देहरादून। उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने जा रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार पुराने चेहरे पर भरोसा जताएगी या फिर किसी नए प्रतिनिधि को राज्यसभा भेजेगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा ने उत्तराखंड में राज्यसभा के लिए अब तक सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को अवसर दिया है। इसी वजह से इस बार भी पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।
राज्य की राजनीति में वैश्य समाज को प्रभावशाली माना जाता है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी और अन्य शहरी क्षेत्रों की कई विधानसभा सीटों पर इस समाज की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना जताई जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा वैश्य समाज से ही किसी चेहरे को राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि 25 सितंबर को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में राज्यसभा चुनाव के लिए प्राप्त दावेदारियों पर चर्चा होगी और तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। अंतिम प्रत्याशी का चयन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बहाने भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को भी साधने का प्रयास कर सकती है। ऐसे में पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
फिलहाल राज्यसभा सीट को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है और 25 सितंबर की कोर कमेटी बैठक के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है। अगर भाजपा कोई नया चेहरा लाए तो नया समीकरण देखने को मिलेगा वैसे माना जा रहा है जल्द मीटिंग के बाद उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नाम को लेकर दिल्ली में चर्चा करेंगे अगले सप्ताह उनका प्रवास दिल्ली हो सकता है उत्तराखंड में आगामी कई कार्यक्रम को लेकर भी वो भाजपा के बड़े नेताओं से मिल सकते है

