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नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’अपनापन’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम

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नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’अपनापन’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन-नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस गरिमामयी समारोह में देश की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।


नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘अपनापन-नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ के विमोचन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।


‘अपनापन’ एक प्रेरणादायी पुस्तक है, जिसमें शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न भूमिकाओं में अपने अनुभवों को साझा किया है। पुस्तक में नेतृत्व, सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुस्तक के प्रकाशन पर शिवराज सिंह चौहान को शुभकामनाएं देते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के मंत्री, विधायक, सांसद, समाजसेवी, लेखक-पत्रकार और अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। नई दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक दृष्टि से खास रहा, जहां देश के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पुस्तक ‘अपनापन’ का लोकार्पण किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हल्द्वानी-काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस

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जनपद नैनीताल के भ्रमण पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हल्द्वानी-काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में आम जनता एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को मौके पर ही समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का समयबद्ध और संतुष्टिपरक समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए जनता को राहत पहुंचाने के लिए अधिकारी संवेदनशीलता से कार्य करें।

इस दौरान पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, विद्युत आपूर्ति एवं सिंचाई से जुड़ी शिकायतें प्रमुखता से सामने आईं। मुख्यमंत्री ने पेयजल निगम को ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत आवश्यकतानुसार टैंकरों की व्यवस्था करने तथा खराब नलकूपों एवं  हैंडपंपों, को शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को प्राथमिकता पर गड्ढामुक्त करने और विद्युत विभाग को निर्धारित रोस्टर के अनुसार निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, विधायक सरिता आर्या, दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्या,  ध्रुव रौतेला, भावना मेहरा, दीपक मेहरा, आयोग के सदस्य जेड. ए. वारसी, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक काशीपुर और रामनगर पहुंचकर जनप्रतिनिधियों के परिजनों के निधन पर गहरा शोक

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मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को काशीपुर और रामनगर पहुंचकर जनप्रतिनिधियों के परिजनों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी काशीपुर के जैतपुर घोषी पहुंचे, जहां उन्होंने विधायक त्रिलोक सिंह चीमा के ताऊजी सरदार अमरजीत सिंह चीमा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।


इसके बाद मुख्यमंत्री रामनगर पहुंचे और क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट के आवास पर जाकर उनकी धर्मपत्नी आशा बिष्ट के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने परिवारजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।


मुख्यमंत्री ने दोनों परिवारों को इस दुःख की घड़ी में हरसंभव सहयोग और संबल का भरोसा दिलाते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है।मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील दौरे को शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और सामाजिक सरोकार की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

सीएम से अभिनेता हेमंत पांडे की मुलाकात

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में जाने-माने अभिनेता हेमंत पांडे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों के बीच उत्तराखंड की कला, संस्कृति और फिल्म जगत से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं से भरपूर प्रदेश है। राज्य सरकार प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने और कला-संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए एक बेहतर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।

वहीं अभिनेता हेमंत पांडे ने प्रदेश सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने और स्थानीय कलाकारों को अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता फिल्म उद्योग के लिए बेहद आकर्षक है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

 हेमंत पांडे, अभिनेता मुख्यमंत्री और अभिनेता के बीच हुई इस मुलाकात को उत्तराखंड में कला, संस्कृति और फिल्म उद्योग को नई दिशा देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल में प्राइज डे पर मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया

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Graphic Era Global School
Graphic Era Global School
Graphic Era Global School – प्राइज डे का जश्न ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल में खूब धूमधाम से हुआ। इस बार, पढ़ाई में टॉप करने वाले के अलावा खेल और कला में झिलमिलाए छात्र भी चर्चा में रहे। उनके चेहरे पुरस्कार मिलते ही ऐसे चमक उठे, मानो कोई नई ऊर्जा आ गई हो। खुद के लिए लड़ने वाले हर बच्चे को शिक्षकों ने सलाह दी – यही जोश बरकरार रखना। ऐसे पल स्कूल के हवाले से कुछ खास बन जाते हैं, जहाँ घमंड नहीं, गर्व छाया रहता है।

Graphic Era Global School प्राइज डे कार्यक्रम क्या है?

एक ओर प्राइज डे का आयोजन ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल में हुआ, जहाँ छात्रों की मेहनत को सम्मान मिला, इस तरह के मौके बच्चों के अंदर विश्वास बढ़ाते हैं, क्योंकि वे महसूस करते हैं कि उनकी कोशिशों को कोई देख रहा है अध्ययन के साथ-साथ खेल, कला और अनुशासन में उत्कृष्टता दिखाने वालों को भी सम्मानित किया गया। ऐसा दिखाता है कि स्कूल सिर्फ नंबरों से आगे बढ़कर बच्चे के समग्र विकास में यकीन रखता है। उस दिन का माहौल हर छात्र के लिए मेहनत, समय का महत्व और व्यवहार के मायने सिखाता रहा

  • होनहार बच्चों के प्रति सम्मान जताया जाए
  • बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना
  • मेहनत और अनुशासन का महत्व समझाना
  • सीखने के पास-पास और हुनरों को मौका देते जाना
  • हर समय नए सपने देखते हुए छात्रों की पढ़ाई में जान आती है

क्यों मिला Graphic Era मेधावी छात्रों को सम्मान

उन छात्रों को खास तौर पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने पूरे साल मेहनत से अच्छा किया, खुशी की लहर दौड़ गई जब उन्हें पुरस्कार मिले. इधर, शिक्षकों ने कहा – सफलता पलक झपकते नहीं मिलती, बल्कि लगातार कोशिश, सहनशीलता और सही दृष्टिकोण से आती है, समारोह में छात्रों के हाथों में प्रमाण पत्र, इनाम और सराहना पहुँची. अन्य विद्यार्थियों के मन में भी कुछ ऐसा कर दिखाने की चाह जग उठी. माता-पिता ने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व का एहसास किया। यह सम्मान सिर्फ एक इनाम नहीं था

  • सम्मान मिला उन छात्रों को, जिन्होंने पढ़ाई में अच्छा किया
  • जीतने वालों को खेल में इनाम मिला, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हाथ बटाने वालों को भी सम्मान मिला
  • इसके बाद आए थे वो पल, जब संयम को नमन मिला
  • मेहनत करने वाले छात्रों की सराहना शिक्षकों द्वारा की गई
  • खुशी के आँसू आए थे माता-पिता की आँखों में, बच्चों की उपलब्धि देखकर

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका

एक छात्र के सफल होने में शिक्षक और माँ-बाप की भूमिका सबसे आगे होती है। ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल के प्राइज डे में यह बात धीरे-धीरे सामने आई। शिक्षकों ने बच्चों को समझा, उन्हें सही रास्ता दिखाया, उनकी ताकत ढूंढ़ी, जबकि घर में माता-पिता ने बच्चों के साथ बैठकर समय बिताया। कार्यक्रम में ऐसे लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने चुपचाप मेहनत की। जब स्कूल की दीवारें घर तक जुड़ जाती हैं, बच्चे अपने कदम खुद उठाते हैं। एक छोटी सी जीत के पीछे कई हाथों का सहारा होता है।.

  • सही रास्ते पर ले जाने के लिए शिक्षकों ने छात्रों की मदद की।
  • माता-पिता ने छोटों के हौसले को मजबूत किया।
  • बेहतर नतीजे तभी आए जब स्कूल और घर एक साथ चले।
  • एक अच्छी हवा में बच्चों के पढ़ने का मौका आया।
  • हर किसी के चेहरे पर छात्रों की सफलता की खुशी झलक रही थी।

किस कार्यक्रम से छात्रों को मिली प्रेरणा

एक छोटा सा कार्यक्रम, प्राइज डे, ने बच्चों को यह दिखाया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन बच्चों के चेहरे पर जो ट्रॉफी ले रहे थे, गर्व साफ झलक रहा था, जबकि दूसरे बच्चे चुपचाप ठान रहे थे कि अगली बार आगे आना है। बच्चों के सामने खड़े शिक्षक ने कहा – अध्ययन नियमित हो, समय की कीमत पता हो, अनुशासन जीवन में हो, आत्मविश्वास भी साथ हो, तभी सफलता मिलती है। स्कूल के मुखिया ने धीमे स्वर में जोड़ा कि हार डराने के लिए नहीं, सीखने के लिए आती है। ऐसे पल, जब बच्चे मंच पर खड़े होते हैं, उनके भीतर एक नई सोच जाग उठती है।

  • मेहनत का असली फायदा पढ़ाकूओं को एकदम समझ में आ गया।
  • उन बच्चों में से कई का हौसला कहीं ऊपर चला गया, जिन्हें इनाम मिला।
  • एक छात्र की मेहनत ने कई सोच बदल दी।
  • सीख मिली कि टाइम रहे तो काम संभलता है।
  • एक बच्चे के मन में सोचने का नया ढंग आया।
विषय जानकारी महत्व
कार्यक्रम का नाम प्राइज डे समारोह छात्रों की उपलब्धियों को सम्मान देना
स्थान ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल स्कूल परिवार के लिए गर्व का अवसर
सम्मानित छात्र मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थी मेहनत और प्रतिभा को पहचान मिली
मुख्य क्षेत्र पढ़ाई, खेल, कला, अनुशासन और गतिविधियां बच्चों के संपूर्ण विकास को बढ़ावा
शिक्षकों की भूमिका मार्गदर्शन, सहयोग और प्रेरणा छात्रों को सही दिशा मिली
अभिभावकों की भूमिका बच्चों का साथ और उत्साहवर्धन बच्चों का मनोबल बढ़ा
कार्यक्रम का संदेश मेहनत, अनुशासन और लगन से सफलता मिलती है छात्रों को भविष्य के लिए प्रेरणा मिली

कुछ ऐसा हुआ था जब ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल में एक समारोह ने खड़ा किया सबको। उस दिन मेहनत करने वाले छात्र धीरे-धीरे आगे आए। उनकी लगन को छू लिया गया, सिर ऊपर उठ गया। शिक्षकों की मेहनत भी आई सामने, इसके साथ ही माता-पिता का योगदान भी। ऐसा लगा कि सही रास्ता, लगातार मेहनत और अनुशासन से सभी आगे बढ़ सकते हैं। वो पल स्कूल के सफर में रंग बन गए।

अल्मोड़ा में प्रवासी पंचायत आयोजित, स्वरोजगार और पलायन रोकने पर केंद्रित चर्चा, योजनाओं की जानकारी

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almora-migrant-panchayat
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अल्मोड़ा प्रवासी पंचायत – अल्मोड़ा में प्रवासी पंचायत की चर्चा अलग है, क्योंकि पहाड़ से जुड़े बड़े सवालों पर बातचीत हुई इसमें सिर्फ बाहर से आया हुआ ही नहीं बल्कि घरेलू लोग अधिकारी भी शामिल हुए। पहाड़ों से लोग रोजगार, पढ़ाई और बेहतर सुविधाओं के लिए बाहर झपटते रहते हैं। इस झुकाव से न तो समाज खुश है न प्रशासन। उम्मीद है कि गांवों में रोजगार के अवसर आएं, योजनाओं की जानकारी सीधे लोगों तक पहुंचे तथा युवाओं को मौका मिले, तो जगह छोड़ना नहीं पड सकती है

स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर क्यों दिया गया जोर?

उल्टे-पुल्टे सवालों की बजाय, पंचायत में ध्यान फिर घर वापसी के रास्तों पर टिका। अल्मोड़ा और पास के पहाड़ी इलाकों में आजीविका के नए दरवाजे खोलने की चर्चा सबसे आगे रही खेती से लेकर बागवानी तक, अधिकारियों ने कई ऐसे काम बताए जो यहाँ फल-फूल सकते हैं। इनमें पर्यटन भी शामिल है खासकर होमस्टे के जरिए घर में रहकर कमाई का मौका हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी हाथों-हाथ लिया जा सकता है, बस शुरुआत चाहिए। युवाओं को सही रास्ता दिखाया जाए, तो वे शहर छोड़े बिना भी ठीक से जिंदगी चला सकते हैं।

  • स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया।
  • युवाओं को छोटे उद्योग और स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया।
  • होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को रोजगार का बड़ा साधन बताया गया।
  • महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने की बात कही गई।

पलायन रोकने के लिए किन बातों पर चर्चा हुई?

गांव-गांव में अब आधे से कम लोग रहते हैं बाकी शहरों में काम ढूंढ ले गए ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यहाँ काम का विकल्प नहीं मिलता। कई खेत बंजर पड़े हैं, क्योंकि जो लोग उन्हें जोतते थे वे दूसरी जगह चले गए। इस पर ग्राम सभा में बातचीत छिड़ी थोड़ी सुविधाएं हों थोड़ा काम मिले तभी कोई ठहरेगा यहाँ।

  • गांवों में रोजगार के स्थानीय साधन बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
  • सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और इंटरनेट जैसी सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया गया।
  • खाली पड़े खेतों को फिर से उपयोग में लाने की बात कही गई।
  • प्रवासियों को अपने गांव से जुड़ने और निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।

सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक कैसे पहुंचाई गई?

एक बड़ी वजह थी पंचायत के मौके पर लोगों तक सही जानकारी पहुँचाना अक्सर किसी को पता ही नहीं होता कि सरकार क्या कुछ दे रही है, फिर लाभ मिलना दूर की बात हो जाती है। विभाग के अधिकारियों ने आयोजन में खुद के पैर पर खड़े होने के रास्ते, खेती-बाड़ी पशुओं की देखभाल घूमने के अवसरों और औरतों को मजबूत बनाने वाले नियमों को समझाया।

  • लोन और अनुदान से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी गई।
  • युवाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए कहा गया।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • स्थानीय कारोबार को ऑनलाइन बाजार से जोड़ने की सलाह दी गई।

प्रवासियों की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?

गांव की बैठक में यह बात धीरे-धीरे सामने आई – जो लोग शहरों में रहकर काम कर चुके हैं, वे पहाड़ के विकास में मदद कर सकते हैं ऐसे इंसान जिन्होंने अलग-अलग जगह काम किया है अपने घर लौटकर नए ख्याल लाए हैं।

  • प्रवासी लोग गांवों में निवेश कर सकते हैं।
  • वे युवाओं को रोजगार और कारोबार से जुड़ी सलाह दे सकते हैं।
  • स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।
  • गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में सहयोग दे सकते हैं।

नैनीताल घूमने वालों के लिए उत्तराखंड मौसम अपडेट, ठहरने से पहले पढ़ें जानकारी

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Uttarakhand weather
Uttarakhand weather

Uttarakhand weather – उत्तराखंड के नैनीताल घूमने का मन बना रहे हो? मौसम की स्थिति जान लेना बेहतर रहता है। दिनभर धूप झलकती है, हवा साफ-साफ लगती है, पर हल्के भरोसे में आना ठीक नहीं। ऊँचाई पर मौसम अक्सर अचानक डगमगा जाता है – बादल छा जाएँ तो कोई हैरानी नहीं। तापमान इस समय 26 डिग्री के पास है, कुछ दिनों में 27 से 29 डिग्री के बीच रह सकता है। 24 मई को पूरे दिन धूप खिली रहेगी, उसके बाद धूप के बीच-बीच में हल्के बादल भी आएँगे। कुछ जिलों में आंधी के तेज झोंके, बिजली कड़कना और गरज की संभावना है, मौसम विभाग ने यह बात सामने रखी है घूमने से पहले होटल का पता लग जाए, रास्ता समझ लिया जाए, मौसम का हाल भी देख लेना चाहिए

नैनीताल मौसम अपडेट तापमान और चेतावनी

विवरण जानकारी
स्थान नैनीताल, उत्तराखंड
वर्तमान मौसम धूप और साफ मौसम
मौजूदा तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस
आने वाले दिनों का तापमान लगभग 27 से 29 डिग्री सेल्सियस तक
मौसम चेतावनी गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं की संभावना
हवा की रफ्तार कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक
यात्रियों के लिए सलाह मौसम अपडेट देखकर ही यात्रा और ठहरने की योजना बनाएं

नैनीताल में दिन के समय मौसम भले ही सुहावना लग रहा हो, लेकिन पहाड़ों में दोपहर बाद या शाम के समय अचानक बादल, तेज हवा और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है। ऐसे में पर्यटकों को खुले स्थानों, ऊंचाई वाले व्यू प्वाइंट और झील किनारे मौसम बिगड़ने पर ज्यादा देर रुकने से बचना चाहिए

  • यात्रा से पहले नैनीताल का ताजा मौसम अपडेट जरूर देखें
  • गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ और ऊंचाई वाली जगहों से दूर रहें
  • बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो गर्म कपड़े और दवाएं साथ रखें
  • होटल या होमस्टे बुक करने से पहले पार्किंग और पहुंच मार्ग की जानकारी लें

ठहरने और घूमने से पहले रखें ये सावधानियां

शनिवार व रविवार को नैनीताल में सैलानियों का आना बढ़ जाता है। इसके कारण होटल मिलने में दिक्कत हो सकती है। पार्किंग की जगह कम पड़ जाती है, ट्रैफिक भी फंस सकता है। बुकिंग किए बिना यहाँ आना उचित नहीं रहता। माल रोड पर लोगों की भीड़ रहती है, नैनी झील के पास भी ऐसा ही हाल होता है। चिड़ियाघर, केव गार्डन और स्नो व्यू पर भी लोग ज्यादा जाते हैं

  • होटल की एडवांस बुकिंग और लोकेशन पहले से कन्फर्म करें।
  • वाहन से जा रहे हैं तो पार्किंग व्यवस्था की जानकारी पहले लें।
  • बारिश या तेज हवा की स्थिति में पहाड़ी रास्तों पर सावधानी से चलें।
  • स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करें।
  • झील में बोटिंग करते समय सुरक्षा जैकेट और नियमों का पालन करें।

पर्यटकों के लिए जरूरी सलाह

हवा नैनीताल में घूमने के हिसाब से अभी सही चल रही है, फिर भी पहाड़ों पर उत्तराखंड में आसमान एकदम बदल सकता है। ऐसे में यात्रियों को सचेत रहना जरूरी है, किसी भी चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ठहरने से पहले जाँच लेना चाहिए – होटल की स्थिति, सड़क का हाल, पार्किंग की उपलब्धता और ऊपर की हवा कैसी है

अल्मोड़ा में बदला मौसम, बारिश से मिली राहत, तापमान गिरा, जंगलों में लगी आग पर असर नहीं

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Weather changes in Almora
Weather changes in Almora

Weather changes in Almora – अल्मोड़ा के मौसम में अचानक उथल-पुथल हो गई है। धूप तब से चिपकी हुई थी, इसके बाद जंगलों में आग लगने लगी। उससे लोग परेशान हो गए थे। फिर बारिश आई, ठंडक फैल गई, गर्मी थोड़ी कम हुई। पर जंगलों में लगी आग नहीं बुझी। ऊंचाई वाले इलाकों में नमी बढ़ी, तापमान झट से गिरा। इससे लोगों को थोड़ा आराम मिला। सड़कों पर भी ट्रैफिक बदला, पर्यटकों का रुख भी। आग पर काबू पाने के लिए नई व्यवस्था शुरू हुई। यह सुरक्षा के लिए था। मौसम विभाग ने आगे तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई है।

क्यों अल्मोड़ा मौसम में बदलाव हुआ

गर्मियों में ठंडक आ गई है अल्मोड़ा में, वजह कुछ नए हालात हैं। मानसून के उतरने से पहले ही बादल छा गए, पहाड़ों से चली हवाएं भी खेल बिगाड़ रही हैं। नमी का पैटर्न टूटा, जिससे पारा नीचे आ गया। घरों में लोग चाय गरम कर रहे हैं, धूप से बचाव मिला है। लेकिन जंगलों में आग अब भी जल रही है, बारिश का पानी उसे नहीं छू पाया। ऐसा नहीं है कि मौसम ने स्थायी फैसला ले लिया हो, यह सिर्फ एक झलक है अस्थायी बदलाव की।

  • मानसून की सक्रियता बढ़ी
  • पर्वतीय हवाओं का तेज प्रभाव
  • स्थानीय नमी में वृद्धि
  • तापमान में गिरावट
  • जंगलों में आग पर असर नहीं

क्या बारिश से राहत मिली

बारिश आई तो अल्मोड़ा के लोग गर्मी से छुटकारा पाने लगे। थोड़ी ठंडक होते ही मौसम बदलने लगा, लोगों को सांस लेने में आसानी हुई। पानी के स्रोतों में फिर से चमक आ गई, खास तौर पर झरनों और कुओं में। इधर, प्रशासन ने सड़कों पर आवाजाही की स्थिति पर टिकी नजर रखी।

  • तापमान गिरा और वातावरण ठंडा हुआ
  • स्थानीय लोगों को गर्मी से राहत मिली
  • जल स्रोतों में सुधार
  • यातायात प्रभावित हुआ
  • पर्यटन गतिविधियों में बदलाव

कब और कहां हुई बारिश

अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले दो दिन से बारिश हुई। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ हल्की धूप और बादलों का मिश्रण रहा। प्रशासन ने चेतावनी जारी की और लोगों से सतर्क रहने को कहा।

  • अल्मोड़ा शहर में हल्की बारिश
  • पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश
  • धूप और बादलों का मिश्रण
  • यातायात प्रभावित
  • स्थानीय प्रशासन की सतर्कता

जंगलों में आग पर असर

हालाँकि बारिश हुई, पर जंगल में आग बुझी नहीं। तेज हवा के साथ-साथ सूखी घास भी आग को फैलाने में मदद कर रही है। अधिकारी और अग्निशमन दल लगातार चौकस हैं। कोई भी व्यक्ति उस इलाके में जाने की स्थिति में नहीं है।

  • तेज हवाओं के कारण आग फैलती रही
  • जंगल की सूखी लकड़ी मुख्य कारण
  • दमकल और प्रशासन की सतर्कता
  • स्थानीय लोगों को सुरक्षित जगह पर भेजा
  • आग पर पूर्ण नियंत्रण अभी नहीं

अल्मोड़ा मौसम अपडेट तालिका

दिनांक स्थान तापमान वर्षा (मिमी) जंगल आग की स्थिति
20 मई 2026 अल्मोड़ा शहर 32°C 10 कंट्रोल में
21 मई 2026 जंगली क्षेत्र 30°C 15 फैल रही
22 मई 2026 पहाड़ी क्षेत्र 28°C 20 सतर्कता

गर्मी से थोड़ी खुली अल्मोड़ा की जनता को हालांकि मौसम बदला है। तापमान घटा, बारिश हुई, हवा भी ठंडी चल रही है पर जंगल की आग अभी भी जलती है। प्रशासन नजर रखे हुए है, लगातार काम चल रहा है ताकि लोग सुरक्षित रहें। आने वाले समय में झोंके दार हवाएं आ सकती हैं, साथ में हल्की फुरसत भी बरस सकती है। लोगों को सचेत रहना होगा, खुद को सुरक्षित रखना होगा, प्रकृति की ओर भी ध्यान देना होगा।

देहरादून में बेस्ट NDA कोचिंग: ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी 12वीं के बाद छात्रों को डिफेंस और मर्चेंट नेवी करियर के लिए गाइड कर रही है

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Best NDA Coaching in Dehradun
Best NDA Coaching in Dehradun

Best NDA Coaching in Dehradun – ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी, देहरादून में NDA की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच भरोसे की पसंद है। उन लड़कों के लिए, जो 12वीं के बाद सेना, नौसेना, वायुसेना या मर्चेंट नेवी में जाना चाहते हैं, यहाँ सलाह और तैयारी मिलती है। इस जगह पर ध्यान लिखित परीक्षा पर होता है, SSB के साक्षात्कार पर भी, फिटनेस पर भी, व्यक्तित्व ढालने पर भी। जोश लिए शिक्षक, लगातार चलने वाले आंकलन, ऐसा घेरा जहाँ रक्षा की छाप है – ये सब मिलकर छात्रों के कदम मजबूत करते हैं।

ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी क्यों है NDA तैयारी के लिए सही विकल्प

ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी, देहरादून में बारहवीं के बाद NDA की तैयारी करने वालों के लिए ठोस जगह है। सख्ती से नहीं, पर अनुशासन का अहसास धीरे-धीरे होता है। पढ़ाई के साथ-साथ आत्मविश्वास भी घर कर जाता है। मजबूत दिमाग की जड़ें यहीं से बनती हैं। गणित से लेकर अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान से लेकर चल रही खबरों तक – सब पर पकड़ बनाने का मौका मिलता है। पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं, बस बात समझदारी से करते हैं। मॉक टेस्ट के बाद हर गलती एक सबक बन जाती है। इसी बीच, छात्र अपने रास्ते को पहचानने लगते हैं।

  • ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी, देहरादून में बारहवीं के बाद NDA की तैयारी करने वालों के लिए ठोस जगह है
  • पढ़ाई के साथ-साथ आत्मविश्वास भी घर कर जाता है
  • मॉक टेस्ट के बाद हर गलती एक सबक बन जाती है

12वीं के बाद डिफेंस करियर के लिए सही गाइडेंस

बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी डिफेंस के साथ-साथ एक ठोस रास्ता बन सकती है। कुछ युवा घर से दूर रहने, जहाज़ों पर काम करने और इंजीनियरिंग जैसे काम में दिलचस्पी रखते हैं उनके रास्ते में अक्सर कोर्स के नाम, आयु सीमा या परीक्षा की तैयारी जैसी चीज़ें आड़े आ जाती हैं इन्हीं उलझनों को समझकर ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी छात्रों को समय देकर समझाती है फिटनेस टेस्ट पास करना हो या एंट्रेंस फॉर्म भरना, हर कदम पर स्पष्ट जानकारी मिलती है। अपने लक्ष्य के बारे में सोचने में आत्मविश्वास तभी आता है जब जानकारी साफ़ हो

  • बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी डिफेंस के साथ-साथ एक ठोस रास्ता बन सकती है
  • जहाज़ों पर काम करने और इंजीनियरिंग जैसे काम में दिलचस्पी रखते हैं
  • हर कदम पर स्पष्ट जानकारी मिलती है

SSB इंटरव्यू और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की तैयारी

एसएसबी का इंटरव्यू एनडीए की लिखित परीक्षा के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है अच्छे नंबर लाने के बावजूद कई छात्र घबरा जाते हैं, क्योंकि बोलचाल और आचरण में कमजोरी रह जाती है ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी में तैयारी ग्रुप डिस्कशन से शुरू होती है, फिर लेक्चर और साइकोलॉजिकल टेस्ट का अभ्यास चलता है इंटरव्यू की प्रैक्टिस वहीं होती है, साथ ही ओएलक्यू पर भी काम किया जाता है छात्रों में टीम के साथ काम करने का एहसास जागता है, नेतृत्व की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती है फैसले लेने का तरीका समझ में आता है, खुद को सही ढंग से पेश करना भी आता है। ऐसे में आत्मविश्वास में सुधार होता है

  • एसएसबी का इंटरव्यू एनडीए की लिखित परीक्षा के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है
  • बोलचाल और आचरण में कमजोरी रह जाती है
  • खुद को सही ढंग से पेश करना भी आता है। ऐसे में आत्मविश्वास में सुधार होता है

मर्चेंट नेवी करियर के लिए भी मिलता है मार्गदर्शन

बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी डिफेंस की तरह एक संभावना है। कुछ युवा समुद्र के किनारे घूमने, जहाजों के कामकाज में खींचे चले आते हैं, फिर भी उन्हें पता नहीं चलता कि कौन सा रास्ता लें। उनके लिए योग्यता, कोर्स का ढांचा या चयन कैसे होता है – इसकी समझ कम होती है। ऐसे में ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश करती है। जानकारी मिलने से छात्र नौसेना और व्यापारिक जहाजरानी दोनों में ठहराव महसूस नहीं करते। अपने आगे के रास्ते को वे स्पष्ट आंखों से देख पाते हैं।

  • बारहवीं के बाद मर्चेंट नेवी डिफेंस की तरह एक संभावना है
  • ऐसे में ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश करती है
  • जहाजों के कामकाज में खींचे चले आते हैं, फिर भी उन्हें पता नहीं चलता कि कौन सा रास्ता लें
विषय ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी में सुविधा छात्रों को लाभ
NDA लिखित परीक्षा गणित, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स की तैयारी परीक्षा पैटर्न की अच्छी समझ बनती है
SSB इंटरव्यू ग्रुप डिस्कशन, इंटरव्यू और मनोवैज्ञानिक टेस्ट का अभ्यास आत्मविश्वास और पर्सनैलिटी मजबूत होती है
फिजिकल फिटनेस फिटनेस, अनुशासन और नियमित अभ्यास पर ध्यान छात्र डिफेंस मानकों के लिए तैयार होते हैं
करियर गाइडेंस 12वीं के बाद डिफेंस और मर्चेंट नेवी विकल्पों की जानकारी छात्र सही करियर दिशा चुन पाते हैं
मॉक टेस्ट नियमित टेस्ट और प्रदर्शन विश्लेषण कमजोर विषयों में सुधार होता है
मर्चेंट नेवी मार्गदर्शन योग्यता, कोर्स और चयन प्रक्रिया की जानकारी छात्र दूसरे अच्छे करियर विकल्प को भी समझते हैं

निष्कर्ष

जब देहरादून में NDA की तैयारी की बात आती है, छात्रों को एक ऐसी जगह चाहिए जो पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के रास्ते भी दिखाए इसलिए ब्रिगेडियर डिफेंस अकादमी 12वीं के बाद के छात्रों के लिए NDA, SSB, डिफेंस फिटनेस और मर्चेंट नेवी के रास्ते आसान बनाती है अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और लक्ष्य के हिसाब से तैयारी कराना यहाँ की पहचान है

देहरादून पुलिस ने हीटवेव के बीच वीकेंड पर्यटन भीड़ के लिए विशेष ट्रैफिक योजना लागू की

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Traffic Plan for the Heatwave
Traffic Plan for the Heatwave
Dehradun Police Traffic Plan – गर्मी तेज होने लगी है। स्कूलों में छुट्टियाँ शुरू हो चुकी हैं। इस बीच लोग ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश और चकराता में अब आमद-रफ्त बढ़ गई है। वीकेंड पर भीड़ और बढ़ सकती है। ऐसे में देहरादून पुलिस ने कुछ खास उपाय शुरू किए हैं। जाम से बचने के लिए मुख्य रास्तों, बाजारों और पर्यटन मार्गों पर ट्रैफिक को दूसरी ओर मोड़ा जाएगा।

देहरादून पुलिस ने यह ट्रैफिक प्लान क्यों लागू हुआ?

गर्मी से छुटकारा पाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के साथ पड़ोसी इलाकों से ढेरों पर्यटक उत्तराखंड की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में देहरादून पुलिस ने तय किया कि अप्रत्याशित ट्रैफिक का सामना करने के लिए एक योजना लागू करनी होगी। मसूरी की ओर जाने वाले मार्ग पर भीड़ तेजी से बढ़ सकती है, ठीक वैसे ही चकराता और ऋषिकेश के रास्ते भी गाड़ियों से भर सकते हैं। इसके बाद न तो शहर के अंदर आवाजाही आसान रहेगी, न ही बाहरी मार्गों पर।

  • गर्मियों की लपटों से बचने, पहाड़ों की तरफ अब ज्यादा मेहमान आ रहे हैं।
  • गर्मियों के महीनों में सड़कों पर बच्चों के साथ परिवार का आना-जाना बढ़ गया।
  • गाड़ियों की तादाद में इजाफे की संभावना है, जब मसूरी और चकराता की ओर रुख किया जाए।

किन रूटों पर सबसे ज्यादा असर रहेगा?

मसूरी, ऋषिकेश, चकराता के साथ देहरादून में पर्यटकों के प्रवेश वाले मार्गों पर इस ट्रैफिक योजना का सबसे ज्यादा प्रभाव दिखेगा। दिल्ली से आने वाले वाहनों के लिए एक मार्ग है, जबकि हरियाणा की ओर से आने वालों के लिए दूसरा तय किया गया है। गाजियाबाद से आने वाले ट्रैफिक को अलग डायवर्जन दिया गया है, मेरठ के लिए भी कुछ ऐसा ही व्यवस्थित किया गया है। मुजफ्फरनगर से आने वाले वाहनों के लिए निर्धारित रास्ता अलग है, सहारनपुर की तरफ से आने वालों के लिए भी कुछ नया तय किया गया है। रुड़की की ओर से आने वाले यातायात के लिए भी विशेष मार्ग बनाए गए हैं।

  • उस रास्ते से गुजरने वाली गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी, जहाँ दिल्ली से देहरादून का हाईवे बना है।
  • थानो रोड से मसूरी की ओर जाने वाले यात्रियों को ऋषिकेश या हरिद्वार से मोड़ा जा सकता है।
  • वापसी में साईं मंदिर डायवर्जन का रास्ता अपनाया जाएगा, ओल्ड राजपुर रोड भी शामिल है।

पुलिस ने क्या खास इंतजाम किए हैं?

गाड़ियों की रफ्तार को संभालने के लिए देहरादून पुलिस ने शहर के रास्तों को चार सुपर जोन में बाँटा है। इसके अलावा, दस छोटे जोन भी बनाए गए हैं। उन्नीस सेक्टर ऐसे हैं जहाँ खास ध्यान दिया जा रहा है। बड़े चौराहों पर अब पुलिसकर्मी खड़े रहेंगे। बाजार के ठीक बीच में भी फोर्स तैनात है। जहाँ रूट झटके भरे होते हैं, वहाँ नजर रखी जा रही है। डायवर्जन के स्थानों पर भी अधिकारी तैनात हैं। इससे जाम नहीं बढ़ेगा। अगर कुछ अचानक होता है तो तुरंत फैसला हो सकेगा।

  • प्रमुख जगहों पर अब 130 पुलिसवाले ड्यूटी पर हैं।
  • कुछ मार्गों पर पुलिस की संख्या बढ़ेगी, खासतौर पर जहाँ नज़र रखना ज़रूरी है।
  • कभी-कभी गलत जगह खड़ी गाड़ियों को क्रेन की मदद से हटा दिया जाता है।
  • हादसे की स्थिति में चलने वाले वाहन डायवर्जन के नियमों से अलग रखे जाएंगे।

मसूरी जाने वालों को क्या जानना चाहिए?

पुलिस ने मसूरी में पार्किंग की भीड़ को देखते हुए एक तरह का कदम उठाया है। जब स्थानीय पार्किंग 90% भर चुकी होगी, तब पर्यटकों के वाहनों को किंग क्रेग जैसी जगहों पर लाकर रोका जा सकता है। उधर से फिर यात्री स्थानीय टैक्सी में बैठकर आगे बढ़ जाएंगे।

  • सुबह-सवेरे मसूरी घूमने का प्लान हो, तो रवानगी ढलते समय से पहले ही हो जाए।
  • पार्किंग का इंतज़ाम होटल में पहले से होना चाहिए।
  • शायद किंग क्रेग में पार्किंग के नए नियम चलने लगें।
  • जहाँ मना हो, वहीं गाड़ी न छोड़ें।
  • शायद आपको वहाँ की टैक्सियों पर भरोसा करना पड़े।

पर्यटकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

यात्रा से पहले रूट की जानकारी, मौसम और पुलिस के निर्देश जरूर चेक कर लेना। जल्दबाजी में गाड़ी चलाना, पार्किंग गलत जगह करना या उल्टी दिशा में जाना भीड़ बढ़ा सकता है। अपने साथ पानी, दवाइयां और आवश्यक कागजात रखना घरवालों के साथ यात्रा करने वालों के लिए फायदेमंद होता है।

  • अब गूगल मैप पर पुलिस के सच्चाई वाले अपडेट भी आने लगे हैं।
  • हल्की धूप में चलते समय पानी की बोतल अपने पास होना चाहिए।
  • रुकना है तो सोच लें – पार्किंग की इजाजत वहाँ नहीं है।
  • हर समय बच्चों की दवा साथ होनी चाहिए।
  • जब ट्रैफिक पुलिस हाथ हिलाए, तभी गाड़ी आगे बढ़े।

स्थानीय लोगों को कैसे राहत मिलेगी?

गाड़ियों का दबाव शहर में कम करने के लिए नई सड़कों पर भेजा जाएगा। आवाजाही सुचारू रखना उतना ही जरूरी है स्थानीय लोगों के लिए, जितना बाहर से आने वालों के लिए। भीड़ कम करना योजना का मकसद है, खासतौर पर जहाँ दुकानें, स्कूल, अस्पताल या बड़े चौराहे हैं। अब लोग ट्रैफिक में फंसे बिना आसानी से घूम पाएंगे, रोज की दिक्कत कम होगी।

  • अब रास्तों पर भागती भीड़ के बीच थोड़ी सी छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
  • मोड़ तब होंगे, जब स्थानीय मार्गों की जरूरत पड़ेगी।
  • हॉस्पिटल पहुँचने के लिए सड़कें मुक्त रहनी चाहिए, नहीं तो दिक्कत होगी।
  • गाड़ियाँ गलत जगह खड़ी करने वालों पर सख्ती से अमल होगा।

यात्रा से पहले क्या तैयारी करें?

थोड़ी देर शुरुआत से पहले देहरादून, मसूरी या फिर ऋषिकेश के सफर में आराम जोड़ देती है। वीकएंड में भीड़ अचानक उमड़ सकती है, इसलिए वक्त थोड़ा ज्यादा रखना समझदारी की निशानी है। बुकिंग से लेकर पार्किंग, मौसम का हाल और गुजरने के रास्ते – अगर ये सब पहले देख लिए जाएं, तो सफर में टालमटोल कम हो जाती है।

  • शहर जाने का समय सुबह-शाम से अलग होना चाहिए।
  • पता चलता है ट्रैफ़िक के बारे में सोशल मीडिया के आधिकारिक पेज से।
  • लंबे समय तक भीड़ होने पर रास्ता अलग कर लेना सही रहता है।

शाम के उस वक्त, जब देहरादून में भीड़ घिरने लगती है, पुलिस की ट्रैफिक टीम धीमे दिमाग से चलने लगती है। पर्यटक और निवासी, एक साथ इस व्यवस्था को समझने लगते हैं। गर्मी छुड़ाने आए लोग घबराहट छोड़कर शांति में डूब जाते हैं। सही ओर मुड़ने पर गलती की जगह, वक्त खुद-ब-खुद बच जाता है। पुलिस के संकेत पर चलने से गाड़ियों का झुंझलाहट भरा बहाव कम हो जाता है। जहाँ ठहरने का निशान है, वहाँ खड़े होने के बजाय आगे बढ़ने पर रास्ते फिसलते नहीं। नियमों को चुनौती देने के बजाय उन्हें स्वीकार करने पर दिमाग हल्का पड़ जाता है।