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धामी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उपनल कर्मियों की हुई जीत!

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उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से नया अपडेट सामने आया है.

देहरादून: उपनल कर्मचारियों के मामले में धामी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिसके बाद उपनल कर्मचारियों को नियमित किए जाने पर सरकार को अब जल्द फैसला लेना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही इन कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए नियमावली बनाई जाने के आदेश कर चुका है, जबकि ऐसा नहीं होने की स्थिति में उपनल कर्मी अवमानना याचिका लगा चुके हैं.

सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज: उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से नया अपडेट सामने आया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने उपनल कर्मियों के मामले पर सरकार की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है. इसके बाद पहले से ही दबाव झेल रही धामी सरकार अब उपनल कर्मियों को नियमित किए जाने के मामले में बैकफुट पर दिखाई देने लगी है.

उपनल कर्मचारी पिछले कई दिनों से सड़कों पर है और नियमितीकरण की मांग के साथ उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. राज्य स्थापना दिवस यानी 9 नवंबर के एक दिन बाद ही उपनल कर्मचारी सड़कों पर उतर आए थे. उधर सरकार इस मामले में न्यायालय से कुछ राहत की उम्मीद कर रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

खास बात यह है कि हाईकोर्ट काफी पहले ही सरकार को समान कार्य के बदले समान वेतन दिए जाने के निर्देश दे चुका है. साथ ही ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए भी नियमावली बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं. हालांकि इन आदेशों के बावजूद भी राज्य सरकार ने उपनल कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय न्यायालय का रुख करना ही उचित समझा था. शायद यही कारण था कि सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

राज्य सरकार इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में झटका खा चुकी है. अब एक बार फिर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से निराशा ही हाथ लगी है. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी राज्य सरकार ने इस पर फिर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी.

बड़ी बात यह है कि अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को भी खारिज कर दिया है. बड़ी बात यह है कि इससे पहले भी विनोद कवि वर्सेस यूपीसीएल मामले में हाईकोर्ट ने समान काम समान वेतन लागू करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यूपीसीएल में पांच कर्मियों को इसका लाभ दिया जा रहा है.

इस मामले में विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कवि कहते हैं कि सरकार को हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में नियमितीकरण का जल्द फैसला करना चाहिए और पिछले कई सालों से लगातार विभागों में सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए.

खास बात यह है कि उपनल कर्मचारी सड़कों पर भी डटे हुए हैं और हाल ही में कैबिनेट में इन कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर मंत्रिमंडलीय समिति बनाए जाने के फैसले के बाद भी यह कर्मचारी नहीं माने हैं. इनका कहना है कि सरकार के इस तरह के निर्णय उनके विरोध को नहीं रोक सकते. अब एक मात्र तरीका यह है कि सरकार कर्मचारियों को नियमित करने की कोई ठोस नीति लागू करें.

नानकमत्ता: 2027 के लिए बदलता राजनीतिक समीकरण नानकमत्ता में कितना ‘प्रेम धुन

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नानकमत्ता: 2027 के लिए बदलता राजनीतिक समीकरण

नानकमत्ता की राजनीति 2027 के चुनाव से पहले नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है।
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम टुरना, जो कांग्रेस छोड़कर पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं, फिलहाल भाजपा टिकट के मजबूत दावेदार बनकर उभर रहे हैं। उन्हें पार्टी में लाने वाले वरिष्ठ नेता भी आगामी विधानसभा चुनाव में उनका टिकट सुनिश्चित कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

दूसरी ओर, 2022 में भाजपा प्रत्याशी प्रेम सिंह राणा अपनी सीट बचाने में असफल रहे थे। उसी चुनाव में, नानकमत्ता से सटी खटीमा सीट पर भी पुष्कर सिंह धामी को हार का सामना करना पड़ा था। दोनों ही सीटों पर थारू मतदाताओं का रुख बदल जाना भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया था।
राणा इस समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल नहीं हो सके थे — यही हार का मुख्य कारण बताया गया।

अब बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में नानकमत्ता सीट को भाजपा के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
ऐसे में पार्टी के भीतर चर्चा है कि नए “राणा चेहरा” या नया नेतृत्व प्रस्तुत करने से भाजपा को यहां नई ऊर्जा और उम्मीद मिल सकती है।

नानकमत्ता में चुनावी सरगर्मी बढ़ने लगी है।
पिछले चुनाव में हारने के बावजूद प्रेम सिंह राणा इस बार जीत के लिए पूरी शक्ति से जुटे हैं। क्षेत्र में “घर–घर राणा की दस्तक” अभियान तेज किया गया है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा उन्हें दोबारा टिकट देगी?
क्योंकि पार्टी के अंदर से ही एक पूर्व मजबूत दावेदार भी मैदान में पूरी सक्रियता के साथ उतर चुके हैं, जो टिकट के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं।

नानकमत्ता में दिलचस्प बात यह है कि

लोग आज भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को स्थानीय विधायक से ज्यादा पसंद करते हैं,लेकिन इसके बावजूद इस सीट पर अब तक राणा के अलावा कोई भी विधायक नहीं जीत पाया है,क्योंकि यहां थारू मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जाती है। 2027 के चुनाव में नानकमत्ता कितना ‘प्रेम धुन’ में रमेगा — यह देखने वाला होगा।

योग का सूर्य विश्व पटल पर दीदिप्तिमान: रेखा आर्या

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हल्द्वानी में शांति योग धाम चैम्पियनशिप का शुभारंभ

मंत्री ने कहा – योग और रोग विलोम शब्द, फिट उत्तराखंड मिशन की आधारशिला योग

हल्द्वानी। कैबिनेट मंत्री एवं उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को ऊंचा पुल, अमृत आश्रम क्षेत्र में आयोजित शांति योग धाम चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के बाद आज योग का सूर्य एशिया से लेकर अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक दीदिप्तिमान हो रहा है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि योग अब भारत की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ विश्व का स्वास्थ्य संदेश बन चुका है।

मंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों में पहली बार योगासन को एक खेल स्पर्धा के रूप में शामिल कराना उत्तराखंड और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी योगासन एक खेल विधा के रूप में सम्मिलित होगा।

रेखा आर्या ने कहा कि योग और रोग दोनों विलोम अर्थ वाले शब्द हैं। जहां योग है, वहां रोग नहीं हो सकता। इसलिए फिट इंडिया और फिट उत्तराखंड अभियान की आधारशिला भी योग ही है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें ताकि समाज स्वस्थ और सशक्त बने।

इस अवसर पर हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा, शांति योगधाम संस्था के संस्थापक दर्शन सिंह बोरा, विजयलक्ष्मी बोरा, भुवन भट्ट, पलक चौरसिया, खुशी सोनकर, प्रेम बोरा, महेंद्र रावत, दीपक पांडे, मुकेश रघुवंशी, आशीष शर्मा और ममता पंत सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

Dehradun: सीमा निगरानी को लेकर गृह सचिव ने समीक्षा की

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देहरादून: उत्तराखंड शासन के गृह सचिव शैलेश बगौली ने उत्तराखंड के सभी क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और सीमा क्षेत्रों में सघन चेकिंग करने के साथ ही विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्यवासियों से भी सभी सुरक्षा मानकों का पालन करने का आग्रह भी किया।

शुक्रवार को सचिवालय में गृह सचिव शैलेश बगौली ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की। इस दौरान गृह सचिव ने कहा कि राज्यों के बॉर्डर पर सघन चेकिंग अभियान लगातार जारी रहे। साथ ही इंटरनेशनल बॉर्डर पर विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने राज्य के सभी बॉर्डर क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील स्थानों परएएनपीआर कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए,जिससे संदिग्ध वाहनों की ट्रैकिंग और निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

गृह सचिव ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर चेकिंग अभियान में तेजी लाने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। शहरों और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की संपूर्ण व्यवस्था और उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

गृह सचिव ने कहा कि राज्यवासियों और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया कि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक मैनपावर,टेक्नोलॉजी या अन्य संसाधनों की आवश्यकता होने पर तुरंत मुख्यालय और शासन को अवगत करवाएं। गृह सचिव ने सभी सरकारी दफ्तरों के आसपास क्षेत्र को सीसीटीवी से आच्छादित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने राज्यवासियों से भी सभी सुरक्षा मानकों का भी पालन करने का आग्रह किया।

इस दौरान बैठक में एडीजी अभिनव कुमार,वी.मुर्गेशन सभी जिलों से जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक (वर्चुअल माध्यम) से उपस्थित रहे।

उत्तराखंड की पहली ग्रीन बिल्डिंग को लेकर पॉलिटिकल घमासान, दिग्गज नेताओं ने उठाये सवाल, जानिये क्या कहा

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उत्तराखंड की पहली ग्रीन बिल्डिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब बीजेपी कांग्रेस के नेता खुलकर इस बारे में सवाल कर रहे हैं.

देहरादून: राजधानी देहरादून शहर के बीचों-बीच बना रही राज्य की पहली ग्रीन बिल्डिंग को लेकर न केवल कांग्रेस बल्कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी अब सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं. ग्रीन बिल्डिंग को लेकर हरीश रावत ने राज्य और केंद्र सरकार के साथ-साथ कार्यदाई संस्था पर सवाल खड़े किए हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ग्रीन बिल्डिंग को लेकर सवाल खड़े किये हैं.

देहरादून के पुराने रोडवेज डिपो की जमीन पर बन रही ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण अक्टूबर महीने में पूरा होना था. 206 करोड़ रुपए की लागत से बन रही ग्रीन बिल्डिंग में एक ही छत के नीचे सभी विभागों को बैठेंगे. त्रिवेंद्र सरकार की इस घोषणा को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया. साथ ही काम में तेजी लाने के निर्देश दिये. ग्रीन बिल्डिंग में 70% पैसा केंद्र सरकार का लगा. जबकि 30% पैसा राज्य सरकार को देना है. हैरानी की बात यह है कि सालों बीत जाने के बाद भी अभी तक बिल्डिंग साइट पर खुदाई का काम ही चल रहा है. इसके साथ ही इससे विवाद भी जुड़ गये हैं.

बीते हफ्ते खनन विभाग ने खुदाई कर रही एक पोकलैंड मशीन को सीज किया. साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया. खनन विभाग ने कहा अनियमिताओं और बिना परमिशन के यहां कुछ गतिविधियां चल रही थी. पहले भी इस बिल्डिंग को लेकर जिला अधिकारी स्तर पर कार्रवाई की गई है. जिसके कारण ग्रीन बिल्डिंग की कार्यदायी संस्था सवालों के घेरे में है.

हरीश रावत ने उठाये सवाल: कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इस बिल्डिंग को लेकर सरकार से सवाल किए हैं. हरीश रावत ने कहा उन्हें जानकारी मिल रही है कि जो केंद्र सरकार से पैसा आया हुआ है अब वह पैसा वापस जा रहा है. बिल्डिंग निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है. हरीश रावत ने कहा है कि जिस तरह से भ्रष्टाचार की खबरें लगातार ग्रीन बिल्डिंग को बनाने के दौरान आ रही हैं वो हैरान कर रही हैं. उन्होंने कहा आखिरकार शहर के बीचों-बीच इस तरह के कार्य कैसे हो रहे हैं? हरीश रावत ने कहा ग्रीन बिल्डिंग को लेकर जो भी कुछ हो रहा है वह अब बेहद चिंताजनक है. राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.

हरीश रावत के साथ ही उत्तराखंड कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष गणेष गोदियाल ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल खड़े किये हैं. गणेश गोदियाल ने कहा अगर शहर के बीचों-बीच बना रही बिल्डिंग का यह हाल है तो आप उन प्रोजेक्ट्स, उन स्कूलों, उन अस्पतालों या अन्य बिल्डिंगों का अंदाजा लगा सकते हैं जो पहाड़ों में बन रहे हैं. उन्होंने कहा राज्य सरकार को राजधानी में बन रहे इस प्रोजेक्ट पर कार्रवाई कर ठोस संदेश देना चाहिए.

उधर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ग्रीन बिल्डिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं. हरीश रावत के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा किसी भी कार्य का जब शिलान्यास होता है तो उसके पूरे होने का समय भी निर्धारित होता है. अगर समय से कोई काम नहीं होता तो कार्यदायी संस्था पर जुर्माना बनता है. इसके साथ ही सरकार को लेटलतीफी का कारण देखना चाहिए. इसके कारण कॉस्ट बढ़ रही है. यह राज्य के लिए सही नहीं है.

उत्तराखंड: प्रो. लोहनी को मिला ‘सारस्वत सम्मान’, राज्य का मान बढ़ा

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हल्द्वानी: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का शुभारंभ शुक्रवार को भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। देशभर से पहुंचे हिंदी प्राध्यापक, शोधार्थी और साहित्यकारों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी साहित्य ने स्वाधीनता संग्राम की अग्नि को शब्दों और विचारों की शक्ति से सदैव प्रज्वलित रखा है। यह समाज को नई दिशा देने वाला सशक्त माध्यम है। उन्होंने साहित्य की ऐतिहासिक भूमिका और उसकी सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।

इसी दौरान उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीनचंद्र लोहनी को हिंदी भाषा और साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘सारस्वत सम्मान’ प्रदान किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में क्षेत्रीय कवियों और स्थानीय साहित्यकारों की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यही आवाज़ें हिंदी साहित्य को जड़ों से जोड़ती हैं।

कार्यक्रम में देशभर से आए प्रतिभागियों ने हिंदी की समृद्ध परंपरा, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विमर्श किया।

उत्तराखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 15 करोड़ के घोटाले का आरोपी दुबई से पकड़ा

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उत्तराखंड पुलिस ने 15 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के आरोपी को दुबई से पकड़ा, इंटरपोल ने किया रेड कार्नर नोटिस जारी।

उत्तराखंड पुलिस की सीबीसीआईडी ​​टीम ने यूएई से एक वांछित अपराधी को प्रत्यर्पित करवाया। पिथौरागढ़ निवासी जगदीश पुनेठा नाम का आरोपी, 2021 में अपने साथियों के साथ निवेश पर आकर्षक रिटर्न के बहाने कई लोगों को ठगने के आरोप में धोखाधड़ी के एक मामले में दर्ज होने के बाद से फरार था। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज आरोपी ने दुबई भागने से पहले कथित तौर पर लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की थी। राज्य पुलिस ने उसे पकड़ने के अपने प्रयासों में, उसके खिलाफ इंटरपोल द्वारा एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया। इसके बाद उसे यूएई की एजेंसियों ने गुरुवार को दुबई में सीबीसीआईडी ​​की एक टीम को सौंपने से पहले पकड़ लिया।

Extradition करने वाली टीम में रूद्रपुर में सीओ रह चुके मनोज ठाकुर, इंस्पेक्टर ललित मोहन जोशी और इंस्पेक्टर सतीश शर्मा रहे शामिल!

रुद्रपुर: नेपाल जा रही कार किच्छा में दुर्घटनाग्रस्त, महिला की मौत व तीन घायल

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दिल्ली से नेपाल जा रही कार किच्छा में दुर्घटनाग्रस्त, एक महिला की मौत, तीन घायल

उधमसिंहनगर जनपद के किच्छा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह लगभग 4:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से नेपाल जा रही डिज़ायर कार किच्छा में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में सवार नेपाल मूल की महिला जयंती की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे में प्रीति भट्ट, करन सिंह और सुवास गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को स्थानीय लोगों और पुलिस की सहायता से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली और क्षतिग्रस्त कार को कब्जे में लेकर घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार नेपाल की ओर जा रही थी तभी किच्छा क्षेत्र में यह हादसा हुआ।

उत्तराखंड: धामी सरकार ने एक और अवैध मजार को ढहाया

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उत्तराखंड : हरिद्वार जिले में एक और अवैध मजार धामी सरकार ने ध्वस्त की

सरकारी भूमि पर अवैध संरचना में कोई नहीं मिले अवशेष

हरिद्वार: जिले की लक्सर तहसील में सुल्तानपुर के पास गांव नेहादपुर सुठारी धामी सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए ग्राम समाज की जमीन पर बनी अवैध मजार ध्वस्त कर दिया।सरकारी भूमि पर बनी इस अवैध संरचना को दो सप्ताह पूर्व नोटिस दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक एसडीएम सौरभ अस्वल की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम और भारी पुलिस फ़ोर्स तैनात कर ये कारवाई की गई और पहले पूरे क्षेत्र को किया गया भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवानों द्वारा सील किया ।

उल्लेखनीय है कि सनातन जिले माने जाते हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर इस तरह की अवैध मजारे बना कर अवैध कब्जे किए जाने के मामले प्रशासनिक सर्वे में सामने आए थे ।

आज तड़के मजार को प्रशासन की टीम ने मौके पर बुलडोज़र चलाकर पूरी तरह ध्वस्त किया,
डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि अवैध कब्जे पर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है जिसका अनुपालन कराया जा रहा है ।उन्होंने बताया कि दो सप्ताह पूर्व उक्त संरचना के वैध दस्तावेजों के बारे में खादिम को नोटिस दिया गया था,उनके द्वारा कोई भूमि दस्तावेज नहीं दिखाए जाने पर आज कार्रवाई की गई है ,कार्रवाई के दौरान किसी भी विवाद से बचने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके में कड़ा पहरा लगाया गया।

धामी सरकार की स्पष्ट नीति
सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और कब्जों को लेकर स्पष्ट नीति है कि किसी भी सूरत में अवैध मजार अवैध निर्माण अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार अभी तक 9500 एकड़ सरकारी जमीन अवैध कब्जा मुक्त करवा चुकी है साथ ही 560 से अधिक अवैध मजारों को भी ध्वस्त कर चुकी है।

अब 15 दिन के भीतर करना होगा शैक्षणिक रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण, ये मिलेगा फायदा

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सरकार शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटी है. इसी क्रम में शैक्षणिक रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण पर डेडलाइन दी गई है.

देहरादून: उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण पर डेडलाइन दी गई है. इस दौरान प्रदेश में उच्च शिक्षा के अंतर्गत छात्रों के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिलॉकर में अपलोड करना होगा. राज्य में साल 2021 से 2024 तक के सभी रिकॉर्ड्स विभिन्न प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश जारी हुए हैं.

प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों के शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण अब बड़ी चुनौती बन गया है. दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण को लेकर समय सीमा तय की है. जिसके तहत 15 दिनों के भीतर विश्वविद्यालयों को यह काम पूरा करना होगा.

राज्य सरकार ने सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शैक्षणिक वर्ष 2021 से 2024 तक के समस्त शैक्षणिक दस्तावेज, क्रेडिट रिकॉर्ड तथा छात्रों की अपार आईडी से जुड़ा डेटा डिजीलॉकर, नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी और अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें. इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता दे रही है. इसी क्रम में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्रों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, क्रेडिट डेटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एनएडी और एबीसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है. इससे छात्रों को किसी भी समय, कहीं भी अपने शैक्षणिक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता, सुगमता और समय की बचत सुनिश्चित होगी.

UGC ने विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिलॉकर पर अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 नवम्बर 2025 कर दी है. इसलिए प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस समय सीमा का पालन करने और साल 2021 से 2024 तक के सभी छात्रों के दस्तावेज, अपार आईडी डेटा और क्रेडिट रिकॉर्ड तत्काल एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

उधर 19 नवम्बर 2025 को दून विश्वविद्यालय में एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर डेटा अपलोडिंग की प्रगति की समीक्षा के लिए कार्यशाला एवं बैठक आयोजित की जाएगी. इसमें सभी विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों, नोडल अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों को अद्यतन रिपोर्ट व आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है.

केन्द्र सरकार की एनएडी-एबीसी प्रणाली न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक पहचान उपलब्ध कराती है, बल्कि क्रेडिट ट्रांसफर को भी सरल बनाती है. यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.