Wednesday, January 21, 2026
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पहला स्टेट बना उत्तराखंड

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पहला स्टेट बना उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में पारिस्थितिकी को अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए ‘‘उत्तराखण्ड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक’’ (जी.ई.पी) लॉच किया। जी.ई.पी का शुभारम्भ करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है। उत्तराखण्ड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक का आंकलन 04 मुख्य घटकों जल, वायु, वन और मृदा के आधार पर किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जी.ई.पी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक प्रकोष्ठ बनाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जी.ई.पी लागू होने से ईकोलॉजी और ईकोनॉमी के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा। इस सूचकांक के परिणामों के विश्लेषण से भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लक्ष्य निर्धारित करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में और जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रकृति प्रदत्त अनेक प्रकार की वन संपदा है, आवश्यकता है इनके सदुपयोग की। हमें वृक्षारोपण के साथ जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड दुनिया को पर्यावरण के क्षेत्र में दिशा देने का कार्य करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में राज्य में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। राज्य में अमृत सरोवरों की संख्या में तेजी से वृद्धि की जा रही है। जिलाधिकारियों, वन विभाग, सारा और अन्य कार्यदाई संस्थाओं को इनके संरक्षण और जल स्तर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई से 15 अगस्त तक राज्य में बृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत 01 लाख 64 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हरेला पर्व के दिन 50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। जनसहभागिता से भी वृक्षारोपण किया जा रहा है।

बैठक में हैस्को संस्था के प्रमुख पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक का प्रस्तुतीकरण करते हुए अवगत कराया गया कि विभिन्न विकासपरक योजनाओं, औद्योगिक प्रक्रियाओं व सरकार द्वारा बनाये गये नियमों इत्यादि के अनुपालन का जो परिणाम है वह सकल रूप से हमारी स्थानीय पर्यावरणीय गुणवत्ता पर देखने को मिलता है। पर्यावरणीय कारकों में हवा, पानी, मिट्टी, जंगल और अन्य कारकों में अगर सुधार हो रहा हो तो जीईपी सूचकांक में वृद्धि देखने को मिलती है। इससे ज्ञात होता है कि हमारा सिस्टम पर्यावरण के अनुकूल है और विकासात्मक गतिविधियों के बावजूद भी यह स्थिर और सुधारात्मक है। यदि हमारी पर्यावरणाय गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है और उसमें कोई गिरावट दिखायी दे रही है या उसमें कोई नकारात्मकता दिखायी दती है तो इससे जीईपी सूचकांक में गिरावट देखने को मिलती है।

इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

कावड़ यात्रा 2024 योगी सरकार फैसले के खिलाफ विपक्ष

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हरिद्वार कावड़ यात्रा 2024 को लेकर 22 जुलाई से दो अगस्त तक चलने वाली सावन पर भोले के भक्तो का हर की पौड़ी पर आगमन शुरू हो गया है भोले की बम करते शिव भक्त भक्ति से सराबोर नगरी में हरिद्वार कावड़ यात्रा में अलग अलग अंदाज में नज़र आने लगे है भीड़ को लेकर उत्तराखंड का पुलिस महकमा अलर्ट नज़र आ रहा है सुरक्षा की पैनी नज़रे हरिद्वार पुलिस बनाएं हुए है सावन में भोले के भक्तो की लाखो में संख्या हरी की नगरी में आती है।

मुख्यमंत्री योगी ने कांवड़ यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने पीने की दुकानों पर संचालक मालिक का नाम पहचान लिखना होगा। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। उधर, इस फैसले का अखिलेश यादव और मायावती ने कड़ा विरोध किया है।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग के दुकानदारों का नाम लिखने का मुजफ्फरनगर पुलिस का फरमान गलत परंपरा है। यह सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाड़ सकता है। जनहित में प्रदेश सरकार को इस आदेश को तत्काल वापस लेना चाहिए। बसपा सुप्रीमो ने बृहस्पतिवार को एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि पश्चिमी यूपी व मुजफ्फरनगर के कांवड़ यात्रा रूट में पड़ने वाले सभी होटल, ढाबा, ठेला आदि के दुकानदारों को मालिक का पूरा नाम प्रमुखता से प्रदर्शित करने का नया सरकारी आदेश गलत परंपरा है।

क्रिकेट पिच का ऑलराउंडर लाइफ में हुआ फैल नताशा हार्दिक हुए अलग

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क्रिकेट पिच का ऑलराउंडर लाइफ में हुआ फैल नताशा हार्दिक हुए अलग

क्रिकेट पिच का ऑलराउंडर लाइफ में हुआ फैल नताशा हार्दिक हुए अलग क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पण्ड्या अपनी वाइफ से अलग हो गए उनके अलग होने को लेकर पिछले काफी समय से चर्चा सोशल मीडिया पर चल रही थी हार्दिक की लाइफ नताशा के साथ लम्बी नहीं चली चार साल बाद भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने गुरुवार को पत्नी नताशा से अलग होने का फैसला ले लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए दी। वहीं, नताशा ने भी इसकी पुष्टि की। दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था।

गुरुवार को स्टार ऑलराउंडर ने इंस्टा पोस्ट के जरिए नताशा से अलग होने की पुष्टि की। हार्दिक और नताशा की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। चलिए जानते है कब कब हार्दिक विवादों में रहे उभरते खिलाडी हार्दिक की लाइफ में बड़ा फैसला लेने के बाद प्रोफाइल पर बड़ा असर देखने को मिलेगा

साल 2019 में हार्दिक पांड्या ‘कॉफी विद करण’ शो में अपने बयान के लिए काफी विवादों में आए थे। उस शो ने हार्दिक की छवि को बिगाड़ कर रख दिया था। 2019 तक हार्दिक को एक ऐसे क्रिकेटर के तौर पर देखा जाता था जो एक हमेशा स्टाइल और फैशन के कारण सुर्खियों में बना रहता था। ‘कॉफी विद करण’ टीवी शो में हार्दिक महिलाओं को लेकर जो टिप्पणी की थी, उसके कारण वह फैन्स के निशाने पर आ गए थे। इसके बाद हार्दिक को ऑस्ट्रेलियाई दौरे से वापस बुला लिया गया था। ऐसा लगा रहा था कि हार्दिक का करियर बस यहीं समाप्त हो जाएगा। इस दौरान उनके परिवार वालों के भी कई बयान सामने आए थे। परिवार वालों का कहना था कि हार्दिक ने खुद को घर में बंद कर लिया था।

साल 2020 में हार्दिक एक बार फिर चर्चाओं में आए, लेकिन इस बार उनके चर्चाओं में आने की वजह कुछ और थी। 2020 में एक जनवरी को हार्दिक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सर्बियाई मॉडल और एक्ट्रेस नताशा स्टैनकोविच के साथ सगाई की बात कबूल की थी। 2019 से 2020 यानी एक साल के अंदर विवादों में रहने वाले हार्दिक को नताशा के प्यार ने जिम्मेदार बना दिया। इसके बाद हार्दिक ने न सिर्फ क्रिकेट पर फोकस किया, बल्कि कई अहम मौके पर टीम को जीत भी दिलाई। इस दौरान वह चोट से भी जूझते रहे, लेकिन उन्होंने वापसी की और आईपीएल में गुजरात टाइटंस की कप्तानी करते हुए टीम को चैंपियन बनाया।

हार्दिक ने इंस्टा पर लिखा, “4 साल तक साथ रहने के बाद, नताशा और मैंने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है। हमने साथ मिलकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और हमें विश्वास है कि यह हम दोनों के लिए हित में है। यह हमारे लिए एक कठिन निर्णय था, क्योंकि हमने साथ मिलकर आपसी सम्मान और संगति का आनंद लिया और जैसे-जैसे हमारा परिवार बढ़ता गया। हमें अगस्त्य मिला है, जो हमारे दोनों के जीवन का केंद्र बना रहेगा और हम सह-पालक होंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम उसकी खुशी के लिए वह सब कुछ दें जो हम कर सकते हैं। हम ईमानदारी से आपसे इस कठिन और संवेदनशील समय के दौरान हमें गोपनीयता प्रदान करने के लिए समर्थन और समझ का अनुरोध करते हैं।”

राज्य आपदा मोचन निधि जारी अलर्ट मोड पर पुष्कर सरकार

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देहरादून राज्य आपदा मोचन निधि जारी आपदा पर अलर्ट मोड पर सरकार उत्तराखंड में आपदा

देहरादून राज्य आपदा मोचन निधि जारी आपदा पर अलर्ट मोड पर सरकार उत्तराखंड में आपदा से किये जाने वाले कामो को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट की कोई कमी नहीं रहेगी हर ज़िले को दस दस करोड़ रूपए भेजे गए है ताकि ज़िलों में आपदा प्रभावित जगह पर किसी को कोई परेशानी नहीं हो

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसून सत्र, 2024 के दृष्टिगत राज्य आपदा मोचन निधि के तहत होने वाले मरम्मत एवं पुनर्निर्माण ( Recovery and Reconstruction ) कार्यों के लिए राज्य के समस्त जिलाधिकारियों के निवर्तन पर 10 करोड़ की दर से कुल 130 करोड़ (रू० एक सौ तीस करोड़ मात्र) की धनराशि स्वीकृत करते हुए सचिव, आपदा प्रबन्धन विभाग को निर्देशित किया गया है कि तत्काल उक्त धनराशि जनपदों को आवंटित की जाय। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा समस्त जिलाधिकारियों को यह निर्देशित किया गया है कि मरम्मत एवं पुनर्निर्माण मद में स्वीकृत की गयी धनराशि से शीघ्रताशीघ्र आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्निर्माण कराया जाय एवं इसमें किसी प्रकार का विलम्ब स्वीकार्य नहीं होगा।

विगत दिनों मानसून को लेकर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए थे कि आपदा के तहत होने वाले कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के कार्यों में जितनी धनराशि की आवश्यकता है, उसे तत्काल सभी जनपदों को दिया जाए। इसी क्रम में गुरुवार को शासन द्वारा एस०डी०आर०एफ० मद से क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिये 130.00 करोड़ स्वीकृत कर दिये गये हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है और सभी विभागों की पुख्ता तैयारी है। सरकार का मंतव्य स्पष्ट है कि आपदाओं के चलते आम जनमानस को कम से कम मुश्किलों का सामना करना पड़े। इसी लक्ष्य के साथ सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा है कि आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों को तत्परता के साथ संपादित किया जा रहा है।

आपदा संबंधी कार्यों में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मानसून सीजन में आम लोगों को बिजली, पानी, खाद्यान्न, चिकित्सा आदि से संबंधित किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग लगातार हालात की निगरानी कर रहा है। राज्य व जनपद स्तर पर आपातकालीन परिचालन केंद्र 24×7 कार्यरत हैं और आम जनता को राहत पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

उत्तराखंड में पंजीकृत हैं 273 हीमोफीलिया ग्रसित रोगी

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राज्य में हीमोफीलिया मरीजों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद गंभीर है

देहरादून राज्य में हीमोफीलिया मरीजों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री ने आज स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार से राज्य में हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों की संख्या व उनको मिलने वाली स्वास्थ्य  सुविधाओं को लेकर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिये हैं कि हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों को हीमोफीलिया फैक्टर व दवाईयों की कोई कमी नहीं होने दी जाये। प्रत्येक मरीज को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिले इसका पूरा ध्यान रखा जाये।    

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में राज्य में 273 हीमोफीलिया से ग्रसित रोगी पंजीकृत है। जिनके उपचार हेतु राज्य सरकार द्वारा आवश्यक हीमोफीलिया फैक्टर (सात, आठ व नौ) निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा पूर्व में हीमोफीलिया से ग्रसित रोगियों को फैक्टर हेतु राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून, एस०एस० जे० बेस हल्द्वानी नैनीताल एवं संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार, पौडी जाना पडता है। परन्तु पिछले पाँच वर्षों से प्रदेश के सभी हीमोफीलिया के ग्रसित रोगियों को उपचार हेतु हीमोफीलिया फैक्टर उनकी निकटतम् चिकित्सा ईकाई पर उपलब्ध कराये जा रहे है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया वर्तमान में राज्य में फैक्टर-7 पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा शीघ्र ही सम्बन्धित चिकित्सा ईकाईयों को फैक्टर-8 और फैक्टर-9 भी उपलब्ध करा दिये जायेगें।

स्वास्थ्य सचिव ने अवगत कराया कि उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित किया है कि वह ब्यक्तिगत रूप में प्रत्येक माह हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा करे तथा सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपने जिलों के जिला नोडल अधिकारियों को निर्देशित करें कि वह प्रत्येक माह हीमोफीलिया मरीजों को मिल रही सुविधाओं का संज्ञान ले व इस बीमारी को लेकर सरकार दुआरा निःशुल्क दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी आम जनता को उपलब्ध कराए।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें पीडित व्यक्ति के खून का थक्का पूरी तरह नहीं बनता है। हीमोफीलिया पीडितों के खून में थक्का जमाने वाले आवश्यक प्रोटीन (फैक्टर) की कमी या अनुपस्थिति होती है और चोट लगने पर रक्तस्त्राव जारी रहता है। यह रोग आमतौर पर पुरुषों को प्रभावित करता है,

महिलाओ में इस रोग के लक्षण अक्सर दृष्टिगोचर नहीं होते हैं पर वह रोग की वाहक होती है। कभी कभार यह रोग महिलाओ को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा हीमोफीलिया युक्त व्यक्तियों के रक्तस्त्राव तेज नही होता अपितु लगातार व लम्बी अवधि तक होता रहता है। सामान्य व्यक्ति, बाह्य चोट जैसे कटने, छिलने चोट लगने से बचाने का ध्यान रखता हैं, किन्तु हीमोफीलिया में बाह्य चोट के अलावा अंदरूनी रक्तस्त्राव भी बहुत गम्भीर हो सकता हैं। जिससे कि हाथ व पैरों के जोडों व मांसपेशियों के अकडाहट, दर्द, जोडों का खराब होना, विकलांगता और कई बार मृत्यु का कारण भी बन जाता है।

विपक्षी दिलो पर भी राज करते सीएम पुष्कर

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देहरादून उत्तराखंड में सीएम धामी ने अपने फैसलों से विपक्ष नेताओ का भी दिल जीत लिया है राज्य में खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने आपदा राहत को लेकर आपदा में लोगो को राहत देने के मामले में तारीफ करते हुए थैंक्यू धामी जी कहा है

खटीमा के लिए तुरत राहत देने के मामले पर विधायक भुवन का ऐसा बयान पहली बार देखने को मिला है सीएम धामी से खटीमा विधायक की मुलाकात भी राजनैतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है इससे पहले नानकमत्ता के विधायक गोपाल सिंह राणा ने सीएम धामी को बेहतर सीएम बताया था

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी जनता के दिलो पर राज करते है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब सीएम के काम के मुरीद विपक्षी विधायक भी हुए है राज्य में ऐसा अवसर सिर्फ धामी राज में देखने को मिला है

पूर्व सीएम हरीश रावत भी धामी काम को लेकर उनकी तारीफ कर चुके है मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी अपने कामों की बदोलत सबका दिल जीत कर राज्य में मजबूत नेता बनकर पिछले तीन सालो में उभरे है उनकी राजनैतिक विजन पारी से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी उनको गुड बुक में शामिल कर चुका है

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक कौशलता किसी से छुपी हुई नहीं वह समय-समय पर अपने फैसलों से राज्य की जनता के साथ-साथ बड़े नेताओं को चौंकाते रहे हैं उनके 3 सालों में फैसले शीर्ष नेतृत्व का ध्यान भी उनको तरफ करने में कामयाब रहे है जनता के दिलो से लेकर विपक्ष को अपने काम की बदोलत धामी राजनैतिक पारी का बेहतर प्रदर्शन कर रहे है

दीपक रावत ने फरियादी को दिलाए 34 लाख

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दीपक रावत के फरियादी को दिलवाए 34 लाख

IAS दीपक रावत हमेशा अपने छापे औचक निरीक्षण से चर्चा में बने रहते है राज्य के पहले कहे या फिर चर्चित देश भर के अफसरों में शुमार दीपक रावत की वर्किंग को हर कोई देखता नजर आता है।

आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत को पिछले जनसुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा रामनगर में उनके साथ हुए निजी भूमि सहित सरकारी भूमि अनुबंध मामले की शिकायत की गई थी जिस पर आयुक्त द्वारा सभी पक्षों को बुलाकर शिकायतकर्ता के 34 लख रुपए वापस करवाए गए।

आयुक्त की जनसुनवाई में शिकायतकर्ता-अब्दुल मुस्तफा पुत्र अब्दुल जब्बार, निवासी मोहल्ला खताडी, रामनगर को अरूण कुमार मासीवाल, जगदीश कुमार मासीवाल, योगेश मासीवाल, नरेन्द्र मासीवाल, निवासी उदयपुरी चौपड़ा तहसील रामनगर के द्वारा ग्राम उदयपुरी चौपड़ा, तहसील रामनगर जिला नैनीताल में भूमि के साथ ही सरकारी भूमि भी अनुबन्ध कर शिकायतकर्ता अब्दुल मुस्तफा को रू0 34 लाख में बेची गयी। उसके उपरान्त शिकायतकर्ता अब्दुल मुस्तफा आयुक्त , कुमाऊं मण्डल, नैनीताल के समक्ष शिकायत लेकर उपस्थित हुए। जहां आयुक्त महोदय द्वारा सम्बन्धित पक्षों को कार्यालय में बुलवाकर शिकायतकर्ता के रू0 34 लाख रुपए बैंक  खाते के माध्यम से वापिस कराये गये। शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान हो गया है तथा शिकायतकर्ता संतुष्ट है।

सीएम धामी से मिले पूर्व विधायक शुक्ला

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सीएम धामी से मिले पूर्व विधायक शुक्ला

किच्छा के पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने पंतनगर की शिक्षा प्राणली पर चिन्ता व्यक्त कर मुख्यमंत्री धामी जी को ज्ञापन सौंप कर सुधार के लिए अपने सुझाव दिये मुख्यमंत्री सहमत होकर अपने निर्देश जारी कर दिये:

देहरादून:- पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उनके सफलतम 3 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर बधाई दी एवं पंतनगर विश्वविद्यालय के शिक्षकों/ वैज्ञानिकों की समस्याओं एवं कैंपस स्कूल पंतनगर के शिक्षकों/ कर्मचारियों की समस्याओं से संबंधित मांग पत्र सौंप कर समाधान करने का निवेदन किया।

पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय के नियंत्रक द्वारा मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के अनुसार विश्वविद्यालय में सामान्य बजट में 390 पद रिक्त हैं तथा ACRIP एवं KVK के वैज्ञानिक/शिक्षकों के सापेक्ष 140 पदों पर इन शिक्षकों को समायोजित किया जा सकता है परंतु शासन से इस पत्र पर अभी तक अनुमति नहीं मिली, इस दौरान विश्वविद्यालय ने उक्त पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया को विज्ञापित किया है ऐसा करने से यह 140 शिक्षक/ वैज्ञानिक अधर में रह जाएंगे, आपके निर्देश पर गठित कमेटी द्वारा इन वैज्ञानिकों की समस्या हल करने हेतु हुई एक बैठक में यह सैद्धांतिक सहमति बनी थी कि इन्हें समायोजित किया जाए, इसी दौरान जिन वैज्ञानिकों/शिक्षकों को विश्वविद्यालय ने 60 वर्ष होने पर सेवानिवृत्ति किया था उनके हक में हाई कोर्ट नैनीताल का निर्णय भी आ गया कि यह विश्वविद्यालय के कर्मचारी हैं अत: इन्हें 65 वर्ष तक कार्य करने का हक है। अतः हाईकोर्ट के निर्णय के बाद इस तरह के 140 शिक्षकों/ वैज्ञानिकों को विश्वविद्यालय का कर्मचारी माना जाए, विश्वविद्यालय के सामान्य बजट के रिक्त 390 पदों में से इन वैज्ञानिकों के सापेक्ष 140 पदों पर इनका समायोजन किया जाए, तब तक विश्वविद्यालय को इन पदों पर सीधी भर्ती न करने हेतु निर्देशित किया जाए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि इस संबंध हाइकोर्ट के निर्णय को लागू करने के साथ ही हाइकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है। ऐसे सभी 140 शिक्षको/वैज्ञानिकों को पंतनगर विश्वविद्यालय का शिक्षक माना जाए अथवा विश्वविद्यालय के समान्य बजट में समायोजन करें।

साथ ही पंतनगर विश्वविद्यालय के कैंपस में स्थित कैंपस स्कूल (नर्सरी से इंटर) के शिक्षक एवं कर्मचारियों को कई माह से वेतन नहीं मिला है इस विद्यालय के संरक्षक कुलपति पंतनगर विश्वविद्यालय हैं तथा उनके द्वारा गठित कमेटी से इसका प्रबंधन होता है परंतु इस विद्यालय के कर्मचारी/ शिक्षकों को विश्वविद्यालय का कर्मचारी नहीं माना जाता है और न ही इन्हें मान्यता प्राप्त विद्यालय का दर्जा है और ना ही प्राइवेट स्कूल का दर्जा है अतः कैंपस स्कूल को या तो पंतनगर विश्वविद्यालय में समाहित किया जाए अथवा इसे पूर्ण रूप से सरकारी स्कूल (राज्य सरकार) में निहित किया जाए ताकि इसके शिक्षको एवं कर्मचारियों की समस्याओं का हल हो सके। जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहमति जताई।

तीन साल में 15 हजार नियुक्ति की बही बयार यही है धामी सरकार

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तीन साल में 15 हजार नियुक्ति की बही बयार यही है धामी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्राविधिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों से चयनित 212 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों के अंतिम वर्ष के इन छात्र-छात्राओं को विभिन्न कम्पनियों में नौकरी मिली है। इस वर्ष अभी तक राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों से 65 प्रतिशत युवाओं को रोजगार मिल चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र सभी युवाओं के सपनों की पहली सीढ़ी है। यह परिश्रम और लगन से किए कार्य का सम्मान भी है। हर छात्र पूर्ण मनोयोग निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को हर क्षेत्र में रोजगार के उचित अवसर मिलें। राज्य के अंदर निजी क्षेत्र भी रोजगार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गैर सरकारी औद्योगिक इकाइयों का विकास हमारी आर्थिक विकास का प्रमुख स्तंभ है। देवभूमि उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को राज्य में सही दिशा और उचित अवसर देने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षो में टेक्नोलॉजी, रोजगार , कौशल विकास के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। देश के अंदर हर क्षेत्र में नौजवानों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में इन्नोवेशन एवं टेक्नोलॉजी को प्रथमिकता दी गई है। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं से देश में नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों हेतु राज्य में ऑनलाइन ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेंटर का निर्माण किया गया है। जिसके माध्यम से छात्रों को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होने छात्रों से कहा कि आपके द्वारा किए गए कार्य एवं अनुभव ही आपकी पूंजी के रूप में हमेशा आपके पास रहेगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोज़गार से जोड़ना है। बीते 3 सालों में राज्य सरकार ने सरकारी विभागों में 15000 से भी ज्यादा युवाओं को नियुक्तियां दी है। राज्य में भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाया गया है। परीक्षा से लेकर नियुक्तियां तक तय समय के अंदर हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आई पारदर्शिता से युवाओं का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। यह पारदर्शिता युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान लोगों/ युवाओं ने नकल विरोधी कानून लागू करने हेतु विशेष रूप से सरकार का आभार व्यक्त किया जा रहा है। यह पारदर्शिता तभी संभव है जब सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हो। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के लिए निरन्तरता से काम कर रही है। समेकित विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में उत्तराखण्ड प्रथम स्थान पर आया है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता परक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को सीधे रोजगार मिले इसके लिए औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के हिसाब से नये कोर्स चलाये जा रहे हैं। बच्चों को तकनीकी शिक्षा के माध्यम से रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है। राज्य के पॉलिटेक्निक कॉलेज में फाइनल वर्ष के 3500 बच्चों में से 2303 बच्चों को रोजगार से जोड़ दिया गया है। पॉलिटेक्निक कॉलेजों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है। युवाओं को अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर मिले इसके लिए सरकार ने राज्य के पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में जर्मन और फ्रेंच भाषा पढ़ाने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी एजुकेशन के लिए हर कॉलेज में अध्यापकों की नियुक्तियां की गई हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि केवल सर्विस प्राप्त करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, निजी सेक्टर में अपने समर्पण, ज्ञान, कार्यशैली के माध्यम सफलता को प्राप्त करना है। जिस भी क्षेत्र में जाएं, उस क्षेत्र में हमेशा सर्वश्रेष्ठ कार्य कर निरन्तर सफलता के मार्ग पर आगे बढ़े। युवाओं को राज्य और समाज के बेहतर भविष्य के लिए सोचना चाहिए।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, अपर सचिव तकनीकी शिक्षा स्वाति भदौरिया, निदेशक तकनीकि शिक्षा आरपी गुप्ता, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

चातुर्मास देवशयनी एकादशी

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चातुर्मास में अभीष्ट की सिद्धि के लिए भक्त प्रिय वस्तुओं का त्याग करेंगे। वहीं हरिशयनी एकादशी पर भगवान चार महीने योग निद्रा में चले गए। इस दौरान मंदिरों में जप-तप और अनुष्ठान करते साधक नज़र आए। साथ ही विष्णु मंदिरों में विविध अनुष्ठान प्रांरंभ हो गए ।

भगवान के चार महीने विश्राम के दौरान हम लोग भी यम नियम और संयम का पालन करते हैं। इन चार महीने के दौरान हम लोग अपनी कोई न कोई प्रिय चीज का त्याग कर देते हैं। कुछ लोग अपनी बुरी आदतों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और चार महीने तक इसका पालन करते हैं।

भूमि पर शयन और पलाश के पत्तों पर है भोजन का नियम
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि देवशयनी के दिन भगवान विष्णु पाताल में सोने चले जाते हैं, इसलिए देवशयनी से देव प्रबोधिनी एकादशी तक मनुष्य को पलंग पर नहीं सोना चाहिए। इस समय में जो व्यक्ति भूमि पर शयन करता है और पलाश के पत्तों पर भोजन करता है। नियमित दीप दान करता है और ब्रह्मचर्य का पालन करता है वह पाप मुक्त व्यक्ति बैकुंठ में स्थान पाता है और भगवान की सेवा में रहता है।