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केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, ऊखीमठ में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का सागर

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केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, ऊखीमठ में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का सागर

रुद्रप्रयाग — भगवान भोलेनाथ के दिव्य धाम श्री केदारनाथ के कपाट आज विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर सम्पूर्ण धाम में श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय कोंडे, बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल, तीर्थ पुरोहितगण और हजारों श्रद्धालु कपाट बंद होने की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के साक्षी बने।

वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई कपाट बंदी

सुबह चार बजे से ही केदारनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपाट बंद करने की प्रक्रिया आरंभ हुई। पूरे क्षेत्र में “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कपाट बंद होने के उपरांत बाबा केदारनाथ की डोली पारंपरिक विधि से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए रवाना हुई।

डोली यात्रा में उमंग और भक्ति का माहौल

डोली यात्रा के दौरान मार्ग के हर पड़ाव पर श्रद्धालु उमंग और भक्ति भाव से बाबा केदारनाथ के जयकारे लगाते नजर आए। डोली का पहला पड़ाव रामपुर में रहेगा, इसके बाद कल गुप्तकाशी पहुंचेगी।
25 अक्टूबर को यह पवित्र डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां अगले छह महीनों तक भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

ऊखीमठ में उत्सव का वातावरण

डोली के स्वागत को लेकर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विशेष तैयारियाँ की गई हैं। पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास से सराबोर है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु डोली के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

शीतकाल के लिए बंद हुये गंगोत्री धाम के कपाट, मुखबा के लिए रवाना हुई मा गंगा की डोली

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गंगोत्री धाम से मां गंगा की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रहेगी

उत्तरकाशी(उत्तराखंड): गंगोत्री धाम के कपाट छह माह शीतकाल के लिए अन्नकूट पर्व पर अभिजीत मूहूर्त में पूर्वाहन 11 बजकर 36 मिनिट पर विधिविधान के साथ बंद कर दिए गए हैं. सेना के बैंड एवं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों तथा गंगा मम्या की जय के उद्घोष के साथ गंगा जी की डोली यात्रा के साथ अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए रवाना हुई. इसके बाद अब मां गंगा की उत्सव डोली 6 महीने मुखबा गांव में प्रवास करेगी.

बुधवार सुबह से ही गंगोत्री धाम में अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था. तीर्थ पुरोहितों ने घाट पर गंगा जी का अभिषेक और आरती तथा मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की. हर्षिल से अर्मी सेना के जवानों ने यहां निशुल्क मेडिकल कैंप तथा लंगर लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा की.

यह मुहूर्त के अनुसार पूर्वाहन 11 बजकर 36 मिनट गंगोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. इसके साथ ही यहां से गंगा जी की भोग मूर्ति डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना हुई. इस दौरान पर शीतकाल में भी गंगोत्री धाम में ही साधनारत रहने वाले साधु संतो तथा मंदिर, आश्रम व होटलों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने गंगा जी को विदाई दी.

गंगोत्री धाम के तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया गंगोत्री धाम से मां गंगा की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रहेगी. यहा रातभर भजन कृतन का किया जाएगा. जिसके अगले दिन मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन के लिए मुखबा गांव में रहेगी. अब छाह माह के लिए मां गंगा के दर्शन मुखबा गांव में ही होगा. उन्होंने कहा इस बार हजारों श्रद्धालुओं के बीच गंगात्री धाम के कपाट बंद कर दिया है.

कपाट बंद होने के बाद भी जलता रहता है अखंड दीपक: गंगोत्री धाम के कपाट भले बंद हो जाएंगे, लेकिन यहां तांबे के एक बड़े दीपक में अखंड जोत जलती रहेगी. मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल बताते हैं कि मंदिर में ताबे का एक बहुत बड़ा दीपक बना हुआ है. उसमें तेल भरकर व अखंड जोत जलाकर जाते हैं, जब अगले वर्ष अक्षय तृतीय पर धाम के कपाट खुलेंगे तो वह अखंड जोत जलती हुई मिलती है. कपाट खुलने पर तीर्थयात्रियों को अखंड जोत के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है.

कहां है मुखबा: मुखबा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है. यह भागीरथी नदी के किनारे स्थित है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 8000 फीट है. उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से मुखबा की दूरी करीब 80 किलोमीटर है. चारों ओर से बर्फ की पहाड़ियों से घिरे मुखबा का सौंदर्य देखते ही बनता है.

चारधाम के कपाट बंद की तिथियां-

  • गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को सुबह 11:36 बजे बंद
  • केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे बंद किए जाएंगे.
  • यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन यानी 23 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे
  • बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे.

शिक्षकों के तबादलों पर अटका फैसला, शिक्षा विभाग को मिले तीन हजार से अधिक आवेदन

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बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों ने धारा 27 के तहत की तबादले की मांग, अनिवार्य तबादले न होने से नाराजगी बढ़ी

देहरादून। प्रदेश में शिक्षकों के तबादले को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। शिक्षा विभाग को धारा 27 के तहत अब तक तीन हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें बेसिक शिक्षा के करीब 1500 और माध्यमिक शिक्षा के लगभग 1800 शिक्षक शामिल हैं।

इस साल शिक्षा विभाग ने अनिवार्य तबादले लागू नहीं किए, जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि अन्य विभागों में कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले किए गए, लेकिन शिक्षा विभाग में इस प्रक्रिया को टाल दिया गया।

शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि विभाग को भी अन्य विभागों की तरह अनिवार्य तबादले लागू करने चाहिए थे। हालांकि, शिक्षा विभाग ने इस बार धारा 27 के तहत ही तबादलों की प्रक्रिया शुरू की है और इसी आधार पर आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बेसिक शिक्षा में लगभग 1500 शिक्षकों ने आवेदन किया है, जबकि माध्यमिक शिक्षा में 800 प्रवक्ता और करीब एक हजार एलटी शिक्षक तबादले की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन आवेदनों पर विचार कर जल्द प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति करेगी सिफारिश

शिक्षकों के तबादलों पर अंतिम निर्णय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित है। यह समिति धारा 27 के तहत प्राप्त आवेदनों पर सिफारिश करती है, जिसके बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी से तबादले किए जाते हैं।

क्या है धारा 27

धारा 27, राज्य के तबादला एक्ट का वह प्रावधान है जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को तबादले का अवसर दिया जाता है। इसमें वे कर्मचारी शामिल होते हैं जो सामान्य श्रेणी के तबादले के पात्र नहीं हैं — जैसे गंभीर रूप से बीमार या अन्य विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारी।

शिक्षक संघ ने चेताया आंदोलन से

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा कि संगठन की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शिक्षकों के तबादले जल्द किए जाएं। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने कहा — “यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

दून अस्पताल के सामने फायरिंग करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, गोली लगने से युवक हुआ था घायल

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने युवक को मारी थी गोली, दो आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे, अब खाएंगे जेल की हवा

देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने फायरिंग की घटना को अंजाम देने वाले 2 आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है. कोतवाली नगर पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया है. इसके साथ ही फायरिंग की घटना में शामिल अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश जारी है.

क्या था मामला? बता दे कि बीती 19 अक्टूबर को सुबह करीब 3:30 बजे कोतवाली नगर पुलिस को एक सूचना मिली थी. जिसमें बताया गया कि दून अस्पताल के सामने फायरिंग की घटना हुई है. सूचना मिलते ही तत्काल कोतवाली नगर पुलिस मौके पर पहुंची. जहां उत्तरकाशी के पुरोला निवासी दीशांत राणा को गोली लगी थी. जिसे घायल अवस्था में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

वहीं, घायल दीशांत के साथी आयुष्मान कौशिक निवासी रायपुर (देहरादून) से पुलिस ने पूछताछ की. जिसमें आयुष्मान ने पुलिस को बताया कि कैनाल रोड स्थित एक कैंटीन में उनका विवाद कव्यांश धामा, रोहन आर्य और विशाल तोमर से हो गया था. विवाद होने और इसी रंजिश के चलते उस पर गोली चलाई गई.

आयुष्मान ने बताया कि कव्यांश धामा के पक्ष से दो अन्य अज्ञात व्यक्ति ने दून अस्पताल के बाहर पहुंचकर उनके साथी दीशांत राणा को गोली मारी, फिर मौके से फरार हो गए. वहीं, घायल दीशांत के भाई शिवम सिंह राणा निवासी राजावाला, सेलाकुई (देहरादून) की तहरीर पर थाना कोतवाली नगर पर मुकदमा दर्ज किया गया.

क्या बोली पुलिस? वहीं, नगर कोतवाली प्रभारी प्रदीप पंत ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन किया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मौके का निरीक्षण किया. साथ ही आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई.

फायरिंग और षड्यंत्र में शामिल दो आरोपी गिरफ्तार: इसी कड़ी में लगातार आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश के दौरान घटना में शामिल 2 आरोपी रोहन आर्य और विशाल तोमर को पुलिस की टीम ने फायरिंग की घटना व षड्यंत्र रचने की भूमिका में शामिल पाए जाने पर गिरफ्तार किया गया. जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया.

अन्य आरोपियों की तलाश के लिए 4 टीमें दे रही दबिश: कोर्ट के आदेश पर दोनों आरोपियों को जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया. साथ ही फायरिंग की घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के लिए 4 टीम देहरादून समेत अन्य जिलों में लगातार दबिश दे रही है. ताकि, आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके.

शीतकालीन चारधाम यात्रा पर आने वालों की बल्ले-बल्ले, जीएमवीएन ने आधा किया किराया

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धामी सरकार उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को 12 महीने चलाना चाहती है, जीएमवीएन के फैसले से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद

देहरादून: यात्रा के दौरान श्रद्धालुओ को राहत देने के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम ने कुछ खास फैसला किया है. दरअसल जीएमवीएन शीतकाल यात्रा को बढ़ावा देने के मकसद के साथ आवासीय दरों में भारी कटौती कर रहा है. निगम के फैसले से शीतकाल में आने वाले श्रद्धालुओं को अब आवासीय सुविधा में आधा किराया ही देना होगा.

शीतकालीन चारधाम यात्रा को ताकत देगा जीएमवीएन का ये फैसला: उत्तराखंड में चारों धामों के कपाट बंद होने के बाद अब सरकार शीतकालीन यात्रा को नए रूप में बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद गढ़वाल मंडल विकास निगम ने शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहन देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. निगम ने अपने विभिन्न होटलों की आवासीय दरों में 50 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की है.

जीएमवीएन ने श्रद्धालुओं के लिए आधा किया किराया: निगम के अंतर्गत उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में स्थित होटलों में यह छूट दी जाएगी. शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान इन जिलों में श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक रहता है. जीएमवीएन का यह फैसला मुख्यमंत्री के उस विजन को बल देता है, जिसके तहत प्रदेश में बारहों महीने तीर्थाटन और पर्यटन को सक्रिय रखने का लक्ष्य रखा गया है.

यहां होती है चारों धामों के देवी देवताओं की शीतकाल में पूजा: शीतकालीन चारधाम यात्रा के अंतर्गत गंगोत्री धाम की पूजा हरसिल के मुखबा गांव में, यमुनोत्री धाम की पूजा खरसाली में, केदारनाथ धाम की पूजा रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में और बदरीनाथ धाम की पूजा पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर और जोशीमठ में की जाती है. इसी अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन स्थलों की यात्रा करते हैं. बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद, भगवान बदरी विशाल की उत्सव-मूर्ति पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर में विराजमान होती है. आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में स्थापित होती है.

जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक ने ये कहा: गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा ने बताया कि-

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में शीतकालीन यात्रा को सफल और आकर्षक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. निगम ने अपने होटल और गेस्ट हाउसों में मौजूदा दरों पर 50 फीसदी तक की छूट देने का निर्णय लिया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु व पर्यटक शीतकालीन यात्रा में सम्मिलित हो सकें.
-विशाल मिश्रा, गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक-

प्रदेश सरकार 12 महीने धार्मिक पर्यटन कराना चाहती है: प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि चारधाम यात्रा केवल छह महीनों तक सीमित न रहे, बल्कि शीतकाल में भी धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले. पिछले कुछ वर्षों में शीतकालीन यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं का रुझान तेजी से बढ़ा है और अब सरकार इस यात्रा को राज्य की स्थायी धार्मिक-पर्यटन परंपरा के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है.

केदारनाथ धाम पहुंचे मुख्य सचिव, पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण, जानिये क्या कहा

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मुख्य सचिव ने कहा अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए.

रुद्रप्रयाग: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान बाबा केदारनाथ के दर्शन किए. साथ ही मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया. इस अवसर पर उन्होंने धाम क्षेत्र में विभिन्न फेज़ों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य निष्पादन की समीक्षा की.

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से धाम में चल रहे सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्य और धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि कल, 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं. उन्होंने निर्देश दिए कि कपाट बंद होने के बाद भी धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी की जाये.

मुख्य सचिव ने कहा अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए. उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं की पूर्व योजना तैयार की जाए, ताकि अगले यात्रा सीजन में यात्रियों को और भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें. उन्होंने बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा, और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया. इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय और सहयोग से कार्य कर रहे हैं.

मुख्य सचिव ने धाम क्षेत्र में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि केदारनाथ धाम आज पूरे देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है. उन्होंने कहा कि सरकार , प्रशासन का लक्ष्य केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और सुविधा का संतुलित संगम सुनिश्चित करना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो सके.

रुद्रप्रयाग चोपता विदेशी पर्यटकों से मारपीट मामला, पुलिस ने बताई सच्चाई, दर्ज किया केस

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विदेशी पर्यटकों ने होमस्टे मालिक पर 8 लाख रुपये की नकदी और अन्य कीमती सामान चुराने का भी आरोप लगाया है.

देहरादून: रुद्रप्रयाग के चोपता क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां विदेशी पर्यटकों के साथ मारपीट, लूटपाट और जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. जानकारी के अनुसार, चार दिनों से चोपता स्थित बंकर हाउस होमस्टे में ठहरे कुछ विदेशी यात्री जब चेक आउट करने लगे, तो होमस्टे के मालिक और उसके स्टाफ ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया.

पीड़ित पर्यटकों ने किसी तरह अपनी जान बचाई. इसके बाद विदेशी टूरिस्ट्स ने मंडल चौकी में शरण ली. इसके बाद आनन फानन में उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी. एक पर्यटक ने आरोप लगाया कि होमस्टे मालिक ने उनके करीब 8 लाख रुपये की नकदी और अन्य कीमती सामान भी चुरा लिए हैं. उन्होंने होमस्टे संचालक के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की है.

मामला विदेशी टूरिस्ट से जुड़ा होने के बाद बेहद गंभीर हो गया है. जिसे पुलिस गंभीरता से ले रही है. मामले में पुलिस ने पर्यटकों की शिकायत दर्ज कर ली है. घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्र की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि पर्यटन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं.

थाना अध्यक्ष उखीमठ मुकेश चौहान ने बताया मामला गाइड और होमस्टे संचालक के बीच का है. दोनों के बीच ही बहस हुई है. फिलहाल इस मामले में लोगों पक्षों को थाने बुलाया गया है. मामले को सुलझाने की कोशिश की जा रही है.

चोपता उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक रमणीक पर्यटन स्थल है. हिमालय पर्वत की तलहटी पर बसे इस छोटे से हिल स्टेशन को छोटा स्विजरलैंड भी कहा जाता है. यह अपनी खूबसूरती, हरे खास के मैदान और बर्फबारी के लिए जाना जाता है. यहां बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. जिसमें विदेशी टूरिस्ट भी शामिल होते हैं. यहां आकर आप खूबसूरत हरे- बुग्यालों का दीदार करने के साथ ही ट्रैकिंग का लुत्फ भी उठा सकते हैं.

राजनैतिक कौशल से विरोधियो की लंका तक लाँघ गए पुष्कर सिंह धामी

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राजनैतिक कौशल से विरोधियो की लंका तक लाँघ गए पुष्कर सिंह धामी राजनीतिक सूझ-बूझ से विरोधियों को पछाड़ते हुए आगे बढ़े पुष्कर सिंह धामी हर वर्ग में बनी एक मिसाल, जिसे विरोधी भी मानते हैं

देहरादून, उत्तराखंड — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी सादगी और रणनीतिक कौशल ने उन्हें हर वर्ग में लोकप्रिय बना दिया है। उन्होंने न केवल प्रदेश की बागडोर युवा ऊर्जा के साथ संभाली, बल्कि कठिन परिस्थितियों में अपने नेतृत्व कौशल का परिचय देते हुए विरोधियों तक को अपना मुरीद बना लिया।

राज्य के रजत जयंती वर्ष में, नवंबर का महीना उत्तराखंड के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसी अवधि में सरकार कई महत्वपूर्ण फैसलों की ओर अग्रसर होती दिखाई दे रही है।

सबसे युवा मुख्यमंत्री, सबसे बड़ी चुनौतियाँ

चार वर्ष पूर्व जब धामी ने सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में उत्तराखंड की कमान संभाली, तब उनके सामने कई जटिल चुनौतियाँ थीं। शुरुआती दिनों में ही विधानसभा चुनाव में सफलता के बाद उन्हें युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी मिली। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों से उपजा संकट ऐसा ही एक मुद्दा था, जिसे उन्होंने न केवल सुलझाया, बल्कि अपनी निर्णय क्षमता और राजनीतिक परिपक्वता से सबको प्रभावित किया।

आपदा के समय, हमेशा सबसे पहले मौके पर

उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे से लेकर चमोली और थराली जैसी प्राकृतिक आपदाओं तक, धामी हर बार सबसे पहले राहत कार्यों की निगरानी के लिए मौके पर पहुँचे। वर्षा काल के दौरान देहरादून में हुई भारी बारिश और सहस्रधारा क्षेत्र के मझाड़ा गांव की त्रासदी में भी मुख्यमंत्री ने प्रभावितों से सीधा संवाद स्थापित कर राहत एवं पुनर्वास के कार्यों में तेज़ी का आश्वासन दिया।

राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण

मुख्यमंत्री धामी ने राजनीति में विनम्रता और परिपक्वता का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए दीपावली के अवसर पर सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से भेंट की — चाहे वे भाजपा के हों या कांग्रेस के। उन्होंने भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत से भी आत्मीय मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं।

हरीश रावत की कार दुर्घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने फ़ौरन हालचाल लिया और बाद में व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका हाल जाना, जो राजनीतिक शिष्टाचार की एक बेहतरीन मिसाल मानी जा रही है।

कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और ‘स्वदेशी अपनाओ’ का संदेश

दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी संवाद कायम रखा। उन्होंने सभी जिलाध्यक्षों से वर्चुअल माध्यम से बात की, उन्हें दीपावली की बधाई दी और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने की अपील की।

इस दौरान ‘स्वदेशी अपनाओ’ अभियान को भी उन्होंने विशेष रूप से बढ़ावा दिया। बाजारों में जाकर स्वदेशी उत्पादों को खरीदा और जनता को भी देसी उत्पादों को अपनाने का प्रेरणादायक संदेश दिया।

निष्कर्ष:

पुष्कर सिंह धामी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सादगी, संजीदगी और सक्रियता के साथ यदि नेतृत्व किया जाए तो विरोधी भी आपके प्रशंसक बन सकते हैं। उनके राजनीतिक कौशल, संवेदनशीलता और जनता से जुड़ाव ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

पुलिस कर्मियों को धामी सरकार देगी विशेष रजत जयंती पदक

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पुलिस कर्मियों को धामी सरकार देगी विशेष रजत जयंती पदक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस स्मृति दिवस परेड के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग किया

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के सुअवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस के समस्त कार्मिकों को एक विशेष रजत जयंती पदक किया जाएगा प्रदान

आगामी 3 वर्षों में पुलिस कर्मियों के आवासीय भवनों के निर्माण के लिए दिए जाएंगे प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को पुलिस लाइन, देहरादून में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिस जवानों के परिजनों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के सुअवसर पर उत्तराखण्ड पुलिस के समस्त कार्मिकों को एक विशेष रजत जयंती पदक प्रदान किए जाने, आगामी 3 वर्षों में पुलिस कर्मियों के आवासीय भवनों के निर्माण हेतु प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए की धनराशि दी जाने, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पुलिस कल्याण निधि के अन्तर्गत वर्तमान में प्रावधानित ढाई करोड़ रुपए की धनराशि को पुनरीक्षित करते हुए आगामी एक वर्ष के लिए साढ़े चार करोड़ रुपए किए जाने एवं भवाली, नैनीताल, ढालमल्ला, काण्डा, बागेश्वर, नैनीडांडा, धुमाकोट, पौड़ी, घनसाली, टिहरी, सतपुली और पौड़ी में एसडीआरएफ के जवानों हेतु 5 बैरकों का निर्माण कराए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों के पुलिस बलों और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर है। अपने इस उत्तरदायित्व को  निभाते हुए बीते एक वर्ष में, संपूर्ण भारत में 186 अर्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों ने अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के 4 वीर सपूत भी शामिल हैं। सभी वीर बलिदानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद हैं, उनका बलिदान हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, राज्य की पुलिस व्यवस्था को और भी अधिक सक्षम और संसाधन युक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार, पुलिस बल के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत  QRT का गठन किया गया है। सरकार ने विगत तीन वर्षों में पुलिस विभाग के भवनों के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है। ये राशि पूर्व वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है। प्रशासनिक भवनों के साथ 688 आवासीय भवनों का निर्माण कार्य गतिमान है। शीघ्र ही हम 120 नए आवासों का निर्माण भी प्रारंभ करने जा रहे हैं। सरकार ने स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने के लिए जवानों के बैरक मैस और कार्यस्थलों के अपग्रेडेशन के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है। सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। सरकार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत समस्त पुलिस कर्मियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस कर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है। इस वर्ष 356 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी विभिन्न श्रेणियों में पदोन्नत किए गए हैं।  विभिन्न श्रेणी के 115 रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए भी कार्यवाही गतिमान है जिन्हें शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इस वर्ष हमारे 215 कर्मियों को विशिष्ट कार्य एवं सेवा के लिए विभिन्न पदक एवं सम्मान चिन्हों से अलंकृत किया गया है।  राज्य सरकार पुलिसकर्मियों की कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। प्रशिक्षण संस्थानों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करा रहे हैं। पीटीसी नरेंद्र नगर को सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। AI और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण के लिए पुलिस कर्मियों को देश के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस कर्मियों के वेतन, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, और अवकाश से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को  ऑनलाइन कर दिया गया है। सरकार ने आपदा राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एसडीआरएफ की एक नई कंपनी की भी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत 162 नए पदों का सृजन किया गया है। पुलिस उपाधीक्षक सीधी भर्ती के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों को वर्तमान में पीटीसी नरेंद्र नगर में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उप निरीक्षक के 222 पदों के साथ-साथ 2000 सिपाहियों की भर्ती भी प्रक्रियाधीन है।

मुख्यमंत्री ने कहा मृतक पुलिस कर्मियों के परिवारों को सहयोग और संबल प्रदान करने के लिए इस वर्ष मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत 136 आश्रित परिवारों को विभिन्न पदों पर नियुक्तियां प्रदान की हैं। राज्य में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए “उत्तराखण्ड खेल नीति” के तहत कुशल खिलाड़ियों के लिए पुलिस विभाग में विशेष कोटे के माध्यम से भर्तियों का प्रावधान भी किया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए समय – समय पर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा वीर जवानों की वीरता और उनके समर्पण की याद में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्थापना की है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमारे जवानों की वीरता और साहस की गाथाओं से परिचित कराएगा। मुख्यमंत्री ने कहा हमारे पुलिस जवान हर परिस्थिति में अदम्य साहस का अभूतपूर्व परिचय देते हैं। उन्होंने कहा हमारा प्रदेश भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है ऐसे में राज्य की शांति और सुरक्षा बनाए रखने में हमारे पुलिसकर्मियों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष उत्तराखंड पुलिस ने कांवड़ यात्रा में लगभग 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और चारधाम यात्रा में करीब 50 लाख से अधिक भक्तों को सुरक्षित और सुगम यात्रा एवं दर्शन कराने में अद्वितीय योगदान दिया है। वी.आई.पी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के साथ ही राष्ट्रीय खेलों और राज्य में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने सराहनीय कार्य किया। उन्होंने कहा राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे का सामना भी हमारी पुलिस ने अदम्य साहस और तत्परता से किया। जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

मुख्यमंत्री ने कहा आधुनिक युग में अपराध का स्वरूप बदल रहा है, पुलिस की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो रही है। चोरी, डकैती, हत्या और महिला अपराधों के साथ नशा और साइबर अपराध जैसे नए खतरों का भी सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने पुलिस की एक त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक फोर्स का गठन किया है। इस फोर्स ने बीते तीन वर्षों में 6199 से अधिक नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की है, और लगभग 275 करोड़ रुपये से अधिक के नारकोटिक पदार्थ भी बरामद किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारे लिए साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ।प् के आने के बाद पुलिस को इस दिशा में और भी अधिक सजग रहना होगा क्योंकि साइबर अपराधों का स्वरूप अब दिन-प्रतिदिन बदल रहा है। उन्होंने कहा हमें साइबर अपराधियों से मुकाबला करने के लिए एक कदम आगे रहना होगा, और इसके लिए हमारी पुलिस को तकनीकी ज्ञान में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा पुलिस फोर्स ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए 63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि, पीड़ितों को लौटाकर उत्तराखंड पुलिस पर जनता के विश्वास को मजबूत किया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, बृजभूषण गैरोला, श्रीमती सविता कपूर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, पूर्व डीजीपी  अनिल रतूड़ी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्यपाल गुरमीत सिंह की आध्यात्मिक यात्रा, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के किए दर्शन

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उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचकर की विशेष पूजा अर्चना, पुनर्निर्माण से लेकर मास्टर प्लान के कामों की ली जानकारी

रुद्रप्रयाग/चमोली: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह आध्यात्मिक यात्रा पर हैं. जिसके तहत वे सबसे पहले केदारनाथ धाम पहुंचे. जहां उन्होंने बाबा केदार के दर्शन किए. साथ ही विशेष रुद्राभिषेक और पूजन कर विश्वकल्याण, मानवता की समृद्धि एवं उत्तराखंड के सतत विकास के लिए आशीर्वाद मांगा. इसके बाद वे बदरीनाथ धाम पहुंचे और बदरी विशाल के दर्शन किए.

आज यानी 21 अक्टूबर को राज्यपाल गुरमीत सिंह के केदारनाथ धाम पहुंचने पर अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने वीआईपी हेलीपैड पर पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राज्यपाल पैदल मार्ग से मंदिर प्रांगण पहुंचे. जहां उन्होंने बाबा केदार का अभिषेक, पूजा और अर्चना की. उन्होंने बाबा केदार से नागरिकों की खुशहाली और राज्य की उन्नति की कामना की.

तीर्थ पुरोहित समाज से की मुलाकात: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित समाज से भेंट की. पुरोहितों ने पारंपरिक मंत्रोच्चारण और पूजा-विधि के साथ राज्यपाल का स्वागत किया. राज्यपाल ने इसे अत्यंत आध्यात्मिक एवं भावनात्मक अनुभव बताया. बाबा केदार की पूजा के बाद राज्यपाल ने मंदिर प्रांगण में पहुंचे श्रद्धालुओं का अभिवादन किया. उन्होंने ‘बाबा केदारनाथ की जय’ के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया.

केदारघाटी का प्रत्येक कण शिवमय है. यहां के पर्वतों में भगवान शिव की उपस्थिति का अनुभव होता है. इस पवित्र भूमि पर कदम रखते ही मन ध्यानमग्न हो जाता है.“- गुरमीत सिंह, राज्यपाल, उत्तराखंड

राज्यपाल ने पुनर्निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान डीडीएमए अधिशासी अभियंता विनय झिंकवाण ने राज्यपाल को धाम में चल रहे निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ज्यादातर पुनर्निर्माण काम पूरे हो चुके हैं. बाकी बचे काम भी अंतिम चरण में हैं.

वहीं, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि पिछले तीन सालों में यात्रा प्रबंधन एवं पुनर्निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने जिला प्रशासन, मंदिर समिति, पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सभी सहयोगी एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि ‘चारधाम यात्रा को सफल, सुरक्षित एवं श्रद्धालु-अनुकूल बनाने में आप सभी की भूमिका सराहनीय है.

तीर्थ पुरोहितों का भवन निर्माण काम पूरा: राज्यपाल गुरमीत सिंह को अवगत कराया कि तीर्थ पुरोहितों के लिए बनाए जा रहे भवनों का निर्माण कार्य ज्यादातर पूरा हो चुका है. भूमि और भवन आवंटन से जुड़े मुद्दों का निराकरण किया जा चुका है. राज्यपाल ने इस समन्वित प्रयास के लिए मंदिर समिति और जिला प्रशासन की विशेष रूप से प्रशंसा की.सेवाभाव और समर्पण के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना: वहीं, राज्यपाल ने केदारनाथ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों से मुलाकात उनका मनोबल बढ़ाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस एवं सेवा दल सभी श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा अनुभव कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और सेवा भाव से काम करें.

बदरीनाथ धाम पहुंचकर की पूजा अर्चना: केदारनाथ धाम के बाद राज्यपाल गुरमीत सिंह बदरीनाथ धाम पहुंचे. जहां उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर विशेष पूजा में प्रतिभाग किया. उन्होंने करीब 1 घंटे का समय बदरीनाथ धाम में व्यतीत किया. उनके बदरीनाथ पहुंचने पर पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया.

वहीं, चमोली डीएम गौरव कुमार ने मास्टर प्लान के कार्यों से राज्यपाल को अवगत कराया. इस पर राज्यपाल ने सिविक एमीनिटी सेंटर, सिविक कम्युनिटी सेंटर, अराइवल प्लाजा और अस्पताल बिल्डिंग की प्रगति पर संतोष जताया. साथ ही मास्टर प्लान के कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा यहां जिस तरह का विकास हो रहा है, वो हमें विश्व गुरु, आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जा रहा है.

23 अक्टूबर को केदारनाथ और 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट होंगे बंद: बता दें कि केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. जिसके बाद 6 महीने तक केदारनाथ धाम में सन्नाटा सा पसर जाएगा. वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जिसके तहत बीती 18 अक्टूबर को केदारनाथ धाम के क्षेत्र रक्षक भुकुंट भैरवनाथ के कपाट बंद हो चुके हैं. वहीं, 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे.