Home Blog Page 163

प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम के नाम पर व्हाट्सएप फ्रॉड, एसएसपी से की शिकायत

0

प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम के नाम पर व्हाट्सएप फ्रॉड, एसएसपी से की शिकायत

देहरादून, 8 जुलाई: उत्तराखंड के प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर साइबर ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए फ्रॉड करने की कोशिश की है। ठगों ने उनके नाम और फोटो का उपयोग करते हुए एक फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार की और कई व्यक्तियों व विभागीय अधिकारियों से पैसों की मांग की।

प्रमुख सचिव ने इस संदर्भ में आज देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को औपचारिक शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके नाम और फोटो का प्रयोग करते हुए व्हाट्सएप नंबर पर प्रोफाइल बनाई गई है। इसके जरिए अलग-अलग लोगों से अनावश्यक रूप से पैसों की मांग की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है, जिसमें विभागीय अधिकारियों को टारगेट किया गया था।

पुलिस ने मामले की जांच साइबर सेल को सौंप दी है। आरोपियों की पहचान और कार्रवाई के लिए मोबाइल नंबर व अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध मैसेज या कॉल पर प्रतिक्रिया न दें और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।

उत्तराखंड में परिवहन सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री धामी ने 20 नई वातानुकूलित टैम्पो ट्रैवलर को दिखाया हरी झंडी

0

उत्तराखंड में परिवहन सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री धामी ने 20 नई वातानुकूलित टैम्पो ट्रैवलर को दिखाया हरी झंडी

देहरादून, 7 जुलाई 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से आयोजित एक समारोह में उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) द्वारा संचालित 20 नई वातानुकूलित मिनी बसों (टैम्पो ट्रैवलर) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें से 10 वाहन देहरादून-मसूरी और 10 वाहन हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग पर संचालित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई सुविधाजनक सेवाओं से ना केवल यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा, बल्कि मसूरी और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर लगने वाले जाम की समस्या में भी काफी हद तक कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यदि यह पहल सफल रहती है तो इस तरह की सेवाओं की संख्या को और बढ़ाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैंप कार्यालय से जीटीसी हेलीपैड तक टैम्पो ट्रैवलर में सफर भी किया।

राज्य के परिवहन को बनाएंगे स्मार्ट और सस्टेनेबल

मुख्यमंत्री धामी ने कहा:

“वातानुकूलित टैम्पो ट्रैवलर राज्य के परिवहन तंत्र को सशक्त बनाएंगे। यह पहल प्रदेश की आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को गति देगी। हमारा प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र को बेहतर सड़क नेटवर्क और विश्वसनीय परिवहन सेवाओं से जोड़ा जाए।”

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखंड परिवहन निगम ने लगातार तीन वर्षों से लाभ कमाया है और इसका श्रेय निगम की नीतिगत पारदर्शिता व कर्मचारियों के सहयोग को जाता है।

डिजिटल युग की ओर बढ़ता परिवहन विभाग

सरकार द्वारा परिवहन सेवाओं में डिजिटल टिकटिंग, ऑनलाइन बुकिंग और ट्रैकिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे आम जनता को यात्रा के दौरान सुविधा, पारदर्शिता और भरोसे का अनुभव हो रहा है।

जल्द शामिल होंगी इलेक्ट्रिक बसें

मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवहन निगम के बेड़े में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों को भी शामिल किया जाएगा, जिसकी खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके अलावा कर्मचारियों के कल्याण हेतु कई योजनाएं लागू की गई हैं—जैसे डीए में बढ़ोतरी, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का क्रियान्वयन, और नयी भर्तियों के माध्यम से मानव संसाधन में वृद्धि

उपस्थित रहे ये प्रमुख चेहरे:

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, परिवहन निगम के अध्यक्ष एल. फैनई, एमडी श्रीमती रीना जोशी सहित परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में हाई अल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन, आदि कैलाश और माणा-मलारी होंगे केंद्र

0

उत्तराखंड में हाई अल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन, आदि कैलाश और माणा-मलारी होंगे केंद्र

वार्षिक पर्यटन कैलेंडर में होगा शामिल, सीमांत क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा व आपदा प्रबंधन पर भी ज़ोर

देहरादून, 6 जुलाई: प्रातः कालीन बैठक में उत्तराखंड के उच्च अधिकारियों को पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार द्वारा एक नई पहल के तहत हाई अल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के सीमांत और ऊँचाई वाले क्षेत्रों को पर्यटन के नक्शे पर और अधिक मजबूती से स्थापित करना है।

गुंजी से आदि कैलाश और नीति-माणा से मलारी तक दौड़ेगा पर्यटन

निर्देशों के अनुसार, कुमाऊं क्षेत्र में यह मैराथन गुंजी से आदि कैलाश तक और गढ़वाल क्षेत्र में नीति-माणा से मलारी तक आयोजित की जाएगी। अधिकारियों को इसे राज्य के वार्षिक पर्यटन कैलेंडर में शामिल करने और प्रत्येक वर्ष निर्धारित तिथि पर इसका आयोजन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

आपदा प्रबंधन और फसल सुरक्षा पर भी विशेष निर्देश

बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जाए तथा प्रभावितों को समय पर सहायता राशि प्रदान करने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही सीमांत एवं पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा हेतु घेरबाड़/सोलर फेंसिंग की योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसानों को राहत मिल सके।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बनाएंगे नई टीम, पंचायत चुनावों के बाद होगा ऐलान

0

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बनाएंगे नई टीम, पंचायत चुनावों के बाद होगा ऐलान

देहरादून: उत्तराखंड में भाजपा की कमान दूसरी बार संभाल चुके महेंद्र भट्ट जल्द ही प्रदेश संगठन की नई टीम का गठन करेंगे। हालांकि, यह प्रक्रिया त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बाद की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, अगस्त माह तक भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी अस्तित्व में आ सकती है।

सक्रियता ही बनेगी टीम में शामिल होने का मापदंड

पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बार संगठन में वही चेहरे शामिल किए जाएंगे जो सक्रिय, जनाधार वाले और सांगठनिक कामकाज में रुचि लेने वाले हैं। ऐसे पदाधिकारी जो पिछले कार्यकाल में सक्रिय नहीं रहे या सांगठनिक दायित्वों के प्रति लापरवाह पाए गए, उन्हें नई टीम में शामिल नहीं किया जाएगा।

दोहरा दायित्व रखने वालों को राहत नहीं

नई टीम में उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है जो सरकारी दायित्वों के साथ संगठनात्मक पद भी संभाल रहे हैं। संगठन मानता है कि इस तरह के दोहरे दायित्व से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

कुछ पुराने चेहरे रहेंगे बरकरार

हालांकि, यह भी संकेत हैं कि कुछ मौजूदा पदाधिकारियों को उनके अनुभव, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और सक्रिय भूमिका के आधार पर नई टीम में पुनः शामिल किया जा सकता है। उनकी जिम्मेदारियों में कुछ फेरबदल किया जा सकता है।

जिलों की कार्यकारिणी का भी होगा विस्तार

नई प्रदेश टीम के गठन के साथ-साथ कुछ जिलों की भाजपा इकाइयों की कार्यकारिणियों में भी विस्तार और पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत किया जा सके।

लोन ऐप फ्रॉड का मास्टरमाइंड सीए अभिषेक अग्रवाल गिरफ्तार, 750 करोड़ की ठगी का आरोपी था थाईलैंड भागने की फिराक में

0

लोन ऐप फ्रॉड का मास्टरमाइंड सीए अभिषेक अग्रवाल गिरफ्तार, 750 करोड़ की ठगी का आरोपी था थाईलैंड भागने की फिराक में

देहरादून/दिल्ली:
देशभर में फर्जी लोन ऐप्स के जरिए 750 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अभिषेक अग्रवाल को उत्तराखंड एसटीएफ ने शनिवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी थाईलैंड भागने की कोशिश में था, लेकिन STF ने उसे उड़ान से पहले ही पकड़ लिया।

STF के SSP नवनीत भुल्लर ने बताया कि अभिषेक अग्रवाल ने चीनी नागरिकों के साथ मिलकर कई शेल कंपनियां बनाई थीं और फर्जी लोन एप्स के जरिए आम लोगों को जाल में फंसाकर मोटी ठगी की। पीड़ितों को पहले लोन दिया जाता था, फिर मनमाने ब्याज और धमकी भरे कॉल के जरिये वसूली की जाती थी।

गुरुग्राम कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय ठगी का जाल

इस गिरोह को अभिषेक अग्रवाल और गुरुग्राम निवासी अंकुर ढींगरा मिलकर चला रहे थे। गिरोह की कई कंपनियों में चीन के नागरिक सह-निदेशक थे और ठगी से जुटाई गई रकम को हवाला के जरिये चीन ट्रांसफर किया जा रहा था।

  • 2022 में इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था।
  • 2023 में अंकुर ढींगरा को गिरफ्तार किया गया था।
  • अभिषेक फरार था, जिस पर लुक आउट सर्कुलर भी जारी था।

STF की सतर्कता से बड़ी ठगी रुकी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर साइबर फ्रॉड और आर्थिक अपराधों के खिलाफ चल रही STF की मुहिम को इस गिरफ्तारी से बड़ी सफलता मिली है।

पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और अन्य विदेशी कनेक्शन, बैंक खातों, और डिजिटल ट्रांजैक्शनों की जांच की जा रही है।

राजनीति से परे एक जननेता की छवि मुख्यमंत्री धामी खेत में हल लगाते हुए वायरल

0

मुख्यमंत्री धामी खेत में हल लगाते हुए वायरल, बोले- “अन्नदाता हमारी संस्कृति के संवाहक हैं”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर से आम जनता के बीच अपने सहज और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के लिए चर्चा में हैं। इस बार वे खटीमा के नगरा तराई क्षेत्र में अपने खेत में किसान की भूमिका में नजर आए, जहां उन्होंने धान की रोपाई करते हुए हल भी चलाया। शनिवार को सोशल मीडिया पर उनके फोटो और वीडियो वायरल हो गए, जिसमें वे पारंपरिक वेशभूषा में खेत में काम करते दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने इस अनुभव को साझा करते हुए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा:

“खटीमा के नगरा तराई में अपने खेत में धान की रोपाई कर किसानों के श्रम, त्याग और समर्पण को अनुभव कर पुराने दिनों का स्मरण किया। अन्नदाता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि संस्कृति और परंपरा के संवाहक भी हैं।”

इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा “हुड़किया बौल” के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, पानी के देवता इंद्र, और छाया के देव मेघ की वंदना भी की।

राजनीति से परे एक जननेता की छवि

सीएम धामी का यह रूप न केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, बल्कि राजनैतिक गलियारों में भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। आम लोगों से सीधा जुड़ाव और किसानों के प्रति सम्मान दर्शाते हुए धामी ने यह संदेश दिया है कि वह आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।

स्थिर सरकार के ध्वज वाहक सियासत पिच पर नाबाद पुष्कर सिंह धामी

0

स्थिर सरकार के ध्वज वाहक सियासत पिच पर नाबाद धामी देहरादून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद वाले उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मजबूत इरादों से जनता के भरोसे को जीतकर हर चुनाव में अपनी जीत का परचम लहरा कर भाजपा सरकार के सबसे लम्बे समय तक अस्थिर सरकार का मिथक तोड़कर स्थिर सरकार के ध्वज वाहक
भाजपा मुख्यमंत्री बन गए है दोनों कार्यकालों के चार साल में पुष्कर सिंह धामी सरकार बीजेपी हाई कमान की कसौटी पर चौबीस कैरट सोना बनकर उभरे है।

पुष्कर सिंह धामी सरकार फैसले आज देश भर में नजीर के रूप में सामने है युवा दिलो से लेकर हर दिल अजीज पुष्कर हर मोर्चे पर मुस्तैदी से डटे रहे उत्तराखंड में आपदा का संकट हो या फिर राजनैतिक विरोधियो द्वारा परिवर्तन की फैब्रीक्रिटेड खबरों का मायाजाल बुना जाना हो लेकिन अपने राजनैतिक कौशल से धामी हर जंग का बखूबी पटलवार करते देखे गए है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उन्हें लगातार चार साल हो गए। ये उनके दो कार्यकालों के चार साल हैं, जिनमें उन्होंने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करके देश भर में विशेष पहचान बनाई और खूब सुर्खियां बटोरीं।

चार साल पहले 4 जुलाई में पुष्कर सिंह धामी को राज्य की बागडोर सौंपी गई थी। तब विधानसभा चुनाव में सिर्फ छह-सात महीने शेष थे। नए युवा चेहरे के कंधों पर भाजपा को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी थी। सत्तारूढ़ दल की वापसी न कर पाने का मिथक उत्तराखंड में बन गया था। मगर पुष्कर सिंह धामी मिथक तोड़कर भाजपा को विधानसभा चुनाव जिताकर इतिहास बनाने वाले पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने जो राज्य में अपनी सरकार को फिर से सत्ता में वापिसी करा पाए।

पुष्कर सिंह धामी के हाथों में ही कमान सौंपकर भाजपा हाईकमान ने भी नई इबारत लिख डाली। धामी को भले ही खटीमा से चुनाव हारवा पाने में उनके राजनैतिक विरोधी कामयाब रहे लेकिन उनका सपना आज तक पूरा नहीं हो सका तब से लेकर अब तक केंद्रीय नेतृत्व के लिए पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में भाजपा के सबसे विश्वसनीय चेहरा साबित होकर चौबीस कैरट सोना बनकर उभरे हुए हैं। चाहे यूसीसी लागू करने की बात रही हो या फिर नकल विरोधी, धर्मांतरण विरोधी जैसे कानूनों की, धामी ने उन्हें अमल में लाने में देरी नहीं की।

पुष्कर सिंह धामी के व्यवहार में सौम्यता और एक्शन में कठोरता हमेशा उत्तराखंड में दिखी। उनके कामकाज को मान्यता देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी कई बार उत्तराखंड आए। पीठ थपथपाई और साफ संदेश दिया कि वह बगैर किसी चिंता के इसी गति से काम करते रहें। बाबा केदारनाथ धाम की धरती से मोदी के कथन 21 वी सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा आज उत्तराखंड में धामी सरकार पब्लिक डोमेन में डिलीवरी देने वाली सरकार के रूप में पसंद की जा रही है
उत्तराखंड में सबसे बड़ा सांस रोकने वाला सिलक्यारा टनल प्रकरण रहा हो या फिर रोमांच की पराकाष्ठा वाले राष्ट्रीय खेल, अपनी क्षमताओं के इम्तिहान में धामी पूरे नंबर लाकर पास हुए।

राष्ट्रीय फलक पर छाए फैसले, देश के लिए बने मॉडल
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चार साल के कार्यकाल में समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोकथाम कानून के संबंध में लिए गए फैसले राष्ट्रीय फलक पर छाए और देश के लिए मॉडल बने।

  1. नकल रोधी कानून: नकल माफिया का कुचक्र तोड़ने के लिए फरवरी 2023 में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा में नकल रोकने के लिए( भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) कानून लागू किया। यह देश के लिए एक मॉडल नकल रोधी कानून बना।
  2. यूसीसी हुआ लागू: 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। इसके बाद कुछ अन्य भाजपा शासित राज्यों ने भी यूसीसी के लिए पहल की। यूसीसी के तहत प्रदेश में दो लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।
  3. दंगाइयों से वसूली के लिए बनाया कानून: दंगा, हड़ताल, विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से बाजार भाव पर नुकसान की भरपाई के लिए 2024 से उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली कानून लागू किया।
  4. गैंगस्टर एक्ट को बनाया सख्त: गैंगस्टर एक्ट में संशोधन करते हुए गो वध, मानव तस्करी, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, नकल माफिया, मनी लॉड्रिंग जैसे अपराधों को इसके दायरे में लाया गया। दोष सिद्ध होने पर 10 साल की गैर जमानती साज और 50 हजार रुपये तक जुर्माना प्रावधान किया गया।
  5. राज्य आंदोलनकारियों और महिला को आरक्षण
    धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को फिर से लागू किया। राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया।

धामी सरकार में इन फैसलों ने भी बटोरी सुर्खियां

पलायन को रोकने के लिए ‘एप्पल मिशन’ और ‘कीवी मिशन’ की शुरुआत
हाउस ऑफ हिमालयाज के ज़रिए पहाड़ी उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का प्रयास
सख्त भू कानून, और ‘लव-लैंड-थूक जिहाद’ पर कठोर रुख
राष्ट्रीय खेलों के आयोजन और जी-20 देशों की बैठकों के आयोजन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की नई पहचान
23 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्तियां कीं
शीतकालीन यात्रा, मानसखंड मंदिरमाला मिशन, महासू मंदिर हनोल विकास परियोजना शुरू की
जीईपी इंडेक्स में शानदार प्रदर्शन किया। एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखंड का पहला स्थान

कांवड़ यात्रा पर गरमाई राजनीति, दिग्विजय सिंह और एसटी हसन के बयान पर भाजपा का पलटवार

0

कांवड़ यात्रा पर गरमाई राजनीति, दिग्विजय सिंह और एसटी हसन के बयान पर भाजपा का पलटवार

नई दिल्ली/देहरादून। सावन माह में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति में गर्मी आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन के बयानों पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि ये नेता हिंदू आस्था के विरुद्ध मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।


क्या कहा दिग्विजय सिंह ने?

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि राज्य सरकारें कांवड़ यात्रा में सुविधाएं देती हैं तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस यात्रा का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा,

“किसी भी सभ्य समाज में नफरत फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”


एसटी हसन की टिप्पणी और विवाद

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ दुकानदारों और होटल कर्मियों की धार्मिक पहचान पूछे जाने की घटनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा,

“नाम पूछकर, कपड़े उतरवाकर धर्म पहचानना भी आतंकवाद की तरह है।”
उन्होंने इन घटनाओं की तुलना पहलगाम में हुए आतंकी हमलों से कर दी, जहां आतंकवादियों ने लोगों की धार्मिक पहचान के आधार पर उन्हें निशाना बनाया था।


भाजपा का पलटवार: त्रिवेदी ने साधा निशाना

भाजपा सांसद और प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने दोनों नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:

“दिग्विजय सिंह और एसटी हसन के बयान ‘डिस्मैंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ की मानसिकता से प्रेरित लगते हैं।”

उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि वे

  • जाकिर नाइक को ‘शांति का दूत’
  • ओसामा बिन लादेन को ‘ओसामा जी’
  • हाफिज सईद को ‘हाफिज साहब’
    कह चुके हैं।

त्रिवेदी ने कहा,

“इन नेताओं को कांवड़ यात्रा में ही सांप्रदायिकता नजर आती है।”


एसटी हसन ने उत्तराखंड सरकार पर भी साधा निशाना

हसन ने कहा कि सरकार आंख मूंदे बैठी है और धार्मिक पहचान पूछे जाने जैसी घटनाओं पर मूक समर्थन दे रही है। उन्होंने इसे धर्मनिरपेक्षता पर आघात बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की।


राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान भाजपा और हिंदू संगठनों द्वारा इसे “आस्था का पर्व” बताया जाता है, जबकि विपक्षी दल इसे “राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण का साधन” मानते हैं। इस बार भी सावन शुरू होने से पहले ही बयानबाज़ी तेज हो गई है


🧭 निष्कर्ष:

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच कांवड़ यात्रा में शामिल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा को आस्था और भक्ति की अभिव्यक्ति मानते हैं। लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से यह यात्रा बार-बार धार्मिक पहचान, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर बहस का केंद्र बन जाती है।

नाबालिगों में विवाह की बढ़ती प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से दो हफ्ते में जागरूकता योजना मांगी

0

नाबालिगों में विवाह की बढ़ती प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से दो हफ्ते में जागरूकता योजना मांगी

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किशोरावस्था में विवाह करने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने इस प्रवृत्ति को “चिंताजनक सामाजिक संकेत” बताते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर इस विषय पर व्यापक जन-जागरूकता योजना तैयार कर प्रस्तुत की जाए।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें 19 वर्षीय युवक ने अपनी उम्र की युवती से विवाह कर, युवती के परिजनों से सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।


हाईकोर्ट की चिंता:

  • बड़ी संख्या में नाबालिग युवक-युवतियां विवाह कर रहे हैं।
  • ऐसे जोड़े कोर्ट में जाकर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
  • कई मामलों में लड़कियां नाबालिग पाई गईं, और लड़कों पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।
  • परिणामस्वरूप पति जेल चला गया, लड़की अकेली, बच्चा निराश्रित हो गया।

वन विभाग का “महंगा पौधा”, एक पौधे पर खर्च हुए ₹4,608!

0

वन विभाग का “महंगा पौधा”, एक पौधे पर खर्च हुए ₹4,608!

हल्द्वानी। उत्तराखंड के वन विभाग की एक हालिया रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। बरेली रोड (हल्द्वानी) पर महज 1,060 पौधे लगाने में विभाग ने ₹48.85 लाख खर्च दिखाए हैं। यानी एक पौधे पर ₹4,608 का खर्च!

इस खुलासे के बाद वन विभाग सवालों के घेरे में आ गया है।

हाईकोर्ट में दायर शपथपत्र से हुआ खुलासा

यह आंकड़ा जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान वन विभाग द्वारा हाईकोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र में सामने आया। याचिकाकर्ता हिशांत आही ने याचिका में दावा किया था कि वर्ष 2024 में सड़क चौड़ीकरण के चलते जो पेड़ काटे गए थे, उनके बदले अभी तक क्षतिपूरक वनीकरण नहीं हुआ

इस पर हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में निर्देश दिए कि तुरंत वनीकरण किया जाए। जवाब में विभाग ने दावा किया कि उन्होंने 8,301 मीटर लंबाई में पौधारोपण कर दिया है।

ट्री गार्ड का हवाला देकर बचाव में आया विभाग

डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी के मुताबिक, कुल खर्च में ट्री गार्ड (लोहे की जाल) लगाने का खर्च शामिल है। यही वजह है कि प्रति पौधे की लागत ज्यादा आई।

पौधारोपण पूरी तरह से मानकों के अनुसार किया गया है। ट्री गार्ड की वजह से लागत बढ़ी है।
उमेश चंद्र तिवारी, डीएफओ तराई केंद्रीय वन प्रभाग

महकमे में गुटबाजी और अफसरों का VRS

जानकारी के मुताबिक, वन विभाग लंबे समय से अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी से जूझ रहा है। हाल ही में एक अफसर के VRS लेने के पीछे भी गुटबाजी को ही कारण माना गया।


प्रमुख सवाल उठते हैं:

  • क्या वाकई पौधारोपण में इतना खर्च जायज़ है?
  • क्या ट्री गार्ड की खरीद प्रक्रिया पारदर्शी थी?
  • क्या विभाग की ओर से कार्य में गड़बड़ी की जांच होगी?