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सैनिक कल्याण मंत्री ने उपनल के स्थापना दिवस पर उपनल कर्मचारी का दुर्घटना बीमा को एक लाख पचास हजार करने की घोषणा

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उपनल के 21वें स्थापना दिवस पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने दी शुभकामनाएं, पूर्व सैनिकों के कल्याण में उपनल की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री राहत कोष में उपनल देगा 01 करोड़ की धनराशि: सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी

मुख्यमंत्री धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से दी बधाई, कहा उपनल के माध्यम से जल्द ही विदेशों में भी मिलेगा रोजगार

उपनल के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर सुबे के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने पूर्व सैनिकों और उपनल कार्मिकों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की, जिनमें प्रमुख रुप से उपनल के वेलफेयर फंड के माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जनपदों के एक-एक गांव में सैनिक कल्याण के क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे। इसी प्रकार, उपनल कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु होने पर दिये जाने वाली तात्कालिक राशि को एक लाख से बढ़ाकर रुपये 1.50 लाख करने तथा मुख्यमंत्री राहत कोष में 01 करोड़ की धनराशि दिये जाने की घोषणा की।

शनिवार को देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र में आयोजित उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के 21वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में जिस उद्देश्य से उपनल की स्थापना की गई थी, वह उद्देश्य आज भी पूरी तरह से सार्थक किया जा रहा है। पूर्व सैनिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए गठित उपनल ने न केवल पूर्व सैनिकों, बल्कि वीर नारियों एवं उनके आश्रितों को भी रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अधिकांश सैनिक 35 से 40 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिस समय उनके ऊपर परिवार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ होती हैं। ऐसे में, उपनल इन पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रितों को रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने घोषणा के बाद अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में मंत्रिमण्डल द्वारा उपनल को देहरादून के गुनियालगांव में निशुल्क भूमि दिये जाने पर सहमति दी है। सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों को सुविधाएं प्रदान होगी और उनके क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उपनल के कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि का चयन हो गया है, और एक वर्ष के भीतर उनपल के कार्यालय का भी निर्माण कर लिया जाऐगा। उन्होंने बताया कि अब तक उपनल के माध्यम से लगभग 24,746 बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। पिछले एक वर्ष में 2,500 पूर्व सैनिकों को विभिन्न राज्यों में नियुक्ति दी गई है, और इतने ही पूर्व सैनिकों को और नियुक्ति देने की प्रक्रिया जारी है।

इस प्रयास से उपनल को वार्षिक लगभग 40 करोड़ रुपये का सर्विस चार्ज मिलने की संभावना है। सैनिक कल्याण मंत्री ने उपनल की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन प्रदेश में पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है और सरकार की ओर से इसे हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
स्थापना दिवस समारोह को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्बोधित किया। उन्होंने उपनल के कार्मिकों तथा उपनल के माध्यम से प्रायोजित कार्मिकों को स्थापना दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जल्द ही उपनल के माध्यम से विदेशों में भी नौकरी मिलेगी। उन्होंने राज्य के सभी पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारजनों को भी बधाई दी।

21वें स्थापना दिवस पर इन उपनल कार्मिकों को किया गया सम्मानित – स्थापना दिवस इस अवसर पर उपनल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। डीजीएम मेजर (सेनि) हिमांशु रौतेला, सूबेदार मेजर राजेंद्र प्रसाद, हवलदार सुभाष चंद्र ज़ख्मोला, हवलदार बाबूराम क्षेत्री, नायक सतेश्वर प्रसाद सती, संजय रावत, प्रियंका नेगी, नायक जीत पाल सिंह, सूबेदार दीपक सिंह नेगी।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, उपनल चेयरमैन मेजर जनरल (सेनि) सम्मी सभरवाल, उपनल के प्रबंध निदेशक बिग्रेडियर जेएनएस बिष्ट, निदेशक सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर अमृत लाल, ले0 जनरल टीपीएस रावत, ले0 जनरल जयवीर सिंह नेगी, ले0 जनरल गंभीर सिंह नेगी, मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, ब्रिगेडियर रमेश भाटिया, मेजर जनरल एमएस असवाल, मेजर जनरल आनंद सिंह रावत, कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी, पीटीआर शमशेर सिंह बिष्ट, कैप्टन धनराम नैनवाल, कर्नल सतीश शर्मा, ले0 कर्नल रौतेला सहित कई उपनल के कार्मिक और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

सृजनात्मकता और प्रेरणा से भरपूर साईं सृजन पटल पत्रिका का सातवां संस्करण प्रकाशित

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डोईवाला: अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध पर्वतारोही एवं पर्यावरणविद् डॉ. हर्षवर्ती बिष्ट ने साहित्यिक पत्रिका साईं सृजन पटल के सातवें अंक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पत्रिका के निरंतर प्रकाशन के लिए संपादक मंडल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पत्रिका उत्तराखंड की संस्कृति और समृद्ध विरासत को पाठकों तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य कर रही है।

डॉ. बिष्ट ने पत्रिका की सामग्री को सृजनात्मक और रोचक बताते हुए कहा कि इसमें संघर्ष से आगे बढ़ने वाली प्रतिभाओं को उचित स्थान दिया गया है। साथ ही, उत्तराखंड के धार्मिक एवं साहसिक पर्यटन पर आधारित लेख पाठकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहे हैं।

पत्रिका के संपादक डॉ. के.एल. तलवाड़ ने बताया कि साईं सृजन पटल में नवोदित लेखकों को विशेष स्थान दिया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिभा को एक मंच मिल सके। उन्होंने कहा कि पत्रिका में समसामयिक विषयों के साथ ऋतुओं से जुड़ी सामग्री को भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

उप संपादक अंकित तिवारी ने कहा कि पत्रिका उत्तराखंड के उन लोगों की सफलता की कहानियों को सामने ला रही है, जिन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत से पहचान बनाई है। इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने बताया कि मात्र सात माह के प्रकाशन में ही पत्रिका पाठकों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है, और इसके नवीनतम अंक का पाठकों को बेसब्री से इंतजार रहता है।

‘साईं सृजन पटल’ पत्रिका न केवल साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा दे रही है, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता को भी सहेजने का कार्य कर रही है।

माणा क्षेत्र में कल से किए जा रहे रेस्क्यू अभियान में 49 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू, शेष 5 के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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शुक्रवार को भारत-चीन सीमा पर स्थित चमोली जिले के माणा क्षेत्र में हुए भारी हिमस्खलन में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए बचाव अभियान सुबह से जारी है। आज प्रदेश के कई जिलों में बारिश के आसार हैं, और चमोली में हिमस्खलन का खतरा भी बरकरार है। बचाव कार्य अब भी जारी है। सड़कें अवरुद्ध होने के कारण कुल छह हेलिकॉप्टरों को लोगों को निकालने के लिए तैनात किया गया है।

लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव, पीआरओ डिफेंस देहरादून के अनुसार, अब तक 47 में से 23 मजदूरों को जोशीमठ पहुंचाया जा चुका है। दुर्भाग्यवश, एक घायल व्यक्ति की मौत हो गई है और एक अन्य की स्थिति गंभीर है। घायलों को प्राथमिकता के आधार पर निकाला जा रहा है।

बीआरओ के कर्मियों को माणा में हिमस्खलन से बचाकर हवाई मार्ग से जोशीमठ लाया जा रहा है। अब तक 55 फंसे कर्मियों में से 47 को बचा लिया गया है।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चमोली में हुए हिमस्खलन पर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वहां के श्रमिकों को बचाने के लिए उत्तराखंड सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। हम ईश्वर से उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना करते हैं और श्रमिकों के परिजनों से भी संपर्क बनाए रखे हैं।

भा.ज.पा. के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड पार्टी प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि बचाव अभियान निरंतर चल रहा है। लोगों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है और सीएम धामी के नेतृत्व में बचाव दल और राज्य सरकार पूरी तरह से सक्रिय हैं।

आइटीबीपी के जवान माणा में रेस्क्यू कार्य में लगे हैं। चार घायलों को एम्स में लाए जाने की संभावना है, जिसके लिए एम्स को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चार घंटे के भीतर दूसरी बार आपदा परिचालन केंद्र का दौरा किया। चमोली में हिमस्खलन और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। मुख्यमंत्री लगातार अपडेट ले रहे हैं और कहा कि हम प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं।

मुख्यमंत्री जोशीमठ आर्मी हेलीपेड पहुंचे, जहां उन्होंने घायलों का हाल जाना। माना में हुए हिमस्खलन के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जीओसी इन सी सेंट्रल कमांड, ले. जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और अन्य अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचने वाले हैं।

एक और घायल मजदूर को ज्योर्तिमठ लाया गया है। अब आठ मजदूरों की तलाश जारी है, और सुबह से 10 मजदूरों को जवानों ने रेस्क्यू कर लिया है। अब तक कुल 47 मजदूरों को बचा लिया गया है।

चमोली के माणा में हिमस्खलन के बाद एसडीआरएफ मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया और तीन हाई एल्टीट्यूट रेस्क्यू टीमों को जौलीग्रांट, सहस्रधारा और गोचर में तैनात किया। मौसम साफ होते ही, टीमों ने रेस्क्यू उपकरणों के साथ हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी। इन टीमों में बर्फ में रेस्क्यू के लिए जरूरी उपकरण भी शामिल किए गए हैं।

पुलिस महानिदेशक रिधिम अग्रवाल ने कहा कि हाई एल्टीट्यूट रेस्क्यू के लिए तीन टीमों को तैनात किया गया है और वे घटनास्थल पर रवाना हो चुकी हैं।

माणा में फंसे मजदूरों को बचाने का अभियान जारी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि बाकी मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, फंसे मजदूर एक कंटेनर में हैं, जो पूरी तरह से बर्फ से ढक चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली के माणा क्षेत्र के लिए देहरादून से प्रस्थान किया। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे भी उनके साथ थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम धामी से फोन पर बात की और माणा में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने प्रदेश में हो रही बारिश और हिमपात की स्थिति पर भी जानकारी ली और केंद्र सरकार से हर प्रकार की सहायता का आश्वासन दिया।

यदि मौसम अनुकूल रहता है, तो मुख्यमंत्री धामी शनिवार को घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा ले सकते हैं। उन्होंने रेस्क्यू के लिए वायुसेना और यूकाडा के हेलिकॉप्टरों को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुक्रवार को भारी हिमस्खलन हुआ, जिसमें 55 मजदूर बर्फ में दब गए। शुक्रवार शाम तक 33 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन 22 मजदूरों का कुछ पता नहीं चल पाया था। मौसम खराब होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा था, लेकिन शनिवार को फिर से अभियान शुरू किया गया है।



मुख्यमंत्री धामी ने माणा के पास हुए हिमस्खलन में अधिकारियों को दिए रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माणा के पास हुए हिमस्खलन की ली जानकारी

राज्य आपात परिचालन केंद्र से व्यवस्थाओं का लिया जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, आई.टी पार्क देहरादून पहुंचकर जनपद चमोली के माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक कर हिमस्खलन के बाद रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हिमस्खलन की स्थिति के बारे में भी पूरी जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अति शीघ्र घटनास्थल में पहुंचने के निर्देश देते हुए कहा कि घटनास्थल के सबसे समीप स्थित हेलीपैड को अति शीघ्र खोल जाए। जिससे रेस्क्यू अभियान में तेजी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर ड्रोन के माध्यम से नजर रखे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा रेस्क्यू अभियान में हेलीकॉप्टर की भी मदद लेकर रेस्क्यू में तेजी लाई जाए। उन्होंने सभी घायलों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से जरूरत पड़ने पर एम्स ऋषिकेश लाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से निरंतर समन्वय संपर्क कर उन्हें हर संभव मदद करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जनपद चमोली में हिमस्खलन के बाद लगातार राहत बचाव का कार्य जारी है। आईटीबीपी, सेना, जिला प्रशासन, वायु सेना, सभी लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं। सभी से निरंतर वार्ता जारी है। विजिबिलिटी ना होने के कारण वर्तमान में हेलीकॉप्टर का जाना संभव नहीं है। इस संबंध में स्नो एक्सपर्ट की सेवाएं ली जा रही हैं। आईटीबीपी के लोग घटना स्थल में विशेष रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी पहली प्राथमिकता श्रमिकों को सुरक्षित निकलना है। सभी लोग अलग अलग स्थानों से हैं, जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, केंद्र सरकार से निरंतर संपर्क में है। प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा रेस्क्यू अभियान में किसी भी एजेंसी की आवश्कता होने पर उनकी मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 लोगों को आईटीबीपी अस्पताल पहुंचाया गया है। बर्फबारी जारी है, कई जगहों पर मार्ग अवरुद्ध हो रहा है। कल मौसम खुलने की संभावना है, जिससे रेस्क्यू अभियान में भी तेजी आएगी। सभी रेस्क्यू दल आपस में समन्वय के साथ कार्य कर रहें हैं। उन्होंने कहा माणा हेलीपैड को भी एक्टिव किया जा रहा है। इसके साथ ही एम्स ऋषिकेश, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल गोपेश्वर में भी सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं।

मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से जुड़े जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी से घटना की पूरी जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि माणा गांव और माणा पास के मध्य सीमा सड़क संगठन के समीप हिमस्खलन की सूचना मिली थी। यहां सेना की आवाजाही के लिए सड़क मार्ग से बर्फ हटाने वाले मजदूरों के घटना स्थल के समीप होने की जानकारी मिली थी। जिसके बाद सेना के साथ ही आईटीबीपी, एनडीआरफ, एसडीआरफ की रेस्क्यू टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, विनोद कुमार सुमन, विनय शंकर पांडे, एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

भू कानून राजनैतिक मुद्दा नही, बल्कि राज्य की जमीनों को बचाने मे निर्णायक कदम: बहुगुणा

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भू कानून के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले जमीन बचाने की मुहिम को कर रहे कमजोर

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भू कानून को राजनैतिक मुद्दा नही, बल्कि देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखने में निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून का जो लोग राजनैतिक कारणों से विरोध कर रहे हैं वे किसी न किसी रूप मे पहाड़ की जमीनों को माफियाओं के हाथों सौंपने के दोषी रहे हैं।

बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य वासियों की भावना के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक सरंक्षण के लिए सशक्त भू कानून लायी है और यह मुद्दा राजनैतिक विषय नहीं है। राज्य का विकास, समृद्धि और संबर्द्धन भाजपा के एजेंडे का हिस्सा रहा है। प्रदेश के सीमित प्राकृतिक संसाधनों और भूमि को सुरक्षित करने के हमारी सरकारों ने जनभावना के अनुसार निरंतर निर्णय लिए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों ने अपने वोट बैंक को शह और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए भू माफियाओं को बढ़ावा दिया। जिसके चलते लंबे समय से एक सशक्त, व्यापक और प्रभावी भू कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी। आज विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि जनसरोकारों की पूर्ति करने वाला भू कानून हम लेकर आए हैं।

उन्होंने कहा कि सभी पक्षों से उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा विस्तृत चर्चा के बाद लाया गया यह कानून जनता की अपेक्षाओं को पूरा करता है। सरकार, सदन और कोर्ट सभी जगह स्पष्ट कर चुकी है कि यह कानून राज्य के भू संसाधनों को बचाने की सिर्फ प्रभावी शुरुआत है और इसमें आगे जो भी बेहतर सुझाव सामने आएंगे उस पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जायेगा। हमारी नीति और नीयत शीशे की तरह साफ है। उत्तराखंड का मूल स्वरूप बचाया जाए और माफियाओं द्वारा डेमोग्राफी बदलने की साजिशों पूरी तरह नकेल कसी जाए इसके सभी प्रावधान भू कानून मे किये गए हैं। जहाँ तक कांग्रेस का सवाल है तो वह युवाओं के भविष्य को सरंक्षित करने वाले नकल विरोधी कानून, लैंड जिहाद, लव जिहाद और महिलाओं को अधिकार देने वाले कानून का भी विरोध करते रहे है। कांग्रेस के तुष्टिकरण के राग को जनता को जानती है।

उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये लोग कभी पहाड़ की जमीनों को बचाने के पक्ष में नहीं रहे। उन्होंने हमेशा राज्य में भू माफियाओं को पनपाने का पाप किया। सिर्फ राजनीतिक मकसद से कांग्रेस इस पूरे मुद्दे पर लगातार राजनीति कर रही है। ऐसे में जब सरकार ने इस कानून को बनाकर, सदन से पास कराया तो इनको अपने हाथ से यह मुद्दा निकलते दिख रहा है और वह सरकार के हर फैसले का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस सहित विपक्षी इस मुद्दे पर भ्रम और झूठ फैला रहे हैं ताकि पहाड़ की जमीनों को बचाने की मुहिम को कमजोर किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग उत्तराखंडियत की बात कर इस पर उंगली उठा रहे हैं, उनका राज्य निर्माण के विरोध में हाथ उठाने का इतिहास रहा है।

उन्होंने इस पूरे मुद्दे पर सुझाव दिया कि राजनीतिक कारणों से कमी निकालने के बजाय, इसको अधिक सशक्त करने के लिए सकारात्मक सुझाव सामने लाने की जरूरत है।

राजनीतिक दलों में पीएम मोदी और भाजपा ही सनातन संस्कृति की प्रचारक

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भाजपा ने राहुल के डर से उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं द्वारा महाकुंभ से बनाई दूरी को उनका असल सनातन विरोधी चेहरा बताया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, राजनीतिक दलों में पीएम मोदी और भाजपा ही सनातन संस्कृति की प्रचारक है, बाकी सभी पार्टियां चुनावों में ही मंदिरों का चक्कर लगाते हैं। सिर्फ सोशल मीडिया पर सनातन का ज्ञान बांटने वाले एक कांग्रेस दिग्गज और पूर्व सीएम अब महाकुंभ पूर्णता के बाद वहां जाने की नई नई तारीख बता रहे हैं।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका, खड़गे समेत कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ नहीं जाने की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि नेहरू-गांधी परिवार केवल चुनाव के समय मंदिरों का दौरा करता है। राज्य के कांग्रेसी नेता, पवित्र धामों को लेकर अफवाह फैलाकर, देश दुनिया के बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ही वास्तव में सनातन धर्म का समर्थन और प्रचार करते हैं। हमारे लगभग सभी नेताओं ने इस समागम में पहुंचकर 66 करोड़ सनातनियों के साथ त्रिवेणी पर स्नान ध्यान और ईश्वर से देश प्रदेश के कल्याण के लिए कामना की है।

उन्होंने तंज किया कि 45 दिन तक चले इस धार्मिक महोत्सव में न कांग्रेस नेतृत्व ने शिरकत की और न ही उनके डर से देवभूमि के उनके नेता हिम्मत कर पाए। ये सोशल मीडिया कर सनातन का ज्ञान बांटते हैं और आलोचना होने पर अब उनके एक बड़े नेता और पूर्व सीएम कुंभ समाप्ति के बाद वहां जाने को लेकर नई नई तारीखों की घोषणा कर रह हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सनातन धर्म और दुनिया के इस सबसे बड़े आयोजन में जाना गांधी परिवार ने जरूरी नहीं समझा। लेकिन उससे भी दुखद है कि देवभूमि में उनकी पार्टी प्रतिनिधियों का आलाकमान के खौफ से महाकुंभ नहीं जाना। इतना ही नहीं ये सभी अब तक अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाने का साहस भी नहीं जुटा पाए हैं।

उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा, सम्भवतः अपनी परिवार की धार्मिक पृष्ठभूमि अस्पष्ट होने के कारण गांधी परिवार महाकुंभ से दूर रहा हो। लेकिन सनातन धर्म के ध्वजवाहक उत्तराखंड का निवासी होने के बावजूद स्थानीय कांग्रेस नेताओं का वहां नहीं जाना बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने कहा, कांग्रेस केवल राजनीतिक फायदे के लिए हिंदू धर्म का इस्तेमाल करती है और इसे लोग अब बखूबी समझ चुके हैं।

ट्रांसजेंडर अदिति शर्मा की मेहनत को सभी ने सराहा, डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से दिखाई गई अदिति शर्मा की स्ट्रगल

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रंगारंग कार्यक्रम के बीच मनी “निवाला प्यार का” की वर्षगांठ

निवाला प्यार की वर्षगांठ आज बहुत ही धूमधाम से रंगारंग कार्यक्रमों के बीच रिस्पना पुल स्थित संस्कृति विभाग के सभागार में मनाई गई। इस मौके पर अदिति शर्मा जो की एक ट्रांसजेंडर है और निवाला प्यार का फूड ट्रक चलाती हैं के जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री भी रिलीज की गई । इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मेयर सौरभ थपलियाल मौजूद रहे।

मेयर सौरभ थपलियाल ने अदिति शर्मा के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि निगम की ओर से अदिति और अदिति जैसे उनके अन्य भाई बहनों को भी पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। यदि वे स्वावलंबी बनने के लिए निगम की ओर से किसी भी प्रकार की सहायता चाहते हैं तो उनको हर प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। इस मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि भारतीय जनता युवा मोर्चा की नेशनल वाइस प्रेसिडेंट नेहा जोशी राज्य मंत्री संस्कृति विभाग मधु भट्ट राज्य मंत्री विनोद उनियाल पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने भी अपने विचार व्यक्त कर कार्यक्रम की सराहना की एवं अदिति शर्मा के उज्जवल भविष्य की कामना की।

मौके पर कार्यक्रम की शुरुआत हिंदू रक्षा दल के संस्थापक महंत स्वामी अनुपम नंद गिरि एवं हिंदू रक्षा दल के धर्म प्रचारक स्वामी शिव ओम बाबा ने मंत्र उच्चारण कर दीप प्रज्वलित करवा कराई। सभी सम्मानित अतिथियों ने दीप प्रज्वल कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस मौके पर ज्योति ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसके पश्चात् एक डॉक्यूमेंट्री का भी विमोचन किया गया। डॉक्यूमेंट्री बनाने में फिल्म डायरेक्टर अनिल वोहरा क्रिएटिव डायरेक्टर धीरज दुआ एक्ट्रेस जुनकी बेगम प्रोडक्शन कंट्रोलर डॉक्टर जितेंद्र सिंह अमित कपूर आदि का बहुत सहयोग रहा।

उन्होंने डॉक्यूमेंट्री बनाने के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया। इस मौके पर डीन एवं प्रोवाइस चांसलर उत्तरांचल यूनिवर्सिटी डॉक्टर राजेश बहुगुणा, सोशल जस्टिस फाऊंडेशन की फाउंडर डॉ आशा लाल, मधु मरवा पार्षद केदारपुर दर्शन लाल बिंजुला, जगदंबा नौटियाल, विजय भट्ट , पूर्व मंडल अध्यक्ष, पार्षद बंजारावाला रुचि रावत, जयवीर रावत, एडवोकेट आकाश वर्मा, डॉ जितेंद्र सिंह कुलदीप राणा दीपा जोशी सरिता लिंगवाल लता सेनीवाल आकाशवाणी से भारतीय आनंद एवं मधु दानू सहित अजय पानीवाली बहन बिष्ट डिंपल चौधरी देवयानी सुमन लता विजयवाणी की फाउंडर प्राची चंद्र आचार्य वर्षा माटा ललिता कोटिया आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में पारस कुमार का विशेष सहयोग रहा वन संचालन में तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक प्रिया गुलाटी का सहयोग रहा इस मौके पर अदिति शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

पदक विजेताओं को नौकरी देने की कवायद शुरू, खेल मंत्री ने अधिकारियों को दिए आदेश

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प्रदेश की खेल अवस्थापनाओं के लिए लेगेसी प्लान तैयार करने के भी निर्देश

प्रदेश सरकार ने 38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की कवायद शुरू कर दी है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने शुक्रवार को अधिकारियों की बैठक बुलाकर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए।

खेल मंत्री के कैंप कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि पदक विजेताओं के जॉब ऑफर का प्रस्ताव तैयार जल्द कैबिनेट में लाने के लिए कहा गया है। खेल मंत्री ने बताया कि इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सरकार ने पदक विजेताओं के लिए जो नगद इनाम राशि की घोषणा की थी, उस पर अमल की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को खिलाड़ियों की नगद इनाम राशि उन्हें जल्द से जल्द दिलवाने के लिए कहा है। बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में अब जितनी खेल अवस्थापनाएं, स्टेडियम, ऑडिटोरियम, मल्टीपरपज हॉल, साइकलिंग वैलोड्रोम, शूटिंग रेंज आदि तैयार हो गई हैं, उनकी देखरेख व संचालन आदि के लिए भी नीति बनाने की जरूरत है। खेल मंत्री ने अधिकारी से कहा कि इसका लेगेसी प्लान तैयार करके इस दिशा में तेजी से कदम उठाएं। बैठक में विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक प्रशांत आर्य समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

टीम इवेंट के हर खिलाड़ी को मिलेगी नौकरी

*राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कुल 103 मेडल जीते हैं। इनमें से जो मेडल टीम इवेंट में आए हैं, उन टीमों के हर खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस कोटे में सरकारी नौकरी के लिए खिलाड़ी के पास उत्तराखंड का मूल निवास या स्थाई निवास सर्टिफिकेट होना आवश्यक है। खास बात यह है कि गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को 4200 ग्रेड पे वाली नौकरी दी जाएगी जबकि सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ₹2800 या ₹2000 ग्रेड पे वाली नौकरी ऑफर की जाएगी। खिलाड़ियों को यह नौकरियां ज्यादातर खेल और युवा कल्याण विभाग व पुलिस विभाग में दी जाएंगी।

ट्रायल की तारीखें जल्द घोषित करें

बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री खिलाड़ी उदीयमान उन्नयन योजना और मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के लिए नए खिलाड़ियों का चयन करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। खेल मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा विभाग के कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए हर जिलों के अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ट्रायल की तारीखें घोषित करें। खेल मंत्री ने कहा कि इसके लिए अगले सत्र में स्कूल कॉलेज खुलने का इंतजार ना किया जाए, बल्कि अभी से इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में किया जा रहा तेजी से कार्य

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सनातन संस्कृति में यज्ञों का रहा है विशिष्ट स्थान – मुख्यमंत्री

सनातन संस्कृति में यज्ञों का हमेशा से ही एक विशिष्ट स्थान रहा है, हमारे वेदों में यज्ञ को धर्म का मेरुदंड कहा गया है। ये देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु का कार्य करते हैैं। ये न केवल हमारी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि समाज को धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक रूप से भी समृद्ध बनाते हैं। यह बात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शिव मन्दिर शंकरपुर सहसपुर में आयोजित 63वें भव्य कोटि लिंग रुद्र महायज्ञ में शामिल होकर कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन परंपराओं की दिव्यता और भव्यता का जीवंत प्रमाण है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस महायज्ञ में 151 विद्वान् वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक ऋचाओं के सामूहिक उच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा, जिससे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि संपूर्ण देश और प्रदेश में आध्यात्मिक ऊर्जा की वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में लहरा रही है और दुनिया भर के देश हमारी प्राचीन संस्कृति और दर्शन से परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में, हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण यमुना तीर्थ सर्किट का भी भव्य निर्माण किया जाएगा, जिसके अंतर्गत यमुना जी पर विभिन्न घाटों का निर्माण होगा। इन घाटों के निर्माण के पश्चात हरिद्वार, ऋषिकेश और देवप्रयाग की भांति भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा, जिससे ये पवित्र स्थान एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने इस भव्य कोटि रुद्र महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दी और भगवान शिव से प्रार्थना कि वे राज्य के सभी निवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें।

इस अवसर पर विधायक सहसपुर सहदेव सिंह पुंडीर, धर्मार्थ सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य नित्यानंद सेमवाल, जिलाध्यक्ष मीता सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष हरबर्टपुर नीरू देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

भारतीय सनातन संस्कृति है ज्ञान विज्ञान एवं आध्यात्म का अद्वितीय संगम- मुख्यमंत्री

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भारतीय सनातन संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व जिन सिद्धांतों की खोज की थी, वे आज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो रहे हैं। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान धाम झाझरा में आयोजित कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता, भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. सी.वी. रमन को भावांजलि अर्पित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून देश की पांचवी साइंस सिटी बन रही है, जो उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि साइंस सिटी हमारे राज्य को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में भी एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार द्वारा तकनीक और नवाचार के उपयोग से सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जहां हम आज प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक ओर साइंस और इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीएसआई डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर और स्टेम लैब्स के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, वहीं, रोबोटिक, ड्रोन, सेमी कंडक्टर और प्री-इनक्यूबेशन लैब की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण नवाचारों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नित-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, जिनके सिद्धांतों ने खगोल शास्त्र और गणित को सरल बनाया, आचार्य कणाद जिन्होंने हजारों साल पहले परमाणु की व्याख्या की, आचार्य नागार्जुन जिन्होंने सदियों पहले सोना, चांदी, तांबे, लौह, पारा व अभ्रक आदि का इस्तेमाल कर औषधीय भस्म बनाने की विधि तैयार की। महर्षि सुश्रुत जिन्होंने जटिल से जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए। ये सभी भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक विज्ञान स्थापित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, आज देश में डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा सके। ये सभी उपलब्धियां भारत को आत्मनिर्भर और विज्ञान-प्रधान राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं विकास, नई प्रौद्योगिकी तथा स्टार्टअप के अनुरूप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, हम प्रदेश में साइंटफिक रिसर्च और लर्निंग को बढ़ावा देते हुए साइंस बेस्ड नॉलेज इकॉनमी को भी मजबूत किया जा रहा है।

विज्ञान में आगे बढ रहा देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज कोरोना वैक्सीन के विकास से लेकर ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों की खोज तक के कार्य आत्मनिर्भरता के मंत्र को अपनाकर कर रहा है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर उतरने वाला पहला देश बना दिया। जहां आदित्य स्1 मिशन के माध्यम से हमने सूर्य के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया। वहीं अब गगनयान मिशन के तहत भारत जल्द ही अंतरिक्ष में मानव भेजने की तैयारी कर रहा है, जो हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियों का एक और स्वर्णिम अध्याय होगा।

ई गवर्नेंस को बढावा दे रही है राज्य सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी सेवाओं को ई-गवर्नेंस के अंतर्गत ऑनलाइन पोर्टल द्वारा सरल और सुलभ बनाने का कार्य किया जा रहा है। नागरिकों को ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन प्रमाणपत्र समेत कई सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध की जा रही है। यही नहीं, कृषि के क्षेत्र में भी किसानों को तकनीक से जोड़ने हेतु राज्य में स्मार्ट एग्रीकल्चर तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में ड्रोन तकनीक और सेंसर आधारित खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलगी। ई-टूरिज्म पोर्टल के माध्यम से पर्यटकों को ऑनलाइन बुकिंग और पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध किए जाने के भी प्रयास गतिमान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऐसे डैशबोर्ड की शुरुआत की गई है जो चारधाम यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को पहले ही मौसम पूर्वानुमान से लेकर अपनी यात्रा प्लान करने में मदद करेगा। यही नहीं, हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए डेटा एनालिटिक्स और सैटेलाइट इमेजरी का भी उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रयास उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यूकॉस्ट में राज्य का पहला कम्यूनिटी साइंस रेडियो भी प्रारम्भ होने रहा है जो विज्ञान की महत्वपूर्ण जानकारियां हर घर तक पहुंचाने में सहायक होगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट या अन्य संसाधन सीमित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ही वो माध्यम हैं, जिससे हम आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाकर उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को साकार कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले निर्माणाधीन साइंस सिटी परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और साइंस म्यूजियम का अवलोकन भी किया।

इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव नीतेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, सलाहकार साइंस सिटी देहरादून जी. एस. रौतेला उपस्थित थे।