Sunday, January 25, 2026
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CM धामी ने अजमेर में अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला के द्वितीय तल का किया लोकार्पण

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया अजमेर, राजस्थान में अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला – तीर्थराज पुष्कर के द्वितीय तल का लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आश्रम हेतु 50 लाख रुपए की अतिरिक्त सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा की

आश्रम के निर्माण हेतु पूर्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा एक करोड़ रुपए की सहयोग राशि प्रदान की गई थी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अजमेर, राजस्थान स्थित अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला आश्रम, तीर्थराज पुष्कर के द्वितीय तल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी, स्थानीय नागरिक तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सर्वप्रथम वे तीर्थराज पुष्कर की पवित्र भूमि पर विराजमान सृष्टि के आदि रचयिता, वेदों के प्रणेता भगवान ब्रह्माजी को साष्टांग प्रणाम करते हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थराज पुष्कर की इस तपोमय भूमि पर उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य एवं प्रसन्नता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि धार्मिक ग्रंथों में पुष्कर, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, गया और प्रयाग को पंचतीर्थ के रूप में वर्णित किया गया है। इनमें भी ब्रह्माजी की यज्ञस्थली पुष्कर को समस्त तीर्थों का गुरु कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुष्कर केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की अनश्वर ज्योति है जो मानवता को सदैव धर्म, तप, त्याग और सद्गुणों के पथ पर चलने की प्रेरणा देती रही है।

उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा का पुण्य तभी पूर्ण माना जाता है जब तीर्थराज पुष्कर के पावन सरोवर में स्नान किया जाए। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए बताया कि संभवतः इसी आध्यात्मिक महिमा और आभा से प्रेरित होकर उनके माता-पिता ने उनका नाम ‘पुष्कर’ रखा।

मुख्यमंत्री धामी ने आयोजन समिति और प्रवासी उत्तराखंडियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे राजस्थान में नहीं बल्कि देवभूमि के अपने परिजनों के बीच होने का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह धर्मशाला आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल बनने के साथ-साथ उत्तराखंड और राजस्थान के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति विश्व पटल पर नई पहचान बना रही है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ-बद्रीनाथ धामों के पुनर्निर्माण जैसे कार्यों ने भारतीय आध्यात्मिक धरोहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण, श्रीकृष्ण यमुना तीर्थ सर्किट, हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सांस्कृतिक स्वरूप व सामाजिक सौहार्द की रक्षा हेतु कठोर कदम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संपूर्ण भारत की आस्था और संस्कृति का केंद्र है। इस पवित्र भूमि के मूल स्वरूप की रक्षा हेतु राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण और कठोर निर्णय लिए हैं | जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून लागू किया गया। लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी घृणित मानसिकताओं पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

दंगारोधी कानून लागू कर दंगाइयों से ही क्षति की भरपाई की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में हरा–नीला–पीला कपड़ा लगाकर सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित कर 10 हजार एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया। देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई, जिससे सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित हुई।

प्रदेश में नया कानून लागू कर मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया और सभी विद्यालयों में सरकारी बोर्ड मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया। 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद किया गया। “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत धार्मिक स्थलों पर भेष बदलकर पाखंड फैलाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य देवभूमि में अलगाववादी सोच नहीं बल्कि ज्ञान और संस्कार के मंदिर स्थापित करना है।

प्रवासी उत्तराखंडियों से आग्रह

मुख्यमंत्री ने उपस्थित उत्तराखंडियों से आह्वान किया कि वे जहाँ भी रहें, अपने राज्य की संस्कृति, पहचान और पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा को सदैव गर्व के साथ आगे बढ़ाएं।उन्होंने कहा कि “हमारा संकल्प है कि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी बनाएं। ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मंत्र के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और इसमें प्रत्येक उत्तराखंडी अपनी निष्ठा एवं परिश्रम के साथ योगदान देगा।”

आश्रम निर्माण में सहयोग हेतु आभार

कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि आश्रम के निर्माण हेतु उत्तराखंड सरकार द्वारा एक करोड़ रुपए की सहयोग राशि प्रदान की गई थी, जिसके लिए मुख्यमंत्री धामी का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम में ओंकार सिंह लखावत, अध्यक्ष – राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण एवं वरिष्ठ भाजपा नेता, सुरेश सिंह रावत, विधायक एवं मंत्री – राजस्थान सरकार, लोकबंधु, जिलाधिकारी – अजमेर, एस. एस. तड़ागी, अध्यक्ष – अखिल भारतीय उत्तराखंड आश्रम, राजेंद्र व्यास व बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी एवं स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे |

हिमाचल बॉर्डर पछुवादून में अतिक्रमण पर धामी सरकार का बुलडोज़र एक्शन

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देहरादून: जिला प्रशासन ने आज (23 नवंबर 2025) को सरकारी भूमि को कब्जेदारी से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया.हिमाचल बॉर्डर से लगे शक्ति नगर किनारे डाक पत्थर से कुल्हाल तक भारी फोर्स के साथ धामी सरकार के बुलडोजर अवैध कब्जो पर गरजते रहे.
एसडीएम विनोद कुमार के साथ उत्तराखंड ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की टीम भारी संख्या में सुरक्षा बल के साथ आज दिन भर कारवाई करती रही और सरकारी भूमि को कब्जेदारों से मुक्त करवाती रही.

यूपी बिहार झारखंड बंगाल से आए एक वर्ग विशेष के लोगों ने बेशकीमती सरकारी भूमि पर कई सालों से अवैध रूप से बसावट कर ली थी। बताया जाता है ये पहले श्रमिक थे जिन्होंने शक्ति नगर बनाई और फिर यहीं बस गए और नदियों के खनन के कारोबार में जुट गए.
ऊर्जा विभाग ने दो साल पहले भी प्रशासन की मदद से अपनी भूमि खाली करवाई थी और यहां बाद में सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए उक्त भूमि निवेशकों को दी थी।

एसडीएम विनोद कुमार के मुताबिक सीएम श्री धामी के निर्देश पर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया गया है। डीएम के आदेश पर उक्त कार्रवाई आज सुबह शुरू की गई है इसमें हमे 11 हेक्टेयर भूमि जिसमें 111 अवैध रूप से बने भवन है कुछ धार्मिक संरचनाएं भी है इन्हें हमे अतिक्रमण मुक्त कराना है।

उल्लेखनीय है कि पछवादून में बड़ी संख्या में घुसपैठियों ने सरकारी भूमि पर कब्जे किए हुए है। जिन्हें धामी सरकार ने सख्ती से हटाने का अभियान शुरू किया है.

सीएम धामी का बयान
हमारी सरकार की स्पष्ट नीति है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाया जाएगा। अभी तक करीब दस हजार एकड़ लैंड को हम लैंड जिहाद से मुक्त करवा चुके है.

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर कुमाऊं के अग्निवीर को लगी गोली… शहीद…

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पुंछ। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की मेंढर तहसील में नियंत्रण रेखा के नजदीक सेना की अग्रिम चौकी पर तैनात अग्नि वीर को अचानक गोली लगने से वह शहीद हो गया। शनिवार दोपहर को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली चलने से सेना के अग्निवीर जवान की मौत हो गई। सेना ने जांच के आदेश जारी किए हैं। पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई है। मृतक अग्निवीर की पहचान दीपक सिंह पुत्र शिवराज सिंह निवासी गांव खरही, तहसील पाटी, जिला चंपावत, उत्तराखंड के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार 18 कुमाऊं
का दीपक सिंह अग्रिम चौकी पर तैनात था। करीब ढाई बजे गोली चलने की आवाज सुनते ही सेना के अन्य जवान दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और खून से लथपथ दीपक को बटालियन चिकित्सा शिविर पहुंचाया। सैन्य डाक्टरों ने उसे मृत बताया। सूचना मिलते ही सैन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंच पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि यह आत्महत्या का मामला है या दुर्घटनावश गोली चलने से अग्निवीर की मृत्यु हुई है।

पिथौरागढ़: हल्दी-मेहंदी के बाद दुल्हन फरार, अब साली से होगी दूल्हे की शादी

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उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में एक अनोखा मामला सामने आया है। शादी से सिर्फ एक दिन पहले दुल्हन घर से रहस्यमय तरीके से गायब हो गई, जिससे दोनों परिवारों और गांव में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार लगभग 25 वर्षीय युवती की शादी शनिवार को जिले के ही एक युवक से तय थी। शुक्रवार को दोनों पक्षों द्वारा गणेश पूजन, हल्दी और मेहंदी जैसी सभी रस्में पूरी की जा चुकी थीं। मेहंदी की रस्म के कुछ देर बाद दुल्हन अचानक घर से लापता हो गई।

घरवालों और रिश्तेदारों ने देर रात तक हर जगह तलाश की, लेकिन युवती का कोई पता नहीं चल सका। फोन भी स्विच ऑफ मिल रहा था।

दुल्हन के गायब होने की जानकारी दूल्हे पक्ष को दी गई तो दोनों परिवारों में खलबली मच गई। चर्चा और विचार-विमर्श के बाद दुल्हन पक्ष के बुजुर्गों ने दूल्हे पक्ष को छोटी बेटी से विवाह कराने का प्रस्ताव रखा।

दोनों परिवारों की सहमति के बाद तय हुआ कि पूर्व निर्धारित मुहूर्त में ही दूल्हा अब दुल्हन की छोटी बहन के साथ सात फेरे लेगा।

दिल्ली में करती है नौकरी

ग्रामीणों के अनुसार युवती दिल्ली में नौकरी करती है और शादी के लिए कुछ दिन पहले ही गांव आई थी। लापता होने के बाद से उसका मोबाइल भी बंद है।

लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। क्या युवती किसी और से शादी करना चाहती थी? क्या उसे दूल्हा पसंद नहीं था? कहीं उसने दूसरा रिश्ता तो तय नहीं कर रखा था?

अभी तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस बीच शुक्रवार देर रात छोटी बहन की मेहंदी की रस्में भी पूरी कर दी गईं और आज दोनों का विधिवत विवाह कराया जाएगा।

सैलानियों के लिए खुला मोहान सफारी जोन, उमड़ी रही भीड़

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मोहान सफारी जोन पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. वन क्षेत्राधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर जिप्सियों को रवाना किया.

रामनगर: सफारी करने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है. विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे अल्मोड़ा वन प्रभाग का मोहान सफारी जोन आखिरकार पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. मानसून सीजन के बाद हर साल की तरह इस बार भी मोहान गेट पर रौनक लौट आई है. सुबह से ही देशभर से आए सैलानियों का उत्साह देखने लायक था. वहीं सफारी जोन में सैलानियों की आमद बढ़ने से स्थानीय व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं.

बीते दिन वन क्षेत्राधिकारी मोहान उमेश पाण्डे ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सफारी सीजन का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने सफारी पर रवाना होने वाले गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई. सफारी गेट खुलते ही पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह दिखा, कई लोग पहली ही सफारी में बाघ, हिरण, हाथियों और दुर्लभ पक्षियों की झलक पाने की उम्मीद लेकर पहुंचे.

स्थानीय गाइडों और पर्यटन कारोबारियों ने बताया कि मोहान जोन अपनी घुमावदार पहाड़ियों, घने जंगलों, नदी किनारे के शांत ट्रैक और प्राकृतिक विविधता के कारण टूरिस्ट्स के बीच बेहद लोकप्रिय है. कहा जाता है कि मोहान क्षेत्र में वन्यजीवों का मूवमेंट अन्य जोनों की तुलना में अधिक है. यही वजह है कि सैलानी यहां के सफारी स्लॉट महीनों पहले बुक करा लेते हैं.

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, ग्वालियर और गुजरात से आए कई सैलानियों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से मोहान जोन खुलने का इंतजार था. कुछ पर्यटकों ने तो इसे कॉर्बेट के जोनों की तरह ही सबसे रोमांचक ट्रेल तक बताया. स्थानीय होटल और रिसॉर्ट संचालकों का कहना है कि जोन खुलने से उनके व्यवसाय में भी रौनक लौटेगी और हजारों लोगों को रोजगार का अवसर बढ़ेगा.

वन विभाग की ओर से भी पर्यटकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की गई है. वन क्षेत्राधिकारी उमेश पाण्डे ने बताया कि ट्रैक की मरम्मत, सड़क किनारे झाड़ियों की कटाई और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया गया है. साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वन कर्मियों की टीम तैयार रखी गई है. पर्यटकों का कहना है कि मोहान जोन प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है.यहां की सुबह की धुंध, नदी किनारे की ठंडी हवा और जंगलों की शांति हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है.

बारात की कार खाई में गिरी, तीन लोगों की मौत, एक घायल

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कैंची धाम। अल्मोड़ा से हल्द्वानी जा रही बारात की कार कैंची धाम के समीप रतिघाट में  लगभग 60 गहरी खाई में गिर गई।  कार में चार व्यक्ति सवार थे। जिसमें से तीन लोगों की मौत हो गई और एक गंभीर घायल हो गया।

सूचना मिलते ही पोस्ट खैरना से निरीक्षक राजेश जोशी के नेतृत्व में SDRF टीम तत्काल घटनास्थल हेतु रवाना हुई। गहरी खाई, रात्रि का अंधकार एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद SDRF टीम ने पूरी तत्परता के साथ रेस्क्यू अभियान संचालित किया।

SDRF रेस्क्यू टीम द्वारा एक घायल व्यक्ति को गहरी खाई से सुरक्षित निकालकर 108 एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया जबकि तीन मृतकों के शवों को खाई से निकालकर स्थानीय पुलिस के सुपुर्द किया गया।

घायल
1.मनोज कुमार, निवासी अल्मोड़ा

मृतक
1. संजय बिष्ट, निवासी अल्मोड़ा
2. सुरेंद्र भंडारी, निवासी अल्मोड़ा
3. पुष्कर भैसोड़ा, निवासी अल्मोड़ा

मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला : भालुओं तथा अन्य वन्यजीवों के हमलों में घायल व्यक्तियों के उपचार का पूरा खर्च उठाएगी राज्य सरकार

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव वन के साथ बैठक कर वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भालुओं तथा अन्य वन्यजीवों के हमलों में घायल व्यक्तियों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक घायल को समय पर तथा समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न हो और आवश्यक संसाधन तत्काल उपलब्ध कराए जाएँ।

यह उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को प्रदत्त मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं जागरूकता उपायों को भी सुदृढ़ किया जाए।

उत्तराखंडः(बड़ी खबर)-राशन कार्ड ई-केवाईसी को लेकर आया अपडेट, पढ़ लिजिए खबर

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इन दिनोें राशन कार्ड का ई-केवाईसी चल रहा है। ऐसे में कई लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है कि स्कैन न हो पाने से उन्हें राशन नहीं मिलेगा। लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यह खबर आपको राहत देगी। जी हां राशन वितरण की नई व्यवस्था के तहत अगर आपकी ई-केवाईसी अभी तक अंगूठे के निशान या रेटिना स्कैन न हो पाने की वजह से पूरी नहीं हो पाई है, तो चिंता न करें। आपका राशन वितरण रोका नहीं जाएगा, आपको निर्धारित समयानुसार पूरा राशन मिलेगा।

विभाग ने स्पष्ट किया गया है कि जिनके घर के मुखिया कही बाहर काम करने के कारण घर पर मौजूद नहीं हैं, अथवा जो अत्यंत बुजुर्ग या असाध्य रोगी हैं, उन सभी के लिए राहत के प्रावधान हैं। इस बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देशित किया है। विभाग ने सभी जनपदों के जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।

बता दें 30 नवंबर की समय सीमा के बाद भी राशन मिलेगा और आपकी ई-केवाईसी के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। राशन वितरण में कोई भी बाधा नहीं होगी। सुनिश्चत करें कि इस जानकारी को अपने पड़ोसी और परिचित सभी राशन कार्डधारकों तक पहुंचाएं।

शरीर में दिखने लगे अगर ये लक्षण, तो समझ जाएं आपके फेफड़ों में हो गया है इन्फेक्शन

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फेफड़ों में इन्फेक्शन कई वजहों से हो सकता है. इसके लक्षण कभी-कभी हल्के होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन इसे हल्के में

फेफड़ों में इन्फेक्शन का मतलब है कि बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है या उनमें सूजन आ जाती है. यह इन्फेक्शन फेफड़ों के काम पर असर डालता है और सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जैसे कि बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, और डायबिटीज या पुरानी बीमारियों वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है.फेफड़ों में इन्फेक्शन को निमोनिया भी कहते हैं.

जो लोग स्मोकिंग करते हैं और लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क में रहते हैं, वे भी इन्फेक्शन को ज्यादा तेजी से फैला सकते हैं. साथ ही, जिस व्यक्ति को हाल ही में सर्दी या फ्लू हुआ हो, उसे फेफड़ों में इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है.

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, फेफड़ों में इन्फेक्शन कई वजहों से हो सकता है. सबसे आम वजह बैक्टीरिया और वायरस से होने वाला इन्फेक्शन है जो सर्दी, फ्लू या सांस की दूसरी बीमारी के दौरान फेफड़ों तक पहुंचता है. इसके अलावा, कमजोर इम्यून सिस्टम, स्मोकिंग, प्रदूषित माहौल में रहना और पुरानी खांसी या गले की समस्या होने से भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. कुछ लोगों को जिन्हें डायबिटीज, दिल की बीमारी या अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां हैं, उनमें इन्फेक्शन ज्यादा गंभीर हो सकता है. फेफड़ों की ठीक से सफाई न करना और खराब खान-पान से भी खतरा बढ़ जाता है. इसलिए, अगर लक्षण दिखें, तो तुरंत इलाज करवाना जरूरी है.

फेफड़ों में इन्फेक्शन के लक्षण क्या हैं?
अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक, फेफड़ों में इन्फेक्शन के लक्षण हल्के या गंभीर हो सकते हैं. शुरुआती लक्षणों में अक्सर लगातार खांसी, बलगम या कफ, हल्का बुखार, थकान और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं. कुछ मामलों में, सीने में दर्द, तेज बुखार, हड्डी या मांसपेशियों में दर्द, छींक आना या गले में खराश भी हो सकती है.

गंभीर इन्फेक्शन में सांस लेने में दिक्कत, तेजी से सांस लेना, चेहरा नीला या पीला पड़ना और लगातार तेज बुखार शामिल हो सकता है. अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि इन्फेक्शन बिगड़ सकता है और जानलेवा हो सकता है.

बचाव के तरीके

  • मास्क पहनें और गंदी या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें.
  • खांसते या छींकते समय अपने हाथ धोएं और टिशू या कोहनी का इस्तेमाल करें.
  • स्मोकिंग और सिगरेट से दूर रहें.
  • अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए बैलेंस्ड और पौष्टिक खाना खाएं.
  • समय पर वैक्सीन लगवाएं, जैसे फ्लू या न्यूमोकोकल वैक्सीन.
  • घर के अंदर और आसपास की हवा को साफ रखें और वेंटिलेशन का ध्यान रखें.

भारत में सांस लेने में दिक्कत एक गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम बन गई है, जिससे लाखों लोग परेशान हैं. लाखों लोग सांस की बीमारियों से परेशान हैं. भारत में करीब 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से परेशान हैं. वहीं, COPD भारत में सांस की बड़ी प्रॉब्लम में से एक है, जिससे 5.523 करोड़ लोग परेशान हैं. खराब एयर क्वालिटी से अस्थमा, COPD और इंफेक्शन जैसी सांस की बीमारियां होती हैं. गाड़ियों से होने वाला पॉल्यूशन, इंडस्ट्रियल एमिशन, कंस्ट्रक्शन का काम और खेती में जलने से हवा पर असर पड़ता है. इसके अलावा, घर के एयर पॉल्यूशन से भी सांस की बीमारियां होती हैं. दूसरे कारणों में तंबाकू स्मोकिंग, उम्र, सर्दी-जुकाम और क्रोनिक साइनसाइटिस शामिल हैं.

ध्यान देने वाली बात
आपके फेफड़े आपके शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक हैं. हर सांस के साथ, आप न सिर्फ अपने फेफड़ों में हवा लेते हैं, बल्कि पॉल्यूटेंट, धूल, जलन पैदा करने वाली चीजें या धुआं जैसी नुकसानदायक चीजें भी अंदर लेते हैं. इन वजहों का आपके फेफड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. इससे फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो सकती है. इसलिए, हेल्दी रहने के लिए अपने फेफड़ों को डिटॉक्स करना जरूरी है.

अल्मोड़ा: स्कूल के पास खतरनाक जिलेटिन छड़ें मिलीं, जांच जारी

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अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डबरा के नजदीक 161 संदिग्ध जिलेटिन की छड़ें मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि सड़क बनाने या अन्य निर्माण कार्य के लिए इनको लाया गया हो, लेकिन स्कूल के पास जिलेटिन छड़ों को डजंप करने के मामले करो पुलिस ने गंभीरता से लिया है। पुलिस बम डिस्पोजल स्क्वॉड ,डॉग स्क्वॉड, एलआईयू की टीमें को साथ मामले की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

बता दें कि शुक्रवार को अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डबरा के नजदीक जिलेटिन की 161 छड़ें देखी गई थी। वहां खेल रहे स्कूल के बच्चों ने ये संदिग्ध छड़ें देखी को प्रधानाचार्य को बताया। प्रधानाचार्य ने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। जिलेटिन कीछड़ों का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि देवभूमि की शांत वादियों में आखिर ये छड़ें आई कहां से।

फिलहाल शनिवार को अल्मोड़ा पुलिस के साथ, बम डिस्पोजल स्क्वॉड ,डॉग स्क्वॉड, एलआईयू की टीमें मौके पर पहुंची और हर चीज की बारीकी से जांच करते हुए सैंपलिंग की। पुलिस ने घटना स्थल के आसपास जंगलों में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया भी शुरू किया है। ताकि किसी संदिग्ध चीज को समय रहते डिटेक्ट किया जाए। जिलेटिन की छड़ें यहां क्यों लाई गई, कौन यहां लेकर आया इन बातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है, सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने का आग्रह किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से घटनास्थल को सुरक्षित किया गया। इस मामले में थाना सल्ट में अज्ञात के विरुद्ध विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 , बीएनएस की धारा 288 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया है। सामान्यतः जिलेटिन की रॉड सड़क निर्माण कार्यों में पत्थर तोड़ने के काम में लाई जाती है। लेकिन स्कूल के नजदीक डंप करने से ये मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है।

क्या है जिलेटिन स्टिक

जिलेटिन स्टिक एक विस्फोटक सामग्री होती है जिसे आमतौर पर बड़े-बड़े पहाड़ तोड़ने, खनन (माइंस) पत्थर तोड़ने, सड़क निर्माण, सुरंग टर्मिनल बनाने, पहाड़ तोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका धमाका इतना शक्तिशाली होता है की बड़ी-बड़ी चट्टानें हिल जाती हैं । आईईडी बम बनाने में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। जिलेटिन के अंदर नाइट्रो ग्लेसरीन आधारित मिश्रण होता है जो बहुत शक्तिशाली और स्थिर विस्फोटक माना जाता है । इसके साथ डेटोनेटर या ब्लास्टिंग टोपी लगाकर धमाका करवाया जाता है। जिलेटिनकी छड़ अपने आप नहीं फटती लेकिन इसे सही तरीके से सक्रिय कर दिया जाए तो यह बहुत बड़ा धमाका कर सकता है। इसका गलत हाथों में पडना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक माना जाता है।