Home Blog Page 169

चंद्रग्रहण 2025: उत्तराखंड के मंदिरों में सूतक और ग्रहण की विशेष व्यवस्था

0

चंद्रग्रहण 2025: उत्तराखंड के मंदिरों में सूतक और ग्रहण की विशेष व्यवस्था
चंद्रग्रहण से कुछ समय पहले ही सूतक काल आरंभ हो जाएगा। यह सूतक काल दोपहर 12:53 बजे से शुरू होगा। चूंकि यह दिन श्राद्ध पक्ष के अंतर्गत आता है, इसलिए ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि भोजन सूतक से पहले ही कर लेना चाहिए।

उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में दोपहर 12:30 बजे से ही कपाट बंद होने लगेंगे, ताकि धार्मिक परंपराओं का पालन किया जा सके। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे मंदिरों में दर्शन की योजना सूतक काल से पहले ही बना लें।

चंद्र ग्रहण 2025 स्पर्श से मोक्ष तक कीजिये यूकॉस्ट में फ्री दीदार बस कीजिये ये काम

0

भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 7 सितंबर 2025 के दिन रविवार को 122 वर्षों के बाद चंद्र ग्रहण लग रहा है। जिसे भारत में स्पर्श से लेकर मोक्ष तक देखा जा सकता है।7 सितंबर को चंद्रग्रहण का स्पर्श रात्रि 9:57 बजे, मध्य 11:49 बजे व मोक्ष 1:27 बजे होगा पूर्णिमा के दिन बेहद खास दिन 7 सितम्बर 2025 चंद्र ग्रहण है धार्मिक कारण के अनुसार जिस दिन ग्रहण लगता है उस दिन मंदिरो को बंद रखा जाता है देहरादून में अगर आप भी ग्रहण देखना चाहते है तो यूकॉस्ट की वेबसाइट पर पंजीकरण करना है जिसके बाद नी शुल्क ब्लड मून देख सकते है

𝗘𝗻𝘁𝗿𝘆 𝗶𝘀 𝗙𝗥𝗘𝗘 !

For Registration https://docs.google.com/…/1FAIpQLSfDk3P6PNU…/viewform…

पूर्ण चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजारा तो यूकॉस्ट दिखा रहा है अद्भुत खगोलीय घटना ब्लड मून को अगर आप भी देखना चाहते हैं तो झाझरा स्थित उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) पहुंच सकते हैं। सात सितंबर को यहां शाम सात से रात एक बजे तक टेलिस्कोप से पूर्ण चंद्रग्रहण देखने का मौका मिलेगा। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि यह सिर्फ खगोल विज्ञान का विषय नहीं बल्कि हमारे और ब्रह्मांड के बीच गहरे संबंध को महसूस करने का अवसर है।

महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी सरकार – मुख्यमंत्री

0

13 महिलाओं को तीलू रौतेली और 33 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को उत्कृष्ट सेवा कार्य सम्मान

गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्त्री शक्ति, तीलू रौतेली एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार और 33 आंगनवाड़ी कार्यकर्तात्रियों को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली को नमन करते हुए कहा कि, तीलू रौतेली ने महज 15 वर्ष की उम्र में अपने रण कौशल से विरोधियों को परास्त किया। जिस उम्र में बच्चे खेलना, कूदना और पढ़ना सीखतें हैं, उसी उम्र में तीलू रौतेली ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। इसलिए वीरांगना तीलू रौतेली को उत्तराखंड की झांसी की रानी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “नारी तू नारायणी” के मंत्र के साथ मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात हो या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना, केंद्र सरकार हर तरह से महिलाओं को सशक्त बना रही है, इसी तरह ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करके भी प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश की महिलाओं को सामाजिक तौर पर मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जहां महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए देश में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना” और “उद्यमिता विकास कार्यक्रम” जैसी योजनाओं के माध्यम से भी मातृशक्ति को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 से तीलू रौतेली पुरस्कार राशि 31 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार धनराशि 21 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार कर दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के शुरुआती चरण के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण इलाकों में माता-पिता के बाद बच्चों को संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा देने की शुरुआत आंगनवाड़ी केंद्रों से ही होती है। उनके दोनों बच्चों ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आंगनवाड़ी से ही प्राप्त किए हैं। इसलिए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी बहनों और सहायिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके मानदेय में वृद्धि की है। पहले जहां आंगनवाड़ी बहनों को 7500 रुपए का मानदेय मिलता था, उन्हें अब 9300 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अब मिनी आंगनवाड़ी को 4500 के बजाय 6250 और सहायिकाओं को 3550 के बजाय 5250 रुपए का मानदेय मिलता है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइज़र के पद पर पदोन्नति दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी शक्ति, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य की महिलाओं के पास क्षमता और योग्यता की कमी नहीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों के बनाए हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी मात दे रहे हैं। इसलिए वो हमेशा महिला समूहों को प्रोत्साहन देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से कहा था कि, 21वीं शताब्दी का तीसरा दशक, उत्तराखंड के नाम होने जा रहे हैं, इस क्रांति में महिला समूहों की अहम भूमिका होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे यह कार्यक्रम पहले आठ अगस्त को आयोजित होना था, लेकिन आपदा के कारण तब आयोजन संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय आपदाओं से घिरा हुआ है, सरकार आपदा प्रभावितों तक हर संभव तरीके से पहुंचने का प्रयास कर रही है, इस काम में केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।

इस मौके पर विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। आगंनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का एतिहासिक कार्य भी धामी सरकार ने किया। आयोजन में विधायक श्री खजान दास, सचिव श्री चंद्रेश कुमार, निदेशक श्री बंशीलाल राणा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

इन्हें मिला तीलू रौतेली पुरस्कार
अल्मोडा से मीता उपाध्याय, बागेश्वर से अलिशा मनराल, चमोली से सुरभि, चम्पावत से अनामिका बिष्ट, देहरादून से शिवानी गुप्ता, हरिद्वार से रूमा देवी, नैनीताल से नैना, पौड़ी गढ़वाल से रोशमा देवी, पिथौरागढ से रेखा भट्ट, रूद्रप्रयाग से हेमा नेगी करासी, टिहरी गढवाल से साक्षी चौहान, ऊधमसिंह नगर से रेखा और उत्तरकाशी से विजयलक्ष्मी जोशी।

तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए 13 महिलाएं चयनित, 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां भी होंगी सम्मानित

0

तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए 13 महिलाएं चयनित, 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां भी होंगी सम्मानित

देहरादून, 2 सितंबर 2025: उत्तराखंड की वीरांगना तीलू रौतेली के नाम पर दिए जाने वाले प्रसिद्ध राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए इस वर्ष 13 साहसी और प्रेरणादायक महिलाओं का चयन किया गया है। साथ ही, राज्य भर से 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।

इसकी जानकारी महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने दी। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार समारोह 4 सितंबर को आईआरडीटी सभागार, देहरादून में आयोजित किया जाएगा।

मंत्री रेखा आर्या का बयान:

“उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर कार्य कर रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें उनकी मेहनत और समर्पण का उचित सम्मान मिलना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण के वास्तविक कार्यकर्ता हमारी आंगनबाड़ी बहनें हैं, और उन्हें वह सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए जिसकी वे हकदार हैं।

सम्मान और उद्देश्य

  • 13 महिलाएं: तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित होंगी
  • 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां: राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करेंगी
  • उद्देश्य: महिला नेतृत्व, सेवा और समाज में योगदान को सम्मानित करना

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के हर प्रयास में पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि महिला शक्ति को केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि अवसर और मंच भी मिले

उत्तराखंड में केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजनाओं को मिली रफ्तार, राज्य सरकार और एनएचएलएमएल के बीच हुआ समझौता

0

देहरादून, 2 सितंबर 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मंगलवार को सचिवालय में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे के विकास को लेकर उत्तराखंड सरकार और नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के बीच यह एमओयू (MoU) संपन्न हुआ।

समझौते के तहत परियोजना में एनएचएलएमएल की 51% और राज्य सरकार की 49% इक्विटी भागीदारी होगी। साथ ही, राजस्व साझेदारी के अंतर्गत अर्जित 90% राशि को उत्तराखंड राज्य में ही पर्यटन, परिवहन और गतिशीलता से जुड़ी परियोजनाओं में व्यय किया जाएगा।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, और अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


🔹 परियोजनाओं का विवरण:

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्वतमाला परियोजना के तहत दो प्रमुख रोपवे परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है:

  • सोनप्रयाग से केदारनाथ:
    • लंबाई: 12.9 किलोमीटर
    • लागत: ₹4100 करोड़
  • गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब:
    • लंबाई: 12.4 किलोमीटर
    • लागत: ₹2700 करोड़ से अधिक

इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाना, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।


🗣️ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

“यह समझौता उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा। साथ ही यह पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य में रेल, रोड और रोपवे कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने चारधाम ऑलवेदर रोड, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, टनकपुर-सितारगंज मार्ग, पौंटा साहिब-देहरादून, और हल्द्वानी बाईपास जैसी अनेक परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कनेक्टिविटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।


🗣️ केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने कहा:

“यह दिन उत्तराखंड में रोपवे विकास की दिशा में मील का पत्थर है। इन परियोजनाओं से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य हर क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहा है।”


🗣️ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का वक्तव्य:

“यह समझौता पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इन रोपवे परियोजनाओं से दूरस्थ क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पर्यटन को स्थायी आधार मिलेगा।”


👥 उपस्थित प्रमुख अधिकारीगण:

इस अवसर पर राज्य और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु
  • सचिव दिलीप जावलकर, धीराज गर्ब्याल, युगल किशोर पंत
  • अपर सचिव विनय कुमार (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय)
  • सीईओ, एनएचएलएमएल श्री राजेश मलिक
  • वाइस प्रेसिडेंट, एनएचएलएमएल श्री प्रशांत जैन
  • अपर सचिव श्री अभिषेक रोहिला, और
  • पर्यटन विभाग के अन्य अधिकारी शामिल थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी गोलीकांड शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि

0

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए कृतसंकल्प होकर कार्य कर रही है।

मंगलवार को मसूरी स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मसूरी में शहीद हुए आंदोलनकारी बलबीर सिंह नेगी, बेलमती चौहान, हंसा धनाई, धनपत सिंह, राय सिंह बंगारी और मदन मोहन ममगई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने हमारे बेहतर भविष्य के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाकर उत्तराखंड के निर्माण में अपना अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि 2 सितंबर 1994 का दिन राज्य के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इस दिन मसूरी की वीरभूमि पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों को पुलिस की गोलियों का सामना करना पड़ा। यह घटना उस समय के सत्ताधारी दलों के दमनकारी रवैये का प्रतीक थी, जिन्होंने एक शांतिपूर्ण आंदोलन को निर्दयता के साथ कुचलने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनके और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। साथ ही शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3000 रुपये मासिक पेंशन की सुविधा भी प्रारंभ की गई है। घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 6000 रुपये तथा सक्रिय आंदोलनकारियों को 4500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व की सरकारों के समय में राज्य आंदोलनकारियों के केवल एक आश्रित के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था थी, परंतु अब नए कानून के अंतर्गत चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। यही नहीं, राज्य सरकार ने चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। इसी के साथ राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को स्कूलों और कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था और आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सपना था कि एक ऐसा उत्तराखंड बने जहां हमारी संस्कृति, भाषा और परंपराओं का संरक्षण हो। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने “समान नागरिक संहिता” लागू कर राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और कर्तव्य सुनिश्चित कर दिए हैं। वहीं, प्रदेश के युवाओं को पारदर्शिता के साथ रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया गया और 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया। इसके बाद उत्तराखंड में 25 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया, वहीं 9 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने दंगाइयों को सबक सिखाने के लिए सख्त दंगारोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी उनसे ही करने का कार्य किया है। हाल ही में सरकार ने नया कानून लागू कर राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कानून के लागू होने के बाद एक जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिनमें सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। राज्य में अवैध रूप से संचालित ढाई सौ से अधिक मदरसों को भी बंद करवाया गया है। प्रदेश सरकार राज्य में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंडियों के विरुद्ध ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के माध्यम से भी सख्त कार्रवाई कर रही है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल सभा भवन जल्द बनाने और सिफन कोर्ट का मामला जल्द हल करने की बात कही तथा मसूरी में वेंडर जोन की घोषणा सहित अन्य मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी के जन्मशताब्दी समारोह को भी भव्य तरीके से मनाएगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी तहसील बनाने के लिए सीएम का आभार व्यक्त करने के साथ ही मसूरी की विभिन्न मांगों को मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, दर्जाधारी सुभाष बड़थ्वाल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन मल्ल सहित राज्य आंदोलनकारियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल हुए।

मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी पर मुख्यमंत्री धामी ने शहीद आंदोलनकारियों को किया नमन

0

मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी पर मुख्यमंत्री धामी ने शहीद आंदोलनकारियों को किया नमन

देहरादून, 2 सितंबर 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना में जिन वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उनके बलिदान को प्रदेश कभी नहीं भूल सकता।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा:

“हमारे राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना संघर्ष किया। उनके त्याग और बलिदान के कारण ही आज हम अपने अधिकारों और पहचान के साथ खड़े हैं।”

तीन काले अध्याय, जो राज्य निर्माण की पीड़ा को दर्शाते हैं

मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के दौरान हुई तीन बड़ी घटनाओं को याद करते हुए कहा:

  • 1 सितंबर – खटीमा गोलीकांड
  • 2 सितंबर – मसूरी गोलीकांड
  • 2 अक्टूबर – रामपुर तिराहा कांड

उन्होंने कहा कि ये तीनों दिन उत्तराखंड के संघर्ष का प्रतीक हैं और राज्य के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हैं। इन घटनाओं ने न केवल आंदोलन को नई दिशा दी, बल्कि आम जनमानस को भी एकजुट कर दिया।

राज्य सरकार कर रही है शहीदों के सपनों को साकार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार शहीद आंदोलनकारियों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड के निर्माण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।


“उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति हम सभी के लिए प्रेरणा है। उनका बलिदान हमें हमेशा अपने कर्तव्यों की याद दिलाता रहेगा।”
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, आंदोलनकारियों के लिए योजनाओं का किया उल्लेख

0

मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, आंदोलनकारियों के लिए योजनाओं का किया उल्लेख

खटीमा, 1 सितंबर 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाग लेते हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों और राज्य आंदोलनकारियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन खटीमा गोलीकांड में बलिदान देने वाले अमर शहीदों — भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानंद भट्ट और परमजीत सिंह — को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि ये वीर सपूत उत्तराखंड के स्वाभिमान और अस्तित्व की लड़ाई के प्रतीक हैं और राज्य की जनता उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगी।

राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकार की प्रमुख योजनाएं:

  • राजकीय सेवाओं में 10% क्षैतिज आरक्षण लागू
  • शहीद परिवारों को ₹3,000 मासिक पेंशन
  • घायल अथवा जेल गए आंदोलनकारियों को ₹6,000 प्रतिमाह पेंशन
  • सक्रिय आंदोलनकारियों को ₹4,500 प्रतिमाह पेंशन
  • नए नियम के अंतर्गत तलाकशुदा, विधवा और परित्यक्ता पुत्रियों को भी आरक्षण का लाभ
  • 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में नियुक्ति
  • राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी
  • सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण

मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी को स्मरण करते हुए कहा कि मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत प्रेरणादायक रही है। इसे देखते हुए राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है।

राज्य हित में लिए गए बड़े निर्णय

मुख्यमंत्री धामी ने सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की
  • देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू, जिससे 24,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली
  • सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू
  • 7,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई

हिमालय बचाओ की शपथ दिलाई

मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को “हिमालय बचाओ अभियान” की शपथ दिलाते हुए कहा:

“हिमालय केवल उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश की धरोहर है। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सबकी है।”

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, विधायक भुवन कापड़ी,गोपाल राणा जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी मणिकांत मिश्रा, और कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी, आंदोलनकारी तथा नागरिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को वर्दीधारी नौकरियों में 10% क्षैतिज आरक्षण

0

उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को वर्दीधारी नौकरियों में 10% क्षैतिज आरक्षण

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सशक्त निर्णयों के लिए लगातार चर्चा में बने रहते हैं। राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर लिए गए फैसले न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित करते रहे हैं।

अब एक और बड़ा कदम उठाते हुए धामी सरकार ने ‘क्षैतिज आरक्षण नियमावली – 2025’ के तहत अग्निवीर योजना से सेवामुक्त हुए युवाओं को राज्य की वर्दीधारी सेवाओं — जैसे पुलिस, होमगार्ड, पीएसी, फॉरेस्ट गार्ड आदि — में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा की है।

यह निर्णय न केवल अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह राज्य में अनुशासित व प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा।

इस फैसले के माध्यम से सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह देश की सेवा करने वाले युवाओं को सम्मान और अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह निर्णय राज्य के युवाओं को रक्षा सेवाओं की ओर प्रेरित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा बदलाव: नए चेहरों के साथ संगठन में नई ऊर्जा की तैयारी

उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा बदलाव: नए चेहरों के साथ संगठन में नई ऊर्जा की तैयारी

देहरादून।
उत्तराखंड बीजेपी में बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। पार्टी इस महीने के अंत तक नई युवा टीम का ऐलान कर सकती है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूती देगी। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में अब तक पुरानी टीम काम कर रही थी, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नई टीम की ज़रूरत महसूस की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, नई 21-सदस्यीय टीम तैयार कर ली गई है, जिसमें महामंत्री, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे अहम पद शामिल हैं। इन नामों पर अंतिम स्तर पर मंथन हो चुका है।

पुराने चेहरों की छुट्टी, जमीनी नेताओं को तरजीह

पार्टी इस बार उन नेताओं को संगठन से बाहर कर सकती है, जो अब तक केवल राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिए सक्रिय थे। बीजेपी अब ऐसे नेताओं पर भरोसा जता रही है जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है और जो कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हैं। इसका उद्देश्य साफ है—2027 के चुनावों में एक बार फिर जीत दर्ज कर हैट्रिक पूरी करना।

हर जिले में समान प्रतिनिधित्व की रणनीति

बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि संगठन में हर जिले को बराबरी का महत्व मिलेगा। इससे कार्यकर्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और पार्टी में एकजुटता का माहौल बनेगा। हालांकि, संगठन में नियुक्तियों को लेकर दिल्ली में लॉबिंग का दौर भी जारी है, लेकिन पार्टी के रणनीतिकार इस बार केवल जमीनी स्तर पर काम करने वालों को ही मौका देने के पक्ष में हैं।

क्या महामंत्री अजय रहेंगे टीम में शामिल?

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, नई टीम की घोषणा कभी भी की जा सकती है। लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान संगठन महामंत्री अजय का नाम इस नई टीम में रहेगा या नहीं? उनके कार्यकाल को पांच साल से अधिक हो चुके हैं। हालांकि, उनके नेतृत्व में बीजेपी ने अब तक कोई बड़ा चुनावी झटका नहीं देखा है, फिर भी पार्टी के भीतर कुछ नेता बदलाव की मांग कर रहे हैं। फिलहाल उनके हटने की संभावना कम ही नजर आ रही है।