठन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना सहित पैक्स कैडर सेवा नियमावली बनाये जाने सहित तमाम योजनाओं की जानकारी प्रस्तुतिकरण के माध्यम से केन्द्रीय सहकारिता मंत्री के समक्ष रखी जायेगी।

बैठक में अपर सचिव एवं निबंधक सहकारिता सोनिका, उप महाप्रबंधक नाबार्ड आलोक गुप्ता, अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती, महाप्रबंधक राज्य सहकारी बैंक आकांक्षा कण्डारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

एआई के दौर में भी मानवता को बनाए रखना जरूरी: डीजी सूचना

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राष्ट्रीय जनसम्पर्क दिवस पर “रिसपॉन्सिबल यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस : रोल ऑफ पब्लिक रिलेशन’’ पर परिचर्चा

पीआरएसआई देहरादून चैप्टर द्वारा कार्यक्रम का आयोजन

महानिदेशक सूचना/उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. बंशीधर तिवारी ने कहा कि एआई के दौर में भी मानवता को बनाए रखना जरूरी है। आज के तकनीकी दौर में हम सभी अपनी जिम्मेदारी समझे। राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर सोमवार को देहरादून में पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के देहरादून चैप्टर द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यकाशाला का विषय ‘‘रिसपॉन्सिबल यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस : रोल ऑफ पब्लिक रिलेशन’’ रखा गया।

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि महानिदेशक सूचना एवं उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. श्री बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, बद्रीकेदार मंदिर समिति के सी.ई.ओ. श्री विजय थपलियाल, अध्यक्ष पी.आर.एस.आई. देहरादून चैप्टर रवि विजारनिया द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

मुख्य अतिथि बंशीधर तिवारी, महानिदेशक सूचना/उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज के तकनीकी दौर में हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने कहा कि ए.आई. तकनीक का वर्तमान समय में जिस प्रकार से तेजी से विकास हो रहा है, उसमें हम सभी की जिम्मेदारी बन जाती है कि हम मनुष्यता की भावना को सर्वोपरि रखे।

ए.आई. तकनीक के उपयोग से समय की बचत होती है, उस समय का उपयोग हम किस प्रकार से करते है, यह भी हम सभी को समझना होगा। सोशल मीडिया के साथ-साथ परिवार एवं समाज से भी जुड़े रहे। किसी भी प्रकार की सूचना को आगे बढ़ाने या भेजने से पहले एक बार विचार अवश्य करना होगा कि सूचना सही है या गलत। कोई भी गलत सूचना एक बार प्रसारित हो जाती है, तो उसका प्रभाव व्यक्ति एवं समाज दोनो पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ए.आई. से कंटेट बनाया जा सकता है, लेकिन उसमें स्वयं के विचारों और अनुभवों का समावेश भी जरूरी है। ए.आई. का जिम्मेदारी के साथ उपयोग, हम सभी का कर्तव्य है और इस बारे में अधिक से अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि संयुक्त निदेशक, सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय ने कहा कि जब भी नई तकनीक आती है, तो उसकी अपनी चुनौतियां होती है, साथ ही नये अवसर और नई संभावनाएं भी बनती हैं। आज जब सभी जगह ए.आई. की होड सी लगी है, तब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ए.आई. का किस सीमा तक उपयोग किया जाय। हमें यह भी सोचना होगा कि हम पूरी तरह से ए.आई. पर ही निर्भर न हो जाय, हमें अपनी क्षमता को बनाये रखना है। जनसंपर्क के क्षेत्र में ए.आई. केवल सहयोगी की भूमिका तक ही सीमित रहे। ए.आई. से होने वाले लाभ एवं दुष्परिणाम के संबंध में जनजागरूकता करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में न्यूज-18 चैनल के संपादक श्री अनुपम त्रिवेदी ने कहा कि हम सभी को समझना होगा कि विज्ञान सुविधा देता है, तो समस्याएं भी देता है। उन्होंने कहा कि आज ए.आई. का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि ए.आई. के गलत उपयोग के कारण आज फेक न्यूज हम सभी के सामने बड़ी चुनौती है। इसके लिए जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क क्षेत्र में व्यक्तिगत संबंध ही महत्वूपर्ण है, इसमें ए.आई. उतना उपयोगी सिद्ध नही हो सकता है।

बदरी केदार मंदिर समिति के सी.ई.ओ. विजय थपलियाल ने कहा कि ए.आई. के दौर में हम ए.आई. से सभी कुछ प्राप्त कर सकते है, लेकिन इमोशन नही। इमोशन केवल मनुष्य के पास ही है। उन्होंने कहा कि हमे ए.आई. तकनीक को वरदान या चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा।

कार्यशाला में तकनीकी विषय विशेषज्ञ के रूप में आकाश शर्मा ने ‘‘जनसंपर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग” विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि ए.आई. हमारा स्थान नहीं ले रहा है, बल्कि हमारे कार्य को अधिक प्रभावशाली बना रहा है। जनसंपर्क लोगों का काम है, और ए.आई. सिर्फ उसे तेज और सटीक बनाने में हमारी मदद करता है। एआई के विभिन्न टूल्स की जानकारी दी।
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पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष श्री रवि बिजारनिया ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनिल वर्मा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर पी.आर.एस.आई. देहरादून चैप्टर के सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश चन्द्र भट्ट, सदस्य सुधाकर भट्ट, वैभव गोयल, राकेश डोभाल, अजय डबराल, दीपक शर्मा, प्रशांत रावत, ज्योति नेगी, शिवांगी, मनमोहन भट्ट, संजय सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

उत्तराखंड बोर्ड 2025: हाईस्कूल और इंटर के परिणाम घोषित, छात्रों ने रचा कीर्तिमान

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उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष भी छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम रोशन किया है। हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) दोनों के नतीजे एक ही दिन घोषित किए गए, जिसमें छात्राओं ने एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी।

हाईस्कूल टॉपर्स की सूची

इस वर्ष कक्षा 10वीं में कमल सिंह चौहान (विवेकानंद वीएमआईसी, मंडलसेरा, बागेश्वर) और जतिन जोशी (एचजीएस एसवीएम आईसी, कुसुमखेड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल) ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। दोनों ने 500 में से 496 अंक (99.20%) प्राप्त किए।

दूसरे स्थान पर रहीं कनकलता, जिन्होंने 495 अंक (99.00%) अर्जित किए। वह एसवीएम आईसी, न्यू टिहरी (टिहरी गढ़वाल) की छात्रा हैं और लड़कियों में पूरे प्रदेश की टॉपर भी बनीं।

तीसरा स्थान तीन छात्रों ने साझा किया –

  • दिव्यम (गोस्वामी गणेश दत्त एसवीएमआईसी, उत्तरकाशी)
  • प्रिया (सीएआईसी, अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग)
  • दीपा जोशी (पीपी एसवीएमआईसी, नानकमत्ता, ऊधम सिंह नगर)

इन सभी ने 494 अंक (98.80%) प्राप्त किए।

हाईस्कूल का कुल परीक्षाफल 90.77% रहा, जिसमें 93.25% छात्राएं और 88.20% छात्र पास हुए। इस बार भी छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों की तुलना में बेहतर रहा।


इंटरमीडिएट (12वीं) के परिणाम

इंटरमीडिएट परीक्षा में अनुष्का राणा (देहरादून) ने टॉप किया, जिन्होंने 500 में से 493 अंक (98.60%) हासिल किए।

दूसरे स्थान पर रहे केशव भट्ट, जिन्होंने 489 अंक (98.60%) प्राप्त किए।
तीसरे स्थान पर रहे आयुष सिंह रावत, जिनके 484 अंक (96.80%) रहे।

इंटर का कुल परीक्षाफल 83.23% रहा। इसमें 86.20% छात्राएं और 80.10% छात्र पास हुए।

ग्राम स्तर तक योग अभियान चलाया जाए- मुख्यमंत्री

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में राज्य में योग मेले, हरित योग और योग पर आधारित प्रतियोगिताओं का होगा आयोजन।

मातृशक्ति को अधिक से अधिक योग से जोड़ा जाएगा।

योग को रोजगार से जोड़ने के भी मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश।

ग्राम स्तर तक योग अभियान चलाया जाए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष योग शिविरों का आयोजन किया जाए। योग पर निबंध, भाषण, पोस्टर और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाय। योग और आयुष मेले के आयोजन के साथ ही हरित योग के कार्यक्रम भी किए जाएं। डिजिटल माध्यम से भी योग को प्रचारित किया जाए योग के क्षेत्र में जन जागरूकता लाने वालों को सम्मानित भी किया जाय। योग से साथ जनसहभागिता से नियमित स्वच्छता अभियान भी चलाया जाए। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश अधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग न केवल हमारी प्राचीन परंपरा है, बल्कि यह आज की जीवनशैली में संतुलन और स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम भी है। हमें युवाओं, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को इस आयोजन से जोड़ना होगा। योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम भव्य, व्यवस्थित और जन-सहभागिता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, योग की पवित्र भूमि है, और यहां से पूरे विश्व को योग का संदेश गया है, इसलिए यहां के कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति को अधिकतम योग से जोड़ा जाय। योग और ध्यान के साथ ही वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाए। जनपदों में योग और आयुष मेले आयोजित किए जाएं। योग को रोजगार से भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि और योग भूमि के रूप में उत्तराखंड की वैश्विक स्तर पर अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि योग का आध्यात्मिक रूप से भी प्रस्तुत किया जाए। राज्य के प्रमुख दैवीय स्थलों और पर्वतीय क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर योग के कार्यक्रम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने आयुष विभाग, शिक्षा विभाग, युवा कल्याण विभाग, पर्यटन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सूचना विभाग एवं जिला प्रशासन को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, सचिन कुर्वे, एडीजी ए. पी. अंशुमन, अपर सचिव विजय जोगदंडे और महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का धरना, कॉलेज प्रशासन के खिलाफ उठी आवाज़

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नई टिहरी। पीजी कॉलेज नई टिहरी में प्रयोगशाला उपकरण, स्मार्ट क्लास और खेल सामग्री की खरीद में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं के विरोध में छात्रसंघ एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अनियमितताओं में शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

धरने का आज चौथा दिन था। छात्रसंघ अध्यक्ष युवराज सिंह शाह और छात्रा मणिका राणा ने आरोप लगाया कि कॉलेज के विभिन्न विभागों में खरीदे गए सामान में वित्तीय गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में साल में सिर्फ दो दिन की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित होती है, फिर भी खेल विभाग द्वारा बाहर से बुलाए गए कोच को कई महीनों तक वेतन दिया गया है, जो संदेहास्पद है।

जांच के दौरान अन्य विभागों में भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। शुक्रवार को गुड फ्राइडे की छुट्टी के कारण जांच समिति कोई कार्य नहीं कर सकी, लेकिन शनिवार को समिति विभागों द्वारा खरीदे गए सामान के बिलों और वाउचरों का मिलान करेगी। छात्रसंघ की ओर से दोषी पाए जाने वालों को उच्च शिक्षा विभाग से निलंबित करने की मांग की जा रही है।

धरने में सौरभ पंवार, आदित्य नेगी, शिवम, मनवीर, आस्था, रजनी, अभिजीत, सानिया सहित कई छात्र-छात्राएं शामिल रहे।