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राजनैतिक कौशल से विरोधियो की लंका तक लाँघ गए पुष्कर सिंह धामी

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राजनैतिक कौशल से विरोधियो की लंका तक लाँघ गए पुष्कर सिंह धामी राजनीतिक सूझ-बूझ से विरोधियों को पछाड़ते हुए आगे बढ़े पुष्कर सिंह धामी हर वर्ग में बनी एक मिसाल, जिसे विरोधी भी मानते हैं

देहरादून, उत्तराखंड — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी सादगी और रणनीतिक कौशल ने उन्हें हर वर्ग में लोकप्रिय बना दिया है। उन्होंने न केवल प्रदेश की बागडोर युवा ऊर्जा के साथ संभाली, बल्कि कठिन परिस्थितियों में अपने नेतृत्व कौशल का परिचय देते हुए विरोधियों तक को अपना मुरीद बना लिया।

राज्य के रजत जयंती वर्ष में, नवंबर का महीना उत्तराखंड के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसी अवधि में सरकार कई महत्वपूर्ण फैसलों की ओर अग्रसर होती दिखाई दे रही है।

सबसे युवा मुख्यमंत्री, सबसे बड़ी चुनौतियाँ

चार वर्ष पूर्व जब धामी ने सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में उत्तराखंड की कमान संभाली, तब उनके सामने कई जटिल चुनौतियाँ थीं। शुरुआती दिनों में ही विधानसभा चुनाव में सफलता के बाद उन्हें युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी मिली। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों से उपजा संकट ऐसा ही एक मुद्दा था, जिसे उन्होंने न केवल सुलझाया, बल्कि अपनी निर्णय क्षमता और राजनीतिक परिपक्वता से सबको प्रभावित किया।

आपदा के समय, हमेशा सबसे पहले मौके पर

उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे से लेकर चमोली और थराली जैसी प्राकृतिक आपदाओं तक, धामी हर बार सबसे पहले राहत कार्यों की निगरानी के लिए मौके पर पहुँचे। वर्षा काल के दौरान देहरादून में हुई भारी बारिश और सहस्रधारा क्षेत्र के मझाड़ा गांव की त्रासदी में भी मुख्यमंत्री ने प्रभावितों से सीधा संवाद स्थापित कर राहत एवं पुनर्वास के कार्यों में तेज़ी का आश्वासन दिया।

राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण

मुख्यमंत्री धामी ने राजनीति में विनम्रता और परिपक्वता का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए दीपावली के अवसर पर सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से भेंट की — चाहे वे भाजपा के हों या कांग्रेस के। उन्होंने भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत से भी आत्मीय मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं।

हरीश रावत की कार दुर्घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने फ़ौरन हालचाल लिया और बाद में व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका हाल जाना, जो राजनीतिक शिष्टाचार की एक बेहतरीन मिसाल मानी जा रही है।

कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और ‘स्वदेशी अपनाओ’ का संदेश

दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी संवाद कायम रखा। उन्होंने सभी जिलाध्यक्षों से वर्चुअल माध्यम से बात की, उन्हें दीपावली की बधाई दी और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने की अपील की।

इस दौरान ‘स्वदेशी अपनाओ’ अभियान को भी उन्होंने विशेष रूप से बढ़ावा दिया। बाजारों में जाकर स्वदेशी उत्पादों को खरीदा और जनता को भी देसी उत्पादों को अपनाने का प्रेरणादायक संदेश दिया।

निष्कर्ष:

पुष्कर सिंह धामी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सादगी, संजीदगी और सक्रियता के साथ यदि नेतृत्व किया जाए तो विरोधी भी आपके प्रशंसक बन सकते हैं। उनके राजनीतिक कौशल, संवेदनशीलता और जनता से जुड़ाव ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

पुलिस कर्मियों को धामी सरकार देगी विशेष रजत जयंती पदक

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पुलिस कर्मियों को धामी सरकार देगी विशेष रजत जयंती पदक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस स्मृति दिवस परेड के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग किया

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के सुअवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस के समस्त कार्मिकों को एक विशेष रजत जयंती पदक किया जाएगा प्रदान

आगामी 3 वर्षों में पुलिस कर्मियों के आवासीय भवनों के निर्माण के लिए दिए जाएंगे प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को पुलिस लाइन, देहरादून में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिस जवानों के परिजनों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के सुअवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस के समस्त कार्मिकों को एक विशेष रजत जयंती पदक प्रदान किए जाने, आगामी 3 वर्षों में पुलिस कर्मियों के आवासीय भवनों के निर्माण हेतु प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए की धनराशि दी जाने, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पुलिस कल्याण निधि के अन्तर्गत वर्तमान में प्रावधानित ढाई करोड़ रुपए की धनराशि को पुनरीक्षित करते हुए आगामी एक वर्ष के लिए साढ़े चार करोड़ रुपए किए जाने एवं भवाली, नैनीताल, ढालमल्ला, काण्डा, बागेश्वर, नैनीडांडा, धुमाकोट, पौड़ी, घनसाली, टिहरी, सतपुली और पौड़ी में एसडीआरएफ के जवानों हेतु 5 बैरकों का निर्माण कराए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों के पुलिस बलों और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर है। अपने इस उत्तरदायित्व को  निभाते हुए बीते एक वर्ष में, संपूर्ण भारत में 186 अर्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों ने अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के 4 वीर सपूत भी शामिल हैं। सभी वीर बलिदानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद हैं, उनका बलिदान हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, राज्य की पुलिस व्यवस्था को और भी अधिक सक्षम और संसाधन युक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार, पुलिस बल के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत  QRT का गठन किया गया है। सरकार ने विगत तीन वर्षों में पुलिस विभाग के भवनों के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है। ये राशि पूर्व वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है। प्रशासनिक भवनों के साथ 688 आवासीय भवनों का निर्माण कार्य गतिमान है। शीघ्र ही हम 120 नए आवासों का निर्माण भी प्रारंभ करने जा रहे हैं। सरकार ने स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने के लिए जवानों के बैरक मैस और कार्यस्थलों के अपग्रेडेशन के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है। सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। सरकार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत समस्त पुलिस कर्मियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस कर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है। इस वर्ष 356 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी विभिन्न श्रेणियों में पदोन्नत किए गए हैं।  विभिन्न श्रेणी के 115 रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए भी कार्यवाही गतिमान है जिन्हें शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इस वर्ष हमारे 215 कर्मियों को विशिष्ट कार्य एवं सेवा के लिए विभिन्न पदक एवं सम्मान चिन्हों से अलंकृत किया गया है।  राज्य सरकार पुलिसकर्मियों की कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। प्रशिक्षण संस्थानों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा रहे हैं। पीटीसी नरेंद्र नगर को सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। AI और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण के लिए पुलिस कर्मियों को देश के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस कर्मियों के वेतन, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, और अवकाश से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को  ऑनलाइन कर दिया गया है। सरकार ने आपदा राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एसडीआरएफ की एक नई कंपनी की भी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत 162 नए पदों का सृजन किया गया है। पुलिस उपाधीक्षक सीधी भर्ती के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों को वर्तमान में पीटीसी नरेंद्र नगर में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उप निरीक्षक के 222 पदों के साथ-साथ 2000 सिपाहियों की भर्ती भी प्रक्रियाधीन है।

मुख्यमंत्री ने कहा मृतक पुलिस कर्मियों के परिवारों को सहयोग और संबल प्रदान करने के लिए इस वर्ष मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत 136 आश्रित परिवारों को विभिन्न पदों पर नियुक्तियां प्रदान की हैं। राज्य में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए “उत्तराखण्ड खेल नीति” के तहत कुशल खिलाड़ियों के लिए पुलिस विभाग में विशेष कोटे के माध्यम से भर्तियों का प्रावधान भी किया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए समय – समय पर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा वीर जवानों की वीरता और उनके समर्पण की याद में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्थापना की है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमारे जवानों की वीरता और साहस की गाथाओं से परिचित कराएगा। मुख्यमंत्री ने कहा हमारे पुलिस जवान हर परिस्थिति में अदम्य साहस का अभूतपूर्व परिचय देते हैं। उन्होंने कहा हमारा प्रदेश भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है ऐसे में राज्य की शांति और सुरक्षा बनाए रखने में हमारे पुलिसकर्मियों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष उत्तराखंड पुलिस ने कांवड़ यात्रा में लगभग 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और चारधाम यात्रा में करीब 50 लाख से अधिक भक्तों को सुरक्षित और सुगम यात्रा एवं दर्शन कराने में अद्वितीय योगदान दिया है। वी.आई.पी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के साथ ही राष्ट्रीय खेलों और राज्य में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने सराहनीय कार्य किया। उन्होंने कहा राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे का सामना भी हमारी पुलिस ने अदम्य साहस और तत्परता से किया। जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

मुख्यमंत्री ने कहा आधुनिक युग में अपराध का स्वरूप बदल रहा है, पुलिस की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो रही है। चोरी, डकैती, हत्या और महिला अपराधों के साथ नशा और साइबर अपराध जैसे नए खतरों का भी सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने पुलिस की एक त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक फोर्स का गठन किया है। इस फोर्स ने बीते तीन वर्षों में 6199 से अधिक नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की है, और लगभग 275 करोड़ रुपये से अधिक के नारकोटिक पदार्थ भी बरामद किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारे लिए साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ।प् के आने के बाद पुलिस को इस दिशा में और भी अधिक सजग रहना होगा क्योंकि साइबर अपराधों का स्वरूप अब दिन-प्रतिदिन बदल रहा है। उन्होंने कहा हमें साइबर अपराधियों से मुकाबला करने के लिए एक कदम आगे रहना होगा, और इसके लिए हमारी पुलिस को तकनीकी ज्ञान में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा पुलिस फोर्स ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए 63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि, पीड़ितों को लौटाकर उत्तराखंड पुलिस पर जनता के विश्वास को मजबूत किया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, बृजभूषण गैरोला, श्रीमती सविता कपूर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, पूर्व डीजीपी  अनिल रतूड़ी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्यपाल गुरमीत सिंह की आध्यात्मिक यात्रा, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के किए दर्शन

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उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचकर की विशेष पूजा अर्चना, पुनर्निर्माण से लेकर मास्टर प्लान के कामों की ली जानकारी

रुद्रप्रयाग/चमोली: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह आध्यात्मिक यात्रा पर हैं. जिसके तहत वे सबसे पहले केदारनाथ धाम पहुंचे. जहां उन्होंने बाबा केदार के दर्शन किए. साथ ही विशेष रुद्राभिषेक और पूजन कर विश्वकल्याण, मानवता की समृद्धि एवं उत्तराखंड के सतत विकास के लिए आशीर्वाद मांगा. इसके बाद वे बदरीनाथ धाम पहुंचे और बदरी विशाल के दर्शन किए.

आज यानी 21 अक्टूबर को राज्यपाल गुरमीत सिंह के केदारनाथ धाम पहुंचने पर अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने वीआईपी हेलीपैड पर पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राज्यपाल पैदल मार्ग से मंदिर प्रांगण पहुंचे. जहां उन्होंने बाबा केदार का अभिषेक, पूजा और अर्चना की. उन्होंने बाबा केदार से नागरिकों की खुशहाली और राज्य की उन्नति की कामना की.

तीर्थ पुरोहित समाज से की मुलाकात: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित समाज से भेंट की. पुरोहितों ने पारंपरिक मंत्रोच्चारण और पूजा-विधि के साथ राज्यपाल का स्वागत किया. राज्यपाल ने इसे अत्यंत आध्यात्मिक एवं भावनात्मक अनुभव बताया. बाबा केदार की पूजा के बाद राज्यपाल ने मंदिर प्रांगण में पहुंचे श्रद्धालुओं का अभिवादन किया. उन्होंने ‘बाबा केदारनाथ की जय’ के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया.

केदारघाटी का प्रत्येक कण शिवमय है. यहां के पर्वतों में भगवान शिव की उपस्थिति का अनुभव होता है. इस पवित्र भूमि पर कदम रखते ही मन ध्यानमग्न हो जाता है.“- गुरमीत सिंह, राज्यपाल, उत्तराखंड

राज्यपाल ने पुनर्निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान डीडीएमए अधिशासी अभियंता विनय झिंकवाण ने राज्यपाल को धाम में चल रहे निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ज्यादातर पुनर्निर्माण काम पूरे हो चुके हैं. बाकी बचे काम भी अंतिम चरण में हैं.

वहीं, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि पिछले तीन सालों में यात्रा प्रबंधन एवं पुनर्निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने जिला प्रशासन, मंदिर समिति, पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सभी सहयोगी एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि ‘चारधाम यात्रा को सफल, सुरक्षित एवं श्रद्धालु-अनुकूल बनाने में आप सभी की भूमिका सराहनीय है.

तीर्थ पुरोहितों का भवन निर्माण काम पूरा: राज्यपाल गुरमीत सिंह को अवगत कराया कि तीर्थ पुरोहितों के लिए बनाए जा रहे भवनों का निर्माण कार्य ज्यादातर पूरा हो चुका है. भूमि और भवन आवंटन से जुड़े मुद्दों का निराकरण किया जा चुका है. राज्यपाल ने इस समन्वित प्रयास के लिए मंदिर समिति और जिला प्रशासन की विशेष रूप से प्रशंसा की.सेवाभाव और समर्पण के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना: वहीं, राज्यपाल ने केदारनाथ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों से मुलाकात उनका मनोबल बढ़ाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस एवं सेवा दल सभी श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा अनुभव कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और सेवा भाव से काम करें.

बदरीनाथ धाम पहुंचकर की पूजा अर्चना: केदारनाथ धाम के बाद राज्यपाल गुरमीत सिंह बदरीनाथ धाम पहुंचे. जहां उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर विशेष पूजा में प्रतिभाग किया. उन्होंने करीब 1 घंटे का समय बदरीनाथ धाम में व्यतीत किया. उनके बदरीनाथ पहुंचने पर पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया.

वहीं, चमोली डीएम गौरव कुमार ने मास्टर प्लान के कार्यों से राज्यपाल को अवगत कराया. इस पर राज्यपाल ने सिविक एमीनिटी सेंटर, सिविक कम्युनिटी सेंटर, अराइवल प्लाजा और अस्पताल बिल्डिंग की प्रगति पर संतोष जताया. साथ ही मास्टर प्लान के कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा यहां जिस तरह का विकास हो रहा है, वो हमें विश्व गुरु, आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जा रहा है.

23 अक्टूबर को केदारनाथ और 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट होंगे बंद: बता दें कि केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. जिसके बाद 6 महीने तक केदारनाथ धाम में सन्नाटा सा पसर जाएगा. वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जिसके तहत बीती 18 अक्टूबर को केदारनाथ धाम के क्षेत्र रक्षक भुकुंट भैरवनाथ के कपाट बंद हो चुके हैं. वहीं, 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे.

सीएम धामी ने पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में की शिरकत, पुलिसकर्मियों को दी ये सौगात

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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में भाग लिया. साथ ही शहीदों के परिजनों से मुलाकात की.

देहरादून: पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित पुलिस लाइन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की. सीएम धामी ने पुलिस और अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. साथ ही मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिस जवानों के परिजनों को सम्मानित भी किया. कार्यक्रम के दौरान सीएम ने राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर उत्तराखंड पुलिस के सभी कार्मिकों को एक विशेष रजत जयंती पदक प्रदान किए जाने की भी घोषणा की.

इसके अलावा, अगले 3 सालों में पुलिस कर्मियों के आवासीय भवनों के निर्माण के लिए हर साल 100 करोड़ रुपए की धनराशि दी जाएगी, तमाम कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए पुलिस कल्याण निधि के तहत वर्तमान में प्रावधानित ढाई करोड़ रुपए की धनराशि को पुनरीक्षित करते हुए अगले एक साल के लिए साढ़े चार करोड़ रुपए किए जाने के साथ ही भवाली, नैनीताल, ढालमल्ला, काण्डा, बागेश्वर, नैनीडांडा, धुमाकोट, पौड़ी, घनसाली, टिहरी, सतपुली और पौड़ी में एसडीआरएफ के जवानों के लिए 5 बैरकों का निर्माण कराए जाने की घोषणा की.

सीएम धामी ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों के पुलिस बलों और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर है. अपने इस उत्तरदायित्व को निभाते हुए बीते एक साल में, पूरे भारत में 186 अर्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के 4 वीर सपूत भी शामिल हैं. सभी वीर बलिदानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद हैं, उनका बलिदान हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा. सीएम ने कहा राज्य सरकार, राज्य की पुलिस व्यवस्था को और भी अधिक सक्षम और संसाधनयुक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है. राज्य सरकार, पुलिस बल के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर थाने में महिला हेल्प डेस्क के तहत क्विक रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है. सरकार ने विगत तीन सालों में पुलिस विभाग के भवनों के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है. ये राशि पिछले सालों की तुलना में कई गुना अधिक है. प्रशासनिक भवनों के साथ 688 आवासीय भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है. जल्द ही 120 नए आवासों का निर्माण भी शुरू करने जा रहे हैं. सरकार ने स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने के लिए जवानों के बैरक मैस और कार्यस्थलों के अपग्रेडेशन के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है. सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की है. सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत सभी पुलिस कर्मियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करा रही है.

सीएम धामी ने कहा पुलिसकर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है. इस साल 356 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तमाम श्रेणियों में पदोन्नत किए गए हैं. तमाम श्रेणी के 115 रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए भी कार्रवाई गतिमान है, जिन्हें शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा. इस साल हमारे 215 कर्मियों को विशिष्ट कार्य और सेवा के लिए विभिन्न पदक एवं सम्मान चिन्हों से अलंकृत किया गया है. राज्य सरकार पुलिस कर्मियों की कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी लगातार काम कर रही है. प्रशिक्षण संस्थानों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा रहे हैं. पीटीसी नरेंद्र नगर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भी विकसित किया जा रहा है. एआई और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण के लिए पुलिस कर्मियों को देश के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में भेजा जा रहा है.

सीएम ने कहा पुलिस कर्मियों के वेतन, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, और अवकाश से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है. सरकार ने आपदा राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एसडीआरएफ की एक नई कंपनी की भी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत 162 नए पदों का सृजन किया गया है. पुलिस उपाधीक्षक सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों को वर्तमान में पीटीसी नरेंद्र नगर में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. उप निरीक्षक के 222 पदों के साथ-साथ 2000 सिपाहियों की भर्ती भी प्रक्रियाधीन है.

मृतक पुलिस कर्मियों के परिवारों को सहयोग और संबल प्रदान करने के लिए इस साल मृतक आश्रित कोटे के तहत 136 आश्रित परिवारों को विभिन्न पदों पर नियुक्तियां प्रदान की है. राज्य में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड खेल नीति के तहत कुशल खिलाड़ियों के लिए पुलिस विभाग में विशेष कोटे के माध्यम से भर्तियों का प्रावधान भी किया है. मुख्यमंत्री ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए समय – समय पर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए.

सीएम ने कहा इस साल उत्तराखंड पुलिस ने कांवड़ यात्रा में लगभग 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और चारधाम यात्रा में करीब 50 लाख से अधिक भक्तों को सुरक्षित और सुगम यात्रा एवं दर्शन कराने में अद्वितीय योगदान दिया है. वी.आई.पी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के साथ ही राष्ट्रीय खेलों और राज्य में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय कार्यक्रमों में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने सराहनीय कार्य किया. उन्होंने कहा राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे का सामना भी हमारी पुलिस ने अदम्य साहस और तत्परता से किया, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी.

आधुनिक युग में अपराध का स्वरूप बदल रहा है, पुलिस की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो रही है. चोरी, डकैती, हत्या और महिला अपराधों के साथ नशा और साइबर अपराध जैसे नए खतरों का भी सामना करना पड़ रहा है. राज्य सरकार ने पुलिस की एक त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक फोर्स का गठन किया है. इस फोर्स ने बीते तीन सालों में 6199 से अधिक नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की है और लगभग 275 करोड़ रुपये से अधिक के नारकोटिक पदार्थ भी बरामद किए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा हमारे लिए साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बन चुका है. AI के आने के बाद पुलिस को इस दिशा में और भी अधिक सजग रहना होगा क्योंकि साइबर अपराधों का स्वरूप अब दिन-प्रतिदिन बदल रहा है. उन्होंने कहा हमें साइबर अपराधियों से मुकाबला करने के लिए एक कदम आगे रहना होगा, और इसके लिए हमारी पुलिस को तकनीकी ज्ञान में दक्ष होना आवश्यक है. उन्होंने कहा पुलिस फोर्स ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए 63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि, पीड़ितों को लौटाकर उत्तराखंड पुलिस पर जनता के विश्वास को मजबूत किया है.

दिवाली पर बुझा बॉलीवुड का सितारा: अभिनेता असरानी का 84 वर्ष की उम्र में निधन, शोले के ‘जेलर’ ने छोड़ी यादों की अमिट छाप

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नई दिल्ली। बॉलीवुड के लिए 20 अक्टूबर 2025 का दिन गहरा दुख लेकर आया। मशहूर अभिनेता असरानी (Asrani) का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। दीवाली के दिन यानी सोमवार को उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे। डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद 20 अक्टूबर की शाम करीब 4 बजे उनका निधन हो गया। असरानी के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी (Goverdhan Asrani) था। उनका जन्म 1941 में राजस्थान के जयपुर में हुआ था। उनके पिता एक कार्पेट कंपनी में मैनेजर थे और असरानी ने शुरुआती शिक्षा जयपुर से ही पूरी की। हालांकि बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था। उन्होंने कुछ समय तक आकाशवाणी में काम किया और फिर पुणे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (FTII) में अभिनय की औपचारिक शिक्षा लेने पहुंचे। यहीं से असरानी के फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।

फिल्म इंडस्ट्री में असरानी को पहचान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की नजरों में आने के बाद मिली। उस समय ऋषिकेश मुखर्जी अपनी फिल्म ‘गुड्डी’ के लिए नए कलाकारों की तलाश कर रहे थे। गुलजार के माध्यम से असरानी को यह मौका मिला और उन्होंने फिल्म ‘गुड्डी’ में शानदार अभिनय कर सभी का ध्यान खींच लिया। इससे पहले असरानी ने साल 1967 में ‘हरे कांच की चूड़ियां’ फिल्म से डेब्यू किया था, लेकिन सफलता का स्वाद उन्हें बाद में मिला।

‘गुड्डी’ के बाद असरानी का करियर पटरी पर आ गया और उन्होंने एक के बाद एक हिट फिल्मों में काम किया — ‘बावर्ची’, ‘सीता और गीता’, ‘शोर’, ‘रास्ते का पत्थर’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को खूब सराहा गया। परंतु साल 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ ने असरानी को अमर कर दिया। फिल्म में उनका ‘जेलर’ वाला किरदार और मशहूर डायलॉग “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” आज भी दर्शकों की जुबान पर है। इस किरदार ने असरानी को हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार कॉमिक अभिनेताओं में शुमार कर दिया।
असरानी ने केवल अभिनय तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि निर्देशन में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 1977 में ‘चला मुरारी हीरो बनने’ नाम की सेमी-बायोग्राफिकल फिल्म का निर्देशन किया। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं मिली, लेकिन असरानी ने हार नहीं मानी और आगे ‘सलाम मेमसाब’, ‘हम नहीं सुधरेंगे’, ‘दिल ही तो है’ और ‘उड़ान’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।

उनके फिल्मी सफर में ‘पिया का घर’, ‘मेरे अपने’, ‘परिचय’, ‘नमक हराम’, ‘अनहोनी’ जैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं। उन्होंने निगेटिव रोल भी निभाए, जैसे कि ‘कोशिश’ और ‘चैताली’ में, लेकिन दर्शकों ने उन्हें सबसे ज्यादा कॉमेडी किरदारों में पसंद किया।
असरानी ने अपने करियर में लगभग 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनके किरदारों की खासियत थी — सादगी, समय पर डायलॉग डिलीवरी और हास्य का स्वाभाविक अंदाज। उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसने हंसी के साथ अभिनय की गहराई भी दर्शकों के दिलों में उतारी।

दिवाली के इस दिन असरानी का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक गहरा सदमा है। शोले के इस ‘जेलर’ ने भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनकी आवाज़, उनके डायलॉग और उनके हंसमुख चेहरे की यादें हमेशा अमर रहेंगी।

बदरीनाथ धाम में दीपोत्सव, 11 हजार दीप जलाकर मनाई गई दिवाली, केदारनाथ भी हुआ जगमग

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बीकेटीसी ने बदरीनाथ और केदारनाथ में दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया.

देहरादून: देशभर में दिवाली धूमधाम से मनाई गई. भगवान राम की नगरी अयोध्या में 5: 26 लाख दीये जलाकर ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बनाया गया. वहीं, बदरीनाथ धाम में भी दीपोत्सव मनाया गया. दिवाली के दिन बदरीनाथ धाम में 11 हजार दीप जलाकर तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया.

फूलों से सजा बदरीनाथ मंदिर: दीपावली पर्व को लेकर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने खास तैयारियां की थी. बीकेटीसी ने दिवाली के मौके पर दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किये. इसके लिए बदरीनाथ मंदिर को 12 कुंतल फूलों से सजाया गया. दिवाली के मौके पर बदरीनाथ धाम कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की गई. साथ ही बदरी विशाल के खजाने की पूजा भी की गई.

इस दौरान माता लक्ष्मी को 56 भोग का प्रसाद अर्पित किया गया. घी के दिये के साथ बदरीनाथ धाम के प्रांगण को दीपों से सजाया गया.. दीपावली के अवसर पर बदरीनाथ धाम में सुरक्षा की विशेष व्यवस्था भी देखी गई .पूजा अर्चना कर भगवान बदरी विशाल से सुख समृद्धि की कामना की गई.

केदारनाथ में दीपोत्सव जारी: दिवाली के मौके पर केदारनाथ मंदिर को 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया. केदारनाथ मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया. केदारनाथ धाम में बीकेटीसी, तीर्थ पुरोहितों और हकहकूकधारियों के सहयोग से दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह दीपोत्सव 20 से 23 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा.

चारधाम के कपाट बंद की तिथियां-

  • गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को सुबह 11:36 बजे बंद होंगे.
  • केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे बंद किए जाएंगे.
  • यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन यानी 23 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे
  • बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे.

देहरादून पुलिस ने इस खास अंदाज में मनाई दीपावली, बुजुर्गों के साथ जलाए दीपक

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देहरादून में पुलिसकर्मियों ने बुजुर्गों के साथ दीपावली की खुशियां बांटी.

देहरादून: देश भर में दीपावली की धूम है, दो दिन दीपावली होने की वजह से चारों तरफ जगमगाती लाइटों के साथ लोगों के चेहरे पर भी खुशी है. हर कोई अपने परिवार के साथ दीपावली मना रहा है, लेकिन राजधानी देहरादून में पुलिस के द्वारा मनाई गई दीपावली बेहद खास रही. देहरादून पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देशों पर शहर के अलग-अलग इलाकों में पुलिसकर्मी अकेले घर में मौजूद बुजुर्गों के साथ दीपावली मनाते हुए दिखाई दिए. पुलिसकर्मियों का कहना है जिनके परिवार किसी कारणवश उनके पास मौजूद नहीं होते हैं, इस संवेदनशील पहलू को समझते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के निर्देश पर दून पुलिस ने इस दीपावली को खास बनाने की एक सराहनीय पहल की.

पुलिसकर्मियों की टीम ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में अकेले रह रहे सीनियर सिटीजन के घर जाकर उनसे भेंट की. इस दौरान पुलिस कर्मियों ने आदरपूर्वक उनका हालचाल पूछा और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दी. दून पुलिस परिवार की ओर से बुजुर्गों को फल और मिष्ठान भेंट किए गए. जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान खिल उठी. पुलिसकर्मियों के इस अपनत्व भरे व्यवहार से भावुक हुए कई बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा.

एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने सभी थाना कोतवाली प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्र में रहने वाले सीनियर सिटीजन का हालचाल जानें और यह सुनिश्चित करें कि त्योहारों के अवसर पर कोई भी बुजुर्ग अपने आपको अकेला महसूस ना करे. इस निर्देश के तहत दून पुलिस ने मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल कायम की.

पुलिस अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि दून पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की रखवाली करने वाला बल नहीं है, बल्कि समाज का अभिन्न अंग भी है. बुजुर्ग हमारे अनुभव संस्कार और परंपरा की जड़ें हैं, उनका स्नेह और आशीर्वाद ही हमें शक्ति देता है. अजय सिंह ने कहा दून पुलिस की इस पहल से बुजुर्गों के मन में सुरक्षा और आत्मीयता की भावना और गहरी हुई. उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पर्व उनके लिए वास्तव में रोशनी लेकर आया. क्योंकि पुलिस ने न केवल उनके घर के दीप जलाए.बल्कि उनके मनों में भी विश्वास की लौ प्रज्ज्वलित की.

इस तरह दून पुलिस ने यह संदेश दिया कि सच्ची सेवा केवल वर्दी में नहीं, बल्कि संवेदनशील हृदय में बसती है और जब समाज का हर वर्ग एक-दूसरे के साथ खड़ा होता है, तभी दीपावली का असली अर्थ साकार होता है.

देहरादून निरंजनपुर मंडी में रॉकेट से दुकान में लगी आग, मची अफरा-तफरी

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देहरादून में बीती रात निरंजनपुर सब्जी मंडी में एक दुकान में भीषण आग लग गई.

देहरादून: कोतवाली पटेल नगर क्षेत्र के अंतर्गत दीपावली की रात निरंजनपुर सब्जी मंडी में एक दुकान में भीषण आग लग गई. आग लगने से आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया. आनन फानन में आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी. जिसके बाद तत्काल मौके पर पुलिस और दमकल विभाग की 2 गाड़ियां पहुंची और आग पर काफी मशक्कत के बाद काबू पाया. पुलिस अनुसार आग दीपावली के मौके पर रॉकेट आकर गिरा था, जिससे आग धधकी. फिलहाल पुलिस आग लगने की घटना की जांच कर रही है.

बताया जा रहा है कि बीती रात कोतवाली पटेल नगर क्षेत्र के अंतर्गत निरंजनपुर सब्जी मंडी के गेट संख्या एक के पास एक दुकान की छत पर रखी अंडों की खाली क्रेट में एक रॉकेट आकर गिर गया. जिसके कारण अंडे की खाली क्रेट में आग लग गई. आग लगने से आसपास अफरातफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी. सूचना पर पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया.

कोतवाली पटेल नगर प्रभारी चंद्रभान अधिकारी ने बताया है कि सूचना के बाद दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. साथ ही घटना के संबंध में अग्रिम कार्रवाई जारी है. वही नगर अग्निशमन अधिकारी किशोर उपाध्याय ने बताया है कि देहरादून शहर में दीपावली की रात को 12 जगह आग लगी, जहां फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया है.

दिवाली पर सियासी मेलजोल! सरकार से संगठन तक मिले सीएम, पूर्व मुख्यमंत्रियों से मुलाकातों ने बटोरी सुर्खियां

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दिवाली पर सीएम धामी ने सरकार से संगठन तक के लोगों से मुलाकात की. इस दौरान वे पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी मिले.

देहरादून: दिवाली का दिन उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में काफी सुर्खियों में रहा. दिवाली के दिन सीएम धामी की पॉलिटिकल मुलाकातों ने खूब सुर्खियां बटोरी. इस दिन सीएम धामी ने कई पूर्व मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की. जिसके कई आसार निकाले गये. वहीं, इसके बाद सीएम धामी ने कई विधायकों से भी मुलाकात की. इसे भी पॉलिटिकल पंडितों ने कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा. आइये आपको इन मुलाकातों के बारे में विस्तार से बताते हैं.

सीएम धामी की मुलाकातों का सिलसिला 19 अक्टूबर से शुरू हुआ. इसमें सीएम धामी ने सबसे पहले पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत से मुलाकात की. इसके बाद सीएम धामी भुवन चंद्र खंडूड़ी के आवास पर पहुंचे. जहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री की कुशलक्षेम जानी. इसके बाद सीएम धामी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. सीएम धामी की इस मुलाकात की सबसे ज्यादा चर्चा हुई.

इसके बाद सीएम धामी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाकात की. साथ ही सीएम धामी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत और भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाकात की. इसके बाद सीएम धामी ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी से भी भेंट की.

पूर्व मुख्यमंत्रियों से मुलाकात के बाद सीएम धामी ने सरकार और संगठन के लोगों से भी मुलाकात की. इस कड़ी में सीएम धामी ने सबसे पहले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से मुलाकात की.

इसके बाद सीएम धामी ने बीजेपी के विधायकों से भी मुलाकात की. इसमें मुन्ना सिंह चौहान, विनोद कंडारी, खजान दास जैसे नाम शामिल रहे. इन सभी विधायकों की स्पेशल मुलाकातों के जानकार कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देख रहे हैं.

बता दें उत्तराखंड में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं चल रही हैं. कई विधायक ऐसे हैं, जो कि मंत्रिमंडल में जगह को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं. उत्तराखंड में मंत्रिमंडल कोटे की बात करें तो 8 मंत्रियों, 3 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) समेत 1 मुख्यमंत्री यानी कुल 12 लोगों का कोटा है. धामी सरकार के इस तीन साल के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद अब कैबिनेट के 2 पद और खाली हो गए. इसके बाद चंदन राम दास के पास मौजूद महत्वपूर्ण इंडस्ट्री डिपार्मेंट और प्रेमचंद अग्रवाल के पास मौजूद वित्त, हाउसिंग डिपार्टमेंट भी मुख्यमंत्री के पास है.

रामनगर में हाईवे पर अचानक आया टस्कर हाथी, खौफ से कार छोड़कर भागा परिवार

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रामनगर में हाईवे पर अचानक टस्कर हाथी आने से राहगीर खौफजदा हो गए.

रामनगर: जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे क्षेत्रों में अक्सर जंगली जानवर आबादी के आसपास तक पहुंच जाते हैं, जिससे मानव व वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं होने का खतरा बना रहता है. रविवार शाम को रामनगर-भंडारपानी मार्ग पर टेड़ा गेट से आगे एक टस्कर हाथी अचानक सड़क पर आ जाने से अफरातफरी मच गई. हाथी ने वहां से गुजर रहे वाहनों का पीछा करना शुरू कर दिया, जिससे राहगीरों में दहशत का माहौल बन गया. कार सवार एक परिवार ने हाथी को अपने ओर आता देख, भागकर जान बचाई. गनीमत रही कि हाथी कुछ देर के बाद जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली.

अचानक हाईवे पर आया हाथी: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाम के समय सड़क से कई वाहन गुजर रहे थे, तभी जंगल की झाड़ियों से एक विशाल टस्कर हाथी अचानक सड़क पर आ गया. हाथी वाहनों की ओर बढ़ने लगा और आक्रामक तरीके से सूंड उठाकर चिंघाड़ने लगा. इस बीच, एक कार में सवार परिवार को अपनी और बच्चों की जान बचाने के लिए कार से उतरकर भागना पड़ा. परिवार में छोटे बच्चे भी मौजूद थे, जो हाथी को अपनी ओर बढ़ता देख घबरा गए. परिवार ने जैसे-तैसे सड़क किनारे जंगल की ओर भागकर अपनी जान बचाई.

हाथी के हाईवे पर आने से मचा हड़कंप: मौके पर मौजूद अन्य वाहन चालक भी भयभीत होकर अपनी गाड़ियां रोककर दूर हट गए. कुछ देर तक सड़क पर हड़कंप की स्थिति बनी रही. गनीमत यह रही कि किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ, कुछ ही देर में टस्कर हाथी ने वाहनों का पीछा छोड़ दिया और वापस जंगल की ओर चला गया. जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन घटना ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को डरा दिया.

वन विभाग ने लोगों से की ये अपील: स्थानीय लोगों के अनुसार, टस्कर हाथी पिछले कुछ दिनों से इसी क्षेत्र में देखा जा रहा है और कई बार सड़क पर अचानक आकर वाहनों को दौड़ा चुका है. लोगों ने वन विभाग को घटना की जानकारी दे दी है. वन अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि मार्ग से गुजरते वक्त सतर्क रहें, विशेषकर शाम और रात के समय वाहन धीरे चलाएं, हॉर्न का उपयोग न करें और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें. बता दें कि ये पहला वाक्या नहीं हैं, रामनगर के कई क्षेत्र जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे हुए हैं, यहां अक्सर जंगली जानवर आबादी के समीप दिखाई देते हैं. कई बार बाघ के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है.