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सीएम धामी ने ली सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक, दुर्घटनाओं पर रोक को बनाए सख्त रोडमैप

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उत्तराखंड: उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार अब और अधिक सख्ती और संवेदनशीलता के साथ काम करने जा रही है। मंगलवार को सचिवालय स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भवन में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की। बैठक में प्रदेश में सड़क सुरक्षा की वर्तमान स्थिति, दुर्घटनाओं के कारणों और भविष्य में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए किए जाने वाले सुधारों पर विस्तृत चर्चा की गई।

सीएम धामी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनजीवन से जुड़ा अहम मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क हादसों में कमी लाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति बनाकर तुरंत प्रभाव से लागू की जाए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करके उनका सुधार किया जाए, राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर सुरक्षा संकेतों को दुरुस्त किया जाए और ट्रैफिक नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित कराया जाए। सीएम धामी ने ओवरस्पीडिंग और नशे में ड्राइविंग पर कड़ी कार्रवाई करने, स्कूल-कॉलेज रूट पर विशेष रोड सेफ्टी ड्राइव चलाने और वाहनों की फिटनेस जांच को और सख्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए तकनीकी निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों को मिलाकर व्यापक प्रयास किए जाएँ।

बैठक के दौरान सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों, संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों को सम्मानित किया गया। सीएम ने उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा की दिशा में ऐसे प्रयास पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। बैठक में परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनएचएआई और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीएम ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर सुरक्षित और दुर्घटनारहित उत्तराखंड बनाने का संकल्प दोहराया।

देहरादून में 8वें दिन भी वकीलों का धरना जारी, बार एसोसिएशन ने बनाई 15 सदस्यों समिति, DM-SSP से करेंगे मुलाकात

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने भी मुलाकात की.

देहरादून: राजधानी देहरादून की पुरानी जिला अदालत की खाली जमीन पर चैंबर निर्माण की मांग को लेकर अधिवक्ता पिछले आठ दिन से प्रदर्शन कर रहे है. पूरे दिन कचहरी में सभी गतिविधियां बंद रखने का फैसला लिया गया था. मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने भी मुलाकात की, जिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं से 15 सदस्यों की एक कमेटी गठित कर जल्द सुझाव मांगे हैं. साथ ही आश्वासन दिया कि प्रशासन इन सुझावों को जल्द से जल्द सरकार तक पहुंचाएगा. वही अगर बार एसोसिएशन आश्वस्त होते है तो धरना बंद कर देंगे और आश्वस्त नहीं होते है तो धरना जारी रहेगा.

दरअसल, रविवार को अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून जिलाधिकारी को उनकी मांगे सुनने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद सोमवार को जिलाधिकारी और एसएसपी दोनों अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे थे.

जिलाधिकारी ने कहा कि फिलहाल पुराने चेंबर से अधिवक्ताओं को विस्थापित नहीं किया जाएगा. अधिवक्ताओं के चेंबर निर्माण में सरकार के सहयोग और अन्य मांगों पर एक सुझाव उन्होंने मांगा है. इसके लिए 15 सदस्यों की एक कमेटी गठित करने के लिए भी कहा गया है और अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया है कि चेंबर निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि आवंटन को समयबद्ध प्रक्रिया से किया जाएगा.

इस पर बार ने फैसला लिया है कि अधिवक्ता एक संघर्ष समिति का गठन करेंगे, ताकि उनकी मांगों के लिए संघर्ष को जारी रखा जा सके. निर्णय यह भी लिया गया कि अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को फिर से जिलाधिकारी के साथ बैठक करेगा. अग्रिम निर्णय के लिए एक बार फिर से बार पदाधिकारियों की बैठक की जाएगी, तब तक के लिए हड़ताल जारी रहेगी.

बार एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी कपिल अरोड़ा ने बताया है कि अधिवक्ता पिछले आठ दिनों से धरने पर है. उनकी मुख्य मांग है कि जिला कोर्ट के पुराने परिसर में उन्हें चेंबर निर्माण के लिए भूमि दी जाए. इसके अलावा नए न्यायालय परिसर में चेंबर निर्माण के लिए भूमि दी जाए. वकीलों के बारे में सरकार ने कुछ नहीं सोचा है. कही भी किसी न्यायालय में बिना अधिवक्ता के कार्य नहीं हो सकता है. अगर न्यायालय में वकील नहीं होगे तो किसी को न्याय मिल पाएगा? फिर न्यायाधीश किसी को न्याय दे पाएंगे?

साथ ही बताया है कि सीएम के निर्देश पर सोमवार को जिलाधिकारी और एसएसपी प्रदर्शन के दौरान मुलाकात की थी. उनके द्वारा आश्वस्त किया गया है कि कोर्ट नीति अपनाते हुए जल्द से जल्द विचार किया जाएगा. साथ ही बार एसोसिएशन की एक 15 सदस्यों की समिति बनाई गई है, जो आज जिलाधिकारी से मिलकर अपनी बात रखेंगे. अगर बार एसोसिएशन आश्वस्त हुए तो धरना बंद कर देंगे. अगर आश्वस्त नहीं हुए तो यह धरना आगे भी जारी रहेगा.

रामनगर में गैस गोदाम के सामने कबाड़ के गोदाम में लगी भीषण आग, बड़ा हादसा टला

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आग इतनी भीषण थी कि फायर ब्रिगेड को इसे बुझाने में 4 घंटे लगे

रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर में सोमवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब गैस गोदाम के सामने स्थित एक कबाड़ गोदाम में भीषण आग भड़क उठी. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में पूरा गोदाम आग की चपेट में आ गया. सूचना मिलते ही फायर स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया.

फायर स्टेशन रामनगर में देर रात वसीम नामक व्यक्ति ने सूचना दी कि गैस गोदाम के सामने कबाड़ के गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई है. सूचना पाते ही फायर निरीक्षक सुशील कुमार के नेतृत्व में टीम तुरंत मौके पर पहुंची. मौके पर पहुंचकर देखा गया कि आग ने कबाड़ के पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया था. लपटें आसपास फैलने की आशंका भी बढ़ रही थी. अगर आग गैस के गोदाम तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था.

स्थिति गंभीर होती देख रामनगर स्टेशन की सभी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर लगाया गया. साथ ही काशीपुर फायर स्टेशन से भी एक अतिरिक्त गाड़ी मंगवाई गई. फायर निरीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि-

आग पर काबू पाने में टीम को करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. तेज हवाओं और कबाड़ सामग्री की अधिकता के कारण आग तेजी से फैलती जा रही थी, लेकिन फायर कर्मियों ने अथक प्रयासों से आग को पूरी तरह बुझा दिया.
-सुशील कुमार, फायर निरीक्षक-

उन्होंने बताया कि आग लगने से गोदाम मालिक को काफी नुकसान हुआ है. हालांकि राहत की बात यह रही कि इस भीषण अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. अभी तक आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, लेकिन प्रथम दृष्टि में शॉर्ट सर्किट को कारण माना जा रहा है. बहरहाल फायर विभाग और पुलिस इस घटना के कारणों की जांच में जुट गई हैं. आग लगने के असली कारणों की पुष्टि विभाग इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही करेगा.

फायर निरीक्षक सुशील कुमार का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है. खासकर जहां कबाड़ या ज्वलनशील सामग्री रखी हो. यह घटना एक बार फिर आग सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी देती है कि बिना सुरक्षा के कबाड़ या ज्वलनशील गोदाम बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं.

युवा ताकत को नशे से बचाने का संकल्प: नशे को मजबूती से ना कहें — मुख्यमंत्री धामी

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देहरादून, 18 नवंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगांठ पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से नशे के विरुद्ध दृढ़ संकल्प लेने और अपने साथियों को भी इसके लिए जागरूक करने की अपील की।

सीएम धामी ने कहा कि नशा सिर्फ एक गलत आदत नहीं, बल्कि समाज को भीतर से खोखला करने वाली भयावह चुनौती है। उन्होंने कहा कि नशे का प्रसार आज वैश्विक स्तर पर एक साइलेंट वॉर की तरह है, और इसका सबसे बड़ा निशाना हमारी युवा शक्ति है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नशामुक्त भारत अभियान शुरू कर इसे एक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। सरकार ने सभी जनपदों के शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग कमेटियां गठित की हैं। साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला को नशा-विरोधी संदेशों से जोड़ा गया। युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए दगड़िया क्लब का गठन।

तीन साल में 6 हजार से अधिक आरोपी पकड़े

राज्य सरकार ने 2022 में त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया था। मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 3 साल में 6 हजार से अधिक आरोपी गिरफ्तार कर 200 करोड़ रुपए से अधिक का नशीला पदार्थ बरामद किया गया है।
प्रदेश के सभी जिलों में नशा मुक्ति केंद्रों को सशक्त किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में चार इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स (IRCA) और AIIMS ऋषिकेश की मदद से ATF भी संचालित हो रहे हैं।

युवाओं से ही बनेगा नशामुक्त उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे नशे को ना कहने के साथ-साथ अपने दोस्तों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करें। कहा उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाना है, और यह तभी संभव है जब हमारी युवा पीढ़ी नशे से दूर रहकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़े। सीएम धामी ने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत की शपथ दिलाई और राज्य स्तरीय भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया। मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, ओबीसी आयोग अध्यक्ष संजय नेगी, सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी मुरुगेशन, निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी आदि मौजूद रहे।

विकासनगर में सड़क दुर्घटना: पिकअप अनियंत्रित होकर खाई में गिरी, चालक की जान गई, हेल्पर घायल

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विकासनगर में एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक की मौत हो गई। जबकि घायल को अस्पताल उपचार के लिए भेज दिया गया है।

दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकासनगर की ओर आ रहा वाहन हथियारी के पास खाई में गिर गया। दुर्घटना में कोतवाली क्षेत्र की मदीना बस्ती निवासी वाहन चालक राशिद अली उर्फ राजू (35) की मौत हो गई। हेल्पर हुकुम घायल हो गया।

सूचना पर मौके पर पहुंची एसडीआरएफ की टीम ने मृतक और घायल को खाई से बाहर निकाला। घायल को उपचार के लिए उप जिला चिकित्सालय विकासनगर भिजवाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण से प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज की भेंट-उत्तराखंड की SHG महिलाओं के सशक्तिकरण पर विस्तृत चर्चा

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आज कर्तव्य भवन, नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने देश की माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामण जी से सौजन्य भेंट की।
 
इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका वृद्धि एवं कौशल-विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
 
बैठक के दौरान श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय महिला समूहों के उत्कृष्ट कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि-SHG महिलाओं ने उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दी है।
स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन से लेकर डिजिटल लेन-देन तक हमारी बहनें स्वयं को और अपने परिवारों को सशक्त बना रही हैं।”
 
प्रदेश महामंत्री ने बैठक में निम्न विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला:
•SHG उत्पादों का राष्ट्रीय स्तर पर विपणन
•स्थानीय उद्योगों व हस्तशिल्प का मूल्य संवर्धन
•महिला उद्यमिता को बढ़ाने हेतु कौशल एवं वित्तीय प्रशिक्षण
•समूह आधारित आजीविका मॉडल
•बैंक लिंकिंग और वित्तीय समावेशन
•डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा
 
माननीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारामण ने उत्तराखंड की महिलाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिला आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, SHG समूहों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित नए आजीविका मॉडल विकसित करने का सुझाव भी दिया।
 
उन्होंने यह भी कहा कि-“SHG उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय बाज़ार और सरकारी क्रय प्रणालियों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य को हर संभव सहयोग देगी।”
 
बैठक के अंत में दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “माननीय वित्त मंत्री जी का मार्गदर्शन उत्तराखंड की महिलाओं को आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और आर्थिक उन्नति की नई ऊर्जा देगा।”
 
यह संवाद उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला नेतृत्व और SHG आधारित आजीविका को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के 587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

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ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025

देहरादून। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने इसके लिये भर्ती विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। उक्त भर्ती हेतु ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि बीते एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत 287 चिकित्सकों तथा 180 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (महिला) के रिक्त पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

इसी क्रम में चयन बोर्ड ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के रिक्त 587 पदों पर भर्ती विज्ञप्ति जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। जिसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार व पिथौरागढ़ के रिक्त 480 पद तथा बैकलॉग के 107 पद शामिल हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिये ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 27 नवम्बर 2025 से शुरू होगी जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई है।

उन्होंने बताया कि उक्त भर्ती के तहत नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिप्लोमाधारक के लिये 336 पद निर्धारित किये गये हैं। इसी प्रकार नर्सिंग अधिकारी (महिला) डिग्रीधारक के लिये 144 पद जबकि नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक 75 तथा नर्सिंग अधिकारी (पुरूष) डिप्लोमाधारक के लिये 32 पद विज्ञापित किये गये हैं।

दिल्ली की चार जिला अदालतों को मिली बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

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बम धमकी के बाद दिल्ली की अदालतों में कार्यवाही ठप, परिसर पूरी तरह खाली कराए गए

नई दिल्ली। दिल्ली की कई जिला अदालतों में मंगलवार को आए बम धमकी भरे ई-मेल ने पूरे न्यायिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया। संदेश मिलते ही अदालत परिसरों को एहतियातन खाली करवा दिया गया और सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए तलाशी अभियान शुरू कर दिया। अचानक बढ़ाई गई सुरक्षा ने पूरे शहर में चिंता का माहौल बना दिया।

अदालतों में अचानक हाई अलर्ट

बम धमकी मिलने के बाद साकेत, द्वारका, पटियाला हाउस और रोहिणी स्थित अदालतों को पूरी तरह से खाली कर दिया गया। जजों, अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों और वहां मौजूद आम लोगों को तत्काल परिसर से बाहर निकलने को कहा गया। बम निरोधक दस्ता और पुलिस टीमें सभी कमरों, पार्किंग और खुले स्थानों में विस्तृत जांच करती रहीं। पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई, जहां विशेषज्ञ टीमें लगातार तलाशी लेती रहीं।

साकेत कोर्ट में कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकी गई

साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि सुरक्षा संबंधी सतर्कता के कारण कुछ समय के लिए सभी न्यायालयीन कार्य बंद कर दिए गए थे। अधिवक्ताओं से अपील की गई कि वे शांति बनाए रखें और बेवजह भीड़ न लगाएं। सुरक्षा जांच पूरी होते ही बाद में कार्यवाही बहाल किए जाने की संभावना जताई गई।

अतीत में भी मिल चुकी हैं धमकियाँ

दिल्ली की अदालतों को पहले भी ऐसे ई-मेल के जरिए डराने की कोशिशें हो चुकी हैं। कुछ महीने पहले दिल्ली हाईकोर्ट को भी बम की झूठी सूचना दी गई थी, जिसके चलते कार्यवाही रोकनी पड़ी थी और सभी को बाहर निकलना पड़ा था। लगातार मिल रही धमकियों ने अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं।

NIA के केस से पहले बढ़ाई गई सतर्कता

पटियाला हाउस और रोहिणी कोर्ट में तलाशी अभियान इसलिए भी तेज किया गया, क्योंकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के आरोपी जसीर बिलाल उर्फ दानिश की पेशी से पहले सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही थी। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक टीम ने पूरी इमारत की तसदीक की।

सीआरपीएफ के दो स्कूलों को भी मिली धमकी

इसी दौरान सुबह करीब 9 बजे दिल्ली के प्रशांत विहार और द्वारका में स्थित दो सीआरपीएफ स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल मिला। तत्काल पुलिस, अग्निशमन दल और सुरक्षा बल मौके पर पहुँचे। स्कूलों को खाली कराकर व्यापक तलाशी की गई, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। अधिकारियों ने इसे ‘होक्स’, यानी झूठी धमकी घोषित किया।

भ्रम फैलाने की कोशिशें बढ़ीं, सुरक्षा और कड़ी की गई

लगातार मिल रही फर्जी धमकियों ने पुलिस की सतर्कता और भी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि भले ही अधिकतर धमकियाँ झूठी निकलती हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

16 करोड़ से होगी नंदा की चौकी पुल की मरम्मत

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15 सितंबर की रात अतिवृष्टि में हो गया था क्षतिग्रस्त

नंदा की चौकी पुल की मरम्मत को हरी झंडी ,  16 करोड़ की डीपीआर पास

1992 की गलती अब नहीं दोहराई जाएगी , ओपन फाउंडेशन हटेगा, वेल फाउंडेशन बनेगा

सोमवार देर रात से एप्रोच मार्ग पर टाइल्स बिछाने का काम शुरू

देहरादून। प्रेमनगर और आसपास के लाखों लोगों की सबसे बड़ी समस्या रहे नंदा की चौकी पुल को लेकर आखिरकार राहतभरी खबर सामने आई है। पांवटा साहिब राजमार्ग पर स्थित यह पुल 15 सितंबर की रात अतिवृष्टि में क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन अब इसकी मरम्मत के लिए 16 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी मिल गई है और विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं।

इससे क्षेत्र के लोगों में दोबारा उम्मीद जग गई है कि जल्द ही इस जाम और परेशानी से छुटकारा मिलेगा।

अतिवृष्टि के दौरान टौंस नदी के उफान में पुल की पांवटा साहिब छोर वाली एबटमेंट वाल ढह गई थी। कारण साफ है — पुल 1992 में ओपन फाउंडेशन पर बना था, जबकि नदी वाले क्षेत्र में वेल फाउंडेशन ही सुरक्षित विकल्प होता है।

नई डीपीआर में यह बड़ी चूक सुधारी गई है।

  • अब पूरा सुदृढ़ीकरण वेल फाउंडेशन पर होगा,
  • पुल को भविष्य के 100 साल के भार और डिस्चार्ज को ध्यान में रखकर मजबूत बनाया जाएगा।

यह बदलाव न सिर्फ तकनीकी सुधार है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भरोसे की वापसी भी है।

दो महीने से परेशानियां झेल रहे लोग — अब राहत की आहट

पुल टूटने के बाद से हाईवे पर यातायात ह्यूम पाइप वाली अस्थायी पुलिया से चल रहा है। एप्रोच रोड टूटी हुई है, जाम रोज़ का दर्द बन गया है, और स्कूल–कॉलेज जाने वाले छात्रों को कई किलोमीटर तक रूकी हुई लाइनें झेलनी पड़ रही हैं।

लोगों का सवाल — “इतने बड़े राजमार्ग पर ऐसी लापरवाही क्यों?”

स्थानीय नागरिकों का गुस्सा और चिंता दोनों चरम पर हैं।

“हमारे बच्चे रोज इस रास्ते से स्कूल जाते हैं, डर लगता है,” एक अभिभावक ने कहा।

“15–20 मिनट का रास्ता अब एक घंटे में पार हो रहा है,” रोजाना आने-जाने वाले छात्रों ने बताया।

दुकानदारों का कहना है कि फुटफॉल आधा हो गया है।

पुल की अचानक क्षति ने लोगों के भरोसे पर भी चोट की है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर समय पर मजबूत नींव बनाई जाती तो पूरे क्षेत्र को इस दुश्चक्र से नहीं गुजरना पड़ता।

उम्मीद की किरण : रात में शुरू हुआ टाइल्स बिछाने का काम

यातायात सुचारू करने के लिए बनाई गई अस्थायी ह्यूम पाइप पुलिया के एप्रोच मार्ग की स्थिति खराब हो चुकी थी। गड्ढों से भरी सड़क पर दोपहिया और चौपहिया वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आती रहीं।

अच्छी खबर यह है कि सोमवार देर रात से एप्रोच मार्ग पर टाइल्स बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसे मजबूती देने के बाद अस्थायी पुल पर वाहनों की आवाजाही कुछ हद तक आसान हो जाएगी। विभाग का दावा है कि मुख्य पुल बनने तक आवागमन में लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

लेकिन अब डीपीआर पास होने और टेंडर शुरू होने के बाद लोगों में राहत की भावना साफ दिख रही है।

स्थानीय निवासी इसे “सबसे बड़ी उम्मीद की खबर” बता रहे हैं।

अधिकारियों का दावा : 2–3 महीने में खुलेगा पुल

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार 16 करोड़ की लागत से सुदृढ़ीकरण कार्य होगा और दो से तीन महीने में पुल फिर से यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

यह समय सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सुकून दे रही है, क्योंकि रोजाना का जीवन फिलहाल इस पुल पर ही निर्भर है।

दिलाराम चौक स्थित राज प्लाजा में एक मोबाइल दुकान में लगी भीषण आग

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दुकान में था करीब 1 करोड़ अधिक का स्टॉक

आग की चपेट में दुकान के सभी मोबाइल, LED, LCD, चार्जर, कवर, म्यूजिक सिस्टम, एसेसरीज आदि जलकर हुई राख

देर रात 10:30 बजे हुई घटना

करीब 30 मिनट बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू

हालांकि आग लगने की क्या वजह रही, अभी तक यह पता नहीं चल पाया