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भाजपा नेता के बेटे की संदिग्ध मौत: सिपाही की पिटाई से क्षुब्ध होकर जहर खाने का आरोप, पुलिस ने किया इनकार

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भाजपा नेता के बेटे की संदिग्ध मौत: सिपाही की पिटाई से क्षुब्ध होकर जहर खाने का आरोप, पुलिस ने किया इनकार

कालाढूंगी (नैनीताल)। भाजपा नेता विशन नगरकोटी के बेटे कमल नगरकोटी (31) की शुक्रवार देर रात जहर खाने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस चौकी के एक सिपाही द्वारा मारपीट और अभद्रता किए जाने से आहत होकर कमल ने यह जानलेवा कदम उठाया। हालांकि कालाढूंगी थाना पुलिस ने मारपीट के आरोपों को नकारते हुए युवक के नशे की लत को मौत की पृष्ठभूमि बताया है।

चेकिंग के दौरान सिपाही ने की अभद्रता: परिजन

कमल नगरकोटी, जो अपने पिता के साथ ठेकेदारी का काम करता था और सयात गांव निवासी था, शुक्रवार दोपहर बाइक से कोटाबाग की ओर जा रहा था। परिजनों के अनुसार रास्ते में स्थानीय पुलिस चौकी पर एक सिपाही ने उसे रोका और चेकिंग के नाम पर थप्पड़ मारते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इससे मानसिक रूप से आहत होकर कमल ने कोटाबाग बाजार में ज़हर खा लिया।

अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम

घटना की जानकारी मिलने पर परिजन उसे तत्काल हल्द्वानी के बेस अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत में उसे सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन रात करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचने से पहले ही कमल की मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में भेजा गया है।

मां को फोन कर बताई अंतिम बात

कमल ने ज़हर खाने से पहले अपनी मां को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी थी। पिता विशन नगरकोटी ने कहा कि वह इस मामले में दोषी सिपाही के खिलाफ तहरीर देंगे और न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है।

पुलिस का पक्ष: मारपीट नहीं, युवक था नशेड़ी

मामले में कालाढूंगी थानाध्यक्ष विजय मेहता ने कहा कि युवक द्वारा जहर खाने की सूचना मिली है, लेकिन किसी प्रकार की मारपीट का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि युवक के नशे की लत के बारे में जानकारी मिली है, जिसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।


पृष्ठभूमि और पारिवारिक स्थिति

कमल की शादी एक साल पहले ही हुई थी और वह पिता के साथ ठेकेदारी का व्यवसाय कर रहा था। उसका बड़ा भाई भारतीय सेना में कार्यरत है। इस घटना से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

एनएच-74 घोटाला 15 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, 13 नवंबर को अगली सुनवाई

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एनएच-74 घोटाला: 15 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, 13 नवंबर को अगली सुनवाई

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित राष्ट्रीय राजमार्ग-74 (एनएच-74) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह समेत सात किसानों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपितों पर 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में संलिप्त होने का आरोप है।

स्पेशल कोर्ट ने लिया आरोपपत्र का संज्ञान

शुक्रवार को ईडी की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 13 नवंबर तय की है। ईडी ने अपनी जांच के तहत कई किसानों की संपत्तियां भी जब्त (अटैच) कर दी हैं।

400 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा घोटाला

एनएच-74 घोटाले का खुलासा मार्च 2017 में हुआ था, जिसे उत्तराखंड का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह ने ऊधमसिंहनगर की सिडकुल चौकी में एनएचएआई के अधिकारियों, सात तहसीलों के तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदारों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उस समय राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।

अधिकारियों और किसानों पर कार्रवाई

जांच के दौरान दो आईएएस और पांच पीसीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था, जबकि 30 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और किसान जेल भेजे गए थे। मुख्य आरोपित बनाए गए तत्कालीन एसएलओ और पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह एक साल से अधिक समय तक जेल में रहे।

सरकारी जांच में यह घोटाला 400 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया। इसके बाद एसआईटी ने चार्जशीट दाखिल कर दी और किसानों सहित कई आरोपियों पर आरोप तय किए। इन किसानों में अधिकतर पंजाब से संबंध रखते हैं।

ईडी की कार्रवाई और चार्जशीट

करीब तीन वर्षों तक चली जांच के बाद, ईडी ने 10 सितंबर को पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह और सात किसानों — जिशान अहमद, सुधीर चावला, अजमेर सिंह, गुरवैल सिंह, सुखवंत सिंह, सुखदेव सिंह और सतनाम सिंह — के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए औपचारिक चार्जशीट दाखिल की। ईडी ने इन सभी की करोड़ों रुपये की संपत्ति को जांच के दौरान अटैच किया है।

एनएच-74 घोटाला: रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह के ठिकानों पर ईडी का छापा, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज़

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एनएच-74 घोटाला: रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह के ठिकानों पर ईडी का छापा, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज़

उत्तराखंड के बहुचर्चित एनएच-74 घोटाले में रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार सुबह तड़के छापेमारी की। देहरादून के राजपुर रोड स्थित उनके आवास के साथ-साथ सीतापुर और बरेली स्थित आवासों पर भी कार्रवाई की गई। साथ ही हरिद्वार के एक अफसर और काशीपुर के एक वकील के निवास पर भी छापे मारे गए हैं।

कागजातों की गहन छानबीन जारी

ईडी की टीमें डीपी सिंह के आवास पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई हैं। डीपी सिंह डोईवाला शुगर मिल में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत रहे हैं। छापेमारी के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से कई बड़े अफसरों में चिंता की लहर दौड़ गई है।

घोटाले की पृष्ठभूमि: 162.5 करोड़ का नुकसान

एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के उपयोग में कथित रूप से हेरफेर कर सरकारी खजाने को 162.5 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस मामले में पीसीएस अफसर डीपी सिंह, पूर्व एसडीएम काशीपुर भगत सिंह फोनिया सहित कुल सात लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है। ईडी पहले ही इस प्रकरण में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

8 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी ने जांच के दौरान पाया कि आरोपियों ने इस घोटाले से अर्जित लगभग 8 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि को वैध रूप देने की कोशिश की। एजेंसी अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि यह पैसा कहां और कैसे खर्च किया गया।

पतंजलि को राहत हाईकोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में दर्ज आपराधिक मुकदमा किया रद्द

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पतंजलि को राहत: हाईकोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में दर्ज आपराधिक मुकदमा किया रद्द नैनीताल हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और इसके संस्थापक बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ भ्रामक विज्ञापनों के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला 2024 में उत्तराखंड के एक वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा ड्रग्स एंड मैजिकल रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत दर्ज कराया गया था।

किन उत्पादों को लेकर था विवाद

शिकायत में आरोप था कि पतंजलि की दवाओं — मधुग्रिट, मधुनाशिनी, दिव्य लिपिडोम टैबलेट, दिव्य लिवोग्रिट टैबलेट, दिव्य लिवाम्रत एडवांस टैबलेट, दिव्य मधुनाशिनी वटी और दिव्य मधुग्रिट टैबलेट — को भ्रामक विज्ञापनों के जरिए बढ़ावा दिया गया।

कोर्ट का फैसला: पर्याप्त साक्ष्य नहीं

हाईकोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हरिद्वार के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा जारी समन को रद्द करते हुए कहा कि शिकायत में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विज्ञापन भ्रामक कैसे थे और उनके झूठे होने के समर्थन में कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट या ठोस सबूत पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता (पतंजलि) को बिना किसी वैज्ञानिक आधार या प्रमाण के केवल विज्ञापन हटाने के लिए कहा गया, जो मुकदमा चलाने का पर्याप्त कारण नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जिन घटनाओं के आधार पर शिकायत दर्ज की गई थी, वे 2023 से पहले की थीं और वे पहले ही समयसीमा से बाहर हो चुकी थीं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दर्ज हुई थी शिकायत

यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को आयुष मंत्रालय की चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई न करने पर फटकार लगाई थी। इसके बाद राज्य सरकार के संबंधित विभाग ने यह शिकायत दर्ज की थी। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में इस पहलू को भी संज्ञान में लिया, लेकिन साक्ष्य के अभाव में मामला खारिज कर दिया।

अलकनंदा में समाया श्रद्धालुओं का वाहन, रुद्रप्रयाग हादसे ने झकझोरा

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अलकनंदा में समाया श्रद्धालुओं का वाहन, रुद्रप्रयाग हादसे ने झकझोरा राजस्थान के उदयपुर से धार्मिक यात्रा पर उत्तराखंड आया पूरा परिवार बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा करने के बाद बद्रीनाथ जा रहा था वीरवार को परिवार के लोग यात्रा पर निकले तो किसी को भी पता नहीं था उनकी ये यात्रा अंतिम यात्रा में तब्दील होने वाली है यात्रा मार्ग पर हादसे ने पूरा परिवार तबाह कर दिया है रुद्रप्रयाग ज़िले से गुरुवार सुबह सामने आई भीषण सड़क दुर्घटना की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। बदरीनाथ दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं का टेंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में जा गिरा। हादसे में कई लोग लापता हैं, कुछ की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

चालक ने बताई हादसे की वजह

अस्पताल में भर्ती घायल चालक सुमित ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि यह दुर्घटना एक ट्रक की टक्कर के कारण हुई। हादसे के समय वाहन में सवार कुछ यात्री बाहर जा गिरे। चालक के बयान की पुष्टि अन्य घायलों ने भी की है। घायल भावना ने बताया कि वे रात को रुद्रप्रयाग में रुके थे और सुबह करीब 7:30 बजे बदरीनाथ के लिए निकले थे।

राजस्थान के यात्री थे सवार

दुर्घटनाग्रस्त वाहन में सवार सभी यात्री राजस्थान के उदयपुर से धार्मिक यात्रा पर आए थे। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।

यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा: टेंपो ट्रैवलर अलकनंदा नदी में गिरा, कई लोग लापता

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यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा: टेंपो ट्रैवलर अलकनंदा नदी में गिरा, कई लोग लापता

रुद्रप्रयाग ज़िले में गुरुवार सुबह एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर घोलतीर के पास एक टेंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर सीधे अलकनंदा नदी में जा गिरा। यह वाहन बदरीनाथ दर्शन के लिए जा रहा था और उसमें चालक सहित कुल 19 लोग सवार थे, जिनमें से 17 एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति:

अब तक मिली जानकारी के अनुसार, वाहन में कुल 19 लोग सवार थे। एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और अन्य राहत एजेंसियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। अभी तक 8 यात्रियों को बचाकर रुद्रप्रयाग अस्पताल भेजा जा चुका है। हादसे में अब तक 2 लोगों के शव बरामद हुए हैं, जबकि बाकी 9 लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।

मुख्यमंत्री का बयान:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद में टेंपो ट्रैवलर के नदी में गिरने की घटना अत्यंत दुःखद है। एसडीआरएफ सहित अन्य एजेंसियां राहत व बचाव कार्य में युद्धस्तर पर जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और ईश्वर से सभी यात्रियों की कुशलता की प्रार्थना कर रहे हैं।

आपातकाल के 50 साल मेरे गांव से जेल गए थे 184 लोग मरने तक नहीं भूलूंगा वो दृश्य केंद्रीय गृहमंत्री बोले

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आपातकाल के 50 साल मेरे गांव से जेल गए थे 184 लोग मरने तक नहीं भूलूंगा वो दृश्य केंद्रीय गृहमंत्री बोले आपातकाल लोकतंत्र पर हमला था: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘आपातकाल के 50 साल’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल ने भारत के लोकतंत्र पर सीधा हमला किया था। उन्होंने इसे सत्ता बचाने के लिए उठाया गया तानाशाही कदम बताया, ना कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता।

शाह ने कहा, “जब आपातकाल लागू हुआ, मैं सिर्फ 11 साल का था। गुजरात में उस समय जनता सरकार थी, इसलिए वहां इसका असर सीमित था। लेकिन जल्द ही वह सरकार भी गिरा दी गई। मेरे गांव से ही 184 लोग जेल भेजे गए थे। मैं वह दिन और वे दृश्य कभी नहीं भूल सकता।”

उन्होंने कहा, “आपातकाल में केवल स्वतंत्रता की भावना रखने पर लोगों को जेल में डाल दिया गया। हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि वह सुबह भारतवासियों के लिए कितनी क्रूर रही होगी।”

‘लोकतंत्र से तानाशाही की ओर’

अमित शाह ने कहा, “आपातकाल का मतलब था — एक लोकतांत्रिक देश को तानाशाही में बदलना। उस समय कोई बाहरी या आंतरिक खतरा नहीं था, फिर भी सिर्फ सत्ता बचाने के लिए इमरजेंसी लगाई गई।”

उन्होंने सवाल उठाया, “क्या उस वक्त संसद की मंजूरी ली गई? क्या कैबिनेट की बैठक बुलाई गई? विपक्ष को भरोसे में लिया गया?” — नहीं। सब कुछ एकतरफा किया गया।

📻 रेडियो पर ऐलान, लोकतंत्र पर चोट

उन्होंने बताया कि सुबह 8 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की, जबकि कैबिनेट को तड़के 4 बजे बुलाया गया, वह भी बिना एजेंडा बताए। खुद बाबू जगजीवन राम और स्वर्ण सिंह ने माना कि उन्हें केवल सूचना दी गई, चर्चा नहीं की गई।

🗳 जनता ने दिया जवाब

अमित शाह ने कहा, “जब 1977 में चुनाव हुए और इंदिरा गांधी व संजय गांधी दोनों हार गए, तब देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई। हमारे गांव में हम ट्रक में बैठकर नतीजे सुनने गए थे। जब परिणाम आया, तो हजारों चेहरों पर जो खुशी थी, वह जीवन भर नहीं भूल सकती।”

🇮🇳 भारत कभी तानाशाही स्वीकार नहीं करता

अंत में शाह ने कहा, “भारत लोकतंत्र की जननी है। यहां तानाशाही की कोई जगह नहीं है। इस देश की जनता ने सिद्ध कर दिया कि वे किसी भी तानाशाही को स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए आपातकाल के बाद एक ऐतिहासिक बदलाव आया और देश ने पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार चुनी।”

इंग्लैंड ने भारत को पांच विकेट से हराया

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इंग्लैंड ने भारत को पांच विकेट से हराया इंग्लैंड और भारत के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच से जुड़ी है, जिसमें इंग्लैंड ने भारत को पांच विकेट से हराया। इस मैच में बेन डकेट ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 149 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 170 गेंदों का सामना किया और 21 चौके1 छक्का लगाया।

हालांकि जब वह बेहतरीन लय में थे, तब शार्दुल ठाकुर ने उन्हें आउट कर भारत को एक महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। डकेट का विकेट भारत के लिए अहम था, क्योंकि वे इंग्लैंड की जीत की ओर तेजी से बढ़ रहे थे।

फिर भी, अंत में इंग्लैंड की टीम ने भारत पर बढ़त बनाए रखी और मैच को पांच विकेट से जीत लिया
यह मुकाबला दोनों टीमों के बीच काफी रोमांचक रहा और डकेट की पारी मैच का अहम मोड़ साबित हुई।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का तीन दिवसीय नैनीताल दौरा, प्रशासनिक तैयारियां शुरू

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का तीन दिवसीय नैनीताल दौरा, प्रशासनिक तैयारियां शुरू

नैनीताल, भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का 25 जून से 27 जून 2025 तक नैनीताल का तीन दिवसीय दौरा प्रस्तावित है। इस महत्वपूर्ण दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। उपराष्ट्रपति इस दौरान कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति 25 जून को नैनीताल पहुंचेंगे, और उसी दिन विश्वविद्यालय समारोह में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, वह नगर के अन्य सांस्कृतिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी सहभागिता कर सकते हैं, जिसके लिए कार्यक्रमों का अंतिम प्रारूप तैयार किया जा रहा है।

दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, अतिथियों के ठहरने और कार्यक्रम स्थलों पर व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन मुस्तैदी से जुटा है। उच्च स्तरीय अधिकारियों की देखरेख में व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, और सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय कर योजना बनाई जा रही है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी, और वर्ष 2023-24 में इसके 50 वर्ष पूर्ण हुए हैं। इस स्वर्ण जयंती समारोह में देशभर के शिक्षाविद, पूर्व छात्र और अन्य गणमान्य अतिथियों के भाग लेने की संभावना है। 26 जून को सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद 27 जून को शेरवुड कालेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इसकी तैयारियों को लेकर सोमवार को शासन स्तर पर जिले के अधिकारियों संग वर्चुअल बैठक भी हुई। एसएसपी पीएन मीणा के अनुसार सुरक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आइजीआइ स्टेडियम में पुलिस की ब्रीफिंग की गई और निर्धारित जगहों पर तैनाती के निर्देश दे दिए गए हैं।

रुड़की सिविल अस्पताल में डॉक्टर से अभद्रता, परिजन ने की तोड़फोड़ और मारपीट

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रुड़की सिविल अस्पताल में डॉक्टर से अभद्रता, परिजन ने की तोड़फोड़ और मारपीट

रुड़की रुड़की सिविल अस्पताल में सोमवार देर रात एक गंभीर घटना सामने आई, जब एक मृतक के परिजन ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया, डॉक्टर से मारपीट की और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि एक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सोमवार रात अस्पताल लाया गया था। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. एजाज द्वारा की गई जांच में व्यक्ति को मृत घोषित किया गया, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया।

कुछ देर बाद मृतक का एक परिजन अस्पताल पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए इमरजेंसी वार्ड में कुर्सियां फेंकी, शीशा तोड़ा और डॉ. एजाज के साथ मारपीट की। इस घटना से अस्पताल में मौजूद स्टाफ और डॉक्टरों में भारी रोष व्याप्त है।

अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस आरोपी की पहचान कर उसकी तलाश में जुटी है। चिकित्सकों और कर्मचारियों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।