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उत्तराखंड में पिछले तीन सालों के भीतर बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की होगी जांच, सीएम ने दिए निर्देश

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उत्तराखंड: हाल ही में कुछ जगहों पर कूटरचित यानी फर्जी दस्तावेजों के जरिए बाहरी लोगों को बसाने के मामले सामने आए हैं. जिस पर सीएम धामी ने सख्ती दिखाई है. जिसके तहत सीएम धामी सभी जिलाधिकारियों को पिछले तीन साल में बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं. साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है.

बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं. दिल्ली दौरे के दौरान बीते दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर तमाम विषयों पर चर्चा किया था तो वहीं आज सीएम धामी ने दिल्ली से ही प्रदेश के सभी जिलाधिकारी के साथ वर्चुअल बैठक की. जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही प्रशासनिक कामों में पारदर्शिता लाने की बात कही.

 

करीब चार घंटे चले इस वर्चुअल बैठक में सीएम ने अधिकारियों को शीतकालीन यात्रा की तैयारियों को तेज करते हुए सभी पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए. बैठक के दौरान सीएम धामी ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित रजत जयंती उत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमाम विषयों को साझा किया था.

पीएम की ओर से साझा किए गए विजन के अनुसार भी सभी जिलों में काम किए जाए. क्योंकि, रजत जयंती उत्सव में राज्य के 25 सालों की यात्रा के साथ ही अगले 25 सालों में किए जाने वाले विजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया था. लिहाजा, जिला अधिकारी प्रशासनिक कामों को बेहतर बनाने के साथ ही इस विजन पर भी काम करें.

उत्तराखंड में समय-समय पर डेमोग्राफिक चेंज का मामला उठता रहा है. कई बार ऐसे मामले के सामने आए कि गलत तरीके से दस्तावेज तैयार कर लोगों को बसाया जा रहा है. जिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम धामी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वो पिछले तीन साल में बने स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच करें और इसमें जो भी दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. जहां एक ओर मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए लगातार खाली पदों पर भर्ती की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में दवाइयां और उपकरणों की कमी को भी दूर करने पर जोर दिया जा रहा है.

बैठक के दौरान सीएम धामी ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हो, इस बाबत अहम दिशा निर्देश दिए. साथ ही अस्पतालों में महिला और बाल रोग चिकित्सकों की तैनाती की मौजूदा स्थिति की सूची भी शासन को उपलब्ध कराने को कहा.

 

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट के बाद उत्तराखंड सरकार भी पूरी तरह से अलर्ट है. ऐसे में सीएम ने दिल्ली में हुई घटना को ध्यान में रखते हुए बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की सघन चेकिंग के निर्देश दिए. इसके अलावा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कामों में तेजी लाने के साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि वो खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करें.

इसके अलावा सीएम धामी ने प्रभावित क्षेत्रों में ठंड से बचने के व्यापक इंतजाम पर ध्यान देने को कहा है. इतना ही नहीं अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में वेरिफिकेशन ड्राइव में तेजी लाया जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए. ताकि, संदिग्ध और अपराध में लिप्त लोगों को पकड़ा जा सके. साथ ही आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके.

सऊदी हादसा: उमरा पर गए 45 भारतीयों की मौत, पीएम मोदी ने जताया दुख

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सऊदी अरब में उमरे पर गए भारतीय तीर्थ यात्रियों का जत्था एक बड़े हादसे का शिकार हो गया है। इस भीषण बस हादसे में 45 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार भारत से उमरा करने गए इन लोगों की बस एक डीजल टैंकर से टकरा गई. जिससे बस में आग लग गई. हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कुल 54 लोग 9 नवंबर को यहां से जेद्दा गए थे।

वे 23 नवंबर को लौटने वाले थे. इन 54 लोगों में से चार लोग रविवार को अलग-अलग कार से मदीना गए, जबकि चार अन्य मक्का में ही रुक गए. इस दुर्घटना में कम से कम 45 लोग मारे गए. अधिकारी के अनुसार, इस हादसे के समय बस में 46 लोग सवार थे, जो मदीना से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक तेल टैंकर से टकरा गई।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जाहिर किया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मदीना में भारतीय नागरिकों से जुड़ी दुर्घटना से मुझे गहरा दुख हुआ है. मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है”.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये हादसा सऊदी समयानुसार रात 11 बजे के आसपास हुआ है. कथित तौर पर बस में ज्यादातर यात्री तेलंगाना राज्य से थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हादसे में केवल एक ही व्यक्ति जीवित बचा है.. बताया जा रहा है कि यह लोग मक्का
से लौटे रहे थे और मदीना जा रहा था।

सऊदी अरब में हुए इस दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में भारत के एक ही परिवार के 18 सदस्यों की मौत हो गई. इस हादसे के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतकों में 9 बच्चे और 9 बड़े शामिल हैं।

रात डेढ़ बजे दुर्घटना की जानकारी मिली. मदीना से 30 किलोमीटर दूर ये एक्सिडेंट हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सऊदी समयानुसार रात 11 बजे के आसपास (भारतीय समयानुसार लगभग 1:30 बजे) यह एक्सीडेंट हुआ. शुरुआती जानकारी के मुताबिक बस में सवार ज्यादातर यात्री तेलंगाना राज्य से थे।

स्थिति पर नजर रखने के लिए तेलंगाना सचिवालय में एक नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) बनाया गया है. इसके नंबर हैं- +91 7997959754, +91 9912919545. वहीं जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया है- 8002440003 (टॉल फ्री)

शेख हसीना को फांसी की सजा, अलर्ट पर है सरकार

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नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध का दोषी करार दिया है. तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने इस मामले में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है. जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला छह पार्ट में सुनाया, जो 400 पेज में है.

जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है. हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है. शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए.

ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि ज्यादातर मौतें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों की ओर से आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले घातक धातु के छर्रों से भरी सेना की बंदूकों से चली गोलियों के कारण हुईं. शेख हसीना की सरकार में सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं. शेख हसीना और अन्य आरोपियों ने संयुक्त रूप से आपराधिक साजिश रची थी.

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना के साथ ही इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ने मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध किए. राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ.

मुख्यमंत्री धामी ने जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारियों के साथ चार घंटे की बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों को शीतकालीन यात्रा की तैयारियों को तेज करने और सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में यह भी कहा गया कि रजत जयंती उत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए विजन के अनुरूप सभी जनपदों में कार्यों का समयबद्ध संपादन सुनिश्चित किया जाए।

हाल ही में कुछ स्थानों पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बाहरी लोगों को बसाने के मामले सामने आए हैं। इसके मद्देनजर जिलाधिकारियों को पिछले तीन साल में जारी स्थाई निवासी प्रमाण पत्रों की जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

सभी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और महिला व बाल रोग चिकित्सकों की तैनाती के लिए सूची शासन को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया।

दिल्ली में हाल ही में हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की सघन चेकिंग करने, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित क्षेत्रों में ठंड से बचने के व्यापक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा अधिकारियों को वैरिफिकेशन ड्राइव में तेजी लाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखने हेतु भी निर्देशित किया गया।

देहरादून में सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी, कैसे मिलेगा मरीजों को बेहतर इलाज?

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राजधानी देहरादून के कई सरकारी हॉस्पिटलों में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है.

देहरादून: देहरादून जिले के सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी बनी हुई है. राजधानी के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बीते लंबे समय से चली आ रही है, हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से कदम भी उठाई जा रहे हैं. लेकिन स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.

विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव के कारण जिले के स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बन रहे हैं, जिस कारण मरीजों को दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरोनेशन अस्पताल या फिर प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है. वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो देहरादून जनपद मे सामान्य और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को मिलाकर 331 पद स्वीकृत हैं, इनमें से संविदा, “यू कोट, वी पे” (You Quote, We Pay) व नियमित नियुक्ति के तहत डॉक्टर्स जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन इन पदों के सापेक्ष सिर्फ 45% विशेषज्ञ चिकित्सक ही विभिन्न अस्पतालों में नियुक्त है.

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज शर्मा ने बताया कि इसकी मुख्य वजह यह है कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स अपेक्षाकृत कम ज्वाइन कर रहे हैं और यह समस्या अभी भी बनी हुई है. हालांकि सरकार की तरफ से डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं और उन्हें सेवायें देने के लिए प्रोत्साहित किए जा रहे हैं. कुछ माह पूर्व सरकार ने नए डॉक्टरों की भर्ती की थी. एक बार फिर से 285 चिकित्सकों का अधियाचन निकलने वाला है. उन्होंने कहा कि यह एक समस्या है कि “यू कोट, वी पे” के माध्यम से भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है.

इसके माध्यम से भी सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किस तरह से विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को भरा जाए, ताकि ग्रामीण और दूर दराज के शेत्रों में इन्हें तैनात किया जा सके. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो जनपद देहरादून की चिकित्सा इकाइयों में चिकित्सा अधिकारी के कुल 311 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 284 कार्यरत हैं, रिक्त पद 27 चल रहे हैं. जबकि 253 नियमित चिकित्सा अधिकारी के पद हैं. देहरादून के विभिन्न अस्पतालों में संविदा के तहत 23 डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. बांडेड डॉक्टरों की संख्या 7 है. 23 सामान्य चिकित्सक स्नातकोत्तर प्रशिक्षण ले रहे हैं. जबकि जनपद में 10 डॉक्टर्स अनुपस्थित चल रहे हैं. वर्तमान में जिले के भीतर 248 डॉक्टर कार्यरत हैं. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभी कुछ नए डॉक्टरों ने भी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जॉइनिंग की है.

गौर हो कि सरकारें डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए “यू कोट, वी पे” (You Quote, We Pay) योजना का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसमें डॉक्टर अपनी सैलरी (वेतन) की दर खुद कोट करते हैं और सरकार भुगतान करती है. यह योजना खास तौर पर उत्तराखंड जैसे राज्यों में दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई है, ताकि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके.

अल्मोड़ा लमगड़ा में लूटपाट के बाद बुजुर्ग महिला की हत्या, दहशत में ग्रामीण

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अल्मोड़ा लमगड़ा ब्लॉक में बुजुर्ग महिला की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है.

अल्मोड़ा: लमगड़ा ब्लॉक के सांगण साहु गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई. गांव के बीचों-बीच स्थित घर में 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंगा देवी पत्नी मोहन सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला. गले का गलोबंद गायब होने और शरीर पर चोट के निशान मिलने से लूटपाट के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है. शांत पहाड़ी क्षेत्र में हुई इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और वे जल्द से जल्द हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.

पुलिस ने बताया कि गंगा देवी अकेले घर में रहती थी. महिला का पति मोहन सिंह, लमगड़ा बाजार में रेस्टोरेंट चलाता है और अधिकांश समय वहीं रहता है. प्रतिदिन की तरह सुबह जब गंगा देवी बाहर नहीं दिखाई दी, तो दोपहर तक चिंता बढ़ने पर पड़ोसी उनके घर पहुंचे. दरवाजा खुला हुआ था, अंदर टीवी चालू थी और गंगा देवी बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़ी मिली. घटना को देखकर ग्रामीणों ने तुरंत उसके पति और दूर चंडीगढ़ में नौकरी कर रहे बेटे रविंद्र को सूचना दी. दोनों सूचना मिलते ही गांव पहुंचे और मामले की जानकारी लमगड़ा पुलिस थाने में दी गई.

थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की. पुलिस के अनुसार मृतका के कान से खून बह रहा था, गले पर निशान थे और गलोबंद भी गायब था, जबकि अन्य आभूषण घर में सुरक्षित मिले. इससे साफ संकेत मिलता है कि वारदात को अंजाम देने वालों का मकसद लूटपाट हो सकता है. लेकिन घर गांव के बीच में स्थित होने और आसपास लोगों की आवाजाही होने के कारण मामले ने और भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि प्राथमिक जांच में हत्या की आशंका जताई जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी. उन्होंने कहा कि पुलिस टीम हर संभव एंगल से मामले की जांच कर रही है. संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है और गांव में सुराग जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद भी ली जाएगी.

इधर, घटना के बाद गांव में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई है. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया. घटना शुक्रवार की है और पुलिस को सूचना बीते दिन दी गई, जिसके बाद महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में युवक को किया गिरफ्तार, नैनीताल से बरामद की दोनों नाबालिग

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अल्मोड़ा पुलिस ने नाबालिगों को भगाकर ले जाने के मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया.

अल्मोड़ा: जनपद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर दो गुमशुदा नाबालिग किशोरियों को सकुशल बरामद किया है. पुलिस की तत्काल कार्रवाई से एक बार फिर अल्मोड़ा पुलिस की सतर्कता और तत्परता सामने आई है. 11 नवंबर 2025 को अल्मोड़ा क्षेत्र से दो नाबालिग किशोरियों बिना बताए घर से लापता हो गई थी. किशोरियों की मां द्वारा 13 नवंबर को कोतवाली अल्मोड़ा में तहरीर दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पींचा ने संबंधित अधिकारियों को किशोरियों की शीघ्र तलाश कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए. एसएसपी के आदेश पर अपर पुलिस अधीक्षक हरबंस सिंह तथा सीओ अल्मोड़ा गोपाल दत्त जोशी के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक योगेश चन्द्र उपाध्याय के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस की विशेष टीम गठित की गई. पुलिस टीम ने लगातार सुरागरसी-पतारसी करते हुए सर्विलांस सेल की तकनीकी सहायता से तलाशी अभियान तेज किया.

प्रयासों के परिणामस्वरूप 14 नवंबर को दोनों नाबालिग किशोरियों को नैनीताल से सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. साथ ही, एक विधि विवादित किशोर को भी संरक्षण में लेकर पूछताछ समेत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई. गुमशुदा किशोरियों के बयान दर्ज होने के बाद मुकदमे में धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट व धारा 64 बीएनएस की बढ़ोतरी की गई. पुलिस की सक्रियता यही नहीं रुकी. लगातार प्रयासों के बाद 15 नवंबर 2025 को पुलिस टीम ने पॉक्सो एक्ट के अभियुक्त साहिल कुमार को बेस तिराहा, अल्मोड़ा से गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तार आरोपी नैनीताल का रहने वाला है.अल्मोड़ा पुलिस द्वारा समय पर की गई कार्रवाई से जहां परिजनों ने राहत की सांस ली है, वहीं पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर संवेदनशील मामलों में अपनी सजगता का परिचय दिया. टीम में एसएसआई रमेश सिंह बोरा, एसएसआई सतीश चन्द्र कापड़ी, एसआई आनन्द बल्लभ कश्मीरा, प्रभारी चौकी धारानौला, कांस्टेबल संतोष कुमार तथा महिला होमगार्ड ओशिन शामिल रहे.

प्रतिबंधित पशु के अवशेष मिलने से हल्द्वानी में बवाल, पथराव और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने भांजी लाठियां

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हल्द्वानी में में जानवर के अवशेष मिलने के बाद तनाव फैल गया. सांप्रदायिक माहौल बनाए रखने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाला.

हल्द्वानी: नैनीताल के हल्द्वानी के बरेली रोड स्थित उजाला नगर में रविवार देर रात उस वक्त हंगामा मच गया, जब स्थानीय लोगों ने आबादी वाले क्षेत्र में प्रतिबंधित पशु के अवशेष मिलने की सूचना दी. देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया. घटना की खबर फैलते ही कई हिंदूवादी संगठन भी मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. वहीं पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. घटना के बाद हिंदूवादी संगठन आक्रोशित हैं.

पुलिस मामले की जांच में जुट गई है, वहीं सीसीटीवी फुटेज में एक कुत्ता मांस के टुकड़े को लाता हुआ दिखाई दिया. हालांकि हिंदूवादी संगठन ने पुलिस को शिकायत पत्र देते हुए जांच की मांग की. इस दौरान कुछ अराजकतत्वों द्वारा एक होटल और कार में पथराव शुरू कर दिया. हंगामा बढ़ता देख पुलिस को अराजकतत्वों को खदेड़ने के लिए को लाठीचार्ज करना पड़ा. हंगामा बढ़ता देख आसपास के लोगों द्वारा अपनी दुकाने बंद कर दी गई. इसके अलावा प्रशासन द्वारा आसपास के थानों की पुलिस को मौके पर तैनात किया गया. वहीं सुरक्षा के दृष्टिगत जिले के कप्तान मंजू नाथ टीसी ने 4 सीओ, सभी थानाध्यक्षों, पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और पीएसी को तैनात किया गया है.

भीड़ ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की. हालात बिगड़ते देख पुलिस फोर्स तत्काल मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया. कुछ लोग विरोध के दौरान उग्र होने लगे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें तितर-बितर किया. इस दौरान हंगामा कर रहे कुछ लोगों को पुलिस हिरासत में भी ले गई. लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे.

शहर की फिजा बिगाड़ने वाले के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अराजकतत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा. जनपद की खुफिया तंत्र व सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम को एक्टिव कर संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. एसएसपी ने जनपद वासियों से शांति, संयम और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है.
मंजूनाथ टीसी, एसएसपी नैनीताल

एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी क्राइम समेत भारी पुलिस बल ने क्षेत्र की घेराबंदी कर स्थिति को नियंत्रण में लिया. अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह किया.

इसके साथ ही फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जो घटनास्थल की बारीकी से जांच कर रही है. पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में कुछ संदिग्धों को चिन्हित किया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

मसूरी में देर रात हाई वोल्टेज ड्रामा, युवती ने युवक को जड़ा थप्पड़, स्पा सेंटर पर सवाल

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मसूरी के भगत सिंह चौक की घटना, स्पा सेंटर पर पत्थर फेंकने के बाद शुरू हुआ विवाद, लोगों ने की कार्रवाई की मांग

मसूरी: पर्यटन नगरी मसूरी एक बार फिर देर रात हुए हंगामे को लेकर चर्चा में है. रविवार की रात भगत सिंह चौक पर एक युवक और कुछ युवतियों के बीच विवाद हुआ. विवाद इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया. इसी दौरान स्पा सेंटर में काम करने वाली युवती ने युवक को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

चौक पर करीब आधे घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा. स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत कराया. बताया जा रहा है कि विवाद एक स्पा सेंटर पर पत्थर फेंकने और उसके बाद हुई कहासुनी से जुड़ा हुआ था, जिसके बाद दोनों पक्ष सड़क पर भिड़ गए.

मसूरी में पिछले कुछ महीनों से तेजी से खुले स्पा सेंटर्स स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. कई स्पा सेंटर्स के बारे में लगातार शिकायतें आती रही हैं. लेकिन प्रशासन और पुलिस द्वारा अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि देर रात खुलने वाले कई स्पा सेंटर्स में संदेहास्पद गतिविधियां होती हैं. इनके बाहर आए दिन बहसबाजी और झगड़े देखे जा रहे हैं. भगत सिंह चौक की यह घटना भी इन्हीं गतिविधियों का परिणाम बताई जा रही है.

व्यापार संघ ने जताई चिंता: व्यापार संघ के महामंत्री जगजीत कुकरेजा ने चिंता जताते हुए कहा कि-

ऐसी घटनाएं मसूरी की फिज़ा खराब कर रही हैं. पर्यटक यहां सुकून और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए आते हैं, लेकिन जब उन्हें सड़क पर इस तरह के नजारे दिखाई देते हैं, तो शहर की छवि खराब होती है. प्रशासन को तुरंत सख़्त कदम उठाने चाहिए. रात्रि गश्त बढ़ाने के साथ संदिग्ध स्पा सेंटर्स की जांच करवानी चाहिए, ताकि शहर की शांति और पर्यटन पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव रोका जा सके.
-जगजीत कुकरेजा, महामंत्री, मसूरी व्यापार संघ-

पुलिस कर रही है तहरीर का इंतजार: शहर कोतवाल देवेंद्र चौहान ने बताया कि-

शहर में हुई घटना की जानकारी मिली है. लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस को कोई तहरीर नहीं मिली है. तहरीर मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी.
-देवेंद्र चौहान, शहर कोतवाल-

इधर स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं और वीडियो वायरल हो रहे हैं, तब पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल तहरीर का इंतज़ार क्यों कर रही है?

देहरादून: आंदोलन में शामिल उपनल महिला कर्मी की ब्रेन हेमरेज से मौत, विभाग में हड़कंप

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देहरादून : उपनल आंदोलन से जुडी इस वक़्त की बड़ी खबर,आंदोलनरत उपनल महिला कर्मी की ब्रेन हेमरेज से हुई मौत।

पति पत्नी दोनों हैँ उपनल कर्मी,पिछले एक हफ्ते से परेड मैदान में चल रहे धरने में हो रहे थे शामिल।

उपनल महासंघ ने डिप्रेसन के चलते महिला की मौत होने का लगाया आरोप,कहा-सरकार ने नहीं ली आंदोलन की सुध,इसी से डिप्रेशन में आई महिला कर्मी की हुई मौत।

आंदोलन स्थल पर दिवंगत महिला कर्मी को दी गई श्रद्धांजलि,नीलम डोभाल उपनल के माध्यम से जिला निर्वाचन कार्यालय देहरादून में कनिष्क सहायक के पद पर थी कार्यरत।