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उद्यान विभाग में जल्द होगी 415 मालियों की भर्ती: कृषि मंत्री गणेश जोशी

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उद्यान विभाग में जल्द होगी 415 मालियों की भर्ती: कृषि मंत्री गणेश जोशी

उद्यान विभाग में जल्द होगी 415 मालियों की भर्ती: कृषि मंत्री गणेश जोशी

देहरादून, 04 मार्च 2025। उत्तराखंड में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित राजकीय उद्यानों और पौधशालाओं में 415 माली के पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। यह भर्ती प्रक्रिया आउटसोर्सिंग के माध्यम से होगी।

मंगलवार को देहरादून के हाथीबड़कला स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित कृषि एवं उद्यान विभाग की बैठक में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है, और अब तक तीन वर्षों में 20,000 से अधिक रोजगार अवसर प्रदान किए जा चुके हैं।

माली की नियुक्ति से राज्य के उद्यानों और पौधशालाओं में रखरखाव और सौंदर्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बागवानी, फल-फूल उत्पादन और वृक्षारोपण कार्यों में भी तेजी आएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि यह निर्णय उत्तराखंड के बागवानी क्षेत्र को मजबूत करेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।

इस बैठक में मंत्री गणेश जोशी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले उत्तराखंड की प्रगतिशील महिला किसानों के सम्मान कार्यक्रम की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में कृषि महानिदेशक रणवीर सिंह चौहान, संयुक्त निदेशक कृषि दिनेश कुमार, निदेशक कैप डॉ. नृपेन्द्र सिंह, डॉ. रतन कुमार, और रेशम निदेशक प्रदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जरूरतमंदों को वितरित किए आर्थिक सहायता चेक

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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जरूरतमंदों को वितरित किए आर्थिक सहायता चेक

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जरूरतमंदों को वितरित किए आर्थिक सहायता चेक

देहरादून, 04 मार्च 2025। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मंगलवार को अपने कैंप कार्यालय में आर्थिक सहायता चेक वितरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने मसूरी विधानसभा क्षेत्र के जरूरतमंदों को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी द्वारा स्वीकृत विवेकाधीन कोष के तहत पाँच-पाँच हजार रुपये के चेक वितरित किए।

इस कार्यक्रम में मंत्री गणेश जोशी ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी का आभार व्यक्त किया और उनके सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा, “सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करना हमारी प्राथमिकता है।”

मंत्री जोशी ने आगे कहा कि राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर तबकों की मदद कर रही है, और आगे भी इस तरह की योजनाओं के जरिए जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने के प्रयास जारी रहेंगे।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत और विष्णु गुप्ता भी उपस्थित थे।

आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थी में शामिल थे:

  • दीपक सिंह,शारदा देवी,वर्षा,शिवानी, पूनम,सुमन देवी,आकांक्षा चीनाली,रजनी देवी,सरिता,प्रमोद कुमार,उमा गुरुंग,विमला देवी,अनूप कुमार,कौशल्या देवी,शीतल,शेफाली,बसंती,सपना आदि।
  • यह पहल गरीबों और जरूरतमंदों के लिए राहत देने वाली साबित हो रही है, और यह दर्शाता है कि सरकार उनकी भलाई के लिए काम कर रही है।

उत्तराखंड में एनीमिया और टीबी मुक्त अभियान: डॉ. धन सिंह रावत का एलान

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उत्तराखंड में एनीमिया और टीबी मुक्त अभियान: डॉ. धन सिंह रावत का एलान

उत्तराखंड में एनीमिया और टीबी मुक्त अभियान: डॉ. धन सिंह रावत का एलान उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश को वर्ष 2025 तक एनीमिया और टीबी मुक्त बनाने के लिए एक सघन जनजागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल

अभियान के तहत, सभी राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रत्येक टीबी मरीज को गोद लेंगे और एक वर्ष तक उनका उपचार करेंगे। इस पहल को ‘निःक्षय मित्र’ योजना के तहत लागू किया जाएगा। इसके अलावा, एनीमिया को जड़ से मिटाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिनमें विद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को शामिल किया जाएगा।

अभियान की रूपरेखा:

प्रदेशभर में गोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ कुपोषण और एनीमिया से संबंधित उपायों के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से छात्र-छात्राओं की टीबी और एनीमिया की जांच भी की जाएगी।

पहल की सफलता:

टीबी मुक्त अभियान के संदर्भ में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पहले से ही प्रदेश में टीबी मरीजों की मदद की जा रही है। अब तक 14,000 से ज्यादा टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है और कई मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इसके साथ ही, 5,000 गांवों को टीबी मुक्त किया जा चुका है, जो कि एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

अभियान में सामाजिक भागीदारी का आह्वान

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और विद्यालयी शिक्षा के अधिकारियों से इस सामाजिक कार्य में स्वैच्छिक रूप से भाग लेने की अपील की है, ताकि 2025 तक उत्तराखंड को एनीमिया और टीबी मुक्त राज्य बनाया जा सके।

इस बैठक में उच्च शिक्षा सचिव रणजीत सिन्हा, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, और अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

नई आबकारी नीति का असर महंगी हुई शराब थोड़ी थोड़ी पिया करो

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उत्तराखंड में शराब महंगी, नई आबकारी नीति का असर

उत्तराखंड में एक अप्रैल से शराब के दाम बढ़ने वाले हैं, जो कारोबारी से लेकर सामान्य ग्राहकों तक पर असर डालेगा। हालांकि, एक फायदा भी है—अब यदि कोई शराब की दुकानदार ओवर रेटिंग करता है और ग्राहक उसकी शिकायत करता है, तो दुकानदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। पहले ऐसी शिकायतों का असर शून्य रहता था, लेकिन अब पुष्कर सिंह धामी सरकार की नई आबकारी नीति के तहत ओवर रेटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, महिला वर्ग द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलने का विरोध पहले भी होता रहा है। अब धार्मिक कॉरिडोर और शैक्षिक संस्थानों के पास शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी, ताकि युवा वर्ग पर गलत प्रभाव न पड़े। इससे शराब की दुकानों को स्कूलों के पास खोलने से भी रोका जाएगा, जो कि पहले गलत संदेश देने का कारण बनता था। विभाग को इसके लिए जगह बदलने की आवश्यकता होगी, और इससे राजस्व में कुछ असर भी हो सकता है।

नई आबकारी नीति के तहत शराब के दाम बढ़ने के साथ-साथ राज्य को राजस्व में 5000 करोड़ रुपये से अधिक का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य का निर्धारण किया गया है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।

इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने नए नियम बनाए हैं। पुष्कर सिंह धामी सरकार की नीति के तहत वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी, जो किसानों और बागवानी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाएगी। इसके साथ ही, मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निर्यात शुल्क में कटौती की गई है, और माल्ट एवं स्प्रिट उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

इस नीति का उद्देश्य प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना और मदिरा उद्योग में निवेश को बढ़ावा देना है, ताकि राज्य को आर्थिक दृष्टि से फायदा हो सके।

राजभवन में सात मार्च से वसंतोत्सव

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राजभवन में सात से नौ मार्च तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय वसंतोत्सव का आयोजन इस बार भी खास होने जा रहा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने इस अवसर पर वसंतोत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

वसंतोत्सव के इस साल के आयोजन में विशेष आकर्षण जटामांसी पर आधारित एक पोस्टल कवर होगा, जिसे राज्य के पुष्पों की विशेष पहचान के रूप में चुना गया है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में पुष्प उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जो न सिर्फ राज्य के लिए वरदान साबित हो सकती हैं, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिला सकती हैं।

यह आयोजन उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, और कुटीर उद्योगों को प्रमोट करने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है, जहां स्थानीय कारीगरों, किसानों, महिला समूहों और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

राज्यपाल ने यह भी बताया कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां पुष्प उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं, और यहां पाए जाने वाले दुर्लभ एवं औषधीय गुणों वाले फूल वैश्विक बाजार में एक खास पहचान बना सकते हैं। इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड को ‘पुष्प प्रदेश’ के रूप में विकसित करने और पुष्प पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

यह आयोजन न सिर्फ प्रदेश की सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहचान को मजबूती देगा, बल्कि उत्तराखंड को ग्रीन टूरिज्म हब के रूप में भी पहचान दिला सकता है।

इस मौके पर राज्यपाल के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें रविनाथ रामन, स्वाति एस भदौरिया, मनुज गोयल, दीप्ति सिंह, डॉ. नितिन उपाध्याय, और डॉ. रतन कुमार शामिल थे।

पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट फैसलों में ग्रीन से लेकर क्लीन विजन पर चर्चा

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पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट फैसलों में ग्रीन से लेकर क्लीन विजन पर चर्चा
देहरादून उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार कैबिनेट के फैसलों को लेकर चर्चा तेज हो चली है जनता से जुड़े मामलो पर अधिक चर्चा हो रही है वही राजनैतिक फैसलों पर दिल्ली में राजनैतिक पार्टिया चर्चा के केंद्र में पुष्कर सिंह धामी सरकार का आकलन कर रही है चलिए आपको बताते है उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार कैबिनेट फैसलों पर किस किस विभाग से लेकर राज्य की विजन रूप रेखा के हिसाब से क्या आकलन किया जा सकता है

यहां कुछ महत्वपूर्ण निर्णय हैं जो उत्तराखण्ड राज्य के कैबिनेट द्वारा लिए गए हैं:

ग्रीन फील्ड टाउनशिप के लिए भूमि हस्तांतरण: उधमसिंहनगर जिले की प्राग फार्म की 1354 एकड़ भूमि को ग्रीन फील्ड टाउनशिप के लिए सिडकुल को हस्तांतरित किया गया।

स्टाम्प और निबंधन विभाग का पुनर्गठन: विभागीय ढांचे के पुनर्गठन के लिए 9 नए अधिकारियों और 29 सहयोगी पदों की स्वीकृति दी गई, ताकि तकनीकी दक्षता और त्वरित सेवा सुनिश्चित की जा सके।

ट्राउट प्रोत्साहन योजना: पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹200 करोड़ की योजना का प्रस्ताव। इसके तहत कार्यरत मत्स्य पालकों को पांच वर्षों तक समर्थन दिया जाएगा।

सतर्कता विभाग में रिवॉल्विंग फंड: भ्रष्टाचार निरोधक सतर्कता विभाग में रिवॉल्विंग फंड के संचालन हेतु नियमावली तैयार की गई, ताकि ट्रैप कार्यवाहियों में परिवादियों को सहयोग दिया जा सके।

स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना: महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यशालाओं के लिए ₹2.30 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई।

पाठ्य पुस्तकों में राज्य आंदोलन और लोक संस्कृति का समावेश: कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम में उत्तराखण्ड के आंदोलन और लोक संस्कृति के विषय को जोड़ा जाएगा।

नई पेंशन योजना: 1 अप्रैल 2025 से उत्तराखण्ड में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) लागू की जाएगी।

कारागार विभाग की सेवा नियमावली: उत्तराखण्ड कारागार विभाग के पदों की सेवा नियमावली 2025 को मंजूरी दी गई।

गन्ने की कीमत और कमीशन: चीनी मिलों द्वारा गन्ने के लिए राज्य परामर्शित मूल्य ₹375 प्रति क्विंटल और ₹365 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया।

मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना: एकल (निराश्रित), परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए इस योजना को प्रारंभ किया गया।

खनन रॉयल्टी शुल्क में संशोधन: कुमाऊं क्षेत्र की कोसी, गोला और दाबका नदियों में खनन रॉयल्टी शुल्क में संशोधन किया गया, जिससे लागत में कमी आएगी।

ये निर्णय उत्तराखण्ड राज्य में महिला सशक्तिकरण, पर्यावरणीय विकास, राजस्व प्रबंधन, और सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

सहायता राशि में 75 प्रतिशत होगी सब्सिडी : रेखा आर्या मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को मिली मंजूरी पहले वर्ष में 2000 महिलाओं को सहायता देने का लक्ष्य

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सहायता राशि में 75 प्रतिशत होगी सब्सिडी : रेखा आर्या
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को मिली मंजूरी
पहले वर्ष में 2000 महिलाओं को सहायता देने का लक्ष्य

देहरादून, 3 मार्च कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को मंजूरी मिलने के बाद महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश की महिलाओं को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि इस योजना में दी जाने वाली सहायता राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में प्रदान किया जाएगा।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इस योजना का लाभ प्रदेश की अविवाहित, परित्यक्ता, तलाकशुदा, निराश्रित और विकलांग एकल महिलाओं को मिलेगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत पात्र महिलाओं को अधिकतम ₹2,00,000 की सहायता राशि प्रदान की जाएगी, जिसमें से 75% राशि सब्सिडी यानी अनुदान के रूप में दी जाएगी। लाभार्थियों को केवल 25% हिस्सा अपने व्यवसाय में निवेश करना होगा।

मंत्री रेखा आर्या ने यह भी बताया कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब जल्द ही इसका सरकारी आदेश (जीओ) जारी किया जाएगा। पहले वर्ष में इस योजना के तहत कम से कम 2000 महिलाओं को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले वर्ष की प्रगति को देखते हुए योजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पहले से कई योजनाएं संचालित हैं, लेकिन विशेष रूप से एकल महिलाओं के लिए कोई योजना नहीं थी। उन्होंने कहा कि एकल महिलाओं को सशक्त करने की सबसे अधिक आवश्यकता है, इसलिए उनके लिए एक विशेष योजना तैयार की गई है।

मंत्री रेखा आर्या ने इस योजना को महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की बहनों के लिए एक अग्रिम तोहफा बताया।

सूबे में कलस्टर विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू रूद्रप्रयाग में तीन कलस्टर विद्यालयों के लिए 7 करोड़ मंजूर प्रत्येक जनपद में एक आवासीय कलस्टर विद्यालय बनेगा

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सूबे में कलस्टर विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू
रूद्रप्रयाग में तीन कलस्टर विद्यालयों के लिए 7 करोड़ मंजूर
प्रत्येक जनपद में एक आवासीय कलस्टर विद्यालय बनेगा

देहरादून, 03 मार्च 2025 उत्तराखंड में कलस्टर विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने कलस्टर विद्यालय योजना के तहत रूद्रप्रयाग जिले में तीन विद्यालयों के लिए 7.48 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि का उपयोग विद्यालयों में भवन निर्माण और अन्य आवश्यक अवस्थापना कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक जनपद में एक कलस्टर विद्यालय को आवासीय सुविधा युक्त बनाने की योजना भी तैयार की गई है।

राज्य सरकार ने विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने के उद्देश्य से प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कलस्टर विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कलस्टर विद्यालयों को एक हब के रूप में विकसित करना है, जहां आस-पास के कम छात्र संख्या वाले और संसाधनों की कमी वाले विद्यालयों को एकजुट किया जाएगा। इससे कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों को एक ही छत के नीचे बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल सकेंगी।

राज्य सरकार ने इस योजना को साकार करने की दिशा में कदम उठाते हुए रूद्रप्रयाग जनपद में तीन विद्यालयों को कलस्टर विद्यालय बनाने के लिए 7.48 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इनमें से राजकीय इंटर कॉलेज बसुकेदार को 1.50 करोड़ रुपये, राजकीय इंटर कॉलेज कोटमा, ऊखीमठ को 2.98 करोड़ रुपये, और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अगस्तमुनि को 2.99 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। इन धनराशियों से विद्यालयों में कक्षा-कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, स्टॉफ कक्ष, प्रधानाचार्य कक्ष, कार्यालय कक्ष, प्रयोगशालाएं, आर्ट एंड क्राफ्ट कक्ष, शौचालय ब्लॉक और सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के लिए अवस्थापना खंड डाकपत्थर, सिंचाई विभाग को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है, और शीघ्र ही इन विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिए धनराशि जारी की जाएगी। इन तीनों विद्यालयों को एक समृद्ध कलस्टर विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां छात्र-छात्राओं को सभी विषयों के शिक्षक, प्रयोगशालाएं, कम्प्यूटर लैब, खेल और अन्य गतिविधियां, साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

इस योजना के तहत प्रत्येक जनपद में एक कलस्टर विद्यालय को आवासीय सुविधा युक्त बनाने की भी योजना है। पहले चरण में, राज्य के दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से कठिन पांच जनपदों में एक-एक कलस्टर आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे, ताकि वहां के छात्र-छात्राओं को आवासीय सुविधा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

बयान:
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में कलस्टर विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रूद्रप्रयाग जनपद में तीन विद्यालयों के लिए 7.48 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इन विद्यालयों को संसाधन-संपन्न बनाया जाएगा, जहां शिक्षकों और अन्य स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था होगी।”
डॉ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प को साकार करती पुष्कर धामी सरकार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लखपति दीदी' संकल्प को साकार करती पुष्कर धामी सरकार

देहरादून, 03 मार्च। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के तहत नए प्रावधानों को मंजूरी दी गई है।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नए प्रावधानों के माध्यम से राज्य की महिलाओं को और अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगी। उन्होंने बताया कि इस फैसले से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक दृष्टि से सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंत्री गणेश जोशी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि हर महिला आत्मनिर्भर बने और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सके। उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया।

उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित समूहों, ग्राम संगठनों और क्लस्टर संगठनों को मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के तहत विभिन्न घटकों से लाभान्वित किया जाएगा। इससे पहले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं, जिनमें शामिल हैं:

  1. मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के तहत 2.30 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी।
  2. क्लस्टर स्तर पर महिलाओं की व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन हेतु 15.40 करोड़ रुपये की व्यवस्था।
  3. ‘लखपति दीदी’ बनाने के उद्देश्य से अल्मोड़ा और कोटद्वार में रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर की स्थापना के लिए 25 लाख रुपये की धनराशि।
  4. डिजिटल एमआईएस के लिए 75 लाख रुपये की धनराशि।
  5. राष्ट्रीय स्तर पर राज्य में आयोजित होने वाले 2 सरस मेलों के आयोजन के लिए मैचिंग ग्रांट के रूप में प्रति मेला 11.12 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी।

आबकारी नीति 2025 ओवरटिंग हुई तो लाइसेंस होगा रद्द

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आबकारी नीति 2025

राज्य के धार्मिक स्थलों के निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का निर्णय लेते हुए धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है पिछले कई वर्षो में सरकारें नहीं कर पाई उसका फैसला धामी सरकार ने लिया है इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य भी रखा गया है जिसके माध्यम से राज्य को राजस्व में बढ़ोतरी होगी

उत्तराखंड में शराब की दुकानों पर ओवरटिंग की जाती रही है जिसका सीधा नुकसान ऐसे ग्राहक बनते है जो रोज़ाना शराब की दुकानों से उनके नियमित ग्राहक है पिछले कई सालो से ओवरटिंग की शिकायते मिलती रही है लेकिन अब ऐसे मामलों पर कमी आएगी जिसका लाभ राज्य सरकार के लिए गए फैसले पर मजबूत नज़र आएगा ओवररेटिंग की शिकायत सही पाए जाने पर दुकान का लाइसेंस रद्द हो जायेगा नई आबकारी नीति 2025 को कैबिनेट ने दी मंजूरी।

राज्य की नई आबकारी नीति 2025 में धार्मिक स्थलों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए उनके निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जनसंवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए, शराब की बिक्री पर और अधिक नियंत्रण किया जायेगा। उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को समाप्त किया गया है। नई आबकारी नीति में किसी दुकान पर एमआरपी से अधिक कीमत ली जाती है, तो लाइसेंस निरस्त करने का प्राविधान किया गया है। डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी mrp लागू होगी, जिससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य

पिछले दो वर्षों में आबकारी राजस्व में राज्य में काफी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 4000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4038.69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4439 करोड़ रुपये का लक्ष्य के सापेक्ष अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है।

पर्वतीय क्षेत्रों में से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में दी जाएगी छूट ।

नई आबकारी नीति के तहत स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। थोक मदिरा अनुज्ञापन केवल उत्तराखंड निवासियों को जारी किए जाएंगे, जिससे राज्य में आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी। इससे कृषकों और बागवानी क्षेत्र में कार्य करने वालों को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। माल्ट एवं स्प्रिट उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।

स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी द्वारा प्रयोग करने के लिए किया जा रहा है प्रोत्साहित ।

आबकारी नीति के तहत नवीनीकरण, लॉटरी और अधिकतम ऑफर जैसी पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से दुकानें आवंटित की जाएंगी। आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है। स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी (आसवनी इकाइयों) द्वारा प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें नए बाजार उपलब्ध होंगे। आबकारी नीति-2025 में जनसाधारण को मदिरा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाने के विशेष अभियान चलाने का प्राविधान किया गया है। नई आबकारी नीति प्रदेश में आर्थिक सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।