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आपदा से जूझ रहे प्रदेश के लिए मां धारी देवी से आशीर्वाद लेने पहुंचे सीएम धामी, भावुक हुए श्रद्धालु

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  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां धारी देवी के मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सुख-समृद्धि एवं आपदा राहत की कामना

प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और आपदा की गंभीर परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज पौड़ी जनपद स्थित पावन धारी देवी मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री शनिवार को चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में आपदाग्रस्त क्षेत्रों का जायज़ा लेने के बाद पौड़ी जिले स्थित धारी देवी मंदिर पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने मां धारी देवी के चरणों में नतमस्तक होकर प्रदेशवासियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि मां धारी देवी प्रदेश की आराध्य हैं, और मैं इस संकट की घड़ी में उनके चरणों में संपूर्ण उत्तराखंड की मंगलकामना लेकर आया हूं।

पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और मंदिर समिति के पदाधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने लोगों से क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी ली और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि आपदा के बावजूद सरकार द्वारा किए गए इंतजाम अत्यंत सराहनीय हैं। इंदौर से आए श्रद्धालु श्री संतोष पाठक ने मुख्यमंत्री को “हिंदू हृदय सम्राट” बताते हुए कहा कि “आपदा के समय जिस संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता से मुख्यमंत्री कार्य कर रहे हैं, वह प्रेरणादायक है।”

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर और अलकनंदा तट का निरीक्षण किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी के दोनों किनारों पर भू-कटाव रोकने के लिए ठोस सुरक्षा दीवारों का निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो और कार्यों में गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

प्रदेश सरकार पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार हर प्रभावित व्यक्ति के साथ है। राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “हमारा संकल्प है कि हम हर पीड़ित तक पहुंचें, उसकी ज़रूरत समझें और उसे फिर से सामान्य जीवन की ओर ले जाएं।”

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक आशा नौटियाल (केदारनाथ), विधायक भरत सिंह चौधरी (रुद्रप्रयाग), जिलाधिकारी श्रीमती स्वाति एस. भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह, अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी सहित अन्य अधिकारी व गणमान्यजन उपस्थित रहे।

उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना मिसाल, प्रभावितों के साथ ग्राउंड जीरो पर सीएम धामी

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आपदा के समय में सीएम धामी बने “संकटमोचक”

सीएम धामी की समय पूर्व तैयारियों ने आपदा के प्रभाव को किया सीमित

पीएम मोदी का भी मिला भरपूर साथ

गत चार महीनों में उत्तराखंड ने प्रकृति के विकराल रूप का सामना किया है। धराली में तबाही से लेकर थराली, पौड़ी, टिहरी, पिथौरागढ़, हरिद्वार, देहरादून, चमोली तक हुई विनाशकारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है। कई बार लोगों के जहन में 2013 जैसी भयानक त्रासदी की यादें तक ताज़ा हो गई, पर इस बार एक फर्क साफ़ दिखा “तैयारी, शीघ्र प्रतिक्रिया और नेतृत्व की मौजूदगी”!

इसी वजह से जान-माल का नुकसान अपेक्षाकृत कम हुआ। यह सब मिलकर उस ‘धामी मॉडल’ को परिभाषित करते हैं जिसे आज प्रदेश और देश के कुछ हिस्सों में उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

धराली में अचानक आई तबाही ने गांव, होटल और बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुँचाई। शुरुआती सूचनाएँ चिंताजनक रहीं, लेकिन आपदा के कुछ ही समय के भीतर ही सीएम धामी के नेतृत्व में एक्टिव हुई राज्य व केंद्र की एजेंसियाँ—एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन सक्रिय मोड में आ गईं। हेलिकॉप्टर से आपूर्ति, रेस्क्यू दलों की तैनाती और तत्काल राहत शिविर स्थापित किए गए, जिससे कई परिवारों तक समय पर मदद पहुँची। इन समन्वयकारी प्रयासों ने राहत कार्यों में गति और पारदर्शिता दोनों जोड़े।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सबसे प्रमुख विशेषता उनका ग्राउंड-प्रेजेंस और सक्रिय मॉनिटरिंग रहा। हर आपदा के तुरंत बाद सीएम धामी स्वयं घटनास्थल पर पहुँचे, राहत कार्यों की निगरानी की और प्रभावितों से सीधे संवाद बनाये रखा। गुरुवार को भी सीएम धामी ने देहरादून के सहस्त्रधारा, मसूरी रोड, टपकेश्वर मंदिर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस सक्रिय नेतृत्व ने राहत कार्यों में जनता के विश्वास और प्रशासन की गति को मज़बूती दी है। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता के रूप में कई जगहों पर पाँच लाख रुपये तक के पैकेज की घोषणा की और चेक वितरण की प्रक्रिया तेज़ की, जिससे प्रभावित परिवारों को आवास, प्राथमिक जरूरतें और पुनर्वास की शुरुआती लागत का सामना करने में मदद मिली।

स्थिति के आकलन के बाद केंद्र सरकार ने भी प्रदेश के साथ समन्वय में कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजली, सड़कों और पुनर्वास के मद्देनज़र 1,200 करोड़ रुपये के तात्कालिक राहत पैकेज की घोषणा की और मृतक परिवारों व घायलों हेतु मदद की व्यवस्था की। इस केंद्रीय पैकेज ने न केवल वित्तीय मदद दी बल्कि प्रदेश के पुनर्निर्माण कार्यों को गति भी प्रदान की।

धामी मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तैयारी और त्वरित तैनाती है। मौसम और हाइड्रोलॉजी पर लगातार निगरानी रखी जाती है, जोखिम वाले इलाकों में समय पर रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी होते हैं, SDRF/NDRF, सेना, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत कंट्रोल रूम से निर्देशित किया जाता है। स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्राम स्तर की व्यवस्थाओं के जरिए राहत सामग्री वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है, और प्रभावितों को त्वरित चेक वितरण तथा दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाती है।

कई सर्वे सीएम धामी के आपदा प्रबंधन मॉडल की सीधे तौर पर सराहना भी कर चुके हैं। हालिया में एक प्रतिष्ठित न्यूज ग्रुप द्वारा सर्वे में भी लोगों ने आपदा प्रभावित राज्यों में सीएम धामी के आपदा प्रबंधन मॉडल को सबसे बेहतर बताया है।

प्रदेश में आई ये आपदा केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि शासन-प्रणाली और तैयारियों की कसौटी भी है। मुख्यमंत्री के निर्णायक कदम, त्वरित राहत और केंद्र–राज्य समन्वय ने इस बार नुकसान को कम करने में भूमिका निभाई और यही कारण है कि कई राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों ने इस प्रतिक्रिया मॉडल पर ध्यान दिया है।

जनता की समस्याओं के समाधान हेतु तत्पर मुख्यमंत्री धामी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सदैव अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बावजूद जनता के बीच समय निकालकर उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान दिलाने को प्राथमिकता देते हैं। इसका जीवंत उदाहरण तब देखने को मिला जब प्रातःकाल ही उनके खटीमा आवास पर बड़ी संख्या में लोग अपनी-अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचे।

मुख्यमंत्री ने बड़ी गंभीरता और धैर्य के साथ प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यानपूर्वक सुनी। किसी की समस्या भूमि से जुड़ी थी, किसी की रोजगार से, किसी की पारिवारिक परेशानी से तो किसी की प्रशासनिक स्तर पर अटकी हुई फाइल से। हर समस्या को सुनते हुए उन्होंने तुरंत ही संबंधित अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और यह सुनिश्चित किया कि समाधान शीघ्र और पारदर्शी तरीके से किया जाए।

यह दृश्य अपने आप में दर्शाता है कि मुख्यमंत्री धामी केवल “सत्ता के शीर्ष” पर बैठे नेता नहीं हैं, बल्कि जनता के बीच रहने वाले जननायक हैं। उनका यह व्यवहार जनता के मन में यह विश्वास और मजबूत करता है कि उत्तराखण्ड का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में है जो वास्तव में उनकी परेशानियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।

धामी की यही संवेदनशीलता और जनता के साथ सीधा संवाद उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है। जनता का कहना है कि— “हमारे मुख्यमंत्री सचमुच धाकड़ हैं, जो हर समय जनता की आवाज़ सुनने और उसे हल करने के लिए तत्पर रहते हैं।”

मुख्यमंत्री धामी ने लिया रुद्रप्रयाग जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा, केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के दिए निर्देश

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आपदा पीड़ितों को हर संभव सहायता पहुंचाना हमारी प्राथमिकता- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनपद रुद्रप्रयाग के आपदा प्रभावित बसुकेदार क्षेत्र के तालजामण, डूंगर, बड़ेथ, जौला, कमद, उछोला, छैनागाड़, पटुय आदि गांवों का हवाई सर्वेक्षण किया। तत्पश्चात उन्होंने जिला पंचायत सभागार, रुद्रप्रयाग में बैठक कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव एवं राहत कार्यों, विद्युत, पेयजल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, मोटर मार्गों की अद्यतन स्थिति और श्री केदारनाथ धाम यात्रा की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून काल में समूचे प्रदेश ने आपदा के कारण कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने प्रभावितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और आपदा के समय जिला प्रशासन की तत्परता से कार्य करने पर सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रभावित क्षेत्रों में तत्परता से पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य किए जाने से प्रभावितों को हौसला मिला है।

मुख्यमंत्री ने आपदा की इस घड़ी में राज्य को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई आपदा की स्थिति की जानकारी का अपडेट समय-समय पर प्रधानमंत्री ले रहे थे। देहरादून पहुंचकर उन्होंने प्रभावितों से भेंट करने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में तात्कालिक राहत पहुंचाने के लिए 1200 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगामी 30 सितम्बर तक अलर्ट मोड पर रहकरआपदा से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।उन्होंने नदी-नालों पर अतिक्रमण हटाने पर विशेष निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के बाद श्री केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है, इसके दृष्टिगत यात्रा व्यवस्थाओं को चाक – चौबंद बनाए रखना जरूरी है।उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रा को सुगम बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किए जाएं।

जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन ने मुख्यमंत्री को जनपद में मानसून काल तथा 28 अगस्त को आई आपदा से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने आपदा के दौरान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने एवं राहत शिविरों में आश्रय देने की व्यवस्था, खाद्यान्न किट, रिफ्रेशमेंट किट, सोलर लाइट, कंबल, टेंट, तिरपाल, टॉर्च, चिकित्सा सुविधाएं एवं मेडिकल कैंप संचालित किए जाने राहत एवं बचाव कार्यों में मानवीय संसाधन, हेली सेवा द्वारा प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल पहुंचाना, खाद्यान्न वितरण आपदा से पशु क्षति, निजी संपत्ति एवं पशुधन क्षति, भवन व गौशालाओं की क्षति सहित सड़क मार्ग, पेयजल योजनाएं, विद्युत पोल-ट्रांसफार्मर, कृषि भूमि आदि प्रभावित हुए परिसंपत्तियों के बारे में मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी।

जिलाधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री को जनपद के सड़क मार्गों पर जवाड़ी बाईपास, सिरोबगड़, मुनकटिया, गौरीकुंड हाईवे सहित संवेदनशील स्थलों तथा श्री केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर हुए नुकसान एवं सुधार कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई तथा केदारनाथ यात्रा के दूसरे चरण में अनुमानित यात्रियों की संख्या, हेली सेवाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई।

विधायक रुद्रप्रयाग एवं विधायक केदारनाथ ने आपदा की घड़ी में त्वरित कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा से हुई क्षति, सड़क मार्ग निर्माण एवं अन्य समस्याओं से भी अवगत कराया।

इस अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष रितु नेगी, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं आमजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रभावितों का दुःख साझा करते हुए हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

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  • मुख्यमंत्री ने चमोली जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
  • अधिकारियों को निर्देश – राहत एवं रेस्टोरेशन कार्यों में न रहे कोई कसर
  • मृतकों के परिजनों को प्रदान की 5-5 लाख के सहायता राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को चमोली जनपद के नंदानगर क्षेत्र में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया और प्रभावितों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राहत कार्याे की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुक़सान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख की सहायता राशि के चेक भी प्रदान किये।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित कुंतारी लगा फाली और कुंतारी लगा सरपाणी का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही धुर्मा, मोख, कुंडी, बांसबारा और मोखमल्ला गांवों का हवाई सर्वेक्षण कर आपदा से नुकसान एवं राहत कार्यों का विस्तृत जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों से भेंट कर कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से प्रभावितों की साथ खड़ी है। प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन-जीवन को जल्द सामान्य करने के लिए राहत एवं बुनियादी सुविधाओं की बहाली के कार्यों को पूरी क्षमता व तत्परता से संचालित करने में निरंतर जुटे रहें। प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत एवं पेयजल की सुचारू आपूर्ति और सभी क्षेत्रों तक सड़क संपर्क बहाल करने के काम को प्राथकिता से पूरा किया जाय।

इस दौरान जिलाधिकारी चमोली श्री संदीप तिवारी ने आपदा से हुए नुकसान तथा राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। अब तक 12 घायल व्यक्तियों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से हायर सेंटर रेफर किया गया है, जिनमें से 01 घायल व्यक्ति को एम्स ऋषिकेश तथा 11 घायलों को मेडिकल कॉलेज श्रीनगर भेजा गया। कुंतरी लगा फाली, सरपाणी, धुर्मा, सेरा एवं मोख में लगभग 45 भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा 15 गौशालाएं भी नष्ट हुई हैं, वहीं इन क्षेत्रों में 08 पशु मृत एवं 40 पशु लापता बताए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण का कार्य गतिमान है। प्रभावित लोगों को खाद्य सामग्री, आश्रय, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस दौरान जनपद के प्रभारी मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक थराली भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, एसडीएम चमोली आर.के.पाण्डेय सहित जनपद के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने नगर निगम देहरादून द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत शुक्रवार को नगर निगम देहरादून द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पखवाड़ा के तहत प्रदेश में स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जन सुविधाओं के लिए बहुद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लोगो को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने सभी को सेवा पखवाड़ा की गतिविधियों में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, नरेश बंसल, मेयर सौरभ थपलियाल, विधायक खजानदास, उमेश शर्मा काऊ, अन्य जन प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

कमिश्नर गढ़वाल ने लिया आपदा का जायजा

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गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय ने शुक्रवार को आपदा प्रभावित मालदेवता – केसरवाला क्षेत्र का जायजा लिया। यहां गत दिनों नदी में आई बाढ़ से सड़क का एक हिस्सा बह गया था, जिस कारण मालदेवता क्षेत्र का रायपुर से सीधे सम्पर्क टूट गया था। लेकिन युद्धस्तर पर चले पुनर्निमाण कार्य के बाद, शुक्रवार सुबह यहां अस्थायी सड़क का निर्माण पूरा किए जाने के बाद यातायात भी खोल दिया गया है।

गढ़वाल कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि, अस्थायी सड़क को सुविधाजनक बनाया जाए, साथ ही बरसात बाद तेजी से स्थायी सड़क का निर्माण किया जाए। उन्होंने सड़क को बाढ़ से बचाने के भी उपाय करने के निर्देश दिए। इस मौके पर मौजूद क्षेत्रीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सभी विभागों ने दिन रात काम कर दो दिन में ही अस्थायी सड़क का निर्माण कर दिया है, इससे रायपुर के दूरस्थ गांवों के साथ ही टिहरी जिले के सकलाना क्षेत्र के लोगों को भी राहत मिलेगी।

उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का विशेष तौर पर आभार व्यक्त किया है। क्षेत्रीय विधायक ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अभी बरसात के दिनों में रात के समय सड़क के इस हिस्से पर आवाजाही से बचें, जल्द ही स्थायी सड़क बनने के बाद यातायात पूर्व की तरह बहाल कर दिया जाएगा।

धामी की अध्यक्षता में सचिवालय देहरादून में राज्य स्तरीय दिशा समिति की पहली बैठक

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय, देहरादून में राज्य स्तरीय दिशा समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं खेल से जुड़ी योजनाओं की कार्यवाही पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग शीघ्र इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और विभागों के बीच आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बल दिया कि राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए लगातार ठोस और सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी युग में योजनाओं की निगरानी और सफल संचालन हेतु आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं की त्वरित उपलब्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने से योजना क्रियान्वयन की गति में उल्लेखनीय सुधार होगा। किसानों, गरीबों, महिलाओं और युवाओं तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँचाने के लिए सभी विभागों द्वारा समन्वित प्रयास करना आवश्यक है।

कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सौर ऊर्जा आधारित पंपों की स्थापना की गति तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को न केवल सिंचाई के साधन सुलभ होंगे बल्कि सौर ऊर्जा के उपयोग से दीर्घकालिक रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी प्राप्त होगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शेष गांवों को शीघ्र सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला है, और राज्य के दुर्गम इलाकों में निवास कर रहे लोगों की सुविधाओं तथा आर्थिक अवसरों के विस्तार के लिए यह आवश्यक है।

बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों की प्रगति की भी गहनता से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता योजनाओं को और प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि राज्य के हर नागरिक के जीवन स्तर में सार्थक सुधार हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता के लिए शासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय जनता की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे नियमित रूप से जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर योजनाओं की प्रगति साझा करें और लोगों को इनसे अधिकाधिक लाभान्वित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता जनता की सुविधा और सुख-सुविधा है, और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता से कार्य करना होगा।

बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, डॉ. कल्पना सैनी, विधायकगण सहदेव सिंह पुण्डीर, रेनू बिष्ट, सुरेश गढ़िया, शक्तिलाल शाह, हरीश धामी एवं मनोज तिवारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रमुख सचिव एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव राधिका झा, नितेश झा, बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, एस.एन. पांडेय, आर. राजेश कुमार, धीराज गर्ब्याल, श्रीधर बाबू अद्दांकी, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी बैठक में सम्मिलित हुए।

मालदेवता क्षेत्र में अवैध निर्माण एंव अतिक्रमण से नदी का रूख बदलने से मची थी तबाही

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बांडावाली खेरीमानसिंह में सरकारी सम्पतियों के नुकसान के मुख्यकारक नदी पर बने अनाधिकृत विशालकाय रिसोर्ट की डीएम ने की उच्च स्तरीय जांच संस्थित; नपेंगे सरंक्षक भी, रक्षक भी

ग्राउंड जीरो पर प्रशासनिक अमला; आपदा बचाव कार्य में लगे कार्मिकों, फोर्स; श्रमिकों का डीएम ने बढाया हौसला;

मालदेवता-द्वारा रोड पुल मरम्मत युद्धस्तर पर जारी; सड़क, पुल पर सेफ्टी ऑडिट उपरान्त ही आवागमन की अनुमति

अतिक्रमण कर करोड़ों की सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर बड़ी कार्यवाही तय;

खेरी मानसिंह क्षतिग्रस्त पुल युद्धस्तर पर मरम्मत कर सम्पर्क मार्ग जोड़ने के निर्देश

जिलाधिकारी के सविन बसंल के निर्देशन में आपदा बचाव कार्य युद्धस्तर पर गतिमान है। जिलाधिकारी ने दिन से देर शाम तक आपदाग्रस्त क्षेत्र केसरवाला, मालदेवता, बांडावाली , खेरीमानसिंह में आपदा बचाव कार्यों का लिया था जायजा डीएम ने राहत बचाव कार्यों में लगे कार्मिको, फोर्स, श्रमिकों का हौसला बढाया।

मालदेवता क्षेत्र के किसनपुरी बांडावाली में नदी का रुख मोड़ कर अनाधिकृत तरीके से बडा रिसोर्ट बनाने वाले मालिक के विरूद्ध जिला प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसनपुर बांडावाली में नदी का रूख मोड़ रिसोर्ट निर्माण से यहां पर करीब 150 मीटर सड़क मार्ग पूरी तरह से वासआउट तथा पुलो एवं सरकारी सम्पतियों को भारी नुकसान पंहुचा है। जिससे यहां पर 06 करोड़ से अधिक की सरकारी सपंत्ति का नुकसान हुआ है। जिलाधिकारी ने सख्त रूख इख्तियार करते हुए नदी किनारे अनाधिकृत एप्रोच और निर्माण की उच्चस्तरी जांच की संस्थित कर दी है।  

देहरादून में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के बाद अब जिला प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली पानी एवं अन्य जरूरी सुविधाओं को बहाल करने में जुटा है। जिलाधिकारी ने अपराह्न से देर शाम तक  मालदेवता- द्वारा पुल, खैरी धनौला किसनपुर बांडावाली का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुलों की एप्रोच ठीक कराते हुए आवगमन शीघ्र सुचारू कराने के निर्देश दिए।

अतिवृष्टि के कारण कुमाल्डा- द्वारा झूला पुल की एप्रोच धस गई थी। यहां पर खेल मैदान भी पूरी तरह से वॉसआउट हुआ है। लोनिवि द्वारा यहां पर एप्रोच ठीक कर यातायात सुचारू कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने नदी को चैनलाइज करने के बाद वयारक्रेट कर पुल की एप्रोच को शीघ्र ठीक कराने के निर्देश दिए। वहीं जिलाधिकारी ने मालदेवता मोटर मार्ग पर किसनपुर बांडावाली में सड़क के 150 मीटर वॉसआउट पोर्सन वासआउट होेने का कारण जाना जिस पर अधिकारियों ने यहां पर अनधिकृत एप्रोच बनाकर नदी का रूख बदलने से तबाही मची है, इस अनाधिकृत निर्माण से सरकारी सपंत्ति को करीब 06 करोड़ का नुकसान पहुंचा है। जिलाधिकारी ने नदी का रूख बदलकर अतिक्रमण एवं अनाधिकृत एप्रोच एवं रिसोर्ट निर्माण के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच संस्थित की है। साथ ही जिलाधिकारी ने लोनिवि को यहां पर नदी को चैनलाइज करते हुए शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश भी दिए है। मालदेवता केशरवाला में वॉसआउट मोटर मार्ग पर वायरक्रेट लगाकर शीघ्र रास्ता चालू करने और नदी को चैनलाइज करते हुए सड़क के वॉसआउट पोर्सन ठीक करने के निर्देश दिए।

फिल्म “चलो जीते हैं” की विशेष पुनः-रिलीज़ का देहरादून बना साक्षी

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देहरादून के तीन सिनेमाघरों में पदर्शित हुई फिल्म

  • ⁠17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक पूरे देश के लगभग 500 सिनेमाघरों में विशेष रूप से प्रदर्शित हो रही ये फिल्म

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म “चलो जीते हैं” की विशेष पुनः-रिलीज़ का राजधानी देहरादून के विभिन्न सिनेमाघरों में आयोजन किया गया। राजधानी के तीन प्रमुख सिनेमाघरों आईनॉक्स माल ऑफ देहरादून , पीवीआर सेंट्रिओ माल और पीवीआर पैसिफिक माल में प्रदर्शित इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी।

यह फिल्म स्वामी विवेकानंद के दर्शन “बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं” पर आधारित है। 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक इसे पूरे देश के लगभग 500 सिनेमाघरों में विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन की एक बाल्यकालीन घटना से प्रेरित इस फिल्म की कहानी युवा नारू के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो स्वामी विवेकानंद के विचारों से गहराई से प्रभावित होकर अपनी छोटी सी दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करता है।

फिल्म “चलो जीते हैं” निस्वार्थ सेवा और त्याग का शाश्वत संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावशाली रूप से पहुँचाने का माध्यम बन रही है। दर्शकों ने भी इसे प्रेरणादायी फिल्म बताते हुए इसकी सराहना की।