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ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण परिक्षेत्र के स्थाई विकास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पैनी नजर

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डीएम चमोली से गैरसैंण विकास कार्यो की समय समय पर कर रहे समीक्षा।
जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण का ढांचागत विकास पर सीएम का जोर।

विकास कार्यो को गति प्रदान करने हेतु गैरसैंण में रिक्त उप जिलाधिकारी के पद पर की नवीन तैनाती,
ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र का स्थाई विकास करना मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता में शामिल है। विगत नवंबर माह में मुख्यमंत्री ने गैरसैंण का दौरा करते हुए जिलाधिकारी चमोली सहित जनपद के तमाम विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करते हुए राजधानी परिक्षेत्र के ढांचागत विकास पर जोर दिया था और जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण का स्थाई विकास कर पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने और बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने सारकोट गांव को गोद लेकर एक आदर्श ग्राम बनाने की घोषणा भी की थी। जिसके बाद राजधानी परिक्षेत्र में तेजी से विकास कार्य होने लगे है। ग्रीष्मकालीन राजधानी के विकास को लेकर मुख्यमंत्री गंभीर है और चमोली के जिलाधिकारी के साथ विकास कार्यो की नियमित समीक्षा भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने सभी विभागों की योजनाओं को एकीकृत करते हुए राजधानी परिक्षेत्र में विकास कार्यो को रफ्तार देने में जुटे है। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीक़े से काम चल रहा है। कृषि और उद्यान विभाग के माध्यम से गांव में पालिहाउस लगाकर यूरोपियन वेजिटेबल उत्पादन को बढावा दिया जा रहा है। गांव में मशरूम हार्वेस्टिंग के लिए मशरूम टनल लगाना की भी योजना है। गांव में मशाला चक्की लगाने के साथ डेयरी पर काम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य जांच के लिए गांव में नियमित शिविर लगाए जा रहे है। सारकोट गांव में उरेडा के माध्यम से 10 सोलर लाइट लगाकर गांव को रोशन किया गया है। गांव में ही रोजगार मिलने से ग्रामीणों में उत्साह है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर मशरूम उत्पादन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गैरसैंण ब्लाक के आदिबद्री, खेती, मालसी और थापली गांव का चयन करते हुए यहां पर किसानों को शतप्रतिशत अनुदान देकर मशरूम टनल बनाई गई और किसानों मशरुम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। जिससे किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ हो रही है। मशरूम उत्पादन में अच्छा मुनाफा पाकर राजधानी क्षेत्र के अन्य गांवों से भी किसान लगातार मशरूम हार्वेस्टिंग की डिमांड कर रहे है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर पूरे राजधानी क्षेत्र को मशरूम वैली के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने राजधानी देहरादून में संचालित विद्यालयों की तर्ज पर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विद्यालयों को आदर्श विद्यालय बनाने हेतु दिए गए निर्देशों के अनुपालन में पहले चरण में राजकीय इंटर कॉलेज भराडीसैंण को मॉडर्न विद्यालय बनाने का काम तेजी से चल रहा है। राजधानी के राइका भराडीसैंण को मार्डन स्कूल बनाने के लिए सभी संसाधन जुटाए जा रहे है। कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग इस काम को अंजाम देने में जुटा है। आने वाले कुछ समय में आदर्श शिक्षा के लिए यह विद्यालय पूरी तरह से हाइटेक नजर आएगा।

गैरसैंण नगर क्षेत्र में जाम की समस्या को दूर करने के लिए यहां पर मल्टी स्टोरी पार्किंग निर्माण हेतु कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएन के माध्यम से आगणन तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर सिंचाई विभाग के माध्यम से गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में मां भराड़ी देवी का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके लिए स्थानीय जनता एवं हितधारक तीर्थ पुरोहितों के सुझाव भी लिए जा रहे है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर गैरसैंण के स्थाई विकास के लिए रिक्त एसडीएम पद पर भी अधिकारी की तैनाती कर दी गई है। गैरसैंण को जल्द ही उप जिलाधिकारी मिलने से यहां विकास कार्यो और तेजी आएगी।

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के सर्वांगीण विकास को लेकर सीएम धामी संकल्पबद्ध है और जिलाधिकारी चमोली से लगातार फालोअप ले रहे है।

स्मार्ट मीटर से खत्म होंगी बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतें

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Electric power box meter for home use

प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा है कि, स्मार्ट मीटर लगने से बिजली उपभोक्ताओं की रीडिंग या बिलिंग संबंधित शिकायतों में अप्रत्याशित तरीके से कमी आएगी। साथ ही वर्तमान में स्मार्ट मीटर बिना शुल्क के बदले जाएंगे।

शनिवार को मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि स्मार्ट मीटर अत्याधुनिक बिजली मीटर है जिसका कन्ट्रोल उपभोक्ता के हाथ में रहता है। इससे आपको पल पल बिजली उपयोग की जानकारी, सभी जरूरी सूचनाएं, बिजली उपयोग की तुलना, भुगतान के कई विकल्प मिल जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो भारत सरकार के सहयोग से भी सभी राज्यों में चलाया जा रहा है। प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि अभी यूपीसीएल के उपभोक्ता शिकायत निवारण केंद्र के साथ ही सीएम हेल्पलाइन और विभागीय शिविरों में सबसे अधिक शिकायतों बिलिंग और रीडिंग को लेकर आती हैं।

अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद मीटर रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप समाप्त हो जाएगा, इससे बिलिंग सम्बन्धी शिकायतों में अप्रत्याशित कमी आएगी। उपभोक्ता को खपत का विवरण मोबाइल एप पर उपलब्ध, होगा जिससे वो अपनी बिजली खपत को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे। साथ ही विद्युत फाल्ट व सप्लाई बाधित होने की सूचना भी तुरंत विभाग तक पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि रूफ टॉप सोलर लगाने पर यही मीटर नेट मीटर की तरह कार्य करेगा।

मीटर बदलने पर कोई शुल्क नही

प्रमुख सचिव ऊर्जा ने बताया कि पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलने पर कोई इंस्टॉलेशन शुल्क नहीं लिया जायेगा। वर्तमान में भारत सरकार के निर्देश पर पोस्ट पेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं। फिर भी कोई उपभोक्ता स्वैच्छा से प्री पेड मीटर की सेवाएं लेना चाहता हैं तो उन्हें घरेलू कनेक्शन पर वर्तमान में लागू विद्युत दरों पर 4 प्रतिशत तथा अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 3 प्रतिशत की छूट मिलेगी। उन्होंने बताया की मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग मंत्रिगणों, विधायकों और अधिकारियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान शुरु करेगा। घर बैठे मीटर को मोबाइल ऍप या ऑनलाइन रिचार्ज करने पर बिजली बिल पर लगने वाले ब्याज या लेट फीस से छुटकारा। प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि छुट्टियों के दिनों में या रात में बैलेंस खत्म होने के बाद भी बिना रूकावट बिजली की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्होने बताया कि योजना के तहत जून 2026 तक 15.88 लाख उपभोक्ताओं सहित 59212 ट्रासंफार्मर और 2602 फीडर के मीटर बदले जाने हैं।

शानदार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल खेल प्रतिभा निखारने में हो – मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री ने 39वें राष्ट्रीय खेलों के लिए अभी से तैयारी शुरू करने को कहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, 38वें राष्ट्रीय खेलों में राज्य के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर बधाई देते हुए कहा है कि, अब हमें 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी में जुटना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में, राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किए गए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के भी दीर्घ कालिक इस्तेमाल की योजना बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड को आयोजन के साथ ही खेल प्रदर्शन को लेकर शानदार यादें देकर गया है। उत्तराखंड की मेजबानी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है, उत्तराखंड ने इस आयोजन के जरिए लंबी लकीर खींचने का काम किया है। इसी तरह उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से, इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमें मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी में जुटना होगा, इसके लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों से लेकर विभाग को तक प्रयास करने होंगे। सरकार इस काम में पूरा सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के जरिए उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में शानदार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो गया है। इसका इस्तेमाल खेल प्रतिभाओं को निखारने में किया जाएगा। सरकार खेल सुविधाओं के दीर्घकालिक इस्तेमाल के लिए योजना बनाएगी।

उत्तराखंड का डंका देश भर में गूँजा धामी को सियासी ऊर्जा दे गए अमित शाह

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उत्तराखंड में हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नई सियासी ऊर्जा दी है। इस आयोजन के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि इसे खेलभूमि भी बनाया जा सकता है। खास बात यह है कि इस आयोजन के दौरान उत्तराखंड ने पदक तालिका में 25वें स्थान से छलांग लगाकर सातवें स्थान पर पहुंचने में सफलता पाई, जिससे राज्य की उपलब्धियों को पूरे देश ने सराहा।

राष्ट्रीय खेलों के समापन पर गृहमंत्री अमित शाह ने गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुख्यमंत्री धामी की जमकर तारीफ की। शाह ने कहा कि 16,000 खिलाड़ियों को एकत्र करना और छोटे राज्य में इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराना आसान काम नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने सीएम धामी की इको-फ्रेंडली प्रैक्टिसेज और खेलों के इस दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए भी सराहना की।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री धामी ने पीएम और गृहमंत्री जैसे बड़े नेताओं को इस आयोजन में बुलाकर अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया और साथ ही देशभर में उत्तराखंड का डंका भी बजाया। इस सफलता ने उनके नेतृत्व को और मजबूत किया है और यह आगामी चुनावों में उनके लिए एक बड़ा सियासी हथियार साबित हो सकता है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले बेहड़ संगठन को धीमा जहर देने का काम कर रहे

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देहरादून उत्तराखंड प्रदेश में 16 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की कवायद में जुटा यूपीसीएल नया बिजली कनेक्शन लेने वालों को फिलहाल पुराना ही मीटर दे रहा है। उपभोक्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि लौटानी है लेकिन यूपीसीएल अभी भी बिलों में अतिरिक्त सिक्योरिटी राशि वसूल कर रहा है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर का विरोध करते किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने बीते दिनों सड़को पर मीटर तोड़ते हुए अपना विरोध किया था सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ किच्छा विधायक ने कहा था वो मीटर नहीं लगने देंगे इस मामले पर राजनीती शुरू हो गयी है बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने सबसे पहले अपने घर पर मीटर लगाए जाने की बात कही है विरोध करते बेहड़ को शिव अरोरा ने राजनैतिक रूप से मीटर लगाए जाने की बात कहने के बाद मामले पर बैक फुट में नज़र आती सियासत देखने को मिल रही है

उधम सिंह नगर हमेशा से विवादों में रहा है राजनीती की बात हो या अपने नेताओं का विरोध बीजेपी कांग्रेस दोनों दलों में आपसी गुटबाजी ऐसी है जिसका राजनैतिक पार्टी के बड़े नेता भी आज तक कोई हल नहीं कर सके है मीटर विवाद से शुरू हुई राजनीती अब निकाय चुनावो में मिली हार के बाद एक बार फिर गर्म होती देखि जा रही है बेहड़ का विरोध पार्टी में जमकर हो रहा है

किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ की ओर से निकाय चुनाव को लेकर की गई आरोपों की बौछार पर अब जिलाध्यक्ष ने तीखा पलटवार किया है। जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि बेहड़ खुद को संगठन से ऊपर न समझें। मेयर प्रत्याशी के फार्म हाउस पर समीक्षा बैठक के नाम पर बेहड़ ने संगठन को धीमा जहर देने का काम किया है। बेहड़ को महानगर से लेकर जिलाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्षों से लंबे समय से परेशानी ही रही है। जिले में पांच विधायकों में से सिर्फ बेहड़ को उनसे परेशानी है। अगर इतनी ही दिक्कत है तो सारे पद बेहड़ संभाल लें और संगठन के लोग घर बैठ जाते हैं।

Uttarakhand Weather शनिवार को ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश

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उत्तराखंड में इस शनिवार Uttarakhand Weather मौसम का मिजाज काफी बदल चुका है, खासकर पहाड़ी इलाकों में जहां बारिश और ठंडी हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। देर रात कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हुई थी, और इसके कारण ठंडक महसूस हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने पहले ही अनुमान जताया था कि शनिवार को ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश हो सकती है।

आज सुबह से ही ठंड का अहसास हो रहा है, खासकर देहरादून के ऊंचाई वाले इलाकों में और उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं। हालांकि कुछ जिलों में मौसम साफ भी है। इस बदलाव से उत्तराखंड में ठंड बढ़ गई है, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए महसूस किया जा रहा है।

38 वे राष्ट्रीय खेलों का शानदार समापन

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हमारे खिलाड़ियों ने देवभूमि को खेल भूमि बना दिया : रेखा आर्या

खेल मंत्री बोली उत्तराखंड का 103 पदक जीतना ऐतिहासिक

अपने पिछले बेस्ट से चार गुना से भी ज्यादा पदक जीते

हल्द्वानी के गौलापार स्टेडियम में शुक्रवार को 38 वे राष्ट्रीय खेलों का शानदार समापन हुआ। मेघालय को अगले राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए ध्वज सोपा गया।

इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की सरकार ने हर जनपद में खेल सुविधाएं जुटा कर देवभूमि को खेल भूमि बनाने का काम किया है। उन्होंने सफल और भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और खेल मंत्री रेखा आर्या को विशेष रूप से शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इतने भव्य आयोजन में सबसे बड़ा योगदान उन एथलीट्स का रहा है जिन्होंने प्रदेश के लिए अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खिलाड़ियों ने हमें पिछले राष्ट्रीय खेलों में मिले 25वें स्थान से सीधे सातवें स्थान तक पहुंचा दिया है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हमने उत्तराखंड को खेल भूमि बनाने का सपना देखा था लेकिन इस सपने को साकार करने का बीड़ा हमारे खिलाड़ी ने उठाया और सफल कर दिखाया।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों में हमने ग्रीन गेम्स जैसी नई अवधारणाओं पर काम किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के स्तर को बहुत ऊंचा कर दिया है। खेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के दौरान हमारे प्रदेश में खेलने आए सभी खिलाड़ियों ने यहां की खेल सुविधाओं की जिस तरह से प्रशंसा की वह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। खेल मंत्री ने कहा कि हमारे एथलीट्स ने राष्ट्रीय खेलों के स्तर पर तो शानदार प्रदर्शन किया ही है अब प्रदेश सरकार इन्हीं खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाब होने के लिए तैयार करेगी। इसके पहले खेल मंत्री रेखा आर्य ने पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचकर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडवीया और मेघालय के मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

इस अवसर पर मेघालय के मुख्यमंत्री को अगले राष्ट्रीय खेलों के लिए ध्वज सोपा गया। आयोजन में बॉलीवुड गायक सुखविंदर, श्वेता माहरा और दिगारी ग्रुप की प्रस्तुतियों ने चार चांद लगा दिए।

इस अवसर पर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडवीया, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा आदि मौजूद रहे।

आने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए लंबी लकीर खींच गया उत्तराखंड

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कॉमन इंट्रो – उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल इस बार व्यवस्थाओं से लेकर आयोजन तक लेकर लंबी लकीर खींचने वाले साबित हुए हैं। इस बार के राष्ट्रीय खेल पर्यावरण हितैषी कदमों से लेकर खिलाड़ियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य की देखभाल को लेकर चर्चाओं मे रहे।

01 – पदक तालिका में प्रदर्शन
-38 वें राष्ट्रीय खेलों से पहले इस आयोजन में उत्तराखंड का इतना शानदार प्रदर्शन कभी नहीं रहा। राज्य स्थापना के बाद जब-जब उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया, तब-तब उसे मिलने वाले पदकों की संख्या दस से लेकर 19 तक रही है। इसी तरह, पदक तालिका में वह 13 वें स्थान से लेकर 26 वें स्थान के बीच में कहीं रहा है। यही हाल स्वर्ण पदकों का भी रहा है, जिसकी संख्या एक से लेकर अधिकतम पांच तक रही है। अब 38 वें राष्ट्रीय खेलों की बात कर लें, तो क्या कुल पदक, क्या स्वर्ण और क्या पदक तालिका की स्थिति, सभी में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। पदकों की कुल संख्या 103 पर पहुंची है। पदकों का सैकड़ा जड़ कर उत्तराखंड ने सबको चकित कर दिया है। इसी तरह, स्वर्ण पदकों की संख्या 24 रही है। पदक तालिका में सातवें स्थान पर आना, सचमुच कमाल का अनुभव है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिसा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, आंध्र, जम्मू कश्मीर जैसे बडे़ राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से पीछे हैं।

02 – छोटे राज्य ने दिखाया दम
उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्य को राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। सफल आयोजन किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि उत्तराखंड को राज्य बने सिर्फ 25 वर्ष हुए हैं। जिस पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल के मॉडल को अपनाने की अक्सर बातें होती हैं, उसे राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कभी नहीं मिली। मणिपुर और असम के बाद उत्तराखंड राष्ट्रीय खेल कराने वाला तीसरा हिमालयी राज्य बन गया है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड के साथ राज्य का दर्जा हासिल करने वाले झारखंड ने वर्ष 2011 में राष्ट्रीय खेल कराए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ मेजबानी मिलने के बावजूद इसका आयोजन नहीं करा पाया था। उत्तराखंड ने 38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया। अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए। इस वजह से कई रिकार्ड भी टूटे। दस हजार खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

03 ग्रीन गेम्स
राष्ट्रीय खेलों में सबसे अहम हरित पहल रही। ग्रीन गेम्स की थीम को अमल में लाने के लिए कई कदम उठाए गए। रायपुर में 2 .77 हेक्टेयर जमीन पर खेल वन तैयार किया गया, जहां पर पदक विजेताओं के नाम के 1600 पौधे लगाए जा रहे हैं। खेलों में जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पदक हों या मेहमानों के लिए आमंत्रण पत्र, सभी ई-वेस्ट से तैयार कराए गए। शुभंकर राज्य पक्षी मोनाल को बनाया गया। हरित जागरूकता के लिए स्पोर्ट्स वेस्ट मटीरियल के प्रतीक चिन्ह आयोजन स्थल पर प्रदर्शित किए गए। आयोजन स्थल पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही के लिए ई-रिक्शे, साइकिल प्रयोग किए गए। इसके अलावा, सोलर पैनल के प्रयोग से लेकर पानी के लिए रीयूसबल वाटर बॉटल की व्यवस्था की गई। हरित पहल से इतर महिला स्वास्थ्य का संदेश देने के लिए महिला खिलाड़ियों को वैलकम किट में सेनेटरी नैपकीन व अन्य जरूरी सामान दिए गए। तीन बार इस्तेमाल किए जा चुके 250 लीटर तेल को बायो डीजल बनाने के लिए भेजा गया।

38 वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी को हमने पहले ही दिन से अपने लिए बड़ी उपलब्धि माना। इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए पूरे प्रयास किए गए। आधारभूत ढांचा तैयार किया गया और उच्चस्तरीय सुविधाएं जुटाई गईं। निश्चित तौर पर उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बाद खेल के क्षेत्र में मजबूत होकर उभरा है। मै सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देता हूं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

चुनौतियों को मात देकर खेल शक्ति बनकर उभरा उत्तराखंड

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नौ स्थानों पर 18 दिनों तक चले राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के जरिए, उत्तराखंड खेल परिदृष्य में प्रमुख शक्ति बनकर उभरा है। उत्तराखंड ना सिर्फ पदक तालिका में अपनी रैंकिंग सुधारने में कामयाब रहा, बल्कि पूरे आयोजन को अनुशासित तरीके से सम्पन्न कराने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भी अपनी क्षमता का परिचय दिया है।

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों को हरी झंडी 9 अक्तूबर को मिल पाई, इस तरह 28 जनवरी से राष्ट्रीय खेल शुरू करने के लिए राज्य सरकार को महज साढ़े तीन महीने का ही समय मिल पाया। कम समय को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तुरंत ग्राउंड जीरो पर उतरे, राज्य के सामने दूसरी चुनौती यह थी कि इस बार खेल प्रतियोगिताएं नौ शहरों में आयोजित की जा रही थी। जिसमें पिथौरागढ़, टिहरी जैसे पहाड़ी जिले भी शामिल थे, जहां सुविधाएं जुटाने से जेकर खेल आयोजन में तक कई तरह की चुनौतियां थी। बावजूद इसके राज्य सरकार ने खेल आयोजनों को कुशलता पूर्वक आयोजित कर, किसी भी खिलाड़ी, कोच, अधिकारी या दर्शक को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी। इस बार सभी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्तराखंड राज्य के भीतर ही किया गया। जबकि पहले एक से अधिक राज्यों में खेल प्रतियोगिताओं को आयोजित किया जाता था।

लगातार जायजा लेते रहे सीएम:

28 जनवरी 2025 से राष्ट्रीय खेलों का आगाज, देहरादून में प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुआ, जबकि समापन 14 फरवरी को हल्द्वानी में गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ। इस तरह 18 दिन तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार राष्ट्रीय खेलों के विभिन्न आयोजन स्थलों पर पहुंचकर स्थितियों का जायजा लेते रहे। जिससे ना सिर्फ खिलाड़ियों को प्रोत्साहन बढा बल्कि आयोजन भी कुशलता पूर्वक सम्पनन हुआ।

राष्ट्रीय खेल: सपनों की उड़ान और खेल प्रतिभाओं का मंच

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साल 1924 की बात है, जब भारत में पहली बार खेलों का एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने देश के खिलाड़ियों के लिए नए रास्ते खोल दिए। दिल्ली में आयोजित इस पहले राष्ट्रीय खेल को तब ‘इंडियन ओलंपिक गेम्स’ कहा जाता था। यह खेल सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं थे, बल्कि एक सपने की शुरुआत थी।

तब भारत में खेलों को लेकर अधिक जागरूकता नहीं थी, लेकिन इन खेलों के माध्यम से देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी चुने जाते थे, जिन्हें आगे चलकर ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भेजा जाता था। धीरे-धीरे यह आयोजन लोकप्रिय होता गया, और साल 1940 में जब ये खेल बॉम्बे (अब मुंबई) में हुए, तो इनका नाम बदलकर ‘नेशनल गेम्स ऑफ इंडिया’ कर दिया गया।

हर दो साल में होने वाले इन खेलों का मुख्य उद्देश्य देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को एक मंच देना था, जहाँ वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। राष्ट्रीय सरकार ने इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठाए। देश के विभिन्न राज्यों से खिलाड़ी इन खेलों में भाग लेने के लिए आते, और उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए चुना जाता।

समय के साथ इन खेलों का महत्व और भी बढ़ता गया। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ, प्रशिक्षण और संसाधन मिलने लगे। सरकार ने सुनिश्चित किया कि यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता बनकर न रह जाए, बल्कि यह खिलाड़ियों के सपनों को उड़ान देने का एक सशक्त मंच बने।

हर बार जब राष्ट्रीय खेल आयोजित होते, तो पूरे देश में खेलों का माहौल बन जाता। विभिन्न राज्यों से युवा एथलीट अपने सपनों को पूरा करने के लिए इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते। उनके भीतर एक जुनून होता, एक लक्ष्य होता कि वे अपने राज्य का, और आगे चलकर अपने देश का नाम रोशन करें।

राष्ट्रीय खेल की इस पहल ने देश को कई महान खिलाड़ी दिए, जिन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का परचम लहराया। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक क्रांति थी, जिसने खेलों को भारत में एक नई पहचान दी।

सरकार का यह कदम आज भी हजारों युवाओं को प्रेरित कर रहा है। हर राज्य अपने बेहतरीन खिलाड़ियों को तैयार करने में जुटा है, ताकि वे इस मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। यह केवल खेलों का आयोजन नहीं, बल्कि देश के युवा एथलीट्स के लिए एक सुनहरा अवसर है, जहाँ वे अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं और दुनिया के सामने अपनी काबिलियत साबित कर सकते हैं।

राष्ट्रीय खेल की यह परंपरा, जो लगभग एक सदी पहले शुरू हुई थी, आज भी उसी जोश और उत्साह के साथ जारी है। यह खेलों का त्योहार है, जिसमें पूरे देश की उम्मीदें और सपने जुड़े होते हैं। यह सरकार की एक अनूठी पहल है, जो भारत को खेलों के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।