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स्वर्गाश्रम क्षेत्र से गंगा में डूबे आदित्य का बैराज में मिला शव

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दिनांक 30.10.2025 को थाना मुनिकीरेती क्षेत्रांतर्गत सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम जौंक, स्वर्गाश्रम निवासी 13 वर्षीय बालक आदित्य रतूड़ी, पुत्र दिनेश प्रसाद रतूड़ी, अपने छोटे भाई विनय (आयु 11 वर्ष), किरायेदार कौशल (आयु 22 वर्ष) तथा पड़ोसी कर्मवीर (आयु 23 वर्ष) के साथ शाम के समय भागीरथी धाम के पास गंगा नदी किनारे घूमने गया था।

घूमने के दौरान आदित्य, विनय एवं कौशल गंगा नदी में कुछ दूरी तक आगे बढ़ गए। अचानक तीनों तेज धारा में बहने लगे। इस बीच कर्मवीर ने उन्हें बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई। उसने विनय और कौशल को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, किंतु आदित्य गंगा की तेज धारा में बह गया।

घटना की सूचना पर पुलिस एवं एसडीआरएफ टीमों को तत्काल सर्च एवं रेस्क्यू कार्य हेतु लगाया गया। पुलिस द्वारा तीन टीमें गठित की गईं। इंस्पेक्टर (एसडीआरएफ) कविंद्र सजवाण के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम डीप डाइविंग उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुँची और सर्च अभियान प्रारंभ किया।
एसडीआरएफ टीम द्वारा लगातार कई दिनों से आधुनिक उपकरणों की सहायता से सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया।
आज दिनांक 04.11.2025 को सर्चिंग के दौरान बालक आदित्य रतूड़ी का शव पशुलोक बैराज क्षेत्र से बरामद किया गया।

शव की पहचान परिजनों द्वारा की गई है। आवश्यक पंचायतनामा एवं पोस्टमार्टम कार्यवाही हेतु शव को जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।

श्रीनगर वैकुंठ चतुर्दशी मेले का आगाज, सीएम ने किया वर्चअल शुभारंभ, डीएम ने की कमलेश्वर मंदिर में पूजा

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सीएम धामी ने पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर वैकुंठ चतुर्दशी मेले का वर्चुअल शुभारंभ किया.

श्रीनगर: पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में पौराणिक एवं प्रसिद्ध वैकुंठ चतुर्दशी मेले का मंगलवार को रंगारंग आगाज हुआ. इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से मेले का शुभारंभ किया. आवास विकास मैदान में आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्रीनगर का यह मेला उत्तराखंड की प्राचीन परंपरा, आस्था और लोकसंस्कृति का जीवंत उदाहरण है. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने का भी माध्यम बन चुका है.

सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सतत प्रयासरत है. बदरीनाथ और केदारनाथ मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण कार्य हों या ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण कार्य, सभी योजनाएं तीव्र गति से प्रगति पर हैं. श्रीनगर क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं. इसमें रोडवेज बस स्टेशन में पार्किंग का निर्माण, अलकनंदा नदी के तट पर गंगा संस्कृति केंद्र की स्थापना और श्रीनगर पालिका को नगर निगम का दर्जा देकर नगर के पार्कों, पार्किंग स्थलों और सड़कों का सुधार कार्य शामिल है.

उन्होंने कहा कि बिलकेदार और बेलकंडी क्षेत्र में नई टाउनशिप विकसित करने का कार्य भी प्रगति पर है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्रीनगर गढ़वाल शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है. वैकुंठ चतुर्दशी मेला यहां की ऐतिहासिक पहचान है, जिसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. इस मेले में हर वर्ग की सहभागिता, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाती है. राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे पारंपरिक मेलों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिले. उन्होंने कहा कि विकास प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंच रही है, जिससे जनसहभागिता और पारदर्शिता दोनों को बल मिलेगा.

डीएम ने की कमलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना: पौड़ी जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने वैकुंठ चतुर्दशी पर्व की शुकामनाएं देते हुए भगवान कमलेश्वर महादेव को नमन किया. कार्यक्रम के बाद डीएम और मेयर ने कमलेश्वर महादेव मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की और भगवान कमलेश्वर से लोककल्याण और समृद्धि की कामना की.

इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक मेला समर्पण, आस्था और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि यह मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन न रहकर सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. विभिन्न जिलों से व्यापारी, शिल्पकार और स्वयं सहायता समूह इसमें भाग ले रहे हैं. मेले में कई नई गतिविधियां जोड़ी गई हैं, जिनमें बेबी शो, फन गेम्स, पारंपरिक परिधानों की प्रदर्शनी, महिला स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं और विभिन्न विषयों पर गोष्ठियों का आयोजन शामिल है, जिससे कार्यक्रम और अधिक आकर्षक बना है.

हरिद्वार में सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजार ध्वस्त अब तक 550 से अधिक अवैध संरचनाओं पर चला धामी सरकार का बुलडोजर

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हरिद्वार के पावर हाउस पथरी क्षेत्र में सरकारी सिंचाई विभाग की भूमि पर बनी अवैध मजार को आज धामी सरकार के बुलडोजर ने ध्वस्त कर दिया।

कारवाई से पूर्व अवैध रूप से बनी संरचना को नोटिस दिया गया था। नोटिस की मियाद पूरी होने के एक सप्ताह के बाद सिंचाई विभाग और नगर प्रशासन की टीम ने जाकर इसे ध्वस्त कर दिया।

हरिद्वार जिले में एक षड्यंत्र के तहत सरकारी भूमि पर दर्जनों की संख्या में अवैध मजारें बना दी गई हैं जिन्हें प्रशासन द्वारा नोटिस देकर हटाने की कारवाई की जा रही है।

डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी इस संरचना की ध्वस्तीकरण की कारवाई में नीचे कोई अवशेष नहीं मिला।

उत्तराखंड में धामी सरकार अभी तक 550 से अधिक अवैध मजारों को ध्वस्त कर चुकी है।

चंपावत में बड़ा हादसा, गहरी खाई में गिरी कार, 2 लोगों की दर्दनाक मौत एक घायल

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चंपावत जिले के लोहाघाट के डूंगरा बोरा इलाके में कार खाई में गिरी, दर्दनाक सड़क हादसे में दो की हुई मौत एक अन्य घायल.

लोहाघाट: चंपावत जिले में मंगलवार 4 नवंबर को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ. डूंगरा बोरा से लोहाघाट को आ रही कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई. घटना में दो लोगों की मौत हो गई जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया. घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने घटना स्थल पर खाई में उतर रेस्क्यू अभियान चलाया.

घटना के मुताबिक, चंपावत जिले के लोहाघाट विकासखंड के सीमांत क्षेत्र डूंगरा बोरा में मंगलवार सुबह करीब 9 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई. दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है. ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया. सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोहाघाट विकास खंड के ग्राम डूंगराबोरा निवासी मुकेश कुमार पुत्र फकीर राम मंगलवार सुबह अपनी टैक्सी वैगन आर UK03 TA/2479 से लोहाघाट की ओर आ रहे थे. कार में सवार मनीषा पुत्री हजारी राम और विक्रम राम पुत्र सुरेश राम सवार थे.

बताया गया कि डूंगरा बोरा के पास पहुंचते ही वाहन अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे में चालक मुकेश कुमार और मनीषा की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि विक्रम राम गंभीर रूप से घायल हो गए. घायल विक्रम कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह खाई से निकलकर सड़क पर पहुंचे और ग्रामीणों को हादसे की जानकारी दी. सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस और प्रशासन की सहायता से रेस्क्यू कार्य में जुट गए. पुलिस ने दोनों शवों को खाई से निकालकर पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है.

उधर सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार लोहाघाट जगदीश सिंह नेगी के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. तहसीलदार नेगी ने बताया दुर्घटना में मुकेश कुमार उम्र 28 वर्ष पुत्र फकीर राम निवासी डूंगरा बोरा और मनीषा उम्र 22 वर्ष पुत्री हजारी राम की मौके पर मौत हो गई है. जबकि विक्रम राम उम्र 24 वर्षी गंभीर रूप से घायल हो गए. जिन्हें जिला चिकित्सालय चंपावत उपचार हेतु भेज दिया गया है.

तहसीलदार नेगी ने बताया दोनों शवों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर डूंगरा बोरा में पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं. फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है, जांच जारी है. दुर्घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है.

मुख्यमंत्री ने काशीपुर में राज्य स्तरीय शहरी विकास सम्मेलन का किया शुभारम्भ

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उत्तराखण्ड के नगरों में स्वच्छता और बुनियादी ढाँचे को मिला नया आयाम
 
मुख्यमंत्री ने 46 करोड़ 24 लाख के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-शिलान्यास
 
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड की रजत जयंती वर्ष समारोह की श्रृंखला में काशीपुर में मंगलवार को राज्य स्तरीय शहरी विकास सम्मेलन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने 46 करोड़ 24 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया तथा दिव्यांग सशक्तिकरण कौशल विकास वाहन व नगर निगम काशीपुर के 14 कूड़ा एकत्रित करने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में, जब हमारे शहर अपने स्वरूप में ढल रहे थे, तब हमारे निकायों के सामने बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ आवश्यक संसाधनों का भी अभाव हुआ करता था। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने भी विकास कार्यों की गति को अत्यधिक प्रभावित किया। परंतु इन 25 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा में हमारे राज्य ने अनेकों चुनौतियों का सामना करते हुए विकास, समृद्धि और सुशासन के नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी राज्य की आत्मा उसके गाँवों में बसती है तो शहरों में हमारे नागरिकों के सपने और आकांक्षाएँ आकार लेते हैं। इसी सोच के साथ हमने शहरी विकास को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है। आज हमारे नगर स्वच्छता, सड़क व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड का नगरीय स्वरूप तेजी से बदला है। वर्ष 2001 में जहाँ राज्य की शहरी जनसंख्या लगभग 16 प्रतिशत थी, वहीं आज यह बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। यही नहीं, राज्य गठन के समय राज्य में केवल 63 स्थानीय निकाय थे और देहरादून एकमात्र नगर निगम हुआ करता था, लेकिन आज राज्य में 107 नगरीय निकाय और 11 नगर निगम शहरों के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय शहरी विकास विभाग का बजट जहाँ केवल 55 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 13 सौ करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है। बीते 25 वर्षों में हमारे शहरों ने न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अनेक अवसर भी सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के सिद्धांत पर चलते हुए भारत को विकास और समृद्धि की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से आज देश के लाखों शहरों, कस्बों और नगरों में साफ-सफाई की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। अमृत योजना के द्वारा शहरी बुनियादी ढाँचे जैसे जल आपूर्ति, सीवरेज और हरित स्थानों को सशक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के माध्यम से शहरी विकास को तकनीक और नागरिक सुविधा के साथ जोड़ते हुए एक आदर्श नगर विकास का मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों गरीब परिवारों को अपने खुद के पक्के घर प्राप्त हुए हैं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जहाँ एक ओर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक नगर में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, वहीं स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, खुले में शौच मुक्त अभियान और लीगेसी वेस्ट प्रबंधन जैसी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखण्ड के प्रत्येक नागरिक को देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में पहली बार साढ़े 82 करोड़ रुपये की लागत से 52 स्थानीय निकायों में 115 अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
 
माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि काशीपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण भी किया जा रहा है। इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 1100 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक हब परियोजना एवं 100 करोड़ रुपये की लागत से अरोमा पार्क परियोजना भी संचालित की जा रही है।
 
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर काशीपुर दीपक बाली, अन्य जनप्रतिनिधि, सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किए बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन, सुरक्षा के चलते कैंची धाम मंदिर रहा बंद

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नैनीताल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार सुबह बाबा नीब करौरी महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर में दर्शन किए। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से बंद रखा।

राष्ट्रपति के दर्शन के बाद मंदिर को पुनः भक्तों के लिए खोल दिया गया। उनके आगमन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आस-पास के इलाकों में पुलिस बल की कड़ी निगरानी रही, वहीं श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए थोड़ी देर इंतज़ार करना पड़ा।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति मुर्मू अपने उत्तराखंड दौरे के तहत आज कैंची धाम पहुंचीं और कुछ देर ध्यान लगाया। इसके बाद वे कुमाऊं विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी।

राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। बाबा नीब करौरी महाराज के भक्तों का मानना है कि राष्ट्रपति का आगमन कैंची धाम के लिए एक शुभ संकेत है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मां नयना देवी मंदिर में की पूजा, राष्ट्रहित का मांगा आशीर्वाद

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को अपने नैनीताल प्रवास के दौरान मां नयना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और राष्ट्र की सुख-शांति एवं खुशहाली की कामना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को अपने नैनीताल प्रवास के दौरान मां नयना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और राष्ट्र की सुख-शांति एवं खुशहाली की कामना की। मंदिर पहुंचने पर राष्ट्रपति मुर्मू का मंदिर समिति के सदस्यों ने पारंपरिक रूप से पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत व अभिनंदन किया।

इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

 

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु का नैनीताल दौरा: प्रेसीडेंट का आज ये है शेड्यूल, नयना देवी मंदिर से शुरुआत फिर कैंची धाम

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज नैनीताल में हैं। वे नयना देवी मंदिर और कैंची धाम के दर्शन करेंगी। उन्हें कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेना है, जहां मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा और डिग्रियाँ प्रदान की जाएंगी। इस दौरान नैनीताल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है।

नैनीताल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को नयना देवी मंदिर के दर्शन के बाद बाबा नीब करौरी स्थापित कैंची धाम के दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति के नयना देवी मंदिर दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस से सुबह से ही सुरक्षा के चाक चौबंद व्यवस्था की है। पैदल आने जाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। मंदिर के आसपास भारी पुलिस फोर्स तैनात हैं।

नयना देवी मंदिर से कार्यक्रम की शुरुआत

  • राष्ट्रपति मुर्मु के नैनीताल दौरे के दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत मां नयना देवी मंदिर दर्शन के साथ होगी। वह 8 बजकर 50 मिनट पर मां नयना देवी मंदिर पहुंचेंगी।
  • राष्ट्रपति इसके बाद राजभवन, नैनीताल के मुख्य द्वार का शिलान्यास समारोह में प्रतिभाग करने के पश्चात नीम करोरी बाबा आश्रम, कैंची धाम के लिए प्रस्थान करेंगी
  • सुबह 10:05 से 10:35 तक नीब करौरी बाबा आश्रम के दर्शन करने के बाद नैनीताल को वापस आएंगी। पूर्वाह्न 11:15 बजे कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल पहुंचेंगी और पूर्वाह्न 11:25 से 12:15 बजे तक विवि के दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग करेंगी। दोपहर 12:15 बजे कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से प्रस्थान कर 12:25 बजे राजभवन, नैनीताल पहुंचेंगी। अपराह्न 2:30 बजे राज भवन, नैनीताल से प्रस्थान करेंगी।

मेधावियों का होगा सम्मान, 16 हजार से अधिक की डिग्री

कुमाऊं विश्विद्यालय नैनीताल के 20 वें दीक्षा समारोह में 89 में से 18 मेधावी छात्रों को मेडल, 16 हजार से अधिक छात्रों को डिग्री जबकि 233 छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान करेगी। विवि के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति दीक्षा समारोह में शामिल हो रही हैं। जिसको लेकर छात्रों, प्राध्यापकों व कर्मचारियों में उत्साह है। कुलपति प्रो. दीवान एस रावत के अनुसार राष्ट्रपति के समारोह से प्रस्थान के बाद मेधावियों को उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत भी मेडल प्रदान करेंगे। समारोह में विश्विद्यालयों के कुलपति सहित अन्य विशिष्टजन शामिल होंगे।

“कमबैक क्वीन” स्नेह राणा ने पूरा किया पिता का सपना: वर्ल्ड कप जीत पर देहरादून के सिनौला गाँव में दीवाली जैसा जश्न

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम के आईसीसी वर्ल्ड कप जीतते ही, टीम की स्टार खिलाड़ी स्नेह राणा के देहरादून स्थित सिनौला गाँव में उत्सव का माहौल बन गया। न सिर्फ ढोल-नगाड़े बजे, बल्कि स्नेह के संघर्ष और सफलता की कहानी ने हर किसी की आँखें खुशी और गर्व के आँसुओं से भर दीं।

परिवार की भावनाएँ और संघर्ष

  • माँ का गर्व: स्नेह राणा की माँ विमला राणा ने जब टीवी पर बेटी को ट्रॉफी उठाते देखा, तो उनकी आँखें नम हो गईं। उन्होंने भावुक होकर कहा, “स्नेह ने पिता का सपना पूरा कर दिया।” यह जीत परिवार के सालों की मेहनत और उम्मीद का फल है।
  • बचपन का जुनून: माँ ने बताया कि जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, स्नेह ने क्रिकेट से दोस्ती कर ली थी। वह बचपन से ही काफी मेहनती थीं और वर्षा हो या ठंड, सुबह-सुबह प्रैक्टिस के लिए निकल जाती थीं।
  • बड़ी बहन का उत्साह: स्नेह की बड़ी बहन रुचि राणा ने कहा कि भले ही दीवाली खत्म हो गई हो, लेकिन उनकी असली दीवाली तो फाइनल जीतने के बाद ही मनी। सेमीफाइनल जीतने के बाद ही उन्हें यकीन हो गया था कि बेटियाँ फाइनल में भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगी।

कमबैक क्वीन” की कहानी

स्नेह के क्रिकेट के प्रति जुनून ने ही उन्हें मुश्किल दौर से बाहर निकाला:

  • चोट का संघर्ष: 2016 में खेल के दौरान घुटने में लगी चोट के कारण वह लंबे समय तक क्रिकेट से दूर हो गई थीं।
  • शानदार वापसी: उन्होंने करीब चार साल बाद भारतीय टीम में दोबारा वापसी की। उनके इसी जुनून और दृढ़ता की वजह से उन्हें भारतीय टीम में “कमबैक क्वीन” कहा जाने लगा।

एकेडमी और कोच का जश्न

स्नेह के बचपन के कोच नरेंद्र शाह ने भी इस सफलता पर खुशी जताई।

  • एकेडमी का उत्सव: जिस लिटिल मास्टर क्रिकेट एकेडमी से स्नेह ने क्रिकेट सीखा, वहाँ बच्चों ने उनकी तस्वीर के साथ तिरंगा लहराकर जश्न मनाया।
  • कोच की राय: कोच नरेंद्र शाह और किरन शाह ने कहा कि स्नेह हमेशा से अनुशासित, जुझारू और समर्पित खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि मुश्किल दौर में भी स्नेह ने हार नहीं मानी और अपनी फिटनेस, बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर लगातार मेहनत की।

28 दिन बाद काली नदी के किनारे मिला था प्रदीप दरियाल का शव, फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम

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5 अक्टूबर को प्रदीप दरियाल अपनी स्कॉर्पियो से हल्द्वानी से पिथौरागढ़ के लिए चले थे, इसी के बाद से वो लापता थे

पिथौरागढ़: लापता होने के 28 दिन बाद काली नदी किनारे मृत मिले मुनस्यारी के प्रदीप दरियाल के शव का फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम के लिए अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से एक्सपर्ट को बुलाया गया था. पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है.

5 अक्टूबर को हल्द्वानी से चले थे प्रदीप दरियाल: मुनस्यारी के पातों गांव निवासी 25 वर्षीय युवक प्रदीप दरियाल पुत्र ललित सिंह 05 अक्टूबर को हल्द्वानी से स्कार्पियों वाहन से धारचूला के लिए निकला था. युवक के लापता होने पर जब ढूंढ खोज की गई तो उसका वाहन पिथौरागढ़-धारचूला एनएच के किनारे बलुवाकोट के पास काली नदी किनारे दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिला जबकि प्रदीप लापता था.

28वें दिन मिला था प्रदीप दरियाल का शव: प्रदीप के परिजनों की ओर से बलुवाकोट कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी. प्रदीप का पता नहीं चलने पर क्षेत्रवासियों में पुलिस के खिलाफ नाराजगी थी. पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों ने मुनस्यारी में प्रदर्शन किया था. मुनस्यारी दौरे में सीएम के सामने इसकी उच्च जांच करने की मांग की थी. दो दिन पूर्व लापता प्रदीप का शव घटनास्थल से लगभग 40 किमी दूर काली नदी किनारे पड़ा मिला. परिजनों ने मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस से फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में पीएम कराने की मांग की थी. इसके चलते रविवार को पोस्टमार्टम नहीं हुआ.

तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम: सोमवार को अल्मोड़ा मेडिकल कालेज से फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ एनएल गर्विस पिथौरागढ़ पहुंचे. उनकी मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया गया. प्रदीप का डीएनए और बिसरा भी सुरक्षित रखा गया है. पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव मुनस्यारी ले गए. काली नदी के तट पर मिले के बाद प्रदीप के शव का रविवार को स्वजनों ने बगैर फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया था. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से फॉरेंसिक के एक्सपर्ट को बुलाया.

जहां कार मिली वहां से 40 किमी दूर मिला शव: प्रदीप दरियाल, जो 26 वर्ष के थे, बीती 5 अक्टूबर को स्कार्पियो वाहन लेकर धारचूला जा रहे थे और दूंगातोली के पास लापता हो गए थे. उनका वाहन काली नदी के किनारे क्षतिग्रस्त अवस्था में मिला था. 28 दिन बाद तल्ला बगड़ क्षेत्र से प्रदीप का शव बरामद हुआ. शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय लाया गया था. रविवार को पोस्टमार्टम होना था, लेकिन परिजनों ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट के बिना इसे कराने से मना कर दिया. पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने मामला सीएमओ के समक्ष रखा. सीएमओ ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर फॉरेंसिक एक्सपर्ट भेजने की मांग की. परिजनों ने पोस्टमार्टम डाक्टरों के पैनल से कराने, बिसरा सुरक्षित रखने और डीएनए सैंपल लेने की भी मांग की थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज: पिथौरागढ़ के सीओ गोविंद बल्लभ जोशी ने बताया कि-

परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है. फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम करा दिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है.
-गोविंद बल्लभ जोशी, सीओ, पिथौरागढ़-

कौन थे प्रदीप दरियाल? प्रदीप दरियाल हल्द्वानी और पिथौरागढ़ के बीच कार चलाते थे. वो मुनस्यारी के पातो गांव के रहने वाले थे. बीती 5 अक्टूबर को नैनीताल जिले के हल्द्वानी से यात्रियों को लेने के लिए वो करीब 3:00 बजे अपने स्कॉर्पियो वाहन संख्या 04TB6174 पर सवार होकर धारचूला के लिए चले थे. काफी समय बीत जाने के बाद भी वो यात्रियों को लेने नहीं पहुंचे, तो यात्रियों ने उनसे संपर्क करने के लिए फोन किया. इस दौरान प्रदीप का फोन बंद आया. इसकी जानकारी यात्रियों ने पुलिस को दी. अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को प्रदीप दरियाल का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हालत में पिथौरागढ़ धारचूला NH ढुंगांतोली थाना बलुवाकोट में काली नदी के किनारे मिला. काफी खोजबीन के बाद भी चालक प्रदीप का कुछ पता नहीं चल सका था. आखिरकार 28वें दिन जहां प्रदीप की स्कॉर्पियो मिली थी वहां से 40 किलोमीटर दूर उनका शव मिला.