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जहरीली हुई दिल्ली-एनसीआर की हवा तो पैक हुये पहाड़, नैनीताल में उमड़ी पर्यटकों की भीड़

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इन दिनों दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा हुआ है. जिसका असर नैनीताल के पर्यटन पर भी पड़ा है.

नैनीताल: दीपावली वीकेंड पर सरोवर नगरी नैनीताल में पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों से पर्यटक नैनीताल का रुख कर रहे हैं. महानगरों में प्रदूषण और बढ़े AQI से स्तर से राहत पाने के लिए लोग नैनीताल की ओर रुख कर रहे हैं.

नैनीताल में फिलहाल मौसम बेहद साफ, खुशनुमा और प्रदूषण रहित है. इन दिनों दिल्ली की हवा दिन प्रतिदिन प्रदूषित होती जा रही है. दिल्ली की हवा का AQI लेवल बढ़ता जा रहा है. आलम ये है कि दिल्ली के कुछ इलाकों में AQI लेवल 600 तक पहुंच चुका है. ऐसे मैं दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है. इसका कारण दिवाली के दौरान हुआ प्रदूषण है. दिल्ली के प्रदूषण से निजात पाने के लिए काफी संख्या में पर्यटक नैनीताल पहुंच रहे हैं.

नैनीताल में अप्रैल माह में हुई नाबालिग से दुष्कर्म की घटना के बाद से पर्यटन सीजन बेहद कम था, लेकिन अब दीपावली के बाद पर्यटकों से इन दिनों सरोवर नगरी गुलज़ार होने लगी. दिल्ली से नैनीताल घूमने पहुंची पर्यटक प्रियांशी अग्रवाल ने बताया दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण का कहर है. पूरी दिल्ली में धुंध छाई हुई है. सांस लेने में तक लोगों को तकलीफ हो रही है. दिल्ली की हवा का AQI लेवल बढ़ा हुआ है. जिस वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया पहाड़ों में इन दिनों ठंड है. नैनीताल में मौसम खुशनुमा बना हुआ है.

दिल्ली से नैनीताल पहुंचे पर्यटक शिवांग ने बताया दिल्ली में स्थिति बेहद खराब है. यही वजह है कि वो कुछ दिन नैनीताल घूमने आ गए हैं. यहां के प्राकृतिक नजारे, शुद्ध वातावरण उन्हें बेहद पसंद है. हालांकि पहाड़ों में ठंड बढ़ चुकी है, लेकिन नैनीताल में उन्हें काफी अच्छा लग रहा है.

नैनीताल होटल एसोसिएशन के सचिव वेद शाह बताते हैं कि इन दिनों दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा हुआ है. जिसका असर नैनीताल के पर्यटन पर भी पड़ा है. जिस वजह से नैनीताल आने वाले दिल्ली-NCR के पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है. उन्होंने बताया कि बीते अप्रैल माह से नैनीताल में पर्यटकों की संख्या बेहद कम थी अब धीरे-धीरे पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है. आगे और अच्छा काम होने की उम्मीद है.

केदारनाथ कपाटबंदी के साक्षी बने सीएम धामी, गौरीकुंड गौरामाई को लेकर भी आया अपडेट, पढ़िये पूरी खबर

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सुबह 8 बजे पुजारी एवं ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पौराणिक रीति रिवाज के साथ मां गौरा माई के कपाट बंद कर दिए हैं.

रुद्रप्रयाग: भैया दूज के पावन मौके पर आज केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिये गये हैं. केदारनाथ कपाट बंद होने के मौके पर सीएम धामी भी धाम पहुंचे. सीएम धामी कपाट बंद होने से पूर्व बाबा केदार की पूजा-अर्चना में शामिल हुये.

इसके बाद सुबह 8.30 बजे शीतकाल के लिए बाबा केदार के कपाट बंद कर दिये गये हैं. केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओम्कारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो गई है.

वहीं, केदारनाथ यात्रा का प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड स्थित मां गौरा माई के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. कपाट बंद करने को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति एवं हक हकूकधारियों की ओर से तैयारियां की गई थी.

भैयादूज के अवसर पर शीतकाल के लिए गौरीकुंड स्थित गौरामाई के कपाट बंद कर दिए गए हैं. वीरवार सुबह 8 बजे पुजारी एवं ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पौराणिक रीति रिवाज के साथ भक्तों की उपस्थिति में मां गौरा माई के कपाट बंद कर दिए. मां की डोली ने मंदिर की एक परिक्रमा करने के बाद गौरी गांव के लिए रवाना हुई. अब शीतकाल के छह माह तक गौरी गांव में मां गौरामाई की पूजा अर्चना संपन्न की जाएगी.

मान्यता है कि कैलाश से भगवान शिव की उत्सव डोली गौरीकुंड पहुंचने से पहले गौरामाई की डोली गर्भगृह से बाहर निकालकर अपने शीतकालीन गद्दीस्थल को रवाना हो जाती है. जिससे बाबा केदार व गौरामाई का मिलन नहीं हो पाता है. यहां पर भगवान शिव ने पार्वती के अंग निर्मित पुत्र गणेश से युद्धकर उसके सिर काटने से गौरामाई नाराज हुई थी.

व्यापार संघ अध्यक्ष गौरीकुण्ड राम गोस्वामी ने बताया ठीक 8 बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. अब शीतकाल के छह माह तक मां गौरा की पूजा गौरी गांव में संपन्न की जाएगी. उन्होंने बताया यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है. जब बाबा केदार के कपाट बंद होते हैं तो डोली के गौरीकुंड पहुंचने से पहले ही मां गौरा माई के कपाट बंद कर डोली गौरी गांव के लिए रवाना हो जाती है.

भैयादूज से पहले बुझे घरों का चिराग, ऋषिकेश में बड़ा सड़क हादसा, तीन युवकों की मौत

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भाई दूज से पहले इन तीन युवकों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है.

ऋषिकेश: देर रात ऋषिकेश में बड़ा सड़क हादसा हुआ है. यहां शादी समारोह से लौट रहे युवकों की गाड़ी खाई में गिर गई. इस हादसे में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई है. इस घटना में वाहन सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हुए हैं. जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भर्ती कराया गया है. हादसा गूलर पावकी देवी मार्ग पर देर रात हुआ है. घायलों की पहचान निखिल रमोला और तनुज पुंडीर निवासी श्यामपुर के रूप में हुई है. मृतकों की पहचान विमल कंडियाल, राहुल कलूड़ा और आशीष कलूड़ा निवासी श्यामपुर के रूप में हुई है.

एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कविंद्र सजवाण ने बताया कड़ी मशक्कत के बाद उनकी टीम ने खाई में उतरकर घायलों को बाहर निकाला है. मृतकों के शव निकालकर पुलिस के हवाले किए हैं. मुनिकीरेती थाना पुलिस पंचायतनामा और पोस्टमार्टम करने की कार्रवाई कर रही है. घटना के बाद जहां शादी समारोह की खुशियों ने खलल पड़ा, वहीं मृतकों के घर कोहराम मच गया है.भाई दूज से पहले इन तीन युवकों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है.

जानकारी के मुताबिक घायल और मृतक देर रात अपने वाहन से शादी समारोह में शामिल होने के लिए घर से निकले. मुनिकीरेती थाना क्षेत्र अंतर्गत गूलर पावकी देवी मार्ग पर वाहन अचानक अनियंत्रित हुआ और खाई में गिर गया. लोगों की सूचना पुलिस के पास पहुंची. पुलिस ने रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया. पुलिस घटना की जांच में जुट गई है.

सड़क दुर्घटनाओं से ऐसे बचें

  • कार या दोपहिया वाहन से यात्रा कर रहे है तो अपनी गाड़ी की गति हमेशा नियंत्रित रखें. ताकि यदि अचानक से कोई वाहन या जानवर सामने से आ जाए तो आप हादसे से बच सके.
  • तकरीबन 60% हादसे नींद की वजह से होते है. यदि आप रात में सफर तय कर रहे है तो अपने ड्राइवर से बातें करते रहे, ताकि ना तो उसे नींद लगे और आप सड़क हादसों से भी बचे रहे.
  • वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें. करीब 20 प्रतिशत हादसे वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने या किसी को मैसेज भेजने की वजह से होते हैं.
  • शराब पीकर या नशा करने के बाद तो वाहन बिल्कुल न चलाए.
  • हमेशा यू-टर्न या मोड़ पर गाड़ी बहुत संभाल कर निकाले.
  • रात के समय डिपर का प्रयोग अवश्य करें.
  • ओवरटेक हमेशा सीधी साइड से ही करें.
  • ट्रक और ओवरलोडेड वाहनों के पास से गुजरते समय पास और हॉर्न का उचित उपयोग करें.
  • भीड़ वाले रास्तों पर अपने वाहन की गति हमेशा धीमी ही रखें, क्योंकि दुर्घटना से देर भली.
  • ट्रैफिक नियमों को अनदेखा न करें, ये हमारी सुरक्षा के लिए ही बनाए गए हैं. ट्रैफिक नियमों का पालन अवश्य करें.

केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, ऊखीमठ में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का सागर

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केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, ऊखीमठ में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का सागर

रुद्रप्रयाग — भगवान भोलेनाथ के दिव्य धाम श्री केदारनाथ के कपाट आज विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर सम्पूर्ण धाम में श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय कोंडे, बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल, तीर्थ पुरोहितगण और हजारों श्रद्धालु कपाट बंद होने की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के साक्षी बने।

वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई कपाट बंदी

सुबह चार बजे से ही केदारनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपाट बंद करने की प्रक्रिया आरंभ हुई। पूरे क्षेत्र में “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कपाट बंद होने के उपरांत बाबा केदारनाथ की डोली पारंपरिक विधि से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए रवाना हुई।

डोली यात्रा में उमंग और भक्ति का माहौल

डोली यात्रा के दौरान मार्ग के हर पड़ाव पर श्रद्धालु उमंग और भक्ति भाव से बाबा केदारनाथ के जयकारे लगाते नजर आए। डोली का पहला पड़ाव रामपुर में रहेगा, इसके बाद कल गुप्तकाशी पहुंचेगी।
25 अक्टूबर को यह पवित्र डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां अगले छह महीनों तक भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

ऊखीमठ में उत्सव का वातावरण

डोली के स्वागत को लेकर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विशेष तैयारियाँ की गई हैं। पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास से सराबोर है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु डोली के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

शीतकाल के लिए बंद हुये गंगोत्री धाम के कपाट, मुखबा के लिए रवाना हुई मा गंगा की डोली

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गंगोत्री धाम से मां गंगा की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रहेगी

उत्तरकाशी(उत्तराखंड): गंगोत्री धाम के कपाट छह माह शीतकाल के लिए अन्नकूट पर्व पर अभिजीत मूहूर्त में पूर्वाहन 11 बजकर 36 मिनिट पर विधिविधान के साथ बंद कर दिए गए हैं. सेना के बैंड एवं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों तथा गंगा मम्या की जय के उद्घोष के साथ गंगा जी की डोली यात्रा के साथ अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए रवाना हुई. इसके बाद अब मां गंगा की उत्सव डोली 6 महीने मुखबा गांव में प्रवास करेगी.

बुधवार सुबह से ही गंगोत्री धाम में अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था. तीर्थ पुरोहितों ने घाट पर गंगा जी का अभिषेक और आरती तथा मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की. हर्षिल से अर्मी सेना के जवानों ने यहां निशुल्क मेडिकल कैंप तथा लंगर लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा की.

यह मुहूर्त के अनुसार पूर्वाहन 11 बजकर 36 मिनट गंगोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. इसके साथ ही यहां से गंगा जी की भोग मूर्ति डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना हुई. इस दौरान पर शीतकाल में भी गंगोत्री धाम में ही साधनारत रहने वाले साधु संतो तथा मंदिर, आश्रम व होटलों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने गंगा जी को विदाई दी.

गंगोत्री धाम के तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया गंगोत्री धाम से मां गंगा की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रहेगी. यहा रातभर भजन कृतन का किया जाएगा. जिसके अगले दिन मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन के लिए मुखबा गांव में रहेगी. अब छाह माह के लिए मां गंगा के दर्शन मुखबा गांव में ही होगा. उन्होंने कहा इस बार हजारों श्रद्धालुओं के बीच गंगात्री धाम के कपाट बंद कर दिया है.

कपाट बंद होने के बाद भी जलता रहता है अखंड दीपक: गंगोत्री धाम के कपाट भले बंद हो जाएंगे, लेकिन यहां तांबे के एक बड़े दीपक में अखंड जोत जलती रहेगी. मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल बताते हैं कि मंदिर में ताबे का एक बहुत बड़ा दीपक बना हुआ है. उसमें तेल भरकर व अखंड जोत जलाकर जाते हैं, जब अगले वर्ष अक्षय तृतीय पर धाम के कपाट खुलेंगे तो वह अखंड जोत जलती हुई मिलती है. कपाट खुलने पर तीर्थयात्रियों को अखंड जोत के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है.

कहां है मुखबा: मुखबा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है. यह भागीरथी नदी के किनारे स्थित है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 8000 फीट है. उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से मुखबा की दूरी करीब 80 किलोमीटर है. चारों ओर से बर्फ की पहाड़ियों से घिरे मुखबा का सौंदर्य देखते ही बनता है.

चारधाम के कपाट बंद की तिथियां-

  • गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को सुबह 11:36 बजे बंद
  • केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे बंद किए जाएंगे.
  • यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन यानी 23 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे
  • बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे.

शिक्षकों के तबादलों पर अटका फैसला, शिक्षा विभाग को मिले तीन हजार से अधिक आवेदन

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बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों ने धारा 27 के तहत की तबादले की मांग, अनिवार्य तबादले न होने से नाराजगी बढ़ी

देहरादून। प्रदेश में शिक्षकों के तबादले को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। शिक्षा विभाग को धारा 27 के तहत अब तक तीन हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें बेसिक शिक्षा के करीब 1500 और माध्यमिक शिक्षा के लगभग 1800 शिक्षक शामिल हैं।

इस साल शिक्षा विभाग ने अनिवार्य तबादले लागू नहीं किए, जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अन्य विभागों में कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले किए गए, लेकिन शिक्षा विभाग में इस प्रक्रिया को टाल दिया गया।

शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि विभाग को भी अन्य विभागों की तरह अनिवार्य तबादले लागू करने चाहिए थे। हालांकि, शिक्षा विभाग ने इस बार धारा 27 के तहत ही तबादलों की प्रक्रिया शुरू की है और इसी आधार पर आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बेसिक शिक्षा में लगभग 1500 शिक्षकों ने आवेदन किया है, जबकि माध्यमिक शिक्षा में 800 प्रवक्ता और करीब एक हजार एलटी शिक्षक तबादले की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन आवेदनों पर विचार कर जल्द प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति करेगी सिफारिश

शिक्षकों के तबादलों पर अंतिम निर्णय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित है। यह समिति धारा 27 के तहत प्राप्त आवेदनों पर सिफारिश करती है, जिसके बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी से तबादले किए जाते हैं।

क्या है धारा 27

धारा 27, राज्य के तबादला एक्ट का वह प्रावधान है जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को तबादले का अवसर दिया जाता है। इसमें वे कर्मचारी शामिल होते हैं जो सामान्य श्रेणी के तबादले के पात्र नहीं हैं — जैसे गंभीर रूप से बीमार या अन्य विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारी।

शिक्षक संघ ने चेताया आंदोलन से

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा कि संगठन की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शिक्षकों के तबादले जल्द किए जाएं। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने कहा — “यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

दून अस्पताल के सामने फायरिंग करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, गोली लगने से युवक हुआ था घायल

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने युवक को मारी थी गोली, दो आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे, अब खाएंगे जेल की हवा

देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने फायरिंग की घटना को अंजाम देने वाले 2 आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है. कोतवाली नगर पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया है. इसके साथ ही फायरिंग की घटना में शामिल अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश जारी है.

क्या था मामला? बता दे कि बीती 19 अक्टूबर को सुबह करीब 3:30 बजे कोतवाली नगर पुलिस को एक सूचना मिली थी. जिसमें बताया गया कि दून अस्पताल के सामने फायरिंग की घटना हुई है. सूचना मिलते ही तत्काल कोतवाली नगर पुलिस मौके पर पहुंची. जहां उत्तरकाशी के पुरोला निवासी दीशांत राणा को गोली लगी थी. जिसे घायल अवस्था में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

वहीं, घायल दीशांत के साथी आयुष्मान कौशिक निवासी रायपुर (देहरादून) से पुलिस ने पूछताछ की. जिसमें आयुष्मान ने पुलिस को बताया कि कैनाल रोड स्थित एक कैंटीन में उनका विवाद कव्यांश धामा, रोहन आर्य और विशाल तोमर से हो गया था. विवाद होने और इसी रंजिश के चलते उस पर गोली चलाई गई.

आयुष्मान ने बताया कि कव्यांश धामा के पक्ष से दो अन्य अज्ञात व्यक्ति ने दून अस्पताल के बाहर पहुंचकर उनके साथी दीशांत राणा को गोली मारी, फिर मौके से फरार हो गए. वहीं, घायल दीशांत के भाई शिवम सिंह राणा निवासी राजावाला, सेलाकुई (देहरादून) की तहरीर पर थाना कोतवाली नगर पर मुकदमा दर्ज किया गया.

क्या बोली पुलिस? वहीं, नगर कोतवाली प्रभारी प्रदीप पंत ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन किया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मौके का निरीक्षण किया. साथ ही आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई.

फायरिंग और षड्यंत्र में शामिल दो आरोपी गिरफ्तार: इसी कड़ी में लगातार आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश के दौरान घटना में शामिल 2 आरोपी रोहन आर्य और विशाल तोमर को पुलिस की टीम ने फायरिंग की घटना व षड्यंत्र रचने की भूमिका में शामिल पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया. जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया.

अन्य आरोपियों की तलाश के लिए 4 टीमें दे रही दबिश: कोर्ट के आदेश पर दोनों आरोपियों को जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया. साथ ही फायरिंग की घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के लिए 4 टीम देहरादून समेत अन्य जिलों में लगातार दबिश दे रही है. ताकि, आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके.

शीतकालीन चारधाम यात्रा पर आने वालों की बल्ले-बल्ले, जीएमवीएन ने आधा किया किराया

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धामी सरकार उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को 12 महीने चलाना चाहती है, जीएमवीएन के फैसले से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद

देहरादून: यात्रा के दौरान श्रद्धालुओ को राहत देने के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम ने कुछ खास फैसला किया है. दरअसल जीएमवीएन शीतकाल यात्रा को बढ़ावा देने के मकसद के साथ आवासीय दरों में भारी कटौती कर रहा है. निगम के फैसले से शीतकाल में आने वाले श्रद्धालुओं को अब आवासीय सुविधा में आधा किराया ही देना होगा.

शीतकालीन चारधाम यात्रा को ताकत देगा जीएमवीएन का ये फैसला: उत्तराखंड में चारों धामों के कपाट बंद होने के बाद अब सरकार शीतकालीन यात्रा को नए रूप में बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद गढ़वाल मंडल विकास निगम ने शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहन देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. निगम ने अपने विभिन्न होटलों की आवासीय दरों में 50 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की है.

जीएमवीएन ने श्रद्धालुओं के लिए आधा किया किराया: निगम के अंतर्गत उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में स्थित होटलों में यह छूट दी जाएगी. शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान इन जिलों में श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक रहता है. जीएमवीएन का यह फैसला मुख्यमंत्री के उस विजन को बल देता है, जिसके तहत प्रदेश में बारहों महीने तीर्थाटन और पर्यटन को सक्रिय रखने का लक्ष्य रखा गया है.

यहां होती है चारों धामों के देवी देवताओं की शीतकाल में पूजा: शीतकालीन चारधाम यात्रा के अंतर्गत गंगोत्री धाम की पूजा हरसिल के मुखबा गांव में, यमुनोत्री धाम की पूजा खरसाली में, केदारनाथ धाम की पूजा रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में और बदरीनाथ धाम की पूजा पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर और जोशीमठ में की जाती है. इसी अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन स्थलों की यात्रा करते हैं. बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद, भगवान बदरी विशाल की उत्सव-मूर्ति पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर में विराजमान होती है. आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में स्थापित होती है.

जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक ने ये कहा: गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा ने बताया कि-

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में शीतकालीन यात्रा को सफल और आकर्षक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. निगम ने अपने होटल और गेस्ट हाउसों में मौजूदा दरों पर 50 फीसदी तक की छूट देने का निर्णय लिया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु व पर्यटक शीतकालीन यात्रा में सम्मिलित हो सकें.
-विशाल मिश्रा, गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक-

प्रदेश सरकार 12 महीने धार्मिक पर्यटन कराना चाहती है: प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि चारधाम यात्रा केवल छह महीनों तक सीमित न रहे, बल्कि शीतकाल में भी धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले. पिछले कुछ वर्षों में शीतकालीन यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं का रुझान तेजी से बढ़ा है और अब सरकार इस यात्रा को राज्य की स्थायी धार्मिक-पर्यटन परंपरा के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है.

केदारनाथ धाम पहुंचे मुख्य सचिव, पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण, जानिये क्या कहा

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मुख्य सचिव ने कहा अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए.

रुद्रप्रयाग: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान बाबा केदारनाथ के दर्शन किए. साथ ही मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया. इस अवसर पर उन्होंने धाम क्षेत्र में विभिन्न फेज़ों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य निष्पादन की समीक्षा की.

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से धाम में चल रहे सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्य और धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि कल, 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं. उन्होंने निर्देश दिए कि कपाट बंद होने के बाद भी धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी की जाये.

मुख्य सचिव ने कहा अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए. उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं की पूर्व योजना तैयार की जाए, ताकि अगले यात्रा सीजन में यात्रियों को और भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें. उन्होंने बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा, और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया. इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय और सहयोग से कार्य कर रहे हैं.

मुख्य सचिव ने धाम क्षेत्र में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि केदारनाथ धाम आज पूरे देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है. उन्होंने कहा कि सरकार , प्रशासन का लक्ष्य केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और सुविधा का संतुलित संगम सुनिश्चित करना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो सके.

रुद्रप्रयाग चोपता विदेशी पर्यटकों से मारपीट मामला, पुलिस ने बताई सच्चाई, दर्ज किया केस

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विदेशी पर्यटकों ने होमस्टे मालिक पर 8 लाख रुपये की नकदी और अन्य कीमती सामान चुराने का भी आरोप लगाया है.

देहरादून: रुद्रप्रयाग के चोपता क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां विदेशी पर्यटकों के साथ मारपीट, लूटपाट और जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. जानकारी के अनुसार, चार दिनों से चोपता स्थित बंकर हाउस होमस्टे में ठहरे कुछ विदेशी यात्री जब चेक आउट करने लगे, तो होमस्टे के मालिक और उसके स्टाफ ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया.

पीड़ित पर्यटकों ने किसी तरह अपनी जान बचाई. इसके बाद विदेशी टूरिस्ट्स ने मंडल चौकी में शरण ली. इसके बाद आनन फानन में उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी. एक पर्यटक ने आरोप लगाया कि होमस्टे मालिक ने उनके करीब 8 लाख रुपये की नकदी और अन्य कीमती सामान भी चुरा लिए हैं. उन्होंने होमस्टे संचालक के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की है.

मामला विदेशी टूरिस्ट से जुड़ा होने के बाद बेहद गंभीर हो गया है. जिसे पुलिस गंभीरता से ले रही है. मामले में पुलिस ने पर्यटकों की शिकायत दर्ज कर ली है. घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्र की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि पर्यटन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं.

थाना अध्यक्ष उखीमठ मुकेश चौहान ने बताया मामला गाइड और होमस्टे संचालक के बीच का है. दोनों के बीच ही बहस हुई है. फिलहाल इस मामले में लोगों पक्षों को थाने बुलाया गया है. मामले को सुलझाने की कोशिश की जा रही है.

चोपता उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक रमणीक पर्यटन स्थल है. हिमालय पर्वत की तलहटी पर बसे इस छोटे से हिल स्टेशन को छोटा स्विजरलैंड भी कहा जाता है. यह अपनी खूबसूरती, हरे खास के मैदान और बर्फबारी के लिए जाना जाता है. यहां बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. जिसमें विदेशी टूरिस्ट भी शामिल होते हैं. यहां आकर आप खूबसूरत हरे- बुग्यालों का दीदार करने के साथ ही ट्रैकिंग का लुत्फ भी उठा सकते हैं.