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देहरादून में 28–30 नवम्बर को होगा WSDM 2025 व USSTC 2025, वैश्विक विशेषज्ञों संग आपदा प्रबंधन पर मंथन

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आज देहरादून मे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस मे यूकाॅस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) तथा 20वाँ उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC 2025) का आयोजन, 28 से 30 नवम्बर 2025 तक ग्राफिक एरा (डीम्ड-टू-बी) विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित किए जाएंगे। ये आयोजन हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिक संस्थानों, नवोन्मेषकों, युवा नेतृत्व, आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों और समुदाय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर भारत की वैज्ञानिक प्रणाली और आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण प्रयास करेंगे। रहेंगे।

विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) के उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष होंगे माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, श्री पुष्कर सिंह धामी, जिनके नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारी, जलवायु परिवर्तन और समुदाय आधारित वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा दिया गया है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे डॉ. जितेन्द्र सिंह, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। उनके मार्गदर्शन और भागीदारी से भारत की विज्ञान-आधारित आपदा प्रबंधन और स्पेस-आधारित प्रौद्योगिकी की प्रतिबद्धता उजागर होती है।

दिनांक 30 नवंबर 2015 को होने वाले समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह जी, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति समापन समारोह को अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायी बनाएगी।

प्रो. दुर्गेश पंत ने बताया कि विज्ञान प्रौद्योगिकी सम्मलेन में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों की शुरुआत की जाएगी, जिनमें उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा प्रसार सम्मान, भागीरथ पुरस्कार और उत्तराखण्ड युवा महिला वैज्ञानिक पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार विज्ञान संचार, आपदा प्रबंधन, जलवायु , सामुदायिक सहभागिता और महिला वैज्ञानिक नवाचारों में उत्कृष्ट योगदान और यूकॉस्ट की वैज्ञानिक प्रतिभा संवर्धन एवं जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक सहभागिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उत्तराखण्ड का प्रथम राज्य-स्तरीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग 2025 भी इसी अवसर पर आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य विज्ञान जागरूकता, जलवायु साक्षरता, नवाचार और आपदा तैयारी को राज्य के प्रत्येक गाँव तक पहुँचाना है। इसमें राज्य के सभी 13 जिलों से टीमें वैज्ञानिक क्विज़, नवाचार प्रदर्शनी, आपदा प्रतिक्रिया चुनौतियों और जलवायु समस्या समाधान प्रतियोगिताओं में भाग लेंगी। यह पहल राज्य में बाल वैज्ञानिक और जलवायु प्रहरी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मलेन का मुख्य विषय है, “समुदायों के निर्माण हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना”, और यह 5E Framework (Engage, Educate, Enable, Empower, Excel) पर आधारित है। सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों जैसे बाढ़, भूस्खलन, वनाग्नि, हीटवेव, बादल फटना और हिमनद झील जोखिम का समाधान करना और भारत तथा हिमालयी क्षेत्र में वैश्विक सहयोग एवं ज्ञान साझा करने का मंच स्थापित करना है। सम्मेलन में छह प्रमुख प्लेनरी/ विचार विमर्श सत्र आयोजित होंगे, जिनमें आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं ग्लेशियर खतरे, मानवता की सुरक्षा, हिमालय के संरक्षक, बहु-आपदा जोखिम, तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से जागरूकता शामिल हैं। इसके अलावा बारह विशेष प्रौद्योगिकी सत्र (STS) आयोजित किए जाएंगे, जिनमें नीति, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, तकनीकी नवाचार, वित्तीय समाधान और हिमालयन कॉरिडोर लचीलापन से जुड़ी पहलें शामिल हैं।

सम्मेलन में 20 से अधिक कार्यशालाएँ, इंटरैक्टिव मंच और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जैसे शी फॉर स्टेम (SHE for STEM ) ,जैव विविधता और जैव प्रौद्योगिकी, जल गुणवत्ता निगरानी, वरिष्ठ नागरिकों के लिए नवाचार, भीड़ प्रबंधन प्रशिक्षण, युथ लीडरशिप और समुदायों की आवाज़ आदि। साथ ही एक इनोवेशन और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन भी होगा, जिसमें राज्य एवं केंद्रीय सरकार, स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थान और नवोन्मेषक भाग लेंगे, जो पूर्व चेतावनी प्रणालियों, स्पेस-आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जलवायु विश्लेषण और सामुदायिक स्तर की आपदा प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करेंगे। NDRF, SDRF, ITBP, BRO, NIM, NCC, NSS और SSB द्वारा व्यावहारिक प्रदर्शन और बचाव प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे।

यह दोनों सम्मलेन उत्तराखण्ड की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और जलवायु लचीलापन की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। ये आयोजन राज्य को एक सशक्त, जागरूक और भविष्य के लिए तैयार उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में योगदान देंगे, जिसमें मजबूत वैज्ञानिक आधार, सशक्त समुदाय, सशक्त युवा और वैश्विक स्तर पर सहभागिता, आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियाँ सुनिश्चित होंगी।
वहीं उल्लेखनीय है कि दिनांक 28 नवंबर 2025 प्रातः 10 बजे 20 वें उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 के प्रारंभिक सत्र के मुख्य अतिथि रहेंगे डा. रमेश पोखरियाल “निशंक” पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड व डा. डीके असवाल, सदस्य, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट आथोरिटी, भारत सरकार मुख्य वक्ता के रूप मे रहेंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूकाॅस्ट के प्रबंधक जनसम्पर्क अमित पोखरियाल, संयुक्त निदेशक व आयोजन सचिव डा. डीपी उनियाल, आयोजन सचिव, विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन 2025 प्रहलाद अधिकारी व पुनीत सिंह प्रमुख रुप से उपस्थित रहे

हरिद्वार में बनेगी राज्य की पहली हेलीपैड वाली बिल्डिंग, छत से उड़ान भर सकेंगे हेली

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बिल्डिंग निर्माण को लेकर यूकाडा की टीम ने टेक्निकल जानकारी जुटाई है. हवाई मार्गों से भी सर्वे किया गया है.

हरिद्वार: 2027 अर्द्धकुंभ मेले से पहले हरिद्वार सीसीआर टॉवर का विस्तार किया जाएगा. पुराने टावर के बराबर में ही रोड़ीबेलवाला मैदान में नई बिल्डिंग बनाई जाएगी. इस बिल्डिंग की छत पर आधुनिक हेलीपैड बनाया जाएगा. यह उत्तराखंड की पहली ऐसी सरकारी बिल्डिंग होगी, जिसकी छत पर हेलीकॉप्टर न सिर्फ लैंड करेंगे बल्कि उड़ान भी भर सकेंगे. 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना को हाई पावर कमेटी से अनुमति मिल गई है. बुधवार को यूकाडा की टीम ने हेलीकॉप्टर से सर्वे कर संभावनाओं का अध्ययन किया.

मेला प्रशासन के अनुसार सीसीआर के ठीक पास सीसीआर की नई बिल्डिंग भी प्रस्तावित है. जिसमें चार मंजिलों का निर्माण होना है. नई बिल्डिंग अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी. इसमें मेला प्रबंधन की सभी तकनीकी, सुरक्षा और कम्युनिकेशन यूनिटों को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है. इस बिल्डिंग की छत पर जो हेलीपैड बनाया जाएगा, उसमें हेलीकॉप्टर सीधे सीसीआर टावर की छत पर लैंड कर सकेगा. इससे शहर के व्यस्त मार्गों और मेलाक्षेत्र के भीतर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी.

इसके साथ ही यह हेलीपैड मेडिकल एम्बुलेंस और आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा. बताया जा रहा है कि किसी भी बड़े हादसे, आपदा या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को तुरंत एयरलिफ्ट कर देहरादून या अन्य बड़े मेडिकल केंद्रों में भेजा जा सकेगा.

अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने बताया नई इमारत के डिज़ाइन, सुरक्षा प्रबंधन और हेलीपैड तक पहुंचने वाले मार्गों का जायजा लिया गया है. यूकाडा की टीम ने टेक्निकल जानकारी जुटाई है. आसामान में हवाई मार्गों को भी परखा गया है. भवन का ढांचा हेलीकॉप्टर संचालन के अनुसार तैयार किया जाएगा. जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए.

गौरतलब है कि हरिद्वार में भी तक कोई भी सरकारी हेलीपैड नहीं है. यहां गुरुकुल, भेल हेलीपैड पर ही वीआईपी हेलीकॉप्टर उतरते हैं. भल्ला कॉलेज के हेलीपैड पर क्रिकेट स्टेडियम बन गया है. इसलिए बड़े नेताओं के हेलीकॉप्टर या फिर इमरजेंसी के लिए ही नया हेलीपैड बनाने की कवायद शुरू हो गई है. बुधवार को दिन भर आसमान में हेलीकॉप्टर गरजते रहे.

उत्तराखंड एआई मिशन 2025 का आयोजन, राज्यपाल ने लॉन्च किया एआई पॉलिसी सॉफ्टवेयर

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उत्तराखंड के राजभवन में बीते दिन उद्भव 2025 कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान दिवस के अवसर पर संविधान शपथ और दीप प्रज्वलन से हुई।

इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई पॉलिसी सॉफ्टवेयर का भी लॉन्च किया। राज्यपाल ने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का युग है और आने वाले समय में एआई का पूर्ण रूप से विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से हर प्रकार की समस्या का समाधान किया जा सकता है और तकनीकी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें ड्रोन तकनीक का प्रयोग हुआ, जो नई तकनीकी का उदाहरण है। उत्तराखंड एआई मिशन 2025 में राज्य की 25 संस्थाओं ने भाग लिया।

राज्यपाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न देशों की यात्राओं में एआई पर जोर दिया गया और अगले साल दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई अन्य देश भी भाग लेंगे।

उत्तराखंड में 99 क्विंटल अनाज सड़ा, हाईकोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड:DM के वसूली आदेश को माफ करने पर सवाल, कोर्ट ने लगाई फटकार

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उत्तराखंड हाईकोर्ट में 2021 की आपदा राहत सामग्री घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। यह मामला उधम सिंह नगर में सस्ता गल्ला योजना के तहत वितरित किए जाने वाले 99 क्विंटल से अधिक अनाज के खराब होने और डीएम के आदेश के बावजूद दोषियों से वसूली माफ किए जाने से जुड़ा है।

रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने पर कोर्ट सख्त

मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संबंधित विभाग की ओर से मूल रिकॉर्ड पेश न किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरा मूल रिकॉर्ड हर हाल में गुरुवार तक प्रस्तुत किया जाए, अन्यथा कोर्ट आगे की सुनवाई नहीं बढ़ाएगा। मामले की सुनवाई आज होनी है।

याचिकाकर्ता का आरोप- राहत सामग्री न बांटी गई, न सुरक्षित रखी

हरिद्वार निवासी याचिकाकर्ता अभिजीत ने अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि 2021 की आपदा के दौरान सस्ता गल्ला योजना के तहत आपदा पीड़ितों के लिए 99 क्विंटल से अधिक अनाज आया था।लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में यह अनाज सड़ गया। न इसे वितरण के लिए भेजा गया और न ही इसे सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था की गई।

वसूली के आदेश के बाद भी ‘माफी’ पर सवाल

जांच के बाद उस समय के जिलाधिकारी उधम सिंह नगर ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के आदेश दिए थे।लेकिन बाद में जिलापूर्ति कमिश्नर ने इस वसूली को माफ कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने गंभीर लापरवाही और घोटाला करार दिया है।

कड़े एक्शन और जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि—

  • नुकसान की पूरी वसूली की जाए,
  • दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो,
  • और मामले से जुड़े अन्य संभावित धन के दुरुपयोग की जांच कराई जाए।

कल रिकॉर्ड आने के बाद जारी होंगे आगे के आदेश

कोर्ट मूल रिकॉर्ड के प्रस्तुत होने के बाद मामले में आगे के आदेश जारी कर सकता है।

देहरादून में CSC सेंटर पर जड़ा ताला:निर्वाचन से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट मिले, सर्टिफिकेट रजिस्टर का रिकॉर्ड भी नहीं मिला

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देहरादून में आज सुबह एक सीएससी सेंटर को सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिला प्रशासन की टीम ने की है। टीम ने सहारनपुर रोड स्थित देवभूमि सीएससी सेंटर पर अचानक रेड की। इस दौरान गंभीर खामियां मिलनी, जिसके बाद केंद्र को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।

यह कार्रवाई उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी और तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव के नेतृत्व में की गई। निरीक्षण के दौरान टीम को केंद्र में निर्वाचन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिनकी जानकारी संचालक अब्दुल वसीम और आसिफ नहीं दे सके।

इसके अलावा रेट लिस्ट, प्रमाणपत्र पंजिका और लेन-देन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं पाया गया। नियमों के उल्लंघन और स्पष्ट जवाब न मिलने पर प्रशासन ने CSC ID 2756 23770017 वाले केंद्र पर ताला जड़ दिया।

प्रशासनिक टीम ने केंद्र में चल रही सेवाओं और अभिलेखों की विस्तृत जांच की, जिसमें कई अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन साबित हुआ।

निरीक्षण में सामने आईं मुख्य गड़बड़ियां

  • निर्वाचन संबंधी संवेदनशील दस्तावेज बरामद
  • सेवा शुल्क सूची उपलब्ध नहीं
  • आवेदन एवं प्रमाण पत्रों की पंजिका का रिकॉर्ड नहीं
  • सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता की कमी

जिलाधिकारी का सख्त संदेश

डीएम सविन बंसल ने कहा कि जनसेवा से जुड़े केंद्रों में पारदर्शिता अनिवार्य है। किसी भी तरह की अनियमितता और उपभोक्ता शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में सीएससी सेंटरों की जांच अभियान चलाया जा रहा है और जहां भी गलत गतिविधियां पाई जाएंगी,केंद्रों को सील किया जाएगा।

कार्रवाई के दौरान प्रशासन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

सीएम धामी का नैनीताल में मॉर्निंग वॉक, जनता से की मुलाकात, लिया चाय का आनंद

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नैनीताल में मॉर्निंग वॉक के दौरान आम नागरिकों, पर्यटकों एवं स्कूली बच्चों से मुलाकात की और सबके साथ आत्मीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय चाय विक्रेता भरत की दुकान पर चाय का स्वाद भी लिया।

मुख्यमंत्री ने मानस खंड मिशन के अंतर्गत नैना देवी मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। बताया कि मंदिर को और अधिक भव्य व आकर्षक स्वरूप देने हेतु ₹11 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मिशन के अन्य विकास कार्यों—डीएसए मैदान के सुधार, वलिया नाला, एवं ठंडी सड़क पर भूस्खलन सुरक्षा कार्यों—की भी जानकारी अधिकारियों से ली और संबंधित विभागों को इन सभी कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।

इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट एवं जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी.सी. और अन्य मौजूद रहे।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए जिलाधिकारियों को यह निर्देश, पढिए पूरी खबर विस्तार से

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मुख्यमंत्री धामी का निर्देश: प्रदेशभर के ठंड एवं शीतलहर से बचाव हेतु सार्वजनिक स्थानों में अलाव के साथ ही सभी रेन बसेरों में आवश्यक रजाई-कंबल आदि की पुख़्ता व्यवस्था हो

अपने नैनीताल भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बढ़ रहे ठंड को देखते हुए प्रदेशभर में रेन बसेरों में आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही ठंड एवं शीतलहर से बचाव हेतु अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि रेन बसेरों में सभी उचित व्यवस्था की जाए तथा जरूरतमंदों को ठंड से बचाव हेतु कंबल उपलब्ध कराए जाए ।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर जिले में टीमों को सक्रिय रखते हुए शहरों, कस्बों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि असहाय एवं बेघर लोगों को समय पर राहत मुहैया कराई जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है । उन्होंने नगरीय क्षेत्रों के साथ ही कस्बों में भी सायंकाल में ठंड अधिक होने पर नियमित रूप से अलाव जलाने के साथ ही नियमित उनकी मोनिटरिंग के भी निर्देश दिए।

इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से आवश्यक सामग्री की उपलब्धता, वितरण और निगरानी की दैनिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को भी कहा है।

कैंची धाम जाने पर अब नहीं मिलेगा जाम:तल्लीताल डांठ-छावनी कार्यालय तक सड़क का चौड़ीकरण, ₹1.12 करोड़ का शासनादेश जारी

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उत्तराखंड के नैनीताल की सड़कें लगातार जाम की समस्या से जूझ रही हैं। पहाड़ों पर बढ़ती पर्यटकों की संख्या और विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु नैनीताल पहुंचते हैं। इससे तल्लीताल डांठ से छावनी कार्यालय तक का मार्ग जामग्रस्त रहता है।

इसी समस्या के समाधान के लिए शासन ने नैनीताल–भवाली राज्य मार्ग के 300 मीटर हिस्से को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की ओर से भेजे गए 1.12 करोड़ के प्रस्ताव को शासन ने स्वीकृति देते हुए शासनादेश जारी कर दिया है। इसके बाद लोनिवि ने सड़क चौड़ीकरण की टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।

सड़क चौड़ी होने के बाद भवाली और कैंची धाम जाने वाले पर्यटक और श्रद्धालु जाम से मुक्त होकर सुगमता से यात्रा कर सकेंगे। पहले चरण में 46 लाख की लागत से छावनी परिषद के समीप चौड़ीकरण कार्य शुरू किया जा चुका है। अब शेष 300 मीटर हिस्से का कार्य भी जल्द शुरू होगा।

छावनी भवन हटाकर सड़क चौड़ीकरण

सड़क चौड़ीकरण के दौरान नैनीताल छावनी का एक पुराना भवन हटाया जाएगा। छावनी परिषद ने इसे लेकर अनापत्ति दे दी है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में छावनी कमांडेंट के साथ बैठक कर भवन को ध्वस्त कर पीछे की ओर नया निर्माण कराने का निर्णय लिया जाएगा।

कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत

विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। श्रद्धालु मंदिर के दर्शन के बाद नैनीताल की ओर लौटते हैं, जिससे इस मार्ग पर जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क चौड़ी होने के बाद श्रद्धालु और पर्यटक बिना जाम के सुगमता से यात्रा कर सकेंगे।

मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत चौड़ीकरण

लोनिवि ने मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत भवाली रोड को नैनीताल से कैंची धाम तक जोड़ने के लिए 1.12 करोड़ का प्रस्ताव बनाया था। पहले चरण में 46 लाख की लागत से कार्य शुरू किया जा चुका है। शासनादेश के बाद शेष हिस्से का कार्य भी तेजी से शुरू होगा।

पंगोट–देचौरी मार्ग को भी मिली मंजूरी

प्रदेश सरकार ने पंगोट से कोटाबाग तक के ग्रामीणों और पर्यटकों के लिए 4.63 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। लोनिवि ने इस मार्ग के 13 किमी हिस्से में सड़क कटिंग और अन्य कार्यों का प्रस्ताव भेजा था। पहले चरण में 5 किमी मार्ग निर्माण हो चुका है। शेष 13 किमी में कटिंग व अन्य कार्य दूसरे चरण में किए जाएंगे।

विधायक ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया

विधायक सरिता आर्य ने इन मार्गों के शासनादेश जारी होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट किया। उन्होंने बताया कि इन सड़कों के संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को आग्रह किया था।

सीएम विशेष सचिव का सफल ऑपरेशन:मंगलवार को रुद्रप्रयाग में घोड़े से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी में आई थी चोट, एम्स में किया गया था एयरलिफ्ट

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष सचिव और वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी डॉ पराग मधुकर धकाते की स्पाइन का ऋषिकेश एम्स में सफल ऑपरेशन हुआ जो फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में आईसीयू में है और कुछ समय बाद उन्हें प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। आईएफएस अधिकारी डॉक्टर पराग मधुकर धकाते को मंगलवार को रुद्रप्रयाग के कालीमठ में आधिकारिक दौरे पर थे जहां घोड़े से नीचे गिरने के कारण उनकी स्पाइन में गंभीर चोट आई थी।

मिली जानकारी के अनुसार आईएफएस अधिकारी पराग मधुकर धकाते मंगलवार को रुद्रप्रयाग में आधिकारिक दौरे पर गए थे जहां कालीमठ में निरीक्षण के दौरान जब वह घोड़े से जा रहे थे तो उसे समय उनका बैलेंस बिगड़ और वह जमीन पर गिर गए जिसके कारण उनकी स्पाइन में गंभीर चोट आई। इसके बाद उन्हें तत्काल हेलीकॉप्टर के जरिए ऋषिकेश के एम्स में भर्ती कराया गया जहां उनका आज दोपहर सफल ऑपरेशन हुआ।

ऋषिकेश एम्स में फिलहाल आईएफएस अधिकारी डॉक्टर पराग मधुकर धाकते को ऑपरेशन के बाद आईसीयू में ही डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। जिन्हें कुछ समय बाद प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल उनके हाल-चाल को लेकर लगातार मुख्यमंत्री अधिकारियों से पल-पल का अपडेट ले रहे हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय भी ऋषिकेश एम्स के डॉक्टर के संपर्क में है।

हल्द्वानी में अब ‘बारात बैन’! SSP का सख्त फरमान: 200 मीटर से लंबी बारात नहीं, हाई-बेस डीजे पर लगा ताला

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सहालग सीजन में हल्द्वानी के जाम से निपटने के लिए एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कड़े निर्देश दिए हैं। अब बारात की लंबाई 200 मीटर तक सीमित, हाई-बेस डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित और रात 10 बजे के बाद डीजे पर पूर्ण बैन। जानें नए नियमों के खास बिंदु।

हल्द्वानी। सहालग सीजन शुरू होते ही उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में यातायात जाम की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बुधवार को सख्त कदम उठाते हुए बारात आयोजनों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बारात और लाइटिंग पर लगे नए प्रतिबंध
एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कहा कि अब सभी वेडिंग पॉइंट, बैंक्वेट हॉल और अन्य वेडिंग आयोजनों पर पुलिस विशेष निगरानी रखेगी। नए नियम के तहत, बारात घर या वेडिंग वेन्यू के गेट से बारात की अधिकतम लंबाई 200 मीटर तक ही सीमित रखी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बारात सड़कों पर ज्यादा देर तक न रुके और यातायात प्रभावित न हो। इसके अलावा, बारात में उपयोग होने वाले बड़े लाइटिंग झालरों को भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। केवल हाथ से पकड़कर चलाए जाने वाले छोटे लाइटिंग झालरों के लिए ही अनुमति लेनी होगी।

हाई-बेस डीजे और रात 10 बजे की सीमा
पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण और आम जनता की परेशानी को देखते हुए एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शादी समारोहों में सड़कों पर बजने वाले हाई-बेस बड़े-बड़े डीजे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय जनता, बुजुर्गों की शांति और बच्चों की पढ़ाई में बाधा को देखते हुए रात 10 बजे के बाद डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध ध्वनि प्रदूषण के नियमों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाया गया है।

प्रशासन का कड़ा रुख और अनुपालन की जिम्मेदारी
एसएसपी ने साफ कर दिया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। उन्होंने निर्देशों का अनुपालन कराने का उत्तरदायित्व स्थानीय थाना और चौकी प्रभारियों को सौंपा है। यह कार्रवाई बताती है कि पुलिस सहालग सीजन में जाम की समस्या को लेकर कितनी गंभीर है। इन कड़े कदमों से उम्मीद है कि हल्द्वानी की सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।