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मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला लंदन फोर्ट अब ‘सोरगढ़ किला’

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मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला लंदन फोर्ट अब ‘सोरगढ़ किला’ मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं के लिए 1029 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में विभिन्न विकास कार्यों और आपदा प्रबंधन के लिए कुल ₹1029 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों और राज्य योजना के तहत दी गई है।

स्थानीय निकायों को बड़ा बजट

मुख्यमंत्री ने पंचम राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत:

  • गैर निर्वाचित निकायों को वित्तीय वर्ष 2025-26 की द्वितीय छमाही के लिए ₹3 करोड़,
  • जिला पंचायतों को तृतीय त्रैमासिक किश्त के रूप में ₹361.25 करोड़,
  • शहरी स्थानीय निकायों को तृतीय त्रैमासिक किश्त हेतु ₹333.25 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

आपदा प्रबंधन हेतु विशेष प्रावधान

मानसून के दौरान संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए:

  • हरिद्वार जनपद के लिए आपदा न्यूनीकरण निधि से ₹1 करोड़,
  • उत्तरकाशी जिले के धराली और स्यानाचट्टी जैसे क्षेत्रों में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत हेतु ₹3 करोड़ अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की गई है।

इसके अलावा, विभिन्न जनपदों और विभागों को आपदा मोचन निधि से:

  • राजस्व परिषद देहरादून को ₹2 करोड़,
  • देहरादून जनपद को ₹16 करोड़,
  • उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को ₹25 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

पौड़ी और यमकेश्वर को मिला अतिरिक्त बजट

पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में चार सेतुओं के उच्चीकरण और एक मोटर मार्ग निर्माण हेतु ₹18.23 लाख की स्वीकृति दी गई है।
वहीं, विकासखण्ड यमकेश्वर के दिवोगी कान्द्रा भवालातोक में विन नदी के किनारे बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए ₹2.58 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।

जेसीबी व मलबा हटाने के कार्यों के लिए स्वीकृति

प्राकृतिक आपदा से सड़कों पर आए मलबे को हटाने हेतु तैनात जेसीबी मशीनों और पूर्व वर्षों के बकाया भुगतानों के लिए 13 जनपदों को प्रति जनपद ₹2 करोड़ की दर से कुल ₹26 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।

लंदन फोर्ट अब ‘सोरगढ़ किला’ के नाम से जाना जाएगा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद पिथौरागढ़ में स्थित ऐतिहासिक लंदन फोर्ट का नाम बदलकर ‘सोरगढ़ किला’ रखने की घोषणा की है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। यह निर्णय स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भाजपा युवा मोर्चा में कुमाऊं-गढ़वाल बैलेंस का फार्मूला, विपुल मैंदोली बने प्रदेश अध्यक्ष

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भाजपा युवा मोर्चा में कुमाऊं-गढ़वाल बैलेंस का फार्मूला, विपुल मैंदोली बने प्रदेश अध्यक्ष

भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश इकाई में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही संगठन ने कुमाऊं-गढ़वाल के बीच संतुलन साधने की स्पष्ट कोशिश की है। ऋषिकेश निवासी विपुल मैंदोली को युवा मोर्चा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे लंबे समय से युवा मोर्चा से जुड़े हुए हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। माना जा रहा है कि विपुल मैंदोली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के करीबी माने जाते हैं।

इस पद को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चाएं जारी थीं, और कई वरिष्ठ नेताओं की नजरें भी इस अहम जिम्मेदारी पर थीं। लेकिन तमाम दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने मैंदोली के नाम पर मुहर लगाई।

युवा वर्ग को साधने की रणनीति

साल 2027 में प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने युवा मोर्चा के माध्यम से युवा वर्ग को साधने की रणनीति बनाई है। यही वजह है कि संगठन के इस बदलाव को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नई टीम में कुछ नए चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके।

महामंत्री पदों पर भी संतुलन

भाजपा ने दो प्रदेश महामंत्रियों की भी घोषणा की है:

  • दीपेंद्र कोश्यारी, नैनीताल निवासी और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे
  • मुलायम सिंह रावत, टिहरी निवासी

दीपेंद्र कोश्यारी की यह सक्रिय राजनीति में नई पारी मानी जा रही है। लंबे समय से उनके किसी पद पर नियुक्त होने की चर्चा थी, लेकिन अब युवा मोर्चा के महामंत्री के रूप में उन्हें जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मुलायम सिंह रावत भी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और उन्हें टिहरी गढ़वाल से संगठनात्मक संतुलन साधने के लिए अहम भूमिका सौंपी गई है।

दिल्ली दरबार से संतुलन की मुहर

सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व युवा मोर्चा का अध्यक्ष पद कुमाऊं मंडल को देने की योजना में था, लेकिन जिन दो नामों पर सहमति नहीं बन पाई, उनके स्थान पर नया नाम तलाशा गया और अंततः विपुल मैंदोली पर सहमति बनी।

पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष शंशाक रावत, जो बच्ची सिंह रावत के बेटे हैं, के कार्यकाल को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया रही। उनके प्रदर्शन को लेकर दिल्ली नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट नहीं था, यही कारण रहा कि उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया।

फिलहाल, दोनों महामंत्री — दीपेंद्र कोश्यारी (कुमाऊं) और मुलायम सिंह रावत (गढ़वाल) — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाते हैं, जिससे नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल की उम्मीद की जा रही है।

बद्री-केदार धाम पहुंचे मुकेश अंबानी, की विशेष पूजा-अर्चना

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बद्री-केदार धाम पहुंचे मुकेश अंबानी, की विशेष पूजा-अर्चना

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। हर साल की तरह इस बार भी अंबानी परिवार की उत्तराखंड चारधाम यात्रा की परंपरा जारी रही।

सुबह लगभग 8:00 बजे मुकेश अंबानी विशेष विमान से देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद वह अपने सहयोगियों के साथ दो हेलिकॉप्टरों के माध्यम से बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए। दोनों पवित्र स्थलों पर उन्होंने विधिवत दर्शन और पूजा संपन्न की।

एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, दर्शन के बाद अंबानी दोपहर में देहरादून लौट आए और फिर अपने निजी विमान से मुंबई के लिए रवाना हो गए।

गौरतलब है कि अंबानी परिवार बीते कई वर्षों से चारधाम यात्रा करता आ रहा है और बद्री-केदार धामों में विशेष आस्था रखता है। उनके आगमन से न केवल धार्मिक स्थलों में एक नई ऊर्जा महसूस होती है, बल्कि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच भी उत्साह का माहौल बन जाता है।

नशा मुक्त दून के लिए महा आगाज, नशे के सौदागरों, पैडलरों पर शिकंजा कसने की तैयारी

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मुख्यमंत्री के विजन ‘‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’’ के संकल्प को साकार करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रभावी रणनीति तैयार कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को ऋषिपर्णा सभागार में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक हुई। जिसमें नशीले पदार्थो के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विभागों को समन्वय बनाते हुए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि राजधानी में नशा तस्करों के लिए कोई जगह नहीं है।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जनपद में संचालित दवा फैक्ट्री एवं मेडिकल स्टोर का निरंतर निरीक्षण करते हुए नशीले पदार्थो की रोकथाम हेतु सघन जांच की जाए। सभी मेडिकल स्टोर पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी स्थापित कराए जाए। जिलाधिकारी ने सीएमओ को पर्याप्त संख्या में ड्रग्स टेस्टिंग किट खरीदने और स्पेशल टास्क फोर्स के माध्यम से सभी सरकारी, गैर सरकारी कॉलेज, यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षण संस्थानों में वृहद स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए। इसके लिए डीएम ने स्वास्थ्य महकमे को मौके पर ही फंड स्वीकृत किया। डीएम ने कहा कि प्रत्येक माह नियमित रूप से एंट्री ड्रग्स गतिविधियों की समीक्षा की जाए। जिलाधिकारी की पहल पर जिला स्तर से पब्लिक हेल्पलाइन नबंर, डेडिकेटेड सेल बनाने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने स्कूलों में गठित एंटी ड्रग्स समिति को सीधे एसटीएफ से लिंक करवाने के निर्देश भी दिए है, ताकि एंटी ड्रग्स गतिविधियों का त्वरित कम्यूनिकेशन हो सके।

जिलाधिकारी ने समाज कल्याण अधिकारी को रायवाला ओल्ड एज होम को शीघ्र नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को सभी नशा मुक्ति केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने और स्थानीय स्तर पर तैनात पटवारी व पुलिस से संचालित गतिविधियों की रिपोर्ट लेने को कहा। जिलाधिकारी ने विद्यालयों के आसपास एवं नशा के संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर सीसीटीवी कैमरे लगाने, निजी एवं शासकीय सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग्स कमेटी को सक्रिय करने, समितियों के नाम की सूची उपलब्ध कराने, नशीले पदार्थो के अवैघ कारोबार की सूचना देने हेतु शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थानों पर बैनर, पोस्टर के माध्मय से मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 और एनसीवी मानस पोटर्ल का व्यापक प्रचार प्रसार कराने और हेल्पलाइन पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए। ताकि नशे के अवैघ करोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।

जिलाधिकारी ने मादक पदार्थो की डिमांड एवं सप्लाई चौन को तोड़ने के लिए एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी औषधि नियंत्रक सहित सभी प्रर्वतनकारी संस्थाओं को मिलकर काम करते हुए प्रवाभी कार्रवाई अमल में लाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि विगत वर्षो का विशलेषण करते हुए मादक पदार्थो के कारोबार में सलिप्त नेटवर्क और लिंकेज का पता लगाया जाए। सड़कों पर यातायात नियमों की चौकिंग के दौरान ड्रग्स टेस्टिंग भी की जाए। मादक पदार्थों के प्रचलन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में वृहद स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाए। आशा वर्कर, सेविका, सहायिका के माध्यम से गांव-गांव तक नागरिकों को नशीले पदार्थों के सेवन से बचने के लिए जागरूक किया जाए। प्रत्येक नागरिक को मानस हेल्पलाइन नंबर एवं पोर्टल की जानकारी हो, ताकि कोई भी नागरिक इस अवैध कारोबार के बारे में आसानी से प्रशासन को सूचना दे सके।

बैठक में डीएफओ मंयक गर्ग, अपर जिलाधिकारी प्रशासन जय भारत सिंह, एसडीएम सदर हरिगिरी, एसडीएम स्मृता परमार, एसडीएम अपर्णा ढ़ौडियाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मुकेश कुमार शर्मा, जिला आबकारी अधिकारी वीरेन्द्र कुमार जोशी, समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूडी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, तहसीलदार कालसी सुशीला कोठियाल सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे।

हेमकुंड साहिब: बर्फ से ढकी वादियों में अंतिम अरदास, आज दोपहर बंद होंगे कपाट

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हेमकुंड साहिब: बर्फ से ढकी वादियों में अंतिम अरदास, आज दोपहर बंद होंगे कपाट

सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब में इन दिनों बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को यहां इस वर्ष की अंतिम अरदास की जाएगी, जिसके बाद गुरुद्वारे के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। दोपहर करीब एक बजे कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अनुसार, कपाट बंद करने की सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब के पाठ के साथ इस प्रक्रिया की शुरुआत होगी। इसके बाद कीर्तन और अरदास के उपरांत, गुरुग्रंथ साहिब को विधिपूर्वक सचखंड में सुशोभित किया जाएगा। दोपहर एक बजे कपाट औपचारिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंद होने के साक्षी बनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ घांघरिया और आसपास के क्षेत्रों में उमड़ पड़ी है। वहीं, हाल ही में हुई बर्फबारी के चलते हेमकुंड साहिब और इसके आसपास का पूरा इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक गया है, जिससे दृश्य और भी रमणीय हो गया है।

इस अवसर पर लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

मैथिली ठाकुर के राजनीति में कदम रखने की अटकलें तेज, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चर्चाएं गरम

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मैथिली ठाकुर के राजनीति में कदम रखने की अटकलें तेज, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चर्चाएं गरम

पटना / जबलपुर, अक्टूबर 2025:सियासत कब किसे हीरो बना दे और कब किसी को हाशिए पर ढकेल दे — इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। बिहार की राजनीति में अब एक नया नाम सुर्खियों में है — लोकप्रिय भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर। संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज़ और भक्ति गीतों से पहचान बनाने वाली मैथिली ठाकुर के राजनीतिक मैदान में उतरने की अटकलें अब तेज़ हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मैथिली ठाकुर ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद यह चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी है कि मैथिली 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चुनावी किस्मत आज़मा सकती हैं। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ मौजूद थे।


मैथिली ठाकुर ने खुद क्या कहा?

जबलपुर दौरे पर पहुंचीं मैथिली ठाकुर से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा:

“मैं भी टीवी पर ये खबरें देख रही हूं। हाल ही में बिहार में मेरी नित्यानंद राय जी और विनोद तावड़े जी से मुलाकात हुई थी। हमने बिहार के भविष्य को लेकर बातें कीं, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। देखते हैं आगे क्या होता है।”

अपने राजनीतिक रुझान को लेकर उन्होंने साफ कहा,

“मैं अपने गांव के क्षेत्र से चुनाव लड़ना पसंद करूंगी, क्योंकि उस जगह से भावनात्मक जुड़ाव है।”

जब उनसे यह पूछा गया कि बिहार चुनाव में वे किसे समर्थन देंगी, तो उन्होंने फिलहाल किसी तरह की राजनीतिक प्रतिबद्धता जताने से इनकार करते हुए कहा:

“मैं इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। हां, देश के विकास में जितना संभव हो, योगदान देने के लिए तैयार हूं।”


बदले बिहार में लौटने की चाह

यह भी कहा जा रहा है कि वर्ष 1995 में, जब बिहार में लालू यादव का शासन आया था, तब मैथिली ठाकुर का परिवार बिहार छोड़कर बाहर चला गया था। लेकिन अब बदलते बिहार की तस्वीर और विकास की रफ्तार देखकर परिवार की यह होनहार बेटी एक बार फिर अपने राज्य की सेवा करने की इच्छा लेकर बिहार लौटने को तैयार दिख रही हैं।


क्या मैथिली ठाकुर बनेंगी बीजेपी का नया चेहरा?

बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी राज्य में युवा, लोकप्रिय और साफ-सुथरी छवि वाले चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में मैथिली ठाकुर का नाम इस रणनीति में फिट बैठता है।
उनकी लोकप्रियता, सांस्कृतिक जड़ें, और परिवार की सामाजिक स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी बना सकती है — खासकर ग्रामीण, महिला और युवा वोटरों के बीच।


📌 फिलहाल निष्कर्ष?

हालांकि, अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या स्वयं मैथिली ठाकुर की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे ये साफ है कि उनके राजनीति में प्रवेश की संभावनाएं नकारा नहीं जा सकतीं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले अगर मैथिली ठाकुर सियासत में उतरती हैं, तो यह राज्य की राजनीति को एक नया आयाम दे सकता है — जहां भक्ति के सुर अब जनसेवा के मंच पर गूंज सकते हैं।

Physics Wala Online Coaching Class मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में सरस आजीविका मेले का किया उद्घाटन, 2.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में सरस आजीविका मेले का किया उद्घाटन, 2.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

ऋषिकेश, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में आयोजित “सरस आजीविका मेला” में प्रतिभाग करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) की 12 आर्थिक गतिविधियों हेतु 1.20 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही, 10 अन्य सीएलएफ के लिए प्रस्तावित 1 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों का शिलान्यास भी किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने “Rising Tehri – Physics Wala Online Coaching Class” का भी उद्घाटन किया। इस पहल के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं जेईई, नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अपने गांव-घर में रहते हुए ऑनलाइन माध्यम से कर सकेंगे।


“ग्रामोत्थान परियोजना” की पहल की सराहना

मुख्यमंत्री ने इस मेले में ग्राम्य विकास विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा संचालित ग्रामोत्थान परियोजना की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल ग्रामीण विकास को गति देने के साथ ही महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।


आजीविका मेले से “वोकल फॉर लोकल” को मिला नया आयाम

मुख्यमंत्री ने मेले में उपस्थित स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और बड़ी संख्या में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा,

“यह मेला हमारी ग्रामीण संस्कृति, परंपरा, कौशल और उद्यमिता को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को साकार करने में सहयोगी बन रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि इन मेलों के जरिए ग्रामीण कारीगर, महिला समूह, हस्तशिल्पी और कृषि उत्पादक अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। मेले में “स्वदेशी अपनाओ” थीम पर आधारित स्टॉल्स लोगों को स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का संदेश दे रहे हैं।


“स्वदेशी अपनाना, सपनों में निवेश करना है” – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो वह केवल एक वस्तु की खरीद नहीं होती, बल्कि वह हमारे ग्रामीण कारीगरों, मातृशक्ति और उद्यमियों के सपनों में सीधा निवेश होता है।

उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वदेशी पर टिकी है। यह मेला उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा।”


महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के ठोस कदम

मुख्यमंत्री श्री धामी ने बताया कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

  • “लखपति दीदी योजना” के अंतर्गत अब तक राज्य की 1.65 लाख महिलाएं लखपति बन चुकी हैं।
  • “मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना” के अंतर्गत 2000 स्टॉल्स के जरिए 5.5 करोड़ रुपये के उत्पादों का विपणन किया गया है।
  • “मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना” महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शुरू किए गए “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड के माध्यम से राज्य की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं।


5 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं स्वयं सहायता समूहों से

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 68,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनसे 5 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा 7,500 से अधिक ग्राम संगठन और 534 क्लस्टर लेवल संगठन भी गठित किए जा चुके हैं।


महिला किसानों को भी मिल रहा लाभ

महिला किसानों के विषय में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “फार्म लाइवलीहुड योजना” और “महिला किसान सशक्तिकरण योजना” के अंतर्गत 3 लाख से अधिक महिला किसानों के कौशल और क्षमता का विकास कर चुकी है।

  • 2.5 लाख एग्रीन्यूट्री गार्डन और किचन गार्डन स्थापित किए गए हैं।
  • 500 से अधिक फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध कराए गए हैं।
  • 5,000 से अधिक महिला किसान ऑर्गेनिक खेती से भी जुड़ी हैं।

इन प्रयासों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, और वे आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।


कार्यक्रम में गणमान्यजन रहे उपस्थित

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, श्री सुबोध उनियाल, अनेक स्वयं सहायता समूहों के सदस्य, ग्रामीण उद्यमी एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


📌 निष्कर्ष

सरस आजीविका मेला न केवल स्थानीय उत्पादों के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरा है, बल्कि यह महिलाओं और ग्रामीण समुदायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री की यह पहल उत्तराखंड को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और उद्यमशील राज्य बनाने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शाम में पंडित उल्हास कशालकर की सुरमयी प्रस्तुति ने मोहा मन

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हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शाम में पंडित उल्हास कशालकर की सुरमयी प्रस्तुति ने मोहा मन

देहरादून, विरासत साधना के अंतर्गत आज का दिन नृत्य, संगीत और संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चों ने नृत्य राग प्रतियोगिता में भाग लेकर दर्शकों को अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से चकित कर दिया। खास बात यह रही कि अधिकतर प्रस्तुतियां बालिकाओं की थीं, जिन्होंने नृत्य के माध्यम से अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत हुई सानिका बर्थवाल की प्रस्तुति से, जिन्होंने “बरसन लागी बदरिया रूम झूम के…” पर नृत्य कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद सेंट जोज़ेफ एकेडमी की प्रणिका झिल्डियाल, हैरिटेज स्कूल की समीक्षा नेगी, डुमरी एडुविला इंस्टीट्यूट की प्रकिता जखमोला, वेनहेल स्कूल की एशवेन नेगी व गौरी चमनवाल, सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल की आकृति मैठाणी, सेंट कबीर स्कूल की साहनवी बिजल्वाण व देवयाना कोठियाल, जीआईसी नथुवावाला के ध्रुव वर्मा, और न्यू ब्लूसूम स्कूल की तेजल त्यागी ने अपने-अपने अद्वितीय अंदाज़ में प्रस्तुति दी, जिन्हें देखकर दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

सेंट पेट्रिक स्कूल की एरिका रोज पिंटू की प्रस्तुति “सब सरकार तुम्हई से है…” ने माहौल को भावविभोर कर दिया। वहीं अस्मिता खेत्रपाल, शेम्या अग्रवाल, आराध्या बहुगुणा, स्वर्ण शिखा खंडूड़ी, अक्षिता राव, और ओजस्वी कुनवाल की प्रस्तुतियां भी बेहद सराही गईं। सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के उपरांत प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।


उज़्बेक लोकसंगीत की गूंज से गूंजा विरासत का मंच

आज की सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत हुई उज़्बेकिस्तान के मशहूर म्यूज़िकल ग्रुप की प्रस्तुति से, जिसने अपने पारंपरिक गीत-संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ग्रुप की अगुवाई कर रहीं थीं मुख्य कोरियोग्राफर फोतिमाबोनू उमरोवा, उनके साथ रहीं नर्तकियां लोला चोलिबोयेवा और रुशाना ओक्टामोवा, और गायन में शामिल हुए फ़ैक्सरिद्दीन ज़ोलनाज़रोव, इब्रोहिम उर्चिनोव और शाक्सज़ोद योल्दाशेव

इन कलाकारों ने अपने गीतों के माध्यम से न केवल उज़्बेक संस्कृति की झलक पेश की, बल्कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक सौहार्द का सुंदर संदेश भी दिया। उनके प्रस्तुत गीत “कट्टा अशुला” ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह पारंपरिक उज़्बेक शैली बिना वाद्य यंत्रों के प्रस्तुत की जाती है, जिसमें केवल स्वर और लय का उपयोग होता है।

तोकशिरबेक ख़ाविदोव, फ़ख़रिद्दीन नज़रोव और शहज़ाद युलदाशोव ने अपने एकल गायन से दर्शकों के दिल जीत लिए। “लड़की हसीन हो, लड़का जवान हो…” जैसे गीतों पर श्रोता भी सुरों के संग बह चले।


सरोद की सुरों से बंधी विरासत की शाम – प्रतीक श्रीवास्तव की प्रस्तुति ने लूटी वाहवाही

प्रसिद्ध सरोद वादक प्रतीक श्रीवास्तव ने जैसे ही अपने वाद्य की झंकार छेड़ी, सांस्कृतिक संध्या का वातावरण एकदम सुरमयी हो गया। उनके साथ तबला वादक शुभ महाराज की जुगलबंदी ने प्रस्तुति को और भी उत्कृष्ट बना दिया। उन्होंने राग श्याम कल्याण से आरंभ कर राग मेघ के साथ समापन किया, जो एक सशक्त संगीतमय यात्रा की तरह रहा।

प्रतीक का संगीत सफर मात्र 6 वर्ष की उम्र में आरंभ हुआ था, जब उनके दादा पंडित रवि चक्रवर्ती, मैहर घराने के प्रख्यात सरोद वादक, ने उन्हें सरोद की दीक्षा दी। इसके बाद उनके चाचा डॉ. राजीब चक्रवर्ती ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में वह पंडित अजय चक्रवर्ती और पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार से उन्नत शिक्षा ले रहे हैं।

प्रतीक श्रीवास्तव ने देश-विदेश में अनेक संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है और अपनी स्पष्ट तानों तथा लयकारी से संगीत जगत में विशेष पहचान बनाई है।


पंडित उल्हास कशालकर की गायकी ने रचा संगीत का जादू

सांस्कृतिक संध्या का सबसे बहुप्रतीक्षित क्षण तब आया जब मंच पर उपस्थित हुए हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के स्तंभ, पद्मश्री पंडित उल्हास कशालकर। रिमझिम बारिश और मौसम की चुनौती के बावजूद उनकी गायकी ने माहौल को सधा कर रखा।

उन्होंने अपने गायन की शुरुआत राग संपूर्ण मालकौंस से की और दो पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत कीं —

  • बड़ा ख़याल: “बराज रही…”
  • छोटा ख़याल: “कित ढूंढन जाऊं…”

दोनों ही बंदिशें विलंबित तीन ताल में थीं और उनकी प्रस्तुति में गायकी का गहराई से अनुभव किया गया।

पंडितजी के साथ मंच पर संगत कर रहे थे:

  • प्रो. ओजेश प्रताप सिंह – स्वर संगत एवं तानपुरा
  • डॉ. विनय मिश्रा – हारमोनियम
  • कौस्तुव स्वैन – तबला
  • अंशुमान भट्टाचार्य – तानपुरा

ग्वालियर, जयपुर और आगरा घरानों के अद्भुत समन्वय के लिए पहचाने जाने वाले पंडित उल्हास कशालकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तानसेन पुरस्कार और पंडित ओंकारनाथ ठाकुर पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। आज भी वे ITC संगीत अनुसंधान अकादमी में गुरु के रूप में कार्यरत हैं और युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सिखा रहे हैं।


निष्कर्षतः, विरासत महोत्सव की यह शाम कला, संगीत और संस्कृति का ऐसा संगम रही, जिसने देहरादून के सांस्कृतिक परिदृश्य को एक नई ऊंचाई दी।

युवा वर्ग के दिलो में धामी ने बढ़ाया अपना कद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवाओं के नाम भावनात्मक संदेश

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नेता वही जो सही समय पर नब्ज पकड़ ले फिर फैसला लेने का जूनून भी अगर युवा वर्ग के लिए जरुरी है तो कदम आगे बढ़ाये जाने में कोई हिचक नहीं होनी चहिये कुछ ऐसा ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलन कर रहे युवा छात्रों के बीच पहुंच कर एक सन्देश देने का काम किया जिससे धामी का कद युवा वर्ग के बीच एक नयी मिसाल बना है पहली बार राज्य का मुख्यमंत्री आंदोलन के बीच पंहुचा फिर वही किया जो युवा चाहते थे धामी के इस कदम ने सियासत कर रहे विपक्ष सहित उस राजनीति को भी खतम कर दिया जिसकी भूमिका बनायीं जा रही थी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का युवाओं के नाम भावनात्मक संदेश

“उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, हमारे शहीदों और आंदोलनकारियों का सपना है – एक ऐसा सपना, जो हर बेटे-बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए देखा गया था।”

आज जब प्रदेश के कुछ युवा सड़कों पर हैं, तो एक ‘मुख्य सेवक’ होने के नाते मेरा यह नैतिक दायित्व है कि हर आवाज़ को सुनूं, हर पीड़ा को समझूं और हर दिल तक पहुंचूं। आंदोलन कर रहे युवा भी हमारे अपने हैं, हमारे परिवार का हिस्सा हैं।

हमने उत्तराखंड को बेहतर बनाने का जो सपना देखा है, उसमें संवाद और विश्वास की सबसे बड़ी भूमिका है।
सरकार और युवा – हम सब एक ही परिवार हैं। और परिवार का मतलब होता है – हर सदस्य की भलाई।

नकल विरोधी कानून: युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए एक सख्त कदम

वर्ष 2023 में हमने पूरे देश में सबसे पहले और सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया।
यह कानून इस बात का प्रमाण है कि हम उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं।

लेकिन जैसा अक्सर होता है, कुछ लोग हर अच्छे प्रयास को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे लोग, जो कानून का उल्लंघन करते हैं या करवाते हैं – अब उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
ऐसे हाकिमों और उनके हाकमो को इस बार ऐसा सबक मिलेगा, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।

कोई भेदभाव नहीं, सिर्फ न्याय

मैं अपने सभी छात्रों को यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार की नीयत में कभी भी भेदभाव या मनभेद की भावना नहीं रही है।
हमारी नीतियां सबके लिए हैं – समान, निष्पक्ष और पारदर्शी।


चलें संवाद की राह पर, बढ़ें विश्वास के साथ

मैं सभी युवाओं से यही अपील करता हूं कि हम संवाद और विश्वास की राह पर आगे बढ़ें।
मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।
हमारा लक्ष्य एक है – उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना।

और यह सपना तभी पूरा होगा जब हम मिलकर चलेंगे, एक परिवार की तरह।

जय उत्तराखंड।
जय भारत।

परीक्षा विवाद में युवाओं के बीच पहुंचे सीएम धामी, सीबीआई जांच की संस्तुति

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परीक्षा विवाद में युवाओं के बीच पहुंचे सीएम धामी, सीबीआई जांच की संस्तुति

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को परेड ग्राउंड में आंदोलनरत युवाओं के बीच पहुंचकर उनकी चिंताओं को सीधे सुना और आश्वस्त किया कि सरकार उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की हालिया परीक्षा में हुए विवाद की CBI जांच की संस्तुति करेगी

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार युवाओं के मन में किसी भी प्रकार का संदेह या अविश्वास नहीं रहने देना चाहती। यही कारण है कि उन्होंने न केवल सीबीआई जांच के लिए सहमति दी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार की रुकावट जांच प्रक्रिया में नहीं आने दी जाएगी।


धरना स्थल पर पहुंचकर दिया भरोसा

परेड ग्राउंड में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच दोपहर बाद अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने कहा,

“यह बातचीत सचिवालय या कार्यालय में भी हो सकती थी, लेकिन मैंने स्वयं यहां आकर आपसे मिलने का निर्णय लिया, क्योंकि आपके संघर्ष और तकलीफ को महसूस करता हूं। मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं।”

उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने 25,000 से अधिक पारदर्शी भर्तियाँ की हैं, जिनमें कहीं से कोई शिकायत नहीं आई। सिर्फ एक मामले में शंका सामने आई है, और उसे भी गंभीरता से लिया जा रहा है।


एसआईटी जांच के साथ अब सीबीआई जांच भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी द्वारा जांचा जा रहा है और समिति ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। फिर भी, युवाओं की मांग को प्राथमिकता देते हुए अब सरकार CBI जांच की संस्तुति करने जा रही है।


युवाओं के सपनों का सम्मान

भावुक अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जानते हैं कि उत्तराखंड का युवा पढ़ाई पूरी कर सरकारी नौकरी का सपना देखता है।

“मैंने भी वही परिस्थितियां देखी हैं, उन्हीं गलियों से होकर आया हूं। मैं जानता हूं कि युवाओं के जीवन में सरकारी नौकरी का सपना कितना मायने रखता है।”


मुकदमे होंगे वापस, भरोसा बहाल होगा

आंदोलन के दौरान अगर किसी भी युवा पर मुकदमा दर्ज हुआ है, तो सरकार उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा,

“हम सबका लक्ष्य है कि अमृतकाल के इस दौर में उत्तराखंड देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बने। इसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अहम है।”


निष्कर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम दर्शाता है कि उनकी सरकार युवा हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। सीबीआई जांच की संस्तुति, मुकदमों की वापसी और धरना स्थल पर स्वयं पहुंचकर संवाद स्थापित करना – यह सभी निर्णय युवाओं के प्रति एक उत्तरदायी और जवाबदेह नेतृत्व की तस्वीर पेश करते हैं।