उत्तराखंड में हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नई सियासी ऊर्जा दी है। इस आयोजन के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि इसे खेलभूमि भी बनाया जा सकता है। खास बात यह है कि इस आयोजन के दौरान उत्तराखंड ने पदक तालिका में 25वें स्थान से छलांग लगाकर सातवें स्थान पर पहुंचने में सफलता पाई, जिससे राज्य की उपलब्धियों को पूरे देश ने सराहा।
राष्ट्रीय खेलों के समापन पर गृहमंत्री अमित शाह ने गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मुख्यमंत्री धामी की जमकर तारीफ की। शाह ने कहा कि 16,000 खिलाड़ियों को एकत्र करना और छोटे राज्य में इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराना आसान काम नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने सीएम धामी की इको-फ्रेंडली प्रैक्टिसेज और खेलों के इस दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए भी सराहना की।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री धामी ने पीएम और गृहमंत्री जैसे बड़े नेताओं को इस आयोजन में बुलाकर अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दिया और साथ ही देशभर में उत्तराखंड का डंका भी बजाया। इस सफलता ने उनके नेतृत्व को और मजबूत किया है और यह आगामी चुनावों में उनके लिए एक बड़ा सियासी हथियार साबित हो सकता है।
देहरादून उत्तराखंड प्रदेश में 16 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की कवायद में जुटा यूपीसीएल नया बिजली कनेक्शन लेने वालों को फिलहाल पुराना ही मीटर दे रहा है। उपभोक्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि लौटानी है लेकिन यूपीसीएल अभी भी बिलों में अतिरिक्त सिक्योरिटी राशि वसूल कर रहा है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर का विरोध करते किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने बीते दिनों सड़को पर मीटर तोड़ते हुए अपना विरोध किया था सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ किच्छा विधायक ने कहा था वो मीटर नहीं लगने देंगे इस मामले पर राजनीती शुरू हो गयी है बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने सबसे पहले अपने घर पर मीटर लगाए जाने की बात कही है विरोध करते बेहड़ को शिव अरोरा ने राजनैतिक रूप से मीटर लगाए जाने की बात कहने के बाद मामले पर बैक फुट में नज़र आती सियासत देखने को मिल रही है
उधम सिंह नगर हमेशा से विवादों में रहा है राजनीती की बात हो या अपने नेताओं का विरोध बीजेपी कांग्रेस दोनों दलों में आपसी गुटबाजी ऐसी है जिसका राजनैतिक पार्टी के बड़े नेता भी आज तक कोई हल नहीं कर सके है मीटर विवाद से शुरू हुई राजनीती अब निकाय चुनावो में मिली हार के बाद एक बार फिर गर्म होती देखि जा रही है बेहड़ का विरोध पार्टी में जमकर हो रहा है
किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ की ओर से निकाय चुनाव को लेकर की गई आरोपों की बौछार पर अब जिलाध्यक्ष ने तीखा पलटवार किया है। जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि बेहड़ खुद को संगठन से ऊपर न समझें। मेयर प्रत्याशी के फार्म हाउस पर समीक्षा बैठक के नाम पर बेहड़ ने संगठन को धीमा जहर देने का काम किया है। बेहड़ को महानगर से लेकर जिलाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्षों से लंबे समय से परेशानी ही रही है। जिले में पांच विधायकों में से सिर्फ बेहड़ को उनसे परेशानी है। अगर इतनी ही दिक्कत है तो सारे पद बेहड़ संभाल लें और संगठन के लोग घर बैठ जाते हैं।
उत्तराखंड में इस शनिवार Uttarakhand Weather मौसम का मिजाज काफी बदल चुका है, खासकर पहाड़ी इलाकों में जहां बारिश और ठंडी हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। देर रात कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हुई थी, और इसके कारण ठंडक महसूस हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने पहले ही अनुमान जताया था कि शनिवार को ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश हो सकती है।
आज सुबह से ही ठंड का अहसास हो रहा है, खासकर देहरादून के ऊंचाई वाले इलाकों में और उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं। हालांकि कुछ जिलों में मौसम साफ भी है। इस बदलाव से उत्तराखंड में ठंड बढ़ गई है, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए महसूस किया जा रहा है।
हमारे खिलाड़ियों ने देवभूमि को खेल भूमि बना दिया : रेखा आर्या
खेल मंत्री बोली उत्तराखंड का 103 पदक जीतना ऐतिहासिक
अपने पिछले बेस्ट से चार गुना से भी ज्यादा पदक जीते
हल्द्वानी के गौलापार स्टेडियम में शुक्रवार को 38 वे राष्ट्रीय खेलों का शानदार समापन हुआ। मेघालय को अगले राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए ध्वज सोपा गया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की सरकार ने हर जनपद में खेल सुविधाएं जुटा कर देवभूमि को खेल भूमि बनाने का काम किया है। उन्होंने सफल और भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और खेल मंत्री रेखा आर्या को विशेष रूप से शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इतने भव्य आयोजन में सबसे बड़ा योगदान उन एथलीट्स का रहा है जिन्होंने प्रदेश के लिए अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खिलाड़ियों ने हमें पिछले राष्ट्रीय खेलों में मिले 25वें स्थान से सीधे सातवें स्थान तक पहुंचा दिया है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हमने उत्तराखंड को खेल भूमि बनाने का सपना देखा था लेकिन इस सपने को साकार करने का बीड़ा हमारे खिलाड़ी ने उठाया और सफल कर दिखाया।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों में हमने ग्रीन गेम्स जैसी नई अवधारणाओं पर काम किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के स्तर को बहुत ऊंचा कर दिया है। खेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के दौरान हमारे प्रदेश में खेलने आए सभी खिलाड़ियों ने यहां की खेल सुविधाओं की जिस तरह से प्रशंसा की वह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। खेल मंत्री ने कहा कि हमारे एथलीट्स ने राष्ट्रीय खेलों के स्तर पर तो शानदार प्रदर्शन किया ही है अब प्रदेश सरकार इन्हीं खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाब होने के लिए तैयार करेगी। इसके पहले खेल मंत्री रेखा आर्य ने पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचकर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडवीया और मेघालय के मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
इस अवसर पर मेघालय के मुख्यमंत्री को अगले राष्ट्रीय खेलों के लिए ध्वज सोपा गया। आयोजन में बॉलीवुड गायक सुखविंदर, श्वेता माहरा और दिगारी ग्रुप की प्रस्तुतियों ने चार चांद लगा दिए।
इस अवसर पर केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडवीया, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा आदि मौजूद रहे।
कॉमन इंट्रो – उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल इस बार व्यवस्थाओं से लेकर आयोजन तक लेकर लंबी लकीर खींचने वाले साबित हुए हैं। इस बार के राष्ट्रीय खेल पर्यावरण हितैषी कदमों से लेकर खिलाड़ियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य की देखभाल को लेकर चर्चाओं मे रहे।
01 – पदक तालिका में प्रदर्शन -38 वें राष्ट्रीय खेलों से पहले इस आयोजन में उत्तराखंड का इतना शानदार प्रदर्शन कभी नहीं रहा। राज्य स्थापना के बाद जब-जब उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया, तब-तब उसे मिलने वाले पदकों की संख्या दस से लेकर 19 तक रही है। इसी तरह, पदक तालिका में वह 13 वें स्थान से लेकर 26 वें स्थान के बीच में कहीं रहा है। यही हाल स्वर्ण पदकों का भी रहा है, जिसकी संख्या एक से लेकर अधिकतम पांच तक रही है। अब 38 वें राष्ट्रीय खेलों की बात कर लें, तो क्या कुल पदक, क्या स्वर्ण और क्या पदक तालिका की स्थिति, सभी में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। पदकों की कुल संख्या 103 पर पहुंची है। पदकों का सैकड़ा जड़ कर उत्तराखंड ने सबको चकित कर दिया है। इसी तरह, स्वर्ण पदकों की संख्या 24 रही है। पदक तालिका में सातवें स्थान पर आना, सचमुच कमाल का अनुभव है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिसा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, आंध्र, जम्मू कश्मीर जैसे बडे़ राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से पीछे हैं।
02 – छोटे राज्य ने दिखाया दम उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्य को राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। सफल आयोजन किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि उत्तराखंड को राज्य बने सिर्फ 25 वर्ष हुए हैं। जिस पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल के मॉडल को अपनाने की अक्सर बातें होती हैं, उसे राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कभी नहीं मिली। मणिपुर और असम के बाद उत्तराखंड राष्ट्रीय खेल कराने वाला तीसरा हिमालयी राज्य बन गया है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड के साथ राज्य का दर्जा हासिल करने वाले झारखंड ने वर्ष 2011 में राष्ट्रीय खेल कराए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ मेजबानी मिलने के बावजूद इसका आयोजन नहीं करा पाया था। उत्तराखंड ने 38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया। अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए। इस वजह से कई रिकार्ड भी टूटे। दस हजार खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।
03 ग्रीन गेम्स राष्ट्रीय खेलों में सबसे अहम हरित पहल रही। ग्रीन गेम्स की थीम को अमल में लाने के लिए कई कदम उठाए गए। रायपुर में 2 .77 हेक्टेयर जमीन पर खेल वन तैयार किया गया, जहां पर पदक विजेताओं के नाम के 1600 पौधे लगाए जा रहे हैं। खेलों में जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पदक हों या मेहमानों के लिए आमंत्रण पत्र, सभी ई-वेस्ट से तैयार कराए गए। शुभंकर राज्य पक्षी मोनाल को बनाया गया। हरित जागरूकता के लिए स्पोर्ट्स वेस्ट मटीरियल के प्रतीक चिन्ह आयोजन स्थल पर प्रदर्शित किए गए। आयोजन स्थल पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही के लिए ई-रिक्शे, साइकिल प्रयोग किए गए। इसके अलावा, सोलर पैनल के प्रयोग से लेकर पानी के लिए रीयूसबल वाटर बॉटल की व्यवस्था की गई। हरित पहल से इतर महिला स्वास्थ्य का संदेश देने के लिए महिला खिलाड़ियों को वैलकम किट में सेनेटरी नैपकीन व अन्य जरूरी सामान दिए गए। तीन बार इस्तेमाल किए जा चुके 250 लीटर तेल को बायो डीजल बनाने के लिए भेजा गया।
38 वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी को हमने पहले ही दिन से अपने लिए बड़ी उपलब्धि माना। इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए पूरे प्रयास किए गए। आधारभूत ढांचा तैयार किया गया और उच्चस्तरीय सुविधाएं जुटाई गईं। निश्चित तौर पर उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बाद खेल के क्षेत्र में मजबूत होकर उभरा है। मै सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देता हूं। पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।
नौ स्थानों पर 18 दिनों तक चले राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के जरिए, उत्तराखंड खेल परिदृष्य में प्रमुख शक्ति बनकर उभरा है। उत्तराखंड ना सिर्फ पदक तालिका में अपनी रैंकिंग सुधारने में कामयाब रहा, बल्कि पूरे आयोजन को अनुशासित तरीके से सम्पन्न कराने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भी अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों को हरी झंडी 9 अक्तूबर को मिल पाई, इस तरह 28 जनवरी से राष्ट्रीय खेल शुरू करने के लिए राज्य सरकार को महज साढ़े तीन महीने का ही समय मिल पाया। कम समय को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तुरंत ग्राउंड जीरो पर उतरे, राज्य के सामने दूसरी चुनौती यह थी कि इस बार खेल प्रतियोगिताएं नौ शहरों में आयोजित की जा रही थी। जिसमें पिथौरागढ़, टिहरी जैसे पहाड़ी जिले भी शामिल थे, जहां सुविधाएं जुटाने से जेकर खेल आयोजन में तक कई तरह की चुनौतियां थी। बावजूद इसके राज्य सरकार ने खेल आयोजनों को कुशलता पूर्वक आयोजित कर, किसी भी खिलाड़ी, कोच, अधिकारी या दर्शक को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी। इस बार सभी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्तराखंड राज्य के भीतर ही किया गया। जबकि पहले एक से अधिक राज्यों में खेल प्रतियोगिताओं को आयोजित किया जाता था।
लगातार जायजा लेते रहे सीएम:
28 जनवरी 2025 से राष्ट्रीय खेलों का आगाज, देहरादून में प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुआ, जबकि समापन 14 फरवरी को हल्द्वानी में गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ। इस तरह 18 दिन तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार राष्ट्रीय खेलों के विभिन्न आयोजन स्थलों पर पहुंचकर स्थितियों का जायजा लेते रहे। जिससे ना सिर्फ खिलाड़ियों को प्रोत्साहन बढा बल्कि आयोजन भी कुशलता पूर्वक सम्पनन हुआ।
साल 1924 की बात है, जब भारत में पहली बार खेलों का एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने देश के खिलाड़ियों के लिए नए रास्ते खोल दिए। दिल्ली में आयोजित इस पहले राष्ट्रीय खेल को तब ‘इंडियन ओलंपिक गेम्स’ कहा जाता था। यह खेल सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं थे, बल्कि एक सपने की शुरुआत थी।
तब भारत में खेलों को लेकर अधिक जागरूकता नहीं थी, लेकिन इन खेलों के माध्यम से देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी चुने जाते थे, जिन्हें आगे चलकर ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भेजा जाता था। धीरे-धीरे यह आयोजन लोकप्रिय होता गया, और साल 1940 में जब ये खेल बॉम्बे (अब मुंबई) में हुए, तो इनका नाम बदलकर ‘नेशनल गेम्स ऑफ इंडिया’ कर दिया गया।
हर दो साल में होने वाले इन खेलों का मुख्य उद्देश्य देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को एक मंच देना था, जहाँ वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। राष्ट्रीय सरकार ने इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठाए। देश के विभिन्न राज्यों से खिलाड़ी इन खेलों में भाग लेने के लिए आते, और उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए चुना जाता।
समय के साथ इन खेलों का महत्व और भी बढ़ता गया। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ, प्रशिक्षण और संसाधन मिलने लगे। सरकार ने सुनिश्चित किया कि यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता बनकर न रह जाए, बल्कि यह खिलाड़ियों के सपनों को उड़ान देने का एक सशक्त मंच बने।
हर बार जब राष्ट्रीय खेल आयोजित होते, तो पूरे देश में खेलों का माहौल बन जाता। विभिन्न राज्यों से युवा एथलीट अपने सपनों को पूरा करने के लिए इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते। उनके भीतर एक जुनून होता, एक लक्ष्य होता कि वे अपने राज्य का, और आगे चलकर अपने देश का नाम रोशन करें।
राष्ट्रीय खेल की इस पहल ने देश को कई महान खिलाड़ी दिए, जिन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का परचम लहराया। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक क्रांति थी, जिसने खेलों को भारत में एक नई पहचान दी।
सरकार का यह कदम आज भी हजारों युवाओं को प्रेरित कर रहा है। हर राज्य अपने बेहतरीन खिलाड़ियों को तैयार करने में जुटा है, ताकि वे इस मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। यह केवल खेलों का आयोजन नहीं, बल्कि देश के युवा एथलीट्स के लिए एक सुनहरा अवसर है, जहाँ वे अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं और दुनिया के सामने अपनी काबिलियत साबित कर सकते हैं।
राष्ट्रीय खेल की यह परंपरा, जो लगभग एक सदी पहले शुरू हुई थी, आज भी उसी जोश और उत्साह के साथ जारी है। यह खेलों का त्योहार है, जिसमें पूरे देश की उम्मीदें और सपने जुड़े होते हैं। यह सरकार की एक अनूठी पहल है, जो भारत को खेलों के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
राष्ट्रीय खेलों के आखिरी दिन उत्तम ने उत्तराखंड के लिए सोना जीता, जबकि, हॉकी के पुरुष वर्ग में कर्नाटक और महिला के मुकाबले में हरियाणा की टीम चैंपियन बनी। विजेता टीमों और खिलाड़ियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। बृहस्पतिवार को 38वें राष्ट्रीय खेलों के तहत वंदना कटारिया स्पोर्ट्स स्टेडियम रोशनाबाद में हॉकी प्रतियोगिता के अंतिम दिन महिला एवं पुरुष वर्ग में हॉकी प्रतियोगिता के मैच और कुश्ती की प्रतियोगिता कराई गईं।महिला वर्ग का फाइनल हॉकी मैच मध्य प्रदेश एवं हरियाणा के बीच खेला गया। बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत हरियाणा की टीम ने 04-01 से मध्य प्रदेश की टीम को हराया। हरियाणा की टीम से चौधरी महिमा ने 01, इशिका ने 02, मोनिका ने 01 गोल किया। मध्य प्रदेश के टीम से चावन ऐश्वर्या ने 01 गोल किया।
पुरुष वर्ग का फाइनल हॉकी मैच कर्नाटक एवं उत्तर प्रदेश के मध्य खेला गया। कर्नाटक की टीम रोमांचक मुकाबले में 03-02 से उत्तर प्रदेश की टीम को हराकर जीत गई। कर्नाटक की टीम से समंथ सीएस ने 01, भरत मलिंगप्पा ने 01, अभारन सुदेव बी ने 01 गोल किया। उत्तर प्रदेश के टीम से सिंह विष्णुकांत ने 01 एवं फराज खान ने 01 गोल किया।
महाराष्ट्र की टीम से तन्नु श्री दिनेश कडू ने किया 01 गोल
महिला वर्ग में तृतीय एवं चतुर्थ स्थान के लिए झारखंड एवं महाराष्ट्र टीम के मध्य खेला गया। रोमांचक मुकाबले में झारखंड की टीम ने 02-01 विजयी प्राप्त की। झारखंड से परमोदनी लखरा ने पहला गोल एवं अलबेला रानी टोपो के दूसरे गोल से झारखंड की टीम को तृतीय स्थान प्राप्त किया। महाराष्ट्र की टीम से तन्नु श्री दिनेश कडू ने 01 गोल किया।
पुरुष वर्ग में तृतीय एवं चतुर्थ स्थान के लिए महाराष्ट्र एवं पंजाब टीम के मध्य खेले गए रोमांचक मुकाबले में महाराष्ट्र की टीम ने 01-00 विजयी प्राप्त की। महाराष्ट्र से वेंकटेश कैंचे ने 01 गोल किया। उसके बाद पंजाब की टीम ओर से बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई गोल नहीं किया जा सका। 01 गोल से महाराष्ट्र की टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया।
130 किलोग्राम भार वर्ग में रोमन ग्रीको कुश्ती के फाइनल मुकाबले में उत्तराखंड के उत्तम ने गोल्ड मेडल जीता। एसएससीबी के प्रेम ने रजत, महाराष्ट्र के दिग्विजय और हरियाणा के अंकुश ने कांस्य पदक प्राप्त किया। 74 किलोग्राम भार वर्ग में एसएसबी के जयदीप ने गोल्ड, महाराष्ट्र के आदर्श ने सिल्वर, दिल्ली के गौरव और कर्नाटक के रोहन ने कांस्य पदक जीता। 60 किलोग्राम भार वर्ग में हरियाणा के साहिल ने गोल्ड, दिल्ली के शुभम ने रजत, एसएससीबी के प्रवीन और महाराष्ट्र के हितेश ने कांस्य पदक हासिल किया।
महाराष्ट्र की असलेशा ने कांस्य पदक अपने नाम किया 53 किलोग्राम भार महिला वर्ग में महाराष्ट्र की स्वाति ने स्वर्ण, मध्यप्रदेश की पूजा ने रजत, गुजरात की हिना बैन और हरियाणा की ज्योति ने कांस्य पदक जीता। 86 किलोग्राम भार वर्ग में दिल्ली के स्वर्ण, हरियाणा के सचिन ने रजत, पंजाब के संदीप और गुजरात के अमन ने कांस्य पदक अपने नाम किया। 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती महिला वर्ग में हरियाणा की तपस्या ने स्वर्ण, गुजरात भाविका ने रजत और चंडीगढ़ की नीतू और महाराष्ट्र की असलेशा ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
पुरुष वर्ग के फाइनल हॉकी मैच का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी गीता पुष्कर धामी एवं भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया गया। हॉकी खिलाड़ियों का पुरस्कार वितरण कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने किया।
जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक निर्माण डीएम की सर्वाेच्च प्राथमिकता में से एक।
जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में मा0 स्वास्थ्य मंत्री ने किया शिलान्यास
जिलाधिकारी सविन बंसल जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं एवं जन सामान्य से संबंधित विषयों एवं समस्याओें पर गंभीर हैं। जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक स्थापित करना डीएम की सर्वाेच्च प्राथमिकता में से एक है। जिसके परिणाम स्वरूप जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में धनराशि ₹ 142.91 लाख से ब्लड बैंक का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही जिला चिकित्सालय का अपना ब्लड बैंक होगा जिससे मरीजों एवं तीमारदारों को काफी राहत मिलेगी।
जिलाधिकारी सविन बसंल स्वयं ब्लड बैंक निर्माण कार्यों की प्रगति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ब्लड बैंक स्थापित होने से जहां जिला चिकित्सालय को अपन ब्लड बैंक मिलेगा वहीं जनमानस मरीजों आगंतुकों को रक्त की आवश्यकता होने पर भटकना नहीं पड़ेगा।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने डीएम देहरादून का पदभार ग्रहण करते ही जनमानस से जुड़े सभी विषयों पर गंभीर हैं लोकसेवक के रूप जनमानस के उनके दायित्वों को निर्वहन करने में सदैव तत्पर रहे हैं।
उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने का कार्य कर रहे, चिकित्सालय में ब्लड बैंक निर्माण कार्यों से लेकर एसएसएनसीयू संचालित करना, चिकित्सालय में आशा घर, उप जिला चिकित्सालय में आईसीयू संचालित करना, विकासनगर चिकित्सालय में मरीजों हेतु निशुल्क भोजन, चिकित्सालयों दवाई कांउटर बढाने, प्रेमनगर में ओटी संचालन, साहिया में अल्ट्रायाउंड मशीन स्थापित करने तथा रोस्टरवार रेडियोलॉजिस्ट की डयूटी लगाने, जिला चिकित्सालय के एसएसएनसीयू, आधुनिक टीकाकरण तथा नारीनिकेतन के लिए डेडिकेटेड एम्बुलेंस आदि अनेक कार्य स्वास्थ्य क्षेत्र में किये है।
38वें नेशनल गेम्स का समापन कल, मेघालय को 39वें नेशनल गेम्स की मेज़बानी
उत्तराखंड में कल शुक्रवार को 38वें नेशनल गेम्स का समापन होगा, और इस अवसर पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा को समापन समारोह में आमंत्रित किया गया है। उन्हें खेलों का ध्वज सौंपा जाएगा, जिससे यह प्रतीक होगा कि अगले नेशनल गेम्स मेघालय में आयोजित होंगे। यह महत्वपूर्ण बदलाव उत्तराखंड से मेघालय के लिए खेलों की मेज़बानी की ओर एक कदम बढ़ाने का संकेत देता है।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने मेघालय के मुख्यमंत्री को पत्र के जरिए जानकारी दी है कि अगले 39वें राष्ट्रीय खेल फरवरी या मार्च 2027 में मेघालय में आयोजित किए जाएंगे। मेघालय को नेशनल गेम्स की मेज़बानी मिलना पूर्वोत्तर भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, और मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने इसे अपने राज्य के लिए गर्व का विषय बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस खुशी को साझा भी किया है।
डॉ. पीटी उषा ने उत्तराखंड की मेहमाननवाज़ी की सराहना की डॉ. पीटी उषा ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित खेलों के सफल आयोजन की सराहना की है। उन्होंने राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में राज्य ओलंपिक संघ और राष्ट्रीय खेल महासंघ के पदाधिकारियों से मुलाकात की, जहां 38वें नेशनल गेम्स की प्रगति पर चर्चा की गई। उन्होंने इस दौरान उत्तराखंड की मेहमाननवाज़ी की तारीफ की और राज्य के खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात की।
यह समापन समारोह उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक पल है, और अब मेघालय के लिए नई शुरुआत के संकेत भी दे रहा है।