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पुष्कर सिंह धामी सरकार के ‘गुड गवर्नेंस’ प्रतीक बने देहरादून डीएम सबीन बंसल

पुष्कर सिंह धामी सरकार के ‘गुड गवर्नेंस’ प्रतीक बने देहरादून डीएम सबीन बंसल

देहरादून। कभी-कभी एक व्यक्ति ही पूरे तंत्र को दिशा देने वाला संदेश बन जाता है। उत्तराखंड में देहरादून के जिलाधिकारी आईएएस सबीन बंसल ऐसे ही एक अधिकारी के रूप में उभरे हैं, जो सरकार के “जनता के द्वार” वाले संकल्प को साकार कर रहे हैं। उनका कार्यालय आज जनता की आवाज़ सुनने और तत्काल समाधान देने का प्रतीक बन चुका है।

डीएम सबीन बंसल के जनता दरबार में रोज़ाना सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुँचते हैं—चाहे वह सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें हों, या व्यक्तिगत परेशानियाँ। हर फरियादी को सुनना और समयबद्ध समाधान देना अब देहरादून प्रशासन की पहचान बन चुका है। यही कारण है कि जनता से लेकर सरकार तक, सब उनके कामकाज की प्रशंसा कर रहे हैं।


मामला जिसने दिल जीता — शिक्षिका कनिका मदान को मिला न्याय

हाल ही में देहरादून कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन में एक शिक्षिका कनिका मदान अपनी दो बेटियों के साथ जिलाधिकारी से मिलीं। उन्होंने बताया कि मोथरोवाला स्थित इडिफाई वर्ल्ड स्कूल प्रबंधन ने उनका दो माह का वेतन, सुरक्षा राशि रोक रखी थी और अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया था।

जिलाधिकारी सबीन बंसल ने तत्काल मुख्य शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। उनके हस्तक्षेप के बाद मात्र दो दिनों के भीतर स्कूल प्रबंधन ने न केवल शिक्षिका का लंबित वेतन (₹78,966) जारी किया, बल्कि सही विवरण के साथ नया अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी किया।

यह उदाहरण केवल एक शिक्षिका की जीत नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशील शासन की मिसाल बन गया।


“जनता के लिए प्रशासन” का साकार रूप

डीएम सबीन बंसल अपनी दृढ़ और संवेदनशील कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वे किसी भी मामले में लापरवाही या टालमटोल बर्दाश्त नहीं करते। चाहे विधवा महिला की सहायता हो, गरीब परिवार की समस्या हो या स्कूल प्रबंधन जैसे प्रभावशाली संस्थानों से जुड़ा मामला — वे सभी में निष्पक्ष और त्वरित निर्णय लेते हैं।

उनके नेतृत्व में देहरादून प्रशासन ने स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े कई मुद्दों पर निर्णायक कदम उठाए हैं। इस कारण न केवल आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा है, बल्कि शासन की “गुड गवर्नेंस” की नीति भी ज़मीन पर उतरती दिख रही है।


जनता दरबार बना विश्वास का प्रतीक

डीएम कार्यालय में रोज़ाना 40–50 नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर पहुँचते हैं। हर फरियादी को समयबद्ध समाधान मिलता है, जिससे लोगों में यह विश्वास बना है कि “अगर देहरादून डीएम के पास जाएंगे, तो न्याय मिलेगा।”

सबीन बंसल की कार्यशैली ने एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है — जहाँ प्रशासन जनता के करीब है, और जनता सरकार के प्रति भरोसा महसूस कर रही है।

निष्कर्ष

आईएएस सबीन बंसल आज उत्तराखंड में गुड गवर्नेंस के आइकॉन के रूप में देखे जा रहे हैं। उनका संदेश स्पष्ट है —

“प्रशासन जनता के लिए है, और जनता के हित में हर कदम हमारा दायित्व है।”

देहरादून: उत्तरांचल ग्रामीण बैंक ने दिया राहत कोष में सहयोग

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में उत्तरांचल ग्रामीण बैंक के प्रतिनिधियों ने भेंट की। इस दौरान बैंक प्रतिनिधियों ने राज्य में आपदा प्रभावितों की सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए ₹35,49,371 की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने उत्तरांचल ग्रामीण बैंक के इस योगदान के लिए बैंक प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग आपदा प्रभावितों की सहायता एवं पुनर्निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार हर आपदा प्रभावित व्यक्ति के साथ खड़ी है और समाज के विभिन्न वर्गों एवं संस्थाओं द्वारा किया जा रहा सहयोग मानवता और एकजुटता की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास पीड़ित परिवारों को राहत देने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में सहायक सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर बैंक के चेयरमैन श्री हरिहर पटनायक, श्री राजीव प्रकाश, सुश्री भारती नौडियाल, श्री हरीश कण्डारी और श्री महिपाल डसीला उपस्थित रहे।

बिहार में मगध लिखेगा विजय मिथिलांचल

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बिहार में मगध लिखेगा विजय मिथिलांचल बिहार में इस समय राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासत की गर्मी हर गली-मोहल्ले में महसूस की जा रही है। जीत के दावे खुलेआम किए जा रहे हैं, जबकि मतदाता अब भी खामोश हैं। इसी खामोशी में आगामी परिणाम की दिशा छिपी प्रतीत होती है। राजनीतिक दलों से लेकर कारोबारी वर्ग तक सभी बिहार की जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए विजय का दावा कर रहे हैं।

फिलहाल, छठ पूजा का सूर्य बिहार के हर घर को आलोकित कर रहा है, वहीं चुनावी माहौल में लोगों की निगाहें मिथिलांचल पर टिकी हैं। माना जाता है कि यहां की 30 विधानसभा सीटें बिहार की सियासत की दिशा तय करती हैं।

इनमें से सात सीटों पर इस समय राजनीतिक संग्राम अपने चरम पर है। एनडीए इन सीटों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा रही है, जबकि आईएनडीआईए गठबंधन इन्हें किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नहीं देना चाहता। इन सीटों में दरभंगा की एक, समस्तीपुर की चार और मधुबनी की दो सीटें शामिल हैं। वर्तमान में इनमें से छह सीटों पर राजद तथा एक पर माकपा का कब्जा है।

हाल ही में योगगुरु बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का सबसे सशक्त नेता बताते हुए उनकी तुलना हिमालय से की। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तित्व हिमालय जितना दृढ़ है।” बिहार चुनाव को लेकर बाबा रामदेव का कहना था कि चाहे महागठबंधन हो, प्रशांत किशोर हों या ओवैसी — सभी अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, लेकिन एनडीए, जो वर्तमान में देश का सबसे सशक्त राजनीतिक गठबंधन है और जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं, उससे मुकाबला करना किसी विपक्षी के लिए आसान नहीं।

राजनीतिक दृष्टि से बिहार देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। लोकसभा की 543 सीटों में से 40 सीटें बिहार से आती हैं। राज्य की राजधानी पटना है। भौगोलिक रूप से बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखंड स्थित हैं। “बिहार” नाम ‘विहार’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है — बौद्ध भिक्षुओं का निवास स्थान।

यह राज्य गंगा और उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है और ऐतिहासिक दृष्टि से भारत के कई महान साम्राज्यों की जन्मभूमि रहा है। मौर्य वंश का उदय यहीं मगध से हुआ और इसके बाद गुप्त वंश ने भी इसी भूमि से पूरे भारत पर शासन किया।

आज भी यहां की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि है। वर्ष 1936 में ओडिशा और वर्ष 2000 में झारखंड बिहार से अलग होकर स्वतंत्र राज्य बने। वर्तमान में केवल 11.3 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है, जो हिमाचल प्रदेश के बाद देश में सबसे कम है।
राज्य की बागडोर लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों में है, और आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की जनता इस बार किसके हाथों में सत्ता की चाबी सौंपती है।

हल्द्वानी साकेत कॉलोनी में झोपड़ी में लगी भीषण आग, सिलेंडर फटने से मचा हड़कंप

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हल्द्वानी साकेत कॉलोनी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक झोपड़ी में आग लगने से जोरदार धमाके के साथ सिलेंडर फट गया.

हल्द्वानी: बीती देर रात हल्द्वानी के लालडांट क्षेत्र स्थित साकेत कॉलोनी में बटाई पर रहने वाले एक परिवार की झोपड़ी में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और झोपड़ी में रखा गैस सिलेंडर फट गया. धमाके की आवाज से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.

झोपड़ी में लगी भीषण आग: घटना के समय झोपड़ी में रहने वाला परिवार दीपावली मनाने अपने पैतृक गांव गया हुआ था. गनीमत रही कि झोपड़ी के अंदर कोई मौजूद नहीं था, जिसके चलते एक बड़ा हादसा टल गया और जनहानि से बचाव हो गया. स्थानीय लोगों ने आग की लपटें उठती देख तुरंत फायर ब्रिगेड और मुखानी थाना पुलिस को सूचना दी.

गैस सिलेंडर में हुआ ब्लास्ट: सूचना मिलते ही दमकल कर्मी और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया, हालांकि तब तक झोपड़ी में रखा सारा घरेलू सामान बिस्तर, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी चीजें जलकर राख हो चुकी थी. आसपास के लोगों ने बताया कि आग लगने से पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया.

सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस: पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि दीपावली के दौरान छोड़ा गया एक रॉकेट झोपड़ी की छत पर गिरा, जिससे आग भड़क गई. आग धीरे-धीरे फैलती चली गई और अंदर रखा सिलेंडर फट गया.

आतिशबाजी आग लगने की वजह: मुखानी थाना पुलिस ने बताया कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन आग से काफी नुकसान हुआ है. वहीं फायर ब्रिगेड विभाग ने आसपास के लोगों से अपील की है कि त्योहारों के समय आतिशबाजी करते वक्त सावधानी बरतें और गैस सिलेंडर तथा बिजली उपकरणों की नियमित सुरक्षा जांच अवश्य करें, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके.

पुलिस ने क्या कहा: स्थानीय लोगों की सतर्कता और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से आग पर काबू पा लिया गया, नहीं तो आग आसपास की झोपड़ियों तक फैल सकती थी. देर रात साकेत कॉलोनी में घटी ने लोगों में दहशत पैदा कर दी.पुलिस टीम आग लगने का कारण रॉकेट मान रही है. थाना मुखानी इंस्पेक्टर दिनेश जोशी ने बताया कि रॉकेट के कारण पहले झोपडी में आग लगी है. जिसके अंदर रखा सिलेंडर फटा, जिस कारण झोपडी पूरी तरह राख हो गई. हादसे के वक्त झोपड़ी में कोई भी मौजूद नहीं था.

महिला के पेट में पट्टी का गोला छोड़ने की जांच शुरू, नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त, पीड़िता की गई थी जान

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नर्सिंग होम में ऑपरेशन होने के बाद महिला बीमार रहने लगी, दूसरे अस्पताल में सर्जरी के दौरान पेट से पट्टी का गोज निकला था

देहरादून: राजधानी देहरादून के एक नर्सिंग होम पर लापरवाही के आरोप लगे हैं. महिला के पेट में पट्टी का गोज छोड़े जाने के मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मनोज शर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है.

महिला के पेट में पट्टी का गोज छोड़ने की जांच शुरू: तीन सदस्यीय जांच कमेटी में एसीएमओ डॉ प्रदीप राणा, कोरोनेशन अस्पताल के सर्जन डॉक्टर आरके टम्टा, वरिष्ठ गायनोकोलॉजिस्ट डॉ मेघना असवाल को शामिल किया गया है. जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अग्रिम कार्रवाई की जाएगी.

दूसरे अस्पताल में इलाज के दौरान चला था पता: देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मनोज शर्मा ने बताया कि-

दीपावली के दिन यह शिकायत प्राप्त हुई थी कि कुछ लोग आराघर के पास स्थित नर्सिंग होम के बाहर महिला का शव रखकर हंगामा कर रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ कार्यालय से एसीएमओ को नर्सिंग होम भेजा गया. इसके बाद यह पता चला कि जनवरी माह में नर्सिंग होम की डॉक्टर ने ज्योति नाम की महिला का सिजेरियन सेक्शन से ऑपरेशन किया था. ऑपरेशन के बाद अक्टूबर में महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई. उसके बाद महिला दोबारा इसी नर्सिंग होम में स्वास्थ्य संबंधित शिकायत लेकर पहुंची.

डॉक्टर की तरफ से महिला की क्लीनिकल जांचें करवाई गई. जांच रिपोर्ट आने के बाद महिला को एक बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया. वहां महिला का ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसकी दो दिन बाद मौत हो गई. इसके बाद शिकायतकर्ता जो महिला का पति है, उसने आरोप लगाया कि बड़े अस्पताल में ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी के पेट से पट्टी का गोज निकला है. जो संभवत जनवरी में उनकी पत्नी के आराघर स्थित नर्सिंग होम में हुए ऑपरेशन के बाद पेट में छोड़ा गया था.
-डॉक्टर मनोज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी-

आरोपी नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त: महिला के पति का आरोप था कि इसी कारण उनकी पत्नी की मौत हुई है. उसके बाद नर्सिंग होम में हुए जन आक्रोश और कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए नर्सिंग होम का अग्रिम आदेशों तक लाइसेंस निरस्त कर दिया गया. मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है. शुक्रवार से जांच कमेटी ने इसकी जांच शुरू कर दी है. जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा.

देहरादून आईटी पार्क पर अवैध कटान कर लकड़ी ले जा रहा वाहन पकड़ा, महिला वन कर्मी ने की कार्रवाई

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वाहन चालक तुन की लकड़ी के गिल्टे ले जा रहा था, वो वन विभाग की टीम को वैध कागजात नहीं दिखा पाया

देहरादून: वन विभाग ने देहरादून IT पार्क पर अवैध पेड़ कटान से भरी गाड़ी को छापा मार कर पकड़ा. वाहन को जब्त करके कानूनी कार्रवाई के लिए आगे भेजा गया है. राजधानी देहरादून में खुलेआम लकड़ी तस्करी की घटना से हड़कंप मच गया.

IT पार्क से पकड़ी अवैध पेड़ कटान की लकड़ी से भरी गाड़ी: शुक्रवार सुबह क्षेत्रीय वन प्रभाग मसूरी ने अवैध पेड़ कटान पर कार्रवाई करते हुए देहरादून आईटी पार्क में लकड़ी के गिल्टों से भरे वाहन को जब्त किया है. वन विभाग की टीम ने देहरादून आईटी पार्क में चेकिंग के दौरान यह कार्रवाई की है. अवैध पेड़ कटान कर लकड़ी ले जा रहे वाहन को मसूरी वन विभाग की टीम ने जब्त कर कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट भेज दिया है. मसूरी वन विभाग की टीम पहले वाहन को सीज कर रायपुर वन चौकी लायी, उसके बाद इस वाहन को रायपुर रेंज कार्यालय पर ले जाया गया. जहां पर जरूरी कागजी कार्रवाई करके इसे कोर्ट भेजा गया.

चालक वैध कागजात नहीं दिखा सका: उप वन क्षेत्र अधिकारी रायपुर रेंज वीरेंद्र दत्त जोशी ने इस कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि-

हमारी टीम रूटिंग कार्रवाई के तहत गश्त पर थी. वन विभाग की टीम ने देहरादून आईटी पार्क के पास एक गाड़ी की चेकिंग की. इस दौरान उसमें पेड़ का कटान कर ले जायी जा रही लकड़ी बरामद हुई. वाहन चालक और उसके साथ मौजूद व्यक्ति द्वारा कोई वैध कागजात नहीं दिखाए गए. इसके बाद गाड़ी को सीज किया गया. वाहन में सवार व्यक्ति द्वारा बताया गया कि उसकी नाप भूमि से यह पेड़ काटा गया है. इसके बाद गाड़ी को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय लाया गया.
-वीरेंद्र दत्त जोशी, उप वन क्षेत्र अधिकारी रायपुर रेंज-

वन विभाग की परमिशन के बिना काटा था पेड़: उपवन क्षेत्र अधिकारी रायपुर रेंज वीरेंद्र दत्त जोशी ने बताया कि यह अवैध रूप से काटा गया पेड़ तुन का था. इसके 12 से अधिक पीस बरामद किए गए हैं. उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी नाप भूमि से भी तुन का पेड़ काटना है तो उसके लिए जरूरी परमिशन लेनी होती है. उन्होंने बताया कि अपनी निजी भूमि पर भी इस तरह का पेड़ काटने के लिए उन्हें विभाग में आवेदन करना होता है. विभाग व्यक्ति की आवश्यकता को देखते हुए या फिर पेड़ द्वारा संपत्ति को हो रहे नुकसान का आकलन करते हुए उक्त व्यक्ति के आवेदन पर निर्णय लेता है. उसके बाद पेड़ को काटने की परमिशन देता है. पकड़े गए व्यक्ति द्वारा किसी तरह की कोई परमिशन का कागज नहीं दिखाया गया, जिस वजह से इस अवैध माना गया है.

महिला वन कर्मियों ने किया सराहनीय कार्य: वन विभाग द्वारा इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली अपनी टीम को प्रोत्साहित किया गया है. उपवन क्षेत्र अधिकारी रायपुर रेंज वीरेंद्र दत्त जोशी ने बताया कि-

यह कार्रवाई उनकी महिला वनकर्मियों द्वारा की गई है, जो कि अपने आप में बेहद सराहनीय है. वन विभाग में कार्यरत महिला कर्मियों द्वारा इस तरह का साहसी काम किया गया है जो कि अपने आप में बेहद बड़ी उपलब्धि है. इस कार्रवाई में वन बीट अधिकारी रेखा नेगी और सहायक कर्मचारी कुंदन सिंह के साथ कई अन्य वन कर्मियों ने सराहनीय भूमिका निभाई जो कि बधाई के पात्र हैं.
-वीरेंद्र दत्त जोशी, उपवन क्षेत्र अधिकारी, रायपुर रेंज-

अल्मोड़ा: खाई में गिरी ऑल्टो, एक की मौत

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अल्मोड़ा से दुखद घटना सायं लगभग 3.00 से 04.00 बजे कनारीछीना के पास एक ऑल्टो कार UK 01 TA 1564 लगभग 30 मी0 गहरी खाई में गिरने से दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसमें 02 युवक सवार थे।
जिसमें एक युवक की दुःखद मृत्यु हो गई।
पुलिस टीम द्वारा स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक और मृतक के शव को खाई से निकाला गया।
घायल-
नीरज 30 वर्ष पुत्र राम सिंह निवासी- पारखेत बागेश्वर
मृतक-
महिपाल उम्र 35 वर्ष पुत्र चन्दन सिंह निवासी-जमराड़ी बैंड अल्मोड़ा

लाखों की चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार, हाल ही में जमानत पर बाहर आया हुआ था आरोपी

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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और हल्द्वानी पुलिस ने लाखों की चरस के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया.

हल्द्वानी: पहाड़ी जनपदों से चरस खरीद कर मैदानी क्षेत्रों में ऊंचे दाम पर बेचने आए एक तस्कर को उत्तराखंड एसटीएफ की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से 2 किलो से अधिक चरस बरामद हुई है. बरामद चरस की अंतरराष्ट्रीय कीमत 12 लाख रुपए आंकी जा रही है. आरोपी के खिलाफ हल्द्वानी पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुटी हुई है. पुलिस तस्कर के तार खंगाल रही है. आरोपी पहले भी तस्करी के आरोप में जेल जा चुका है और जमानत पर बाहर आया था.

मैदानी क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर बेचता था तस्कर: गौर हो कि उत्तराखंड में नशा तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है. मोटी कमाई के चक्कर में लोग इस जंजाल में फंस रहे हैं. उत्तराखंड एसटीएफ की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा हल्द्वानी कोतवाली के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 12 लाख की चरस के साथ एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है. आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है. पुलिस के मुताबिक एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना मिली थी कि पहाड़ों से भारी मात्रा में चरस हल्द्वानी लाई जा रही है.

तलाशी के दौरान लाखों की चरस बरामद: जिसपर टीम द्वारा हल्द्वानी कोतवाली पुलिस को साथ लेकर एमबीपीजी कॉलेज के पास से एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया. तलाशी के दौरान आरोपी युवक के पास से 2 किलो 20 ग्राम चरस बरामद हुई. पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम नारायण सिंह परगई (58 साल), निवासी ग्राम कुकना तहसील ओखेलकांडा, थाना मुक्तेश्वर जनपद नैनीताल हाल निवासी जय दुर्गा कॉलोनी, दुर्गा सिटी सेंटर, हल्द्वानी बताया.

जेल से जमानत पर बाहर आया हुआ था तस्कर: आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने चरस चम्पावत के नौलिया गांव से खरीदी थी, जिसको वह मैदानी क्षेत्रों मे ऊंचे दामों मे बेचने के लिए लाया था. इससे पहले भी वह कई बार पहाड़ी क्षेत्र से चरस ला चुका है. अभियुक्त द्वारा बताया गया कि इससे पहले भी वो एक बार चरस तस्करी मे जेल जा चुका है. जमानत से छूटने के बाद कम समय मे ज्यादा पैसा कमाने के लालच मे उसने दोबारा से चरस तस्करी का काम शुरू कर दिया था. STF टीम द्वारा पूछताछ में अन्य कई ड्रग्स तस्करों के नाम की जानकारी हुई है. जिन पर अलग से कार्रवाई की जायेगी, अभियुक्त का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है.

कोटद्वार में विवाद सुलझाने गई पुलिस टीम पर हमला, 10 महिलाओं समेत 14 गिरफ्तार

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यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर के गांव में आयोजित रामलीला के दौरान कुछ युवकों ने उत्तराखंड की महिलाओं पर पटाखे फेंक दिए थे

पौड़ी गढ़वाल: कोतवाली कोटद्वार क्षेत्र में रामलीला के दौरान हुए विवाद को सुलझाने पहुंची पुलिस खुद हंगामे में फंस गई. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लोगों ने पुलिस टीम को दौड़ा लिया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पुलिस ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 22 नामजद समेत 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 महिलाओं समेत 14 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

लोगों के विवाद ने लिया हिंसक रूप: जानकारी के अनुसार, देवरामपुर क्षेत्र की महिलाएं यूपी के तल्ला मोटाढाक में रामलीला देखकर लौट रही थीं. इस दौरान यूपी के युवकों ने उनके साथ अभद्रता करते हुए जलते पटाखे फेंके. विरोध करने पर मारपीट की गई. गांव वालों का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया. महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने देवरामपुर के युवकों को पकड़ लिया, जबकि अभद्रता करने वाले युवकों को अलग ले जाने लगी.

गांव वालों ने पुलिस से आरोपी युवकों को अलग न ले जाकर मौके पर ही फैसला करने की मांग की गई. इस बात को लेकर एसआई और महिलाओं में तीखी नोकझोंक हो गई. इसके बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया. गुरुवार सुबह देवरामपुर के लोग दोनों युवकों को पुलिस हिरासत से छुड़ाने पहुंचे तो इस दौरान बीती रात पुलिस से उलझने वाले कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

10 महिलाओं समेत 14 लोग गिरफ्तार: कोटद्वार में 22 अक्टूबर को रामलीला के आयोजन के दौरान दो पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती खड़ी कर दी. अपर पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह ने बताया कि-

विवाद की सूचना पुलिस को समय पर मिली थी. प्रारंभिक जांच में पता चला कि रामलीला स्थल पर दो समूहों में आपसी विवाद के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विवाद के एक पक्ष के कुछ व्यक्तियों को थाने बुलाकर पूछताछ की कोशिश की. इसी दौरान दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने पुलिस टीम पर अचानक हमला कर दिया. इस हमले में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए. उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए तुरंत कड़ी कार्रवाई की. इस मामले में तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज की गई और 10 महिलाओं सहित कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया और न्यायालय ने उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए.
-चंद्र मोहन सिंह नेगी, अपर पुलिस अधीक्षक-

पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की: अपर पुलिस अधीक्षक ने यह भी बताया कि इस घटना में शामिल कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पहले ही दर्ज हैं, जबकि करीब 15 लोग अज्ञात हैं. अज्ञात व्यक्तियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार विवेचना कर रही है. शीघ्र ही उन्हें भी न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा. अपर पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह ने नागरिकों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि पुलिस कानून और व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है. किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

मॉडिफाइड साइलेंसर से पटाखे फोड़ने से मना किया तो पुलिसकर्मियों को पीटा, 2 महिला समेत 4 पर केस दर्ज

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युवक को मॉडिफाइड साइलेंसर से पटाखे फोड़ना से रोकना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया.

लक्सर: हरिद्वार जिले के लक्सर कोतवाली क्षेत्र के मुंडाखेड़ा खुर्द गांव में पुलिसकर्मियों पर हमला करने का मामला सामने आया है. घर के बाहर बाइक के मॉडिफाइड साइलेंसर से पटाखे फोड़कर तेज आवाज निकालने की शिकायत पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर युवक के परिवार ने ना सिर्फ हमला कर दिया, बल्कि उनकी वर्दी भी फाड़ डाली. पुलिस टीम पर हमला होते ही हड़कंप मच गया. सूचना मिलने पर दूसरी टीम मौके पर पहुंची, तब तक आरोपी फरार हो गए. पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है.

जानकारी के मुताबिक, मुंडाखेड़ा खुर्द निवासी प्रदीप ने शाम पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी थी कि गांव में ही रहने वाला भास्कर अपने घर के बाहर बाइक के साइलेंसर से पटाखों की तेज आवाज निकाल रहा है. प्रदीप के मना करने के बाद भी वह लगातार ऐसा करता रहा. सूचना पर हेड कांस्टेबल मनोज मिनान और रविंद्र नागर मौके पर पहुंचे और शिकायतकर्ता से जानकारी लेने के बाद भास्कर के घर पहुंचे.

पुलिसकर्मियों के अनुसार, उस समय भास्कर घर पर नहीं था. उन्होंने उसके पिता धूम सिंह को समझाया कि बेटे को दोबारा ऐसी हरकत न करने की हिदायत दी. पुलिसकर्मी वहां से लौट ही रहे थे कि कुछ ही दूरी पर धूम सिंह, उसकी पत्नी , भाई और उसकी पत्नी ने उन्हें रोक लिया. बताया गया कि सभी ने मिलकर पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ गाली गलौज व मारपीट शुरू कर दी.

हाथापाई के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी फट गई और उनके चेहरे पर भी चोटें आईं. घटना की गंभीरता को देखते हुए घायल पुलिसकर्मियों ने किसी तरह कोतवाली लक्सर में फोन कर सूचना दी. कुछ देर बाद उपनिरीक्षक दीपक चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी गांव छोड़कर फरार हो चुके थे. घायल पुलिसकर्मियों का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और हेड कांस्टेबल मनोज मिनान की तहरीर पर सभी चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

कोतवाली प्रभारी राजीव रौथाण ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. जांच उपरांत अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. बता दें कि पूर्व में भी पुलिस मॉडिफाइड साइलेंसर से पटाखे फोड़ने पर कार्रवाई कर चुकी है. जबकि कई के भविष्य को देखते हुए चेतावनी देकर छोड़ा गया. अक्सर युवा बाइक राइडर ने मॉडिफाइड साइलेंसर खतरनाक लगाकर पटाखे फोड़ते हुए और खतरनाक स्टंट करते दिखाई देते हैं. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद भी बाइक राइडर सबक नहीं ले रहे हैं.