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पैनिक खबरों का जखीरा ढूढते अवसर वीर, धामी सरकार के ग्राउंड जीरो पर बने धृतराष्ट्र

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देहरादून — उत्तराखंड में आई आपदा एक बार फिर उन चेहरों को सामने ले आई है जो हर संकट को केवल टीआरपी और सनसनी फैलाने का जरिया मानते हैं। सोशल मीडिया और बाहरी मीडिया हाउसों की एक जमात, जिन्हें न तो ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना है और न ही स्थानीय लोगों की तकलीफों से, केवल नकारात्मकता फैलाने के उद्देश्य से सक्रिय हो गई है।

हर आपदा की तरह इस बार भी कुछ लोग अवसर की तलाश में सरकार के प्रयासों की अनदेखी कर, केवल अफवाहें फैलाकर खुद को “वीर” सिद्ध करने में जुटे हैं। ये वही लोग हैं जो हर कठिन घड़ी में सरकार पर निशाना साधते हैं, लेकिन खुद कभी ग्राउंड ज़ीरो पर नजर नहीं आते।

इस बीच, धराली क्षेत्र में आई आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार ज़मीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं ग्राउंड जीरो पर मौजूद रहकर राहत कार्यों में जुटी टीमों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं और हर जरूरी निर्देश समय पर दे रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है।

पिछले पांच दिनों से चल रहे राहत-बचाव अभियान में रविवार का दिन विशेष है। खराब मौसम के बावजूद राहत दल मलबा हटाने, रास्ते खोलने और लापता लोगों की तलाश में पूरी तरह जुटा हुआ है। हालांकि अभी तक लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना बहुत कम है, लेकिन प्रशासन हर संभावित प्रयास कर रहा है।

यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष या मीडिया समूह को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं है। बल्कि यह सवाल उठाती है कि क्या केवल डर फैलाना ही खबर है? क्या ग्राउंड पर हो रहे सकारात्मक प्रयासों को दिखाना अब ‘अलोकप्रिय’ हो गया है?

समाज और मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि जहां आलोचना जरूरी हो वहां उसे पूरी ताकत से किया जाए, लेकिन जहां मेहनत और ईमानदारी से कार्य हो रहा हो, वहां भी उसे उतनी ही प्राथमिकता से दिखाया जाए। आपदा के समय केवल पैनिक फैलाना नहीं, समाधान और सहयोग का संदेश देना ही सच्ची पत्रकारिता और नागरिकता है।

केदारनाथ यात्रा चार दिन बाद हुई शुरू

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रुद्रप्रयाग — लगातार हो रही बारिश और केदारनाथ पैदल मार्ग पर पत्थर गिरने की घटनाओं के चलते बीते चार दिनों से रोकी गई केदारनाथ यात्रा को शनिवार से दोबारा शुरू कर दिया गया है। यात्रा की बहाली के साथ ही शनिवार को दो हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए।

पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलधार बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच मुनकटिया क्षेत्र सहित कई स्थानों पर पहाड़ियों से भूस्खलन और भारी बोल्डर गिरने की घटनाएं हो रही थीं। पैदल मार्ग पर भी कई जगह वर्षा के कारण बड़े-बड़े पत्थर गिर रहे थे। इन खतरों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने एहतियातन यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।

शनिवार को सोनप्रयाग में पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही मौसम की स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए रखी। जैसे ही मौसम अनुकूल नजर आया, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यात्रियों को सोनप्रयाग से गौरीकुंड की ओर बढ़ने की अनुमति दी गई। इसके बाद, गौरीकुंड से पैदल मार्ग की स्थिति का आकलन करने के बाद, परिस्थितियां अनुकूल पाए जाने पर यात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए रवाना किया गया।

सोनप्रयाग से करीब दो हजार श्रद्धालु केदारनाथ की यात्रा पर निकले। इस दौरान सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। पुलिस की निगरानी में यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गई।

कोतवाली निरीक्षक राकेंद्र कठैत ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रियों को आगे बढ़ाया गया। गौरीकुंड से भी पैदल मार्ग की सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें केदारनाथ भेजा गया।

उत्तरकाशी आपदा: ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे मुख्यमंत्री धामी प्रभवित लोगो से मिले तो उनकी आँखे भी नम हो गई

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उत्तरकाशी आपदा: ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, हवाई निरीक्षण कर राहत कार्यों की समीक्षा

देहरादून/उत्तरकाशी, 6 अगस्त 2025। उत्तराखंड में जारी प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खराब मौसम की परवाह किए बिना उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने हवाई निरीक्षण के जरिए क्षति का जायज़ा लिया और ग्राउंड ज़ीरो से राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री प्रभवित लोगो से मिले तो उनकी आँखे भी नम हो गई उन्होंने कहा सरकार हर प्रभवित वयक्ति के साथ खड़ी है

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी स्थित आपदा नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों, सेना के प्रतिनिधियों और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ बैठक कर राहत कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि,

“सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राहत और पुनर्वास कार्य हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पीड़ित तक सहायता पहुंचे और किसी को भी संकट की घड़ी में अकेला न छोड़ा जाए।”

राहत कार्यों में जुटा प्रशासन और सेना

  • रेस्क्यू ऑपरेशन और मेडिकल कैंपों की स्थापना प्रभावित क्षेत्रों में कर दी गई है।
  • भोजन, दवाइयां और जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
  • सड़कों की मरम्मत, मोबाइल नेटवर्क की बहाली और राशन व दवाओं की आपूर्ति का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

एयर सपोर्ट तैयार

राहत कार्यों को समर्थन देने के लिए भारतीय वायुसेना के चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टर पूरी तरह से अलर्ट पर हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

उत्तरकाशी में मुख्यमंत्री पुष्कर ने किया कैंप अफसरों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश

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उत्तरकाशी में नदी के बढ़े जल स्तर व आस-पास के क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए।

धराली उत्तरकाशी में सभी सरकारी एजेंसियां, विभाग और सेना आपसी समन्वय से राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। बीती रात 130 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। बंद रास्तों को खोला जा रहा है और प्रभावितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

हर्षिल, धराली में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। रेस्क्यू टीमों द्वारा आपदा स्थल से 135 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया है, धराली के पास(गंगोत्री की तरफ) से लगभग 100 लोग तथा हर्षिल आर्मी गेट से नीचे की तरफ 35 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी, प्रशांत आर्य एवं पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती सरिता डोबाल द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी और निरीक्षण किया जा रहा है।अतरिक्त कार्यबल को आपदाग्रस्त क्षेत्र में भेजने की क़वायद जारी है।अवरुद्ध हाईवे को सुचारु करने तथा मेजर रोड ब्लॉक वाले स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर कार्य तेजी से जारी है।

धराली, हर्षिल में आपदा स्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है। पुलिस, प्रशासन, फायर, SDRF, NDRF, ITBP, आर्मी सहित सभी दल राहत बचाव कार्यों में जुटे हैं। अतिरिक्त पुलिस व अन्य आपदा राहत टीमें धराली के लिये रवाना हैं। लगातार बारिश व भू-स्खलन से कई जगहों पर गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध होने के कारण टीमों को पहुँचने में समय लग रहा है।

उत्तरकाशी आपदा पर मुख्यमंत्री धामी की सतर्क निगरानी, प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश

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उत्तरकाशी आपदा पर मुख्यमंत्री धामी की सतर्क निगरानी, प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश

देहरादून, 5 अगस्त 2025।उत्तरकाशी जिले में आई भीषण आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को देहरादून के आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपना आंध्र प्रदेश का कार्यक्रम निरस्त कर तत्काल देहरादून लौटते ही आपदा से जुड़े अधिकारियों की आपात बैठक ली और स्थिति की ताजा जानकारी प्राप्त की।

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान धराली और आसपास के इलाकों में हुआ है, जहां सड़कों और मकानों को भारी क्षति पहुंची है। विधायक सुरेश चौहान से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि बेघर हुए लोगों को स्कूलों में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी किनारे बसे इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत शिफ्ट किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी से लेकर भोजन, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम ठीक रहा तो वह बुधवार को स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे।

सड़क संपर्क टूटा, नेटवर्क बाधित

प्रभावित क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है, जिससे संपर्क साधने में कठिनाई हो रही है। नेताला के पास सड़क बंद होने के बावजूद जिला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) सड़कों को खोलने के काम में जुटा हुआ है ताकि जल्द से जल्द राहत कार्य सुचारु हो सके।

सरकार द्वारा राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि आपदा प्रभावितों को जल्द से जल्द मदद मिल सके मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य और एसपी सरिता डोभाल से बात कर राहत बचाव कार्य का फीडबैक लिया है स्कूलों में बारिश को देखते हुए उत्तरकाशी में अवकाश रहेगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जानकारी दी नेताला के पास बंद मार्ग को खोल दिया गया है यहाँ से अफसरों की टीम देर रात को आगे बढ़ गई प्रभवित एरिया में जल्द से जल्द बिजली वयवस्था को सुचारु कर लिया जायेगा।

उत्तरकाशी में जलप्रलय: सेना का बेस कैंप और हेलीपैड तबाह, प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

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उत्तरकाशी में जलप्रलय: सेना का बेस कैंप और हेलीपैड तबाह, प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 5 अगस्त 2025। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव और हर्षिल क्षेत्र में मंगलवार को बादल फटने के बाद भारी तबाही मच गई है। आपदा में न केवल स्थानीय ढांचे प्रभावित हुए हैं, बल्कि सेना का बेस कैंप और हेलीपैड भी पूरी तरह तबाह हो गया है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर्षिल में सेना का कैंप भारी बारिश और मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। इसके पास बहने वाला तेलगाड़ नाला भी उफान पर आ गया, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए गंगोत्री हाईवे भी मलबा आने के कारण बंद हो गया है।

📞 जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर:

धराली और आसपास के क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा के मद्देनज़र जिला प्रशासन, उत्तरकाशी ने निम्न हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिन पर संपर्क कर प्रभावित लोगों से संबंधित जानकारी ली जा सकती है:

  • 01374-222126
  • 01374-222722
  • 9456556431 (DEOC उत्तरकाशी)

प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से तबाही, चार की मौत, कई लापता; पीएम मोदी और गृह मंत्री ने जताया दुख

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उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से तबाही, चार की मौत, कई लापता; पीएम मोदी और गृह मंत्री ने जताया दुख

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 5 अगस्त 2025।मंगलवार दोपहर उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने की भयावह घटना ने तबाही मचा दी। खीरगंगा नदी में आई अचानक बाढ़ ने गांव के निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। दर्जनों होटल और घर मलबे में दब गए, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।

घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य नेताओं ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“उत्तरकाशी की इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। सभी पीड़ितों की कुशलता की कामना करता हूं। मैंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी से बात कर हालात की जानकारी ली है। राज्य सरकार की निगरानी में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। लोगों तक हरसंभव मदद पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जो राज्य से बाहर थे, ने घटना की सूचना मिलते ही अधिकारियों को तुरंत राहत एवं बचाव कार्यों में जुटने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी ने चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। मौके पर डीएम प्रश्नात आर्य और जिला प्रशासन की टीम ने डेरा डाल लिया है। सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और केंद्र सरकार की आपदा प्रबंधन टीमें राहत कार्यों में जुट गई हैं।

धराली गांव में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। प्रभावितों की तलाश और सुरक्षित निकासी के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, राहत-बचाव में जुटी सेना और प्रशासन

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, राहत-बचाव में जुटी सेना और प्रशासन

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 5 अगस्त 2025। उत्तरकाशी जिले के हर्षिल क्षेत्र में मंगलवार को खीरगाड़ क्षेत्र के धाराली गांव में बादल फटने की घटना से भारी तबाही मच गई। तेज बहाव के साथ आया मलबा गांव तक पहुंच गया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और कई ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बादल फटने की सूचना प्राप्त हुई है। पानी के साथ बहुत तेज़ी से मलबा आया है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और आपदा प्रबंधन विभाग राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं।”

उत्तरकाशी पुलिस ने जानकारी दी कि खीरगाड़ का जलस्तर बढ़ने से धराली क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ है। पुलिस, एसडीआरएफ, सेना और अन्य आपदा टीमें मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।

भूस्खलन और बाढ़ के कारण गांव में हालात गंभीर हो गए हैं। आइबेक्स ब्रिगेड के जवानों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया। जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि सेना की टुकड़ी ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया है और अब तक हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सेना एवं स्थानीय प्रशासन संकट की इस घड़ी में हरसंभव सहायता देने के लिए तत्पर हैं।

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, 20 से अधिक होटल-होमस्टे बहे, कई मजदूरों के दबे होने की आशंका

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उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, 20 से अधिक होटल-होमस्टे बहे, कई मजदूरों के दबे होने की आशंका

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), 5 अगस्त 2025। मंगलवार को उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री धाम क्षेत्र के प्रमुख पड़ाव धराली में बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई। खीर गंगा नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के चलते क्षेत्र में 20 से 25 होटल और होमस्टे पूरी तरह तबाह हो गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि, “धराली क्षेत्र में बादल फटने की सूचना मिली है। जलस्तर में तेज़ी से वृद्धि के कारण भारी नुकसान हुआ है। स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और राहत कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं।”

स्थानीय निवासी राजेश पंवार के अनुसार, खीर गंगा के जलग्रहण क्षेत्र में ऊपर की ओर बादल फटने की घटना हुई, जिसके बाद अचानक नदी में उफान आ गया और पूरा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि इस भीषण बाढ़ में 10 से 12 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। क्षेत्र में भारी नुकसान की आशंका के चलते सतर्कता बरती जा रही है। धामी ने बताया कि बचाव और राहत कार्यों के लिए जिला प्रशासन, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा, “हम लोगों को बचाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद प्रदान करेगी।

उत्तराखंड में नए पर्यटन स्थलों का उभार छिपे रत्नों को संवार रही उत्तराखंड सरकार

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उत्तराखंड में नए पर्यटन स्थलों का उभार छिपे रत्नों को संवार रही उत्तराखंड सरकार

देहरादून। विश्व धरोहर फूलों की घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रंग-बिरंगे फूलों की वजह से पर्यटकों को बेहद आकर्षित कर रही है। इस साल यहां अब तक 243 विदेशी पर्यटक आ चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। कुल पर्यटकों की संख्या में भी इस बार उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

जुलाई और अगस्त का महीना फूलों की घाटी के लिए सबसे खास माना जाता है, क्योंकि इसी समय यहां सबसे अधिक किस्मों के फूल खिलते हैं। इस समय घाटी में 300 से ज्यादा प्रजातियों के फूल खिले हुए हैं, जो किसी स्वर्गिक नज़ारे से कम नहीं हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजी ढलानों और हरियाली से घिरी घाटी की सुंदरता देखने लायक है।

छिपे रत्नों को संवार रही उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड, जिसे पहले से ही नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, अब छिपे हुए पर्यटन स्थलों को भी विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य इन अनछुए स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर लाना है ताकि ना केवल पर्यटकों को नए अनुभव मिलें, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो सके।

कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में कई नए पर्यटन स्थल उभरकर सामने आ रहे हैं। यहां होमस्टे कल्चर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर पैदा कर रहा है। यदि इन स्थानों का प्रचार-प्रसार सही ढंग से किया गया, तो यह आने वाले वर्षों में पर्यटन के नए केंद्र बन सकते हैं। फूलों की घाटी जहां पर्यटकों के दिलों को पहले से ही जीत रही है, वहीं उत्तराखंड के अन्य छिपे हुए पर्यटन स्थल भविष्य में राज्य की पहचान और आमदनी दोनों को नया आयाम दे सकते हैं।