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दिवाली पर ड्रोन से कंट्रोल होगा देहरादून का एयर पॉल्यूशन, जानिए कैसे?

दीपावली पर वायु प्रदूषण का स्तर न बढ़े इसके लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अपनी कमर कस ली है.

देहरादून: देश भर में दीपावली त्यौहार की धूम देखी जा रही है. त्यौहार को लेकर बाजार सच चुके हैं. लोग बाजारों में बढ़चढ़कर खरीदारी कर रहे हैं. दीपावली के दौरान सबसे बड़ी चुनौती वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने की रहती है. क्योंकि आतिशबाजी के कारण दीपावली पर वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है, जिसको लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कमर कस ली है.

दीपावली पर आतिशबाजी के कारण एयर क्वालिटी काफी अधिक खराब हो जाती है, जिसको ध्यान में रखते हुए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अपनी रणनीति भी तैयार की है. दीपावली के बाद देहरादून के संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए पानी की बौछार करवाई जाएगी, ताकि एयर क्वालिटी को बेहतर किया जा सके.

देहरादून में एयर क्वालिटी इंडेक्स: वैसे साल 2024 में साल 2023 के मुकाबले एयर क्वालिटी में ज्यादा गिरावट दर्ज नहीं की गई थी. साल 2024 में दीपावली के दौरान देहरादून में एयर क्वालिटी इंडेक्स 288 तक पहुंच गया था, जिससे देहरादून की आबोहवा बिगड़ गई थी. साथ ही पीएम 10 की स्थिति 254.39 और पीएम 2.5 की स्थिति 116.50 हो गई थी.

वहीं साल 2024 के मुकाबले साल 2023 में वायु गुणवत्ता और अधिक खराब थी. साल 2023 में दीपावली के दौरान देहरादून में एयर क्वालिटी इंडेक्स 333 तक पहुंच गया था, साथ ही पीएम 10 की स्थिति 307.15 और पीएम 2.5 की स्थिति 63 हो गई थी.

एक्यूआई: ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि साल 2024 के मुकाबले इस साल 2025 में एयर क्वालिटी इंडेक्स का कम रह सकता है. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार शून्य से लेकर 50 एक्यूआई स्तर को बेहतर माना जाता है. 51 से 100 तक एक्यूआई स्तर को संतोषजनक, 101 से 200 तक का एक्यूआई स्तर को मध्य, 201 से 300 तक एक्यूआई स्तर को खराब, 301 से 400 तक एक्यूआई स्तर को बेहद खराब और 401 से लेकर 500 तक एक्यूआई स्तर को सेहत के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाता है.

पीएम 2.5 ज्यादा खतरनाक: इसमें साथ ही एयर क्वालिटी के लिए एक्यूआई स्तर के साथ ही पार्टिकुलेट मैटर वैल्यू (पीएम) भी महत्वपूर्ण होती है. पीसीबी के अनुसार हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 और पीएम 10 की मात्रा 100 तक होना ही सुरक्षित माना जाता है, लेकिन पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा बढ़ना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है,

दरअसल, गैसोलीन, तेल, डीजल ईंधन या लकड़ी जलाने से पीएम 2.5 का उत्पादन होता है, जो हवा में मिक्स हो जाता है. पीएम 2.5 का आकार छोटा है, जो हवा के साथ फेफड़ों में आसानी से चला जाता है. यही वजह है कि पीएम 2.5 को पीएम 10 के मुकाबले काफी अधिक नुकसानदायक माना जाता है.

देहरादून में बढ़ता वायु प्रदूषण: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव की वजह से भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. वर्तमान समय में देहरादून का एक्यूआई स्तर संतोषजनक स्थिति में है. यानी 51 से 100 के बीच रह रहा है. लेकिन दीपावली के दौरान एक्यूआई स्तर काफी अधिक बढ़ने की आशंका है. जब एक्यूआई का स्तर 100 से ऊपर जाता है तो उसे सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता है.

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की दीपावली पर तैयारी: वहीं, ज्यादा जानकारी देते हुए उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते ने कहा कि दीपावली स्वच्छ और सुरक्षित हो इसके लिए उत्तराखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर रणनीतिय तैयार कर ली है.

ड्रोन के जरिए पानी का छिड़काव: मुख्य रूप से जो भी संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां पॉल्यूशन अधिक होने की आशंका है, उन क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए पानी का छिड़काव करने की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में मॉनिटरिंग स्टेशन भी लगा दिए गए हैं.

साथ ही बताया गया कि केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है. इसके अलावा सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि स्कूलों और अस्पतालों के आसपास पटाखे न फोड़े जाए. उत्तराखंड ने नेशनल लेवल पर एयर क्वालिटी में बेहतर प्रदर्शन किया है. ऐसे पीसीबी की कोशिश है आगामी दीपावली स्वच्छ हो सुरक्षित हो साथ ही एयर क्वालिटी बेहतर रहे.

मुख्यमंत्री धामी का चम्पावत में व्यापक भ्रमण, ग्रामीणों से सीधा संवाद

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मुख्यमंत्री धामी का चम्पावत में व्यापक भ्रमण, ग्रामीणों से सीधा संवाद

महिलाओं ने किया पारंपरिक स्वागत, मुख्यमंत्री बोले – “चम्पावत मेरी प्रेरणा है”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को अपने विधानसभा क्षेत्र चम्पावत का सड़क मार्ग से दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चम्पावत से टनकपुर तक के मार्ग में विभिन्न गांवों में रुककर ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया और विकास कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने अपने भ्रमण के दौरान मुड़ियानी, धौन, स्वाला, अमोड़ी, चल्थी, सिंयाड़ी, सूखीढांग और अन्य ग्रामों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

महिलाओं ने किया पारंपरिक स्वागत

प्रत्येक ग्राम में मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने उन्हें फूलों और मंगल गीतों से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इसे मातृशक्ति का आशीर्वाद बताते हुए कहा,

“चम्पावत की जनता का स्नेह और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। यही मेरे कार्यों की असली ऊर्जा है।”

बच्चों से पूछा सपनों और पढ़ाई के बारे में

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई स्थानों पर बच्चों से संवाद भी किया। उन्होंने बच्चों से उनके सपनों, पढ़ाई और करियर के बारे में जाना और उन्हें मन लगाकर पढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा:

“आप सभी हमारे प्रदेश का भविष्य हैं। जिस दिन आप आत्मविश्वास से अपने सपने पूरे करेंगे, उत्तराखण्ड विकास की नई ऊँचाइयों को छूएगा।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दे रही है ताकि हर बच्चे को बेहतर भविष्य मिल सके।

स्थानीय उत्पादों को दिया बढ़ावा

चल्थी में मुख्यमंत्री एक स्थानीय दुकान पर पहुँचे और वहाँ से स्वयं पहाड़ी गडेरी (बड़ी अर्बी) और अदरक खरीदी। उन्होंने कहा:

“राज्य सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को मजबूत कर रही है। हर नागरिक को स्थानीय उत्पादों को अपनाना चाहिए।”

जनता से जुड़ाव ही मेरी सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत की हर गली, हर गांव उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।

“मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे चम्पावत की सेवा का अवसर मिला। हम सब मिलकर इसे एक आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को दीपावली, धनतेरस और भाई दूज की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं।

विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा

अपने भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, कृषि और स्थानीय रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि

“जनहित से जुड़े सभी कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्वक पूरे किए जाएं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जनता की सुविधा, सुरक्षा और समग्र विकास है।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति:

इस अवसर पर दायित्वधारी श्री श्याम नारायण पांडे, अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद अधिकारी, भाजपा प्रदेश मंत्री निर्मल मेहरा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की समीक्षा बैठक

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सड़क सुरक्षा के लिए तकनीक-आधारित, व्यावहारिक और प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा को लेकर एक ऐसा मैकेनिज्म विकसित किया जाए जो तकनीकी रूप से सक्षम, क्रियान्वयन में सरल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक हो।

सड़क सुरक्षा उल्लंघनों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर शत-प्रतिशत एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्रवाई अधूरी नहीं रहनी चाहिए, और यदि राज्य के संदर्भ में नियमों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो वह भी शीघ्र किया जाए।

रेड लाइट जम्पिंग पर सख्ती, लाइसेंस निलंबन की सिफारिश

मुख्य सचिव ने कहा कि रेड लाइट जंप करने वाले व्यक्तियों के ड्राइविंग लाइसेंस को न्यूनतम तीन माह के लिए निलंबित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन मामलों में चालान की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, परंतु व्यक्ति द्वारा अब तक कंपाउंडिंग नहीं की गई है, तो ऐसे वाहनों को CCTV के माध्यम से ट्रैक कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ऑटोमेशन और तकनीकी उन्नयन पर ज़ोर

ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड बनाने के लिए मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग से प्रस्ताव तैयार करने को कहा। उन्होंने ट्रैफिक सिग्नल्स, स्ट्रीट लाइट्स और अन्य आधुनिक उपकरणों को शामिल करने के लिए उपयुक्त तकनीकी समाधान प्रस्तुत करने को भी कहा।

जन-जागरूकता और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने कहा कि enforcement के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियान भी बड़े पैमाने पर चलाए जाएं ताकि लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति चेतना विकसित हो।

सड़क दुर्घटनाओं की आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए उन्होंने हेली एंबुलेंस सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर स्वास्थ्य और परिवहन विभाग को संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव शैलेश बगोली, बृजेश कुमार संत, पुलिस महानिरीक्षक निलेश आनंद भरणे सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चौखुटिया में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिए निर्देश, सीएचसी को एसडीएच में बदले जाने की प्रक्रिया जारी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चौखुटिया में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिए निर्देश, सीएचसी को एसडीएच में बदले जाने की प्रक्रिया जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चौखुटिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को जन अपेक्षाओं के अनुरूप सुदृढ़ बनाने हेतु स्वास्थ्य सचिव को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा चौखुटिया स्थित 30 बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को 50 बिस्तरों वाले उप जिला अस्पताल (एसडीएच) में परिवर्तित करने की घोषणा की गई है। इस निर्णय के शासनादेश की प्रक्रिया शासन स्तर पर प्रगति पर है।

सरकार प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा जानकारी दी गई कि चौखुटिया का वर्तमान सीएचसी 30 बिस्तरों के साथ संचालित हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों की ओपीडी होती है। साथ ही, हर माह 30 से 35 गर्भवती महिलाओं का प्रसव महिला चिकित्साधिकारी द्वारा कराया जा रहा है।

फिलहाल केंद्र में कुल 7 चिकित्सक कार्यरत हैं, जिनमें 3 महिला और 4 पुरुष डॉक्टर शामिल हैं। इनमें एक दंत चिकित्सक भी मौजूद हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए सप्ताह में तीन दिन विशेषज्ञों की एक टीम — जिसमें फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं — जिला अस्पताल अल्मोड़ा एवं उप जिला अस्पताल रानीखेत से सीएचसी चौखुटिया भेजी जाती है। यह टीम नियमित रूप से अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है।

वर्तमान में अस्पताल में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, डेंटल चेयर और 108 एम्बुलेंस जैसी सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के सौजन्य से चन्दन डायग्नोस्टिक केंद्र द्वारा प्रतिदिन 70 से 80 डायग्नोस्टिक जांचें निःशुल्क की जा रही हैं, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।

दीपावली: आत्मनिर्भरता और स्वदेशी गर्व का पर्व

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Deepawali 2025 wokal for lokal दीपावली केवल रोशनी और उल्लास का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने गृह क्षेत्र खटीमा में ‘स्वदेशी अपनाओ’ अभियान के अंतर्गत पारंपरिक मिट्टी के दीयों और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस दीपावली स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। इससे न केवल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बल मिलेगा, बल्कि गांवों और कस्बों की अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिलेगी।

उन्होंने कहा, “जब हम अपने गांव-कस्बों में बने दीये या स्वदेशी वस्तुएँ खरीदते हैं, तो हम केवल एक उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि किसी परिवार की आजीविका, मेहनत और उम्मीद का सम्मान करते हैं।”

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को ज़मीनी स्तर पर साकार करने के लिए लगातार प्रयासरत है। स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से स्थानीय कुटीर उद्योग, शिल्प और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की हस्तकला, पारंपरिक उत्पाद, मिट्टी के दीये, जैविक और पहाड़ी खाद्य सामग्री न केवल राज्य में बल्कि देश-विदेश में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि इस दीपावली संकल्प लें कि अपने घर की सजावट और रोशनी केवल स्वदेशी उत्पादों से करें, ताकि किसी और घर में भी खुशियों के दीये जल सकें। “हमारी हर छोटी-सी खरीद किसी परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है,” उन्होंने कहा।

अंत में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दीपावली, धनतेरस और भैयादूज की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए।

इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी, महिला समूहों की सदस्याएं और आम नागरिक उपस्थित रहे।

हिमालयन अस्पताल में जटिल सर्जरी से नवजात को नई जिंदगी

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नवजात को इसोफेजियल एट्रेज़िआ विद ट्रेकियो-इसोफेजियल फिस्चुला नामक गंभीर स्थिति थी, जिसमें आहार नली विकसित नहीं होती और श्वास नली से जुड़ी रहती है।

दीपावली से पहले हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में एक अद्भुत चिकित्सा सफलता ने एक परिवार के जीवन में फिर खुशियां लौटा दीं। रश्मि (नाम परिवर्तित) के प्री-मेच्योर नवजात की आहार नली पूरी तरह विकसित नहीं थी। अस्पताल के बाल शल्य चिकित्सकों की टीम ने जटिल सर्जरी कर नवजात की आहार नली विकसित की। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि नवजात को इसोफेजियल एट्रेज़िआ विद ट्रेकियो-इसोफेजियल फिस्चुला नामक गंभीर स्थिति थी, जिसमें आहार नली विकसित नहीं होती और श्वास नली से जुड़ी रहती है। सर्जरी टीम में डॉ. सोनालिक गुप्ता, डॉ. सागर गर्ग, डॉ. आरती राजपूत, डॉ. यूसुफ और ओटी स्टाफ शीतल शामिल रहे। सर्जरी के बाद नवजात को डॉ. चिन्मय और डॉ. सैकत पात्रा की निगरानी में एनआईसीयू में रखा गया।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि यह सफलता टीम की प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट कौशल का परिणाम है। अस्पताल का उद्देश्य हर नवजात को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

रश्मि के परिवार ने तीन सप्ताह की सघन देखभाल के बाद जब शिशु को पहली बार दूध पीते देखा, तो उन्होंने इसे “दीपावली का सबसे बड़ा उपहार” बताया।

क्यों थी सर्जरी चुनौतीपूर्ण?
नवजात का वजन मात्र 1500 ग्राम था और वह समय से पहले जन्मा था, जिससे सर्जरी और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई थी।

हिमालयन अस्पताल में अत्याधुनिक नवजात चिकित्सा सुविधाएं
अस्पताल में जटिल नवजात सर्जरी के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ टीम, आधुनिक एनआईसीयू और मॉनिटरिंग सिस्टम उपलब्ध हैं। यहां प्री-मेच्योर और गंभीर अवस्था वाले शिशुओं का उपचार उन्नत तकनीक और संवेदना के साथ किया जाता है।

क्या है इसोफेजियल एट्रेज़िआ?
यह एक जन्मजात विकृति है, जो लगभग 4500–5000 में से एक बच्चे में पाई जाती है। इसमें आहार नली का विकास अधूरा रह जाता है और अधिकांश मामलों में यह श्वास नली से जुड़ जाती है, जिससे नवजात को सांस लेने और भोजन निगलने में कठिनाई होती है।

तीन महीने बाद फिर से गुलजार हुए कार्बेट टाइगर रिजर्व के पर्यटन जोन, पर्यटकों ने ली जंगल सफारी की रोमांचक शुरुआत

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तीन महीने बाद फिर से गुलजार हुए कार्बेट टाइगर रिजर्व के पर्यटन जोन, पर्यटकों ने ली जंगल सफारी की रोमांचक शुरुआत

ढिकाला, बिजरानी, झिरना, दुर्गादेवी जोन खुले; बाघ और हाथियों की झलक ने बढ़ाया रोमांच

रामनगर। मानसून के कारण तीन महीने तक बंद रहने के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के प्रमुख पर्यटन जोन एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। ढिकाला, बिजरानी, झिरना और दुर्गादेवी जैसे लोकप्रिय जोनों में बुधवार से जंगल सफारी शुरू हो गई, जिसमें पहले ही दिन पर्यटकों ने हिरण, हाथी सहित कई वन्यजीवों को देखने का रोमांच महसूस किया।

बुधवार सुबह बिजरानी जोन के आमडंडा गेट पर पर्यटन सत्र का विधिवत शुभारंभ हुआ। स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने फीता काटा और नारियल फोड़कर जंगल सफारी सीजन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कार्बेट उपनिदेशक राहुल मिश्रा, एसडीओ अमित ग्वासाकोटी और रेंजर नवीन चंद्र पांडे भी मौजूद रहे।

पर्यटकों को लड्डू खिलाकर और पारंपरिक तरीके से स्वागत कर जंगल सफारी के लिए रवाना किया गया। सुबह की पाली में 30 जिप्सियों के माध्यम से पर्यटकों ने सफारी का आनंद लिया। हालांकि पहले दिन किसी को बाघ नहीं दिखाई दिया, लेकिन हाथी और अन्य वन्यजीवों की झलक ने सफारी को रोमांचक बना दिया।

सीतावनी और भंडारपानी जोन में अपेक्षाकृत कम भीड़ रही, जहां निर्धारित 60 में से केवल कुछ ही जिप्सियों से पर्यटक जंगल में गए। वहीं पवलगढ़ गेट से 60 जिप्सियों के माध्यम से अच्छी संख्या में पर्यटक सफारी पर निकले। यहां रेंजर रमेश चंद्र ध्यानी ने पर्यटकों का माला पहनाकर स्वागत किया।

इसके अलावा कालाढूंगी स्थित कार्बेट फॉल और बराती रौ जैसे पैदल पर्यटन स्थलों को भी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो चुकी है और सभी गेट्स पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। दोपहर की पाली में भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के जंगल सफारी के लिए जाने की संभावना है।

राज्य में सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया जायेगा – मुख्यमंत्री

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राज्य में सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया जायेगा – मुख्यमंत्री सीमांत जिलों में आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी जानकारी और प्रशिक्षण के लिए नवाचार केन्द्र बनेंगे – मुख्यमंत्री गुप्तकाशी में चतुर्थ सीमांत पर्वतीय बाल विज्ञान महोत्सव का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गुप्तकाशी में चतुर्थ सीमांत पर्वतीय बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं और सेवाओं के विस्तार हेतु राज्य में सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत जनपदों में अब ऐसे नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहाँ आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी उपयोगी जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव के राज्य स्तरीय आयोजन का दीप प्रज्वलित शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न जनपदों से आए बाल वैज्ञानिकों के साथ जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन एवं संरक्षण, आपदा प्रबंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा संरक्षण आदि विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भव्य आयोजन से सीमांत जनपदों के प्रतिभावान बाल वैज्ञानिकों को नई दिशा और अवसर प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। नए भारत की गति और दिशा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों पर निर्भर करेगी। विज्ञान की नई तकनीकों के बल पर आज भारत अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहा है। देहरादून में देश की पाँचवीं साइंस सिटी बनने जा रही है, जो उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जनता को पारदर्शी और प्रभावी सेवाएँ मिलें, इसके लिए अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर रुद्रप्रयाग जिले में आपदा प्रबंधन केंद्र के निर्माण के लिए जिलाधिकारी को कार्ययोजना बनाने के निर्देश देने के साथ ही पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बणसू जाखधार में विभिन्न कार्यों के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, सीमांत क्षेत्र के उद्यमी इंद्र सिंह रावत और सीमांत सेवा फाउंडेशन के डॉ. पाटनी को सम्मानित करने के साथ ही यूकॉस्ट की रुद्रप्रयाग डैशबोर्ड पुस्तक का विमोचन भी किया। इस जीआईएस आधारित रिमोट सिस्टम डैशबोर्ड पर विभिन्न विभागों की योजनाओं से जुड़ी सूचनाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव की थीम – जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियाँ तथा आपदा जोखिम प्रबंधन एकीकरण है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन एवं संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा देना और ऐसी रणनीतियाँ विकसित करना है।

कार्यक्रम में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, उपाध्यक्ष महिला बाल विकास ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिला अध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, प्रधानाचार्य पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय जाखधार तिलक सिंह सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ

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Chief Minister Pushkar Singh Dhami inaugurated the Children’s Science Festival मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ

रुद्रप्रयाग में आयोजित चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव में 300 छात्र और वैज्ञानिक ले रहे हैं भाग

रुद्रप्रयाग | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने वाला देश का पहला राज्य है, जहां तकनीकी शिक्षा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास, रोबोटिक्स और इनोवेशन लैब्स की स्थापना की जा रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पहली बार कक्षा 12 के व्यावसायिक छात्रों के लिए रोजगार मेले का आयोजन किया गया है, जो राज्य सरकार की युवाओं को हुनर और रोजगार से जोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

महोत्सव का आयोजन उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में 15–16 अक्टूबर को पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बणसू, जाखधार, गुप्तकाशी में किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय आयोजन में लगभग 300 स्कूली छात्र-छात्राएं, देशभर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, विज्ञान संचारक और प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिताओं में विज्ञान कविता पाठ (हिंदी व अंग्रेजी), विज्ञान मॉडल निर्माण, प्रश्नोत्तरी और बाल चौपाल जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। प्रतिभागियों को जूनियर (कक्षा 6–8) और सीनियर (कक्षा 9–12) वर्ग में विभाजित किया गया है।

इस वर्ष महोत्सव की थीम “जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियाँ एवं आपदा जोखिम प्रबंधन एकीकरण” निर्धारित की गई है। कार्यक्रम का संचालन मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के निर्देशन में किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व यह विज्ञान महोत्सव चम्पावत, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में आयोजित किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “सीमांत क्षेत्रों का वैज्ञानिक और तकनीकी विकास, सशक्त उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में अहम कदम है।”

प्रदेशभर में घटिया और प्रतिबंधित कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई, अब तक 370 से अधिक सैंपल लिए गए

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प्रदेशभर में घटिया और प्रतिबंधित कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई, अब तक 370 से अधिक सैंपल लिए गए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर राज्य में घटिया व प्रतिबंधित दवाओं के खिलाफ सघन अभियान जारी है। औषधि विभाग ने अब तक प्रदेशभर से 370 से अधिक औषधीय सैंपल जांच के लिए संकलित किए हैं।

राज्यभर में चल रहे इस औचक निरीक्षण अभियान की निगरानी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार के आदेश पर की जा रही है। अपर आयुक्त एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में जिलों की औषधि निरीक्षक टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं।

तीन प्रमुख जिलों में छापेमारी

🔹 रामनगर (नैनीताल):
14 अक्टूबर को खताड़ी क्षेत्र में औचक निरीक्षण के दौरान एक मेडिकल स्टोर को गंभीर अनियमितताओं के चलते तत्काल बंद किया गया। दो अन्य स्टोरों को चेतावनी दी गई, जबकि दो स्टोर बंद पाए गए। एक क्लीनिक से पांच दवाओं के सैंपल भी लिए गए।

🔹 देहरादून:
दून मेडिकल कॉलेज के पास मेडिकल स्टोर्स में छापेमारी कर बच्चों की खांसी-जुकाम की प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गईं। साथ ही सेलाकुई स्थित औषधि निर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर चार सैंपल जांच के लिए लिए गए।

🔹 रुड़की (हरिद्वार):
गुप्त सूचना के आधार पर बिना लाइसेंस एक प्रतिष्ठान में छापा मारकर राजस्थान व मध्यप्रदेश सरकार की सप्लाई की गई 12 प्रकार की सरकारी एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं। दवाएं फार्म 17–17ए के अंतर्गत सील कर ली गई हैं। कार्रवाई Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत की जाएगी।


सरकार की स्पष्ट चेतावनी: बच्चों की दवा को लेकर कोई समझौता नहीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। खासकर दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित कफ सिरप न देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “कार्रवाई सतत जारी रहेगी। बच्चों की सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार और अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने भी अभियान को लगातार और कठोर बनाए रखने की बात कही है।


सरकार का संदेश स्पष्ट:

“जनस्वास्थ्य और खासकर बच्चों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अनधिकृत बिक्री, भंडारण या घटिया दवाओं पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”