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देहरादून में पारा 41 डिग्री, लू के असर से अघोषित कर्फ्यू लागू, हेल्पलाइन नंबर जारी

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Dehradun update – गर्मी ने देहरादून में अब जीना मुश्किल कर दिया है। तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच गया है, फलस्वरूप शहर में जीवन ठहर-ठहर कर चल रहा है। दोपहर को सड़कें सूनी पड़ी हैं, क्योंकि धूप और लू ने बाहर आने से रोक दिया है। इतना तेज मौसम हो गया है कि लोग घर से तभी निकलते हैं जब कोई चारा नहीं रहता। कहीं-कहीं ऐसा लगता है मानो कर्फ्यू लगा दिया गया हो। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार इंसान और खुले में काम करने वाले सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। प्रशासन ने सलाह दी है – लू से बचाव के उपाय अपनाए जाएं, जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन पर बात की जाए। ऊंचे तापमान के बीच स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन तैयार खड़े हैं

देहरादून में गर्मी और लू का असर

गर्मी के चलते देहरादून में हवा झुलसा रही है, इंसानों को आम जिंदगी जीने में तकलीफ हो रही है। बाहर घूमना अब एक बोझ बन चुका है, खासकर उस वक्त जब सूरज अपनी चरम सीमा पर होता है। इधर-उधर लोगों की आवाजाही टिक गई है, बाजारों में पहले जैसी भीड़भाड़ अब नजर नहीं आती

मुख्य जानकारी विवरण
स्थान देहरादून, उत्तराखंड
तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस तक
मुख्य असर दोपहर में सड़कों और बाजारों में सन्नाटा
खतरा हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी
सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और मजदूर वर्ग
  • गर्मी के मौसम में धूप में घंटों रहने से तबीयत खराब हो सकती है।
  • पसीना बहते ही शरीर को पानी की ज़रूरत महसूस होने लगती है।
  • बाहर काम करने वालों को सावधानी रखना चाहिए।
  • गर्मी के समय छोटे बच्चों को धूप में लंबा समय नहीं रखना चाहिए।
  • गर्मी के मजबूत झोंकों से सिर में तेज दर्द आ सकता है। धूप में खड़े रहने पर चक्कर भी आए, ऐसा कई बार होता है। कुछ लोगों को उल्टी भी शुरू हो जाती है।

हेल्पलाइन नंबर और बचाव के जरूरी उपाय

गर्मी के बढ़ते खतरे के मद्देनजर जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर घोषित कर दिए हैं। कहीं भी कोई तकलीफ हो, शिकायत हो या फिर कोई समस्या उठ खड़ी हो – इन नंबरों पर सीधा संपर्क करना चाहिए

सहायता / सावधानी जानकारी
हेल्पलाइन नंबर 2726066, 2626066
व्हाट्सएप नंबर 7534826066
आपदा कंट्रोल रूम 0135-2726066 / 1077
बाहर निकलने से बचें सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक
जरूरी पेय पदार्थ पानी, छाछ, नींबू पानी और ओआरएस
  • बाहर जाते वक्त सिर पर कुछ ऐसा डालें जो धूप से बचाए।
  • हो सके तो टोपी का इस्तेमाल कर लें। कभी-कभी गमछा भी काम आ जाता है।
  • अगर छाता मिल जाए, तो उसे भी ले लेना चाहिए।
  • पानी का सेवन दिनचर्या में बहुत ज़्यादा होना चाहिए।
  • सुबह के समय धूप में जाना हो तो पहले कुछ खाएं।
  • गरमी में साँस लेने वाले कपड़े चुनना बेहतर होता है।

देहरादून में गर्मी का यह असर लोगों के लिए चेतावनी है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए प्रशासन की सलाह का पालन करना, पर्याप्त पानी पीना और दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना बेहद जरूरी है।

उत्तराखंड वाइल्डफायर: बागेश्वर के जंगल में आग लगी, धुएं से पूरा इलाका प्रभावित और घिरा हुआ है।

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Uttarakhand Wildfire – जंगल में आग लगने से बागेश्वर में अफरा-तफरी फैल गई। धुएँ की वजह से गांव वालों को सांस लेने में दिक्कत हो रही, जबकि पेड़ एक-एक कर जल रहे। इसके बाद SDRF के लोग और अधिकारी मौके पर पहुँच गए। कई किलोमीटर तक धुएँ का घेरा है, उसी के बीच आग पर काबू पाने के प्रयास चल रहे। हवा के झोंके ने आग को तेज कर दिया, जिसके कारण लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया। न सिर्फ जंगल को नुकसान हुआ, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के काम भी ठप हो गए। बचाव काम में वन विभाग के साथ आसपास के निवासी भी लगे हुए हैं। अब तक जो हुआ, वह दो तरफा है – प्रकृति का नुकसान और दैनिक जीवन में खलल।

उत्तराखंड वाइल्डफायर के कारण

बागेश्वर के जंगल में आग लगने के कई कारण हो सकते हैं। अधिक गर्मी, सूखा मौसम और अव्यवस्थित पर्यटन गतिविधियां भी आग फैलाने में योगदान देती हैं।

  • गर्मी और तेज धूप से वनस्पति सूख जाती है।
  • जंगल में कचरा और सूखी पत्तियाँ आग का कारण बन सकती हैं।
  • अव्यवस्थित पर्यटन और आग जलाने से दुर्घटनाएँ होती हैं।
  • हवाओं की तेज़ी आग को तेजी से फैलाती है।
  • प्राकृतिक कारण जैसे बिजली गिरना या तापमान वृद्धि।

उत्तराखंड वाइल्डफायर से प्रभावित क्षेत्र और धुएँ का फैलाव

वाइल्डफायर के कारण आसपास के क्षेत्र में धुआँ फैल गया है और कई गांव प्रभावित हुए हैं। हवा की दिशा के अनुसार धुआँ कई किलोमीटर दूर तक पहुँचा।

1. बागेश्वर जिले के आसपास के छोटे गांव प्रभावित।

2. मुख्य सड़कों पर धुएँ के कारण दृश्यता कम।

3. स्कूल और कार्यालयों को अस्थायी बंद किया गया।

4. पशु और वन्यजीवों को भी खतरा।

5. स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को मास्क पहनने की सलाह।

राहत और बचाव कार्य

स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और SDRF टीम मिलकर राहत कार्य कर रहे हैं। आग को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं।

  • SDRF और फायर ब्रिगेड की त्वरित तैनाती।
  • गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना।
  • जल स्रोतों का उपयोग कर आग पर काबू पाना।
  • हेलिकॉप्टर से पानी डालकर आग पर नियंत्रण।
  • स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी।

जंगली जानवर और प्रकृति को नुकसान

इस आग से वन्यजीव और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा है। कई जानवर अपने आवास छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

  • पक्षी और छोटे जीव सुरक्षित स्थान पर चले गए।
  • पेड़-पौधे जलकर नष्ट हुए।
  • मिट्टी की नमी कम होने से पर्यावरणीय असंतुलन।
  • आसपास के जल स्रोतों में धुआँ और राख का प्रभाव।
  • लंबे समय तक वन क्षेत्र पर असर।

स्थानीय लोगों की सुरक्षा

स्थानीय प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

1. गांवों में अलर्ट जारी।

2. बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान।

3. सड़क मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण।

4. स्वास्थ्य संबंधी मदद उपलब्ध कराना।

5. मास्क और धुएँ से बचाव उपाय।

वाइल्डफायर प्रभावित क्षेत्र की जानकारी

जिला प्रभावित क्षेत्र लोगों की संख्या बचाव टीमें स्थिति
बागेश्वर जंगल और आसपास के गांव लगभग 10,000 SDRF, फायर ब्रिगेड, वन विभाग आग पर नियंत्रण की कोशिश जारी

बागेश्वर वाइल्डफायर ने न केवल जंगल और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है बल्कि आसपास के लोगों की सुरक्षा और जीवन पर भी असर डाला है। प्रशासन और SDRF की टीम लगातार राहत कार्य कर रही है। निवासियों को सतर्क रहना चाहिए और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक आपदाओं में समय पर राहत और बचाव बेहद जरूरी है।

उत्तराखंड मौसम आज: मसूरी-नैनीताल में तापमान रिकॉर्ड, पहाड़ों में भी गर्मी, 5 जिलों में तूफान अलर्ट

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Uttarakhand weather today – गर्मी का असर आज उत्तराखंड में सबको झेलना पड़ रहा है। मसूरी के बाद नैनीताल भी ऊंचे तापमान पर पहुंच गया, हालांकि कई छोटे क्षेत्रों में भी हवाएं गर्म हो चुकी हैं। उधर, तूफान के खतरे के चलते पांच जगहों पर घंटियाँ बज उठी हैं – इनमें उत्तरकाशी से लेकर देहरादून तक नाम आते हैं। ऐसे में तेज हवाओं का सामना करने वाले इलाके ज्यादा सतर्क हो गए हैं। बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग और बीमार लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। लगातार नए अपडेट आ रहे हैं, जिनके बूते लोग अपने फैसले ठीक समय पर ले पा रहे हैं। ये हालात आज किसी के लिए भी आम नहीं है।

उत्तराखंड मौसम का आज का हाल और गर्मी की तीव्रता

आज उत्तराखंड के मौसम ने सबको चौंका दिया है। मसूरी और नैनीताल में पारा ऊपर चढ़ गया, जबकि पहाड़ों में भी चिलचिलाती गर्मी छा गई है। अगले कुछ दिन धूप थमने के बजाय और तेज हो सकती है, मौसम विभाग का ऐसा कहना है। हवा आमतौर पर हल्की रहेगी, फिर भी कहीं-कहीं झोंके घुमावदार हो सकते हैं। इस बीच, लोगों को समझदारी से रहने की बात कही गई है। स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में कामकाज को लेकर कुछ ढील दी गई है, सुरक्षा को ध्यान में रखकर। गर्मी के दौर में बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर ध्यान रखें, विशेषज्ञों का यही मानना है।

क्यों मसूरी और नैनीताल में बढ़ा तापमान?

मसूरी और नैनीताल में तापमान बढ़ने के कई कारण हैं।:

  • पहाड़ों में गर्म हवा का दबाव बढ़ना।
  • सूरज की तीव्र रोशनी और कम बादल।
  • स्थानीय जलवायु में असामान्य बदलाव।
  • मानव गतिविधियों से वातावरण में गर्मी का प्रभाव।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में धूप सीधे जमीन पर पड़ना।

उत्तराखंड में तूफान की चेतावनी कब और कहां हैं?

मौसम विभाग ने 5 जिलों में तूफान अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट इन क्षेत्रों में है:

  • उत्तरकाशी
  • चमोली
  • पिथौरागढ़
  • देहरादून
  • नैनीताल

इस दौरान तेज हवा और आंधी के साथ बारिश की संभावना है। नागरिकों से कहा गया है कि खुले में कम निकलें और वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।

गर्मी और तूफान से सुरक्षा के उपाय

गर्मी और तूफान से सुरक्षित रहने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं:

  • घर के अंदर रहना और धूप से बचना।
  • पानी अधिक मात्रा में पीना।
  • बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल।
  • खुले स्थानों पर वाहन सावधानी से चलाना।
  • मौसम विभाग के अपडेट लगातार चेक करना।

अगले कुछ दिनों का उत्तराखंड में मौसम का अनुमान

मौसम विभाग ने अगले दिनों के लिए चेतावनी जारी की है:

  • धूप और गर्मी बनी रह सकती है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश की संभावना।
  • रात के समय तापमान सामान्य रहेगा।
  • तेज हवाओं से नुकसान से बचाव के उपाय जरूरी।
  • नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह।

उत्तराखंड मौसम तालिका

जिला तापमान (°C) हवा की गति (किमी/घंटा) बारिश की संभावना चेतावनी
मसूरी 36 15 कम गर्मी
नैनीताल 35 12 कम गर्मी
उत्तरकाशी 34 20 अधिक तूफान
चमोली 33 18 अधिक तूफान
देहरादून 37 10 कम गर्मी

उत्तराखंड में आज मौसम ने लोगों को चेतावनी दी है। मसूरी-नैनीताल में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है और पांच जिलों में तूफान अलर्ट जारी है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि घर के अंदर रहें, पानी पीते रहें और मौसम विभाग के अपडेट नियमित रूप से देखें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें और खुले में कम निकलें। इन सावधानियों को अपनाकर आप सुरक्षित रह सकते हैं और मौसम की चुनौतियों से बच सकते हैं।

उत्तराखंड होमस्टे योजना संशोधित, सामुदायिक पर्यटन को पहली बार प्रमोट किया गया

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उत्तराखंड होमस्टे योजना – अब उत्तराखंड की होमस्टे योजना में बदलाव आया है। इस बार, ध्यान समाज से जुड़ा हुआ पर्यटन पर है गांव के लोग अब एक साथ काम कर सकेंगे न कि बस एक परिवार। छोटे-छोटे पहाड़ी गांवों के लिए यह राहत की बात है महिलाओं के हाथ में आएगा काम का नया झरना। युवा शहरों की ओर भागने की बजाय घर पर रहकर कमा सकेंगे पर्यटक अब ज्यादा गहराई से जुड़ पाएंगे स्थानीय संस्कृति और प्रकृति का तजुर्बा अब ठंडे होटलों तक सीमित नहीं रहेगा।

उत्तराखंड होमस्टे योजना में संशोधन से क्या बदलाव होगा?

अब उत्तराखंड की होमस्टे योजना में बदलाव के बाद स्थानीय निवासियों को अधिक फायदा मिल सकता है। पहले ध्यान सिर्फ घरों को पर्यटकों के लिए ढालने पर था गांव के लोगों और समुदाय को शामिल करना अब इसका हिस्सा बन चुका है। ऐसे में घूमने आने वाला व्यक्ति केवल कमरे तक नहीं रुकेंगे बल्कि स्थानीय जीवन के अनुभव को छू पाएंगे।

  • स्थानीय परिवारों को होमस्टे से कमाई का मौका मिलेगा।
  • गांव के लोग मिलकर पर्यटन से जुड़ सकेंगे।
  • स्थानीय खाना, संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा।
  • महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
  • पर्यटकों को पहाड़ी जीवन का असली अनुभव मिल सकेगा।

उत्तराखंड होमस्टे योजना में सामुदायिक पर्यटन क्यों जरूरी है?

गाँव के हर व्यक्ति को पर्यटन से फायदा मिले यही समाज से जुड़ा है उत्तराखंड के ढेर सारे गांव अपनी प्रकृति, चुपचाप वातावरण और रहन-सहन के कारण जाने जाते हैं। इन जगहों को यात्रा काम धंधा से जोड़ा जाए तो घरेलू लोगों के पास आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं। असली पहाड़ी जीवन देखने के इच्छुक पर्यटकों को भीड़ वाली जगहों से बचकर शांति मिलेगी।

  • गांवों में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय बाजार को फायदा होगा।
  • हस्तकला, स्थानीय भोजन और लोक संस्कृति को पहचान मिलेगी।
  • छोटे गांवों में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
  • युवा अपने गांव में रहकर काम कर सकेंगे।
  • पर्यटन का लाभ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को मिलेगा।

स्थानीय लोगों को कैसे फायदा मिलेगा उत्तराखंड होमस्टे योजना से

गांव वालों को अब अपनी जमीन, रहन-सहन और परंपरा को पर्यटन से जोड़ने का मौका मिलेगा एक पर्यटक के आने से उसे घर का खाना, लोकगीत, खेती-बाड़ी, जंगल की टहल और देहाती जीवन का एहसास हो सकता है। ऐसे में कई लोगों के लिए काम के नए रास्ते खुल सकते हैं। खाना बनाने वाला, गाइड की भूमिका निभाने वाला, सामान बेचने वाला या सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने वाला

  • स्थानीय लोगों की आय बढ़ सकती है।
  • महिलाओं को घर से ही काम का अवसर मिल सकता है।
  • युवाओं को गाइड, ड्राइवर और सेवा से जुड़े काम मिल सकते हैं।
  • गांव के उत्पाद जैसे दाल, मसाले, शहद और हस्तशिल्प बिक सकते हैं।
  • गांव की संस्कृति और पहचान को नई मजबूती मिलेगी।
विषय जानकारी
राज्य उत्तराखंड
योजना होमस्टे योजना
मुख्य बदलाव सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा
लाभार्थी स्थानीय परिवार, महिलाएं और युवा
मुख्य उद्देश्य रोजगार, स्थानीय संस्कृति और गांवों का विकास

अंत में, उत्तराखंड की होमस्टे योजना में बदलाव पर्यटन को फायदा पहुँचा सकता है। गांव आगे आएंगे, क्योंकि सामुदायिक पर्यटन को धक्का मिलेगा। इस राह से सीधे स्थानीय लोग लाभ पाएंगे। पर्यटक घुल-मिलकर उत्तराखंड की असली जिंदगी, खानपान और संस्कृति को छू पाएंगे ठीक ढंग से चलाया गया तो यह पहाड़ी इलाकों में रोजगार और विकास की दिशा में काम कर सकता है।

IIT रुड़की जल्द करेगा JEE Advanced 2026 की रिस्पांस शीट जारी, आंसर की जल्द आएगी

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IIT Roorkee release – JEE Advanced 2026 के बारे में IIT रुड़की ने जानकारी दे दी है। शाम के समय, लगभग पाँच बजे, jeeadv.ac.in पर उत्तर दिखने लगेंगे। इससे उन छात्रों को फर्क पड़ेगा जिन्होंने 17 मई को परीक्षा दी थी। अब उनके Paper 1 और Paper 2 के विकल्प तुलना के लिए उपलब्ध रहेंगे। वे provisional answer key के हिसाब से अंकों का अंदाजा लगा सकेंगे। 25 मई 2026 को सुबह 10 बजे IIT रुड़की draft answer key जारी करेगा। कुछ दिन बाद उम्मीदवार आपत्ति दर्ज कर पाएंगे

JEE Advanced 2026 Response Sheet कैसे डाउनलोड करें?

जैसे आप साइट पर पहुँचेंगे, आपके सारे जवाब दिखने लगेंगे। लॉगइन की जानकारी किसी के साथ शेयर करने से पहले सोच लेना चाहिए, खासकर अगर आप शीट देखने वाले हों। आपसे नामांकन नंबर या जन्म तारीख जैसी जानकारी मांगी जा सकती है

  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जाएं।
  • होमपेज पर JEE Advanced 2026 Response Sheet link पर क्लिक करें।
  • अपना registration number, date of birth और required details भरें।
  • Response sheet स्क्रीन पर खुल जाएगी।
  • इसे डाउनलोड करके PDF के रूप में सेव कर लें।
  • Answer key जारी होने के बाद अपने answers को official key से match करें।

छात्र जल्द देख सकेंगे Response sheet

JEE Advanced 2026 में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट है। IIT रुड़की आज यानी 21 मई 2026 को शाम 5 बजे JEE Advanced 2026 की candidate response sheet आधिकारिक वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जारी करेगा। इसके बाद 25 मई 2026 को provisional answer key जारी की जाएगी, जिस पर उम्मीदवार 26 मई शाम 5 बजे तक feedback या objection दर्ज कर सकेंगे। Final answer key और result 1 जून 2026 को घोषित किए जाएंगे

Event Date & Time Details
JEE Advanced 2026 Exam 17 मई 2026 Paper 1 सुबह 9 से 12 बजे और Paper 2 दोपहर 2:30 से 5:30 बजे तक आयोजित हुआ।
Candidate Response Sheet 21 मई 2026, शाम 5 बजे उम्मीदवार अपनी marked responses आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे।
Provisional Answer Key 25 मई 2026, सुबह 10 बजे Answer key जारी होने के बाद छात्र अपने संभावित marks calculate कर पाएंगे।
Objection / Feedback Window 25 मई सुबह 10 बजे से 26 मई 2026 शाम 5 बजे तक किसी answer पर आपत्ति होने पर उम्मीदवार निर्धारित समय में feedback submit कर सकेंगे।
Final Answer Key & Result 1 जून 2026, सुबह 10 बजे Final answer key के साथ JEE Advanced 2026 result घोषित किया जाएगा।
JoSAA Counselling 2 जून 2026, शाम 5 बजे से संभावित Result के बाद qualified candidates counselling process में भाग ले सकेंगे।

Answer Key, Objection Window और Result की जरूरी तारीखें

Response sheet के बाद उम्मीदवारों की नजर provisional answer key पर रहेगी। IIT रुड़की 25 मई को answer key जारी करेगा, जिसके आधार पर छात्र अपने expected marks calculate कर सकेंगे। अगर किसी answer पर संदेह हो तो निर्धारित समय में objection submit किया जा सकेगा।

  • JEE Advanced 2026 Exam: 17 मई 2026
  • Candidate Response Sheet: 21 मई 2026, शाम 5 बजे
  • Provisional Answer Key: 25 मई 2026, सुबह 10 बजे
  • Objection Window: 25 मई से 26 मई 2026, शाम 5 बजे तक
  • Final Answer Key और Result: 1 जून 2026, सुबह 10 बजे
  • JoSAA Counselling संभावित शुरुआत: 2 जून 2026

उत्तराखंड में गर्मी तेज होते ही धधकने लगे जंगल

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उत्तराखंड में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगल एक बार फिर आग की चपेट में आने लगे हैं। हर साल की तरह इस बार भी वन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि जंगलों में लगने वाली आग अब सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और आजीविका के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है।

प्रदेश में 15 फरवरी से अब तक वनाग्नि की 309 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें करीब 257 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा असर गढ़वाल मंडल में देखने को मिला है, जहां 227 घटनाओं में लगभग 185 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आए हैं। वहीं कुमाऊं मंडल में 50 घटनाओं में करीब 47 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

बृहस्पतिवार को भी चमोली, टिहरी समेत कई जिलों से जंगलों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं बद्रीनाथ वन प्रभाग में दर्ज की गई हैं, जहां 72 घटनाओं में 24 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में 32, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में 31, पिथौरागढ़ में 29 और अलकनंदा वन प्रभाग में 21 घटनाएं सामने आई हैं।

हालांकि वन विभाग आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन चुनौती यह भी है कि वनाग्नि की प्रतिदिन की सटीक रिपोर्ट समय पर तैयार नहीं हो पा रही है। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन सुशांत पटनायक के अनुसार, आग लगने के उसी दिन यह स्पष्ट करना मुश्किल होता है कि कितनी घटनाओं में कितना क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

ऐसे में सवाल यही है कि आखिर हर साल धधकते जंगलों को बचाने के लिए स्थायी समाधान कब निकलेगा, क्योंकि जंगलों की आग अब पर्यावरण के साथ-साथ इंसानी जिंदगी के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

उत्तराखंड में गर्मी के कारण स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र का समय परिवर्तित, सुबह 7 से 11:30 बजे

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उत्तराखंड स्कूल अपडेट – गर्मी के चलते उत्तराखंड में स्कूल और आंगनबाड़ी के समय बदल गए हैं इस वजह से बच्चों को अब सुबह सिर्फ 7 बजे से 11:30 बजे तक पढ़ने जाना होगा बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है दोपहर में तापमान बढ़ने से छोटे बच्चे ज्यादा परेशान होते हैं। इसलिए सुबह के समय को पढ़ाई और देखभाल के लिए ठीक समझा गया है।

उत्तराखंड स्कूल अपडेट स्कूल का समय क्यों बदला गया है?

गर्मी का असर उत्तराखंड के कई हिस्सों में साफ नजर आ रहा है और धूप तेज होने की वजह से बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो सकती है छोटे बच्चे गर्मी में जल्दी थक जाते हैं यही बात समझकर फैसला लिया गया। अब स्कूल और आंगनबाड़ी का समय सुबह 7 बजे से 11:30 बजे तक रखा गया है। इस घटे हुए समय में बच्चे दोपहर की तेज धूप से बच पाएंगे

  • बच्चों को दोपहर की तेज गर्मी से बचाने के लिए समय बदला गया है।
  • सुबह का मौसम बच्चों के लिए थोड़ा आरामदायक रहता है।
  • छोटे बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
  • स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई और देखभाल पहले की तरह जारी रहेगी।
  • माता-पिता को नए समय के अनुसार बच्चों को तैयार करना होगा।

उत्तराखंड स्कूल अपडेट बच्चों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी

अब सुबह के समय बच्चों को स्कूल के लिए निकलना पड़ेगा घरवालों को उठने का समय, खाना और पानी का ध्यान रखना पड़ेगा गर्मी में बच्चे को भूखे नहीं भेजना चाहिए। उसके साथ पानी की बोतल जरूर होनी चाहिए स्कूल जाते वक्त हल्के कपड़े और टोपी भी पहनाई जा सकती है।

  • बच्चों को सुबह समय पर उठाकर हल्का और अच्छा नाश्ता दें।
  • हर बच्चे के साथ पानी की बोतल जरूर भेजें।
  • धूप से बचाने के लिए टोपी या रुमाल का इस्तेमाल करें।
  • बच्चों को ज्यादा भारी बैग न दें।
  • स्कूल से आने के बाद बच्चों को आराम करने दें।

नया स्कूल समय किन छात्रों पर लागू होगा

अब स्कूल और आंगनबाड़ी के लिए नए समय का ऐलान हुआ है। गर्मी में बच्चों को आराम मिल सके यही वजह है इसके पीछे। सुबह साढ़े छह बजे से लेकर ठीक ग्यारह बजे तक कक्षाएं चलेंगी ताकि धूप तेज होने से पहले घर पहुंच जाएं। हर इलाके में थोड़ा फर्क हो सकता है इसलिए पास के स्कूल या केंद्र में खुद जाकर पूछ लेना बेहतर होगा।

  • स्कूल सुबह 7 बजे से शुरू होंगे।
  • छुट्टी सुबह 11:30 बजे होगी।
  • आंगनबाड़ी केंद्रों का समय भी इसी अनुसार रहेगा।
  • बच्चों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।
  • अभिभावक स्कूल से नई जानकारी लेते रहें।
विषय जानकारी
राज्य उत्तराखंड
बदलाव का कारण गर्मी और तेज धूप
नया समय सुबह 7 बजे से 11:30 बजे तक
लागू स्थान स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र
मुख्य उद्देश्य बच्चों की सेहत और सुरक्षा

गर्मी बढ़ने के साथ उत्तराखंड में स्कूलों और आंगनबाड़ी का समय बदल दिया गया है सुबह-सुबह पढ़ाई होने से बच्चे तपती धूप में नहीं झेलेंगे। घर जाने का समय ऐसा होगा कि भीषण गर्मी शुरू होने से पहले वे सुरक्षित पहुंच जाएं माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को समय पर स्कूल छोड़ें इसके अलावा पसीने से बचने के लिए ढीले कपड़े टोपी और पानी की बोतल जरूर दें।

चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सेहत की निगरानी के लिए उत्तराखंड सरकार ने ‘ई-स्वास्थ्य धाम’ शुरू किया

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Uttarakhand Char Dham Yatra – अब उत्तराखंड सरकार चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए ‘ई-स्वास्थ्य धाम’ को मजबूत कर रही है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वालों का स्वास्थ्य डेटा अब लगातार अपडेट होगा। सांस लेने में दिक्कत हो, ब्लड प्रेशर बढ़ जाए या थकान लगे – ऐसे में तुरंत सहायता पहुंचाना संभव हो जाएगा। ऊंचाई, ठंड और मौसम के झटकों से यात्रा मुश्किल हो जाती है। इसलिए अब सिर्फ आवेदन पर भरोसा नहीं, बल्कि चेकअप, इलाज के आंकड़े और आपातकालीन व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह पोर्टल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़ा है, जिसके जरिए यात्री 14 अंकों का ABHA नंबर भी बनवा सकते हैं।

ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल से यात्रियों को क्या फायदा होगा?

इस पोर्टल के ज़रिए यात्रा के बीच स्वास्थ्य जानकारी डिजिटल ढंग से जुड़ती है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी तेज़ी से फैसला कर पाते हैं। मेडिकल टीम के लिए समझना आसान हो जाता है – किसे तुरंत जाँच की ज़रूरत है। कभी-कभी दवा, कभी ऑक्सीजन, तो कभी रेफरल या एंबुलेंस की सहायता चाहिए होती है

  • यात्रियों की सेहत की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी।
  • ABHA ID के जरिए हेल्थ रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से मैनेज किया जा सकेगा।
  • हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी बीमारियों की जल्दी पहचान में मदद मिलेगी।
  • बुजुर्ग और गंभीर बीमारी वाले यात्रियों को प्राथमिकता से मेडिकल सहायता मिल सकेगी।
  • इमरजेंसी में डॉक्टरों और एंबुलेंस टीम को तेजी से अलर्ट किया जा सकेगा।

चार धाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की सेहत की निगरानी के लिए ‘ई-स्वास्थ्य धाम’

विषय जानकारी
योजना का नाम ई-स्वास्थ्य धाम
किसने शुरू किया उत्तराखंड सरकार
उद्देश्य चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सेहत की निगरानी करना
किन यात्रियों को लाभ यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालु
मुख्य सुविधा यात्रियों के स्वास्थ्य की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
स्वास्थ्य जांच ब्लड प्रेशर, शुगर, सांस की समस्या, हार्ट प्रॉब्लम और अन्य बीमारियों की निगरानी
डिजिटल सुविधा यात्रियों का हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा
आपातकालीन मदद जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, एंबुलेंस और मेडिकल टीम तुरंत सहायता दे सकेगी
खास फायदा बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों को समय पर इलाज मिल सकेगा
महत्व चार धाम यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर बनाना

संक्षेप में

उत्तराखंड सरकार की ‘ई-स्वास्थ्य धाम’ पहल चार धाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सेहत पर नजर रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस व्यवस्था से यात्रियों की स्वास्थ्य स्थिति की समय पर जांच होगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता मिल सकेगी।

चार धाम यात्रा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था और जरूरी सावधानियां

यात्रा मार्ग के सहारे अब डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मी और स्वास्थ्य स्वयंसेवी तैनात हैं। सरकार ने इस रास्ते में मेडिकल राहत केंद्र भी बनवाए हैं, स्क्रीनिंग के लिए ठिकाने भी बनाए गए हैं। तब भी श्रद्धालुओं को घर से निकलने पहले डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। खास तौर पर जिन्हें दिल की परेशानी, BP, शुगर, अस्थमा या फेफड़े से जुड़ी बीमारी हो

  • यात्रा से पहले मेडिकल चेकअप और जरूरी दवाएं साथ रखें।
  • ऑनलाइन यात्रा पंजीकरण और हेल्थ डिटेल्स सही जानकारी के साथ भरें।
  • ऊंचाई पर धीरे-धीरे चलें और जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत न करें।
  • ठंड, बारिश और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए गर्म कपड़े रखें।
  • सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर या अत्यधिक थकान होने पर तुरंत मेडिकल टीम से संपर्क करें।
  • आपात स्थिति में हेल्पलाइन 104 या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र की मदद लें।

थक-हारकर पहुंचा डीएम के द्वार, जिला प्रशासन बना सहारा

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देहरादून से एक मानवीय और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और दिव्यांगता से जूझ रहे एक परिवार को जिला प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार, जो तीन बेटियों के पिता हैं, उनके सिर से करीब 65 हजार रुपये का कर्ज जिला प्रशासन ने उतार दिया है। साथ ही रोजगार दोबारा शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।

जानकारी के मुताबिक संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने के लिए 50 हजार रुपये का ऋण लिया था, लेकिन कोविड महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक हालात बिगड़ने के चलते वह किश्तें जमा नहीं कर सके, जिसके बाद ब्याज सहित करीब 64 हजार 915 रुपये की आरसी तहसील भेज दी गई। परिवार की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि 100 प्रतिशत दिव्यांग पिता और 65 प्रतिशत दिव्यांग माता केवल पेंशन के सहारे तीन बेटियों का पालन-पोषण कर रहे थे।

बताया गया कि तहसील स्तर पर कार्रवाई और जेल भेजने की चेतावनी से परिवार मानसिक तनाव में था। ऐसे में जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए सीएसआर फंड से पूरा बकाया ऋण जमा कराने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं, रोजगार दोबारा शुरू करने के लिए रायफल क्लब फंड से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।

जिलाधिकारी ने परिवार की तीनों बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के तहत शिक्षा सहायता से जोड़ने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। जिला प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद और असहाय लोगों तक राहत पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने विकास योजनाओं के लिए दी ₹29.10 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति, कई जिलों को बड़ी सौगात

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उत्तराखंड में विकास योजनाओं को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनपदों में अवस्थापना विकास, पेयजल व्यवस्था और जनसुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बड़ी वित्तीय स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने करीब 29 करोड़ 10 लाख रुपये की वित्तीय मंजूरी देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं का काम गुणवत्ता और तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि जनता को जल्द लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने पौड़ी गढ़वाल के नीलकंठ क्षेत्र में बहुमंजिला पार्किंग निर्माण के लिए 48 करोड़ 82 लाख रुपये की प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। साथ ही पहली किस्त के रूप में 19 करोड़ 53 लाख रुपये जारी किए गए हैं। वहीं अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं में बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 38 इंडिया मार्क-II हैंडपंप स्थापित करने हेतु 1 करोड़ 36 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिसमें पहली किस्त के तौर पर 50 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

टिहरी गढ़वाल की हिण्डोलाखाल पम्पिंग पेयजल योजना के अंतर्गत ऊर्जा दक्ष पम्पों की खरीद के लिए 9 करोड़ 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही योजना के क्रियान्वयन के लिए पहली किस्त के रूप में 3 करोड़ 89 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

इसके अलावा पिथौरागढ़ नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नेड़ा बस्ते में देवभूमि रजत जयंती पार्क निर्माण के लिए 9 करोड़ 81 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है, जबकि पहली किस्त के तौर पर 1 करोड़ 97 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। वहीं कुंभ मेला 2027 को देखते हुए पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम द्वारा प्रस्तावित 10 अस्थायी मरम्मत कार्यों के लिए 3 करोड़ 21 लाख रुपये की योजना को भी मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि इन योजनाओं के समय पर पूरा होने से जनता को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।