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देवभूमि में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुख्यमंत्री सहित अन्य नेताओं ने किया भव्य स्वागत

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देवभूमि में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुख्यमंत्री सहित अन्य नेताओं ने किया भव्य स्वागत In the land of the gods, the BJP National President was given a grand welcome by the Chief Minister and other leaders.

देहरादून (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के आगमन से पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया। वे रविवार को सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत गुंजी गांव के दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे।

जे.पी. नड्डा सबसे पहले देहरादून स्थित जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचे, जहां उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की प्रस्तुति देखी। इसके उपरांत वे हेलिकॉप्टर के माध्यम से पिथौरागढ़ जिले के गुंजी गांव के लिए रवाना हुए, जहां वे रविवार रात्रि को प्रवास करेंगे।

गुंजी पहुंचकर नड्डा स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा वे ज्योलिंगकोंग से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे तथा महिला फेडरेशन द्वारा संचालित होम स्टे परियोजनाओं का भी भ्रमण करेंगे। गुंजी में रात्रि प्रवास के पश्चात, वे सोमवार को देहरादून होते हुए दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।

उनके उत्तराखंड आगमन पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्रीगण और कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा, “धर्म, अध्यात्म, और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देवभूमि उत्तराखंड में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का आगमन हम सभी के लिए गौरव का विषय है। उनके दौरे से भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है।”

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मुख्यमंत्री धामी की पहल रंग लाई, कैंची धाम बाईपास निर्माण को मिली वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति

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मुख्यमंत्री धामी की पहल रंग लाई, कैंची धाम बाईपास निर्माण को मिली वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति Chief Minister Dhami’s initiative bore fruit, as theoretical approval for the transfer of forest land for the construction of the Kainchi Dham bypass has been received.

अब शीघ्र शुरू होगा बाईपास मार्ग का निर्माण, मिलेगा जाम से निजात

देहरादून/नैनीताल:
उत्तराखंड के लोकप्रिय धार्मिक स्थल कैंची धाम तक यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रस्तावित बाईपास मोटर मार्ग को केंद्र सरकार से वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा यह स्वीकृति दी गई है। अब शीघ्र ही बाईपास मार्ग का शेष निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।

बढ़ती भीड़ और जाम को देखते हुए बाईपास की थी घोषणा

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में एनएच-109 (ई) पर वाहनों की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या को देखते हुए कैंची धाम के लिए बाईपास मार्ग निर्माण की घोषणा की थी। लगभग 19 किमी लंबे इस मार्ग में शिप्रा नदी पर एक सेतु का भी निर्माण प्रस्तावित है।

इस परियोजना के प्रथम 8 किमी हिस्से के चौड़ीकरण, डामरीकरण एवं निर्माण के लिए ₹1214.71 लाख की धनराशि पहले ही लोक निर्माण विभाग को जारी की जा चुकी है, और इस पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।

वन भूमि के लिए केंद्र से मिली सैद्धांतिक सहमति

मार्ग के शेष 11 किमी हिस्से में वन भूमि आने के कारण, ऑनलाइन प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया था। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं इस प्रस्ताव को लेकर हाल ही में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर अनुमति का अनुरोध किया गया था। उनके प्रयासों से गुरुवार को आयोजित REC बैठक में वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:

“कैंची धाम बाईपास के लिए वन भूमि प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने से निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सकेगी। इससे श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय जनता को यातायात सुविधा मिलेगी और भवाली तथा कैंची धाम क्षेत्र में लगने वाले भीषण जाम से राहत मिलेगी।”


यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और स्थानीय लोगों की यातायात सुगमता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जनहित जरुरी देवभूमि के लाल का एक और कमाल विरोध वाली शराब दुकाने नहीं खोलेगी धामी सरकार

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जनविरोध पर सरकार का सख्त रुख: विरोध वाली शराब दुकानों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द Dhami government’s big decision in public interest – controversial liquor shops will not be opened in the land of gods.

धामी सरकार का जनहित में बड़ा फैसला — देवभूमि में नहीं खुलेंगी विवादित शराब दुकानें

देहरादून: उत्तराखंड में नई शराब की दुकानों को लेकर हो रहे जनविरोध को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। जिन स्थानों पर शराब की दुकानों का विरोध हो रहा है, वहां के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। सरकार ने इस निर्णय में राजस्व की हानि को दरकिनार कर जनहित को प्राथमिकता दी है।

राज्य के आबकारी आयुक्त हरिचंद्र सेमवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में वे सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी, जिनका स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है या जो विरोध के चलते अभी तक शुरू नहीं हो सकीं।

आबकारी नीति के तहत कार्यवाही

आदेश में सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आबकारी नीति नियमावली-2025 के नियम 28.1 और 28.4 (ए) के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करें। इन नियमों के अनुसार, स्थानीय विरोध की स्थिति में नई शराब दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं

देवभूमि में शराब के खिलाफ भावनाएं, सरकार ने माना जनमत

राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में शराब की नई दुकानों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। कई स्थानों पर महिलाओं और स्थानीय संगठनों ने खुलकर मोर्चा संभाला था। सरकार ने समय रहते जनभावनाओं को समझते हुए राजस्व हितों की बजाय सामाजिक सरोकारों को महत्व दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही इस विषय पर स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक गरिमा और जनभावनाओं के विपरीत कोई निर्णय नहीं लेगी। इस फैसले को जनहित में एक साहसिक और संवेदनशील पहल माना जा रहा है।

महल सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी हरजीत सिंह उर्फ काला कनाडा के ब्रैम्पटन में मारा गया, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हत्या का वीडियो

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महल सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी हरजीत सिंह उर्फ काला कनाडा के ब्रैम्पटन में मारा गया, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हत्या का वीडियो The main accused in the Mahal Singh murder case, Harjeet Singh alias Kala, was killed in Brampton, Canada; a video of the murder has gone viral on social media.

एनआईए से ली जाएगी जानकारी, पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की

काशीपुर (उत्तराखंड)/ब्रैम्पटन (कनाडा):
कुख्यात महल सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी हरजीत सिंह उर्फ काला (50) की कनाडा के ओंटारियो प्रांत स्थित ब्रैम्पटन शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। उसकी हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि शूटरों ने उसे हाउस ऑफिस के पास निशाना बनाया। हालांकि, अब तक हरजीत की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस घटना के बाद ब्रैम्पटन पुलिस ने इलाके को सील कर दिया है और जांच शुरू कर दी है। हरजीत सिंह अपने पीछे माता, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गया है।

कई गंभीर धाराओं में दर्ज थे मुकदमे, घोषित था इनामी अपराधी

हरजीत सिंह के खिलाफ काशीपुर कोतवाली में यूएपीए, आईपीसी की धारा 386, 302 समेत कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज थे। वह लंबे समय से कनाडा में रह रहा था, और उस पर इनाम भी घोषित किया गया था।

13 अक्टूबर 2022 को हुआ था महल सिंह का हत्याकांड

यह मामला 13 अक्टूबर 2022 का है, जब कुंडेश्वरी पुलिस चौकी क्षेत्र के जुड़का नंबर दो में स्टोन क्रशर मालिक महल सिंह की उनके घर में अखबार पढ़ते समय दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाइक सवार दो शूटरों ने वारदात को अंजाम दिया था।

एनआरआई हरजीत काला पर था हत्या का शक

हत्या के बाद महल सिंह के भतीजे कर्मपाल सिंह ने गांव गुलजारपुर निवासी एनआरआई हरजीत सिंह काला पर शक जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में सामने आया कि महल सिंह की हत्या की साजिश कनाडा में बैठे हरजीत काला ने रची थी, ठीक उसी तरह जैसे सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।

स्टोन क्रशर को लेकर था विवाद, हत्या की साजिश पन्नू के साथ मिलकर रची

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हरजीत काला, महल सिंह के स्टोन क्रशर व्यवसाय में साझेदारी करना चाहता था, लेकिन इंकार किए जाने पर उसने खुद का क्रशर खोलने की योजना बनाई। इसके लिए उसने पन्नू को भारत में जमीन की तलाश और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन जब महल सिंह ने उनके क्रशर प्रोजेक्ट में रुकावट डालनी शुरू की, तो हरजीत ने उसकी हत्या की साजिश रच डाली।

दो शूटरों को बाहर से बुलाया गया, जिन्होंने पन्नू के साथ मिलकर रेकी की और 13 अक्टूबर को महल सिंह की हत्या कर दी। इस हत्याकांड में कुल 10 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

एसएसपी का बयान

एसएसपी ऊधमसिंह नगर, मणिकांत मिश्रा ने कहा:

“हरजीत सिंह काला की हत्या की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई है। अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में एनआईए से जानकारी ली जाएगी।

राज्य कर्मचारियों के लिए राहतभरी खबर: अब 5400 ग्रेड वेतन तक वालों को भी एलटीसी में हवाई यात्रा की सुविधा

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राज्य कर्मचारियों के लिए राहतभरी खबर: अब 5400 ग्रेड वेतन तक वालों को भी एलटीसी में हवाई यात्रा की सुविधा Relief news for state employees: Now those with a grade pay of up to 5400 will also have the facility of air travel in LTC.

सरकार ने बदली यात्रा अवकाश की शर्तें, न्यूनतम छुट्टियों की सीमा भी घटाई

उत्तराखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों के लिए यात्रा अवकाश (LTC) नियमों में बड़ा संशोधन किया है। अब ग्रेड वेतन ₹5400 तक के अधिकारी और कर्मचारी रेल के साथ-साथ हवाई यात्रा का भी लाभ उठा सकेंगे। इस संबंध में सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने आदेश जारी कर दिए हैं।

क्या है नया बदलाव?

  • अब तक एलटीसी लेने के लिए न्यूनतम 15 दिन का उपार्जित अवकाश अनिवार्य था, जिसे घटाकर 5 दिन कर दिया गया है।
  • ₹5400 ग्रेड वेतन वाले अधिकारी अब एलटीसी में वायुयान से यात्रा कर सकेंगे।
  • यदि वे हवाई यात्रा नहीं करते हैं, तो उन्हें रेल की प्रथम श्रेणी (First Class) में यात्रा की अनुमति होगी। पहले इन्हें AC 2-tier की सुविधा ही मिलती थी।
  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अब AC 3-tier में यात्रा करने की सुविधा दी गई है, जबकि पहले उन्हें स्लीपर क्लास का ही विकल्प मिलता था।
  • अन्य श्रेणियों में भी यात्रा सुविधाओं को उन्नत किया गया है।

कर्मचारी संगठनों ने जताया आभार

सरकार के इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव और सचिव वित्त का आभार व्यक्त किया है। संगठनों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों के हित में एक सकारात्मक और सराहनीय पहल है।

कर्मचारियों की समयपालन पर सरकार सख्त,सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए निर्देश

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कर्मचारियों की समयपालन पर सरकार सख्त, महीने में चार दिन देरी से आने पर होगी कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए निर्देश The government is strict about employees’ punctuality; the General Administration Department has issued directives.

उत्तराखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। अब यदि कोई कर्मचारी एक माह में चार या अधिक बार देर से कार्यालय पहुंचता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार:

  • एक दिन देर से आने पर मौखिक चेतावनी दी जाएगी।
  • दो दिन देरी पर लिखित चेतावनी जारी की जाएगी।
  • तीन दिन देरी होने पर एक दिन का आकस्मिक अवकाश (CL) काटा जाएगा।
  • चार या उससे अधिक दिन देरी से आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का यह कदम कार्यालयों में कार्य संस्कृति और अनुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

ग्रीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की बड़ी पहल 25 स्थानों पर शुरू हुई ई-चार्जिंग सुविधा

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The government’s major initiative to promote the Green Char Dham Yatra has started e-charging facilities at 25 locations.

चारधाम यात्रा को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और हरित बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने इस यात्रा सीजन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब यात्रा मार्ग पर 25 स्थानों पर ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन पूरी तरह चालू हो चुके हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार इस वर्ष की चारधाम यात्रा को “ग्रीन यात्रा” की थीम पर आधारित किया गया है। इसी क्रम में, परिवहन विभाग और टीएचडीसी के सहयोग से कुल 38 ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 25 स्टेशन पहले ही सेवा में आ चुके हैं।

इन चार्जिंग स्टेशनों को जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) की संपत्तियों में स्थापित किया गया है। प्रत्येक स्टेशन पर 60 किलोवाट क्षमता के यूनिवर्सल चार्जर लगाए गए हैं, जिसमें दो 30-30 किलोवाट की चार्जिंग गन शामिल हैं। जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ावों पर ये स्टेशन स्थापित किए गए हैं ताकि अधिक से अधिक यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं।

रुद्रप्रयाग जिले में विशेष पहल

रुद्रप्रयाग जिले में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित चार जीएमवीएन गेस्ट हाउसों में भी ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

हरित उत्तराखंड की दिशा में अग्रसर राज्य

यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप हरित पर्यटन को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। ई-वाहनों की सुविधा न केवल तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि राज्य को प्रदूषण मुक्त बनाने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा:

“हमारा लक्ष्य सिर्फ यात्रा को आसान बनाना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड को एक पर्यावरण मित्र राज्य बनाना है, जहां पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी हो।”


ई-चार्जिंग स्टेशन इन प्रमुख स्थानों पर उपलब्ध हैं:

उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मंगलौर, रुड़की, बड़कोट, स्यानाचट्टी, फूलचट्टी, जानकीचट्टी, कौड़ियाला, श्रीनगर, श्रीकोट, गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, कालेश्वर, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, औली, पांडुकेश्वर, बद्रीनाथ, स्यालसौड़, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, घनसाली आदि।

माणा गांव में शुरू हुआ 12 वर्षों बाद पुष्कर कुंभ, दक्षिण भारत से पहुंचे श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

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माणा गांव में शुरू हुआ 12 वर्षों बाद पुष्कर कुंभ, दक्षिण भारत से पहुंचे श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान The Pushkar Kumbh, which began in Maan village after 12 years, saw devotees arriving from South India for a sacred bath.

केशव प्रयाग में आस्था और परंपरा का संगम, प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम

चमोली जनपद के सीमांत गांव माणा में स्थित केशव प्रयाग में 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पुष्कर कुंभ का भव्य आयोजन विधि-विधान के साथ आरंभ हो गया है। जैसे ही यह दुर्लभ आयोजन शुरू हुआ, बदरीनाथ धाम और माणा गांव में तीर्थयात्रियों की चहल-पहल बढ़ गई। विशेष रूप से दक्षिण भारत से आए वैष्णव परंपरा के श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पैदल मार्गों का उन्नयन किया गया है और वहां विभिन्न भाषाओं में साइन बोर्ड लगाए गए हैं। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से मार्ग पर पुलिस बल, तथा संगम स्थल पर एसडीआरएफ के जवानों की तैनाती की गई है। तहसील प्रशासन को पूरे आयोजन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पुष्कर कुंभ का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व

पुष्कर कुंभ का आयोजन तब होता है जब गुरु (बृहस्पति) ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करता है — यह संयोग हर 12 वर्ष में एक बार आता है। इसी ज्योतिषीय स्थिति के दौरान, अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम स्थल केशव प्रयाग में यह विशेष कुंभ मेले जैसा आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण भारत के महान संत रामानुजाचार्य और माधवाचार्य ने यहीं पर मां सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया था। इसके अलावा, महर्षि वेदव्यास ने भी यहीं तप कर महाभारत की रचना की थी।

आस्था से जुड़ता भारत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा:

“तीर्थ स्थल केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये देश की एकता और सांस्कृतिक समरसता के प्रतीक भी हैं। देशभर, विशेषकर दक्षिण भारत से श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि माणा गांव में आयोजित पुष्कर कुंभ उत्तर और दक्षिण भारत को आपस में जोड़ने वाला सेतु बन रहा है। यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सजीव करता है।”

मुख्यमंत्री ने युवक एवं महिला मंगल दलों से किया संवाद

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मुख्यमंत्री ने युवक एवं महिला मंगल दलों से किया संवाद The Chief Minister interacted with youth and women’s welfare groups.

सेवा, संस्कृति और स्वावलंबन में मंगल दलों की भूमिका सराहनीय – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में “मुख्य सेवक संवाद” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेशभर से आए युवक एवं महिला मंगल दलों के प्रतिनिधियों से संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि मंगल दलों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,000 किया जाएगा। साथ ही, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने हेतु ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए नई नीति तैयार की जाएगी। डिजिटल मिशन के तहत मंगल दलों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, और राज्य स्तर पर एक पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिससे सभी युवक एवं महिला मंगल दल आपस में जुड़ सकें और समन्वय स्थापित कर सकें।

मुख्यमंत्री ने मंगल दलों के सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और आपदा प्रबंधन में योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ये दल उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर बदलाव लाने, जनजागरूकता बढ़ाने और आपदा के समय ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाने में मंगल दलों का योगदान उल्लेखनीय है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार मंगल दलों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने हेतु ₹50,000 से ₹3.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत बजट का प्रावधान इस प्रकार किया गया है:

  • मुख्यमंत्री युवा मंगल दल स्वावलंबन योजना – ₹5 करोड़
  • मुख्यमंत्री ग्रामीण खेलकूद एवं स्वास्थ्य संवर्धन योजना – ₹2 करोड़
  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना – ₹60 करोड़
  • मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना – ₹10 करोड़
  • पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना – ₹21 करोड़

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोक संस्कृति के संवर्धन हेतु भी प्रतिबद्ध है और मेलों व पारंपरिक पर्वों के आयोजन के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव

  • उत्तरकाशी के आज़ाद डिमरी ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग की।
  • बागेश्वर की खृष्टि कोरंगा ने कहा कि मंगल दलों को ब्लॉक और जिला स्तरीय बैठकों में सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि योजनाओं का लाभ सही तरीके से आमजन तक पहुंचे।
  • चम्पावत की मोनिका ने सुझाव दिया कि जनहित की जानकारियों हेतु एक समर्पित पोर्टल बनाया जाए।
  • चमोली के सुरजीत सिंह बिष्ट ने ग्राम स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई।
  • हरिद्वार के मनोज चौहान ने राज्य में योग और फिटनेस को बढ़ावा देने की बात रखी।

इस अवसर पर विधायक सुरेश गड़िया, पीएमजीएसवाई राज्य स्तरीय अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव एस.एन. पाण्डेय एवं निदेशक युवा कल्याण प्रशांत आर्य भी उपस्थित रहे।