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अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा सचिवालय में नाबार्ड की समीक्षा बैठक

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अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विभागों को नाबार्ड में अवशेष धनराशि हेतु प्रतिपूर्ति बिलों को समयबद्धता से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए

अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विभागों को नाबार्ड में अवशेष धनराशि हेतु प्रतिपूर्ति के बिलों को समयबद्धता से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य हेतु भारत सरकार द्वारा आरआईडीएफ के मानक आवंटन हेतु कुल 650 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। इसके साथ ही एसीएसी श्री आनन्द बर्द्धन ने वर्ष 2025-26 के लिए संचालित प्रोजेक्ट, संवितरण, ऋण लक्ष्यों की प्रगति की कार्ययोजना पर प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्वीकृत प्रस्तावों के सापेक्ष विभागों द्वारा डिस्बर्समेंट की प्रगति पर शीघ्रता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने सभी विभागों को इस दिशा में तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि विभागों द्वारा वितरण एवं अदायगियों में आ रही समस्याओं का निस्तारण कर कार्यों को समयबद्धता से पूरा किया जाए। एसीएस ने प्रोजेक्ट्स की निरन्तर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करते हुए पीएम गति शक्ति उत्तराखण्ड पोर्टल पर भी लगातार अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

अपर मुख्य सचिव ने ऑफ सीजन फलों एव सब्जियों के अधिक उत्पादन वाले स्थानों चकराता, मोरी में आरम्भ में कलेक्शन सेन्टर का संचालन आरम्भ करते हुए भविष्य में मण्डी की स्थापना, स्टोरेज व रोपवे की संभावना की कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव विनीत कुमार, डा0 अहमद इकबाल, आनन्द श्रीवास्तव सहित नाबार्ड एवं सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

 उत्तराखंड के नए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन

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उत्तराखंड की वर्तमान मुख्य सचिव, राधा रतूड़ी, का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। इसके बाद, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद बर्द्धन उत्तराखंड सरकार के नए मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे। आनंद बर्द्धन 31 मार्च को अपना कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। उनके पास प्रशासनिक क्षेत्र में एक लंबा और व्यापक अनुभव है। 1992 में उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ था, और वह रामपुर, इटावा, पौड़ी, नैनीताल और हरिद्वार जैसे जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर के पदों पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने वित्तीय संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भी अपनी सेवा दी है।

विशेष रूप से, आनंद बर्द्धन ने यूपी सहकारी चीनी कारखाना संघ लिमिटेड के संयुक्त प्रबंधक निदेशक और यूपी वित्तीय निगम के महाप्रबंधक के तौर पर भी काम किया। अपनी सेवाओं के दौरान उन्होंने शासन के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। 2010 में उन्होंने हरिद्वार कुंभ मेला अधिकारी के रूप में भी कार्य किया। वह राज्यपाल और मंत्रिपरिषद सचिव के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रमुख सचिव के रूप में, उन्होंने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सिंचाई, लघु सिंचाई, खनन, सैनिक कल्याण, पुनर्गठन, आबकारी, उच्च शिक्षा, योजना, और ईएपी जैसे विभागों में कार्य किया। इसके अलावा, वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। उन्होंने आवास, शहरी विकास, गृह एवं कारागार, राजस्व, वन एवं पर्यावरण, और ग्रामीण विकास विभागों की जिम्मेदारी भी निभाई है।

आनंद बर्द्धन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने भौतिकी में बीएससी ऑनर्स भी किया, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने फ्रांस के ईएनए से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी किया।

वर्तमान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी 31 मार्च को अपने कार्यकाल को समाप्त करेंगी। खबरें हैं कि उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए आवेदन किया है, और यह संभावना जताई जा रही है कि सेवानिवृत्ति से पहले उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

‘‘धारा मेरा, नौला मेरा, गांव मेरा, प्रयास मेरा’’ पर आधारित भागीरथ मोबाइल एप का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में जल संरक्षण अभियान 2025 के अंतर्गत आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने जल संरक्षण अभियान 2025 की थीम ‘‘धारा मेरा, नौला मेरा, गांव मेरा, प्रयास मेरा’’ पर आधारित भागीरथ मोबाइल एप का शुभारंभ और ब्रोशर का विमोचन किया। इस एप के माध्यम से लोग अपने क्षेत्र के क्रिटिकल और संकटग्रस्त जल स्त्रोतों की जानकारी साझा कर सकेंगे। एप के माध्यम से चिन्हित स्त्रोतों का सरकार द्वारा पुनर्जीवीकरण की दिशा में कार्य किये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जल स्त्रोतों, नौलों, धारों तथा वर्षा आधारित नदियों का संरक्षण करने के उद्देश्य से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) का गठन किया है। सारा ने विगत वर्ष विभिन्न विभागों के मध्य सहयोग एवं समन्वय स्थापित कर प्रदेश के लगभग 6500 से अधिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु उपचार कार्य करने के साथ ही लगभग 3.12 मिलियन घन मीटर वर्षा जल का संचयन करने में भी सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि सारा द्वारा, जहां एक ओर, मैदानी क्षेत्रों में केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के सहयोग से भू-जल रिचार्ज हेतु विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। वहीं, प्रदेश की नदियों को पुनर्जीवित करने के अपने प्रथम चरण में तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर नयार, सौंग, उत्तरवाहिनी शिप्रा एवं गौड़ी नदी के उपचार के लिए आई०आई०टी०, रूड़की एवं एन०आई०एच० रूड़की के सहयोग से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल उन्नति, प्रगति जीवन और विकास का मुख्य आधार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। इसमें जन सहयोग भी लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि 10 सालों में उत्तराखण्ड के विकास को बुलंदियों पर ले जाने का यही समय है, जो सही समय है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के अभियान को ग्राम स्तर से राज्य स्तर तक व्यापक रूप से चलाया जायेगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य के जल स्त्रोतों के सुधारीकरण और पुनर्जीवित करने के लिए सारा का गठन किया गया है। जल संरक्षण अभियान 2025 में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भागीरथ मोबाइल एप का शुभारंभ भी हो गया है। इस एप के माध्यम से आम जन अपने क्षेत्रों के क्रिटिकल और सूख चुके जल स्त्रोतों की जानकारी साझा कर सकेंगे जिससे समय रहते उनका उपचार भी संभव होगा।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि जल संरक्षण अभियान 2025 एक अभियान मात्र नहीं है। राज्य की जल संपदाओं का संचयन, संरक्षण राज्यवासियों की सहभागिता से किया जा रहा। इस अभियान के तहत ग्राम स्तर पर धारा नौला संरक्षण समिति गठित है, जिससे प्रत्येक स्तर पर ग्रामवासियों की भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके साथ ही ग्रामपंचायतों की क्षमता विकास के लिए चरणवार कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

इस मौके पर विधायक खजान दास, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, जलागम प्रबंधन से नीना ग्रेवाल, पर्यावरणविद चंदन सिंह नयाल, कुंदन सिंह पंवार और पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे लोग मौजूद थे।

दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं होंगी दुरूस्त: डॉ. धन सिंह रावत, नौ पर्वतीय जिलों में तैनात किये 84 बॉण्डधारी चिकित्सक

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अस्पतालों में डॉक्टरों के आने से मरीज़ों को मिलेगी बड़ी राहत

सूबे के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 84 नये एमबीबीएस चिकित्सक मिल गये हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से पास आउट इन बॉडधारी चिकित्सकों को प्रदेश के नौ पर्वतीय जनपदों में तैनाती दे दी गई है। जिसकी सूची मुख्य चिकित्साधिकारियों को सौंप दी गई है ताकि प्राथमिकता के आधार पर इन्हें दूरस्थ चिकित्सा इकाईयों में तैनात किया जा सके।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सा इकाईयों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अपग्रेडेशन के लिये राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों सहित विभिन्न संवर्गों में पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती से स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। इसी क्रम में बॉड व्यवस्था के तहत श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से पास आउट 84 बॉडधारी चिकित्सकों को नौ पर्वतीय जनपदों में तैनाती दे दी गई है। जिसकी सूची स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से मुख्य चिकित्साधिकारियों को सौंप दी गई है। इन बॉडधारी चिकित्सकों को संबंधित सीएमओ प्राथमिकता के आधार पर रिक्तियों रिक्त पदों के सापेक्ष चिकित्सालय आवंटित करेंगे।

डॉ. रावत ने बताया कि बॉड व्यवस्था के पौडी व अल्मोड़ा जनपद में 15 चिकित्सकों को तैनाती दी गई है। इसी प्रकार पिथौरागढ़ में 11, बागेश्वर 6, चमोली व रूद्रप्रयाग में 9-9, उत्तरकाशी व टिहरी में 7-7 तथा चम्पावत जनपद में 5 चिकित्सक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बॉडधारी एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती प्राथमिकता के आधार पर दुर्गम व पर्वतीय क्षेत्रों के चिकित्सालयों में दी जायेगी, जिसके निर्देश संबंधित मुख्य चिकित्साधिकारियों को दे दिये गये हैं।

सभी बॉण्डधारी चिकित्सकों को 20 दिन के भीतर तैनाती स्थान पर योगदान देना होगा और अपनी योगदान आख्या संबंधित जनपद के सीएमओ को प्रस्तुत करनी होगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि संविदा बॉण्डधारी चिकित्सकों की नियुक्ति बॉण्ड व्यवस्था के तहत 05 वर्ष के लिये नियत मानदेय पर की गई है। बॉण्ड के उल्लंघन पर इनके खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुरूप सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती से स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होगी और स्थानीय स्तर पर लोगों को उपचार मिल सकेगा।

भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड के सीएम ने दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में 1064 हेल्पलाइन की बैठक के दौरान निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्ड के लिए सभी विभागों द्वारा अपने स्तर से प्रयास किये जाएं। विभागों में जिन मामलों में अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, विभागों द्वारा इसके समाधान के लिए उचित कार्यवाही की जाए। एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का समय-समय पर ट्रांसफर किया जाए। 1064 हेल्पलाइन की प्रभावशीलता को नियमित बनाये रखने के लिए सभी विभाग विजिलेंस को सहयोग करें। सीएम हेल्पलाइन 1905 के साथ 1064 हेल्पलाइन की भी समीक्षा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर सघन जांच के साथ कठोर कार्यवाही भी की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए की शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनी रहे और भ्रष्टाचार की शिकायत होने पर यदि वह सही पाई जाती है, तो शिकायतकर्ताओं को प्रोत्साहित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए विभाग स्तर पर नोडल अधिकारी बनाये जाएं और उनको प्रशिक्षण भी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण में सभी विभाग विजिलेंस को सहयोग करें।

बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले तीन सालों में कुल 66 लोगों को ट्रैप किया जा चुका है। 72 भ्रष्टाचारियों को हिरासत में भी लिया गया है। राजस्व विभाग, पुलिस और विद्युत विभाग में सबसे अधिक कार्मिक ट्रैप किए गए है। 2025 में टोलफ्री नंबर 1064 एवं वेबसाइट से अब तक 343 शिकायतें प्राप्त हुई है, जिन पर कार्यवाही गतिमान है। रिवॉल्विंग फंड के तहत ट्रैप की कार्यवाही में शिकायतकर्ताओं को ट्रैप की धनराशि वापस की जाने की प्रकिया शुरू की गई है। जिसमें वर्तमान में 33 लोगों को ट्रैप की धनराशि वापसी की प्रक्रिया गतिमान है।

बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव न्याय प्रदीप पंत, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, एल. फैनई, आर.मीनाक्षी सुदंरम, निदेशक सतर्कता वी. मुरूगेशन, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

स्पा सेंटरों पर छापा: अवैध कारोबार बनाम वैध कारोबार

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स्पा सेंटरों पर छापा: अवैध कारोबार बनाम वैध कारोबार उत्तराखंड में स्पा सेंटरों का कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है और यह अब एक नया व्यापार बन चुका है। खासकर देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में स्पा सेंटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना काल के बाद, जबकि स्थानीय व्यापारियों की संख्या में कमी आई है, स्पा सेंटरों के कारोबार ने कई नए व्यापारी आकर्षित किए हैं। हालांकि, स्पा सेंटरों का बढ़ता कारोबार कुछ समस्याओं को भी जन्म दे रहा है।

सही दिशा में चलने वाले स्पा सेंटर

जिन स्पा सेंटरों का संचालन सही तरीके से किया जा रहा है, वे ग्राहकों को अच्छा रिस्पॉन्स देते हैं और व्यापार में वृद्धि भी होती है। ये स्पा सेंटर पेशेवर तरीके से ग्राहकों को आराम और इलाज की सेवाएं प्रदान करते हैं। लेकिन उत्तराखंड में यह आमतौर पर नहीं दिखाई देता।

स्पा सेंटरों में अनियमितताएं और अवैध गतिविधियां

कुछ स्पा सेंटरों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, जो उन्हें बदनाम कर रहे हैं। विशेष रूप से देहरादून और अन्य बड़े शहरों में कुछ स्पा सेंटर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगते हैं। इन स्पा सेंटरों में अवैध गतिविधियों के होने की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन पुलिस कभी-कभी ही इन पर कार्रवाई करती है।

हालांकि, कुछ मामलों में पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के अधिकारियों ने सख्ती दिखाई है। हाल ही में, पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की टीम ने रुड़की में आरआर सिनेमा परिसर में तीन स्पा सेंटरों पर छापा मारा। इस दौरान इन स्पा सेंटरों में कई अनियमितताएं पाई गईं, जैसे दस्तावेजों और रिकॉर्ड रजिस्टर में गड़बड़ियां। इन स्पा सेंटरों के संचालकों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

स्पा सेंटरों की बढ़ती संख्या और पुलिस की कार्रवाई

रुड़की में छापेमारी के दौरान पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की टीम ने बारीकी से स्पा सेंटरों की जांच की। इस दौरान, सिनेमा परिसर में स्थित तीन स्पा सेंटरों के संचालन में कई नियमों का उल्लंघन पाया गया। इस कार्रवाई के बाद, पुलिस ने इन सेंटरों पर जुर्माना लगाकर इसे एक कड़ी चेतावनी दी।

कुल मिलाकर

उत्तराखंड में स्पा सेंटरों का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन कुछ सेंटरों में अवैध गतिविधियों की जानकारी सामने आ रही है। यह राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि जब तक इन सेंटरों को पूरी तरह से नियमन और जांच के तहत नहीं लाया जाता, तब तक अवैध कारोबार की संभावना बनी रहेगी। सरकार और पुलिस को इस दिशा में और कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि राज्य में इस तरह के अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

चार धाम यात्रा में रील पर रोक, बैकफुट पर नहीं जाएगी सरकार: धामी का बड़ा बयान

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चार धाम यात्रा में रील पर रोक बैक फुट पर नहीं जाएगी सरकार धामी का बड़ा बयान

चार धाम यात्रा में रील पर रोक, बैकफुट पर नहीं जाएगी सरकार: धामी का बड़ा बयान देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने फैसलों से लगातार चर्चा में बने रहते हैं। राज्य में उनके निर्णय विपक्ष से लेकर अन्य सभी दलों द्वारा सराहे गए हैं, यही कारण है कि वह राज्य में अपनी धमक के साथ फैसले लेते हैं और बैकफुट पर आने का सवाल नहीं उठता। ताजा मामला मुख्यमंत्री धामी का बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा की परंपराओं को मानना होगा और रील पर रोक के मामले पर भी स्पष्ट रुख अपनाया है।

सीएम धामी ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन में अंतर है, और इसलिए चार धाम यात्रा की परंपराओं का पालन करना आवश्यक है। लिव-इन रिलेशनशिप के विषय पर उन्होंने कहा कि इस पर सरकार पीछे नहीं हटेगी, हाला

लिव-इन रिलेशनशिप पर नहीं होगी ढील

राज्य में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के विरोध पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, “हमने 2022 के चुनाव में वादा किया था कि भाजपा सरकार बनने पर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करेंगे, और हम उस वादे को पूरा कर चुके हैं।”

धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह विषय कई बार उच्चतम न्यायालय में भी उठ चुका है। उन्होंने यह कहा कि यदि इस पर कोई सुझाव आता है तो उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।

चारधाम यात्रा में रील कल्चर पर रोक

चारधाम यात्रा के दौरान रील कल्चर पर रोक से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन के बीच अंतर को समझना होगा। उन्होंने कहा, “चारधाम यात्रा को विशुद्ध रूप से यात्रा होना चाहिए, और यह धार्मिक उद्देश्य के लिए है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुराने रील चलाने से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है।

धामी का ‘इकोलॉजी और इकॉनमी’ मॉडल

सीएम धामी ने केदारनाथ में पीएम मोदी के नेतृत्व में हुए पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां इकोलॉजी का पूरा ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का विकास मॉडल ‘इकोलॉजी और इकॉनमी का संतुलन’ है। धामी ने यह भी बताया कि चारधाम यात्रा के आसपास के क्षेत्रों में भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए नए स्थान विकसित किए जा रहे हैं।

आपदाओं का सामना करना सबसे बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में आपदाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बादल फटना, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाएं अक्सर होती हैं, और इनसे निपटना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने सिलक्यारा टनल हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अतिक्रमण और कानून के पालन पर जोर

मुख्यमंत्री ने राज्य में अतिक्रमण को लेकर अपने सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया और कहा कि अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम कानून पर चलने वाले लोग हैं और अतिक्रमण को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।”

वक्फ कानून और देवभूमि की पवित्रता

धामी ने राज्य में वक्फ कानून लागू करने का भी संकेत दिया और कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना और डेमोग्राफी में बदलाव को रोकना उनके प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। इसके लिए उन्होंने सत्यापन अभियान चलाया और अन्य सख्त कानूनों को लागू किया है।

पीएम मोदी के साथ काम करने का अनुभव

अंत में, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को आधुनिक भारत का शिल्पकार बताते हुए कहा कि पीएम हर छोटी बात पर ध्यान देते हैं और सामान्य लोगों की चिंता करते हैं।

सारांश में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में विभिन्न मुद्दों पर अपने स्पष्ट और सख्त रुख को पेश किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर निर्णय में कानून का पालन करती है और जनता के हित में फैसले ले रही है, चाहे वह चारधाम यात्रा की परंपराओं का पालन हो, समान नागरिक संहिता हो या अतिक्रमण हटाने का अभियान।

बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड दो लाख का हत्यारा एक साल बाद गिरफ्तार

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उधम सिंह नगर के नानकमत्ता गुरुद्वारा के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह को पुलिस ने एक साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस अपराधी ने पिछले एक साल में कई ठिकाने बदले और पहचान छिपाने के लिए अपना हुलिया भी बदल दिया था। 28 मार्च 2024 को बाबा तरसेम सिंह की हत्या के बाद सरबजीत सिंह और उसके साथी अमरजीत सिंह बाइक से फरार हो गए थे। जहां अमरजीत को अप्रैल 2024 में हरिद्वार में एनकाउंटर में मार दिया गया था, वहीं सरबजीत भूमिगत हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर पहले 50,00 फिर एक लाख और बाद में दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस ने पंजाब में उसके संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह हर बार चकमा देने में सफल हो गया। पुलिस को दो महीने पहले यह जानकारी मिली कि सरबजीत तरनतारन में किसी घर में छिपा हुआ है। इसके बाद एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने इस टास्क को अपने हाथों में लिया और पूरी जानकारी को गोपनीय रखते हुए एक टीम भेजी। पुलिसकर्मियों ने बदल-बदलकर तरनतारन जाकर जानकारी जुटाई और इस टास्क को इतना गोपनीय रखा कि किसी को इसकी भनक भी नहीं लगी।

सरबजीत का आपराधिक इतिहास
सरबजीत सिंह पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे मामले शामिल हैं। उसने पंजाब में 2006 से लेकर 2024 तक विभिन्न स्थानों पर अपराध किए हैं। बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले में भी उसने 302, 120B और 34 IPC के तहत केस दर्ज कराया गया था।

सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी ली
इस हत्याकांड के बाद सरबजीत सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली थी। पोस्ट में दावा किया गया था कि हत्या के बाद वह अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होगा और लोकेशन बांग्लादेश के ढाका में स्थित गुरुद्वारा नानकशाही की दी गई थी। हालांकि, यह पोस्ट सरबजीत ने खुद की थी या किसी और ने, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका।

वारदात की पूरी कहानी
28 मार्च 2024 को सुबह 6:15 बजे सरबजीत सिंह और अमरजीत सिंह बाइक से डेरा कार सेवा पहुंचे थे। यहां सरबजीत बाइक चला रहा था और बाबा तरसेम सिंह को गोली अमरजीत ने मारी। उस समय बाबा परिसर में कुर्सी पर बैठे हुए थे। अमरजीत को उत्तराखंड एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने 8 अप्रैल 2024 को एनकाउंटर में मार गिराया था, लेकिन सरबजीत सिंह पुलिस के हाथ नहीं आया। अमरजीत की मौत के बाद उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन एसएसपी के नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने सरबजीत को आखिरकार एक साल बाद गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि सरबजीत सिंह पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था। पुलिस अब इस हत्याकांड से जुड़े अन्य षड्यंत्रकारियों तक भी पहुंचने में सक्षम हो सकती है।

धन सिंह रावत करेंगे बड़ा खुलासा सियासत में आने वाला है भूचाल

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सहकारिता के माध्यम से महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर: डॉ. धन सिंह रावत यूपी के मुख्यमंत्री की बहन शशि पयाल को सम्मानित किया गया

देहरादून, धन सिंह रावत करेंगे बड़ा खुलासा सियासत में आने वाला है भूचाल उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए युवा सहकार और जनजातीय सहकारिता सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।

साल 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इसके तहत पूरे साल भर सहकारिता पर गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में “सहकारिता के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण” पर आधारित एक कार्यक्रम बुधवार को देहरादून के सर्वे चौक स्थित आरटीडीए ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित करके की।

कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 35 महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें सहकारिता विभाग से 12, महिला सहकारी बैंक से 11, और सहायता समूहों से जुड़ी 12 महिलाओं को निबंधक सहकारिता और सीजीएम नाबार्ड द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा, “उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने महिलाओं को सहकारिता में 33% आरक्षण दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में महिलाओं की आय को दोगुना नहीं, बल्कि तीन गुना बढ़ाया जाए।”

सहकारिता मंत्री ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत प्रदेशभर में विभिन्न जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सहकारिता विभाग द्वारा एक युवा सहकार कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को सहकारिता से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही जनजातीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद जैसे मिलेट्स के पुनर्जीवित करने पर चर्चा की जाएगी।

इस कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बहन शशि पयाल को भी सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सम्मानित किया। डॉ. रावत ने कहा कि शशि पयाल सादगी की मिसाल हैं। वह आज भी मंदिर में फूल और चाय बेचती हैं। उन्होंने सहकारिता विभाग से ऋण लेकर अपनी आय बढ़ाई है।

लोनी अर्बन क्रेडिट सोसाइटी मामले पर बोलते हुए डॉ. रावत ने कहा कि वह जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा करेंगे और मीडिया के सामने आएंगे। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की देन बताते हुए कहा कि इस मामले में भारत सरकार और राज्य सरकार ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कार्यक्रम में सचिव सहकारिता दिलीप जावलकर ने सहकारिता विभाग द्वारा उत्तराखंड में किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना की और महिला अधिकारियों की मेहनत की भी प्रशंसा की। निबंधक सहकारिता सोनिका ने महिला सशक्तिकरण पर अपने संबोधन में कहा कि यह तभी संभव है जब महिलाओं का शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड के सीजीएम पंकज यादव, पूर्व जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री सुभाष रमोला ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर “अपना घर” संस्था की नन्ही बच्चियों ने अद्भुत योग प्रदर्शन किया, जिससे सभी उपस्थित लोग अचंभित हो गए।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन संयुक्त निबंधक मंगला त्रिपाठी ने किया, और अंत में अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम में अपर निबंधक सहकारिता आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल सहित सहकारिता विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और सहकारिता क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर दीदी की मिसाल हैं सीएम योगी की बड़ी बहन

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आत्मनिर्भर दीदी की मिसाल हैं सीएम योगी की बड़ी बहन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी बहन शशि पयाल ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत कुछ धनराशि लेकर स्वरोजगार की शुरुआत की थी। उनके पति पूरण सिंह पयाल और उन्होंने मिलकर इस योजना के माध्यम से पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के कोठार गांव में चाय की दुकान खोली। आज वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं।

योगी आदित्यनाथ की बड़ी बहन शशि पयाल ने किसी सिफारिश के बजाय अपने प्रयासों से आत्मनिर्भरता हासिल की है। अब उनकी बहू शिवानी पयाल भी उनके मार्ग पर चल रही हैं और पहाड़ों में महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति जागरूक कर रही हैं।

शशि पयाल की बहुउद्देशीय सहकारी समिति किमसार से 400 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सहकारिता विभाग द्वारा देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर शशि पयाल अपनी बहू शिवानी के साथ इस कार्यक्रम में पहुंचीं। शशि पयाल ने बताया कि वर्ष 2003-04 में उन्होंने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना से कुछ रकम प्राप्त कर स्वरोजगार शुरू करने का फैसला लिया था और इस पैसे से अपने पति के साथ मिलकर कोठार गांव में चाय की दुकान खोली थी।