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6 जून 2025 को निर्जला एकादशी: व्रत, राशि परिवर्तन और लक्ष्मी योग का दुर्लभ संयोग

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6 जून 2025 को निर्जला एकादशी: व्रत, राशि परिवर्तन और लक्ष्मी योग का दुर्लभ संयोग

देहरादून। वर्ष 2025 में निर्जला एकादशी का पर्व 6 जून को मनाया जाएगा। यह व्रत सभी 24 एकादशियों में सबसे बड़ा और पुण्यदायी माना जाता है। इस बार की निर्जला एकादशी विशेष ज्योतिषीय और धार्मिक संयोगों के कारण और भी अधिक फलदायक मानी जा रही है।

इस दिन ग्रहों के राजकुमार बुध भी राशि परिवर्तन कर रहे हैं। वे 6 जून को अपनी स्वराशि मिथुन में गोचर करेंगे। इसके अतिरिक्त, यह तिथि शुक्रवार को पड़ रही है, जो मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। ऐसे में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और ग्रहों की अनुकूलता का त्रिवेणी संयोग इस दिन को विशेष बना रहा है।


निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत के भीम ने सभी एकादशी व्रत करने में असमर्थता जताई थी, तब ऋषि व्यास ने उन्हें सिर्फ एक व्रत — निर्जला एकादशी — करने का सुझाव दिया, जिसे करने से वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

इस दिन भक्त बिना जल ग्रहण किए उपवास करते हैं और पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा, ध्यान, मंत्र जाप, आरती, और चालीसा पाठ करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से विष्णु जी की आराधना करने से धन, समृद्धि, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


इस साल के विशेष संयोग

🔹 तिथि: शुक्रवार, 6 जून 2025
🔹 व्रत: निर्जला (भीमसेनी) एकादशी
🔹 ग्रह संयोग: बुध का मिथुन राशि में गोचर
🔹 वार योग: शुक्रवार (मां लक्ष्मी का दिन)


क्या करें इस दिन

  • उपवास रखें: यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो निर्जला व्रत करें (बिना जल के)।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें: पीले पुष्प, तुलसी, और पंचामृत से पूजन करें।
  • मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है।
  • दान करें: जल, फल, वस्त्र, छाता, पंखा और अनाज का दान विशेष पुण्य प्रदान करता है।
  • ध्यान और भजन-कीर्तन: पूरे दिन भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करें।

निष्कर्ष

इस वर्ष की निर्जला एकादशी व्रतधारियों और भक्तों के लिए एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ अवसर लेकर आई है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति, विशेष वार योग और देवी-देवताओं की कृपा एक साथ मिलकर इस दिन को आध्यात्मिक उत्थान और कर्म सुधार के लिए श्रेष्ठ बना रहे हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 6 जून को करेंगे किसानों से ‘खाट पर संवाद’, डोईवाला के पाववाला सौड़ा गांव में लगेगी चौपाल

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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 6 जून को करेंगे किसानों से ‘खाट पर संवाद’, डोईवाला के पाववाला सौड़ा गांव में लगेगी चौपाल

देहरादून, 5 जून। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 6 जून को एक दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंचेंगे। इस दौरान वे जनपद देहरादून के डोईवाला विकासखंड के पाववाला सौड़ा गांव में आयोजित एक विशेष किसान चौपाल में भाग लेंगे। इस चौपाल की खास बात यह होगी कि केंद्रीय मंत्री पारंपरिक तरीके से खाट पर बैठकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

यह जानकारी उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दी। उन्होंने बताया कि इस चौपाल का उद्देश्य किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं, अनुभव और सुझाव जानना है ताकि नीतियों को जमीनी हकीकत से जोड़ा जा सके।

कृषि संकल्प अभियान के तहत होगा संवाद

किसान चौपाल के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री दोपहर को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहीं, शाम 3 बजे, देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में “विकसित भारत संकल्प यात्रा – कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत किसानों को संबोधित करेंगे।

तैयारियां जोरों पर

प्रदेश कृषि मंत्री गणेश जोशी ने इस महत्वपूर्ण दौरे के मद्देनज़र अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी तैयारियां समयबद्ध और व्यवस्थित ढंग से पूरी की जाएं। उन्होंने इसे किसानों के साथ संवाद और कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है।

गुरुवार को कृषि मंत्री के जनसंपर्क अधिकारी मनोज जोशी और कृषि एवं उद्यान विभाग की टीम ने कार्यक्रम स्थल का दौरा कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया।

यह दौरा केवल एक राजनीतिक या प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र की नब्ज टटोलने और किसानों की बात उनके अंदाज़ में समझने का प्रयास है।

वंशिका की गुगली पर कुलदीप यादव बोल्ड

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कुलदीप यादव ने की बचपन की दोस्त वंशिका से सगाई, रिंकू सिंह और सांसद प्रिया सरोज भी पहुंचे बधाई देने

लखनऊ। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव ने बुधवार को लखनऊ के एक होटल में अपनी बचपन की मित्र वंशिका चड्ढा से सगाई कर ली। यह समारोह बेहद सादगीपूर्ण और निजी रखा गया, जिसमें परिवारजनों और कुछ करीबी मित्रों को ही आमंत्रित किया गया था।

इस खास मौके पर टीम इंडिया के बल्लेबाज और ‘सिक्सर किंग’ के नाम से मशहूर रिंकू सिंह, अपनी मंगेतर और मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज के साथ पहुंचे और नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं। रिंकू सिंह और प्रिया सरोज खुद भी आगामी 8 जून को लखनऊ के एक होटल में सगाई करने जा रहे हैं।

इंग्लैंड दौरे से पहले निजी जीवन में नई शुरुआत

कुलदीप यादव आईपीएल 2025 में शानदार प्रदर्शन के बाद अब इंग्लैंड दौरे के लिए तैयार हैं। सगाई समारोह के अगले ही दिन, यानी 5 जून की सुबह, वे इंग्लैंड रवाना हो गए। वहां 20 जून से टेस्ट सीरीज़ की शुरुआत होगी, जिसमें उनका पहला मुकाबला है।

वंशिका ऑस्ट्रेलिया में करती हैं जॉब

लखनऊ के लालबंगला क्षेत्र की रहने वाली वंशिका चड्ढा के पिता योगेंद्र सिंह एलआईसी में कार्यरत हैं, जबकि वंशिका वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं। दोनों की शादी जून में प्रस्तावित थी, लेकिन कुलदीप के इंग्लैंड दौरे के चलते इसे फिलहाल टाल दिया गया है। अब विवाह समारोह बाद में आयोजित किया जाएगा।

कोच और यूपीसीए ने दी बधाई

सगाई समारोह में कुलदीप के कोच कपिल पांडे सहित कुछ विशेष मित्र शामिल हुए। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) के अधिकारियों ने उन्हें फोन पर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस सगाई के साथ कुलदीप ने मैदान के बाहर भी जीवन की एक नई पारी की शुरुआत की है।

बेरोजगारी ने बढ़ाई पहाड़ों में कुंवारों की तादाद, युवा 30 पार शादी का इंतजार

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Uttarakhand youth 30 years but not married

रानीखेत/अल्मोड़ा – उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में एक नई सामाजिक चुनौती उभर कर सामने आ रही है। यह चुनौती न केवल परिवारों की चिंता का कारण बन रही है, बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन को भी प्रभावित कर रही है। बेरोजगारी और निजी क्षेत्र की अस्थिर नौकरियों के कारण पहाड़ों के कई युवा 30 की उम्र पार करने के बावजूद अब तक अविवाहित हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका के सीमित साधनों के चलते अब विवाह भी एक संघर्ष का विषय बन गया है। पहले फौज में भर्ती को एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता था, लेकिन अग्निवीर योजना लागू होने के बाद उस ओर भी युवाओं का रुझान घटा है। अब युवाओं को शहरों की ओर रुख करना पड़ता है, जहां अस्थायी या कम वेतन वाली नौकरियां शादी के बाद की ज़िम्मेदारियों को निभाने में पर्याप्त नहीं होतीं।

समाज की बदलती सोच बन रही एक और वजह

विवाह के लिए अब गांवों में रहने वाले, खेती-किसानी या छोटे व्यवसाय करने वाले युवाओं को कमतर आंका जा रहा है। लड़कियों और उनके परिजनों की प्राथमिकता अब सरकारी नौकरी, अच्छा वेतन पैकेज और शहरी जीवनशैली है। यहां तक कि मेहनती और स्वावलंबी युवक भी केवल इस वजह से अस्वीकृत हो रहे हैं कि वे शहर में नहीं रहते।

इस सामाजिक असंतुलन का असर मानसिक तौर पर युवाओं पर दिखने लगा है — कई युवा अकेलेपन, तनाव और डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं।


जमीनी हकीकत: पहाड़ के पांच कुंवारे युवाओं की कहानी

नवीन सिंह (32), रानीखेत
“बीए के बाद गांव में खेती और फल उत्पादन करता हूं। जब रिश्ता आता है तो लोग पूछते हैं नौकरी कहां है, पैकेज कितना है। क्या अब मेहनत और ईमानदारी का कोई मोल नहीं?”

सुनील नेगी (32), हल्द्वानी/गांव वापसी
“मां की तबीयत खराब हुई तो नौकरी छोड़ गांव लौट आया। अब शादी की बात होती है तो लोग कहते हैं, गांव में रहकर क्या करोगे?”

दीपक टम्टा (34), भिकियासैंण
“हर बार रिश्ता कहीं न कहीं अटक जाता है। नौकरी पक्की नहीं है। कई बार सोचता हूं अब अकेले ही सही।”

नरेंद्र सिंह रावत (33), चौखुटिया
“आईटीआई की है, बिजली का छोटा ठेका चलाता हूं। स्किल और सम्मान दोनों है गांव में, पर रिश्ता होते ही पहला सवाल होता है – शहर में रहते हो?”

अजय बोरा (31), द्वाराहाट
“पोस्ट ग्रेजुएशन किया, बैंक की परीक्षा दी – चयन नहीं हुआ। अब बागवानी और डेयरी कर रहा हूं। दो लड़ाइयाँ लड़ रहा हूं – समाज से और खुद से।”


समाज की सोच बदलने की जरूरत

पारस उपाध्याय, चिलियानौला
“अब तो रिश्ता भी प्रतियोगिता बन गया है। शहर की लड़कियां हमारी ज़िंदगी नहीं समझ पातीं। अगर हमें जैसे हैं वैसे ही स्वीकारा जाए, तो रिश्ते ज्यादा मजबूत बन सकते हैं।”

दिनेश चंद्र, मजखाली
“यह सामाजिक परिवर्तन है जिसे समझदारी से संभालना होगा। सिर्फ युवाओं को नहीं, पूरे समाज की सोच को बदलने की ज़रूरत है।”

उमाशंकर पंत, पुजारी – नीलकंठ महादेव मंदिर, रानीखेत
“पहले गुण, संस्कार और परिवार देखे जाते थे। अब नौकरी और पैसा ही सब कुछ है। यह बदलाव समाज को खोखला कर रहा है।”

निष्कर्ष

पहाड़ों में शादी अब एक पारिवारिक नहीं, सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बन गया है। युवाओं को मौके देने के साथ-साथ समाज को भी अपनी सोच में लचीलापन लाना होगा। वरना यह “कुंवारों की फौज” सिर्फ आंकड़ों की नहीं, एक बड़ी सामाजिक चिंता की शक्ल ले लेगी।

श्री गुरु राम राय दरबार साहिब के विरुद्ध आपत्तिजनक पोस्ट का मामला, अमन स्वेडिया के खिलाफ शिकायत दर्ज

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श्री गुरु राम राय दरबार साहिब के विरुद्ध आपत्तिजनक पोस्ट का मामला, अमन स्वेडिया के खिलाफ शिकायत दर्ज

देहरादून – श्री गुरु राम राय दरबार साहिब, झंडा साहिब देहरादून के विरुद्ध सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के मामले में अमन स्वेडिया नामक व्यक्ति के खिलाफ शहर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। दरबार प्रशासन ने इसे धार्मिक भावनाएं भड़काने, मानहानि करने और सार्वजनिक अशांति फैलाने की साजिश बताया है, और दोषी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दरबार के मुख्य व्यवस्थापक विजय गुलाटी की ओर से दी गई लिखित शिकायत में कहा गया है कि अमन स्वेडिया ने 29 अप्रैल से 2 मई के बीच अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से दरबार साहिब, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल और श्री महंत देवेंद्र दास के खिलाफ कई आपत्तिजनक, भ्रामक और अपमानजनक वीडियो व पोस्ट साझा किए।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अमन स्वेडिया ने दरबार से जुड़े हनुमान अखाड़ा और हनुमान मंदिर को तोड़ने का झूठा आरोप लगाकर धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होंने संस्था को ‘धर्म व्यापार’ कहकर समाज में भ्रम फैलाने और लोगों को भड़काने का प्रयास किया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्होंने दरबार प्रशासन पर रामलीला स्थलों को हटवाने का झूठा आरोप लगाया है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और दरबार प्रशासन ने ऐसे कृत्यों को सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया है।इसके अतिरिक्त, स्वेडिया ने फेसबुक पर सरकार से दरबार से जुड़े वित्तीय मामलों की ईडी और सीबीआइ जांच की मांग की और इंदिरेश हास्पिटल पर गुंडागर्दी के आरोप लगाए। दो मई को साझा एक वीडियो में उन्होंने दरबार संगत को गुंडे और खालिस्तानी तक कह डाला, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया है।दरबार साहिब प्रशासन ने अमन स्वेडिया के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शहर कोतवाल प्रदीप पंत ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में व्यय-वित्त समिति की बैठक, दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति

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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में व्यय-वित्त समिति की बैठक, दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति Expenditure-Finance Committee meeting chaired by Chief Secretary, two important projects approved

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दो प्रमुख विकास योजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई — ऋषिकेश में जानकी सेतु के निकट राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर के निर्माण और डोईवाला-दूधली मोटर मार्ग को डबल लेन में विस्तारित करने की परियोजना।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर का डिज़ाइन पर्वतीय संस्कृति को दर्शाने वाला हो तथा ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन करे। उन्होंने यह भी कहा कि यह केंद्र आत्मनिर्भर (सेल्फ-सस्टेनेबल) होना चाहिए, जिससे संचालन व रखरखाव के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन स्वयं जुटाए जा सकें।

बैठक में बताया गया कि राफ्टिंग मैनेजमेंट सेंटर की अनुमानित लागत ₹4404.27 लाख है। निर्माण पूर्ण होने के बाद, यह केंद्र ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से राफ्टिंग पॉइंट्स की लाइव निगरानी, परमिट जारी करने, समय-सारिणी प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसे कार्यों में सहायता करेगा।

इसके अतिरिक्त, समिति ने ₹1306.64 लाख की लागत से डोईवाला-दूधली मोटर मार्ग को डबल लेन में बदलने की परियोजना को भी स्वीकृति दी।बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को गंगा दशहरा की दी शुभकामनाएं

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को गंगा दशहरा की दी शुभकामनाएं गंगा और जल स्रोतों की पवित्रता बनाए रखने का दिया संदेश Chief Minister Pushkar Singh Dhami extended his greetings to the people of the state on the occasion of Ganga Dussehra.

देहरादून, 4 जून 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस पावन दिन पर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार सहित प्रदेश के विभिन्न घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं का भी स्वागत करते हुए उन्हें पर्व की बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि:

“जीवनदायिनी मां गंगा का हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, पहचान और जीवन का आधार है। बिना गंगा और अन्य नदियों के लोक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।”

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि गंगा सहित सभी पवित्र नदियों और जल स्रोतों की पवित्रता एवं स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व का प्रतीक है, और हमें अपने पर्यावरण, जल संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति सजग और जिम्मेदार बनना चाहिए।

आपदा प्रबंधन की तैयारी तेज़: जिलाधिकारी सविन बंसल ने परिचालन केंद्र का निरीक्षण कर दिए कई निर्देश

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आपदा प्रबंधन की तैयारी तेज़: जिलाधिकारी सविन बंसल ने परिचालन केंद्र का निरीक्षण कर दिए कई निर्देश Disaster management preparations intensified: District Magistrate Savin Bansal inspected the operations center and gave several directives.

देहरादून, 4 जून 2025 (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग): मानसून को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने आपदा परिचालन केंद्र का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन को मजबूत, त्वरित और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

डिजिटल कंट्रोल रूम और जीआईएस मैपिंग पर जोर

डीएम ने निर्देश दिए कि जल्द ही कंट्रोल रूम को डिजिटल प्लेटफॉर्म में परिवर्तित किया जाए। दीवारों पर जिले के तहसील, थाना, अस्पताल और प्रमुख सेवाओं के GIS मानचित्र लगाए जाएं। इसके साथ ही GIS टीम को कंट्रोल रूम में स्थायी रूप से तैनात किया जाएगा।

तत्काल रिस्पॉन्स के लिए विभागीय अधिकारियों की शिफ्ट ड्यूटी

डीएम ने मानसून सीजन में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया कि लोनिवि, एनएच, जल संस्थान, यूपीसीएल और पेयजल विभाग के जूनियर इंजीनियर प्रतिदिन दो शिफ्टों (सुबह और शाम) में कंट्रोल रूम में उपस्थित रहें और शिकायतों का उसी दिन निस्तारण सुनिश्चित करें।

पुलिस वायरलेस और सायरन सिस्टम का होगा विस्तार

आपदा कंट्रोल रूम के वायरलेस सेट पर पुलिस की ड्यूटी लगाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, राज्य में पहली बार थानों और तहसीलों में उच्च गुणवत्ता के आपातकालीन सायरन लगाने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी की तैनाती

जिलाधिकारी ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को निर्देश दिए कि मसूरी, चकराता, त्यूणी, डोईवाला व अन्य संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन की संभावना वाले स्थानों पर जेसीबी मशीनें तैनात की जाएं। उनके चालकों और संबंधित इंजीनियरों के मोबाइल नंबरों को कंट्रोल रूम की दीवार पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।

125 में से 122 शिकायतें निस्तारित

अब तक मानसून से जुड़ी कुल 125 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 122 का समाधान किया जा चुका है। शेष मामलों की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।

आपदा कंट्रोल रूम को ए-क्लास बनाए जाने के निर्देश

डीएम ने कहा कि राजधानी देहरादून का कंट्रोल रूम “ए-क्लास संसाधन एवं प्रतिक्रिया युक्त” होना चाहिए। इसके अंतर्गत रियल टाइम डिस्प्ले स्क्रीन, रेपिड वायरलेस कम्युनिकेशन और सुसज्जित सूचना तंत्र विकसित किया जाएगा।

रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति का आदेश

डीएम ने आपदा प्राधिकरण की सभी रिक्तियों को शीघ्र भरने के आदेश दिए। साथ ही, जो उपकरण खराब हो चुके हैं, उन्हें निष्प्रोज्य घोषित करने और आवश्यक मानव संसाधन हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए।

जनसंपर्क और शिकायत निवारण में पारदर्शिता

कंट्रोल रूम की सभी लैंडलाइन और मोबाइल नंबरों को दीवारों पर चस्पा करने और आपदा प्रबंधन के लेटरहेड पर प्रकाशित करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि आमजन को सूचनाएं सरलता से उपलब्ध हो सकें।

आपदा सूचना और शिकायत हेतु संपर्क करें:

📞 0135-2726066, 0135-2626066, 0135-2626067, 0135-2626068

जिलाधिकारी सविन बंसल के इन निर्देशों के साथ देहरादून ज़िला प्रशासन ने आपदा से निपटने की अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया है, जो राज्य के लिए मॉडल आपदा प्रबंधन प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्तराखंड को डिजिटल टैलेंट और एआई कौशल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति में हुए तीन ऐतिहासिक समझौते

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उत्तराखंड को डिजिटल टैलेंट और एआई कौशल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति में हुए तीन ऐतिहासिक समझौते

देहरादून, 4 जून 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को सचिवालय में उत्तराखंड के सामाजिक और तकनीकी विकास से जुड़े तीन महत्वपूर्ण समझौते किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य राज्य को डिजिटल टैलेंट का केंद्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षा प्रणाली और समग्र सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है।

सामाजिक विकास के लिए उत्तराखंड सरकार और टाटा ट्रस्ट में समझौता

उत्तराखंड सरकार और टाटा ट्रस्ट के बीच 10 वर्षों के लिए हुए समझौते के तहत राज्य में जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य किया जाएगा।

तकनीकी कौशल विकास हेतु नैस्कॉम और उच्च शिक्षा विभाग में त्रिपक्षीय समझौता

सेतु आयोग, उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग और नैस्कॉम/आईटी-आईटीईएस सेक्टर स्किल काउंसिल के बीच हुए समझौते के तहत उत्तराखंड को तकनीकी स्किल हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • सभी शासकीय व निजी महाविद्यालयों में AI, Data Science, Cyber Security, Python जैसे पाठ्यक्रमों को शैक्षणिक क्रेडिट के साथ लागू किया जाएगा।
  • प्रत्येक ज़िले में एक मॉडल कॉलेज को मेंटर संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • योजना से 1.5 लाख छात्र लाभान्वित होंगे।

AI-आधारित व्यक्तित्व विकास के लिए वाधवानी फाउंडेशन से समझौता

सेतु आयोग, उच्च शिक्षा विभाग और वाधवानी फाउंडेशन के बीच हुए तीन वर्षीय समझौते के तहत

  • 1.20 लाख छात्रों को AI-आधारित व्यक्तित्व विकास और स्वरोजगार केंद्रित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • कोर्सेस को अगले शैक्षणिक सत्र से शैक्षणिक क्रेडिट के साथ लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री का संबोधन:

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तीनों समझौतों को “राज्य के युवाओं, छात्रों और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के जीवन को बदलने वाला कदम” बताया। उन्होंने कहा:

“उत्तराखंड को हर क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। ये समझौते हमें 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे और आधुनिक भारत के निर्माण में उत्तराखंड को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करेंगे।”

उन्होंने टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए, इन समझौतों को AI, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप बताया।

कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति: कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, टाटा ट्रस्ट के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा, नैस्कॉम की सीईओ अभिलाषा गौड़, वाधवानी फाउंडेशन के ईवीपी सुनील दहिया, उच्च शिक्षा सचिव रंजीत सिन्हा, सचिव राधिका झा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यह पहल उत्तराखंड को सामाजिक समावेशन, तकनीकी दक्षता और AI आधारित शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का आह्वान — “संवेदनशील बनें, संकल्पबद्ध होकर करें पर्यावरण संरक्षण”

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world environment day विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का आह्वान — “संवेदनशील बनें, संकल्पबद्ध होकर करें पर्यावरण संरक्षण”

देहरादून, 5 जून:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, और इसके संरक्षण में उत्तराखंडवासियों की भूमिका सदैव अग्रणी रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “हरेला” जैसे पर्व इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से जुड़ने की जो परंपरा बनाई, वह आज भी उत्तराखंड की संस्कृति में जीवित है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सामूहिक प्रयासों की जरूरत

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए जन प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और ग्रामीण समुदायों से जुड़ने की अपील की।

“हमें मिलकर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा, नदियों और जलस्रोतों की स्वच्छता को सुनिश्चित करना होगा, और प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ जन जागरूकता बढ़ानी होगी,” — मुख्यमंत्री धामी

“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को विशेष रूप से सफल बनाने की अपील करते हुए इसे प्रकृति और भावना से जोड़ने वाली पहल बताया। साथ ही उन्होंने प्रदेशभर में चल रहे स्वच्छता और पौधारोपण अभियानों में सक्रिय भागीदारी का अनुरोध किया।

ग्लोबल वार्मिंग और जल-जंगल-जमीन पर समेकित चिंतन का आह्वान

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण में हो रहे तेजी से बदलावों, ग्लोबल वार्मिंग, और प्राकृतिक संसाधनों के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम जल, जंगल और जमीन से जुड़ी समस्याओं पर समेकित और दीर्घकालिक नीति आधारित चिंतन करें।

“सामाजिक चेतना और सामूहिक प्रयासों से ही हम पर्यावरणीय संकट का समाधान खोज सकते हैं,” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी


मुख्यमंत्री का यह संदेश न केवल पर्यावरण के प्रति उत्तराखंड सरकार की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि जनभागीदारी और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर चलने वाली सतत विकास की सोच को भी उजागर करता है।