देहरादून से एक मानवीय और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और दिव्यांगता से जूझ रहे एक परिवार को जिला प्रशासन ने बड़ी राहत दी है। ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार, जो तीन बेटियों के पिता हैं, उनके सिर से करीब 65 हजार रुपये का कर्ज जिला प्रशासन ने उतार दिया है। साथ ही रोजगार दोबारा शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
जानकारी के मुताबिक संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने के लिए 50 हजार रुपये का ऋण लिया था, लेकिन कोविड महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक हालात बिगड़ने के चलते वह किश्तें जमा नहीं कर सके, जिसके बाद ब्याज सहित करीब 64 हजार 915 रुपये की आरसी तहसील भेज दी गई। परिवार की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि 100 प्रतिशत दिव्यांग पिता और 65 प्रतिशत दिव्यांग माता केवल पेंशन के सहारे तीन बेटियों का पालन-पोषण कर रहे थे।
बताया गया कि तहसील स्तर पर कार्रवाई और जेल भेजने की चेतावनी से परिवार मानसिक तनाव में था। ऐसे में जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए सीएसआर फंड से पूरा बकाया ऋण जमा कराने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं, रोजगार दोबारा शुरू करने के लिए रायफल क्लब फंड से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
जिलाधिकारी ने परिवार की तीनों बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के तहत शिक्षा सहायता से जोड़ने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। जिला प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद और असहाय लोगों तक राहत पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

