जल जीवन मिशन 2.0: उत्तराखंड में पेयजल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, 14 लाख परिवारों को होगा सीधा लाभ
उत्तराखंड में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन और राज्य सरकार के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।
क्यों अहम है यह समझौता?
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह एमओयू राज्य में जल जीवन मिशन के कार्यों को नई गति और मजबूती देगा। खासकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में यह मिशन केवल योजना नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन से जुड़ा अभियान है।
राज्य में:
- करीब 14 लाख ग्रामीण परिवार लाभार्थी
- 16,500 पेयजल योजनाएं स्वीकृत
- अधिकांश योजनाएं पूरी, बाकी तेजी से प्रगति पर
पहाड़ों में पानी पहुंचाना क्यों चुनौती?
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इस मिशन को और जटिल बनाती हैं:
- दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र
- दूरस्थ गांव
- भूस्खलन और आपदा का खतरा
इसी वजह से यहां पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक कठिन होता है।
जल संरक्षण पर भी बड़ा फोकस
राज्य सरकार सिर्फ पाइपलाइन नहीं, बल्कि जल स्रोत बचाने पर भी काम कर रही है।
बड़े कदम:
- पारंपरिक स्रोत (नौले, धारे) संरक्षण
- स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी का गठन
उपलब्धियां:
- 6500+ जल स्रोतों का संरक्षण
- 3.5 मिलियन घन मीटर वर्षा जल संचयन
1000 गांवों में जल क्रांति
जल शक्ति अभियान के तहत:
- 1000 गांवों में तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन
- जनभागीदारी से जल संरक्षण को बढ़ावा
टेक्नोलॉजी का सहारा
- डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
- ग्लेशियर रिसर्च सेंटर
- बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान
लक्ष्य: हिमालय और जल स्रोतों का दीर्घकालिक संरक्षण
केंद्र सरकार का समर्थन
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना करते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।
- जल जीवन मिशन 2.0 उत्तराखंड
- “हर घर जल योजना अपडेट”
- “उत्तराखंड पेयजल योजना 2026”
- “ग्रामीण जल सप्लाई स्कीम”

