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अमरत्व की कथा: हनुमान ही नहीं, ये 8 चिरंजीवी आज भी हैं

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अमरत्व की कथा: हनुमान ही नहीं, ये 8 चिरंजीवी आज भी हैं

जब हम हिन्दू पौराणिक कथाओं में अमरत्व की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में भगवान राम के परम भक्त, बल, विनय और अटूट भक्ति के प्रतीक हनुमान जी का नाम आता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि हनुमान जी अकेले नहीं हैं जिन्हें धरती पर युगों-युगों तक जीवित रहने का वरदान प्राप्त है?

सनातन धर्म की गहराइयों में एक रहस्यमयी अवधारणा है — अष्ट चिरंजीवी। ये आठ ऐसे अमर पात्र हैं जिन्हें किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान, भक्ति और सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए चुना गया है।

इनमें से कोई ऋषि हैं, कोई योद्धा, कोई राजा, तो कोई समाज से तिरस्कृत। लेकिन इन सभी का एक ही उद्देश्य है — उस मूल्य को जीवित रखना जो समय के साथ लुप्त नहीं होना चाहिए।

इनकी कहानियाँ सिर्फ पुरानी नहीं हैं — ये कालचक्र के साथ अब भी साँस ले रही हैं, विशेषकर कलियुग की हलचल में। इन्हें जानना मृत्यु से बचने की कल्पना नहीं है, बल्कि ये समझना है कि ऐसा क्या है जो सदा जीवित रहने योग्य है।

आईए, आपको मिलवाते हैं उन अमर आत्माओं से, जो आज भी हमारे बीच कहीं न कहीं विद्यमान हैं।

अश्वत्थामा: अमरत्व जो वरदान नहीं, श्राप बन गया

गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा महाभारत के महान योद्धाओं में से एक थे। अपने पिता की भाँति वे भी दिव्य अस्त्रों के ज्ञान में पारंगत, साहसी और अपराजेय थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध में उन्होंने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया।

किन्तु जब उन्होंने दुर्योधन को मृत्यु शैया पर देखा, तो उनका क्रोध विकराल रूप ले बैठा। प्रतिशोध की अग्नि में जलते हुए, उन्होंने सोते हुए पांडव पक्ष के वीरों की हत्या कर दी और फिर अपने क्रोध की पराकाष्ठा में अभिमन्यु के गर्भस्थ पुत्र (परीक्षित) पर ब्रह्मास्त्र से प्रहार किया।

यह अधर्म देख भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें श्राप दिया — “तू युगों-युगों तक इस धरती पर भटकता रहेगा — घायल, दुखी और तिरस्कृत।”यह अमरत्व किसी वरदान से नहीं, बल्कि एक भयानक श्राप से कम नहीं था।

अश्वत्थामा की कथा हमें सिखाती है कि शक्ति यदि विवेक और धर्म के बिना हो, तो वह आत्मा का विनाश करती है।अमरत्व केवल तभी सार्थक है जब उसके साथ नीति और करुणा जुड़ी हो — अन्यथा, वह एक अंतहीन पीड़ा बन जाती है।

राजा महाबली — धर्मनिष्ठ असुर राजा

राजा महाबली, असुरों के महान और पराक्रमी सम्राट थे। शक्ति और वैभव के बावजूद वे अत्यंत धर्मपरायण, नम्र और दानशील शासक थे। उनका शासन न्यायप्रिय और प्रजा-हितैषी था, जिससे वे देवताओं के लिए भी चुनौती बन गए। जब उनका प्रभाव स्वर्ग और पृथ्वी के संतुलन को बिगाड़ने लगा, तब विष्णु को इस स्थिति को सँभालने हेतु अवतार लेना पड़ा।

भगवान विष्णु ने वामन नामक एक छोटे ब्राह्मण बटुक का रूप लिया और तीन पग भूमि माँग ली। महाबली ने वचन निभाते हुए स्वयं को ही समर्पित कर दिया — अपनी सारी संपत्ति, भूमि, और अंततः अपना अस्तित्व भी।

विष्णु, जो उन्हें हराने आए थे, महाबली की विनम्रता और धर्मपरायणता से स्वयं ही प्रभावित हो गए। परिणामस्वरूप, उन्होंने महाबली को अमरत्व प्रदान किया और उन्हें पाताललोक के एक विशिष्ट भाग — सुतल लोक — का राजा बना दिया, जिसकी रक्षा स्वयं भगवान विष्णु करते हैं।

राजा महाबली की कथा हमें यह सिखाती है कि अहंकार को दंड से नहीं, बल्कि समर्पण से जीता जाता है।
यह भी सिद्ध करता है कि धर्म और विनम्रता केवल देवताओं का गुण नहीं — एक असुर भी ईश्वरीय कृपा का पात्र बन सकता है।

वेदव्यास — सनातन ज्ञान के अमर संरक्षक

वेदव्यास का नाम आते ही हमारे सामने वह महान ऋषि उभरता है जिसने वेदों का संकलन, महाभारत का लेखन और असंख्य पुराणों की रचना की। उनका जीवन केवल लेखन या संकलन भर नहीं था — यह एक ईश्वरीय प्रयोजन था, आध्यात्मिक ज्ञान को कालचक्र के पार पहुँचाने का कार्य

मान्यता है कि वेदव्यास आज भी हिमालय की निर्जन गुफाओं में निवास करते हैं, जहाँ से वे अब भी संतों और ऋषियों का मार्गदर्शन करते हैं — एक ऐसे अदृश्य आवरण के पीछे से, जो उन्हें सामान्य दृष्टि से ओझल रखता है।

ज्ञान शाश्वत है — और जो उसे धारण करता है, वह भी शाश्वत होता है।
वेदव्यास इस सत्य का प्रतीक हैं कि धर्म और सत्य की रक्षा करना केवल एक युग की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर युग की आवश्यकता है।

उनकी अमरता केवल शरीर की नहीं, चिरंतन सत्य के वाहक के रूप में है।

विभीषण — जिसने धर्म को रिश्तों से ऊपर रखा

विभीषण, रावण के अनुज थे — एक असुर कुल में जन्मे, लेकिन मन, वचन और कर्म से पूर्णतः धर्मनिष्ठ। जब उनके सामने चुनाव आया — रक्त-संबंध बनाम धर्म — तो उन्होंने बिना डरे धर्म का साथ चुना।

राम-रावण युद्ध में उन्होंने अपने ही कुल और भाई के विरुद्ध भगवान श्रीराम का साथ दिया। यह निर्णय आसान नहीं था — समाज से बहिष्कार, परिवार से तिरस्कार — सबकुछ सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय का मार्ग नहीं छोड़ा।

रावण के पतन के पश्चात, विभीषण को लंका का राजा बनाया गया। श्रीराम ने उन्हें दीर्घायु का वरदान दिया ताकि वे लंका में पुनः धर्म की स्थापना कर सकें।

विभीषण हमें सिखाते हैं कि सच्चाई के पक्ष में खड़ा होना, भले ही अकेले क्यों न हो, आत्मा को अमर बना देता है।
उनकी कथा एक गहरा संदेश देती है — सामाजिक तिरस्कार की परवाह किए बिना, धर्म के लिए खड़ा होना ही सच्चा साहस है।

परशुराम — अंतिम युद्ध के लिए प्रतीक्षारत योद्धा ऋषि

परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं — एक ऐसे अवतार जो संन्यासी भी हैं और योद्धा भी। उनका अवतरण उस समय हुआ जब क्षत्रिय वर्ग ने धर्म की सीमाएँ लाँघकर अन्याय और अत्याचार का मार्ग अपना लिया था। परशुराम ने धर्म की पुनर्स्थापना हेतु पृथ्वी को अन्यायी क्षत्रियों से मुक्त किया।

लेकिन धर्म की रक्षा का उनका कार्य केवल हिंसा तक सीमित नहीं रहा। जब न्याय स्थापित हो गया, तब उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और गहन तपस्या में लीन हो गए।

किंतु कथा यहीं समाप्त नहीं होती।

शास्त्रों में वर्णन है कि परशुराम अब भी जीवित हैंअमर। वे हिमालय में तप कर रहे हैं और प्रतीक्षा कर रहे हैं उस दिन की जब भगवान कल्कि, विष्णु के अंतिम अवतार, प्रकट होंगे।
तभी परशुराम अपने संचित अस्त्र-शस्त्र ज्ञान से कल्कि को अंतिम धर्मयुद्ध के लिए तैयार करेंगे — अधर्म के समूल विनाश के लिए।

परशुराम हमें सिखाते हैं कि धर्म के लिए किया गया क्रोध भी अंततः शांति में विलीन होना चाहिए।
सच्चा योद्धा वही है, जो हथियार तब रखता है जब न्याय पूर्ण रूप से स्थापित हो जाए।

मार्कण्डेय — जिसकी भक्ति ने मृत्यु को भी रोक दिया

मार्कण्डेय को जन्म से ही एक शापित भविष्य मिला था — मात्र 16 वर्ष की आयु तक ही उनका जीवन सीमित था। लेकिन उन्होंने इस नियति को स्वीकार करने के बजाय, अपनी संपूर्ण आत्मा से भगवान शिव की आराधना प्रारंभ कर दी।

जब उनकी अंतिम घड़ी आई और यमराज स्वयं उनका प्राण लेने पहुँचे, तब युवा मार्कण्डेय ने पूरी शक्ति से शिवलिंग को आलिंगन कर लिया — न तो भयभीत हुए, न विचलित। यही अटल भक्ति भगवान शिव को प्रसन्न कर गई।

शिव स्वयं प्रकट हुए, और अपने परम भक्त की रक्षा करते हुए यमराज का संहार कर डाला। फलस्वरूप, उन्होंने मार्कण्डेय को चिरयौवन और अमरत्व का वरदान दिया।

मार्कण्डेय की कथा यहीं नहीं थमती।

वह इतने पुण्यशाली थे कि उन्होंने स्वयं प्रलय (सृष्टि का अंत) का दर्शन किया। इस दौरान, भगवान विष्णु ने उन्हें ब्रह्मांड के चक्र — सृष्टि, स्थिति और लय — के रहस्य दिखाए। वे साक्षात सृष्टि के अंत और पुनर्जन्म के साक्षी बने।

मार्कण्डेय अमर भक्ति का प्रतीक हैं। उनकी कथा यह सिखाती है कि शुद्ध और निस्वार्थ भक्ति केवल नियति को नहीं बदल सकती, बल्कि मृत्यु को भी पराजित कर सकती हैजहाँ विश्वास पूर्ण होता है, वहाँ मृत्यु भी रुक जाती है।

कृपाचार्य — कालातीत शिक्षक

कृपाचार्य महाभारत काल के दोनों पक्षों — कौरव और पांडव — के राजकीय आचार्य थे। वे धर्म और नीति की गहरी समझ के लिए विख्यात थे, और युद्ध के दौरान उन्होंने संयम और सूक्ष्म दृष्टि के साथ स्थितियों का मूल्यांकन किया।

भगवानों ने उन्हें कलियुग में भी जीवित रहने का वरदान दिया, ताकि वे इस युग के संकटकाल में भी धर्म के ज्ञान और शिक्षण को बनाए रख सकें। कहा जाता है कि अगले युग में वे सप्तर्षि मंडल के सात महान ऋषियों में से एक होंगे।

कृपाचार्य की शिक्षा हमें यह सिखाती है कि सच्चा ज्ञान प्रतिक्रिया नहीं करता, वह निरीक्षण करता है, धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करता है, और पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाता रहता है।वे एक ऐसे शिक्षक हैं जो समय की सीमाओं से परे रहते हुए, अनवरत ज्ञान का संचार करते रहते हैं।

पंचायत चुनावो के राजनैतिक अर्जुन बने धामी चक्रवयूह नहीं तोड़ पाए दिग्गज

पंचायत चुनावो के राजनैतिक अर्जुन बने धामी चक्रवयूह नहीं तोड़ पाए दिग्गज देहरादून उत्तराखंड पंचायत चुनाव में बीजेपी ने नामांकन के पहले दिन चार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित कर लिया है पुष्कर सिंह धामी सरकार का राजनैतिक चक्रवयूह कांग्रेस भेद नहीं पाई दिग्गज नेता अपने अपने एरिया में अपनी राजनैतिक जमीं धामी के राजनैतिक कौशल के आगे बिना युद्ध लड़े हथियार डालते नज़र आए है ये भी कहा जा रहा है कांग्रेस के दिग्गज नेता धामी के आगे हथियार डालते नज़र आए है जिसके चलते एक बार भी पंचायत चुनाव के बूते धामी फिर अपने राजनैतिक विरोधियो पर भारी पड़े है

उत्तराखंड की राजनीती के बेताज बादशाह एक बार फिर विजेता बने है पंचायत चुनाव 2027 का सेमीफइनल माना जा रहा था जिस पर राजनैतिक नज़रें टिकी हुई थी अपनों से ग्रह युद्ध लड़ते कांग्रेस बीजेपी इस चुनाव में नज़र आई लेकिन जो जीता नहीं सिकन्दर कहलाता है उत्तराखंड की राजनैतिक सियासत के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनता का दिल ही नहीं जीत रहे बल्कि राष्टीय नेतृत्व का सितारा भी बन गए है मोदी से लेकर अमित शाह कई बार धामी सरकार की तारीफ में कसीदे गढ़ चुके है

विधानसभा चुनाव 2027 को पंचायत चुनाव का सेमीफइनल करार दिया जा रहा था लेकिन चुनाव नतीजा बता रहे है कांग्रेस कई ज़िलों में बीजेपी के समाने हथियार डालती नज़र आई उधम सिंह नगर हो या कोई भी जिला हर जगह बीजेपी ने अपना मजबूत इरादा बता दिया धामी लक्ष्य के आगे कांग्रेस का अभिमन्यु बनना तय है राजनैतिक पंडितो के अनुसार पंचायत चुनावो में कांग्रेस की ऐसी दशा होगी सोचा नहीं था ऐसे में अब आगामी सियासत भरी डगर कांग्रेस के लिए बेहद कठिन नज़र आती है

पंचायत चुनाव में भरी हामी मजबूत हुए पुष्कर सिंह धामी

पंचायत चुनाव में भरी हामी मजबूत हुए पुष्कर सिंह धामी देहरादून उत्तराखंड पंचायत चुनाव में बीजेपी ने नामांकन के पहले दिन चार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित कर लिया है पुष्कर सिंह धामी सरकार का राजनैतिक चक्रवयूह कांग्रेस भेद नहीं पाई दिग्गज नेता अपने अपने एरिया में अपनी राजनैतिक जमीं धामी के राजनैतिक कौशल के आगे बिना युद्ध लड़े हथियार डालते नज़र आए है ये भी कहा जा रहा है कांग्रेस के दिग्गज नेता धामी के आगे हथियार डालते नज़र आए है जिसके चलते एक बार भी पंचायत चुनाव के बूते धामी फिर अपने राजनैतिक विरोधियो पर भारी पड़े है

हर जिले में बनेगा ‘संस्कृत ग्राम’, मुख्यमंत्री धामी भोगपुर से करेंगे योजना की शुरुआत

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हर जिले में बनेगा ‘संस्कृत ग्राम’, मुख्यमंत्री धामी भोगपुर से करेंगे योजना की शुरुआत

देहरादून — उत्तराखंड सरकार प्रदेश की द्वितीय राजभाषा और देववाणी संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। राज्य के हर जिले में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम विकसित किया गया है, जहां संस्कृत को जनभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समग्र प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को देहरादून के भोगपुर गांव से इस अभिनव योजना का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर प्रदेश के सभी जिलों के संस्कृत ग्राम वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहेंगे। यह योजना उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त सहयोग से संचालित की जा रही है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार संस्कृत भाषा को फिर से उसकी गरिमा दिलाने और जनजीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है।


संस्कृत होगी संवाद और कामकाज की भाषा

आदर्श संस्कृत ग्रामों में न केवल आपसी बातचीत बल्कि दैनिक कार्यों का संचालन भी संस्कृत भाषा में किया जाएगा। इन गांवों में भारतीय जीवन मूल्यों, सनातन संस्कृति और संस्कारों को आत्मसात करते हुए वेद, पुराण और उपनिषदों का पाठ विशेष अवसरों पर किया जाएगा।

इसके साथ ही ये ग्राम नारी सम्मान, चरित्र निर्माण, नशामुक्ति, सद्भावना और अपराध प्रवृत्तियों पर नियंत्रण जैसे सामाजिक सरोकारों को भी संस्कृत के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।

सरकार का उद्देश्य इन संस्कृत ग्रामों के माध्यम से राज्य की संस्कृति, संस्कार, और ज्ञान-विज्ञान की परंपरा को सशक्त बनाना और वैश्विक मंच पर पुनः प्रतिष्ठित करना है।

पैनिक खबरों का जखीरा ढूढते अवसर वीर, धामी सरकार के ग्राउंड जीरो पर बने धृतराष्ट्र

देहरादून — उत्तराखंड में आई आपदा एक बार फिर उन चेहरों को सामने ले आई है जो हर संकट को केवल टीआरपी और सनसनी फैलाने का जरिया मानते हैं। सोशल मीडिया और बाहरी मीडिया हाउसों की एक जमात, जिन्हें न तो ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना है और न ही स्थानीय लोगों की तकलीफों से, केवल नकारात्मकता फैलाने के उद्देश्य से सक्रिय हो गई है।

हर आपदा की तरह इस बार भी कुछ लोग अवसर की तलाश में सरकार के प्रयासों की अनदेखी कर, केवल अफवाहें फैलाकर खुद को “वीर” सिद्ध करने में जुटे हैं। ये वही लोग हैं जो हर कठिन घड़ी में सरकार पर निशाना साधते हैं, लेकिन खुद कभी ग्राउंड ज़ीरो पर नजर नहीं आते।

इस बीच, धराली क्षेत्र में आई आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार ज़मीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं ग्राउंड जीरो पर मौजूद रहकर राहत कार्यों में जुटी टीमों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं और हर जरूरी निर्देश समय पर दे रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है।

पिछले पांच दिनों से चल रहे राहत-बचाव अभियान में रविवार का दिन विशेष है। खराब मौसम के बावजूद राहत दल मलबा हटाने, रास्ते खोलने और लापता लोगों की तलाश में पूरी तरह जुटा हुआ है। हालांकि अभी तक लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना बहुत कम है, लेकिन प्रशासन हर संभावित प्रयास कर रहा है।

यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष या मीडिया समूह को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं है। बल्कि यह सवाल उठाती है कि क्या केवल डर फैलाना ही खबर है? क्या ग्राउंड पर हो रहे सकारात्मक प्रयासों को दिखाना अब ‘अलोकप्रिय’ हो गया है?

समाज और मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि जहां आलोचना जरूरी हो वहां उसे पूरी ताकत से किया जाए, लेकिन जहां मेहनत और ईमानदारी से कार्य हो रहा हो, वहां भी उसे उतनी ही प्राथमिकता से दिखाया जाए। आपदा के समय केवल पैनिक फैलाना नहीं, समाधान और सहयोग का संदेश देना ही सच्ची पत्रकारिता और नागरिकता है।

केदारनाथ यात्रा चार दिन बाद हुई शुरू

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रुद्रप्रयाग — लगातार हो रही बारिश और केदारनाथ पैदल मार्ग पर पत्थर गिरने की घटनाओं के चलते बीते चार दिनों से रोकी गई केदारनाथ यात्रा को शनिवार से दोबारा शुरू कर दिया गया है। यात्रा की बहाली के साथ ही शनिवार को दो हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए।

पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलधार बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच मुनकटिया क्षेत्र सहित कई स्थानों पर पहाड़ियों से भूस्खलन और भारी बोल्डर गिरने की घटनाएं हो रही थीं। पैदल मार्ग पर भी कई जगह वर्षा के कारण बड़े-बड़े पत्थर गिर रहे थे। इन खतरों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने एहतियातन यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।

शनिवार को सोनप्रयाग में पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही मौसम की स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए रखी। जैसे ही मौसम अनुकूल नजर आया, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यात्रियों को सोनप्रयाग से गौरीकुंड की ओर बढ़ने की अनुमति दी गई। इसके बाद, गौरीकुंड से पैदल मार्ग की स्थिति का आकलन करने के बाद, परिस्थितियां अनुकूल पाए जाने पर यात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए रवाना किया गया।

सोनप्रयाग से करीब दो हजार श्रद्धालु केदारनाथ की यात्रा पर निकले। इस दौरान सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। पुलिस की निगरानी में यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गई।

कोतवाली निरीक्षक राकेंद्र कठैत ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रियों को आगे बढ़ाया गया। गौरीकुंड से भी पैदल मार्ग की सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें केदारनाथ भेजा गया।

उत्तरकाशी आपदा: ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे मुख्यमंत्री धामी प्रभवित लोगो से मिले तो उनकी आँखे भी नम हो गई

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उत्तरकाशी आपदा: ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, हवाई निरीक्षण कर राहत कार्यों की समीक्षा

देहरादून/उत्तरकाशी, 6 अगस्त 2025। उत्तराखंड में जारी प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खराब मौसम की परवाह किए बिना उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने हवाई निरीक्षण के जरिए क्षति का जायज़ा लिया और ग्राउंड ज़ीरो से राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री प्रभवित लोगो से मिले तो उनकी आँखे भी नम हो गई उन्होंने कहा सरकार हर प्रभवित वयक्ति के साथ खड़ी है

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी स्थित आपदा नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों, सेना के प्रतिनिधियों और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ बैठक कर राहत कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि,

“सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राहत और पुनर्वास कार्य हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पीड़ित तक सहायता पहुंचे और किसी को भी संकट की घड़ी में अकेला न छोड़ा जाए।”

राहत कार्यों में जुटा प्रशासन और सेना

  • रेस्क्यू ऑपरेशन और मेडिकल कैंपों की स्थापना प्रभावित क्षेत्रों में कर दी गई है।
  • भोजन, दवाइयां और जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
  • सड़कों की मरम्मत, मोबाइल नेटवर्क की बहाली और राशन व दवाओं की आपूर्ति का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

एयर सपोर्ट तैयार

राहत कार्यों को समर्थन देने के लिए भारतीय वायुसेना के चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टर पूरी तरह से अलर्ट पर हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

उत्तरकाशी में मुख्यमंत्री पुष्कर ने किया कैंप अफसरों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश

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उत्तरकाशी में नदी के बढ़े जल स्तर व आस-पास के क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए।

धराली उत्तरकाशी में सभी सरकारी एजेंसियां, विभाग और सेना आपसी समन्वय से राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। बीती रात 130 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। बंद रास्तों को खोला जा रहा है और प्रभावितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

हर्षिल, धराली में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। रेस्क्यू टीमों द्वारा आपदा स्थल से 135 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया है, धराली के पास(गंगोत्री की तरफ) से लगभग 100 लोग तथा हर्षिल आर्मी गेट से नीचे की तरफ 35 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी, प्रशांत आर्य एवं पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती सरिता डोबाल द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी और निरीक्षण किया जा रहा है।अतरिक्त कार्यबल को आपदाग्रस्त क्षेत्र में भेजने की क़वायद जारी है।अवरुद्ध हाईवे को सुचारु करने तथा मेजर रोड ब्लॉक वाले स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर कार्य तेजी से जारी है।

धराली, हर्षिल में आपदा स्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है। पुलिस, प्रशासन, फायर, SDRF, NDRF, ITBP, आर्मी सहित सभी दल राहत बचाव कार्यों में जुटे हैं। अतिरिक्त पुलिस व अन्य आपदा राहत टीमें धराली के लिये रवाना हैं। लगातार बारिश व भू-स्खलन से कई जगहों पर गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध होने के कारण टीमों को पहुँचने में समय लग रहा है।

उत्तरकाशी आपदा पर मुख्यमंत्री धामी की सतर्क निगरानी, प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश

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उत्तरकाशी आपदा पर मुख्यमंत्री धामी की सतर्क निगरानी, प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश

देहरादून, 5 अगस्त 2025।उत्तरकाशी जिले में आई भीषण आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को देहरादून के आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपना आंध्र प्रदेश का कार्यक्रम निरस्त कर तत्काल देहरादून लौटते ही आपदा से जुड़े अधिकारियों की आपात बैठक ली और स्थिति की ताजा जानकारी प्राप्त की।

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान धराली और आसपास के इलाकों में हुआ है, जहां सड़कों और मकानों को भारी क्षति पहुंची है। विधायक सुरेश चौहान से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि बेघर हुए लोगों को स्कूलों में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी किनारे बसे इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत शिफ्ट किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी से लेकर भोजन, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम ठीक रहा तो वह बुधवार को स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे।

सड़क संपर्क टूटा, नेटवर्क बाधित

प्रभावित क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है, जिससे संपर्क साधने में कठिनाई हो रही है। नेताला के पास सड़क बंद होने के बावजूद जिला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) सड़कों को खोलने के काम में जुटा हुआ है ताकि जल्द से जल्द राहत कार्य सुचारु हो सके।

सरकार द्वारा राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि आपदा प्रभावितों को जल्द से जल्द मदद मिल सके मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य और एसपी सरिता डोभाल से बात कर राहत बचाव कार्य का फीडबैक लिया है स्कूलों में बारिश को देखते हुए उत्तरकाशी में अवकाश रहेगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जानकारी दी नेताला के पास बंद मार्ग को खोल दिया गया है यहाँ से अफसरों की टीम देर रात को आगे बढ़ गई प्रभवित एरिया में जल्द से जल्द बिजली वयवस्था को सुचारु कर लिया जायेगा।

उत्तरकाशी में जलप्रलय: सेना का बेस कैंप और हेलीपैड तबाह, प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

उत्तरकाशी में जलप्रलय: सेना का बेस कैंप और हेलीपैड तबाह, प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 5 अगस्त 2025। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव और हर्षिल क्षेत्र में मंगलवार को बादल फटने के बाद भारी तबाही मच गई है। आपदा में न केवल स्थानीय ढांचे प्रभावित हुए हैं, बल्कि सेना का बेस कैंप और हेलीपैड भी पूरी तरह तबाह हो गया है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर्षिल में सेना का कैंप भारी बारिश और मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। इसके पास बहने वाला तेलगाड़ नाला भी उफान पर आ गया, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए गंगोत्री हाईवे भी मलबा आने के कारण बंद हो गया है।

📞 जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर:

धराली और आसपास के क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा के मद्देनज़र जिला प्रशासन, उत्तरकाशी ने निम्न हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिन पर संपर्क कर प्रभावित लोगों से संबंधित जानकारी ली जा सकती है:

  • 01374-222126
  • 01374-222722
  • 9456556431 (DEOC उत्तरकाशी)

प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।