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विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल गैरसैण हमेशा याद करेगा विपक्ष आचरण

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विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल गैरसैण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा सत्र विपक्ष ने नैनीताल प्रकरण को लेकर जमकर हंगामा किया, जिसके चलते प्रश्नकाल नहीं हो सका। नेता सदन पुष्कर सिंह धामी जब सदन को संबोधित कर रहे थे, उस समय विपक्ष ने सरकार की बात सुने बिना विरोध शुरू कर दिया। यह विरोध देर रात तक जारी रहा।

विपक्ष ने जिला अधिकारी और एसएसपी को हटाने की मांग को लेकर आक्रोश जताया, जबकि सरकार ने बेतालघाट प्रकरण में पहले ही दो पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी थी। इसके बावजूद विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और प्रदर्शन तेज करता रहा।

हद तो तब हो गई जब विपक्ष ने सदन में बिस्तर तक बिछा लिए और रात भर वहीं रुका। सदन की कार्यवाही से जुड़े दस्तावेजों को फाड़ने और टेबल पलटने जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस तरह के व्यवहार से राज्य की छवि राष्ट्रीय स्तर पर बिहार जैसे राज्यों से तुलना के रूप में की जा रही है, जिसे लेकर आम जनता और जानकार वर्ग में चिंता जताई जा रही है।

गैरसैण जैसे संवेदनशील और प्रतीकात्मक स्थल पर विपक्ष का ऐसा आचरण न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि इससे आम जनता से जुड़े मुद्दे सत्र के पहले दो दिनों में पूरी तरह से हाशिए पर चले गए।
जनता को उम्मीद थी कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि गंभीरता से राज्य के मुद्दे उठाएंगे, लेकिन हंगामे और प्रदर्शन ने लोकतंत्र के इस मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजभवन में स्वल्पाहार कार्यक्रम आयोजित

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजभवन में स्वल्पाहार कार्यक्रम आयोजित स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में एक स्वल्पाहार कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने “संवैधानिक नेतृत्व: प्रेरक अभिव्यक्ति” नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक राजभवन सूचना परिसर द्वारा प्रकाशित की गई है, जिसमें राज्यपाल द्वारा दिए गए विधानसभा सत्रों के अभिभाषणों के साथ-साथ राज्य स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस के भाषणों को संकलित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड सैनिक पुनर्वास संस्था द्वारा तैयार की गई कॉफी टेबल बुक “एक शाम सैनिकों के नाम” का भी लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक में दिनांक 14 जनवरी 2025 को सशस्त्र बल वयोवृद्ध दिवस के अवसर पर राजभवन देहरादून और 11 जून 2025 को राजभवन नैनीताल में आयोजित कार्यक्रमों की गतिविधियों को दस्तावेजीकृत किया गया है। यह पुस्तक “एक शाम सैनिकों के नाम – 2025” शीर्षक से प्रकाशित की गई है।

इस आयोजन में पूर्व महाराष्ट्र राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज सहित कई सांसद, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में किया ध्वजारोहण

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भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं बच्चों को राष्ट्रीय पर्व की शुभकामनाएं दीं।

मुख्य सचिव ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले ज्ञात एवं अज्ञात वीरों को नमन करते हुए कहा कि आज का दिन उन असंख्य बलिदानियों की स्मृति में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है, जिनके त्याग और समर्पण के कारण हमें स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यह लक्ष्य केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि राज्य के सतत प्रयासों और कठिन परिश्रम का प्रतिबिंब है। राज्य ने हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, जिससे हम सशक्त उत्तराखण्ड की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की महिला शक्ति और युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी से उत्तराखण्ड को देश के श्रेष्ठतम राज्यों की श्रेणी में लाना संभव हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अपेक्षा के अनुरूप वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रयासों में उत्तराखण्ड की भूमिका को रेखांकित करते हुए राज्य को मैन्युफैक्चरिंग हब, स्किल हब, आयुष प्रदेश और वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी फसलें, मोटे अनाज और स्थानीय उत्पाद राज्य की आजीविका को मजबूती देने में सक्षम हैं। छोटे और मध्यम किसानों को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार गंभीर प्रयास कर रही है।

प्रशासनिक सुधारों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि सचिवालय और जनपद स्तर से गवर्नेंस रिफॉर्म्स की शुरुआत की जा रही है। साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए कैपेसिटी बिल्डिंग अभियान की आवश्यकता भी रेखांकित की।

मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में परियोजनाओं की ऑनलाइन अनुश्रवण और मूल्यांकन हेतु पीएम गति शक्ति पोर्टल (स्टेट) पर कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत विभिन्न योजनाओं जैसे कैपिटल असिस्टेंस योजना, मिसिंग लिंक योजना, मुख्यमंत्री घोषणाएं, ई-समीक्षा आदि की निगरानी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आवास विभाग का ऑनलाइन एप्लीकेशन सिस्टम भारत सरकार द्वारा “बेस्ट प्रैक्टिस” की श्रेणी में शामिल किया गया है।

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती जनपदों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के 51 गांवों का चयन कर उनके बहुमुखी विकास की योजना बनाई गई है। वहीं, ‘अपुणि सरकार’ पोर्टल को भारत सरकार द्वारा बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में मान्यता मिली है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य द्वारा स्प्रिंग एवं रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य जल स्रोतों का पुनर्जीवन और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही ‘हाउस ऑफ हिमालय’ जैसे ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्य सचिव ने सचिवालय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला संस्थान भी है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ करें, ताकि राज्य और समाज निरंतर प्रगति कर सके।

उन्होंने सभी को आह्वान किया कि वे ईमानदारी, दक्षता और नवाचार की भावना के साथ कार्य करें, जिससे देश के विकास में हर निर्णय और हर प्रयास सकारात्मक भूमिका निभा सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, श्री एल. फैनई, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव, अपर सचिव सहित सचिवालय प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। साथ ही उन्होंने हाल ही में धराली व अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, शोकसंतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि आपदा प्रभावित इलाकों में पुनर्वास कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीदों के सपनों के अनुरूप भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में नवनिर्माण एवं पुनर्निर्माण के कार्य तेज़ी से चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पबद्ध है और आने वाले 25 वर्षों की व्यापक योजनाओं पर कार्य शुरू हो चुका है। जनसहयोग से उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बलवीर रोड स्थित भाजपा कार्यालय में भी ध्वजारोहण किया। इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सहित पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अमरत्व की कथा: हनुमान ही नहीं, ये 8 चिरंजीवी आज भी हैं

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अमरत्व की कथा: हनुमान ही नहीं, ये 8 चिरंजीवी आज भी हैं

जब हम हिन्दू पौराणिक कथाओं में अमरत्व की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में भगवान राम के परम भक्त, बल, विनय और अटूट भक्ति के प्रतीक हनुमान जी का नाम आता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि हनुमान जी अकेले नहीं हैं जिन्हें धरती पर युगों-युगों तक जीवित रहने का वरदान प्राप्त है?

सनातन धर्म की गहराइयों में एक रहस्यमयी अवधारणा है — अष्ट चिरंजीवी। ये आठ ऐसे अमर पात्र हैं जिन्हें किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान, भक्ति और सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए चुना गया है।

इनमें से कोई ऋषि हैं, कोई योद्धा, कोई राजा, तो कोई समाज से तिरस्कृत। लेकिन इन सभी का एक ही उद्देश्य है — उस मूल्य को जीवित रखना जो समय के साथ लुप्त नहीं होना चाहिए।

इनकी कहानियाँ सिर्फ पुरानी नहीं हैं — ये कालचक्र के साथ अब भी साँस ले रही हैं, विशेषकर कलियुग की हलचल में। इन्हें जानना मृत्यु से बचने की कल्पना नहीं है, बल्कि ये समझना है कि ऐसा क्या है जो सदा जीवित रहने योग्य है।

आईए, आपको मिलवाते हैं उन अमर आत्माओं से, जो आज भी हमारे बीच कहीं न कहीं विद्यमान हैं।

अश्वत्थामा: अमरत्व जो वरदान नहीं, श्राप बन गया

गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा महाभारत के महान योद्धाओं में से एक थे। अपने पिता की भाँति वे भी दिव्य अस्त्रों के ज्ञान में पारंगत, साहसी और अपराजेय थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध में उन्होंने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया।

किन्तु जब उन्होंने दुर्योधन को मृत्यु शैया पर देखा, तो उनका क्रोध विकराल रूप ले बैठा। प्रतिशोध की अग्नि में जलते हुए, उन्होंने सोते हुए पांडव पक्ष के वीरों की हत्या कर दी और फिर अपने क्रोध की पराकाष्ठा में अभिमन्यु के गर्भस्थ पुत्र (परीक्षित) पर ब्रह्मास्त्र से प्रहार किया।

यह अधर्म देख भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें श्राप दिया — “तू युगों-युगों तक इस धरती पर भटकता रहेगा — घायल, दुखी और तिरस्कृत।”यह अमरत्व किसी वरदान से नहीं, बल्कि एक भयानक श्राप से कम नहीं था।

अश्वत्थामा की कथा हमें सिखाती है कि शक्ति यदि विवेक और धर्म के बिना हो, तो वह आत्मा का विनाश करती है।अमरत्व केवल तभी सार्थक है जब उसके साथ नीति और करुणा जुड़ी हो — अन्यथा, वह एक अंतहीन पीड़ा बन जाती है।

राजा महाबली — धर्मनिष्ठ असुर राजा

राजा महाबली, असुरों के महान और पराक्रमी सम्राट थे। शक्ति और वैभव के बावजूद वे अत्यंत धर्मपरायण, नम्र और दानशील शासक थे। उनका शासन न्यायप्रिय और प्रजा-हितैषी था, जिससे वे देवताओं के लिए भी चुनौती बन गए। जब उनका प्रभाव स्वर्ग और पृथ्वी के संतुलन को बिगाड़ने लगा, तब विष्णु को इस स्थिति को सँभालने हेतु अवतार लेना पड़ा।

भगवान विष्णु ने वामन नामक एक छोटे ब्राह्मण बटुक का रूप लिया और तीन पग भूमि माँग ली। महाबली ने वचन निभाते हुए स्वयं को ही समर्पित कर दिया — अपनी सारी संपत्ति, भूमि, और अंततः अपना अस्तित्व भी।

विष्णु, जो उन्हें हराने आए थे, महाबली की विनम्रता और धर्मपरायणता से स्वयं ही प्रभावित हो गए। परिणामस्वरूप, उन्होंने महाबली को अमरत्व प्रदान किया और उन्हें पाताललोक के एक विशिष्ट भाग — सुतल लोक — का राजा बना दिया, जिसकी रक्षा स्वयं भगवान विष्णु करते हैं।

राजा महाबली की कथा हमें यह सिखाती है कि अहंकार को दंड से नहीं, बल्कि समर्पण से जीता जाता है।
यह भी सिद्ध करता है कि धर्म और विनम्रता केवल देवताओं का गुण नहीं — एक असुर भी ईश्वरीय कृपा का पात्र बन सकता है।

वेदव्यास — सनातन ज्ञान के अमर संरक्षक

वेदव्यास का नाम आते ही हमारे सामने वह महान ऋषि उभरता है जिसने वेदों का संकलन, महाभारत का लेखन और असंख्य पुराणों की रचना की। उनका जीवन केवल लेखन या संकलन भर नहीं था — यह एक ईश्वरीय प्रयोजन था, आध्यात्मिक ज्ञान को कालचक्र के पार पहुँचाने का कार्य

मान्यता है कि वेदव्यास आज भी हिमालय की निर्जन गुफाओं में निवास करते हैं, जहाँ से वे अब भी संतों और ऋषियों का मार्गदर्शन करते हैं — एक ऐसे अदृश्य आवरण के पीछे से, जो उन्हें सामान्य दृष्टि से ओझल रखता है।

ज्ञान शाश्वत है — और जो उसे धारण करता है, वह भी शाश्वत होता है।
वेदव्यास इस सत्य का प्रतीक हैं कि धर्म और सत्य की रक्षा करना केवल एक युग की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर युग की आवश्यकता है।

उनकी अमरता केवल शरीर की नहीं, चिरंतन सत्य के वाहक के रूप में है।

विभीषण — जिसने धर्म को रिश्तों से ऊपर रखा

विभीषण, रावण के अनुज थे — एक असुर कुल में जन्मे, लेकिन मन, वचन और कर्म से पूर्णतः धर्मनिष्ठ। जब उनके सामने चुनाव आया — रक्त-संबंध बनाम धर्म — तो उन्होंने बिना डरे धर्म का साथ चुना।

राम-रावण युद्ध में उन्होंने अपने ही कुल और भाई के विरुद्ध भगवान श्रीराम का साथ दिया। यह निर्णय आसान नहीं था — समाज से बहिष्कार, परिवार से तिरस्कार — सबकुछ सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय का मार्ग नहीं छोड़ा।

रावण के पतन के पश्चात, विभीषण को लंका का राजा बनाया गया। श्रीराम ने उन्हें दीर्घायु का वरदान दिया ताकि वे लंका में पुनः धर्म की स्थापना कर सकें।

विभीषण हमें सिखाते हैं कि सच्चाई के पक्ष में खड़ा होना, भले ही अकेले क्यों न हो, आत्मा को अमर बना देता है।
उनकी कथा एक गहरा संदेश देती है — सामाजिक तिरस्कार की परवाह किए बिना, धर्म के लिए खड़ा होना ही सच्चा साहस है।

परशुराम — अंतिम युद्ध के लिए प्रतीक्षारत योद्धा ऋषि

परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं — एक ऐसे अवतार जो संन्यासी भी हैं और योद्धा भी। उनका अवतरण उस समय हुआ जब क्षत्रिय वर्ग ने धर्म की सीमाएँ लाँघकर अन्याय और अत्याचार का मार्ग अपना लिया था। परशुराम ने धर्म की पुनर्स्थापना हेतु पृथ्वी को अन्यायी क्षत्रियों से मुक्त किया।

लेकिन धर्म की रक्षा का उनका कार्य केवल हिंसा तक सीमित नहीं रहा। जब न्याय स्थापित हो गया, तब उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और गहन तपस्या में लीन हो गए।

किंतु कथा यहीं समाप्त नहीं होती।

शास्त्रों में वर्णन है कि परशुराम अब भी जीवित हैंअमर। वे हिमालय में तप कर रहे हैं और प्रतीक्षा कर रहे हैं उस दिन की जब भगवान कल्कि, विष्णु के अंतिम अवतार, प्रकट होंगे।
तभी परशुराम अपने संचित अस्त्र-शस्त्र ज्ञान से कल्कि को अंतिम धर्मयुद्ध के लिए तैयार करेंगे — अधर्म के समूल विनाश के लिए।

परशुराम हमें सिखाते हैं कि धर्म के लिए किया गया क्रोध भी अंततः शांति में विलीन होना चाहिए।
सच्चा योद्धा वही है, जो हथियार तब रखता है जब न्याय पूर्ण रूप से स्थापित हो जाए।

मार्कण्डेय — जिसकी भक्ति ने मृत्यु को भी रोक दिया

मार्कण्डेय को जन्म से ही एक शापित भविष्य मिला था — मात्र 16 वर्ष की आयु तक ही उनका जीवन सीमित था। लेकिन उन्होंने इस नियति को स्वीकार करने के बजाय, अपनी संपूर्ण आत्मा से भगवान शिव की आराधना प्रारंभ कर दी।

जब उनकी अंतिम घड़ी आई और यमराज स्वयं उनका प्राण लेने पहुँचे, तब युवा मार्कण्डेय ने पूरी शक्ति से शिवलिंग को आलिंगन कर लिया — न तो भयभीत हुए, न विचलित। यही अटल भक्ति भगवान शिव को प्रसन्न कर गई।

शिव स्वयं प्रकट हुए, और अपने परम भक्त की रक्षा करते हुए यमराज का संहार कर डाला। फलस्वरूप, उन्होंने मार्कण्डेय को चिरयौवन और अमरत्व का वरदान दिया।

मार्कण्डेय की कथा यहीं नहीं थमती।

वह इतने पुण्यशाली थे कि उन्होंने स्वयं प्रलय (सृष्टि का अंत) का दर्शन किया। इस दौरान, भगवान विष्णु ने उन्हें ब्रह्मांड के चक्र — सृष्टि, स्थिति और लय — के रहस्य दिखाए। वे साक्षात सृष्टि के अंत और पुनर्जन्म के साक्षी बने।

मार्कण्डेय अमर भक्ति का प्रतीक हैं। उनकी कथा यह सिखाती है कि शुद्ध और निस्वार्थ भक्ति केवल नियति को नहीं बदल सकती, बल्कि मृत्यु को भी पराजित कर सकती हैजहाँ विश्वास पूर्ण होता है, वहाँ मृत्यु भी रुक जाती है।

कृपाचार्य — कालातीत शिक्षक

कृपाचार्य महाभारत काल के दोनों पक्षों — कौरव और पांडव — के राजकीय आचार्य थे। वे धर्म और नीति की गहरी समझ के लिए विख्यात थे, और युद्ध के दौरान उन्होंने संयम और सूक्ष्म दृष्टि के साथ स्थितियों का मूल्यांकन किया।

भगवानों ने उन्हें कलियुग में भी जीवित रहने का वरदान दिया, ताकि वे इस युग के संकटकाल में भी धर्म के ज्ञान और शिक्षण को बनाए रख सकें। कहा जाता है कि अगले युग में वे सप्तर्षि मंडल के सात महान ऋषियों में से एक होंगे।

कृपाचार्य की शिक्षा हमें यह सिखाती है कि सच्चा ज्ञान प्रतिक्रिया नहीं करता, वह निरीक्षण करता है, धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करता है, और पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाता रहता है।वे एक ऐसे शिक्षक हैं जो समय की सीमाओं से परे रहते हुए, अनवरत ज्ञान का संचार करते रहते हैं।

पंचायत चुनावो के राजनैतिक अर्जुन बने धामी चक्रवयूह नहीं तोड़ पाए दिग्गज

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पंचायत चुनावो के राजनैतिक अर्जुन बने धामी चक्रवयूह नहीं तोड़ पाए दिग्गज देहरादून उत्तराखंड पंचायत चुनाव में बीजेपी ने नामांकन के पहले दिन चार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित कर लिया है पुष्कर सिंह धामी सरकार का राजनैतिक चक्रवयूह कांग्रेस भेद नहीं पाई दिग्गज नेता अपने अपने एरिया में अपनी राजनैतिक जमीं धामी के राजनैतिक कौशल के आगे बिना युद्ध लड़े हथियार डालते नज़र आए है ये भी कहा जा रहा है कांग्रेस के दिग्गज नेता धामी के आगे हथियार डालते नज़र आए है जिसके चलते एक बार भी पंचायत चुनाव के बूते धामी फिर अपने राजनैतिक विरोधियो पर भारी पड़े है

उत्तराखंड की राजनीती के बेताज बादशाह एक बार फिर विजेता बने है पंचायत चुनाव 2027 का सेमीफइनल माना जा रहा था जिस पर राजनैतिक नज़रें टिकी हुई थी अपनों से ग्रह युद्ध लड़ते कांग्रेस बीजेपी इस चुनाव में नज़र आई लेकिन जो जीता नहीं सिकन्दर कहलाता है उत्तराखंड की राजनैतिक सियासत के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनता का दिल ही नहीं जीत रहे बल्कि राष्टीय नेतृत्व का सितारा भी बन गए है मोदी से लेकर अमित शाह कई बार धामी सरकार की तारीफ में कसीदे गढ़ चुके है

विधानसभा चुनाव 2027 को पंचायत चुनाव का सेमीफइनल करार दिया जा रहा था लेकिन चुनाव नतीजा बता रहे है कांग्रेस कई ज़िलों में बीजेपी के समाने हथियार डालती नज़र आई उधम सिंह नगर हो या कोई भी जिला हर जगह बीजेपी ने अपना मजबूत इरादा बता दिया धामी लक्ष्य के आगे कांग्रेस का अभिमन्यु बनना तय है राजनैतिक पंडितो के अनुसार पंचायत चुनावो में कांग्रेस की ऐसी दशा होगी सोचा नहीं था ऐसे में अब आगामी सियासत भरी डगर कांग्रेस के लिए बेहद कठिन नज़र आती है

पंचायत चुनाव में भरी हामी मजबूत हुए पुष्कर सिंह धामी

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पंचायत चुनाव में भरी हामी मजबूत हुए पुष्कर सिंह धामी देहरादून उत्तराखंड पंचायत चुनाव में बीजेपी ने नामांकन के पहले दिन चार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित कर लिया है पुष्कर सिंह धामी सरकार का राजनैतिक चक्रवयूह कांग्रेस भेद नहीं पाई दिग्गज नेता अपने अपने एरिया में अपनी राजनैतिक जमीं धामी के राजनैतिक कौशल के आगे बिना युद्ध लड़े हथियार डालते नज़र आए है ये भी कहा जा रहा है कांग्रेस के दिग्गज नेता धामी के आगे हथियार डालते नज़र आए है जिसके चलते एक बार भी पंचायत चुनाव के बूते धामी फिर अपने राजनैतिक विरोधियो पर भारी पड़े है

हर जिले में बनेगा ‘संस्कृत ग्राम’, मुख्यमंत्री धामी भोगपुर से करेंगे योजना की शुरुआत

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हर जिले में बनेगा ‘संस्कृत ग्राम’, मुख्यमंत्री धामी भोगपुर से करेंगे योजना की शुरुआत

देहरादून — उत्तराखंड सरकार प्रदेश की द्वितीय राजभाषा और देववाणी संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। राज्य के हर जिले में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम विकसित किया गया है, जहां संस्कृत को जनभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समग्र प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को देहरादून के भोगपुर गांव से इस अभिनव योजना का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर प्रदेश के सभी जिलों के संस्कृत ग्राम वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहेंगे। यह योजना उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त सहयोग से संचालित की जा रही है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार संस्कृत भाषा को फिर से उसकी गरिमा दिलाने और जनजीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है।


संस्कृत होगी संवाद और कामकाज की भाषा

आदर्श संस्कृत ग्रामों में न केवल आपसी बातचीत बल्कि दैनिक कार्यों का संचालन भी संस्कृत भाषा में किया जाएगा। इन गांवों में भारतीय जीवन मूल्यों, सनातन संस्कृति और संस्कारों को आत्मसात करते हुए वेद, पुराण और उपनिषदों का पाठ विशेष अवसरों पर किया जाएगा।

इसके साथ ही ये ग्राम नारी सम्मान, चरित्र निर्माण, नशामुक्ति, सद्भावना और अपराध प्रवृत्तियों पर नियंत्रण जैसे सामाजिक सरोकारों को भी संस्कृत के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।

सरकार का उद्देश्य इन संस्कृत ग्रामों के माध्यम से राज्य की संस्कृति, संस्कार, और ज्ञान-विज्ञान की परंपरा को सशक्त बनाना और वैश्विक मंच पर पुनः प्रतिष्ठित करना है।

पैनिक खबरों का जखीरा ढूढते अवसर वीर, धामी सरकार के ग्राउंड जीरो पर बने धृतराष्ट्र

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देहरादून — उत्तराखंड में आई आपदा एक बार फिर उन चेहरों को सामने ले आई है जो हर संकट को केवल टीआरपी और सनसनी फैलाने का जरिया मानते हैं। सोशल मीडिया और बाहरी मीडिया हाउसों की एक जमात, जिन्हें न तो ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना है और न ही स्थानीय लोगों की तकलीफों से, केवल नकारात्मकता फैलाने के उद्देश्य से सक्रिय हो गई है।

हर आपदा की तरह इस बार भी कुछ लोग अवसर की तलाश में सरकार के प्रयासों की अनदेखी कर, केवल अफवाहें फैलाकर खुद को “वीर” सिद्ध करने में जुटे हैं। ये वही लोग हैं जो हर कठिन घड़ी में सरकार पर निशाना साधते हैं, लेकिन खुद कभी ग्राउंड ज़ीरो पर नजर नहीं आते।

इस बीच, धराली क्षेत्र में आई आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार ज़मीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं ग्राउंड जीरो पर मौजूद रहकर राहत कार्यों में जुटी टीमों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं और हर जरूरी निर्देश समय पर दे रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है।

पिछले पांच दिनों से चल रहे राहत-बचाव अभियान में रविवार का दिन विशेष है। खराब मौसम के बावजूद राहत दल मलबा हटाने, रास्ते खोलने और लापता लोगों की तलाश में पूरी तरह जुटा हुआ है। हालांकि अभी तक लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना बहुत कम है, लेकिन प्रशासन हर संभावित प्रयास कर रहा है।

यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष या मीडिया समूह को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं है। बल्कि यह सवाल उठाती है कि क्या केवल डर फैलाना ही खबर है? क्या ग्राउंड पर हो रहे सकारात्मक प्रयासों को दिखाना अब ‘अलोकप्रिय’ हो गया है?

समाज और मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि जहां आलोचना जरूरी हो वहां उसे पूरी ताकत से किया जाए, लेकिन जहां मेहनत और ईमानदारी से कार्य हो रहा हो, वहां भी उसे उतनी ही प्राथमिकता से दिखाया जाए। आपदा के समय केवल पैनिक फैलाना नहीं, समाधान और सहयोग का संदेश देना ही सच्ची पत्रकारिता और नागरिकता है।

केदारनाथ यात्रा चार दिन बाद हुई शुरू

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रुद्रप्रयाग — लगातार हो रही बारिश और केदारनाथ पैदल मार्ग पर पत्थर गिरने की घटनाओं के चलते बीते चार दिनों से रोकी गई केदारनाथ यात्रा को शनिवार से दोबारा शुरू कर दिया गया है। यात्रा की बहाली के साथ ही शनिवार को दो हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए।

पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलधार बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच मुनकटिया क्षेत्र सहित कई स्थानों पर पहाड़ियों से भूस्खलन और भारी बोल्डर गिरने की घटनाएं हो रही थीं। पैदल मार्ग पर भी कई जगह वर्षा के कारण बड़े-बड़े पत्थर गिर रहे थे। इन खतरों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने एहतियातन यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।

शनिवार को सोनप्रयाग में पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही मौसम की स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए रखी। जैसे ही मौसम अनुकूल नजर आया, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यात्रियों को सोनप्रयाग से गौरीकुंड की ओर बढ़ने की अनुमति दी गई। इसके बाद, गौरीकुंड से पैदल मार्ग की स्थिति का आकलन करने के बाद, परिस्थितियां अनुकूल पाए जाने पर यात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए रवाना किया गया।

सोनप्रयाग से करीब दो हजार श्रद्धालु केदारनाथ की यात्रा पर निकले। इस दौरान सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। पुलिस की निगरानी में यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गई।

कोतवाली निरीक्षक राकेंद्र कठैत ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रियों को आगे बढ़ाया गया। गौरीकुंड से भी पैदल मार्ग की सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें केदारनाथ भेजा गया।