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सीएम के संकल्प, डीएम के कमिटमेंट, सप्ताह भर में ही निर्णय धनराशि रिलीज में परिवर्तित

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त्यूनी में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बालिका छात्रावास, महाविद्यालय को 77.30 लाख फंड जारी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी को नई एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड मशीन उपकरण, प्रसव कक्ष विस्तारीकरण वार्ड आया, स्वच्छक स्टाफ हेतु 54.45 लाख फंड जारी

कस्तुरबा गांधी बालिका छात्रावास में स्टडी टेबल, वाटर आरओ, इन्टरनेट, कम्न्यूटर, रोटीमेकर हेतु 17.95 लाख

प0 शिवराम राजकीय महाविद्यालय त्यूनी की लाईब्रेरी रीडिंगरूम, इन्टरनेट, फर्नीचर, आदि सुविधाओं के लिए 4.90 लाख फंड जारी

मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार के त्यूनी भ्रमण कार्यक्रम से जनपद के दुरस्त क्षेत्र त्यूनी को कई सौगात मिल गई है। जिलाधिकारी सविन बसंल ने मा0 मुख्यमंत्री के दुरस्थ क्षेत्रों में निवेश तथा अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ दिए जाने के संकल्प फलीभूत करने तथा जनमानस से किए कमिटमेंट को बरकार रखते हुए त्यूनी में चिकित्सालय, बालिका छात्रावास के निरीक्षण के दौरान तथा प0 शिवराम महाविद्यालय में व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में सामने आई कमियों के निराकरण के लिए एक सप्ताह के भीतर ही 77.30 लाख की धनराशि जारी कर दी है।

डीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र त्यूनी के निरीक्षण के एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासांउड मशीन, रूम हीटर, इलैक्ट्रिक कैटल, पिल्लो, थ्री सीटर चेयर, आउटसोर्स के माध्यक से एक वार्ड आया एवं स्वच्छक की तैनाती के लिए स्वीकृति के साथ ही 54.45 लाख फंड जारी किया है, चिकित्सालय में सुविधा बढने से जनमानस को सुगम सुविधाएं मिलेगी।

डीएम ने कस्तुरबा गांधी बालिका छात्रावास के लिए स्टडी टेबल, फर्नीचर, उपकरण, रोटीमेकर मशीन, इन्टरनेट, डिजिटल बोर्ड हेतु 17.95 लाख की धनराशि जारी की है। वही प0 शिवराम राजकीय महाविद्यालय त्यूनी को लाइब्रेरी, रीडिंगरूम, कम्प्यूटर, इन्टरनेट, फर्नीचर, आदि सुविधाओं के लिए 4.90 लाख फंड जारी कर दिया है।

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि अगले भ्रमण से पूर्व सभी व्यवस्थाएं धरातल पर दिख जाएं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रेडियोलॉजिस्ट अब दो दिन बैठगें पहले माह में एक ही दिन बैठते थे, जनमानस की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए डीएम ने चिकित्सालय में नई एक्स-रे मशीन, नई अल्ट्रासाउण्ड मंशीन की स्वीकृति के साथ ही रेडियोलॉजिस्ट की भी मसूरी चिकित्सालय से माह में 02 दिन ड्यूटी लगाई है

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने किया अहमदाबाद के चिकित्सा संस्थानों का भ्रमण

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यू.एन. मेहता अस्पताल व बी.जे. मेडिकल कॉलेज में परखी स्वास्थ्य सुविधाएं

स्टेट मेडिकल कॉलेजों में बाल हृदय रोगियों के उपचार की होगी विशेष व्यवस्था

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने गुजरात भ्रमण के दौरान आज अहमदाबाद में यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तथा बी.जे. मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। जहां उन्होंने चिकित्सा संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर शैक्षणिक, प्रशासनिक व स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर की मदद से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में बाल हृदय रोगियों के उपचार के लिये विशेष व्यवस्था की जायेगी।

अहमदाबाद के राजकीय प्रवास के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज प्रतिष्ठित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर का भ्रमण किया। जहां उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर संस्थान के चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने पावर प्वांइट प्रस्तुति के माध्यम से हृदय रोग देखभाल, उपचार सेवाओं और नवीनतम चिकित्सा प्रणालियों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. रावत ने बताया पीडियाट्रिक कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के उपचार में यह चिकित्सा संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। जहां प्रत्येक वर्ष विभिन्न देशों से सैकड़ों हृदय रोगी उपचार के लिये आते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी इसी स्तर की बाल हृदय चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जायेंगी, जिससे नवजातों में हृदय रोग की समय पर पहचान और उपचार संभव हो सके। इसके लिये यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर की मदद से एक ठोस कार्ययोजना बनाकर उत्तराखंड के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी बाल हृदय रोगियों के उपचार की व्यवस्था की जायेगी।

डॉ. रावत ने इसके उपरांत बी.जे. मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। जहां उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल स्टॉफ और छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर कॉलेज की शिक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने सिविल अस्पताल का भी दौरा किया और मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। अस्पताल भ्रमण के दौरान डॉ. रावत ने मरीजों व उनके तीमारदारों से मिलकर उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली। डॉ. रावत ने बताया कि अहमदाबाद का सिविल अस्पताल अंग दान के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी है और यहां चिकित्सा सेवाएं अत्यधिक उन्नत है।

मोदी स्वागत के लिए हर्षिल-मुखवा सजकर तैयार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत के लिए हर्षिल-मुखवा क्षेत्र सज-संवर कर पूरी तरह से तैयार है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आग्रह पर शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री वृहस्पतिवार को हर्षिल-मुखवा क्षेत्र के भ्रमण पर आ रहे हैं। जिसे देखते हुए उत्तरकाशी जिले के इस सीमावर्ती क्षेत्र में गजब का उत्साह एवं उल्लास देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री की आगवानी के लिए हर्षिल क्षेत्र के निवासी बड़ी संख्या में निचली घाटियों के शीतकालीन प्रवास स्थलों से अपने मूल घरों को लौट आए हैं और पिछले दिनों हुई बर्फबारी से सराबोर हर्षिल घाटी में ठिठुरन की बजाय गर्मजोशी का माहौल है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वृहस्पतिवार 6 मार्च के हर्षिल-मुखवा क्षेत्र के प्रस्तावित दौरे तहत सबसे पहले गंगा जी के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा (मुखीमठ) जाकर गंगा मंदिर में दर्शन-जून करने का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए मुखवा स्थित गंगा मंदिर एवं स्थानीय भवन शैली से बने पौराणिक भवनों को भव्य तरीके से सजाने के साथ ही समूचे मुखवा गांव को भी सजाया-संवारा गया है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुखबा मंदिर के बाद प्रधानमंत्री पूर्वाह्न 10.30 बजे हर्षिल पहुंचकर उत्तराखंड शीतकालीन पर्यटन और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद जादुंग व पीडीए के लिए मोटर बाईक व एटीवी-आरटीवी रैलियों तथा जनकताल एवं मुलिंगला के लिए ट्रैकिंग अभियानों को झंडी दिखाकर शुभारंभ करेंगे। सीमावर्ती नेलांग-जादुंग-पीडीए क्षेत्र का मनमोहक शीत मरूस्थली पठार का क्षेत्र अभी तक पर्यटन की गतिविधियों से अछूता रहा है। प्रधानमंत्री के हाथों इन क्षेत्रों के लिए साहसिक पर्यटन अभियानों के शुभारंभ से इस क्षेत्र में पर्यटन विकास के नए द्वार खुल जाएंगे।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री के द्वारा हर्षिल में जनसभा को भी संबोधित किया जाएगा। हर्षिल में जनसभा के लिए बड़ा पंडाल स्थापित करने के साथ ही साज-सज्जा कर सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक सरिता डोबाल सहित प्रशासन व पुलिस के तमाम अधिकारी इन दिनों हर्षिल में ही डेरा डाले हुए हैं। प्रधानमंत्री के दौरे की व्यवस्थाओं को लेकर अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को हर्षिल क्षेत्र में तैनात किया गया है। क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती करने के साथ ही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर आज पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे, सचिव गृह शैलेश बगोली, आयुक्त गढवाल मंडल एवं सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पाण्डेय, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी मुरूगेशन व ए.पी. अंशुमान, महानिदेशक सूचना वंशीधर तिवारी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आज हर्षिल क्षेत्र का भ्रमण कर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने हर्षिल-मुखवा क्षेत्र में की गई विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन की सभी तैयारियां पूरी हैं और उत्तरकाशी जिला प्रधानमंत्री के स्वागत हेतु पूरी तरह से तैयार है।

देवभूमि उत्तराखंड आगमन से पहले पीएम ने दी राज्य को दी दो बड़ी सौगात।

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केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दिए जाने पर सीएम ने व्यक्त किया पीएम का आभार।

दिल्ली दौरे के दौरान सीएम ने दोनों रोपवे के निर्माण के लिए पीएम से किया था अनुरोध।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविन्दघाट से हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे विकास के लिए केन्द्रीय मंत्रीमंडल द्वारा मंजूरी दिये जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड आने से पहले प्रधानमंत्री ने राज्य को दो बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे का विकास होने से श्रद्धालुओं को दर्शन में काफी सुगमता होगी। मुख्यमंत्री ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री से इन दोनों रोपवे के निर्माण के लिए अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का देवभूमि उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। उनके मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार का हर क्षेत्र में राज्य को सहयोग मिल रहा है। श्री केदारनाथ का पुनर्निमाण, श्री बदरीनाथ के मास्टर प्लान के कार्य तेजी से हुए हैं। उनके आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा में भी श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी।

केन्द्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम के तहत पर्वतमाला परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) तक रोपवे को दी मंजूरी ।

केन्द्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम के तहत पर्वतमाला परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) तक रोपवे को मंजूरी दी है। परियोजना का डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर 4,081.28 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत पर विकसित किया जाएगा। रोपवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है और यह सबसे उन्नत ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा। इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे प्रति (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रतिदिन 18 हजार यात्रियों को ले जाएगी।

यह रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटकर लगभग 36 मिनट कर देगी। रोपवे परियोजना निर्माण और संचालन के साथ-साथ आतिथ्य, यात्रा, खाद्य और पेय पदार्थ (एफ एंड बी) और पर्यटन जैसे संबद्ध पर्यटन उद्योगों में पूरे वर्ष रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराएगी। रोपवे परियोजना का विकास संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, पहाड़ी क्षेत्रों में लास्ट मील कनेक्टिविटी को बढ़ाने और तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वर्तमान में केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और इसे पैदल, घोड़ा-खच्चर, पालकी और हेलीकॉप्टर से किया जाता है। प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। केदारनाथ 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 3,583 मीटर (11968 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

केन्द्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम – पर्वतमाला परियोजना के तहत उत्तराखंड राज्य में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी (12.4 किमी) तक रोपवे परियोजना के विकास को भी दी मंजूरी ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किलोमीटर रोपवे परियोजना के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना का डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजीगत लागत 2,730.13 करोड़ रुपये होगी। वर्तमान में हेमकुंड साहिब जी की यात्रा गोविंदघाट से 21 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और इसे पैदल, घोड़ा-खच्चर, पालकी से किया जाता है। प्रस्तावित रोपवे की योजना हेमकुंड साहिब जी के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों और फूलों की घाटी में आने वाले पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के लिए बनाई गई है और यह गोविंदघाट और हेमकुंड साहिब जी के बीच हर मौसम में अंतिम मील की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।

रोपवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है और यह गोविंदघाट से घांघरिया (10.55 किमी) तक मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला (एमडीजी) पर आधारित होगा, जिसे घांघरिया से हेमकुंड साहिब जी (1.85 किमी) तक सबसे उन्नत ट्राइकेबल डिटैचेबल गोंडोला (3 एस) तकनीक से जोड़ा जाएगा, इसका डिजाइन इस तरीके से तैयार किया जाएगा जिससे इसकी क्षमता प्रति घंटे प्रति दिशा 1,100 यात्री (पीपीएचपीडी) होगी और यह प्रतिदिन 11,000 यात्रियों को ले जाएगा। रोपवे परियोजना निर्माण और परिचालन के दौरान और साथ ही पूरे वर्ष आतिथ्य, यात्रा, खाद्य और पेय (एफ एंड बी) और पर्यटन जैसे संबद्ध पर्यटन उद्योगों में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करेगी। रोपवे परियोजना का विकास संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, तीर्थयात्रियों के लिए अंतिम मील तक कनेक्टिविटी बढ़ाने और क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हेमकुंड साहिब जी उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तीर्थ स्थल है। इस पवित्र स्थल पर स्थापित गुरुद्वारा मई से सितम्बर के बीच साल में लगभग 5 महीने के लिए खुला रहता है और हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख तीर्थयात्री यहां आते हैं।

केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की मंजूरी हेली सेवाओं पर असर

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केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की मंजूरी

मोदी सरकार ने केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं से यात्रा के समय में महत्वपूर्ण कमी आएगी और यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाएगा।

केदारनाथ रोपवे परियोजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम की पर्वतमाला परियोजना के तहत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किमी लंबी रोपवे परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में केदारनाथ यात्रा में 8-9 घंटे का समय लगता है, लेकिन रोपवे बनने के बाद यह समय घटकर 36 मिनट रह जाएगा। इस रोपवे में 36 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे या केबिल कार परियोजना का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को सौंपा गया है। एजेंसी इस परियोजना की Detailed Project Report (DPR) तैयार कर रही है।

सुरक्षित यात्रा के लिए महत्वपूर्ण कदम

केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए दो ही विकल्प थे। पहला पैदल यात्रा, जो बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए कठिन है, और दूसरा रोपवे या केबिल कार, जो सभी के लिए यात्रा को सुगम बनाएगा। रोपवे बनने से केदारनाथ यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो शारीरिक रूप से कठिनाइयों का सामना करते हैं।

हेली सेवाओं पर असर

केदारनाथ में स्थितियां कठिन होने के कारण हेली सेवाओं का संचालन जोखिमपूर्ण माना जाता है। रोपवे बनने के बाद हेली सेवाओं का क्रेज कम हो जाएगा, क्योंकि रोपवे यात्रा अधिक सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक होगी। इससे राज्य में हेली सेवाएं सीमित हो जाएंगी, और यात्री अधिकतर रोपवे या केबिल कार का चयन करेंगे।

यह परियोजना उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

मोदी कैबिनेट से उत्तराखंड को मिली बड़ी सौगात गोविंदघाट से Hemkund Sahib Ji रोपवे परियोजना को मंजूरी

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कैबिनेट ने उत्तराखंड में गोविंदघाट से Hemkund Sahib Ji (12.4 किमी) तक रोपवे परियोजना के विकास को मंजूरी दी – राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम – पर्वतमाला परियोजना

नई दिल्ली, PIB : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने गोविंदघाट से Hemkund Sahib Ji तक 12.4 किमी की रोपवे परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना का विकास डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (DBFOT) मोड पर किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजी लागत ₹2,730.13 करोड़ होगी।

वर्तमान में, Hemkund Sahib Ji तक यात्रा एक चुनौतीपूर्ण 21 किमी की चढ़ाई है, जो गोविंदघाट से पैदल, घोड़े या पालकी के माध्यम से की जाती है। प्रस्तावित रोपवे तीर्थयात्रियों और फूलों की घाटी (Valley of Flowers) की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए सुविधा प्रदान करेगा और गोविंदघाट और Hemkund Sahib Ji के बीच हर मौसम में आखिरी मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

रोपवे को सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें गोविंदघाट से घाटी तक 10.55 किमी (Monocable Detachable Gondola) और घाटी से Hemkund Sahib Ji तक 1.85 किमी (Tricable Detachable Gondola – 3S) तकनीकी आधार पर, एक डिज़ाइन क्षमता के साथ 1,100 यात्रियों प्रति घंटे प्रति दिशा (PPHPD) होगी, जो प्रति दिन 11,000 यात्रियों को परिवहन करेगा।

इस रोपवे परियोजना से निर्माण और संचालन के दौरान और पर्यटन उद्योग जैसे आतिथ्य, यात्रा, खाद्य और पेय (F&B) में भी रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

रोपवे परियोजना का विकास समाज-आर्थिक संतुलित विकास को बढ़ावा देने, तीर्थयात्रियों के लिए आखिरी मील कनेक्टिविटी बढ़ाने और क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Hemkund Sahib Ji उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक अत्यधिक पूजनीय तीर्थ स्थल है, जो समुद्रतल से 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां स्थित गुरुद्वारा मई से सितंबर तक लगभग 5 महीने खुले रहते हैं और इसे हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख तीर्थयात्री दर्शन करने आते हैं। Hemkund Sahib Ji तक की यात्रा प्रसिद्ध Valley of Flowers के प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य करती है, जो एक राष्ट्रीय उद्यान है और जिसे UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है, और यह प्राचीन गढ़वाल हिमालय में स्थित है।

Parvatmala Pariyojana ropeway Govindghat to Hemkund Sahib Ji

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Cabinet approves development of ropeway project from Govindghat to Hemkund Sahib Ji (12.4 km) in the State of Uttarakhand under National Ropeways Development Programme – Parvatmala Pariyojana
PIB Delhi : The Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA), chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi, has approved the construction of 12.4 km ropeway project from Govindghat to Hemkund Sahib Ji. The project will be developed on Design, Build, Finance, Operate and Transfer (DBFOT) mode at a total capital cost of Rs. 2,730.13 crore.

Currently, the journey to the Hemkund Sahib Ji is a challenging 21-km uphill trek from Govindghat and is covered on foot or by ponies or palanquins. The proposed ropeway is planned to provide convenience to pilgrims and visiting the Hemkund Sahib Ji and the tourists visiting the Valley of Flowers and will ensure all-weather last mile connectivity between Govindghat and Hemkund Sahib Ji.

The ropeway is planned to be developed in public-private partnership and will be based on Monocable Detachable Gondola (MDG) from Govindghat to Ghangaria (10.55 km), seamlessly integrated with the most advanced Tricable Detachable Gondola (3S) technology from Ghangaria to Hemkund Sahib Ji (1.85 km) with a design capacity of 1,100 passengers per hour per direction (PPHPD) carrying 11,000 passengers per day.

The ropeway project will also generate substantial employment opportunities during construction and operations as well as in allied tourism industries like hospitality, travel, foods & beverages (F&B) and tourism throughout the year.

The development of ropeway project is a significant step towards fostering balanced socio-economic development, enhancing last mile connectivity for pilgrims and fostering rapid economic growth of the region.

Hemkund Sahib Ji is a highly revered pilgrimage site situated at an elevation of 15,000 ft in Chamoli district of the State of Uttarakhand. The Gurudwara established at the holy site is open for about 5 months in a year between May and September and is visited by about 1.5 to 2 lakh pilgrims annually. The trek to Hemkund Sahib Ji also serves as the gateway to the famous Valley of Flowers, a national park recognized as the UNESCO World Heritage site, located in the pristine Garhwal Himalayas.

शीतकालीन यात्रा: धामी के मजबूत इरादों को पंख लगाएंगे मोदी

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शीतकालीन यात्रा: धामी के मजबूत इरादों को पंख लगाएंगे मोदी उत्तरकाशी, 5 मार्च 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड दौरा शीतकालीन यात्रा को नए आयाम देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है। इस बार प्रधानमंत्री मोदी 6 मार्च को उत्तरकाशी जिले में शीतकालीन यात्रा के दौरान प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जो उत्तराखंड में धार्मिक और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मुखबा व्यू प्वाइंट से हिमालय के दर्शन
प्रधानमंत्री मोदी पहले मुखबा में मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल पर दर्शन और पूजा करेंगे। फिर वे हर्षिल में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां विंटर टूरिज्म पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और बाइक रैली को हरी झंडी दिखाएंगे।

मुखबा में पीएम मोदी पारंपरिक परिधान “चपकन” पहनकर पूजा कर सकते हैं, जो इस क्षेत्र की संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। गंगोत्री मंदिर समिति ने उन्हें यह परिधान भेंट देने की तैयारी की है। साथ ही, हर्षिल में प्रधानमंत्री को वहां का पारंपरिक परिधान “मिरजाई” भी भेंट किया जाएगा।

धामी सरकार का विजन और शीतकालीन यात्रा का भविष्य
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शीतकालीन यात्रा के माध्यम से राज्य में पर्यटन के नए अवसरों की तलाश में हैं। उनका लक्ष्य इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण के रूप में स्थापित करना है, ताकि धार्मिक और शीतकालीन पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिले। धामी सरकार का ध्यान होटल व्यवसाय, व्यू प्वाइंट्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर है, और पीएम मोदी के दौरे से इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जाएगा।

धामी ने कहा कि उत्तरकाशी में शीतकालीन यात्रा से केवल धार्मिक श्रद्धालुओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह पर्यटन, होमस्टे और सीमावर्ती गांवों के विकास में भी मदद करेगा। उनका मानना है कि पीएम मोदी के इस दौरे से उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, विशेषकर बर्फीले पर्यटन स्थलों, साहसिक खेलों और धार्मिक स्थलों पर।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
प्रधानमंत्री के इस दौरे से उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, क्योंकि इससे पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार इस कार्यक्रम के लिए युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई हैं।

यह दौरा उत्तराखंड के शीतकालीन यात्रा को एक नई पहचान दिलाने और राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: बोलीं जया किशोरी – आज गुरु खुद को ईश्वर से बड़ा समझने लगे हैं, ये धर्म के लिए खतरनाक

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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: बोलीं जया किशोरी - आज गुरु खुद को ईश्वर से बड़ा समझने लगे हैं, ये धर्म के लिए खतरनाक

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: बोलीं जया किशोरी – आज गुरु खुद को ईश्वर से बड़ा समझने लगे हैं, ये धर्म के लिए खतरनाक

ऋषिकेश, 4 मार्च 2025 अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के चौथे दिन, प्रसिद्ध कथावाचक जया किशोरी ने साधकों को संबोधित करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा और धर्म के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आजकल के गुरु खुद को भगवान से बड़ा समझने लगे हैं, जो धर्म और आध्यात्म के लिए खतरनाक स्थिति है। जया किशोरी ने स्पष्ट किया कि गुरु का मुख्य काम व्यक्ति को भगवान से जोड़ने का है, न कि खुद को। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु ईश्वर से कभी बड़ा नहीं हो सकता, बल्कि वह तो केवल भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है।

मुनि की रेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में आयोजित सात दिवसीय इस महोत्सव के दौरान जया किशोरी ने साधकों को यह भी बताया कि धर्म की सच्चाई और आध्यात्मिक ज्ञान कभी भी नया नहीं होता, बस उसे प्रस्तुत करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। उन्होंने कहा, “गुरु सिर्फ उस ज्ञान पर धूल की परत हटाने का काम करता है, जो पहले से मौजूद है।” उन्होंने साधकों को यह भी समझाया कि जो जल्दी समझ जाता है, उसका कर्तव्य है कि वह दूसरों को भी समझाने में मदद करे।

महिला और पुरुष के बीच समानता पर अपनी बात रखते हुए जया किशोरी ने कहा कि दोनों की सोच में अंतर केवल उनकी परवरिश का परिणाम होता है। अगर बचपन से ही लड़के और लड़कियों को समान शिक्षा और संस्कार मिलें, तो दोनों की सोच एक जैसी हो सकती है।

इस अवसर पर उन्होंने योग के महत्व पर भी जोर दिया और साधकों से आग्रह किया कि वे अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

प्रयागराज महाकुंभ ड्यूटी से लौटने के बाद SDRF के जवानों का मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन

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प्रयागराज महाकुंभ ड्यूटी से लौटने के बाद SDRF के जवानों का मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन

प्रयागराज महाकुंभ ड्यूटी से लौटने के बाद SDRF के जवानों का मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन

देहरादून, 4 मार्च 2025 उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 में अपनी ड्यूटी निभाकर लौटे SDRF (State Disaster Response Force) के 112 जवानों का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उन्होंने एसडीआरएफ की टीम को 5 लाख रुपये का पुरस्कार चेक प्रदान किया और उनकी कड़ी मेहनत एवं समर्पण के लिए उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “SDRF टीम ने महाकुंभ प्रयागराज में उत्कृष्ट कार्य करके उत्तराखंड का मान बढ़ाया। इन अनुभवों का लाभ आगामी हरिद्वार कुंभ 2027 में भी होगा। विशेष रूप से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन सेवाओं के संदर्भ में इन अनुभवों से काफी मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि महाकुंभ प्रयागराज में भगवान के इस महासंगम की चुनौती को संभालना कठिन कार्य था, लेकिन एसडीआरएफ के जवानों ने इस कार्य को बखूबी निभाया और बेहतर व्यवस्थाओं के माध्यम से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकार का मान ऊंचा किया।

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि, “उत्तराखंड राज्य विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है, और SDRF ने आपदा प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन जवानों ने तेज़ प्रतिक्रिया और आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर आपदाओं के प्रभाव को कम किया है।”

उन्होंने 2027 के कुंभ को भव्य रूप से आयोजित करने के लिए कई योजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें प्रमुख था वाहनों के लिए सुनियोजित पार्किंग व्यवस्था। सरकार इस पर पूरी तरह से काम कर रही है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की भीड़-भाड़ की समस्या से बचा जा सके।

इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, गृह सचिव शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, एडीजी अमित सिन्हा, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आईजी SDRF रिद्धिम अग्रवाल, और अन्य अधिकारी व जवान भी उपस्थित थे।