केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की मंजूरी हेली सेवाओं पर असर

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केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की मंजूरी

मोदी सरकार ने केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं से यात्रा के समय में महत्वपूर्ण कमी आएगी और यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाएगा।

केदारनाथ रोपवे परियोजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम की पर्वतमाला परियोजना के तहत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किमी लंबी रोपवे परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में केदारनाथ यात्रा में 8-9 घंटे का समय लगता है, लेकिन रोपवे बनने के बाद यह समय घटकर 36 मिनट रह जाएगा। इस रोपवे में 36 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे या केबिल कार परियोजना का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को सौंपा गया है। एजेंसी इस परियोजना की Detailed Project Report (DPR) तैयार कर रही है।

सुरक्षित यात्रा के लिए महत्वपूर्ण कदम

केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए दो ही विकल्प थे। पहला पैदल यात्रा, जो बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए कठिन है, और दूसरा रोपवे या केबिल कार, जो सभी के लिए यात्रा को सुगम बनाएगा। रोपवे बनने से केदारनाथ यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो शारीरिक रूप से कठिनाइयों का सामना करते हैं।

हेली सेवाओं पर असर

केदारनाथ में स्थितियां कठिन होने के कारण हेली सेवाओं का संचालन जोखिमपूर्ण माना जाता है। रोपवे बनने के बाद हेली सेवाओं का क्रेज कम हो जाएगा, क्योंकि रोपवे यात्रा अधिक सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक होगी। इससे राज्य में हेली सेवाएं सीमित हो जाएंगी, और यात्री अधिकतर रोपवे या केबिल कार का चयन करेंगे।

यह परियोजना उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।